Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक बार एक परिवार को फोन का बिल बहुत अधिक मिला… तो परिवार के मुखिया ने इस पर चर्चा के लिये घर के सब लोगों को बुलाया।

पिता – यह तो हद हो गयी। इतना ज़्यादा बिल! मैं तो घर का फोन यूज़ ही नहीं करता… सारी बातें ऑफ़िस के फ़ोन से करता हूँ।

माँ – मैं भी ज़्यादातर ऑफ़िस का ही फ़ोन यूज़ करती हूँ। सहेलियों के साथ इतनी सारी बातें घर के फोन से करुँगी तो कैसे चलेगा..?

बेटा – माँ आपको तो पता ही है कि मैं सुबह सात बजे घर से ऑफ़िस के लिये निकल जाता हूँ । जो बात करनी होती है ऑफ़िस के फ़ोन से करता हूँ।

बेटी – मेरी कम्पनी ने भी मेरी डेस्क पर फोन दिया हुआ है। मैं तो सारी कॉल्स उसी से करती हूँ। फिर ये घर के फोन का बिल इतना ओया कैसे…?

घर की नौकरानी चुपचाप खड़ी सुन रही थी। सबकी प्रश्न भरी निगाहें नौकरानी की ओर उठीं…

नौकरानी बोली – “तो और क्या… आप सब भी तो जहाँ काम करते हैं, वहीं का फोन इस्तेमाल करते हैं… “मैंने भी वही किया तो क्या गलत किया…?
😄😄😄😁😁😁😆😆😆😅😅😅

                              जय हो 🙏😛

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अकबर की क्रूरता के वो पांच किस्से, जिन्हें सुनकर कांप जाएगी आपकी रूहअकबर को वैसे तो उदार शासक कहा जाता था, लेकिन 1568 में चित्तौड़ के किले की घेराबंदी के दौरान मुगल सेना ने 30,000 से ज्यादा आम लोगों को मार डाला था. इसी वजह से वहां की महिलाएं जौहर करने पर मजबूर हो गई थीं.इस दौरान अकबर ने 40,000 सैनिकों के साथ आगरा से चित्तौड़ के लिए कूच किया. जान हथेली पर रखकर लड़ने वाले सैनिक इस किले की रक्षा करते थे. इस किले को जीतने के लिए उसने किले के अंदर जाने वाली जरूरी सामान की आपूर्ति रोक दी.

अकबर और उसकी सेना ने चित्तौड़ के किले की महीनों घेराबंदी की थी. लाख कोशिश करने के बाद भी वो सभी उसे जीत नहीं पा रहे थे.

जब हिन्दू लड़ते हुए शहीद हो गए तब मुगल किले के अंदर घुसे, लेकिन तब तक सारी हिन्दू महिलाएं जौहर कर चुकी थीं. तभी लंबे समय तक चले युद्ध से बौखलाए अकबर और उसकी सेना ने 20,000 से 30,000 लोगों को काट डाला.
उसने नरसंहार में बच गई महिलाओं और बच्चों को अपना गुलाम बना लिया. इस जीत और कत्लेआम के बाद अकबर ने यह संदेश भेजा कि हमने राजस्थान के कई किलों और काफिरों के शहरों पर कब्जा कर लिया है. हमने उनकी निशानियों को मिटा दिया है और मंदिरों को तोड़ दिया है.
ये घटनाएं अकबर के शासनकाल और उसके इतिहास का काला धब्बा हैं. कहा तो यह भी जाता है कि यह चित्तौड़ के इतिहास का तीसरा जौहर था….

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साध्वी प्रज्ञा


#जेल में बिताए दिन और आरोप — असली तस्वीर देखिए,
1. #सोनमवांगचुक – 57 दिन
धारा: NSA

2. उमर ख़ालिद – 1896 दिन
धारा: UAPA

3. शर्जील इमाम – 2126 दिन
धारा: UAPA

4. लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित – 3213 दिन
धारा: कुछ नहीं, फ्रेम किया गया था, पूरी तरह बरी, 2025 में कर्नल रैंक से सम्मानित.

5- साध्वी प्रज्ञा,  स्वामी असीमानंद- 3365 दिन धारा:-  कुछ भी नहीं,  5 साल के बाद चार्ज शीट  दायर किया गया

पूरी तरह से हर मामले में निर्दोष बरी

मामले की जांच अधिकारी रहा ATS का  मुस्लिम इंस्पेक्टर मोहम्मद महबूब मुजावर ने खुद कोर्ट में अपील दायर करके कहा था कि मेरे ऊपर इनको फसाने का पूरी तरह से दबाव है जबकि यह लोग निर्दोष हैं और मुझे हिंदू आतंकवाद की थ्योरी के लिए इनको कुछ भी करके फसाने का दबाव है

लेकिन तब इस खबर को मीडिया में आने नहीं दिया गया था

6. डीजी  बंजारा,  एमएन दिनेश,  राजकुमार पांडियन, पी पी पांडे,  विपुल अग्रवाल,  शरद सिंघल,  गीता जौहरी, अभय चुडस्मा तरुण बारोट, हिमांशु सिंह राजावत – सभी IPS अधिकारी हैं जो डीजी रैंक से लेकर आईजी रैंक डीआईजी रैंक एसपी रैंक और डिप्टी एसपी रैंक के हैं

इनके द्वारा जेल में बिताए गए जो दिन है वह 4500 से लेकर 3500 दिन के बीच में है

इतने लंबे वक्त तक जेल में बिताने के बाद भी यह सभी निर्दोष बरी हुए

और इन्हें कई गंभीर धाराओं में जेल में बंद किया गया था इसमें से एक पुलिस अधिकारी का 16 साल का बच्चा आत्महत्या कर लिया और एक पुलिस अधिकारी की पत्नी ने आत्महत्या कर लिया था

उस खबर को मीडिया में आने से रोक दिया गया था क्योंकि तब केंद्र में कांग्रेस सत्ता में थी लेकिन सोशल मीडिया पर उसे खबर को प्रमुखता से दिखाया गया फिर कुछ राष्ट्रवादी चैनलों ने भी और राष्ट्रवादी अखबारों ने भी छपा था

और अब सवाल – कांग्रेसी/नक्सली इकोसिस्टम, उनके पिड्डी टुकड़े-टुकड़े चैप्स और तथाकथित ‘लिबरल’ गिरोह किसके लिए आँसू बहाते हैं?

उस सेना अधिकारी के लिए नहीं जिसने बेगुनाही के बावजूद सालों जेल काटी…बल्कि सोनम वांगचुक, उमर ख़ालिद और शर्जील इमाम के लिए, जिनकी सोच और बयानबाज़ी का मक़सद ही भारत को तोड़ना था।

क्या यह टुकड़े-टुकड़े गैंग इतनी संख्या में पुलिस अधिकारियों को फर्जी मामले में जेल में बंद  करने पर क्योंकि कांग्रेस को हिंदू आतंकवाद की थ्योरी साबित करनी थी ?
#followers

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अल फहद यूनिवर्सिटी


आतंक के अड्डे अल फहद यूनिवर्सिटी को कांग्रेस ने मात्र 100 रुपये में 70 एकड़ जमीन दी !
🤔🙄
कुछ विदेशी परिवार के स्लेव्स जब यह कह रहे हैं कि दिल्ली में बम विस्फोट के बाद चर्चित युनिवर्सिटी जो आतंकियों का अड्डा बन गयी है , यह  अल फहद यूनिवर्सिटी है ,जब यह बनाई गई तब वह सीधे यह भी कह रहे हैं कि भाजपा सरकार ने इसे स्थापित किया …

#फैक्ट_स्टॉर्म_पालिसी_एंड_लीगल_रिसर्च #फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार , कांग्रेस के हरियाणा के तत्कालीन  मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपनी सत्ता के जाने से मात्र 2 महीने पहले बिना  विधानसभा में बहस किए चुपचाप गुपचुप तरीके से 70 एकड़ जमीन अपने विशेष पावर का इस्तेमाल करके माइनॉरिटी शिक्षा के नाम पर अल फाहाद यूनिवर्सिटी को मात्र ₹100 में दे दिया था

ठीक वैसे ही जैसे कांग्रेसी पीएम मनमोहन सिंह अपनी सत्ता जाने के मात्र 2 महीने पहले 20%  भारत वक्फ बोर्ड को देकर चले गए और दिल्ली की प्राइम प्रॉपर्टी जिसमें संसद भवन भी है उसे भी वह बोर्ड को दे दिया

और साथ में इतना असीमित  पावर दे दिया था कि वक्फ बोर्ड  भारत की जिस भी प्रॉपर्टी को अपना बतायेगी  वह उसकी हो जाएगी
…..स्लेव्स को अब पढ़ लिख कर ही बयान देना चाहिए या आरोप लगाना चाहिए
….साक्ष्य पोस्ट के साथ संलग्न हैं ।

देश बेचना इसे कहते है……!!

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अलबर्ट आइंस्टीन इस सदी के सर्वाधिक बडे़ विचारकों में
एक थे । लेकिन मरते वक्त उन्होंने जो कहा ,
वह उनके जीवन भर की पीडा़ का निचोड़ था ।
किसी ने पूछा , आइंस्टीन जब सांस तोड़ रहे थे , कि
अगर पूरब के लोग सच हों और पुनर्जन्म होता हो तो
आप आगे भी वैज्ञानिक ही होना चाहेंगे या कुछ और ?

मनुष्य के आखिरी वचन बडे़ महत्त्वपूर्ण होते हैं ।
वे उसके सारे जीवन का निचोड़ होते हैं
क्योंकि उसके बाद फिर उनमें सुधार करने की भी
कोई सुविधा न रहेगी ।

आइंस्टीन ने आंखें खोली और कहा कि
फिजिसिस्ट होने की बजाय मैं एक प्लम्बर होना पसंद करूंगा
ताकि कुछ समय अपने संबंध में सोचने के लिए भी तो दे सकूं ।

मेरा सारा समय चांद-तारों के संबंध में सोचने में खो गया
और मैं वैसा ही अज्ञानी मर रहा हूं जैसा अज्ञानी पैदा हुआ था
और दुनिया मुझे ज्ञानी कहती है ।

अगर कोई आगे मेरा जन्म हो तो मैं वैसा ही नहीं मरना चाहता हूं
जैसा पैदा हुआ ।।

मैं जागकर , अपने को जीतकर , अपने को पहचानकर
इस जगत से विदा होना चाहता हूं ।
यह जीवन तो गया । यह तो बह गया ।
अब इसमें तो कोई संभावना न बची ।।

* जिस चिन्तन और मनन के लिए मैंने तुमसे कहा है
उसमें पहली बात है कि सब तरफ से अपने विचारों को
खींचकर अपने पर ही आमंत्रित कर लेना ।
और एक जादू घटित होता है जिसकी तुम कल्पना भी नहीं
कर सकते ।

तुम सोच सकते हो केवल उसी चीज के संबंध में
जिसके संबंध में तुमने पढा़ हो , सुना हो ,
किसी ने कुछ कहा हो ।
तुम अपने संबंध में क्या सोचोगे ?

तो जैसे ही व्यक्ति सारे बाह्य चिन्तन छोड़ देता है
और उसकी आंखें सिर्फ अपने ही रूप पर टिक जाती हैं …
इसलिए मैंने कहा , एक जादू घटित होता है :
तुम अपने संबंध में सोच नहीं सकते ।
वहां सोचना शून्य हो जाता है ।
वहां सिर्फ देखना शेष रह जाता है ।

इसलिए हमने इस देश में उस घडी़ को दर्शन की घडी़ कहा है ,
चिन्तन की नहीं ।।

🌹🌹👁🙏👁🌹🌹💲
osho

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सबरीमाला मंदिर से सैकड़ों करोड़ के सोना चोरी मामले में टीडीबी (त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड) के पूर्व अध्यक्ष और केरल के वरिष्ठ सीपीआई (एम) नेता ए. पद्मकुमार की गिरफ्तारी ने कम्युनिस्टों को नंगा कर दिया है।
हिंदू द्रोही उनके चेहरे और चरित्र के तथाकथित सेवाभावी परदे के पीछे की आखिरी परत भी खुल गई है।
एक दशक तक कम्युनिस्ट प्रतिष्ठान ऐसे व्यवहार करते रहे जैसे सबरीमाला उनका निजी खजाना हो, पवित्र धन की लूटपाट करते रहे, भक्तों को चुप कराते रहे और हर गलत काम को अहंकार और धमकी में लपेटते रहे।
अब उनके नेटवर्क का एक और स्तंभ ढ़ह गया है, और केरल सच्चाई को बेरहमी से सामने आते देख रहा है।
यह कोई घोटाला नहीं है, बल्कि इस बात का खुलासा है कि कैसे एक सत्ताधारी दल ने अपने राजनीतिक और निजी लालच के लिए एक पवित्र मंदिर को खोखला कर दिया।
जब कोई सरकार भगवान को चढ़ाई गई संपत्ति भी लूटने लगे, तो उसका पतन ‘अगर’ का नहीं, बल्कि ‘कब से’ का सवाल हो जाता है।
लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती, याद करिए कि, केदारनाथ धाम से सोना चोरी करने की खबर कांग्रेसी कउव्वों ने उड़ायी थी।
दिल्ली में सूअंर के गोश्त के टिक्कों के साथ कांग्रेसी कृपा वाली बहुत महंगी स्कॉच गले से नाक तक ढ़केल कर दलाल कुबुद्धिजीवियों ने उस तथाकथित चोरी पर अंग्रेज़ी में लंबे लंबे खर्रे इस तरह लिखने शुरू किए थे कि, चोरी की आंच किसी तरह पीएम मोदी तक पहुंच जाये।
कांग्रेसी तो खूब नाच ही रहे थे, कांग्रेसी पैंटी और कम्युनिस्ट ब्रा पहनकर कांग्रेसाचार्य उमाशंकरवा भी खूब कैबरे डांस किया था।
इन सबके थनों में इतना दूध उफनाने लगा था जितना दूध भगवान् कृष्ण को मारने आयी पूतना के थनों में भी नहीं उफनाया था।
जबकि जांच और अदालत में साबित हुआ कि, केदारनाथ धाम में कोई चोरी नहीं हुई, वह केवल कांग्रेसी अफ़वाह ही थी।
लेकिन लेकिन यही कांग्रेसी इंडी गैंग, कांग्रेसाचार्य उमाशंकरवा समेत उसके सब लोग अब मुर्दे की तरह मौन हैं, क्योंकि चोर उन्हीं के इंडी गिरोह का है… और उनके हिंदू द्रोही “पूतना” चरित्र के चीथड़े उड़ा रहा है।