Posted in हिन्दू पतन

#उमर का पूरा परिवार यह जानता था की उमर आतं कवादी बन चुका है लेकिन फिर भी उसके भाई-भाभी अब तक खुद को ऐसा बता रहे थे जैसे उन्हें पता ही नहीं था की उमर  कितना बड़ा आ तंकी है!

यह जो उमर का वीडियो सामने आया है यह वीडियो उसके ही फोन से मिला…!

उमर ने अपना फोन अपने भाई और भाभी को दे दिया था और कहा था कि जैसे ही मेरे बारे में टीवी में कोई खबर आए तो यह फोन किसी नदी या तालाब में फेंक देना,

फिर जैसे ही यह खुलासा हुआ की उमर आतंकवादी है तो उसके भाई और भाभी ने उसके फोन को तालाब में फेंक दिया था,

फिर क्योंकि पूरा परिवार पुलिस गिरफ्त में है उसके बाद उसे फोन को रिकवर किया गया तब यह वीडियो मिला!

और इसीलिए उमर का घर भी उड़ाया गया क्योंकि पूरा परिवार आ तंकी है,

और यह जो महबूबा मुफ्ती आंसू बहा रही है कि अगर उमर आ तंकी था तो उसके परिवार को क्यों सजा दी गई !

तो पूरा परिवार ही आतं कवादी बन चुका था और पूरे परिवार को पता था की उमर  क्या-क्या कर रहा है मगर फिर भी किसी ने पुलिस को सूचना नहीं दी…!

और अब अल फलाह यूनिवर्सिटी के चांसलर का घर बिलदोजर से गिराया जाएगा ……

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Posted in नहेरु परिवार - Nehru Family

#चमचों_के_नेहरू
1962 में हिसार से एक सांसद थे –
जिनका नाम था मनीराम बागडी।
बागडी जी को नेहरू की नौटंकी से
बड़ी नफ़रत थी। बागड़ी जी को पता था नेहरू 14 नवम्बर को सफ़ेद अचकन पर गुलाब का फूल टाँग कर आयेगा और चमचे चाचा नेहरू ज़िन्दाबाद के नारे लगायेंगे, बागड़ी जी ने एक झुग्गी झोपड़ी का भारत की माटी का साँवला सा बच्चा जिसकी नाक बह रही थी, थोड़ी सी राख व कालिख उसके मुँह पर
और लगादी, उसको अपनी गोद में उठाकर अपने शाल में ढककर चुपचाप जा कर संसद में अपनी सीट पर बैठ गये।

ज्यों ही गुलाब का फूल टाँगकर
नेहरू जी संसद में घुसे तो
उनके चमचों ने चाचा नेहरू ज़िन्दाबाद के नारों से हाल को गुँजा दिया और जब नेहरू का महिमा मण्डन होने लगा, तो बागड़ी जी एकाएक उठ खड़े हुए और बोले -नेहरू को भारतीय बच्चों से प्यार नहीं, इसको तो अंग्रेज़ी मेमों के बच्चे प्यारे लगते हैं !
अगर सच में नेहरू को भारतीय बच्चों से प्यार है तो मेरी गोद में जो भारतीय बच्चा बैठा है ,
उसको सबके सामने एक बार चूमकर दिखाएं, यह कहकर बागड़ी जी ने उस काले कलूटे बच्चे को नेहरू के सामने कर दिया।
उसके बाद नेहरू आगे आगे और
बागड़ी जी पीछे पीछे,
बागड़ी जी ने नेहरू को संसद भवन से बाहर तक भगा दिया था।
कहने का मतलब यह है कि नेहरू का बच्चों से कोई लेना देना नहीं था ,

यह केवल उसको महान दिखाने के लिए दिया गया केवल एक दिखावी तगमा था,एक परिवार के नाम पर देश में बहुत अति हो चुकी है,
अब समय आ गया है कि
चाचा व बापू नामक तगमे
अब हटा देने चाहिएँ…आपकी क्या राय है?

Source…..साभार

#congressbritishpetparty

Posted in Ghandhi

*गांधी जी और आचार्य चतुरसेन*
……..

‘बापू, यह हैं आचार्य चतुरसेन, महान इतिहासकार और लेखक,’
जमनालाल बजाज ने महात्मा गांधी से चतुरसेन का परिचय कराते हुए आगे कहा, ‘आपने कहा था ना नवजीवन के लिए संपादक चाहिए, यह सबसे योग्य पात्र हैं, इन्हें दे दीजिए यह कार्यभार।’

‘नमस्ते बापू’ आचार्य चतुरसेन ने गांधी जी का अभिवादन किया
‘नमस्ते शब्द में वेदों की बू आती है, यह ठीक नहीं है।’ गांधी जी बोले।

‘जी,’ आचार्य चतुरसेन आगे बोले, ‘तो फिर राम—राम बापू।’
‘देखे राम—राम बोलना हिन्दू—मुस्लिम एकता के लिए सही नहीं है।’ गांधी जी ने फिर कहा।
‘वंदेमातरम बापू।’ आचार्य जी ने पुन: अभिवादन किया।
‘नहीं वंदेमातरम् भी सही नहीं है, इसमें बुतपरस्ती की बू आती है। हमें आजादी चाहिए तो ऐसी भाषा का प्रयोग करना होगा, जिससे मुस्लिमों को ठेस न पहुंचे।’
‘जय बापू।’

‘हूं,’ गांधी जी फिर आगे बोले, ‘हम तुम्हें नवजीवन का संपादक बनाते हैं, एक हजार वेतन मिलेगा। सबकुछ तुम्हें ही करना होगा। मेरे नाम से लेख लिखने होंगे, न्यूज छापनी होंगी, सारी न्यूज वही होगी कि नेहरू ने बापू को क्यों महान बताया और बापू ने नेहरू को। मेरे भाषण लिखकर देने होंगे। और हां संपादक में मेरा नाम जाएगा, तुम किसी से यह नहीं कहोगे कि यह सब तुम करते हो।’

‘बापू मैं सबकुछ करने को तैयार हूं, लेकिन संपादक में मेरा नाम जाना चाहिए, आपका नहीं।’
‘नहीं यह नहीं हो सकता।’ गांधी जी ने विरोध किया।
‘तो फिर यह आचार्य चतुरसेन भी ऐसे स्वार्थी और तुष्टिकरण करने वाले को जीवन में कभी बापू नहीं कहेगा और तुम्हारे दर्शन आज के बाद नहीं करेगा।’ कहकर आचार्य चतुरसेन चले गए।

आचार्य चतुरसेन ने जीवन में फिर कभी गांधी के दर्शन नहीं किए।

*आचार्य चतुरसेन की आत्मकथा का एक अंश*
प्रस्तुति : मधु धामा