🔥 यह है ओसामा — गैंगस्टर शहाबुद्दीन का बेटा… और दुर्भाग्य से रघुनाथपुर सीट से जीत भी गया! रघुनाथपुर कोई मुस्लिम बहुल इलाका नहीं… यह 80% से अधिक हिंदू आबादी वाला क्षेत्र है। फिर भी जनता ने ऐसे परिवार के वारिस को चुन लिया, जिसकी कहानी खौफ से भरी है।
उसके पिता शहाबुद्दीन ने —
चंद्रकेश्वर प्रसाद के तीन बेटों का अपहरण किया — सिर्फ पैसा ऐंठने के लिए। दो मासूमों पर इतना तेज़ाब डाला कि खाल तक गल गई। तीसरे बेटे को कोर्ट में गवाही देने से ठीक पहले गोली मारकर हत्या की । और आज… उसी का वारिस विधानसभा में बैठा ताज पहन रहा है! क्योंकि समाज भूल गया — और खामोशी ने अपराधियों को सत्ता दे दी। ये सीट हिंदू बहुल है… फिर भी जीत उस घराने की, जिसका इतिहास खून, खौफ और कानून को ठेंगा दिखाने से भरा है..! 🔥 इतिहास को भूलना, सबसे बड़ा अपराध है। क्योंकि जब समाज भूल जाता है — अपराधी जीत जाता है..!!!!
છ મહિના પહેલાં રાજદીપ સરદેસાઈને કેન્સર ડિટેક્ટ થયું હતું. તેની સર્જરી થવાની હતી. રાજદીપ હંમેશાં કોંગ્રેસ માટે સોફ્ટ કોર્નર રાખવા માટે જાણીતો છે. તેની પત્ની સાગરિકા તૃણમૂલની સાંસદ છે અને ભાજપ અને મોદીની પ્રખર વિરોધી છે. પરંતુ આજે એક ઇન્ટરવ્યૂમાં રાજદીપ જણાવી રહ્યો છે કે તેની કેન્સરની સર્જરી થઈ છે, તે જાણ્યા પછી પીએમ મોદીએ રાજદીપ સરદેસાઈને ફોન કરી 30 મિનિટ સુધી વાત કરી અને તેને હેલ્થ ટિપ્સ આપી હતી તેમજ તેના સવારના રૂટિનને સુધારવાની વાત કરી હતી. ખુદ વડાપ્રધાન દ્વારા રાજદીપની સાથે ફોન પરની વાતો સાંભળીને રાજદીપ સરદેસાઈનાં બહેન અને દીકરો વડાપ્રધાન મોદીના ફેન બની ગયા છે, એવું રાજદીપ પોતે કહી રહ્યો છે !
બધાં જાણે જ છે કે રાજદીપ અને તેની પત્ની સાગરિકા રોજ પીએમ મોદીને ગાળો આપતા હોય છે, મોદી વિરુદ્ધ પ્રોપેગેન્ડા ચલાવીને જ આ લોકોએ પોતાની કરિયર બનાવી છે, તેમ છતાં પીએમ મોદીએ રાજદીપને ઉત્તમ સ્વાસ્થ્યની શુભેચ્છા પાઠવી હતી. આ બધી બાબતો જ પીએમ મોદીને બીજાઓથી અલગ તેમજ લોકપ્રિય બનાવે છે.
कांग्रेस रचती रही हिन्दुओं के खिलाफ एक के बाद एक साज़िश और हिन्दू बना रहा बेखबर इस वीडियो/लेख में बताया गया है कि किस तरह 1950 से लेकर 2009 तक कांग्रेस सरकार ने हिंदुओं के अधिकार, मंदिरों की संपत्ति और धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रहार किया। आर्टिकल 25, आर्टिकल 28, हिंदू कोड बिल, आरक्षण नीति, इमरजेंसी में सेकुलर शब्द जोड़ना, पूजास्थल कानून, अल्पसंख्यक आयोग, वक्फ बोर्ड कानून और राम सेतु एफिडेविट जैसे फैसलों के जरिए हिंदुओं को लगातार कमजोर किया गया। जानिए कैसे संविधान और कानून का इस्तेमाल कर हिंदुओं की आस्था, इतिहास और अधिकारों पर हमला किया गया।
जो बूढ़ापा लालू और मुलायम ने देखा वो शानदार है, वैसे तो ये बूढ़ापा ईश्वर दुश्मन को भी ना दिखाए लेकिन हजारों जिंदगी उजाड़ने वाले इन दो के लिए तो बनता है, ये समाज के उन बुजुर्गो के लिए भी है जो अगली पीढ़ी को विरासत मे दौलत के साथ नफ़रत भी दे रहे है।
जिस रोहिणी आचार्य के लिए लालू ने टाटा मेडिकल वाली हेराफेरी की, जिसकी शादी के लिए पूरे पटना के शोरूम और ज्वेलर्स को लूटवा दिया, आज वही रोहिणी आचार्य उसे दुत्कार चली गयी वो भी ऐसे समय ज़ब उसकी पूरी साख बिखर चुकी है। वैसे लालू रोहिणी की ही एक किडनी पर जिन्दा है।
ऐसा कहा जाता है लालू ज़ब छोटा था तो पढ़ना चाहता था, पड़ोसी भूमिहारो से जाति का दंश सहता बढ़ा हुआ था। राजनीति मे आया तो इंदिरा गाँधी का धुर विरोधी था उसी चक्कऱ मे जेल भी गया, फिर जेल से लौटा, उलटफेर मे मुख्यमंत्री बना।
लालू के जंगलराज पर विस्तार से लिखने की कोई आवश्यकता नहीं है, कुछ ऐसा ही मुलायम के साथ था। ज़ब दोनों की अर्थी पास आयी तो जिन बच्चों के लिए पूरी दुनिया का विषपान किया उन्ही बच्चों ने ठोकर मार दी। राम मंदिर के कंटको को राम जैसी संतान तो मिलनी भी नहीं थी।
लालू मुलायम दोनों ने एक बात हमेशा कही कि वे शोषित वर्ग से है, उन्होंने बहुत कुछ खुद झेला है। लेकिन ऐसा सच मे था तो ईश्वर द्वारा दिये मौके को क्यों नहीं भुनाया।
भगवान परशुराम के माता पिता की भी हत्या की गयी थी, भगवान महावीर का भी लोगो ने अपमान किया था। मगर एक ने सशक्तिकरण से समाज को मुक्त किया तो दूसरे ने वचनो से। भगवान तक ना भी जाए तो अकेले बिहार मे कर्पूरी ठाकुर जैसा उदाहरण था।
जरूरी नहीं कि सामाजिक नफ़रत का उत्तर नफ़रत से ही दिया जाए, लालू और मुलायम के पास मौका था चाहते तो पिछडो की शिक्षा और रोजगार के लिए कुछ करते। पिछडो के लिए गाँवों मे ही अच्छे विद्यालय खोलते, उच्च शिक्षा का प्रबंध करते। दलित पढ़ लिख जाते तो कभी मज़ाक ना बनता।
लेकिन इसके विपरीत लालू मुलायम ने गुंडाराज चुना, गुंडों का विकास किया और उन गुंडों ने बिना जाति देखे नरसंहार किये। सवर्ण हाशिये पर आया और दलित जो पहले से हाशिये पर था वह जमीन मे धंस गया।
ऐसी ही पिछडी जाति से नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह भी आते थे, हो सकता है बचपन मे थोड़ा बहुत सहन किया हो मगर ज़ब भगवान ने शासन की संभावना दी तो नफ़रत नहीं परोसी बल्कि हर वर्ग को उपकृत किया, इसलिए आज एक प्रधानमंत्री तो दूसरा क़ृषि मंत्री है।
जबकि लालू के नाम से जनता को आज भी डराया जा रहा है, मुलायम एक मामले मे ठीक थे कि मृत्युपूर्व उन्होंने अपनी अंतर्रात्मा की सुनी। मौका 2019 चुनाव से पहले हुए सत्र का था, अपने बेटे अखिलेश द्वारा मंच पर जलील होने से मुलायम शोकग्रस्त थे।
मुलायम ने तब अपने भाषण मे प्रधानमंत्री की ओर मुंह करके कहा था कि भगवान करे आप दोबारा प्रधानमंत्री बने। एक टीस थी इस बयान के पीछे, जाते जाते एहसास हो रहा था कि जीवन मे जो किया वो गलत है और यही समय था कि डूबने से पहले लकड़ी पकड़ ली जाए। मुलायम अपने अंतिम दिनों मे सरकार को मौन समर्थन देने लगे थे।
लेकिन इसके विपरीत लालू का अहंकार आज भी ज्यो का त्यों है, लालू को आज भी खुशफहमी है कि उसका जंगलराज एक महान शासन था। हालांकि चित्रगुप्त जी कर्मो का लेखा जोखा करते है खुशफहमियों का नहीं, ईश्वर से प्रार्थना है लालू जीवित रहे और अपनी आँखों के सामने वो सब बर्बादी देखे जो उसकी वजह से हजारों घरो की हुई है।
मौत से पहले लालू पूरी तरह अपने उन सभी दुष्कर्मो, हत्याओं और अपहरणो को याद करें। कर्म कोई बांधकर नहीं ले जा सकता, सारा लेखा जोखा इसी सृष्टि मे होना है।
एक समय जीतनराम मांझी ने रामद्रोह किया था। उसके बाद जीतनराम मांझी के बुरे दिन शुरू हो गये थे। और राजनीति के नेत्थपय में चले गये थे। उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ और अयोध्या जी में राम लल्ला के आगे माफी माँगी। आज अपनी राजनीति के शिखर पर हैं।