एक दिन मौत जंगल से गुजर रही थी।
रास्ते में उसे एक छोटी सी लड़की मिली।
जब उसने मौत को उसके काले, चमकदार, सुंदर घोड़े पर देखा, तो बड़ी मासूमियत से पूछा:
“क्या आप भी रास्ता भटक गए हैं?”
मौत ने उसे देखा और हल्की सी मुस्कान के साथ कहा:
“हाँ, मैं भी भटक गया हूँ। और तुम? क्या तुम्हें घर का रास्ता पता है?”
लड़की ने जवाब दिया:
“नहीं… पर अब मुझे डर नहीं लग रहा, क्योंकि आप मेरे साथ हो। अब मैं अकेली नहीं हूँ।”
मौत हैरान हो गई। उसने पूछा:
तुम मुझसे नहीं डरती? क्या तुम जानती हो मैं कौन हूँ? मैं मौत हूँ!”
लड़की ने शांत भाव से कहा:
“अगर आप मुझे लेने आए हो तो ठीक है।
लेकिन क्या मैं आपसे एक निवेदन कर सकती हूँ?”
मौत बोली:
“हाँ, बताओ। मौत से क्या मांगोगी?”
लड़की के चेहरे पर उदासी थी। उसने कहा:
“मेरी माँ को बचा लीजिए। वो बहुत बीमार है।
इसीलिए मैं जंगल में औषधियाँ लेने आई थी और रास्ता भटक गई।
मुझे डर है अगर मैं घर नहीं लौटी तो वो मेरे ग़म और अपनी बीमारी से मर जाएंगी।
हमारे पास कोई नहीं है। पापा तो पिछले साल ही गुजर गए थे।
अब माँ ही मेरा सब कुछ हैं।”
मौत पहली बार शर्मिंदा और दुखी हुई।
वो तो लड़की को बिना वापसी के ले जाने आई थी, लेकिन अब उसका मन बदल गया।
वे दोनों साथ-साथ चलने लगे –
लड़की नंगे पाँव दर्द से कराहती हुई, और मौत अपने घोड़े पर सवार।
कुछ देर बाद उनका घर दूर से दिखने लगा।
मौत रुक गई, और लड़की आगे बढ़ने लगी।
लड़की ने पीछे मुड़कर देखा और पूछा:
“आप क्यों नहीं आ रहे? चलिए ना!”
मौत ने जवाब दिया:
“अब मैं आगे नहीं जा सकता!”
लड़की हैरान होकर बोली:
“तो क्या आप मुझे नहीं ले जाएंगे? क्या मैं आपके साथ नहीं जाऊंगी?”
मौत ने उसकी मासूम आँखों में देखते हुए कहा:
“नहीं। अभी नहीं।
तुम्हें अपनी माँ का ख़याल रखना है।
जब सही समय आएगा, तब मैं तुम्हारे और तुम्हारी माँ के लिए आऊँगा।
और तब तुम दोनों मेरे साथ चलोगी।”
लड़की की आँखों में खुशी की चमक दौड़ गई।
उसने कहा:
“शुक्रिया। मैं आपका इंतजार करूँगी…
क्योंकि अब मुझे पता है – आप बुरे नहीं हैं।”
यह सुनकर मौत ने अपने घोड़े को एड़ लगाई।
घोड़ा धरती को चीरता हुआ दौड़ पड़ा और देखते ही देखते मौत का काला साया जंगल के अंधेरे में गायब हो गया।
—
मौत बुरी नहीं होती।
वो तो बस तब डरावनी लगती है जब वो समय से पहले आ जाए।
✅✨
(यह कहानी स्पेनिश लोककथा पर आधारित है।)