मोदी जी् सिंधु नदी समझौते पर संसद में बहस के लिए कमर कस ली तो, सोचिए क्या होगा? अगर बहस हो ही गई तो सब खुलकर आएगा कि नेहरू और तब के भारत के केंद्रीय सिंचाई, ऊर्जा और वक्फ मंत्री, हाफिज मोहम्मद इब्राहिम, जो आजादी से पहले मुस्लिम लीग से चुनाव जीते थे, ने क्या भूमिका निभाई ? पानी का विभाग उनके ही पास था।कैसे नेहरू ने 30 नवंबर 1960 को लोकसभा में कहा कि “पाकिस्तान वाले पंजाब में हम सूखा नहीं पड़ने दे सकते, इस तर्क के आधार पर पांचों नदियों का 80% पानी पाकिस्तान को दे दिया गया।
पता चलेगा कि कैसे राजस्थान और पंजाब (जिसमें आज का हरियाणा शामिल है) के किसान नेता भारतीय संसद में रोए थे, क्योंकि उनका पानी पाकिस्तान को दिया जा रहा था। कैसे युवा सांसद अटल बिहारी वाजपेयी ने नेहरू को कटघरे में खड़ा किया। पता चलेगा कि कैसे संसद को बताए बिना ये समझौता हुआ।
कैसे पाकिस्तान इस समझौते में सिर्फ 60 करोड़ मांग रहा था, पर भारत ने 83 करोड़ दे दिए। कैसे हाफिज मोहम्मद इब्राहिम ने लोकसभा में जवाब दिया था और क्या क्या कहा था।
भारत के पश्चिमी राज्यों को सूखा रखने में इस संधि की बड़ी भूमिका है। भारत में अकाल पड़ रहा था और नेहरू को पाकिस्तान के किसानों की चिंता थी। पाकिस्तान उस समय तक भारत से अमीर था। भारत को अनाज के मामले में आत्मनिर्भर होने से कई दशक पीछे धकेल दिया गया। मोदी जी ने इस समझोते को स्थगित कर रखा है।
जय श्री राम