कांग्रेस के दलाल प्रकाश राज का एक बयान सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो रहा है।
उन्होंने कहा है, इंडोनेशिया में 90% आबादी मुसलमानों की है। 2% हिन्दू हैं और 11 हज़ार मंदिर हैं। वहां पर हमने कभी दंगा फसाद नही होते हुए सुना, क्यों कि वहां RSS नही है।
अब आप सच्चाई जानिए…
इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा द्वीपीय देश है।
यानी वहां करीब 17000 से ज्यादा द्वीप हैं और यह द्वीप काफी दूर-दूर तक फैले हैं और एक द्वीप है जिसका नाम है बाली।
इंडोनेशिया के जो 2% हिंदू है है वह सिर्फ इसी बाली द्वीप पर रहते हैं और इंडोनेशिया के जो 11000 मंदिर है वह सिर्फ इसी बाली द्वीप पर है, क्योंकि यह सारे मंदिर नवी शताब्दी से लेकर 13वीं शताब्दी के है, इसीलिए इन्हें यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में रखा गया है और इंडोनेशिया के इन हिंदू मंदिरों से और बाली के हिंदुओं से इंडोनेशिया को कुल जीडीपी का 15% आय प्राप्त होता है जो पर्यटन से आता है।
इंडोनेशिया में अगर सबसे ज्यादा शांति है तो सिर्फ बाली द्वीप पर है क्योंकि यहां हिंदू रहते हैं।
अब जरा आप इंडोनेशिया में जो इस्लामी आतंकी संगठन है उनके नाम जानिए…
Komando jihad
Jemaah islamiyah
Jamaah ansharut
Laskar jijad
Mujahideen tanah runtuh
Indonesian mujahideen council
East indonesia mujahideen
West indonesia mujahideen
Abu uswah network
Darul islam indonesia
Turkistan islamic jihad
Mujahedin kompak
Jamaah ansharut daulah
अब सोचिये इंडोनेशिया में कितने इस्लामिक आतंकवादी संगठन है।
इसके अलावा 2002 बाली बम ब्लास्ट में 202 लोगों की मौत हुई थी और इसमें ब्रिटेन अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के पर्यटक तथा बाली के हिंदू मारे गए थे।
इस घटना में 40 आतंकियों को गिरफ्तार किया गया था, सब के सब मुस्लिम आतंकी थे और उनका यह कहना था कि क्योंकि इंडोनेशिया मुस्लिम बहुमत वाला देश है, इसीलिए वह नहीं चाहते थे बाली द्वीप पर हिंदू रहे और वह बाली के हिंदुओं को या तो मुस्लिम बनाना चाहते हैं या मारना चाहते हैं।
इसलिए उन्होंने बाली में 12 रिजॉर्ट में बहुत खतरनाक बम रखे थे लेकिन सिर्फ एक रिसॉर्ट में ही ब्लास्ट हो पाया बाकी के जो बम थे वह टेक्निकल खराबी की वजह से ब्लास्ट नहीं हो पाए।
उसके बाद ऑस्ट्रेलिया दूतावास के सामने ब्लास्ट किया गया था। 2004 में एक भीषण कार बम ब्लास्ट जकार्ता में हुआ था और बम ब्लास्ट के साथ सुसाइड जैकेट पहने आत्मघाती हमलावर शहर में ब्लास्ट किए थे जिसमें 300 से ज्यादा लोग मारे गए थे उनके निशाने पर ग्रीक एंबेसी थी।
उसके बाद 2009 में फिर से जकार्ता में बम ब्लास्ट हुआ था जो सीरियल बम ब्लास्ट था। उसके बाद जकार्ता के 12 चर्च में 13 मई 2018 को इस्लामी आतंकियों द्वारा एक साथ हमला किया गया था जिसमें 1000 से ज्यादा ईसाई मारे गए थे।
बाद में इंडोनेशिया सरकार में अमेरिका की मदद से आतंकियों पर कड़ी करवाई किया और एक बहुत बड़ा अभियान चलाया गया और इस अभियान में 3000 से ज्यादा इस्लामिक आतंकवादी मारे गए. इंडोनेशिया में ना मुकदमा चलाया गया ना जेल भेजा गया बल्कि मिलिट्री कार्रवाई में आतंकियों को मारा गया।
उसके बाद इंडोनेशिया सरकार मुस्लिम नागरिकों को खुश करने के लिए जिन द्वीपो पर मुस्लिम आबादी है वहां पर शरिया कानून लागू कर दिया, सिर्फ बाली द्वीप को छोड़कर जहां हिंदू है वहां शरिया कानून नहीं लागू है वहां हिंदुओं को अपने रीति रिवाज का पालन करने का अधिकार है।
तो इसीलिए जब कोई आठ फेल अभिनेता किसी तरह का बकवास करता है तो बिना गूगल पर सच्चाई जान उसके बकवास को शेयर मत करिए बल्कि आप लोग तथ्यों की जांच करिए।
Day: August 3, 2025
👉 #विभाजन_कैसे_कैसे ?? 👇👇
मुस्लिम शराब व्यापारियों को भारत में रहने को कहा गया, क्योंकि इस्लाम में शराब हराम है, परन्तु पाकिस्तान की बेशर्मी देखिये कि इन शराब की फेक्टरियों का मुआवजा भी माँगा और भविष्य में होने वाले लाभ में हिसा भी l
भारत सरकार के पास एक सरकारी मुद्रा छपने की मशीन थी जिसे देने से भारत सरकार ने स्पष्ट मना कर दिया था l
लाहौर स्थित पंजाब सरकार के पुस्तकालय में जो Encyclopedia Britannica की एक प्रति थी उसे धार्मिक आधार पर विभाजित कर के दोनों देशों को आधा-आधा दे दिया गया l पुस्तकालय की पुस्तकें जो भारत भेजने पर सहमती बनाई गई, उन्हें भेजते समय अधिकाँश बहुमूल्य ग्रन्थ, पुस्तकें, अभिलेख आदि नष्ट कर दिए गये l
सबसे हास्यापद तो यह तथ्य सामने आया कि अंग्रेजी शब्दकोश की एक डिक्शनरी को फाड़ कर दो भागों में विभाजित कर दिया गया, A-K शब्दकोश भारत भेजे गये और बाकी पाकिस्तान में रखे गये l
भारत के वायसराय के पास दो शाही गाड़ियां थीं जिसमे से एक सोने की थी और एक चांदी की थी, दोनों पर विवाद हुआ तो लार्ड माउन्टबेटन के सैन्यादेशवाहक (ADC means Aide-de-camp) ने सिक्का उछाल कर निर्णय किया तो सोने की गाड़ी भारत के हिस्से में आई l वायसराय की साज सज्जा के सामान, कवच, चाबुक, वर्दियां आदि सब बराबर बराबर बाँट ली गई l
अंत में वायसराय के सामान में एक भोंपू (तुरही) शेष बची, जो कि विशेष आयोजनों में बजाने हेतु उपयोग में लाई जाती थी, अब यदि उसे आधा आधा बाँट दिया जाए तो किसी काम का नही और एक देश को देने पर विवाद होना तय था, तो अंत में उसे ADC ने ही अपने पास एक यादगार के रूप में रख लिया l
#सबसे_मुख्य_विषय…
जनसंख्या के आधार पर हुए इस विभाजन के आधार पर आकलन करें तो समस्त चल और अचल परिसंपत्तियों में भारत की हिस्सेदारी 82.5% थी, और पाकिस्तान 17.5% की हिस्सेदारी थी, जिसमे तरल संपत्ति, मुद्रित मुद्रा भंडार, सिक्के, डाक और राजस्व टिकटें, सोने के भंडार और भारतीय रिजर्व बैंक की संपत्ति भी शामिल है।
सभी चल और अचल संपत्ति में से भारत और पाकिस्तान के बीच का अनुपात 80-20 में निर्धारित होने की सहमती बनने का अनुमान था, पाकिस्तान ने बेशर्मी की समस्त हदें पार करते हुए मांगें रखीं जिसमे मेज, कुर्सियां, स्टेशनरी, बिजली के बल्ब, स्याही बर्तन, झाडू और सोख्ता कागज (InkPads) का भी विभाजन किया जाना था l
उपरोक्त समस्त सन्दर्भों तथा तथ्यों का आकलन करने पर एक मूल प्रश्न खड़ा होता है कि यदि उपरोक्त वर्णित अनुपात के रूप में पाकिस्तान को 75 करोड़ रुपए देने के लिए दुरात्मा गांधी दबाव बना रहा था तो उस अनुपात की दृष्टि से भारत के लिए कितना कोष बनता था… उत्तर मिलेगा 470 करोड़ रुपए l
जबकि अंग्रेज भारत के राजकोष में मात्र 155 करोड़ रूपये छोड़ कर गये थे, शेष धन गांधी ने अंग्रेजों से क्यों नही माँगा ?
इन अमर्यादित तथा नाजायज़ मांगों के प्रति तत्कालीन भारत सरकार ने नाराजगी प्रस्तुत की और और सरदार पटेल ने मांगें मांगने से स्पष्ट मन कर दिया जिसके कारण दुरात्मा गाँधी ने पाकिस्तान जाकर हठपूर्वक आमरण अनशन करने की जिन्ना के सुझाव को स्वीकार किया जिससे कि यह विवाद अंतर्राष्ट्रीय विवाद का रूप ले तथा भारत सरकार पर दबाव बना कर अमर्यादित तथा नाजायज़ मांगों को स्वीकार करवाया जा सके l
यहाँ मैं यह कहने में मुझे कोई झिझक नही है कि श्री मदन लाल पाहवा, श्री नथुराम गोडसे, श्री नारायण आप्टे, श्री विष्णु करकरे, श्री गोपाल गोडसे आदि ने कोई अपराध नही किया अपितु राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत होकर उन अमर्यादित तथा नाजायज़ मांगों को रुकवाया जिन्हें रुकवा पाने में स्वयं नेहरु और पटेल भी असमर्थ थे l
गांधी वध के अंतिम दिनों के बार में भी यदि हम आकलन करेंगे तो पायेंगे कि 20 जनवरी, 1948 के बम फेंकने के प्रकरण के बाद बिरला हॉउस की सुरक्षा बढाने के स्थान पर घटा दी गई थी, जिससे यह पक्ष उजागर होता है कि नेहरु सरकार उस समय गांधी वध के खतरे को समझते हुए भी इस महान कार्य को होने देना चाहती थी l🚩
