योगी जी: “मैंने उन्हें ऊँची ताज़ियाँ न बनाने की चेतावनी दी थी। उन्होंने एक न सुनी—हाई-टेंशन तार से टकराकर तीन लोगों की मौत हो गई। फिर उन्होंने मुआवज़े की माँग करते हुए सड़कें जाम कर दीं। मैंने कहा—लाठियों से भगाओ! जब मैंने उन्हें चेतावनी दी थी, तो उन्होंने क्यों नहीं सुनी?”
“लातों की भूत बातों से नहीं मानते”… योगी जी स्पष्टता और दृढ़ता से बोलते हैं। जब चेतावनियाँ अनसुनी हो जाती हैं, तो परिणाम ज़्यादा ज़ोर से सुनाई देते हैं—योगी शब्दों को तोड़-मरोड़कर नहीं बोलते, वे सीधे काम पर ध्यान देते हैं।