राजीव गांधी के साथ तस्वीर मे इस शख़्स को आपमें से शायद बहुत से लोग नहीं जानते होंगे,ये आदिल शहरयार हैं,अब आप पूछेंगे की कौन आदिल शहरयार?
तो हम बताएंगे कि ये मुहम्मद यूनुस के बेटे थे,अब आप पूछेंगे कि कौन मुहम्मद यूनुस?तो हम बताएंगे कि मुहम्मद यूनुस के बारे में दुनिया कुछ भी बोले,हम वो सब नहीं बोलेंगे,हम बस इतना बताएंगे कि मुहम्मद यूनुस विदेश सेवा के अधिकारी थे जो किचन कैबिनेट में न होते हुए भी किचन तक पहुंच रखते थे और इमेरजेंसी के दौरान संजय गांधी के बाद सबसे ताक़तवर शख़्सियत थे.
इन्हीं मुहम्मद यूनुस के घर पर संजय गांधी और मेनका का विवाह हुआ था,और जिनकी शादी की सारी तैयारी आदिल शहरयार ने की थी,हाँ तो ये आदिल भाई इमेरजेंसी ख़तम होने के बाद और संजय गांधी की मृत्यु के बाद अमेरिका सेटल हो गए.
लेकिन 1982 में खबर आई कि आदिल शहरयार धोखाधड़ी और घोटाले के आरोप में अमेरिका में गिरफ्तार हो गए हैं,बाद में जांच में ये बात भी सामने आई कि आदिल वहां विस्फोटको और ड्रग्स के व्यापार में इन्वॉल्व हैं,और इन सब आरोपों के चलते आदिल शहरयार को अमेरिका में 35 साल की सज़ा सुना दी गई.
1984 में इंदिरा की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने, और मुहम्मद यूनुस अपने बेटे को बचाने की गुहार लेकर राजीव गांधी के पास पहुंचे (बद)(ख़ुश) किस्मती से 2 दिसम्बर 1984 की रात भोपाल में एक ऐसी दुर्घटना घटी जिसमे 15000 हज़ार से ज्यादा लोग मारे गए,दुर्घटना का केंद्र था यूनियन कार्बाइड का कारखाना,जिसका मालिक था एंडरसन,जो कि एक अमेरिकी नागरिक था,अर्जुन सिंह ने उसे गिरफ़्तार करवा लिया.
यहां राजीव गांधी जी की सरकार ने दूरदर्शिता और समझदारी दिखाई,जीवन भर एंडरसन को भारत की जेल में रखने और vip ट्रीटमेंट देने की बजाय उसे रिहा करवा कर अमेरिका भेज दिया और थोड़े ही दिनों में अमेरिका ने राजीव की अमेरिका यात्रा के ठीक एक दिन पहले अगस्त 1985 में,एक अभूतपूर्व निर्णय लेते हुए,आदिल शहरयार को रिहा कर दिया.
बाद में राजीव गांधी जी को उनके इसी दूरदर्शी और देश का पैसा बचाने वाले निर्णय के लिए भारत रत्न से भी नवाजा गया.
