Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

मेरी प्रेरणा💐💐*

  ऑफिस से आते ही वह आज कपड़ों की अलमारी लगाने  में  लग गई, अपने पति शिखर के आने के पहले ही वह उसके कपड़े प्रेस के लिए देना चाह रही थी,।

     तभी शिखर की अलमारी से एक बन्द,पुराना सा पैकेट नीचे गिरते ही उसकी नजर उस पर लिखे “मेरी प्रेरणा” पर चली गई, यह क्या?

      एक पुलिस ऑफिसर होंने के साथ ही
एक नारी मन शक के चक्रव्यूह में फंसता चला गया, शिखर जो कि एक आई ए एस ऑफिसर थे , अपने    जीवन साथी के साथ वह  दस माह पहले ही विवाह बंधन में बंधी थी, ” क्या शिखर मुझसे पहले–नहीं ऐसा नहीं हो सकता, ” उसने तो मुझसे यही कहा था कि तुम  ही मेरा पहला एवम आखिरी प्यार–तभी अंदर से आवाज आई “आ गई बेटी,में चाय बनाती हूं” घर मे कई नौकर होने के बावजूद भी शांति ही अपने बेटे बहु को हाँथ से चाय बना कर पिलाती थीं।

” जी माँ, चाय तो मैं आपके ही हाँथ की पिऊंगी,”  शिखर के साथ साथ उसे भी उनकी माँ की बनाई चाय अच्छी लगने लगी थी, ।

माँ, एक बात पूंछू , चाय पीते पीते  ‘”क्या शिखर पहले    किसी,–तभी माँ  उसके हाँथ में पैकेट देख    उसकी   जिज्ञाशा   को समझते हुए उसके सामने ही न चाहते हुए पैकेट खोलने लगी, 8-10 साल के बच्चे की  सफेद शर्ट जिसमे पीछे नीली स्याही का बहुत बड़ा
धब्बा बना था देख वह चौक उठी , उसके मुंह से ” माँ,$$  मैं , भी  क्या क्या,”

माँ के एक एक शब्द उसके सीने को चीर रहे थे,और वह आत्मग्लानि से भरती जा रही थी ।

“जब शिखर पांचवी में पढ़ता था ,उसके साथ ही पड़ोस में रहने वाले कलेक्ट्रेट के बड़े बाबू का लाडला ,जो अपने को कलेक्टर का बेटा बोलता और शिखर से ही अपना होमवर्क करवाता था, सभी पर सदा अपना रॉब जमाता था।

  शिखर की स्याही की दावत उसने फोड़ दी।
” मैं कैसे लिखूंगा, मुझे थोड़ी स्याही अपनी दवात से दे दो” , उस शैतान लड़के ने पूरी स्याही की दावत इसकी शर्ट पर डाल दी स्कूल से आने पर यह खूब रोया , उसके पिताजी से बताने गया तो “चलो हटो , एक नौकरानी का बेटा , मेरे बेटे की बराबरी करने चला आया और शर्ट के साथ 20 रुपये फेंक कर इसे घर से बाहर निकाल दिया “

“देखा मेरे पापा कलेक्टर है , ” हंसते हुए उनके लड़के ने दरवाजे बंद कर लिए।

  माँ, कलेक्टर क्या होता है, इसने हाँथ में शर्ट लिए रोते हुए पूंछा, था और कई दिनों तक बिना स्कूल ड्रेस के स्कूल न जा सका था ।

  शिखर के बीमार एवम अपाहिज पिता के अंतिम शब्द ,” अपने बेटे को कलेक्टर बनाना”  मुझे याद रहे।
दरवाजे के बाहर खड़े सभी बातों को सुन रहे शिखर ने “अरे मेरी पुलिस ऑफिसर ,”

” मेरी प्रेरणा ” ने ही  मुझे तुमसे मिलाया है ,। और अपनी बाहों का हार  उसके  गले मे  डाल दिया ।
    और  दोनों अपने को इस  मुकाम पर पहुंचाने वाली नायिका अपनी जन्मदात्री के सीने से लग गये।

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