एक गाँव में एक सौदागर रहता था | उसका नाम घंसोजी था | वह बड़े ही बईमान किस्म का इंसान था | कम सामान तौलना और दुगने पैसे वसूलना उसका काम था | जब वह बूढ़ा होने लगा तो एक दिन उसने अपने लड़के को बुलाया और कहा की अब से यह व्यापार तुम्हे ही संभालना है मगर एक बात का ध्यान रखना की मुनाफा ज्यादा लेना और सामान कम तौलना क्युकी हमारी साथ पिछली पुसते इसी तरह से व्यापार करके धनवान हुई है | बेटे ने बाप की बात को गाँठ बाँध लिया और कम सामान तौलकर दुगना मुनाफा वसूल करने लगा |
एक दिन की बात है किसी दुसरे गाँव से एक किसान अपना धनिया बेचने आया और सौदागर की दुकान पर जा पंहुचा | सौदागर ने सोचा की माल सस्ता मिल रहा है और है भी इतना अधिक की अगर में सारे साल यही माल अधिक मुनाफे में बेचता रहू तो खूब लाभ ही लाभ होगा इसलिए यह सौदा करने में कोई नुकसान नहीं है यही सोचकर लालची बेटे ने किसान से कहा की सौदा तो में कर लूँगा मगर मेरी एक शर्त है | किसान बोला की आप अपनी शर्त बोलिए | सौदागर ने कहा की माल में अपने हाथ से तौलकर लूँगा | भला इसमें मुझे क्या एतराज होगा किसान ने कहा | धनिया तौलते समय बेटे को बाप की नसीहत याद आई तो उसने धनिया कम तौला और सारा धनिया तौलकर जब देखा तो खुश हुवा की आज पिता की सारी सम्पति देकर मैंने बहुत बड़ा लाभ का सौदा कर लिया है और उसने अपना और पिता का सारा धन किसान को देकर विदा कर दिया |
शाम को जब बेटा घर आया तो सौदागर ने दिन भर के व्यापार के बारे में अपने बेटे से पूछा तो उसने सारा किस्सा कह सुनाया | बेटे की बात सुनकर बूढ़े बाप ने अपना सर पकड़ लिया और बोला की मूर्खो के सरताज बादशाह यह तुने क्या किया ? मैंने तो दुसरो को कम माल तौलकर देने के लिए कहा था न की कम तौलकर लेने के लिए कहा था | तब सौदागर की पत्नी ने कहा की अब भी संभल जाओ बैमानी का नतीजा भी बुरा ही होता है तब जा कर सौदागर की आँख खुली और फिर उसने अपने बेटे को हमेशा इमानदारी से व्यापर करने की नेक सलाह दी |
Day: June 5, 2025
एक गाँव में एक सौदागर रहता था | उसका नाम घंसोजी था | वह बड़े ही बईमान किस्म का इंसान था | कम सामान तौलना और दुगने पैसे वसूलना उसका काम था | जब वह बूढ़ा होने लगा तो एक दिन उसने अपने लड़के को बुलाया और कहा की अब से यह व्यापार तुम्हे ही संभालना है मगर एक बात का ध्यान रखना की मुनाफा ज्यादा लेना और सामान कम तौलना क्युकी हमारी साथ पिछली पुसते इसी तरह से व्यापार करके धनवान हुई है | बेटे ने बाप की बात को गाँठ बाँध लिया और कम सामान तौलकर दुगना मुनाफा वसूल करने लगा |
एक दिन की बात है किसी दुसरे गाँव से एक किसान अपना धनिया बेचने आया और सौदागर की दुकान पर जा पंहुचा | सौदागर ने सोचा की माल सस्ता मिल रहा है और है भी इतना अधिक की अगर में सारे साल यही माल अधिक मुनाफे में बेचता रहू तो खूब लाभ ही लाभ होगा इसलिए यह सौदा करने में कोई नुकसान नहीं है यही सोचकर लालची बेटे ने किसान से कहा की सौदा तो में कर लूँगा मगर मेरी एक शर्त है | किसान बोला की आप अपनी शर्त बोलिए | सौदागर ने कहा की माल में अपने हाथ से तौलकर लूँगा | भला इसमें मुझे क्या एतराज होगा किसान ने कहा | धनिया तौलते समय बेटे को बाप की नसीहत याद आई तो उसने धनिया कम तौला और सारा धनिया तौलकर जब देखा तो खुश हुवा की आज पिता की सारी सम्पति देकर मैंने बहुत बड़ा लाभ का सौदा कर लिया है और उसने अपना और पिता का सारा धन किसान को देकर विदा कर दिया |
शाम को जब बेटा घर आया तो सौदागर ने दिन भर के व्यापार के बारे में अपने बेटे से पूछा तो उसने सारा किस्सा कह सुनाया | बेटे की बात सुनकर बूढ़े बाप ने अपना सर पकड़ लिया और बोला की मूर्खो के सरताज बादशाह यह तुने क्या किया ? मैंने तो दुसरो को कम माल तौलकर देने के लिए कहा था न की कम तौलकर लेने के लिए कहा था | तब सौदागर की पत्नी ने कहा की अब भी संभल जाओ बैमानी का नतीजा भी बुरा ही होता है तब जा कर सौदागर की आँख खुली और फिर उसने अपने बेटे को हमेशा इमानदारी से व्यापर करने की नेक सलाह दी |