Posted in खान्ग्रेस

किसने करवाईं देश के परमाणु वैज्ञानिकों की हत्याए…?

ऊपर बायें से पहली तस्वीर: लोकनाथ महालिंगम, दूसरी: एम पद्मनाभ अय्यर, तीसरी: उमंग सिंह, चौथी: पार्थ प्रतिम। नीचे बायें से पहली तस्वीर: उमा राव, दूसरी: तीतस पाल, तीसरी: तिरुमला प्रसाद टेंका, चौथी: होमी जहांगीर भाभा 👇

क्या आप जानते हैं कि २००९ से २०१३ के बीच देश के कई परमाणु वैज्ञानिकों की रहस्यमय तरीके से मौत हो गई थी…?

इन पांच सालों में लगभग हर कुछ दिन पर कोई न कोई परमाणु वैज्ञानिक या तो किसी हादसे का शिकार हुआ या उसकी जान ऐसे गई जिसका कारण आज तक किसी को नहीं पता। इस तरह से देश के कुल ११ प्रतिभावान वैज्ञानिक मौत की नींद सो गए, लेकिन क्या यह महज संयोग हो सकता है…? या फिर इसके पीछे कोई साजिश थी…?

हैरानी की बात है कि उस वक्त सोनिया गांधी की अगुवाई वाली यूपीए के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार ने इन मौतों की सही वजह पता करने की कोई जरूरत नहीं समझी। चूंकि वो कांग्रेस की सरकार का दौर था, लिहाजा मीडिया ने भी इस खबर को एक तरह से दबा दिया। भारत के परमाणु वैज्ञानिकों की रहस्यमय मौत का ये सिलसिला पुराना है।

Posted in हिन्दू पतन

*वामपंथी न्यूज वेबसाइट The Wire के पत्रकार उमर रशीद द्वारा अपनी सहयोगी वामपंथी हिंदू महिला का यौन शोषण किया गया । वह सालों तक अपना यौन शोषण करवाती रही क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि उसके मामले का प्रचार कर हिंदूवादी लोग फायदा उठा सकें । आखिरकार इस हिंदू वामपंथी महिला ने अपनी झिझक तोड़ी और अंग्रेजी में एक सार्वजनिक चिट्ठी लिखकर अपनी आपबीती बयान की जिसका पूरा हिंदी अनुवाद नीचे दिया गया है ।*

पत्रकार: The Wire का उमर राशिद (The Hindu और Outlook में भी काम कर चुका है)

पीड़िता का आरोप: ‘प्रगतिशील पत्रकारिता’ की आड़ में महिलाओं को फँसाकर यौन हिंसा करना उसका धंधा है

पीड़िता ने खुलासा किया है कि ये उसका पैटर्न है, जिसके तहत वो कई महिलाओं को अपना शिकार बना चुका है। पीड़िता ने लिखा, “ये लिखते हुए मैं काँप रही हूँ और रो रही हूँ। वो एक सीरियल यौन शोषक और बलात्कारी है। वो ख़ुद को जानवरों से प्यार करने वाला बताता है।”

अपनी मरी हुई माँ का सहारा लेकर भी वो महिलाओं को भावनात्मक रूप से प्रभावित करता है। जब पीड़िता की इससे पहली बार बात हुई तो ‘प्रगतिशील राजनीति’ पर जमकर चर्चा हुई। इस गिरोह की नज़र में ‘प्रगतिशील राजनीति’ क्या है, समझ जाइए – मोदी को गाली देना, रोहिंग्या घुसपैठियों की पैरवी और राम मंदिर का विरोध। साथ ही ‘साहित्य में रोमांस’ पर भी चर्चा हुई।

पीड़िता को ऐसा लगा कि उमर राशिद उसे ‘दिल्ली के प्रगतिशील सर्कल’ में आगे बढ़ने में मदद करेगा।

“वो अपने खेल की शुरुआत महिलाओं को लोधी गार्डन में टहलने के लिए बुलाकर करता है।”

“वो प्रेस क्लब की बैठकों में मुझे बतौर ‘ट्रॉफी फ्रेंड’ ले जाता था। मैं शहर में नई थी, उससे बहुत छोटी थी – मुझे लगाए वो मुझे आगे बढ़ाएगा।”

“मुझे बार-बार शारीरिक रूप से धक्का दिया गया, मारा गया, थप्पड़ मारा गया, गला दबाकर लगभग मार ही डाला गया, और ऐसे तरीकों से शोषण किया गया जिन्हें शब्दों में बयान करना मुश्किल है। शारीरिक और यौन – दोनों ही स्तर पर। मुझे बार-बार असुरक्षित और जबरन से*क्स के लिए मजबूर किया गया।”

“उम्र राशिद ने मेरे साथ बार-बार रे*प किया — एक बार नहीं, दो बार नहीं, बल्कि उस पूरे समय में जब मैं उसके साथ थी।”

“मुझे आज भी याद है कि मैं बार-बार से*क्स से इनकार करती थी, उसे साफ़-साफ़ ‘ना’ कहती थी, उससे भीख माँगती थी कि वह न करे, क्योंकि मैं हमेशा उसकी गुस्से की प्रतिक्रिया से डरी हुई थी। मैं बार-बार सोचती और इस चिंता में जीती रही कि कहीं वह फिर से मुझे पीट न दे, और वह बार-बार ऐसा करता भी था।”

“कई बार उसने मुझे जबरदस्ती से*क्स के लिए मजबूर किया, और उस दौरान मैं बीमार और पूरी तरह से अनिच्छुक होती थी। हर बार ओमर मुझे माफ़ी माँगने के लिए मजबूर करता था, जबकि वह सामने बैठकर हँसता और खाना खाता, जैसे कुछ हुआ ही नहीं। और इसी बीच वह अपने फ़ोन पर दूसरी लड़कियों से चैट करता रहता था। हर बार वह जानबूझकर कं*डोम का इस्तेमाल नहीं करता था ताकि मुझ पर अपना दबदबा दिखा सके। इसके चलते मुझे कई बार अनचाही प्रेगनेंसी का डर सताता रहा, और मुझे चोरी-छिपे गायनेकोलॉजिस्ट के पास जाना पड़ता था क्योंकि वह मुझे इलाज के लिए जाने नहीं देता था।”

“प्रेगनेंसी के डर से अलग, वह लगातार दूसरी महिलाओं के साथ सोता था (जबकि वह कहता था कि हम रिलेशनशिप में नहीं हैं), और मुझे हमेशा एसटीडी (STD) का डर बना रहता था। मेरे शरीर में रैशेज, यीस्ट इन्फेक्शन और हार्मोनल असंतुलन हो गए थे क्योंकि मैं नियमित रूप से i-pill लेती रहती थी। मुझे अपने स्वास्थ्य के लिए चुपचाप डॉक्टरों के पास जाना पड़ता था, क्योंकि उमर राशिद मुझे यही यकीन दिलाता रहता था कि मेरी सारी प्रेगनेंसी और एसटीडी की चिंताएँ सिर्फ़ एक भ्रम हैं।”

“सबसे बुरा और क्रूर वाकया तब होता था जब वह मुझे बुरी तरह पीटता था और उसी वक्त वह अपना फोन निकालकर मेरे अस्त-व्यस्त कपड़े और बाल रिकॉर्ड करता था, ताकि वह मुझे ‘पागल औरत’ साबित कर सके। इस पूरे समय वह मेरी जासूसी करता रहता था – मैं कहाँ जाती हूँ, किससे बात करती हूँ, मेरे सोशल मीडिया को सेंसर करता, मेरी ज़िंदगी और खाने-पीने तक पर कंट्रोल रखता था, और हर वक्त मुझे बताता रहता था कि मैं कितनी ‘भयानक’ दिखती हूँ।”

वह मेरी ज़िंदगी के हर पहलू को नियंत्रित करता था मुझे नीचा दिखाने के लिए। उसे मेरी डाइट से, मैं क्या खाती हूँ और क्या नहीं – हर चीज़ से दिक्कत थी। वह मुझे जबरदस्ती बीफ खाने के लिए मजबूर करता था – जैसे किसी ‘सेक्युलरिज़्म’ की अजीब सी परीक्षा हो। हर बार जब मुझे बीफ खाने के लिए मजबूर किया जाता था, मैं उल्टी कर देती थी और उसे इस पर मज़ा आता था। उसे इस बात में भी मज़ा आता था कि मैं उसके पैरों पर गिरकर उससे माफ़ी माँगूँ,

Posted in हिन्दू पतन

हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट ने तीन बड़े फैसले सुनाए हैं, जो गंभीर सवाल खड़े करते हैं:

1- कश्मीर को “भारतीय अधिकृत” और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को “हिंदुत्व आतंकवाद” कहने वाली 19 वर्षीय खदीजा शेख को जमानत।

2
– यमनी नागरिक मो. कासिम अल शिबाह को भायकुला पुलिस स्टेशन से रिहा करने का आदेश।

3- मुंबई हवाई अड्डे के संवदेनशील कार्यों के लिए तुर्की की सेलेबी कम्पनी को बदलने के आदेश पर रोक।

दिलचस्प बात यह है कि इन सभी फैसलों में जस्टिस सोमशेखर सुंदरेशन शामिल थे।

खतरनाक बात यह है कि जज बनने से पहले, वह कुख्यात ब्रिटिश NGO ऑक्सफैम के बोर्ड सदस्य थे, जिसे ‘डीप स्टेट’ से फंडिंग मिलती है!

क्या ऐसे जजों की पृष्ठभूमि की जांच नहीं होनी चाहिए…?
एक आम सरकारी नौकरी के लिए भी कितनी पड़ताल होती है, फिर यहाँ क्यों नहीं…?
सुना है कि जस्टिस सुंदरेशन की नियुक्ति की फाइल भारत सरकार ने कई बार वापस की थी, लेकिन कॉलेजियम इसके नाम पर अड़ा रहा।

क्या हमारे देश में जज और सिस्टम कानून से ऊपर हैं…?

क्या विदेशी डीप स्टेट’ हमारी न्यायपालिका को अंदर से खोखला कर रहा है…? एवम् कोलेजियम इसमें संलिप्त है।
मेरे विचार से यह बेहद खतरनाक स्थिति है।
आपकी क्या राय है…?

#supremecourtofindia
#ChiefJusticeOfIndia
#HighCourtOfBombey