Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

चार्ली चेपलिन का नाम तो सुना होगा। वह एक हंसोड़ अभिनेता था। उसकी पचासवी वर्षगाठ बड़ी जोर शोर से मनाई गयी थी। और उस वर्षगाठ पर एक आयोजन किया गया सारे यूरोप और अमेरिका में। अभिनेताओ को निमंत्रित किया गया कि वे चार्ली चेपलिन का अभिनय करे। ऐसे सौ अभिनेता सारी दुनिया से चुने जायेंगे। प्रतियोगिता होगी नगरो- नगरो में। और फिर अंतिम प्रतियोगिता होगी। और उस अंतिम प्रतियोगिता में तीन व्यक्ति चुने जायेंगे जो चार्ली चेपलिन का अभिनय करने में सर्वाधिक कुशल होंगे। उन तीनो को पुरस्कार दिया जायेगा।

प्रतियोगिता हुई, हजारो अभिनेताओ ने भाग लिया, एक से एक अभिनेता, चार्ली चेपलिन बना, बनने की कोशिस की। चार्ली चेपलिन के मन में हुआ कि में भी किसी दुसरे के नाम से फार्म भरकर सम्मलित क्यों न हो जाऊ? मुझे तो प्रथम पुरस्कार मिल ही जाने वाला है, में खुद ही चार्ली चेपलिन हूँ, भला मेरा धोखा और कौन दे सकेगा। और जब बात भी खुल जाएगी, तो एक मजाक हो जाएगी। में तो हंसोड़ अभिनेता हूँ ही, लोग कहेंगे खूब मजाक की इस आदमी ने। वह एक छोटे से गाँव से फार्म भरकर सम्मलित हो गया।

अंतिम प्रतियोगिता हुई, उसमे वह सम्मलित था। सौ लोगो में वह भी एक था, किसी को पता नहीं, वहा तो सौ चार्ली चेपलिन एक से मालूम होते थे, एक सी मूंछ, एक सी चाल, एक सी ढाल, वे सब ही चार्ली चेपलिन थे। प्रतियोगिता हुई, पुरस्कार बंटे, मजाक भी खूब हुई, लेकिन चार्ली चेपलिन ने जो सोची थी वह मजाक नहीं हुई, मजाक उलटी हो गयी। चार्ली चेपलिन को दूसरा स्थान मिल गया। कोई और उसका ही पार्ट करने में नंबर एक आ गया। और जब पता चला दुनिया को तो, दुनिया हैरान रह गयी कि हद हो गयी यह बात तो। चार्ली चेपलिन खुद मौजूद था प्रतियोगिता में और उसे नंबर दो का पुरस्कार मिला।

तो हो सकता महावीर के अनुयायी महावीर को हरा दे, बिलकुल हरा सकते है क्योकि अनुयायी एक नक़ल होता है, असल नहीं। लेकिन नकली आदमी हरा भी दे तो नकली आदमी, नकली आदमी ही रहेगा। उसके भीतर कोई आनंद, कोई विकास, कोई प्रफुल्लता, कोई पूर्णता उपलब्ध नहीं हो सकती।

अभी गाँधी हमारे मुल्क में थे, गाँधी के साथ हजारो नकली गाँधी इस मुल्क में पैदा हो गए थे। उन्होंने मुल्क को डुबो दिया, उन नकली गांधियो ने मुल्क को डुबो दिया। गाँधी जैसी खादी पहनने लगे, गाँधी जैसा चरखा चलने लगे। उन्होंने डुबो दिया इस मुल्क को, जो नकली गाँधी पैदा ही गए थे, इस मुल्क के हत्यारे साबित हुए, मर्डरर्स साबित हुए। डुबो दिया इस मुल्क को, डुबोये जा रहे है रोज। डुबोयेंगे ही। क्योकि नकली आदमी अन्दर से कुछ और होता है और बाहर कुछ और। असली आदमी जो भीतर होता है, वही बाहर भी।

असली आदमी बनना है तो किसी आदर्श को थोपने की कोशिश भूल कर भी मत करना। अन्यथा आप एक नकली आदमी बन जायेंगे और आपका जीवन तो गलत हो ही जायेगा, आपके जीवन की गलती दुसरो तक को नुकसान पहुचायेगी। समाज तब एक धोखा हो जायेगा, एक प्रपंच हो जायेगा। पूरा समाज एक फ्रोड हो जायेगा। क्योकि जब सब नकली आदमी होते है तो बड़ी मुश्किल होती है।

ओशो 🌹❤️ 🙏

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પુરાતત્વ: મહાવનના સૂતેલા યોદ્ધાઓ – “કર્ણ” અને “મલયધ્વજ પંડ્યા”.

મહાવન વિસ્તાર યમુના અને ગંગા વચ્ચે આવેલો હતો.  મહાવન એ વિસ્તાર છે જ્યાં ભગવાન કૃષ્ણએ કુરુક્ષેત્ર યુદ્ધમાં માર્યા ગયેલા બધા વીરોનો સામૂહિક રીતે અગ્નિસંસ્કાર કર્યો હતો.  ૧૮મા દિવસે યુદ્ધ સમાપ્ત થયા પછી મહાવન ખાતે અંતિમ સંસ્કાર કરવામાં આવ્યા.   આ સમારોહમાં ધૃતરાષ્ટ્ર, ગાંધારી, કુંતી અને પાંડવો હાજર રહ્યા હતા.  પ્રાચીન રેકોર્ડમાં મહાવનનું ધ્યાન ખેંચાયું છે.  ગંગા નદીના કિનારે આવેલું મહાવન, સામૂહિક અગ્નિસંસ્કારનું સ્થળ હતું (“પુણ્ય-જલો-ચિતમ” માં “ચિતમ” શબ્દ જુઓ). આ ગંગા નદી મહાવનથી પૂર્વમાં ઘણી દૂર ખસી ગઈ છે. મહાભારતનું “સ્ત્રી પર્વ” તેના અનોખા સ્વરૂપમાં પ્રાચીન માહિતી આપે છે. તેમાં કર્ણના અગ્નિસંસ્કારનો ઉલ્લેખ છે. કર્ણ બધા યોદ્ધાઓનો મુખ્ય હતા. કર્ણ તેના કુંડળ અને કવચ સાથે મહાવનમાં સૂતા હોવાનો ઉલ્લેખ છે (જુઓ: “કુંડલી કવચી શૂરો દિવાકર સંપ્રભ:”). જ્યારે  શ્લોક સાથે વાંચો છો, ત્યારે તે “રથ યુથ પતિ” (મહાન રથ યોદ્ધા) નો ઉલ્લેખ કરે છે. મહાભારતમાં એક અન્ય રથ યોદ્ધાનો ઉલ્લેખ છે જેમને કર્ણની જેમ સમાંતર ભવ્ય અગ્નિસંસ્કાર મળ્યો હતો. તે કવતપુરમ (તમિલનાડુ) ના પાંડ્ય રાજા “મલયધ્વજ પંડ્યા” હતા. તેમનો અગ્નિસંસ્કાર કરવામાં આવ્યો ન હતો ,સમાધિ આપવામાં આવી હતી, તેમને અશ્વત્થામા દ્વારા મારી નાખવામાં આવ્યા હતા અને તેઓ પણ મહાવનમાં સૂતા છે.  પલ્લીમદમ ખાતે સુંદર પાંડ્ય ઈશ્વરમ મંદિર અને ઉક્કિરનકોટ્ટાઈ સ્થળ સહિત હિન્દુ પાંડ્ય રાજાઓના સમાધિ  સ્થળો એ વાતની પુષ્ટિ કરે છે કે પાંડ્ય રાજાઓને હંમેશા સમાધિ આપવામાં આવતી. અગ્નિસંસ્કાર કરવામાં આવતા નહોતા.  કુરુક્ષેત્રના યુદ્ધભૂમિ પર પોતાના પ્રાણનું બલિદાન આપનારા પ્રખ્યાત પાંડ્ય રાજા “મલયધ્વજ પાંડ્ય” ને પણ કર્ણની સમાંતર ઉચ્ચતમ અને શ્રેષ્ઠ સારવાર આપવામાં આવી હતી.  જ્યારે દ્વારકા નગર ગુજરાતમાં હતું ત્યારે આ કવઠપુરમ નગર તમિલનાડુમાં હતું.   “સિનૌલી” અને “તિલવારા સાકિન” મહાભારતના “મહાવંશો” છે,   ભારતીય પુરાતત્વ સર્વેક્ષણની શોધને શ્રેષ્ઠ પ્રશંસાની જરૂર છે.  જોકે, ફિનલેન્ડના અશ્કો પારપોલા આ શોધની ટીકા કરી રહ્યા છે.  તેઓ આ સાઇટ પર બિનજરૂરી ચર્ચા ઉભી કરી રહ્યા છે.  અશ્કો પારપોલાને મહાભારત પુરાતત્વમાં વધુ વાંચવાની જરૂર છે.
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યદુબીરસિંહ રાવત સંજય મંજુલ સીલા ત્રિપાઠી પ્રો.  આલોક ત્રિપાઠી
ડીજી એએસઆઈ

Posted in हिन्दू पतन

भारत का संविधान बनाने में संविधान सभा में 23 सदस्य ऐसे थे जो 1946 में पाकिस्तान बनाने के लिए मुस्लिम लीग के टिकट पर जीते थे।

लेकिन जब इन्होंने पाकिस्तान बना लिया तो उसके बाद यह बड़ी होशियारी से पाकिस्तान नहीं गए और फिर नेहरू गांधी ने इनको भारत के संविधान बनाने का ही जिम्मा दे दिया है, इन सब ने भी अपना संविधान बनाया है।

यह सिर्फ भारत में नेहरू और गांधी ही कर सकते थे कि जिनको गद्दारी का चार्ज लगाकर जेल में डालना था उनको सीधे संविधान बनाने की जिम्मेदारी दे दी। इनमें से कुछ नाम है। यह सब बाद में बहुत सारे लोग केंद्र और राज्यो में मंत्री अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के चांसलर तक बने।

मद्रास से:
१. मुहम्मद इस्माइल साहिब
२. केटीएम अहमद इब्राहिम
३. महबूब अली बेग साहिब बहादुर
४. बी. पोकर साहिब बहादुर, मुम्बई से
५. अब्दुल कादिर मोहम्मद शेख
६.  अब्दुल कादिर अब्दुल अजीज खान, असम से
७. मोहम्मद सादुल्ला,
८. अब्दुर रौफ, उत्तर प्रदेश से
९ बेगम क़ुदसिया ऐज़ाज़ रसूल नवाब, हरदोई से
१० सैयद फजल-उल-हसन हसरत मोहानी, AMU से
११ नवाब इस्माइल खान, मेरठ से जो बाद में AMU के चांसलर बने
१२. जेडएच लारी, बिहार से
१३. हुसैन इमाम, गया से
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