જિંદગી માત્ર એ નથી કે આપણે જોઈએ છીએ એ પણ છે જે જોઈ શકવા માટે આપણે સક્ષમ નથી. જયારે કોઈની મદદ કે માર્ગદર્શનથી નથી જોઈ શકતા એ જોતા અને સમજતા થશું ત્યારે આપણી નફરત પ્રેમમાં પલટાતા બિલકુલ વાર નહીં લાગે.
એક ભાઈ પોતાની સાથે બે – ત્રણ નાનાં બાળકોને લઈને ટ્રેનમાં ચડ્યા. એક ડબ્બામાં થોડી જગ્યા જોઈ એટલે સામાન ઉપર રાખીને બારી પાસે કંઈક વિચારતા વિચારતા એ ભાઈ બેસી ગયા. ટ્રેન ચાલુ થઈ અને સાથે સાથે પેલા બાળકોના તોફાન પણ ચાલુ થયા. જેમ જેમ સમય પસાર થતો ગયો તેમ તેમ તોફાન વધતાં ગયાં.
પેલા ભાઈ તોફાન કરી રહેલાં બાળકોને કંઈ જ કહેતા નહોતા આથી બાળકો વધુ ધમાચકડી મચાવતાં હતાં. થોડીવાર પછી તો એ બીજા મુસાફરોના સામાનમાં હાથનાખીને ફંફોસવા માંડ્યા અને આખો ડબો માથે લીધો.
ડબાના અન્ય મુસાફરોથી હવે સહન કરવું મુશ્કેલ હતું એટલે બધાએ પેલા શૂન્યમનસ્ક થઈને બેઠેલા ભાઈને ઢંઢોળીને કહ્યું, ” ભાઈ આ તમારાં બાળકો કેવા તોફાન કરે છે. તમે એને અટકાવતા કેમ નથી ? ”
બાળકો સહેજ દૂર ગયા એટલે પેલા ભાઈએ મુસાફરોને ધીમેથી કહ્યું , ‘‘ એ બાળકોના તોફાન બદલ હું આપની માફી માંગું છું અને હું એમને એટલા માટે નથી અટકાવતો કારણ કે આ તોફાન અને સુખ એના જીવનમાં બહુ ટૂંકા ગાળાનું છે. આ બાળકોની મા મૃત્યુ પામી છે અને હું એમને સાથે લઈને ડેડબોડી લેવા જાઉં છું. હવે તમે જ કહો આ બાળકોને હું કેવી રીતે ચુપ કરાવું ? ”
તમામ મુસાફરોની આંખ ભીની થઈ ગઈ. જે બાળકોને એ નફરત કરતા હતા એ જ બાળકોને બીજી જ ક્ષણે વ્હાલ કરતા થઈ ગયા. કોઈએ ચૉકલેટ આપી, કોઈએ બિસ્કિટ આપ્યા તો વળી કોઈએ બહારથી આઇસક્રીમ પણ લઈ આપ્યો. કોઈએ બાળકોને પોતાના ખોળામાં બેસાડ્યા , કોઈએ માથા પર હાથ ફેરવ્યો તો કોઇએ કપાળમાં ચૂમી આપી. સત્ય જાણ્યા પછી તમામ મુસાફરોનો ગુસ્સો ન જાણે ક્યાં જતો રહ્યો !
જીવનમાં સુખ હોઈ કે દુઃખ તેને સમજતા અને તેમાંથી આંનદ લેતા શીખી જશું તો જીવનની દરેક પળ સુખમય બની જશે.
ભારત સંસ્કૃતિ માંથી
👏👏👏
Day: March 7, 2025
2010 जब कांग्रेस सत्ता में थी मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे तब देखिए किस तरह से सूचना के अधिकार का बलात्कार किया जा रहा था
आप जानकर चौंक जाएंगे वजाहत हबीबुल्लाह जो भारत के पहले सीआईसी यानी चीफ इनफॉरमेशन कमिश्नर थे उन्होंने एक अर्जी के सुनवाई के जवाब में आदेश दिया था कि राजीव गांधी फाउंडेशन को आरटीआई के तहत नहीं लाया जा सकता
मनमोहन सरकार यह नहीं बताना चाहती थी कि राजीव गांधी फाउंडेशन में कौन डोनेशन देता है कितना डोनेशन देता है भारत सरकार कितना पैसा राजीव गांधी फाउंडेशन को दे रही है और राजीव गांधी फाउंडेशन का पैसा कहां खर्च होता है कि कम पर खर्च होता है
मजे की बात यह कि पूरे भारत में उन्होंने सिर्फ राजीव गांधी फाउंडेशन को ही आरटीआई से बाहर किया था किसी और फाउंडेशन को उन्होंने आरटीआई के दायरे से बाहर नहीं किया
और जब वह रिटायर हुए जब सरकार बदली तब पता चला कि राजीव गांधी फाउंडेशन में वजाहत हबीबुल्लाह भी खुद ट्रस्टी थे
कभी अपना कुकर्म याद करो अपना बदबूदार गिरेबान भी देखो।
साभार
થોડા વર્ષો પહેલા, NCERT એ તેના પાઠ્યપુસ્તકમાં પ્રકાશિત કર્યું હતું કે ઔરંગઝેબ અને શાહજહાંએ યુદ્ધ દરમિયાન નાશ પામેલા હિન્દુ મંદિરોના સમારકામ માટે રુપિયા આપ્યા હતા.
પરંતુ, જ્યારે આ માહિતીનો સ્ત્રોત જાણવા માટે RTI દાખલ કરવામાં આવી.
NCERT એ જવાબ આપ્યો કે માહિતી ઉપલબ્ધ નથી.
— વિકૃત શિક્ષણ

एक महान रहस्यदर्शी मिलेरेप्पा के बारे में ऐसा ही कहा जाता है। जब तिब्बत में वह अपने गुरु के पास गया तो वह इतना अधिक विनम्र, इतना पवित्र और इतना अधिक प्रामाणिक था कि वहां अन्य शिष्यों को उससे ईर्ष्या होने लगी। यह निश्चित था कि वह गुरु का उत्तराधिकारी बनता। और वास्तव में उस आश्रम में राजनीति चल रही थी, इसलिए उन लोगों ने उसे मार डालने का प्रयास किया। एक दिन उन लोगों ने उससे कहा—’‘ यदि तुम वास्तव में सद्गुरु के प्रति पूर्ण श्रद्धा रखते हो तो क्या तुम इस पहाड़ी से नीचे कूद सकते हो? यदि तुम वास्तव में गुरु पर विश्वास करते हो, यदि तुम्हारी श्रद्धा सच्ची है तो तुम्हें कुछ भी हानि नहीं हो सकती।’’
और मिलेरेप्पा बिना किसी हिचक के, बिना एक क्षण सोचे पहाड़ी से नीचे कूद पड़ा। वे दौडते हुए नीचे पहुंचे क्योंकि वह लगभग तीन हजार फुट गहरी घाटी थी। उसकी इधर—उधर बिखरी हड्डियां खोजने के लिए वे लोग नीचे पहुंचे, लेकिन वह वहां पद्यासन लगाये बहुत प्रसन्न और अत्यधिक आनंदपूर्ण स्थिति में बैठा मिला।
उसने अपने नेत्र खोले और कहा— ” तुम लोग ठीक कहते थे, विश्वास और श्रद्धा ही रक्षा करते हैं।’’
उन लोगों ने सोचा कि यह जरूर ही कोई संयोग हो सकता है। इसलिए जब एक दिन एक घर में आग लगी थी तो उन लोगों ने उससे कहा—’‘ यदि तुम अपने सद्गुरु से प्रेम करते हो, उन पर श्रद्धा रखते हो, तो इस घर के अंदर जाकर लोगों को बचाओ।’’
वह तुरंत उस घर में लगी आग के अंदर चला गया, जहां एक स्त्री और एक बच्चा रह गया था। आग बहुत भयानक थी और सभी यह आशा कर रहे थे कि वह जल जायेगा, लेकिन वह बिना जले बाहर आ गया।
एक दिन वे सभी कहीं जा रहे थे और सभी को एक नदी पार करनी थी। उन लोगों ने उनसे कहा—’‘ तुम्हें तो नाव से नदी पार करने की कोई जरूरत है ही नहीं। तुम्हारे पास तो इतनी महान श्रद्धा और विश्वास है, तुम तो नदी पर चल सकते हो। और वह नदी के जल पर चलता हुआ उस पार जा पहुंचा।’’
यह पहला अवसर था कि सद्गुरु ने यह चमत्कार देखा। वह उसके प्रति अनजान था। जब उसे पहाड़ी से घाटी में कूदने को और जलते घर में प्रवेश करने को कहा गया था। वह इन घटनाओं के प्रति होशपूर्ण था ही नहीं। लेकिन इस बार उसने नदी किनारे स्वयं खड़े—खड़े उस नदी के जलपर चलते हुए देखा था।
उसने मिलेरेप्पा से कहा—’‘ तुम यह क्या कर रहे हो? यह तो असम्भव है।’’
और मिलेरेप्पा ने कहा—’‘ बिलकुल भी असम्भव नहीं है। मैं यह सब कुछ आपकी ही शक्ति द्वारा ही कर रहा हूं।’’
अब वह सद्गुरु विचार में पड़ गया—’‘ यदि मेरे नाम और मेरी शक्ति से यह अज्ञानी और मूर्ख व्यक्ति यह सब कुछ कर सकता है… और मैंने स्वयं कभी ऐसी कोशिश ही नहीं की।’’
इसलिए उसने कोशिश की और वह नदी में डब गया। इसके बाद उसके बारे में कभी कुछ भी नही सुना गया।
एक ऐसा सद्गुरु जो बोध को उपलब्ध नहीं भी हुआ हो, उसके प्रति भी यदि श्रद्धा गहरी हो, तो वह भी तुम्हारे जीवन में क्रांति ला सकता है। और इसका विपरीत भी सत्य है, एक बुद्ध भी तुम्हारी कोई भी सहायता नहीं कर सकता, यदि तुम्हारी प्यास गहरी और सच्ची नहीं है। यह सभी कुछ तुम्हीं पर निर्भर करता है पूरी तरह तुम्हीं पर।
प्रेम योग
प्रवचन-4
ओशो.
કોંગ્રેસ નો ઝીણા પ્રેમ.
1951માં પાકિસ્તાનના કરાચીમાં મુહમ્મદ અલી ઝીણાની કબર પર પ્રાર્થના કરતા ભારતના પ્રથમ શિક્ષણ મંત્રી મૌલાના અબુલ કલામ આઝાદ અને કોંગ્રેસીઓ..
યે રિશ્તા ક્યા કહેલાતા હૈ..

इस धरती पर वामपंथ से बड़ा पाखंड, धूर्तता कोई दूसरा नही होगा ..वामपंथ को समझना है तो ज्यादा पुरानी नही सिर्फ 1989 में चीन में tianaman square, Beijing की घटना को याद कर लीजिये …
भारत में ये वामी पिल्ले लोकतंत्र, बोलने की आजादी, गरीबी से आजादी जैसी बड़ी बड़ी बाते करते है … लेकिन जब चीन में कम्यूनिस्ट पार्टी की सरकार ने छात्रों का दमन करते हुए करीब 3,000 छात्रों को मारा था तब भारत की कम्युनिस्ट पार्टियों ने चीन के इस दमन का समर्थन किया था ..
चीन में कम्युनिस्ट पार्टी ने जब mao tse tung के नेतृत्व में सत्ता हथियाई थी तब से चीन में कम्युनिस्ट पार्टी का तानाशाही का राज चलता है .. कभी चुनाव नही होते ..लोगो को कोई भी नागरिक अधिकार हासिल नही है ..हलांकि जब चीन की अर्थव्यवस्था चौपट होने लगी तब चीन ने कम्युनिज्म की आड़ में साम्राज्यवादी निति अपना लिया और जिसका नतीजा हुआ की चीन में कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े लोग और सेना से रिटायर जनरलों ने हजारो करोड़ डालर का साम्राज्य खड़ा कर लिया .. चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के ये उद्योगपति बड़े पैमाने पर मजदूरों का शोषण करने लगे .. और चीन में मजदूरों को कोई भी हक या कोई भी labour law नही है ..
कम्युनिस्ट यानी वामपंथ से खिलाफ चीन में लोगो का रोष खूब बढने लगा ..क्योकि वामपंथी नीतिओ से चीन में आमिर खूब आमिर होने लगे और गरीब और गरीब होने लगे .. बीजिंग युनिवर्सिटी के छात्रों ने जबरजस्त आन्दोलन किया ..जो धीरे धीरे चीन के 400 से अधिक शहरों में फ़ैल गया .. छात्रों के साथ मजदूर और आम आदमी भी वामपंथी सुअरों के खिलाफ बगावत पर सड़को पर उतर गये …
चीनी सरकार ने छात्रों के आन्दोलन को बड़ी सख्ती से दबाया .. उनके उपर टैंक चढ़ा दिए ..छात्रों पर अत्याधुनिक राइफलो से फायरिंग की गयी ..करीब ३००० से ज्यादा छात्र मारे गये .. बीस हजार लोगो को जेल में ठूंस दिया गया जो आज भी चीनी जेलों में बंद है …यूनाईटेड नेशंस में चीन में अपना प्रतिनिधि मंडल भेजकर ये जानना चाहता था की आखिर कितने छात्र मारे गये है तो चीन के साथ साथ उस समय भारत में गठबंधन से सत्ता में आये वामपंथी दलों ने यूएन का ये कहकर विरोध किया की किसी भी देश को ये अधिकार हासिल है की वो अपने विरुद्ध बगावत पर कारवाई करे ..चीन से जो छात्रों पर कारवाई की है वो बिलकुल उचित है .. यहाँ तक भी वामपंथी छात्र संगठनो जैसे आआईसा, एसऍफ़आई, डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स यूनियन आदि ने चीनी सेना द्वारा छात्रों पर टैंक चढ़ाने का समर्थन किया था |
इस आन्दोलन का चीन के विभिन्न शहरों में नेतृत्व कर रहे छात्र नेताओ Wu’er kaixi, Chai Ling, Kong Qing dong, Wang Dan, Shen Tong, Liu Gang, Feng Congde,Wang Hui, Li Lu, etc को चीनी सेना ने गिरफ्तार कर लिया और उन्हें सार्वजिनक रूप से जनता के सामने बिना कोई मुकदमा चलाये गोली मार दी गयी ..इस आन्दोलन को समर्थन देने वाले चीन के चार बड़े लेखको को भी गोली मार दी गयी .. 20,000 से ज्यादा लोगो को जेलों में ठूंस दिया गया …
इस आदोलन में एक अनाम छात्र की तश्वीर पूरी दुनिया में बहुत प्रसिद्ध हुई ..जिसका नाम कोई नही जानता था ..जिसे “टैंक मैंन” का नाम दिया गया ..चीनी सेना के ३०० टैंको के आगे ये छात्र बिना किसी डर के खड़ा हो गया ..टैंक के चालक को विश्वास था की टैंक पास जाते ही ये छात्र भाग जायेगा लेकिन ये छात्र टस से मस तक नही हुआ .. और टैंक के चालक ने उस छात्र की बहादुरी से प्रभावित होकर खुद ही टैंक बिल्कुल उसके पास रोक दी … बाद में उस छात्र और उस टैंक चालक सैनिक को भी गोली मार दी गयी ..क्योकि उस सैनिक टैंक चालक ने उस छात्र की बहादुरी से प्रभावित होकर उसे कुचला नही था …
सोचिये … भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में ये वामपंथी सूअर कितनी आजादी से “भारत तेरे टुकड़े होंगे ..इंशाअल्लाह इंशाअल्लाह” का नारा लगाते है .. और करवाई होने पर कहते है देश में कोई आजादी ही नही है .. लेकिन यही वामपंथी सूअर चीन में अपनी पार्टी के दमन को जायज ठहराते है …..!!!