Posted in हिन्दू पतन

साल 2004 में बेसलान के स्कूल में  इस्लाम के आतंकीयों  का बहुत बड़ा हमला हुआ था। इस हमले से पूरी दुनिया भयभीत हो गई थी। यहां चेचन्या के 32 आतंकियों ने तीन दिनों तक स्कूल को घेरे रखा। इस घटना में 330 से ज्यादा लोग मारे गए जिसमें ज्यादातर बच्चे थे। आतंकियों ने स्कूल के पहले दिन के आयोजन समारोह में आए 1200 शिक्षकों, छात्रों और अभिभावाकों को बंदी बनाकर रखा।

ये दुनिया का सब से बड़ा दिल दहलाने वाला बच्चों को सेक्शुअल नरसंहार था जो इतना दर्दनाक था की पूरी दुनिया आतंकी दरिंदे मुसलमानो के द्वारा किए गये इस कृत्य पर सन्न रह गयी.. भारत की महा भ्रष्ट मीडिया की किया कहें .. पूरी दुनिया के न्यूज़ में इस नरसंहार की कहानी पूरी नही आने दी गयी ..
बेसलान के एक बच्चों के स्कूल में अचानक मोहम्मद के बनाए आतंकी संगठन इसलाम के मुस्लिम हमलावरों ने इतिहास का सब से घिनौना हमला बोला ..वो लोग अंदर घुस गये .. इस हमले में जो मुसलमानो ने किया वो आज तक किसी मीडीया ने बोलने की हिम्मत नही दिखाई.. अंदर घुसते ही जो भी स्कूल के अंदर पुरुष थे उनको तुरंत ही मार दिया गया ताकि किसी तरह के प्रतिरोध की संभावना ना रहे..
इसके बाद जैसे ही इनकी नज़रें डरी हुई और बेसहारे स्कूल की छोटी बच्चियों पर गयीं .. इनकी आँखों मे वासना उभर उठी ..इनके अंदर का शैतान जाग उठा ..
बेसलान स्पष्ट रूप से एक यौन हत्या थी. मुसलमान इस स्कूल में आतंकवाद से भी ज़्यादा की दरिंदगी दिखना चाहते थे ..
अल्लाह बंदे सेक्स हत्यारों ने अब सभी छोटी छोटी बच्चियों की तरफ देखा .. उन सबको अंदर बने एक जिम हॉल में ले गये ..
इसके बाद छोटी छोटी बच्चियों की चीखती आवाज़ें इनके ज़ुल्म के आगे दब कर रह गयी …अपने ही सारे दोस्तों के सामने अपमानित होती रही …
बारी बारी से ३ साल ५ साल की एक एक बच्ची के साथ कई कई मुसलमानो ने बलात्कार किया गया.. ना सिर्फ़ मुस्लिम हैवानों ने बलात्कार किया बल्कि बच्चों के गुप्तांगों में अपने बंदूकों और अन्य वस्तुओं को … ****####@@@
दूसरे सारे बंधक बच्चों को ये सब देखने को मजबूर किया गया .. और आतंकवादी हंस रहे थे..
जितना बच्चों के गुप्तांगों से खून निकलता .. मुसलमान उतनी ही ज़ोर से हंसते ..
बहुत सारी छोटी छोटी बच्ची ज़्यादा ब्लीडिंग की वजह से वहीं उसी वक़्त मर गयी .. रेप करने के दौरान दरिंदे वीडियो शूट भी कर रहे थे… खून से फर्श लाल हो गयी थी
लड़कियाँ इस रेप में और हथियार के गुप्तांगों में डालने के वजह से खून से सन गयीं.. जिस्म से इतना खून निकला की तत्काल चिकित्सा नही होने की वजह से वहीं चीखती चिल्लती मासूमों ने दम तोड़ दिया ..
लेकिन इन सब के बाद भी मुसलमानो का दिल सिर्फ़ रेप से और हत्या से नही भरा था .. सारे मुसलमानो ने छोटे छोटे बच्चों को पीटना शुरू किया .. बुरी तरह पीटा ..
वास्तव मे पिटाई तो वो शुरू से ले कर अंत तक करते रहे .. इस दौरान मुसलमान खुश होते.. हंसते ..
आतंकवादियों ने बच्चों को खूब लहू लुहान किया… और खूब ठहाके लगाए .. जैसे जैसे समय बीता .. मुसलमानो के ज़ुल्म और बढ़ते गये.. जब बच्चों ने प्यास के मारे पानी माँगा तो वो लोग हँसे … मज़ाक उड़ा रहे थे…
उस दिन मौसम भी अजीब था बाहर जबरदस्त गर्मी थी और अंदर के उस हॉल में एयर कंडीशनर भी काम नही कर रहा था..बच्चे प्यास से तड़प रहे थे .. पानी माँग रहे थे
पीड़ित बच्चों के हालत और बुरे उस वक़्त हो गये जब उन दरिंदों ने बच्चों को अपना पेशाब पीने पर मजबूर किया .. कुछ मामलों में तो बंधकों के उपर ही पेशाब किया ..
आतंकवादियों ने एक गेम खेला.. बच्चों के सामने जो बहुत ही ज़्यादा प्यासे थे .. उनके सामने पानी के बर्तन को रख दिया और कहा जो इसको पीने आएगा उसको मैं गोली मार दूँगा ..
जब बच्चों ने पुछा की क्या वो रेस्ट रूम मे जा कर पानी पी सकते हैं तो उस मे से एक आतंकी मुस्लिम ने कहा कि .. हम तुम्हारे अंकल नही बल्कि जिहादी हैं और तुम्हे मारने आए हैं.. इसके बाद बच्चों को मे अपनी मौत का ख़ौफ़ समा गया … अपने आपको ज़िंदा बच पाने की उम्मीद ख़त्म हो गयी.. बच्चे डर कर चिल्ला भी नही पा रहे थे क्यूँ की ऐसा करने पर उनको मारा जाता पीटा जाता…बच्चों को लगा अगर वो चिल्लाएँगे तो ये लोग उनको गोली मार देंगे
अब तक स्कूल के बाहर भीड़ लग चुकी थी…आतंकी अंदर से खड़े हो कर नगरवासियों पर कॉमेंट करते… अंडे फेंकते… हंसते.. और ये सब रात तक चलता रहा … बच्चों के उपर इनकी क्रूरता जारी रही .. रात को इन्होने बच्चों को ही कहा की वो नंगे बलात्कार किए हुए मर चुके बच्चों की लाशों को उठा कर के पीछे फेंक कर आयें
इस बीच रशियन सैनिकों ने स्कूल को घेर लिया था.. .समझौते की कोशिशें जारी थी .. सैनिकों ने आतंकवादियों से खाना खाने के लिए फुड देने की बात की पर आतंकियों ने इनकार कर दिया .. क्यूँ कि उन्हे उसमे ज़हर होने का डर था
इस बीच रूस की सब से अच्छी फोर्स Alpha and Vympel (Russia Special forces) आ चुकी थी ..
आतंकियों ने साफ कर दिया था की अगर गैस का इस्तेमाल हुआ आ बिजली काटी गयी तो वो तुरंत बच्चों को मार देंगे ..
आतंकवादी इन फोर्स के पहले की सारी काररवाई की छानबीन कर ली थी .. उन्होने थकान और नींद भगाने वाली दवाई amphetamines लाए थे ..
रूसी विशेष बलों ने विभिन्न तकनीकों का उपयोग करते हुए स्कूल पर हमला कर दिया टैंक से .. बंदूक से … विस्फोट ए .. हर तरह से हमला किया गया . स्पेशल फोर्स के कमांडो भी जान पर खेल गये ..लेकिन उस अभागे दिन सिर्फ़ रक्तपात को छोड़ कर और कुछ हासिल नही हो पाया

३३० लोग मारे गये जिस मे से १८० छोटे छोटे मासूम बच्चे थे .. बच्चों को गोली मार दी गयी थी …१८ महीने के बच्चे तक को चाकू घोंप घोंप कर मारा गया था ..२४७ बच्चे जो गंभीर रूप से घायल थे उनको इलाज के तुरंत बाद मास्को सर्जरी के लिए भेजा गया … कई फोर्स के सैनिक भी मारे गये थे… ३ दिन तक बंधक बच्चों पर ये ज़ुल्म ढाते रहे थे….

अंत में चारो तरफ बच्चों की लाशों को देख कर उनके माँ बाप के चीख पुकार और रोने की आवाज़ से पूरा इलाक़ा दहल उठा.. जो बच्चे स्कूल से निकल रहे थे सब खून से सने हुए थे.. लाशों के ढेर लगे थे … इस्लाम ने सबकी खुशियाँ छीन ली…
भारत के लोगों अगर अपने नन्हे नन्हे बच्चों से भी तुम्हे प्यार है तो सेकूलरिस्म त्याग दो वरना … अपने बच्चों के बलात्कार और हत्या और बंश नाश के ज़िम्मेदार तुम खुद होगे ..
this is the proof if someone wants it

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

सुल्तान महमूद गज़नवी के पास कोई शख्स ककड़ी लेकर हाज़िर हुआ🥱
सुल्तान ने ककड़ी कबूल फरमाई और पेश करने वाले को ईनाम दिया–😃
फिर अपने हाथ से ककड़ी की एक फाँक काटकर अपने चहेते गुलाम अयाज़ को दी
अयाज़ मज़े लेकर वो ककड़ी खा गया,
फिर सुल्तान ने दूसरी फाँक काटी और खुद खाने लगा वो इतनी कड़वी थी कि ज़बान पर रखना मुश्किल था🥱
सुल्तान ने हैरत से अयाज़ की तरफ देखा और फरमाया:-
अयाज़,इतनी कड़वी ककड़ी तू कैसे खा गया कि तेरे चेहरे पर कड़वाहट का ज़रा भी असर न हुआ–? 🥱
अयाज़ ने कहा:-ककड़ी वाकई बहुत कड़वी थी,मुँह में डाली तो अक्ल ने कहा कि थूक दे,मगर दिल ने कहा:-
अयाज़ खबरदार!ये वही हाथ है जिनसे रोज़ाना अच्छी अच्छी और मीठी चीजें खाता रहा है,अगर एक दिन कड़वी चीज़ मिल गई तो क्या थूक देगा, इसलिए खा गया—-😃
यही मुसलमान की शान होनी चाहिए कि जिस अल्लाह ने इन्सान पर बहुत सारे एहसान फरमाये,अगर कभी उसकी तरफ से कोई मुसीबत आ जाये तो सब्र के साथ उसे कबूल कर लेना चाहिए
इस कहानी के माध्यम से अयाज़ गां…डे कहना चाह रहा है कि अरब में ककड़ी की खेती क्या मेरे अब्बू  गजनवी ने की थी जो कहानी इतनी मज़े से पढ़ लिए हो।
😂😂😂

Posted in हिन्दू पतन

वह सुल्ताना बेगम हैं, जो अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की परपोती होने का दावा करती है ।

इसकी शादी मिर्ज़ा बेदार बख्त से हुई थी और इसके 6 बच्चे हैं। अब ये कोलकाता की एक झुग्गी में रहती हैं और मासिक पेंशन पर निर्भर हैं।

यहां तक ठीक है, पर क्या आप जानते है कि ये सुल्ताना बेगम दिल्ली के लाल किले पर अपना कब्ज़ा चाहती हैं, जिसके लिए इसने दिल्ली हाइकोर्ट में याचिका भी डाली थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दी ।

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

वह सुल्ताना बेगम हैं, जो अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की परपोती होने का दावा करती है ।

इसकी शादी मिर्ज़ा बेदार बख्त से हुई थी और इसके 6 बच्चे हैं। अब ये कोलकाता की एक झुग्गी में रहती हैं और मासिक पेंशन पर निर्भर हैं।

यहां तक ठीक है, पर क्या आप जानते है कि ये सुल्ताना बेगम दिल्ली के लाल किले पर अपना कब्ज़ा चाहती हैं, जिसके लिए इसने दिल्ली हाइकोर्ट में याचिका भी डाली थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दी ।

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

પૂરી એક અંધેરી ને ગંડુ રાજા – દલપતરામ

પૂરી એક અંધેરી ને ગંડુ રાજા,
ટકે શેર ભાજી ને ટકે શેર ખાજાં;
બધી ચીજ વેચાય ત્યાં ભાવ એકે,
કદી સારી બૂરી ન વેચે વિવેકે.

ત્યાં જઈ ચઢ્યા બે ગુરુ એક ચેલો,
ગયો ગામમાં માગવા શિષ્ય પેલો;
લીધી સુખડી હાટથી આપી આટો,
ગુરુ પાસ જઈને કહે, “ખૂબ ખાટ્યો.”

ગુરુજી કહે, “રાત રહેવું ન આંહી,
સહુ એક ભાવે ખપે ચીજ જ્યાંહી;
હશે ચોરને શાહનો ન્યાય એકે,
નહી હોય શિક્ષા ગુનાની વિવેકે.

ન એ વસ્તીમાં એક વાસો વસીજે,
ચલો સદ્ય ચેલા જવું ગામ બીજે.”
કહે શિષ્ય, “ખાવા પીવા ખૂબ આંહી,
તજી તેહ હું તો ન આવીશ ક્યાંહી.”

ગુરુએ બહુ બોધ દીધો જ ખાસો,
“નહીં યોગ્ય આંહી રહ્યે રાતવાસો.”
ન માની કશી વાત તે શિષ્ય જયારે,
ગુરુજી તજીને ગયા ગામ ત્યારે.

રહ્યા શિષ્યજી તો ત્યહાં દિન ઝાઝા,
બહુ ખાઈપીને થયા ખૂબ તાજા;
પછીથી થયા તેહના હાલ કેવા,
કહું છું હવે હું સુણો સદ્ય તેવા.

(દોહરા)
તસ્કર ખાતર પાડવા, ગયા વણિકને દ્ધાર;
તહાં ભીત તૂટી પડી, ચોર દબાયા ચાર.
માત પ્રભાતે ચોરની, ગઈ નૃપને ફરિયાદ;
શૂળી ઠરાવી શેઠને, ડોશીની સૂણી દાદ.

“એવુ ઘર કેવું ચણ્યું, ખૂન થયાં તે ઠાર;
રાતે ખાતર ખોદતાં, ચોર દબાયા ચાર.”
વણિક કહે, “કડિયા તણો એમાં વાંક અપાર;
ખરેખરી એમાં નથી, મારો ખોડ લગાર.”

કડિયાને શૂળી ઠરી, વણિક બચ્યો તે વાર;
ચૂકે ગારો કરનારની, કડિયે કરી ઉચ્ચાર.
ગારો કરનાર કહે, “પાણી થયું વિશેષ;
એ તો ચૂક પખાલીની, મારી ચૂક ન લેશ”

પુરપતી કહે પખલીને, “જો તું શૂળીએ જાય,
આજ પછી આ ગામમાં, એવા ગુના ન થાય.”
“મુલ્લાં નીસર્યા મારગે, મેં જોયુ તે દિશ;
પાણી અધિક તેથી પડ્યું, રાજા છાંડો રીસ.”

મુલ્લાંજીને મારવા, કરી એવો નિરધાર;
શૂળી પાસે લઈ ગયા, મુલ્લાંને તે વાર.
ફળ જાડું શૂળી તણું, મુલ્લાં પાતળે અંગ;
એવી હકીકત ચાકરે, જઈ કહી ભૂપ પ્રસંગ.

ભૂપ કહે, “શું હરઘડી આવી પૂછો કોઈ;
શોધી ચઢાવો શૂળીએ, જાડા નરને જોઈ.”
જોતાં જોતાં એ જડ્યો, જોગી જાડે અંગ;બહુ દિન ખાઈને બન્યો, રાતે માતે રંગ

શિષ્ય મુદત માગી ગયો ગુરુ પાસે પસ્તાય;
ગુરુએ આવી ઉગારિયો, અદભૂત કરી ઉપાય.
જોગી શૂળી પાસ જઈ કહે, “ભૂપ સુણ કાન,
આ અવસર શૂળીએ ચઢે, વેગે મળે વિમાન.”

ચેલો બોલ્યો, “હું ચઢું” ને ગુરુ કહે, “હું આપ;”
અધિપતિ કહે, “ચઢીએ અમો, પૂરણ મળે પ્રતાપ.”
ગુરુ ચેલાને ગામથી, પહોંચાડ્યા ગાઉ પાંચ;
રાજા શૂળી પર રહ્યો, અંગે વેઠી આંચ.

જહાં ! ભણેલ ન ભૂપતિ, નીપજે એવા ન્યાય;
દેશ સુધારાની તહાં, આશા શી રખાય?

Posted in खान्ग्रेस

भगवान का शुक्र है कि उस दौर में सोसल मीडिया नहीं था नहीं तो राहुल गांधी से भी बड़े पप्पू थे राजीव गांधी।

आज कुछ किस्से मै आपको बताने जा रहा हूं जिसे पढ़कर आप दंग रह जाएंगे कि राजीव गांधी जैसे लोग इतने बड़े देश के प्रधानमंत्री भी थे..?

उनके पास सिर्फ एक ही योग्यता थी कि वो फिरोज गांधी के बेटे थे… उफ्फ माफ करना… वो पंडित नेहरू के नाती (नवासे) थे।

पूरा लेख कमेंट में है अंत तक पढ़िए….
5-7 मिनट लगेगा… पर आज राजीव गांधी के बारे में ऐसी बातें जानेंगे कि जो आपको पहले से पता नहीं होगीं..
पढ़िए 👇
राजीव गांधी कोई पढ़ाई लिखाई में अच्छे नहीं थे 5 सितारा दून स्कूल से स्कूलिंग के बाद 1961 में उन्हें इंजियनीरिंग पढ़ने लन्दन के ट्रिनिटी कॉलेज कैब्रिज भेजा गया,

यहीं पर राजीव एक छोटे से रेस्ट्रॉन्ट में वेट्रेस के तौर पर काम कर रही एडवीज अंतोनियो अल्बिना माइनो जिसे आज हम सोनिया गांधी के नाम से जानते हैं के सम्पर्क में आये,

1965 तक वो भोग विलास में डूबे रहे निरंतर फेल होते रहे और पास नहीं हो सके जिसके बाद कॉलेज ने राजीव को निकाल दिया, फिर राजीव ने 1966 में लन्दन स्थित इम्पीरियल कॉलेज में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया, किन्तु वहां भी फेल हुए,

उसी वर्ष राजीव की मां इंदिरा प्रधानमंत्री बनी और राजीव भारत आ गए, 1966 में दिल्ली फ्लाइंग क्लब ज्वाइन किया और प्लेन उड़ाना सीखा…

अब 1970 में प्रधानमंत्री इंदिरा ने जुगाड़ लगवा कर राजीव को सरकारी एयरलाइंस एयर इंडिया में कमर्शियल पायलट के तौर पर नौकरी में लगवा दिया, 1971 में भारत पाक युद्ध हुआ भारतीय सेना व् वायु सेना को लाजिस्टिक स्पोर्ट के लिए पायलट्स की आवश्यकता थी और एयर इंडिया के कमर्शियल पायलट्स को रसद व् हथियार एयर ड्राप करने हेतु बुलाया गया,

सारे के सारे पायलट्स तुरन्त युद्ध क्षेत्र में सेवाएं देने को आ गये सिवाय एक के और वो राजीव गांधी थे

जो डर के मारे सोनिया गांधी संग व् इटली के दूतावास में जा छिपे थे, अगले 8 वर्षों तक राजीव के भाई संजय ने उन्हें भोग विलास के सभी साधन उपलब्ध करवाए और खुद राजनीती में सक्रिय रह अपनी पकड़ मजबूत करते रहे..

1980 में संजय का काम तमाम करवाये जाने के बाद राजीव राजनीती में आये…

1984 में इंदिरा गांधी को उनके अंगरक्षकों ने दोपहर में गोली मार दी, राजीव गांधी ने भावनाओं से ऊपर उठकर शोक संताप में समय लगाने के बजाय उसी दिन शाम को भारत के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर अपनी तशरीफ़ रख दी, और कांग्रेसियों को सिखों का नरसंहार करने का आदेश दे डाला, कांग्रेसियों ने स्कूलों के रजिस्टरों और वोटर लिस्ट निकाल निकाल कर सिखों के घर खोजे और घरों में घुसकर हजारों सिखों को काटा.. 😭

महिलाओं से बलात्कार किया.. 😭

कई गर्भवती महिलाओं को जीवित ही जला दिया,

कांग्रेस नेताओं के पेट्रोल पंपों से तेल सप्पलाई किया गया सिखों को उनके बच्चो को उनकी सम्पत्तियों को फूंकने हेतु, सड़क चलते सिखों के गले में टायर डालकर जला दिया गया, यहाँ तक की राष्ट्रपति जैल सिंह को भी नहीं बख्शा गया और जब वो गाड़ी में थे तो उनपर भी कांग्रेसियों ने हमला किया,

गाड़ी के कांच तोड़ दिए गए,

दिल्ली में कांग्रेसियों का हिंसा का तांडव शुरू हुआ और शीघ्र ही ये देश के कोने कोने में फ़ैल गया

और राजीव गांधी ने देश भर में करीब 35000 निर्दोष सिखों को मौत के घाट उतरवाकर इंदिरा की मृत्यु का बदला लिया,

और बाद में राजीव गांधी ने उसे “बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है” वाला ब्यान देकर उसे न्यायोचित ठहरा दिया, खैर अगले चुनाव हुए और जनता ने राजीव द्वारा करवाये सिख नरसंहार को महत्व दिए बिना राजीव को इंदिरा की सहानुभूति के नाम पर 411 सीटें देकर असीम शक्ति दे दी..

और राजीव् ने निरंकुश होकर उस बहुमत का दुरूपयोग किया,

1985 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा शाहबानो को न्याय देकर मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक से बचने और गुजारे भत्ते का जो मार्ग खोला था उसपर आतातायी राजीव ने अपनी अक्ल पर पड़ा बड़ा वाला भीमकाय पत्थर दे मारा..

और अपुर्व बहुमत का प्रयोग कर मुस्लिम तुष्टिकरण का नया अध्याय लिखा और सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पलटकर मुस्लिम महिलाओं को पुनः गुलाम बना दिया भोपाल गैस कांड हुआ हजारों निर्दोष लोगों के हत्यारे यूनियन कार्बाइड के मालिक वारेन एंडरसन को राजीव ने अमेरिकी सरकार से सौदेबाजी कर सुरक्षित अमरीका भेज दिया,

क्योंकि राजीव की मां इंदिरा के बॉयफ्रेंड यूनुस खान का लड़का आदिल शहरयार जो अमेरिकी जेल में बंद था और उसे छुड़वाने हेतु राजीव ने 30,000 निर्दोष भारतियों के हत्यारे एंडरसन को अमरीका भगा दिया

और आदिल शहरयार को छुड़वाकर भारत ले आया,

वैसे कहा जाता है कि संजीव गांधी उर्फ़ संजय गांधी यूनुस खान की ही संतान था,

सच्चाई तो राम ही जाने…

राजीव में न वैश्विक कूटनीति की समझ थी न सैन्य शक्ति के सदुपयोग की अतः अपनी सिमित विवेक क्षमता से ग्रस्त राजीव गांधी ने श्रीलंका में LTTE से लड़ने भारतीय फोर्सेज जबर्दस्ती भेज दीं

और इंडियन पीस कीपिंग फोर्सेस के 1400 सैनिक मरवाये और 3000 सैनिक घायल करवाये

हलांकि बाद में राजीव को थूककर चाटना पड़ा

और सैनिकों को वापस बुलाना पड़ा,

राजीव को अपनी उस मूर्खता के कारण ही श्रीलंका दौरे पर श्रीलंकाई सैनिक द्वारा कूटा गया था,

और वो पहले व् एकमात्र प्रधानमंत्री बने जिन्हें विदेशी धरती पर विदेशी सैनिक द्वारा लतियाया गया, 1989 में बोफोर्स का घोटाला खुला

जिसमे पता चला की राजीव गांधी ने सोनिया के अत्यंत “करीबी मित्र” जिसे सोनिया अपने संग इटली से दहेज़ में लायी थी और जो सोनिया राजीव के घर में ही रहता था

उस ओटावियो कवात्रोची के द्वारा बोफोर्स सौदे में राजीव ने दलाली खायी थी,

राजनितिक नौटँकियां करने में भी राजीव किसी से पीछे न थे,

टीवी पर आने वाले रामायण सीरियल में राम का पात्र निभाने वाले अरुण गोविल को लेकर राजनितिक यात्राएं शुरू की

हिंदुओं को मुर्ख बनाकर उन्हें उनकी आस्था द्वारा विवश कर उनका वोट हथियाने हेतु,
1991 में Schweizer Illustrierte नामक स्विस मैगज़ीन ने काले धन वाले उन लोगों के नाम का खुलासा किया जिनका अवैध धन स्विट्ज़रलैंड के बैंकों में जमा था

और उसमें राजीव गांधी का भी नाम था…

मैगज़ीन ने खुलासा किया कि राजीव गांधी के 2.5 बिलियन स्विस फ्रैंक स्विट्ज़रलैंड के बैंक के एक अकाउंट में जमा हैं

1992 में टाइम्स ऑफ़ इंडिया और द हिन्दू ने खबरें छापीं की राजीव गांधी को सोवियत ख़ुफ़िया एजेंसी KGB से निरंतर धन मिलता था,

और रूस ने इस खबर की पुष्टि भी की थी और सफाई में कहा था कि सोवियत विचारधारा के हितों की रक्षा हेतु ये पैसे दिए जाते रहे हैं, 1994 में येवगिनिया अल्बट्स और कैथरीन फिट्ज़पेट्रिक ने KGB प्रमुख विक्टोर चेब्रिकोव के हस्ताक्षर युक्त पत्र प्रस्तुत कर ये खुलासा किया कि राजीव के बाद राजीव के परिवार सोनिया और राहुल को KGB की ओर से धन उपलब्ध करवाया जाता रहा है

और KGB गांधी परिवार से निरन्तर कॉन्टैक्ट में रहती है,

अब यदि आप पूरा आकलन करें तो पाएंगे कि राजीव एक कम पढ़े लिखे औसत से कम समझदार वो व्यक्ति थे जिसने 35000 निर्दोष सिख मरवाये,

भोपाल गैस कांड में  30000 निर्दोषों के हत्यारे को भगाया,

मुस्लिमों महिलाओं का जीवन नर्क बनाया,

रक्षा सौदों में दलाली खायी,

KGB जैसी एजेंसी के वो खुद एजेंट थे और उससे पैसे लेते थे, कूटनीति की समझ नहीं थी

और मूर्खतावश श्रीलंका में 1400 भारतीय सैनिकों की बलि चढ़वाई और देश का नाम कलंकित किया !
इस परिवार के कारण
भारत विभाजन ,
गाँधी वध ,
इंदिरा जी की हत्या ,
भोपाल गैस कांड ,
श्री लंका शांति सेना भेजना ,

आदि घटनाओं में जितने भारतीयों ने अपने प्राण गंवाये है उतना तो शायद अंग्रेजों के 200 वर्ष के शासन काल में भी नहीं मारे गए होंगे।

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

એક સ્ટોરી….
😂😂😂😂

એક સ્ત્રી ખરીદી કરવા ગઈ. કેશ કાઉન્ટર પર, તેણીએ તેનું પર્સ પૈસા ચૂકવવા માટે ખોલ્યું.

કેશિયરે તેના પર્સમાં ટીવીનું રિમોટ જોયું.

તે પોતાની જિજ્ઞાસા પર કાબૂ ન રાખી શક્યો અને પૂછ્યું,

“શું તમે હંમેશા તમારું ટીવી રિમોટ તમારી સાથે રાખો છો?😕”

તેણીએ જવાબ આપ્યો, “ના, હંમેશા નહીં, પરંતુ મારા પતિએ આજે ક્રિકેટ મેચને કારણે મારી સાથે ખરીદી કરવા સાથે આવવા માટે ના પાડી, તેથી મેં રિમોટ જ સાથે લઇ લીધું.”

બોધ : તમારી પત્નીને તેના શોખમાં સાથ આપો અને ટેકો આપો…..🙍🙍🙍🙍🙍🙍🙍

વાર્તા ચાલુ છે….😏

કેશિયર હસ્યો અને પછી મહિલાએ ખરીદેલી બધી વસ્તુઓ તેને પાછી આપી.

આ કૃત્યથી આઘાત પામી, તેણીએ કેશિયરને પૂછ્યું કે તે શું કરી રહ્યો છે.

તેણે કહ્યું, “તમારા પતિએ તમારું ક્રેડિટ કાર્ડ બ્લોક કરી દીધું છે……….”😲😲😲😲😲😲

બોધ: હંમેશા તમારા પતિના શોખનો આદર કરો.😒😒😒😒😒😒😒😒😒😒

વાર્તા ચાલુ છે….

પત્નીએ પર્સમાંથી પતિનું ક્રેડિટ કાર્ડ કાઢીને સ્વાઈપ કર્યું. કમનસીબે તેના પતિ એ પોતાનું કાર્ડ બ્લોક કર્યું ન હતું.

બોધ: તમારી પત્નીની શક્તિ અને ડહાપણને ઓછો આંકશો નહીં..

વાર્તા ચાલુ રહે છે…

સ્વાઇપ કર્યા પછી, મશીને સૂચવ્યું, ‘તમારા મોબાઇલ ફોન પર મોકલેલ પિન દાખલ કરો’…….

બોધ: જ્યારે માણસ હારી જાય છે, ત્યારે મશીન તેને બચાવવા માટે પૂરતું સ્માર્ટ છે!

વાર્તા ચાલુ છે….

તેણીએ પોતાની જાત સાથે સ્મિત કર્યું અને તેના પર્સમાં રણકતો મોબાઈલ હાથમાં લીધો.

જે તેના પતિનો ફોન હતો જે ફોરવર્ડ કરાયેલ એસએમએસ દર્શાવે છે.

તેણીએ તેનો ફોન રીમોટ કંટ્રોલની સાથે લઇ લીધો હતો, જેથી તે તેની ખરીદી દરમિયાન તેણીને ફોન કરી ને ડીસ્ટર્બ ન કરે. અને તેમા આવેલ એસ.એમ.એસ. નો પીન નંબર દાખલ કરી બીલ ની ચુકવણી કરી દીધી.

તેણીએ તેની વસ્તુઓ ખરીદી અને ખુશીથી ઘરે પરત ફરી.

બોધ: અધીરી સ્ત્રીને ઓછી આંકશો નહીં!😷😷😷😷😷

વાર્તા ચાલુ છે….

ઘરે પહોંચતા જ જોયું તો તેની કાર ગેરેજમાં નહોતી .😈😈😈😈😈

દરવાજા પર એક ચિઠ્ઠી ચોંટાડી હતી

“રિમોટ મળી શક્યું નથી. મિત્રો સાથે ક્રિકેટ મેચ જોવા માટે બહાર જાઉ છું . ઘરે આવતા મોડું થશે. જો તારે કંઈક જોઈતું હોય તો મને મારા ફોન પર કૉલ કરજે “.😇😇😇😇

ઓ તારી !… તે ઘરની ચાવી પણ લઈને નીકળી ગયો!

😂😂😂😂

બોધ: તમારા પતિને નિયંત્રિત કરવાનો પ્રયાસ કરશો નહીં.
તમે હંમેશા હારી જશો😯😯😯😯😯😯😯😯

એકલા હસશો નહીં તમારા ખાસ મિત્રોને કૃપા કરીને શેર કરો.

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

सच्चा सुख संतोष में है




एक संत को अपना भव्य आश्रम बनाने के लिए धन की जरूरत पड़ी। वह अपने शिष्य को साथ लेकर धन जुटाने के लिए लोगों के पास गए। घूमते-घूमते वह एक गांव में अपनी शिष्या एक बुढ़िया की कुटिया में पहुंचे। कुटिया बहुत साधारण थी। वहां किसी तरह की सुविधा नहीं थी फिर भी रात हो गई तो संत वहीं ठहर गए। बूढ़ी मां ने उनके लिए खाना बनाया।

खाने के बाद संत के सोने के लिए मां ने एक तख्त पर दरी बिछा दी और तकिया दे दिया। खुद वह जमीन पर एक टाट बिछाकर सो गईं। थोड़ी ही देर में वह गहरी नींद सो गईं लेकिन संत को नींद नहीं आ रही थी। वह दरी पर सोने के आदी नहीं थे। अपने आश्रम में सदा मोटे गद्दे पर सोते थे। संत सोचने लगे कि जमीन पर टाट बिछा कर सोने के बावजूद इस को गहरी नींद आ गई और मुझे तख्त पर दरी के बिछोने पर भी नींद क्यों नहीं आई।

मैं तो संत हूँ, सैंकड़ों का मार्गदर्शन करता हूं और यह एक साधारण बुढ़िया। यह बात उन्हें देर तक मथती रही। सोचने लगे, एक दिन यहीं रुकता हूं, देखता हूं कि यह ऐसा कौनसा मंत्र जानती है कि ऐसी अवस्था में भी प्रसन्न है, चैन से सोती है।

सुबह जल्दी उठकर बूढ़ी मां ने अपने हाथ से कुटिया की सफाई की और चिडिय़ों को दाना खिलाया। गाय को चारा दिया। फिर सूर्य को जल अर्पण किया, पौधों को सींचा। गुरु को प्रणाम किया और कुछ देर बैठ कर भगवान नाम का स्मरण। आंगन से तरक़ारी तोड़ कर भोजन पकाया।

गुरु को प्रथम भोजन करवा कर आप ग्रहण किया। दिन में आस पड़ोस की बच्चियों को बुला कर उन्हें हरि कथा सुनाई, हरि भजन का ज्ञान दिया। फिर संध्या पूजन, रात को पुन: सादे भोजन का प्रबंध। सोने की तैयारी। गुरु सोचने लगे आज फिर नींद नहीं आयेगी। पूछ ही लूं कि क्या रहस्य है।

संत ने पूछा, ‘‘मां, तुमने मेरे लिए अच्छा बिछोना बिछाया। फिर भी मुझे नींद नहीं आई जबकि तुम्हें जमीन पर गहरी नींद आ गई। क्या तुम्हें धरती की कठोरता नहीं सताती? क्या यह चिंता नहीं होती कि कैसे अपने लिये अच्छे भोजन का, नरम बिछड़ने का प्रबंध करूं? इसका कारण क्या है?’’ वह बोलीं, ‘‘गुरुदेव जब मैं सोती हूं तो मुझे पता नहीं होता कि मेरी पीठ के नीचे गद्दा है या टाट।

उस समय मुझे आपके वचन अनुसार दिन भर किए गए सत्कर्मों का स्मरण करके ऐसा अद्भुत आनंद मिलता है कि मैं सुख-दुख सब भूल कर परम पिता की गोद में सो जाती हूं इसलिए मुझे गहरी नींद आती है।’’

संत ने कहा, ‘‘मैं अपने सुख के लिए धन एकत्रित करने निकला था। यहां आकर मुझे मालूम हुआ कि सच्चा सुख भव्य आश्रम में नहीं बल्कि संतोष में है, गरीब की इस कुटिया में है।’


कहते है की इस कहानी से ओर भी कई बातें सीखने को मिलती है। 🙏🏻👇🏻

  1. सच्चा सुख संतोष में है – असली आनंद भव्य आश्रमों या ऐशो-आराम में नहीं, बल्कि संतोषपूर्ण जीवन और अच्छे कर्मों में मिलता है।
  2. साधारण जीवन, उच्च विचार – एक साधारण बुढ़िया, जो सादा जीवन जीती थी, फिर भी आत्मिक रूप से संतुष्ट और प्रसन्न थी, जबकि संत होते हुए भी गुरु को चैन नहीं था।
  3. धन और सुविधाएँ शांति की गारंटी नहीं हैं – संत के पास आरामदायक बिछौना था, फिर भी उन्हें नींद नहीं आई, जबकि बुढ़िया टाट पर भी चैन से सो गई। इसका अर्थ है कि बाहरी सुख-सुविधाएँ हमें आंतरिक शांति नहीं दे सकतीं।
  4. सत्कर्म और भक्ति जीवन को सुखद बनाते हैं – बुढ़िया ने अपने दिन को सत्कर्मों, दान-पुण्य और ईश्वर स्मरण में लगाया, जिससे उसे आत्मिक सुख मिला और वह चिंता मुक्त होकर सो सकी।
  5. दूसरों की सेवा सच्ची खुशी देती है – बुढ़िया ने संत की सेवा की, पशु-पक्षियों का ध्यान रखा, पड़ोस की बच्चियों को हरि कथा सुनाई, जिससे उसके मन में संतोष और खुशी बनी रही।
  6. सुख-दुख हमारे विचारों पर निर्भर करते हैं – अगर हमारा मन शुद्ध और संतुष्ट रहेगा, तो हमें बाहरी परिस्थितियाँ परेशान नहीं करेंगी।
  7. सच्ची नींद और शांति अच्छे कर्मों से आती है – बुढ़िया को शांति से नींद आई क्योंकि उसने दिनभर अच्छे कर्म किए थे। जब मन में शांति और संतोष होता है, तब शरीर को भी आराम मिलता है।

निष्कर्ष:
“सच्चा सुख बाहरी चीजों में नहीं, बल्कि मन की शांति, संतोष और सत्कर्मों में है।”
इसलिए हमें धन और ऐशो-आराम की जगह अच्छे कर्मों, सेवा और भक्ति पर ध्यान देना चाहिए, जिससे हमें वास्तविक सुख और मानसिक शांति मिले।

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

धन, पुत्र, वही जो परमार्थ में लगे




एक सेठ बड़ा साधु सेवा भावी था। जो भी सन्त महात्मा नगर में आते वह उन्हें अपने घर बुला कर उनकी सेवा किया करता था।

एक बार एक महात्मा जी सेठ के घर आये। सेठानी महात्मा जी को भोजन कराने लगी। सेठ जी उस समय किसी काम से बाज़ार गये हुए थे।

भोजन करते करते महात्मा जी ने स्वाभाविक ही सेठानी से कुछ प्रश्न किये।

पहला प्रश्न यह था कि तुम्हारा बच्चे कितने हैं ?
सेठानी ने उत्तर दिया कि ईश्वर की कृपा से चार बच्चे हैं।
महात्मा जी ने दूसरा प्रश्न किया कि तुम्हारा धन कितना है?
उत्तर मिला कि महाराज! ईश्वर की अति कृपा है लोग हमें लखपति कहते हैं।
महात्मा जी जब भोजन कर चुके तो सेठ जी भी बाज़ार से वापिस आ गये और सेठ जी महात्मा जी को विदा करने के लिये साथ चल दिये।

मार्ग में महात्मा जी ने वही प्रश्न सेठ से भी किये जो उन्होंने सेठानी से किये थे।
पहला प्रश्न था कि तुम्हारे बच्चे कितने हैं?

सेठ जी ने कहा महाराज! मेरा एक पुत्र है। महात्मा जी दिल में सोचने लगे कि ऐसा लगता है सेठ जी झूठ बोल रहे हैं। इसकी पत्नी तो कहती थी कि हमारे चार बच्चे हैं और हमने स्वयं भी तीन-चार बच्चे आते-जाते देखे हैं और यह कहता है कि मेरा एक ही पुत्र है।

महात्मा जी ने दुबारा वही प्रश्न किया, सेठ जी तुम्हारा धन कितना है?

सेठ जी ने उत्तर दिया कि मेरा धन पच्चीस हज़ार रूपया है।

महात्मा जी फिर चकित हुए इसकी सेठानी कहती थी कि लोग हमें लखपति कहते हैं। इतने इनके कारखाने और कारोबार चल रहे हैं और यह कहता है मेरा धन पच्चीस हज़ार रुपये है।

महात्मा जी ने तीसरा प्रश्न किया कि सेठ जी! तुम्हारी आयु कितनी है?

सेठ ने कहा-महाराज मेरी आयु चालीस वर्ष की है महात्मा जी यह उत्तर सुन कर हैरान हुए सफेद इसके बाल हैं, देखने में यह सत्तर-पचहत्तर वर्ष का वृद्ध प्रतीत होता है और यह अपनी आयु चालीस वर्ष बताता है। सोचने लगे कि सेठ अपने बच्चों और धन को छुपाये परन्तु आयु को कैसे छुपा सकता है?

महात्मा जी रह न सके और बोले-सेठ जी! ऐसा लगता है कि तुम झूठ बोल रहे हो?

सेठ जी ने हाथ जोड़कर विनय की महाराज!

झूठ बोलना तो वैसे ही पाप है और विशेषकर सन्तोंं के साथ झूठ बोलना और भी बड़ा पाप है।

आपका पहला प्रश्न मेरे बच्चों के विषय में था। वस्तुतः मेरे चार पुत्र हैं किन्तु मेरा आज्ञाकारी पुत्र एक ही है। भक्ति भाव पूजा पाठ में लगा हुआ है मैं उसी एक को ही अपना पुत्र मानता हूँ। जो मेरी आज्ञा में नहीं रहते कुसंग के साथ रहते हैं वे मेरे पुत्र कैसे?

दूसरा प्रश्न आपका मेरा धन के विषय में था। महाराज! मैं उसी को अपना धन समझता हूँ जो परमार्थ की राह में लगे। मैने जीवन भर में पच्चीस हज़ार रुपये ही परमार्थ की राह में लगाये हैं वही मेरी असली पूँजी है। जो धन मेरे मरने के बाद मेरे पुत्र बन्धु-सम्बन्धी ले जावेंगे वह मेरा क्यों कर हुआ?

तीसरे प्रश्न में आपने मेरी आयु पूछी है। चालीस वर्ष पूर्व मेरा मिलाप एक
संत जी से हुआ था। उनकी सेवा चरण-शरण ग्रहण करके गुरु धारण किए मैं तब से भजन-अभ्यास और साधु सेवा कर रहा हूँ। इसलिये मैं इसी चालीस वर्ष की अवधि को ही अपनी आयु समझता हूँ।।

          कबीर संगत साध की, साहिब आवे याद।
          लेखे में सोई घड़ी, बाकी दे दिन बाद। ।

जब कभी सन्त महापुरुषों का मिलाप होता है-
उनकी संगति में जाकर मालिक की याद आती है,
वास्तव में वही घड़ी सफल है। शेष दिन जीवन के निरर्थक हैं।


कहते है की इस कहानी से ओर भी कई बातें सीखने को मिलती है। 🙏🏻👇🏻

  1. सच्चा पुत्र वही जो सही राह पर चले – केवल जन्म देने से कोई पुत्र नहीं होता, बल्कि जो माता-पिता की आज्ञा माने, अच्छे संस्कार अपनाए और धर्म के मार्ग पर चले, वही असली संतान कहलाने योग्य है।
  2. धन वही जो परमार्थ में लगे – जो धन दूसरों की सेवा, धर्म और भलाई के कार्यों में लगाया जाए, वही असली धन है। सांसारिक धन तो मृत्यु के बाद पीछे छूट जाता है, लेकिन नेक कार्यों में लगाया गया धन हमारे साथ जाता है।
  3. जीवन की वास्तविक आयु वही है जो भक्ति और सत्कर्म में बीती हो – असली उम्र वह नहीं जो जन्म से लेकर अब तक बीती हो, बल्कि वह समय मूल्यवान है जो भगवान की भक्ति, साधु संगति और अच्छे कर्मों में लगा हो।
  4. संतों और महापुरुषों की संगति जीवन को सार्थक बनाती है – जब हम संतों के साथ रहते हैं, तो हमें सही मार्गदर्शन मिलता है और हमारे जीवन का उद्देश्य स्पष्ट होता है।
  5. संसार की मोह-माया में फँसकर असली धन और असली रिश्तों को मत भूलो – यह संसार नश्वर है, लेकिन परोपकार, धर्म, और भक्ति अमर रहती है। इसलिए इनका महत्व समझना चाहिए।

  1. सच्चा सुख सेवा और भक्ति में है – जीवन का वास्तविक आनंद धन, परिवार और भौतिक सुखों में नहीं, बल्कि सेवा, संतोष और भक्ति में है।

निष्कर्ष:
“धन, पुत्र, और उम्र की असली परिभाषा वही है जो परमार्थ, सेवा और भक्ति से जुड़ी हो।”
हमें अपने जीवन को अच्छे कर्मों, सेवा और भगवान की भक्ति में लगाना चाहिए, क्योंकि यही सच्चा धन और असली पूँजी है।

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

धैर्य और सकारात्मकता की सीख




एक लड़का घर-परिवार, धन और पढ़ाई संबंधी समस्याओं से बहुत परेशान था। घर में रोज विवाद होता ।उम्र ज्यादा नहीं थी, लेकिन रोज़-रोज़ के विवादों ने उसे अंदर से तोड़ दिया था। निराशा में डूबा हुआ, उसे लगने लगा कि उसकी ज़िंदगी में कोई रास्ता नहीं बचा है।

समाधान की तलाश में परेशानी में वह एक घने जंगल में पहुंच गया। जंगल में दूर दूर तक भटकने के बावजूद उसके मन को शांति नहीं मिली। चारों ओर अंधेरा था, और जंगली जानवरों का खतरा भी था। तभी उसकी नजर एक छोटी-सी झोपड़ी पर पड़ी।

उसके मन में सवाल उठा—”इस सुनसान जंगल में भी ऐसे कौन रह सकता है?” जिज्ञासा से भरा, वह झोपड़ी की ओर बढ़ने लगा।

झोपड़ी के पास पहुँचते ही उसने एक संत को ध्यान की मुद्रा में बैठे हुए देखा। संत के चेहरे पर शांति और प्रसन्नता झलक रही थी। लड़का उनके पास जाकर बैठ गया।

संत ने स्नेहपूर्वक उसका परिचय पूछा। लड़के ने भारी मन से उत्तर दिया, “मैं जीवन में बहुत परेशान हूं और समझ नहीं आ रहा कि क्या करूं। इसीलिए समाधान में
यहाँ आया हूँ।”

संत तो संत थे ज्ञानी पुरुष, लड़के की पीड़ा तुरंत समझ गए। उन्होंने सहानुभूति से कहा, ” बेटा, समस्याएं तो जीवन का हिस्सा हैं। समय एक जैसा नहीं रहता, निराश नहीं होना चाहिए।”

इसके बाद वे लड़के से बोले तुम्हें में एक कहानी सुनाता हूं ध्यान से सुनो और बताओं कि कहानी का सार क्या है? लड़के ने हाँ मै सिर हिलाया!
संत नें कहानी सुनायी ।

“एक छोटे बच्चे ने अपने घर में बांस और कैक्टस के दो पौधे लगाए।”

बच्चा हर दिन दोनों पौधों को एक समान पानी देता और उनकी देखभाल करता। कुछ समय बाद कैक्टस का पौधा तो तेजी से बढ़ने लगा, लेकिन बांस का पौधा जरा भी नहीं बढ़ा।

समय बीतता गया, पर बांस के पौधे में कोई बदलाव नजर नहीं आया। लोलन फिर भी बच्चा निराश नहीं हुआ, उसने लगातार मेहनत जारी रखी।

फिर एक दिन अचानक बांस का पौधा तेजी से बढ़ने लगा और कुछ ही समय में कैक्टस से भी ऊंचा हो गया।

संत ने लड़के से कहा, बेटा जानते हो इसका राज…..
“बांस का पौधा पहले तो अपनी जड़े मजबूत कर रहा था, इसलिए उसे बढ़ने में समय लगा। लेकिन कभी भी निराश नहीं हुआ, उसने प्रयास जारी रखे।”

“हमारे जीवन में भी दो बातें जरूरी हैं—

  1. धैर्य और सकारात्मकता बनाए रखना। परिस्थितियाँ कैसी भी हों, आशा नहीं छोड़नी चाहिए।
  2. पहले अपनी जड़े मजबूत करें। जब हमारी नींव मजबूत होगी, तो जीवन में सफलता और संतोष भी तेजी से मिलेगा।”

संत की बातें सुनकर लड़के के चेहरे पर संतोष के भाव आ गये उसे बहुत बड़ा समाधान मिल चुका था। उसे अब एहसास हो गया था कि मुश्किलें स्थायी नहीं होतीं और धैर्य से काम लें तो जीवन बदल सकता है।

उसने नई सोच के साथ जीवन में आगे बढ़ने का निश्चय किया और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ अपने घर लौट गया।