Posted in हिन्दू पतन

गुजरात के अहमदाबाद में वंदे भारत ट्रैन में एक लैपटॉप चोरी होता है

जब रेलवे पुलिस जांच करती है तब CCTV में उन्हें एक व्यक्ति लैपटॉप का बैग ले जाता हुआ दिखता है

पुलिस ने जिस मोबाइल नंबर से सीट बुक हुई थी उस नंबर को सर्विलेंस पर डाल दिया

इसके बाद चोर की लोकेशन दिल्ली की आती है, फौरन पुलिस की एक टीम दिल्ली के लिए निकलती है और जब ये टीम वहां की लोकल पुलिस के साथ उस होटल में पहुंचती है तब हर्षित चौधरी बना हुआ ये व्यक्ति शराब पी रहा था

पुलिस जैसे ही इसे पकड़ती है तो यह कहता है कि मैं सेना में मेजर हूँ और यह बैग गलती से मेरे पास आ गया था सेना का नाम सुनकर पुलिस थोड़ा झिझकती है पर CCTV में यह व्यक्ति साफ साफ चोरी करता दिख रहा था तो पुलिस इसकी पूछताछ करना शुरू करती है तब यह सेना का एक फर्जी ID कार्ड पुलिस को देता है और बार बार अपना नाम हर्षित चौधरी बताता है

इसके बाद पुलिस इसकी ड्यूटी की जगह पूछती है और इसके बताये पोस्टिंग की जगह पर जब सेना से पता करती है तब असली खुलासा होता है वास्तव मे इस व्यक्ति का असली नाम मोहम्मद शाहबाज खान था जो फर्जी तौर पर सेना का मेजर हर्षित चौधरी बना हुआ था, इसकी पहचान नकली होने के साथ साथ काफी डॉक्युमेंट भी नकली थे

मोहम्मद शाहबाज खान अलीगढ़ का रहने वाला एक शादी शुदा व्यक्ति है जिसके 2 बच्चे भी थे, यह 2015 में सेना का सिपाही था मगर अनुशासन हीनता के चलते इसे फौज से निकाल दिया गया था और फिर ये चोरी चकारी करने लगा

अभी यह सब जांच चल ही रही थी कि पुलिस के पास इसके जब्त मोबाइल में एक महिला का फ़ोन आता है और उसके बाद एक हैरान करने वाला कांड और सामने आता है इस आदमी ने अपनी इस हिन्दू पहचान और मेजर की फर्जी पहचान के सहारे 100 से अधिक हिन्दू महिलाओं के साथ शादी डॉट कॉम के जरिये संपर्क किया जिसमें से 40 से 50 को ये आमने सामने मिल चुका था इसी नकली पहचान के साथ और उनमें से कई के लाखो रुपये लूट चुका था पुलिस ने खुलासा किया है कि बड़े घरों की नौकरीपेशा अब तक कम से कम 24 लड़कियों के साथ यह शारीरिक संबंध बना चुका है जबकि एक लड़की के साथ LJ करके इसने मंदिर में शादी कर ली और उसे अलीगढ़ के ही एक मकान में किराए पर रखा हुआ था

ये उसी लड़कीं का फ़ोन था जो खुद को इसकी पत्नी बता रही थी अब ये अहमदाबाद जेल में है और इससे कड़ी पूछताछ की जा रही है साथ मे यह भी जांच की जा रही है कि इसने और क्या क्या किया है इसने जिस लड़की से पहचान छुपा कर शादी की उसने भी इसके खिलाफ अलीगढ़ के ही एक थाने में FIR करवा दी है, उसने अपनी FIR में मारपीट, अप्राकृतिक फैक्स और LJ सहित धर्मांतरण के दबाव का मामला दर्ज करवाया है

इसके अलावा जो नकली पहचान इसने बनाई थी वह भरतपुर, राजस्थान के किसी हर्षित जादौन नाम के व्यक्ति की थी जिससे पुलिस ने संपर्क किया जिसके बाद अब उसने भी मोहम्मद शाहबाज खान पर FIR दर्ज करवा दी है इसके द्वारा कितनी महिलाओं का शोषण और किया गया है इसकी जांच अभी जारी है और यह संख्या बढ़ भी सकती है।

दो नम्बर के काम चोरी डकैती आतंक ओर हिन्दू  बहन बेटियो  की गिटनेपिंग जाल यही काम है इस कमाइली झुंड का।
समाज सतर्क रहें।
साभार

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*લિપિડ પ્રોફાઇલ*
ખૂબ સરસ રીતે સમજાવ્યું
એક જાણીતા ડોક્ટરે લિપિડ પ્રોફાઇલને એક અનોખી રીતે સમજાવતી સુંદર વાર્તા કહી.
કલ્પના કરો કે આપણું શરીર એક નાનું શહેર છે. આ શહેરમાં મુખ્ય સમસ્યા ઊભી કરનારા કોલેસ્ટ્રોલ છે. તેમના કેટલાક સાથીઓ પણ છે. મુખ્ય ગુનેગાર ટ્રિગ્લિસરાઈડ છે. તેમનું કામ શેરીઓમાં ફરવાનું, અરાજકતા ફેલાવવાનું અને રસ્તાઓ બ્લોક કરવાનું છે.
હૃદય આ શહેરનું કેન્દ્ર છે. બધા રસ્તાઓ હૃદય તરફ જાય છે. જ્યારે મુશ્કેલી ઊભી કરનારાઓની સંખ્યા વધે છે, ત્યારે તમને ખબર છે કે શું થાય છે. તેઓ હૃદયના કાર્યને વિક્ષેપિત કરવાનો પ્રયાસ કરે છે.
પરંતુ આપણા શરીરરૂપી શહેરમાં પોલીસ દળ પણ છે. એચડીએલ સારો પોલીસ છે જે મુશ્કેલી ઊભી કરનારાઓને પકડીને જેલમાં (યકૃત) મૂકે છે. યકૃત પછી તેમને ડ્રેનેજ સિસ્ટમ દ્વારા શરીરમાંથી બહાર કાઢી નાખે છે.
જો કે, એક ખરાબ પોલીસ પણ છે, એલડીએલ, જે સત્તાનો ભૂખ્યો છે. એલડીએલ મુશ્કેલી ઊભી કરનારાઓને જેલમાંથી છોડી દે છે અને તેમને ફરીથી શેરીઓમાં મૂકી દે છે.
જ્યારે સારા પોલીસ એચડીએલની સંખ્યા ઓછી થઈ જાય છે, ત્યારે શહેરમાં અરાજકતા ફેલાઈ જાય છે. આવા શહેરમાં રહેવાનું કોને ગમશે?
શું તમે મુશ્કેલી ઊભી કરનારાઓને ઘટાડવા અને સારા પોલીસોને વધારવા માંગો છો?
ચાલવાનું શરૂ કરો! દરેક પગલા સાથે, સારા પોલીસ એચડીએલ વધશે, અને મુશ્કેલી ઊભી કરનારા કોલેસ્ટ્રોલ, ટ્રિગ્લિસરાઈડ અને એલડીએલ ઘટશે.
તમારું શહેર (શરીર) તેની જીવંતતા ફરીથી પ્રાપ્ત કરશે. તમારું હૃદય, શહેરનું કેન્દ્ર, મુશ્કેલી ઊભી કરનારાઓના બ્લોકેડ (હાર્ટ બ્લોક) થી સુરક્ષિત રહેશે. અને જ્યારે તમારું હૃદય સ્વસ્થ હશે, ત્યારે તમે પણ સ્વસ્થ રહેશો.
તેથી, જ્યારે પણ તમને તક મળે ત્યારે ચાલવાનું શરૂ કરો!
સ્વસ્થ રહો…અને
સારું સ્વાસ્થ્ય રાખો
આ મુખ્યત્વે ચાલવાથી સારા એચડીએલને વધારવા અને ખરાબ એલડીએલને ઘટાડવા માટેનો એક સારો લેખ છે. *દરેક ચાલવાનું પગલું એચડીએલ વધારશે. તેથી, ચાલો, ચાલો અને ચાલો. હેપી સિનિયર સિટિઝન્સ વીક

*ઘટાડો:*
* મીઠું.
* ખાંડ.
* બ્લીચ કરેલો લોટ.
* ડેરી ઉત્પાદનો.
* પ્રોસેસ્ડ ઉત્પાદનો.

*જરૂરી ખોરાક:*
* શાકભાજી;
* કઠોળ;
* બીન્સ;
* બદામ;
* ઇંડા;
* કોલ્ડ પ્રેસ્ડ ઓઇલ (ઓલિવ, કોકોનટ, …)
* ફળો.

ત્રણ વસ્તુઓ જે તમારે ભૂલવાનો પ્રયાસ કરવો જોઈએ:
* તમારી ઉંમર.
* તમારો ભૂતકાળ.
* તમારી ફરિયાદો.

જરૂરી વસ્તુઓ જે તમારે જાળવવી જોઈએ:
* તમારું કુટુંબ;
* તમારા મિત્રો;
* તમારા સકારાત્મક વિચારો;
* એક સ્વચ્છ અને આવકારદાયક ઘર.

ત્રણ મૂળભૂત વસ્તુઓ જે તમારે અપનાવવી જોઈએ:
* હંમેશાં હસો / હસો.
* તમારી પોતાની ગતિએ નિયમિત શારીરિક પ્રવૃત્તિ કરો.
* તમારા વજનને તપાસો અને નિયંત્રિત કરો.
છ આવશ્યક જીવનશૈલી જે તમારે અનુસરવાની જરૂર છે:
* જ્યાં સુધી તમને તરસ ન લાગે ત્યાં સુધી પાણી પીવાની રાહ જોશો નહીં.
* જ્યાં સુધી તમે થાકી ન જાઓ ત્યાં સુધી આરામ કરવાની રાહ જોશો નહીં.
* જ્યાં સુધી તમે બીમાર ન પડો ત્યાં સુધી તબીબી તપાસ કરાવવાની રાહ જોશો નહીં.
* ભગવાન પર વિશ્વાસ કરવા માટે ચમત્કારોની રાહ જોશો નહીં.
* તમારા પોતાનામાં વિશ્વાસ ક્યારેય ગુમાવશો નહીં.
* સકારાત્મક રહો અને હંમેશાં આવતીકાલ માટે વધુ સારી આશા રાખો …
જો તમારી પાસે આ વય શ્રેણી (47-90 વર્ષ) માં મિત્રો હોય, તો કૃપા કરીને આ તેમને મોકલો.
🌹હેપી સિનિયર સિટિઝન્સ વીક 🎉 તમે જાણો છો તે દરેક સારા સિનિયર સિટિઝનને મોકલો.
ભગવાન તમને ખૂબ આશીર્વાદ આપે 🙏
-એક ડોક્ટર

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भक्त की लाज


भक्त की लाज बचाने के लिए भगवान् मालिश करने स्वयं आयें🙏🙏*
भक्तों की महिमा अनन्त है | हजारों ही ऐसे भक्त हैं जिन्होंने परमात्मा का नाम जप कर भक्ति करके संसार में यश कमाया | ऐसे भक्तों में “सैन भगत जी” का भी नाम आता है | वह जाति से नाई थे |
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सैन जी के समय में भक्ति की लहर का जोर था | भक्त मंडलियाँ काशी व अन्य स्थानों में बन चुकी थी | भक्त मिलकर सत्संग किया करते थे |
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सैन नाई जी एक राजा के पास नौकर थे| वह सुबह जाकर मालिश व मुठी चापी किया करते थे | एक दिन संत आ गए | सारी रात कीर्तन होना था | प्रभु भक्ति में सैन जी इतने मग्न थे कि उन्हें राजा के पास जाने का ख्याल ही न रहा | संत सारी रात कीर्तन करते रहे |
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राजा ने सुबह उठना था और उसकी सेवा होनी थी | अपने भक्त की लाज रखने के लिए भक्तों के रक्षक ईश्वर को सैन जी का रूप धारण करके राजा के पास आना पड़ा | भगवान् ने राजा की सेवा इतनी श्रद्धा के साथ की कि राजा प्रसन्न हो गया
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प्रसन्न होकर उसने अपने गले का हार उतार कर सैन जी के भ्रम में भगवान् को दे दिया | भगवान् मुस्कराए और हार ले लिया | अपनी माया शक्ति से उन्होंने वह हार सैन जी के गले में डाल दिया और उनको पता तक न लगा | प्रभु भक्तों के प्रेम में ऐसा बन्ध जाता कि वश में होकर कहीं नहीं जाता |
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सुबह हुई | सैन जी को होश आया कि वह महल में नहीं गए तो राजा नाराज़ हो जाएगा | यह सोच कर वह महल की तरफ चल पड़े | आगे राजा बाधवगढ़ अपने महल में टहल रहा था |
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उसने स्नान करके नए वस्त्र पहन लिए थे | सैन उदासी के साथ राजा के पास पहुँचा तो राजा ने पूछा, सैन ! अब फिर क्यों आए ? क्या किसी और चीज़ की जरूरत है ? आज तुम्हारी सेवा से हम बहुत खुश हुए हैं |
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सैन ने सोचा कि राजा मेरे से नाराज़ है | उसने कांपते हुए बिनती की, महाराज ! क्षमा कीजिए, मैं नहीं आ सका | भक्त जन आ गए थे तो रात भर कीर्तन होता रहा |
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यह बात सुनकर राजा बहुत हैरान हुआ | उसने कहा- आज तुम्हें क्या हो गया है, यह कैसी बातें कर रहे हो, मेरे पास तुम समय पर आए | सोए को उठाया, नाख़ून काटे, मालिश की, स्नान करवाया, कपड़े पहनाए तथा मैंने प्रसन्न होकर अपना हार उतारकर तुझे दिया | वह हार आज तुम्हारे गले में है |
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सैन ने देखा उसके गले में सचमुच ही हार था | उस समय उसे ज्ञान हुआ तथा राजा को कहने लगा, यह सत्य है महाराज ! मैं नहीं आया | मैं जिसकी भक्ति कर रहा था, उसने स्वयं आकर मेरा कार्य किया | यह माला आपने भगवान के गले में डाल दी थी और भगवान अपनी शक्ति से मेरे गले में डाल गए | यह तो प्रभु का चमत्कार है |
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यह सुनकर राजा बहुत हैरान हुआ | वह सैन जी चरणों में नतमस्तक होकर कहने लगा, भक्त जी ! अब आपको राज्य की तरफ से खर्च मिला करेगा अब आप बैठकर भक्ति किया करें | ऐसे हुए भक्त सैन नाई जी

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संत की शरण



एक गांव में एक ठाकुर थे।
उनके यहां एक नौकर काम करता था.. जिसके कुटुंब में बीमारी की वजह से कोई आदमी नहीं बचा।
केवल नौकर का लड़का रह गया। वह ठाकुर के घर काम करने लग गया..
रोजाना सुबह वह बछड़े चराने जाता था.. और लौटकर आता तो रोटी खा लेता था। ऐसे समय बीतता गया।

एक दिन दोपहर के समय वह बछड़े चरा कर आया तो ठकुरानी की नौकरानी ने उसे ठंडी रोटी खाने के लिए दे दी।
उसने कहा कि थोड़ी सी छाछ या रबड़ी मिल जाए तो ठीक है।
नौकरानी ने कहा कि, जा जा तेरे लिए बनाई है रबड़ी, जा ऐसे ही खा ले नहीं तो तेरी मर्जी।
उस लड़के के मन में गुस्सा आया कि, मैं धूप में बछड़े चरा कर आया हूं, भूखा हुँ..
पर मेरे को बाजरे की सूखी रोटी दे दी.. रबड़ी मांगी तो तिरस्कार कर दिया..
वह भूखा ही वहां से चला गया।
गांव के पास में एक शहर था.. उस शहर में संतों कि एक मंडली आई हुई थी.. वह लड़का वहां चला गया। संतों ने उसको भोजन कराया और पूछा कि तेरे परिवार में कौन हैं।
उसने कहा कि कोई नहीं है..
संतों ने कहा तू भी साधु बन जा.. लड़का साधु बन गया।
संतों ने ही उसके पढ़ने की व्यवस्था काशी में कर दी.. वह पढ़ने के लिए काशी चला गया वहां पढ़कर वह विद्वान हो गया।
फिर कुछ समय बाद उसे महामंडलेश्वर महंत बन दिया गया।
महामंडलेश्वर बनने के बाद एक दिन उसको उसी शहर में आने का आमंत्रण मिला..
वह अपनी मंडली लेकर वहां आये..
जिनके यहाँ वह बचपन में काम करते थे, वे ठाकुर बूढ़े हो गए थे।
वह ठाकुर जी भी शहर में उनका सत्संग सुनने आए.. उनका सत्संग सुना और प्रार्थना की कि महाराज.. एक बार हमारी कुटिया में पधारो जिससे हमारी कुटिया पवित्र हो जाए !
महामंडलेश्वर जी ने उसका निमंत्रण स्वीकार कर लिया..
महामंडलेश्वर जी अपनी मंडली के साथ ठाकुर के घर पधारे।
भोजन के लिए पंक्ति बैठी, भोजन मंत्र का पाठ हुआ.. फिर सबने भोजन करना आरंभ किया।
महाराज के सामने तख़्त लगाया गया, और उस पर तरह-तरह के भोजन के पदार्थ रखे हुए थे।
अब ठाकुर जी महाराज के पास आए साथ में नौकर था जिसके हाथ में हलवे का पात्र था।
ठाकुर साहब प्रार्थना करने लगा कि महाराज कृपा करके थोड़ा सा हलवा मेरे हाथ से ले लो।
महाराज को हंसी आ गई..
ठाकुर ने पूछा कि आप हँसे कैसे ?
महाराज बोले कि, मेरे को पुरानी बातें याद आ गई इसलिए हंसा।
ठाकुर साहब बोले महाराज यदि हमारे सुनने लायक बात हो तो हमें भी बताइए।
महाराज ने सब संतो से कहा कि, भाई थोड़ा ठहर जाओ बैठे रहो, ठाकुर बात पूछता है, तो बताता हूं..

महाराज ने ठाकुर से पूछा कि, आपके कुटुंब में एक नौकर का परिवार रहा करता था उस परिवार में अब कोई है क्या ?

ठाकुर बोले कि, केवल एक लड़का था.. और हमारे यहाँ उसने कई दिन बछड़े चराए.. फिर ना जाने कहाँ चला गया।

बहुत दिन हो गए फिर कभी उसको देखा नहीं।

महाराज बोले, कि मैं वही लड़का हूं। पास के शहर में संत-मंडली ठहरी हुई थी। मैं वहां चला गया।

पीछे काशी चला गया वहां पढ़ाई की और फिर महामंडलेश्वर बन गया।

यह वही आंगन है जहां आपकी नौकरानी ने मेरे को थोड़ी सी रबड़ी देने के लिए भी मना कर दिया था।

अब मैं भी वही हुँ, आंगन भी वही है.. आप भी वही हैं..

पर अब आप अपने हाथों से मोहनभोग दे रहे हैं.. कि महाराज कृपा करके थोड़ा सा मेरे हाथ से ले लो !

मांगे मिले ना रबड़ी, करूं कहां लगी वरण।
मोहनभोग गले में अटक्या, आ संतों की शरण।।

सन्तो की शरण लेने मात्र से इतना हो गया कि जहां रबड़ी नहीं मिलती थी वहां मोहनभोग भी गले में अटक रहे हैं..

अगर कोई भगवान् की शरण ले ले, तो वह संतों का भी आदरणीय हो जाए..

लखपति करोड़पति बनने में सब स्वतंत्र नहीं हैं.. पर भगवान् की शरण होने में भगवान् का भक्त बनने में सब के सब स्वतंत्र हैं..
और ऐसा मौका इस मनुष्य जन्म में ही है।।

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સુખ દુખ ની ગતી


ગામડામાં રહેતા એક ખેડુત પાસે એક જાતવાન ઘોડો હતો. આખા પંથકમાં બધા એના આ ઘોડાના ખુબ વખાણ કરતા. કેટલાય ઘોડેસ્વારો આ ઘોડાના મો માંગ્યા દામ આપવા તૈયાર હતા પરંતું ખેડુત ઘોડો વેંચવા માંગતો નહોતો કારણકે એ ઘોડાને ખુબ પ્રેમ કરતો હતો.

એકદિવસ સવારે જાગીને એણે જોયુ તો એનો ઘોડો ગાયબ હતો. એણે ઘોડાને શોધવાના ખુબ પ્રયાસ કર્યા પણ ઘોડો ન મળ્યો. ગામના લોકોએ આ ખેડુતને કહ્યુ , “ ભાઇ, તમારા નસીબ ખરાબ છે કે તમારો જાતવાન ઘોડો ચોરાઇ ગયો.” ખેડુતે ગામ લોકોને કહ્યુ , “ મારા નસીબ ખરાબ છે કે સારા એ નક્કી કરનારો હું કે તમે કોણ ? કુદરતના આયોજનને સમજી શકવા માટે આપણે કોઇ સક્ષમ નથી.”

ગામ લોકો તો અંદરો અંદર વાતો કરતા જતા રહ્યા કે “ આ ડોહાનું ચસકી ગયુ છે એનો ઘોડો જતો રહ્યો એના આઘાતમાં આવી વાતો કરે છે.”. થોડા દિવસ પછી ઘોડો પાછો આવ્યો અને એની સાથે બીજા 10 જંગલી ઘોડાને લાવ્યો. ગામ લોકોને આ સમાચાર મળ્યા એટલે બધા ખેડુતને મળવા આવ્યા અને કહ્યુ , “ તમે તે દિવસે સાચુ કહેતા હતા. તમારા નસિબ ખરાબ નહી સારા છે અને એટલે આ ઘોડો બીજા 10 ઘોડાને પોતાની સાથે લાવ્યો છે.” ખેડુતે કહ્યુ, “ તમે હજુ તમે મારી વાત ને સમજી શક્યા નથી. આ ઘટના મારા સારા નસિબ છે એમ પણ ન કહી શકાય.”

થોડા દિવસ બાદ નવા આવેલા જંગલી ઘોડાને તાલીમ આપતી વખતે ખેડુતનો એકનો એક યુવાન દિકરો ઘોડા પરથી પડ્યો અને એના હાથ-પગ ભાંગી ગયા. ખેડુતનો એકમાત્ર આધાર પથારીવશ થઇ ગયો. ગામલોકો ખબર કાઢવા આવ્યા અને કહ્યુ , “ તમારી વાત બીલકુલ સાચી હતી. આ જંગલી ઘોડાઓ આવ્યા તે તમારા સારા નસિબ નહોતા જો ઘોડા ના આવ્યા હોત તો તમારો દિકરો સાવ સાજો નરવો હોત.તમારા નસિબ ખરાબ કે દિકરો ખાટલે પડ્યો.” ખેડુતે દુ:ખી થતા કહ્યુ , “ ભાઇઓ દિકરાના હાથપગ ભાંગ્યા તો એ મારા ખરાબ નસિબ છે એમ પણ ન કહેવાય કારણકે કુદરતના કાર્યનો તાગ કાઢવો મુશ્કેલ છે.”

થોડા સમય પછી યુધ્ધ જાહેર થયુ. સરકારના માણસો ગામમાં આવીને બધા જ યુવાનોને યુધ્ધમાં લડાઇ કરવા માટે ફરજીયાત લઇ ગયા પણ આ ખેડુતના દિકરાને છોડી દીધો કારણકે એ તો લડી શકે તેમ હતો જ નહી. ગામલોકો ફરી આ ખેડુતની ઘરે ગયા અને કહ્યુ , “ તમારા નસિબ સારા છે કે તમારા દિકરાના હાથપગ ભાંગ્યા કમસેકમ આ છોકરો તમારી નજર સામે તો છે.” ખેડુત ખડખડાટ હસવા લાગ્યો.

જીવનમાં આવતા ચડાવ ઉતાર જીવન આપનારાએ ગોઠવેલા છે. જીવનમાં બનતી જુદી-જુદી ઘટના વખતે ‘ મારા નસિબ સારા છે’ કે ‘મારા નસિબ ખરાબ છે’ નો હર્ષ-શોક કરવાને બદલે કુદરતે નક્કી કરેલા પ્રવાહમાં જીવનનૌકાને મુકત રીતે વહેતી મુકવામાં આવે તો એની મજા કંઇક જુદી જ છે

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बहू



सर्दी बढ़ती जा रही थी। सरिता जी कई दिनों से गोंद के लड्डू बनाने की सोच रही थीं। अभी आटा भूनकर चुकी ही थीं कि डोरबेल बजी। दरवाजा खोला तो उनकी पड़ोसन थीं। घर में प्रवेश करते ही पड़ोसन आशा जी ने कहा,

‘घी की खुशबू से घर महक रहा है।’

‘हां, गोंद के लड्डू बना रही हूं। सर्दी में खाने ही चाहिए।’ सरिता जी ने कहा।

आशा जी रसोई में ही पहुंच गई थीं, बोलीं, ‘अरे! इतना आटा और गोंद। इससे तो 2 किलो बन जाएंगे। आप दोनों के लिए बहुत ज्यादा हैं। पड़ोस में बांटने हैं क्या?

‘हां, ज्यादा हैं, पर दोनों बेटों के घर भेज दूंगी। दोनों बहुओं कौ नौकरी में फुर्सत कहां मिलती है ?….. फिर मुझे तो सारा सामान इकट्ठा करना ही है, थोड़ा ज्यादा सही। जब तक बना सकते हैं, बच्चों को बनाकर खिलाते रहें। बड़ा संतोष मिलता है।
मेरी बहुएं तो कहती हैं कि आप खिला रही हो तो घर की गुझिया, मठरी, गोंद और तिल के लड्डू और अनेक तरह के अचार सब स्वाद से खा रहे हैं। हम लोग तो रोज का खाना बनाने में ही थक जाते हैं।

आशाजी अपनी बहुओं की शिकायत करके मन हल्का करने आई थीं, लेकिन यहां तो उल्टी गंगा बह रही थी। वे तो अपनी बहुओं से आशा करती थीं कि अब वे आएं तो कुछ बना कर लाएं। उन्हें समझ में आ गया कि क्यों उनकी बहुएं ससुराल आने से बचती हैं। अभी तो उनकी उम्र ही क्या है, जो वे बहुओं से सेवा की अपेक्षा करने लगीं। उन्हें सबक मिल गया था कि मां के हाथ के व्यंजन बेटे-बहू के जीवन में ही नहीं, रिश्तों में भी रस घोल देते हैं। उन्होंने भी निश्चय किया कि वे भी सरिता जी की तरह अपने परिवार में प्यार और खुशियों का अमृत ही बांटेंगी, शिकायतों का जहर नहीं। आखिर इतना तो वे भी कर ही सकती हैं… पर कभी सोचा ही नहीं।

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अभिमान


एक कलाकार फिल्मी दुनिया में स्टार बनने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहा था। उसके इस काम में पूरा परिवार सहयोग कर रहा था। एक भाई उसकी पब्लिसिटी करने में लगा था, तो बहन उसके कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने में लगी थी। इस प्रकार पूरा परिवार उसे सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ाने में लगा था। वह दिन भी आ गया जब उसकी पहली फिल्म हिट हो गई। वह रातों रात बुलंदियों के शिखर पर पहुंच गया। स्टार बनते ही वह अपनी दुनिया में मस्त हो गया। वह अपने परिवार के लोगों को उपेक्षा की दृष्टि से देखने लगा। वह समझ गया था कि अब उसे किसी की सहायता की आवश्यकता नही!
वह स्वयं ख्याति के शिखर पहुंच जाएगा। उसका परिवार उसके लिए बोझ बन गया था। उसे इस बात का अभिमान हो गया था कि परिवार के लोग उसकी प्रतिभा की बदौलत ही अपना पेट पाल रहे हैं। उसने परिवार के लोगों को स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि वे लोग कोई दूसरा काम ढूंढ लें। उस पर आश्रित न रहें।

इस प्रकार उसने परिवार के लोगों से दूरी बना ली। उसे अपनी कला पर घमंड हो गया और उसके अभिनय का स्तर पहले जैसे नहीं रहा। दर्शक उसके अभिनय को नकारने लगे। सफलता की सीढ़ियां चढ़ने के बजाय उसके गर्दिश के दिन आ गए। उसे काम मिलना बंद हो गया। एक दिन ऐसा भी आया जब वह गुमनामी के अंधकार में खो गया।

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अकेला मास्टर ही दोषी क्यों ?‼️



10 मिनट लेट हो जाने पर मास्टरों पर ऊँगली उठाने वाले लोग यह बताएं कि किस अधिकारी के कार्यालय में जाने पर आपको उसके आने का घंटो इन्तजार नहीं करना पड़ता? किस कार्यालय में जाने के बाद आपको यह सुनने को नहीं मिलता कि साहब आज नहीं हैं ? हफ्तों इन्तजार करने के बाद जब साहब के किसी दिन आने की सूचना मिलती है तो आप समय से कार्यालय पहुँच जाते हैं और 12 बजे तक साहब के आने का इंतजार करते हैं, जब साहब गाड़ी से उतरते हैं तो रस्ता छोड़कर झुककर हाथ जोड़कर उनके सम्मान में अपना सम्मान गिरवी रखते हैं।

फिर साहब आसन ग्रहण करते हैं, और आप अपनी बारी का इंतजार, बारी आने पर हाथ जोड़कर जी हुजूर, जी हुजूर कहते हुए काँपते हाथों से अपनी फरियाद सुनाते हैं कि साहब कुछ दया कर दें। आधी अधूरी फरियाद सुनने के बाद साहब आपको जाने का हुक्म देते हैं और लौटते समय आप हाथ जोड़कर 3 बार झुक झुककर सलामी ठोंकते हैं, इस उम्मीद में कि साहब एक बार आपकी सलामी स्वीकार कर लें। लेकिन साहब कोई जवाब नहीं देते और उनका अर्दली आपको धकियाते हुए कहता है कि चलिये अब बाहर निकलिये ।

इतनी दीनता दिखाने के बाद और इतना सम्मान पाने के बाद आप खुशी-खुशी घर जाते हैं कि आज साहब मिल तो गये और उनसे बात हो गयी।

यही लोग स्कूल में आकर शेर बनते हैं और उस मास्टर के सामने अपना पराक्रम दिखाते हैं, जो उनके बच्चों का भविष्य संवारने के लिये गेंहू तक पिसवाकर रोटी खिलाता है। हाथ पकड़कर लिखना सिखाता है। डर से आँसू निकलने पर आपके बच्चे को गोदी में बैठाकर आँसू तक पोछता है। गली में जुआ खेलते दिख जाने पर आपके बच्चे को डाँटता भी है, और ऐसे शिक्षक पर आपको धौंस जमाते हुए तनिक भी लज्जा नहीं आती।

आपके बच्चे को डाँट देने पर आप स्कूल में सवाल करने चले आते हैं कि ‘मास्टर’… तुमने मेरे बच्चे को डाँटा क्यों ? भले ही आप किसी पुलिस वाले से अक्सर बिना वजह डाँट खाते रहते हों। उनसे तो बिन गलती लाठी खाने पर भी आप माफी मांगने लगते हैं, किन्तु मास्टर द्वारा अनुशासन बनाये रखने के लिए दी गयी डॉट पर भी आपको जवाब चाहिए।

आप ये क्यों भूल जाते हैं कि जब आप अपने बच्चे का रोना सुनकर उसकी पैरवी करने स्कूल आते हैं, तो उसी समय आपके बच्चे के मन से अनुशासन के नियमों का भय निकल जाता है और वह और भी अनुशासनहीन हो जाता है। उसके मन से दंड का भय निकल जाता है, और वह और भी उद्दंड हो जाता है। वह ये सोचने लगता है कि गलती करने पर उसके पापा उसका पक्ष लेंगे इसलिए गुरुजी से डरने की जरूरत नहीं। फिर तो वह स्कूल का कोई भी कार्य न करेगा। आप अपने बच्चे की पढ़ाई चाहते हैं या उसकी स्वच्छन्दता ?

कानून का भय यदि समाप्त हो जाय तो हर कोई कानून का उल्लंघन करने लगेगा, ठीक उसी प्रकार यदि अनुशासन का भय यदि खत्म हो जाय तो बच्चा स्वच्छन्द हो जाएगा। विद्यालय की शैक्षिक व्यवस्था खतरे में पड़ जाएगी। ये हमारा दुर्भाग्य है कि बेसिक में पढ़ने वाले कई बच्चों के माता-पिता अनुशासन के महत्त्व से बिलकुल अनजान हैं और हर दंड को नकारात्मक ही लेते हैं।

जबकि गोस्वामी तुलसीदास ठीक ही लिखा है- ‘भय बिन होय न प्रीति।’ भय बिना अनुशासन भी सम्भव नहीं है और बिन अनुशासन शिक्षक छात्र सम्बन्धों की कल्पना बेमानी सी होगी।

आप अपने परिवार को ही लीजिये, क्या आप बच्चे की गलती पर उसे दंड नहीं देते ? समझाने का असर एक सीमा तक ही होता है, वो भी हर एक पर असर भी नहीं करता । दंड का आशय सदैव उत्पीड़न नहीं होता, विद्यालय में तो हरगिज नहीं। विद्यालय में दंड का आशय अनुशासन स्थापित करने से होता है। यहाँ दंड का आशय पिटाई से न लगाएँ।

शिक्षक को सदैव खुशी होती है जब उसका कोई शिष्य उससे भी आगे निकलता है और इसी उद्देश्य से वह शिक्षा भी देता है कि उसका प्रत्येक शिष्य सफल हो। इसलिए आप शिक्षक के कार्यों का छिद्रान्वेषण न करें, न ही उस पर शंका।

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गुरु की महिमा


एक संत के पास 30 सेवक रहते थे ।एक सेवक ने गुरुजी के आगे अरदास की महाराज जी  मेरी बहन की शादी है तो आज एक महीना रह गया है तो मैं दस दिन के लिए वहां जाऊंगा ।   कृपा करें ! आप भी साथ चले तो अच्छी बात है ।  गुरु जी ने कहा बेटा देखो टाइम बताएगा ।  नहीं तो तेरे को तो हम जानें ही देंगे उस सेवक ने बीच-बीच में इशारा गुरु जी की तरफ किया कि गुरुजी कुछ ना कुछ मेरी मदद कर दे !  आखिर वह दिन नजदीक आ गया सेवक ने कहा गुरु जी कल सुबह जाऊंगा मैं । गुरु जी ने कहा ठीक है बेटा !

सुबह हो गई जब सेवक जाने लगा तो गुरु जी ने उसे 5 किलो अनार दिए और कहा ले जा बेटा भगवान तेरी बहन की शादी खूब धूमधाम से करें दुनिया याद करें कि ऐसी शादी तो हमने कभी देखी ही नहीं और साथ में दो सेवक भेज दिये जाओ तुम शादी पूरी करके आ जाना ।  जब सेवक घर से निकले 100 किलोमीटर गए तो मन में आया जिसकी बहन की शादी थी वह सेवक से बोला गुरु जी को पता ही था कि मेरी बहन की शादी है और हमारे पास कुछ भी नहीं है फिर भी गुरु जी ने मेरी मदद नहीं की ।  दो-तीन दिन के बाद वह अपने घर पहुंच गया । 
उसका घर राजस्थान रेतीली इलाके में था वहां कोई फसल नहीं होती थी । 
वहां के राजा की लड़की बीमार हो गई तो वैद्यजी ने बताया कि इस लड़की को अनार के साथ यह दवाई दी जाएगी तो यह लड़की ठीक हो जाएगी ।  राजा ने मुनादी करवा रखी थी अगर किसी के पास अनार है तो राजा उसे बहुत ही इनाम देंगे ।  इधर मुनादी वाले ने आवाज लगाई अगर किसी के पास अनार है तो जल्दी आ जाओ, राजा को अनारों की सख्त जरूरत है । जब यह आवाज उन सेवकों के कानों में पड़ी तो वह सेवक उस मुनादी वाले के पास गए और कहा कि हमारे पास अनार है, चलो राजा जी के पास । राजाजी को अनार दिए गए अनार का जूस निकाला गया और लड़की को दवाई दी गई तो लड़की ठीक-ठाक हो गई ।

राजा जी ने पूछा तुम कहां से आए हो, तो उसने सारी हकीकत बता दी तो राजा ने कहा ठीक है  तुम्हारी बहन की शादी मैं करूंगा ।  राजा जी ने हुकुम दिया ऐसी शादी होनी चाहिए कि लोग यह कहे कि यह राजा की लड़की की शादी है सब बारातियों को सोने चांदी गहने के उपहार दिए गए बरात की सेवा बहुत अच्छी हुई लड़की को बहुत सारा धन दिया गया । 
लड़की के मां-बाप को बहुत ही जमीन जायदाद व आलीशान मकान और बहुत सारे  रुपए पैसे दिए गए ।  लड़की भी राजी खुशी विदा होकर चली गई । अब सेवक सोच रहे हैं कि गुरु की महिमा गुरु ही जाने ।  हम ना जाने क्या-क्या सोच रहे थे गुरु जी के बारे में ।   गुरु जी के वचन थे जा बेटा तेरी बहन की शादी ऐसी होगी कि दुनियां देखेगी।संत वचन हमेशा सच होते हैं ।

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दाम्पत्य


मेरी पत्नी मेरे बगल में सो रही थी… और मैं फेसबुक पर लाॅग इन ही हुआ था कि अचानक मुझे एक सूचना मिली, एक महिला ने मुझे उसे जोड़ने के लिए कहा। मैंने मित्र अनुरोध स्वीकार कर लिया और एक संदेश भेजकर पूछा, “क्या हम एक दूसरे को जानते हैं?”
उसने जवाब दिया: “मैंने सुना है कि तुम्हारी शादी हो गई है लेकिन मैं अब भी तुमसे प्यार करती हूँ।”
वह अतीत से एक दोस्त थी। तस्वीर में वह बेहद खूबसूरत लग रही थीं। मैंने चैट बंद की और अपनी पत्नी की ओर देखा, वह दिन भर की थकान के बाद गहरी नींद सो रही थी।
उसे देखकर मैं सोच रहा था कि वह इतनी सुरक्षित कैसे महसूस करती है कि वह मेरे साथ बिल्कुल नए घर में इतने आराम से सो सकती है।
वह अपने माता-पिता के घर से बहुत दूर है, जहां वह 24 घंटे अपने परिवार से घिरी रहती थी। जब वह परेशान या उदास होती थी तो उसकी मां वहां होती थी ताकि वह उनकी गोद में रो सके। उसकी बहन या भाई चुटकुले सुनाते थे और उसे हंसाते थे। उसके पिता घर आते थे और उसे वह सब कुछ देते थे जो उसे पसंद था और फिर भी, उसने मुझ पर इतना भरोसा किया।
ये सारे विचार मेरे मन में आए तो मैंने फोन उठाया और “ब्लॉक” दबा दिया।
मैं उसकी ओर मुड़ा और उसके बगल में सो गया।