आदमी अपने भीतर के रडार, जो कि उसका दिल है, के माध्यम से चीजों को चुनता या अपने निर्णय लेता है।
एक बार एक युवा नवविवाहित दंपत्ति दूर एक छोटे से खेत में रहते थे। वे गरीब थे और उन दोनों के पास अपनी आजीविका कमाने का कोई साधन नहीं था।
एक दिन उस नवविवाहित पुरुष ने उस खेत को छोड़ कर कहीं दूर जाकर नौकरी खोजने की सोची।
उसने अपनी पत्नी से कहा- “प्रिय, मैं पैसे कमाने के लिए कहीं दूर जाना चाहता हूँ और मैं वादा करता हूँ कि वहाँ से बहुत सारा पैसा कमा के लौटूंगा, ताकि हम उन सभी सुख-सुविधाओं के साथ रह सकें, जिनके हम हकदार हैं। मुझे नहीं पता कि मैं कब तक आऊँगा, लेकिन कृपया मेरी प्रतीक्षा करना और मेरे प्रति वफादार रहना और मैं भी आपके प्रति वफादार रहूँगा।”
अब, वह युवक काम की तलाश में दूर-दूर के कई गाँवों और शहरों में जाता है। तब एक गाँव में उसे एक सेठ मिलता है जो काम के लिए एक मेहनती व्यक्ति की तलाश में था। वह युवा उस सेठ के साथ काम करने की इच्छा ज़ाहिर करता है और वह सेठ भी आसानी से उसे अपने पास काम करने के लिए रख लेता है। हालाँकि, अपना काम शुरू करने से पहले, वह युवा अपनी कुछ शर्तें रखता है, “जब तक मैं चाहूँगा, तभी तक मैं काम करूँगा और जब भी मुझे लगेगा कि मुझे घर जाना है, तो कृपया मुझे मेरे कर्तव्यों से मुक्त कर दें। मैं अपने काम के समय के दौरान कोई वेतन नहीं लूँगा। जब तक मैं आपके पास काम करता हूँ, मेरे वेतन को आप अपने पास सम्भाल कर रखें। जिस दिन मैं जाऊँगा, कृपया उस दिन आप मेरे सारे पैसे मुझे सौंप देना।”
सेठ उस युवक की सभी शर्तों से सहमत हो गया। युवक ने लगन से काम करना शुरू कर दिया। बीस वर्षों के लंबे समय के बाद, एक दिन वही युवक अपने सेठ के पास आया और कहा, “श्रीमान, मैं अब यहाँ से जाना चाहता हूँ। मुझे अब घर लौटना है। क्या मुझे मेरी मजदूरी मिल सकती है?”
सेठ ने उत्तर दिया, “बिल्कुल, लेकिन तुम्हारे जाने से पहले मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ। मैं या तो तुम्हें जितने साल तुमने काम किया है, उतने सालों की मजदूरी दे कर तुम्हें भेज सकता हूँ, या फिर तुम्हें तुम्हारे जीवन के लिए तीन सलाह दे कर बिना पैसे के तुम्हें भेज सकता हूँ। इनमें से तुम्हें क्या चाहिए ये चुनाव तुम्हें करना है।”
उस व्यक्ति ने सोचने के लिए कुछ समय मांगा। उसने दो दिनों तक बहुत विचार किया और अपने वेतन की जगह तीन सलाहों को चुना।
सेठ ने उसे याद दिलाया कि अगर वह सलाह मांगेगा तो उसे कोई पैसा नहीं मिलेगा।
आदमी ने जवाब दिया- “मैंने आपके साथ बहुत समय तक काम किया है। आपके साथ काम करते हुए मैंने बहुत कुछ सीखा है और नई-नई चीजों में कौशलता हासिल की है। यह अनुभव मुझे जीवन में आगे ले जाएगा और इसलिए मुझे केवल तीन सलाह चाहिए।”
तब सेठ ने उसे तीन सलाहें दीं :
- अपने जीवन में कभी भी अनुचित रास्ता या शोर्ट्कट न अपनाएँ। ऐसे रास्ते आपकी जान भी ले सकते हैं।
- कभी भी किसी वस्तु के लिए ज्यादा व्याकुल या अधीर न हों, क्योंकि बुरी चीजों के प्रति ऐसी अधीरता घातक हो सकती है।
- क्रोध या दर्द के क्षणों में कभी भी निर्णय न लें क्योंकि यह आपको ग़लत निर्णय की ओर ले जा सकता है और फिर अपनी गलती पर पश्चाताप करना पड़ सकता है।”
इसके बाद मालिक ने उसे तीन रोटियाँ थमा दीं और कहा- “तुम्हारे पास तीन रोटियाँ हैं। तुम अपनी यात्रा के दौरान इनमें से दो का सेवन कर सकते हो और आखरी रोटी को घर पहुँचने तक अपने पास रखना और अपनी पत्नी के साथ साझा कर के खाना।”
उस व्यक्ति ने अपने सेठ को धन्यवाद दिया और बहुत सालों के बाद अपनी पत्नी से मिलने के लिए अपनी यात्रा शुरू की।
अपनी यात्रा के पहले दिन, वह एक बूढ़े व्यक्ति से मिलता है जो उसका अभिवादन करता है और पूछता है, “तुम कहाँ जा रहे हो?” जिस पर वह व्यक्ति जवाब देता है, “मैं जहाँ जा रहा हूँ वहाँ पहुँचने के लिए 20 दिनों तक चलने की जरूरत है।” इसके लिए बूढ़ा व्यक्ति उस व्यक्ति को एक छोटा रास्ता अपनाने की सलाह देता है और कहता है, “ये रास्ता अपनाने से तुम अपनी मंजिल तक सिर्फ पाँच दिनों में ही पहुँच जाओगे।”
वह व्यक्ति जल्द से जल्द अपने घर पहुँचना चाहता था इसलिए वह छोटा रास्ता अपनाने के बारे में सोचने लगा, लेकिन तभी उसे अपने सेठ की पहली सलाह याद आ गई। उसने सेठ की सलाह का पालन करते हुए लंबे रास्ते पर चल कर घर पहुँचना चुना।
कुछ दिनों बाद उसे पता चला कि लुटेरे लोगों को छोटा रास्ता अपनाने के लिए बरगलाया करते हैं और जब यात्री छोटा रास्ता अपना कर आगे बढ़ता है तो उन पर घात लगाकर हमला करते हैं और उनका सारा सामान लूट लेते हैं।
उस व्यक्ति ने सोचा कि सेठ की पहली सलाह ने उसे एक विपत्ति से बचा लिया। कुछ और दिन इसी तरह से यात्रा करने के बाद, वह सड़क के किनारे एक सराय में रुक गया और अंधेरा होने के कारण उसने पूरी रात वहीं आराम करने के बारे में सोचा। वह हाथ पैर धोकर बिस्तर पर सोने के लिए चला गया। लेकिन कुछ ही समय के बाद वह एक भयानक चीख सुन कर जाग गया। वह दरवाजा खोल कर बाहर जाने ही वाला था, तभी उसे सेठ की सलाह का दूसरा भाग याद आया और वह वापस अपने बिस्तर पर जाकर सो गया।
अगले दिन सुबह उसने सराय के मालिक को इस घटना के बारे में बताया तो उसने बहुत ही चौंकाने वाला जवाब दिया। सराय के मालिक ने कहा, “आप भाग्यशाली हैं कि आप ने अन्य मेहमानों की तरह उत्सुकता में आकर दरवाज़ा नहीं खोला। और इसलिए आप जीवित भी हैं। हमने सुना है कि रात के समय एक राक्षस राहगीरों का ध्यान आकर्षित करने के लिए चिल्लाता है और जब जिज्ञासु मेहमान बाहर आकर देखते हैं तो वह उन्हें खींच कर, जंगल में ले जा कर मार डालता है।”
उस व्यक्ति ने भगवान को धन्यवाद दिया और सोचा कि सेठ की दूसरी सलाह के कारण आज मैं जिंदा हूँ।
उस व्यक्ति ने अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए फिर से अपनी यात्रा प्रारंभ कर दी। कुछ दिनों तक चलने के बाद आखिरकार अब वह अपने घर के बहुत करीब पहुँच गया था। जैसे ही वह अपने घर के पास आया उसने खिड़की से देखा कि उसकी पत्नी अकेली नहीं थी और उसके साथ एक आदमी था जिसके बालों को वह धीरे से सहला रही थी। उस व्यक्ति का हृदय क्रोध और बदले की भावना से भर गया और उस के मन में उन दोनों को मारने के विचार आने लगे।
लेकिन तभी उसको अपने सेठ की दी हुई तीसरी और अंतिम सलाह याद आती है और वह एक गहरी सांस के साथ खुद को सांत्वना देता है, और सोचता है कि वह इस घटना पर शान्ति से बैठ कर विचार करेगा। वह उस रात पास की झाड़ी में ही सो जाता है।
सुबह होने पर जब वह शांत मन से उस घटना पर विचार करता, तो इस निर्णय पर पहुँचता है कि वह अपनी पत्नी और उसके प्रेमी को नहीं मारेगा। वह वापस अपने सेठ के पास चला जाएगा और जीवन भर वहीं काम करेगा। उसने सोचा कि जाने से पहले उसे एक बार अपनी पत्नी से मिलकर उसे बताना चाहिए कि इतने सालों में वह उसके प्रति कितना वफादार रहा है।
उस व्यक्ति ने दरवाज़े पर पहुँच कर दस्तक दी। जब पत्नी ने दरवाज़ा खोला तो अपने पति को सामने देखकर बहुत उत्साहित हो गई और खुशी से उसकी आँखों से आंसु बहने लगे। जब उसकी पत्नी उसे खुशी से गले लगाती है तो वह व्यक्ति उसे दूर धकेल देता है और उस व्यक्ति की आँखें आसुओं से भर जाती हैं। वह पूछता है, “वह आदमी कौन है जिसके साथ तुम कल रात थीं ?” वह जवाब देती है- “वह आपका बेटा है। जब आप चले गए थे, तब मुझे पता चला कि मैं गर्भवती हूँ। अब आपका बेटा बीस साल का हो गया है।”
यह सुनकर वह व्यक्ति रोने लगा और उसने अपने सेठ को सही सलाह देने के लिए मन ही मन अपने हृदय से धन्यवाद दिया। फिर उस व्यक्ति ने अपने बेटे को गले लगा लिया।
उन सब ने बैठ कर बहुत सारी बातें कीं, अपने अनुभवों को एक दूसरे के साथ साझा किया। अंत में उस व्यक्ति ने अपने सेठ की तीन सलाह के बारे में भी बताया। फिर उसने आखरी रोटी को मेज पर रख दिया और कहा, “यह सब मैंने पिछले बीस वर्षों में कमाया है।”
फिर रात के खाने के समय सबने मिलकर ईश्वर से प्रार्थना की और तीनों मिलकर उस आखिरी रोटी को खाने लगे। पत्नी ने जैसे ही रोटी का आखरी टुकड़ा तोड़ा तो पाया कि उसमें सोने के सिक्के थे जो उसकी बीस साल की कमाई से कहीं अधिक थे। यह सब उस व्यक्ति की सच्चाई, ईश्वर में विश्वास, व कड़ी मेहनत का ही फल था।
दिल की सुनें और इसे अपना आंतरिक मार्गदर्शक बनने दें। दिल हमेशा सच बताएगा और सही मार्गदर्शन करेगा।
*” हृदय एक पवित्र स्थान है, और यह हमें विशाल आंतरिक ब्रह्मांड का द्वार, आश्चर्य और ज्ञान का रास्ता दिखाता है। हृदय के ज्ञान के माध्यम से, हम सरलता और आनंद से जी सकते हैं।”