आज मासीरे आलमगीरी पुस्तक को पढ़कर समाप्त किया। यह पुस्तक साकी मुस्ताद खान ने लिखी थी और इसका अंग्रेजी अनुवाद सर यदुनाथ सरकार ने किया था।
इस पुस्तक में हिंदुओं पर औरंगजेब के अत्याचारों का प्रामाणिक वर्णन है। कैसे औरंगजेब ने जजिया लगाया, मंदिरों को तोड़ने का फरमान दिया, हिंदुओं को जबरन मुसलमान बनाया।
लेखक निष्पक्ष नहीं चाटुकार इतिहासकार है। जहां औरंगजेब की हार हुई। उसे नहीं लिखा। जहां जीत हुई। उसे बढ़ा चढ़ा कर लिखा। लेखक हिंदुओं को काफिर और मुसलमानों को दीन का सेवक लिखता है।
औरंगजेब के एक खास चरित्र का ज्ञात हुआ। हिंदू राजा से लड़ने के लिए राजा को भेजता था ताकि जो भी करे काफिर ही मरें। सत्ता की लड़ाई में किसी एक की पीठ पर हाथ रखकर दोनों को लड़ाता था और उसी राज्य के मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाता था।
औरंगज़ेब को मथुरा के जाटों, राजस्थान के दुर्गादास राठोड़, पंजाब के सिखों ने चुनौती दी। मगर सबसे लंबे समय तक शिवाजी, शंभाजी, राजाराम, तारा देवी ने 50 वर्ष तक उसे डक्कन में उलझाएं रखा।
यही दक्कन मुगलियां सल्तनत की गिरावट का कारण बना। हर हिंदू को यह पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिए।
#डॉ_विवेक_आर्य
