सच्चा किस्सा,
स्कूटर इंडिया में मेरे एक सहकर्मी थे, मदन मुरारी बंसल (8-10 वर्ष पूर्व उनका स्वर्गवास हो चुका है) जो मथुरा की मांट तहसील के रहने वाले थे, यह किस्सा उन्होंने ही सुनाया था,
बंसल की ससुराल भरतपुर शहर में थी, उनके ससुर जी के कई काम थे, उसमें एक काम कबाड़ खरीदना भी था,
एक बार उन्होंने भरतपुर के राजा के महल से कुछ कबाड़ खरीदा था,
यहां पहले एक बात जान लीजिए कि पहले जमाने में राजा-महाराज सोने की मूर्तियां वनवा कर, उन पर पीतल चढ़ावा कर रखा करते थे,
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तो बंसल जी के ससुर साहब राजमहल से पीतल का काला पड़ चुका 8-10 किलो का एक हाथी कबाड़ में लेकर आए,
घर में आकर वह हाती उन्होंने बच्चों को खेलने के लिए दे दिया, बच्चे उसे दिन भर घर में इधर-उधर घसीटते रहते थे, 8-10 दिनों में हाथी के पैरों के नीचे की पीतल घिस गई और सोना दिखाई देने लगा,
एक दिन आंगन में बच्चे खेल रहे थे, बंसल जी के ससुर चारपाई पर लेटे थे, तो उनकी नजर हाथी के पैरों पर पड़ी, उन्होंने तुरंत उठकर उस हाथी को देखा और बच्चों से लेकर उसको अपने पास रख लिया,
फिर उन्होंने उस हाथी का सोना बेचकर, एक बहुत बड़ा टेंट हाउस खोला, भगवान की कृपा से वह टेंट हाउस चल निकला और बंसल जी के ससुर भरतपुर के बहुत बड़े टेंट हाउस के मालिक बन गए.
@जैसा स्वर्गीय मित्र मदन मुरारी बंसल ने बताया था.