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कान कटा गधा:

एक बार की बात है शेर को भूख लगी तो उसने लोमड़ी मैं कहा:- मेरे लिए कोई शिकार ढूंढकर लाओ अन्यथा मैं तुम्हें ही खा जाऊँगा |

लोमड़ी एक गधे के पास गई और बोली:- मेरे साथ शेर के समीप चलो क्योंकि वो तुम्हें जंगल का राजा बनाना चाहता है |
शेर ने गधे को देखते ही उस पर हमला करके उसके कान काट लिए लेकिन गधा किसी प्रकार भागने में सफल रहा |

तब गधे ने लोमड़ी से कहा:- तुमने मुझे धोखा दिया शेर ने तो मुझे मारने का प्रयास किया और तुम कह रही थी कि वह मुझे जंगल का राजा बनायेगा |
लोमड़ी ने कहा:- मूर्खता भरी बातें मत करो |
उसने तुम्हारे कान इसीलिए काट लिए ताकि तुम्हारे सिर पर ताज सुगमता पूर्वक पहनाया जा सके, समझे |

आओ चलो लौट चलें शेर के पास |

गधे को यह बात ठीक लगी,इसलिए वह पुनः लोमड़ी के साथ चला गया |
शेर ने फिर गधे पर हमला किया तथा इस बार उसकी पूँछ काट ली |
गधा फिर लोमड़ी से यह कहकर भाग चला:- तुमने मुझसे फिर झूठ कहा, इस बार शेर ने तो मेरी पूँछ भी काट ली |

लोमड़ी ने कहा:- शेर ने तो तुम्हारी पूँछ इसलिए काट ली ताकि तुम सिंहासन पर सहजतापूर्वक बैठ सको | चलो पुनः उसके पास चलते हैं |

इस प्रकार लोमड़ी ने गधे को फिर से लौटने के लिए मना लिया |
इस बार सिंह गधे को पकड़ने में सफल रहा और उसे मार डाला |
शेर ने लोमड़ी से कहा:- जाओ,इसकी चमड़ी उतार कर इसका दिमाग फेफड़ा और हृदय मेरे पास ले आओ और बचा हुआ अंश तुम खा लो |

लोमड़ी ने गधे की चमड़ी निकाली और गधे का दिमाग खा लिया और केवल फेफड़ा तथा हृदय सिंह के पास ले गई सिंह ने गुस्से में आकर पूछा: – इसका दिमाग कहाँ गया |
लोमड़ी ने जवाब दिया:- महाराज ! इसके पास तो दिमाग था ही नहीं |

यदि इसके पास दिमाग होता तो क्या कान और पूँछ कटने के उपरान्त भी आपके पास यह पुनः वापस आता |
शेर बोला:- हां ,तुम पूर्णतया सत्य बोल रही हो |

यह हर उस हिंदू गधे की कहानी है जो 1000 वर्षों से अधिक समय से सभी हिंदुओं को खत्म करने के बारम्बार षड्यंत्र होने के बाद भी धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करता है |

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