મહારાષ્ટ્રના એક ગામની સાચી ઘટના બોધપાઠ લેવા માટે પૂરતી છે
એક દિવસ એક મુસ્લિમ તેની પત્ની અને આઠ બાળકો સાથે ગામના વડા પાસે આવ્યો અને ગામમાં રહેવા માટે ભીખ માંગવા લાગ્યો.
રાત્રે જાગીને ગામની સંભાળ રાખનાર ચોકીદારે વિરોધ કર્યો પણ કોઈએ તેની વાત ન સાંભળી અને મુસ્લિમ પરિવારને ગામમાં રહેવા દીધો.
દિવસો વીતતા ગયા અને મુસ્લિમના આઠ બાળકો મોટા થયા જ્યારે તેમનો લગ્ન કરવાનો વારો આવ્યો, મુસ્લિમ સરપંચ પાસે ગયો અને કહ્યું કે હુઝૂર બાળકોના લગ્ન થવાના છે અને મારી પાસે એક જ ઘર છે, ત્યારે ગામલોકોએ તેને બંજર જમીન આપી અને કહ્યું કે તમારે તેના પર ઘર બનાવવું જોઈએ.
આ પછી મુસ્લિમ બનિયા પાસે ગયો અને તેની પાસેથી પૈસા ઉછીના લીધા.
થોડા સમય પછી, તે આઠ બાળકોને 74 બાળકોનો જન્મ થયો અને તે જોતા લગભગ 30 વર્ષમાં, તે ગામમાં મુસ્લિમોની વસ્તી 40% થઈ ગઈ.
હવે મુસ્લિમ છોકરાઓ તેમની આદત મુજબ હિંદુઓ સાથે ઝઘડવા લાગ્યા અને તેમની સ્ત્રીઓ અને બહેન દીકરીઓની છેડતી કરવા લાગ્યા.
ધીરે ધીરે દરેક હિંદુ પોતાના પરિવાર સાથે સ્વેચ્છાએ ગામ છોડવા લાગ્યા.
એક દિવસ ગામનું મુખ્ય મંદિર મુસ્લિમોએ તોડી નાખ્યું અને તેના પર મસ્જિદ બનાવવાનું શરૂ કર્યું, પછી બાકીના હિંદુઓએ તેમને રોકવાનું શરૂ કર્યું, ત્યારે મુસ્લિમે કહ્યું કે જે અલ્લાહના કામમાં અવરોધ આવે તેને કાપી નાખો.
બાકીના હિંદુઓએ સામસામે આવવાનું યોગ્ય ન માનતા ગામ છોડી દીધું અને રસ્તામાં ચોકીદારને કહ્યું કે અમે તારી વાત નથી સાંભળી અને મુલ્લા પર વિશ્વાસ કર્યો, જેના કારણે આજે અમારે ગામ છોડવું પડ્યું.
તે ગામનું નામ પંચવટીથી બદલીને રહીમાબાદ કરવામાં આવ્યું છે. આ ગામ મહારાષ્ટ્રના અમરાવતી જિલ્લામાં આવેલું છે.
*નોંધ – આ સત્ય ઘટના છે.*🙏
Day: June 11, 2023
🙏
*पति पत्नी एक कार से जंगल से गुजर रहे थे।*
*अचानक पत्नी ने घायल जानवर के बच्चे को सड़क पर तड़पते देखा और ड्राइवर को बोली कार रोको !!*
*दोनों लोग कार से नीचे उतरे।*
*पत्नी बोली ये तो कुत्ते का बच्चा है और उसको पानी पिलाने लगी ,बच्चे में जान आ गई*,
*पत्नी बोली इसको साथ ले चलते है ।*
*पति बोला*
*”इस जंगल में कुत्ता कहां से आया?”*
*ये भेड़िये का बच्चा है ।पत्नी जिद्द कर बैठी ये कुत्ते का बच्चा है और उसे अपने साथ घर ले आई !!*
*इन दोनों के घर में पहले से दो कुत्ते थे।*
*साथ ही उन पति-पत्नी स्वयं के भी दो बच्चे थे।*
*कुछ दिनों के बाद एक कुत्ता घर से गायब हो गया ,तलाश की गई तो उसकी हड्डियां घर के पीछे मिलीं।*
*पति बोला*
*”देखो भेड़िये ने हमारे वफादार कुत्ते को मार डाला।”*
*पत्नी बोली*
*”ये दोनों कुत्ते पहले दिन से इससे चिढ़ते थे इसीलिए* *इसने प्रतिक्रिया में ऎसा किया होगा।*
*कुछ दिनों के बाद दूसरा कुत्ता भी गायब हो गया और फिर*
*कुछ दिनों के बाद उनका अपना बच्चा भी गायब हो गया !!*
*घर में झगड़ा शुरू हो गया।पड़ोसी भी बोलने लगे।मोहल्ले से भेड़िये को भगाओ। लेकिन पत्नी मानने को तैयार नहीं थी।*
*दोनों के बीच तलाक़ हो गया।*
*पत्नी भेड़िये और अपने बचे हुए दूसरे बच्चे को लेकर अपने मायके आ गई।*
*कुछ दिनों के बाद भेड़िया दूसरे बच्चे को भी खाकर भाग गया, पत्नी *भेड़िये को खोजने निकल पड़ी।*
*लोगों ने कहा*
*”अब खोज कर क्या करोगी ?”*
*पत्नी बोली*
*”उस भेड़िये से माफ़ी मांगूंगी कि मेरे पति और मेरे दोनों कुत्तों ने अगर उस मासूम भेड़िये से* *नफरत ना की होती तो बेचारे को मानव मांस खाने को मजबूर नहीं होना पड़ता !!”*
*गाँधी विचार-धारा यही है*
*भेड़ियों से हमदर्दी और अपने ही हिन्दुओं से नफरत जो आज समाज में घुल गयी है।*
*तमाम लोग इन सभी भेड़ियों से मुहब्बत कर रहे है ये जानते हुए भी कि भेड़िये अपना चरित्र नहीं बदलते*
*भेडिये निर्दई खूनी होते हैं , निर्मम खूनी*
*सावधान और सतर्क रहें, सुरक्षित रहें*
🌹🙏
“तुम्हारी माँ पागल है”
रात के 1:30 बजे फोन आता है, बेटा फोन उठाता है तो माँ बोलती है-
“जन्म दिन मुबारक लल्ला”
बेटा गुस्सा हो जाता है और माँ से कहता है –
सुबह फोन करतीं, इतनी रात को नींद खराब क्यों की? कह कर फोन रख देता है।
थोडी देर बाद पिता का फोन आता है। बेटा पिता पर गुस्सा नहीं करता बल्कि कहता है- सुबह फोन करते
फिर पिता ने कहा – मैनें तुम्हें इसलिए फोन किया है कि “तुम्हारी माँ पागल है” जो तुम्हें इतनी रात को फोन किया। वो तो आज से 25 साल पहले ही पागल हो गई थी।
जब उसे डॉक्टर ने ऑपरेशन करने को कहा और उसने मना किया था। वो मरने के लिए तैयार हो गई पर ऑपरेशन नहीं करवाया।
रात के 1:30 बजे को तुम्हारा जन्म हुआ। शाम 6 बजे से रात 1:30 तक वो प्रसव पीड़ा से परेशान थी। लेकिन तुम्हारा जन्म होते ही वो सारी पीड़ा भूल गयी। उसके ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा।
तुम्हारे जन्म से पहले डॉक्टर ने दस्तखत करवाये थे कि अगर कुछ हो जाये तो हम जिम्मेदार नहीं होंगे। तुम्हे साल में एक दिन फोन किया तो तुम्हारी नींद खराब हो गई.
मुझे तो रोज रात को 25 साल से रात के 1:30 बजे उठाती है और कहती है देखो हमारे लल्ला का जन्म इसी वक्त हुआ था, बस यही कहने के लिए तुम्हें फोन किया था। इतना कहके पिता फोन रख देते हैं।
बेटा सुन्न हो जाता है। सुबह माँ के घर जाकर माँ के पैर पकड़कर
माफी मांगता है. तब माँ कहती है, देखो जी मेरा लाल आ गया।
फिर पिता से माफी मांगता है तब पिता कहते हैं- आज तक ये कहती थी कि हमें कोई चिन्ता नहीं हमारी चिन्ता करने वाला हमारा लाल है। पर अब तुम चले जाओ मैं तुम्हारी माँ से कहूंगा कि चिन्ता मत करो, मैं तुम्हारा हमेशा की तरह आगे भी ध्यान रखूंगा!
तब माँ कहती है- माफ कर दो बेटा है।
सब जानते हैं दुनियाँ में एक माँ ही है जिसे जैसा चाहे कहो फिर भी वो गाल पर प्यार से हाथ फेरेगी।पिता अगर तमाचा न मारे तो बेटा सर पर बैठ जाये। इसलिए पिता का सख्त होना भी जरुरी है।
माता पिता को आपकी दौलत नहीं बल्कि आपका प्यार और वक्त चाहिए। उन्हें प्यार दीजिए। माँ की ममता तो अनमोल है।
નરસિંહ મહેતાની એકમાત્ર પુત્રી કુંવરબાઈના લગ્ન ઉના (જૂનાગઢ)ના શ્રીરંગ ઓઝાના પુત્ર વત્સરાજ સાથે થયા હતા. નરસિંહ મહેતા વતી કુવરબાઈને ભગવાન કૃષ્ણે મામેરુ આપ્યાની એક પ્રસિદ્ધ ચમત્કારિક કથા છે. કુંવરબાઈને માત્ર એક જ પુત્રી હતી, શર્મિષ્ઠા, જેમના લગ્ન વડનગરના ઘનશ્યામ સાથે થયા હતા, અને તેમની પુત્રીઓ સાવિત્રી (તાના) અને સંધ્યા (રીરી) હતી, જેમના લગ્ન વડનગરના મંડલેશ્વર નીલકંત્રાયના પુત્રો અનુક્રમે લોકેશ અને મહેશ સાથે થયા હતા. મુસ્લિમ બાદશાહ અકબરના દરબારમાં સંગીત રજૂ કરવા માટે આમંત્રિત કરવામાં આવતાં બંને બહેનો કૂવામાં કૂદીને મૃત્યુ પામી હતી. જ્યારે તાનસેન રાગ દીપકની આગમાં ભારતમાં ઘૂમી રહ્યો હતો ત્યારે વડનગરની બંને યુવતીઓએ રાગ મલ્હાર ગાઈને આગને ઠંડક આપી હતી. જ્યારે તેને બાદશાહ અકબરના દરબારમાં રજૂઆત કરવા માટે બોલાવવામાં આવ્યો ત્યારે તેણે કૂવામાં ડૂબીને આત્મહત્યા કરવાનું પસંદ કર્યું. ત્યારબાદ તાનસેને તેની સ્મૃતિમાંથી એક નવો રાગ રચ્યો, જેનું નામ તાનારીરી હતું.
सिन्धु घाटी की लिपि : क्यों अंग्रेज़ और कम्युनिस्ट इतिहासकार नहीं चाहते थे कि इसे पढ़ाया जाए! 🔰
▪️इतिहासकार अर्नाल्ड जे टायनबी ने कहा था – विश्व के इतिहास में अगर किसी देश के इतिहास के साथ सर्वाधिक छेड़ छाड़ की गयी है, तो वह भारत का इतिहास ही है।
भारतीय इतिहास का प्रारम्भ सिन्धु घाटी की सभ्यता से होता है, इसे हड़प्पा कालीन सभ्यता या सारस्वत सभ्यता भी कहा जाता है। बताया जाता है, कि वर्तमान सिन्धु नदी के तटों पर 3500 BC (ईसा पूर्व) में एक विशाल नगरीय सभ्यता विद्यमान थी। मोहनजोदारो, हड़प्पा, कालीबंगा, लोथल आदि इस सभ्यता के नगर थे।
पहले इस सभ्यता का विस्तार सिंध, पंजाब, राजस्थान और गुजरात आदि बताया जाता था, किन्तु अब इसका विस्तार समूचा भारत, तमिलनाडु से वैशाली बिहार तक, आज का पूरा पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान तथा (पारस) ईरान का हिस्सा तक पाया जाता है। अब इसका समय 7000 BC से भी प्राचीन पाया गया है।
इस प्राचीन सभ्यता की सीलों, टेबलेट्स और बर्तनों पर जो लिखावट पाई जाती है उसे सिन्धु घाटी की लिपि कहा जाता है। इतिहासकारों का दावा है, कि यह लिपि अभी तक अज्ञात है, और पढ़ी नहीं जा सकी। जबकि सिन्धु घाटी की लिपि से समकक्ष और तथाकथित प्राचीन सभी लिपियां जैसे इजिप्ट, चीनी, फोनेशियाई, आर्मेनिक, सुमेरियाई, मेसोपोटामियाई आदि सब पढ़ ली गयी हैं।
आजकल कम्प्यूटरों की सहायता से अक्षरों की आवृत्ति का विश्लेषण कर मार्कोव विधि से प्राचीन भाषा को पढना सरल हो गया है।
सिन्धु घाटी की लिपि को जानबूझ कर नहीं पढ़ा गया और न ही इसको पढने के सार्थक प्रयास किये गए।
भारतीय इतिहास अनुसन्धान परिषद (Indian Council of Historical Research) जिस पर पहले अंग्रेजो और फिर कम्युनिस्टों का कब्ज़ा रहा, ने सिन्धु घाटी की लिपि को पढने की कोई भी विशेष योजना नहीं चलायी।
आखिर ऐसा क्या था सिन्धु घाटी की लिपि में? अंग्रेज और कम्युनिस्ट इतिहासकार क्यों नहीं चाहते थे, कि सिन्धु घाटी की लिपि को पढ़ा जाए?
अंग्रेज और कम्युनिस्ट इतिहासकारों की नज़रों में सिन्धु घाटी की लिपि को पढने में निम्नलिखित खतरे थे –
1. सिन्धु घाटी की लिपि को पढने के बाद उसकी प्राचीनता और अधिक पुरानी सिद्ध हो जायेगी। इजिप्ट, चीनी, रोमन, ग्रीक, आर्मेनिक, सुमेरियाई, मेसोपोटामियाई से भी पुरानी. जिससे पता चलेगा, कि यह विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता है। भारत का महत्व बढेगा जो अंग्रेज और कम्युनिस्ट इतिहासकारों को बर्दाश्त नहीं होगा।
2. सिन्धु घाटी की लिपि को पढने से अगर वह वैदिक सभ्यता साबित हो गयी तो अंग्रेजो और कम्युनिस्टों द्वारा फैलाये गए आर्य- द्रविड़ युद्ध वाले प्रोपगंडा के ध्वस्त हो जाने का डर है।
3. अंग्रेज और कम्युनिस्ट इतिहासकारों द्वारा दुष्प्रचारित ‘आर्य बाहर से आई हुई आक्रमणकारी जाति है और इसने यहाँ के मूल निवासियों अर्थात सिन्धु घाटी के लोगों को मार डाला व भगा दिया और उनकी महान सभ्यता नष्ट कर दी। वे लोग ही जंगलों में छुप गए, दक्षिण भारतीय (द्रविड़) बन गए, शूद्र व आदिवासी बन गए’, आदि आदि गलत साबित हो जायेगा।
कुछ फर्जी इतिहासकार सिन्धु घाटी की लिपि को सुमेरियन भाषा से जोड़ कर पढने का प्रयास करते रहे तो कुछ इजिप्शियन भाषा से, कुछ चीनी भाषा से, कुछ इनको मुंडा आदिवासियों की भाषा, और तो और, कुछ इनको ईस्टर द्वीप के आदिवासियों की भाषा से जोड़ कर पढने का प्रयास करते रहे। ये सारे प्रयास असफल साबित हुए।
सिन्धु घाटी की लिपि को पढने में निम्लिखित समस्याए बताई जाती है –
सभी लिपियों में अक्षर कम होते है, जैसे अंग्रेजी में 26, देवनागरी में 52 आदि, मगर सिन्धु घाटी की लिपि में लगभग 400 अक्षर चिन्ह हैं। सिन्धु घाटी की लिपि को पढने में यह कठिनाई आती है, कि इसका काल 7000 BC से 1500 BC तक का है, जिसमे लिपि में अनेक परिवर्तन हुए साथ ही लिपि में स्टाइलिश वेरिएशन बहुत पाया जाता है। लेखक ने लोथल और कालीबंगा में सिन्धु घाटी व हड़प्पा कालीन अनेक पुरातात्विक साक्षों का अवलोकन किया।
भारत की प्राचीनतम लिपियों में से एक लिपि है जिसे ब्राह्मी लिपि कहा जाता है। इस लिपि से ही भारत की अन्य भाषाओँ की लिपियां बनी। यह लिपि वैदिक काल से गुप्त काल तक उत्तर पश्चिमी भारत में उपयोग की जाती थी। संस्कृत, पाली, प्राकृत के अनेक ग्रन्थ ब्राह्मी लिपि में प्राप्त होते है।
सम्राट अशोक ने अपने धम्म का प्रचार प्रसार करने के लिए ब्राह्मी लिपि को अपनाया। सम्राट अशोक के स्तम्भ और शिलालेख ब्राह्मी लिपि में लिखे गए और सम्पूर्ण भारत में लगाये गए।
सिन्धु घाटी की लिपि और ब्राह्मी लिपि में अनेक आश्चर्यजनक समानताएं है। साथ ही ब्राह्मी और तमिल लिपि का भी पारस्परिक सम्बन्ध है। इस आधार पर सिन्धु घाटी की लिपि को पढने का सार्थक प्रयास सुभाष काक और इरावाथम महादेवन ने किया।
सिन्धु घाटी की लिपि के लगभग 400 अक्षर के बारे में यह माना जाता है, कि इनमे कुछ वर्णमाला (स्वर व्यंजन मात्रा संख्या), कुछ यौगिक अक्षर और शेष चित्रलिपि हैं। अर्थात यह भाषा अक्षर और चित्रलिपि का संकलन समूह है। विश्व में कोई भी भाषा इतनी सशक्त और समृद्ध नहीं जितनी सिन्धु घाटी की भाषा।
बाएं लिखी जाती है, उसी प्रकार ब्राह्मी लिपि भी दाएं से बाएं लिखी जाती है। सिन्धु घाटी की लिपि के लगभग 3000 टेक्स्ट प्राप्त हैं।
इनमे वैसे तो 400 अक्षर चिन्ह हैं, लेकिन 39 अक्षरों का प्रयोग 80 प्रतिशत बार हुआ है। और ब्राह्मी लिपि में 45 अक्षर है। अब हम इन 39 अक्षरों को ब्राह्मी लिपि के 45 अक्षरों के साथ समानता के आधार पर मैपिंग कर सकते हैं और उनकी ध्वनि पता लगा सकते हैं।
ब्राह्मी लिपि के आधार पर सिन्धु घाटी की लिपि पढने पर सभी संस्कृत के शब्द आते है जैसे – श्री, अगस्त्य, मृग, हस्ती, वरुण, क्षमा, कामदेव, महादेव, कामधेनु, मूषिका, पग, पंच मशक, पितृ, अग्नि, सिन्धु, पुरम, गृह, यज्ञ, इंद्र, मित्र आदि।
निष्कर्ष यह है कि –
1. सिन्धु घाटी की लिपि ब्राह्मी लिपि की पूर्वज लिपि है।
2. सिन्धु घाटी की लिपि को ब्राह्मी के आधार पर पढ़ा जा सकता है।
3. उस काल में संस्कृत भाषा थी जिसे सिन्धु घाटी की लिपि में लिखा गया था।
4. सिन्धु घाटी के लोग वैदिक धर्म और संस्कृति मानते थे।
5. वैदिक धर्म अत्यंत प्राचीन है।
हिन्दू सभ्यता विश्व की सबसे प्राचीन व मूल सभ्यता है, हिन्दुओं का मूल निवास सप्त सैन्धव प्रदेश (सिन्धु सरस्वती क्षेत्र) था जिसका विस्तार ईरान से सम्पूर्ण भारत देश था।वैदिक धर्म को मानने वाले कहीं बाहर से नहीं आये थे और न ही वे आक्रमणकारी थे। आर्य – द्रविड़ जैसी कोई भी दो पृथक जातियाँ नहीं थीं जिनमे परस्पर युद्ध हुआ है।
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एक आदमी था जो कॉन्वेंट स्कूल में पीरियड और छुट्टी का घंटा बजाता था….
टन..टन..टन..टन..टन..
एक दिन स्कूल के नए प्रिंसिपल की नज़र उस पर गयी तो उससे पूछ बैठे उसके बारे में…कितना पढ़े लिखे हो जी ??
आदमी ने बड़े मासूमियत से कहा…साहब, अनपढ़ हूँ.
प्रिंसिपल को ये जानकर हैरत हुई कि उनके इस प्रतिष्ठित स्कूल का घंटा बजाने वाला कर्मचारी अनपढ़ है.
उन्होंने कहा कि एक अनपढ़ आदमी हमारे इतने प्रतिष्ठित स्कूल का घंटा बजाने वाला नहीं हो सकता और फ़िर उस घंटा बजाने वाले को स्कूल से निकाल दिया गया.
अब वो बेचारा क्या करे ???
कुछ काम नहीं थी तो उसके भूखे मरने की नौबत आ गई.
ऐसी हालत में किसी ने उसपर दया करके सलाह दी कि वहाँ उस रास्ते पर समोसा बेचो…
कुछ तो कमाई होगी.
फ़िर , उसने समोसे बेचना शुरू किया.
ऊपरवाले की कृपा रही और उसकी जी-तोड़ मेहनत की बदौलत दुकान चल निकली.
खोमचे से गुमटी हुआ , गुमटी से बड़ा दुकान और फिर देखते ही देखते बाजार की सबसे फेमस दुकान बन गई.
जब उसका धंधा आगे बढा तो उसने अपने बच्चों को भी इस काम मे लगा कर और दूसरे धंधे आजमाए.
कुछ ही समय बाद वो शहर का जाना माना सेठ बन गया.
उसके कई प्रतिष्ठान हो गए.
तो, उसकी ख्याति सुन एक पत्रकार आया उसका इंटरव्यू लेने.
बाकी बातों को पूछने के बाद उसने पूछा कि आप कहाँ तक पढ़े हैं ???
पत्रकार को भी ये जानकर बड़ी हैरत हुई कि इतना बडा सेठ तो बिलकुल अनपढ़ है.
पत्रकार ने कहा कि आप पढ़े लिखे नहीं हैं….
फिर भी, इतना बड़ा व्यापार संभाले हुए हैं तथा इतने सफल हैं.
मैं तो यही सोच रहा हूँ कि अगर आप पढ़े होते….
तो क्या कर रहे होते ???
सेठ ने सपाट भाव से कहा – स्कूल में घंटा बजा रहा होता.
असल में यही पूरी कहानी का मूल है.
कुछ लोगों को लगता है कि…. मोइया तो सबका साथ, सबका विकास चिल्लाता रहता है.
कटेशरों को वजीफा देता है… हाथ में कुराण्ड और कप्यूटर की बात करता है.
वो तो पढ़ा-लिखा हैय्ये नहीं है अर्थात वो तो कट्टर हिनू हैय्ये नहीं है.
अगर वो हमारे जैसा कट्टर हिनू होता तो अभी तक उखाड़-पछाड़ मचा दिया होता.
तो भाई, बात ऐसी है कि…. वो अगर पढ़ा लिखा होता (आपकी परिभाषा के अनुसार वाला कट्टर हिनू) तो अभी तक वो स्कूल में घंटा बजा रहा होता…
अर्थात, अभी तक देश गृहयुद्ध की आग में जल रहा होता…
तथा, हम और आप पूरी दुनिया का बहिष्कार झेलते हुए पिगिस्तान की ही तरह चावल, दाल और आटा के लिए तरस रहे होते.
लेकिन, उन्होंने देश के अंदरूनी दुश्मनों को यही “सबका साथ-सबका साथ विकास” वाला लॉलीपॉप पकड़ा कर देश को न सिर्फ दुनिया के नक्शे में विश्वगुरु के तौर पर उभार रहा है बल्कि देश में भी काशी कॉरिडोर, भव्य राममंदिर, महाकाल कॉरिडोर आदि के जरिए उसकी प्रकृति एक हिनू राष्ट्र की बना रहा है.
वैसे…. अपने यहाँ एक बहुत ही पुरानी कहावत है कि…
कपड़े वही पहनो, जो दूसरों को पसंद हो..
लेकिन.. खाओ वही जो खुद को पसंद हो.
अर्थात….
बोलो वही जो सुनने वाले को अच्छा लगे..
लेकिन, करो वही जो खुद को अच्छा लगे.
और, मोई जी वही कर रहे हैं…
लेकिन, बोलने और करने सम्बंधी अपने कहावत का इतनी सी बेसिक बात भी अगर अपने लोगों को समझ नहीं आती है तो ये समस्या उनकी समझदारी की है…
न कि कर्ता अर्थात मोई जी की.
जय महाकाल…!!!