यह जो कसूरी मेथी है उसकी कहानी बड़ी दिलचस्प है
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक छोटा सा कस्बा है जिसका नाम है कसूर वहां पर एक जगतराम करके रहते थे उन्होंने मेथी घर में रखी थी और आठ 10 दिन के लिए कहीं बाहर चले गए थे और जब पूरा परिवार आया तो देखा मेथी एकदम सूख गई है फिर उस दिन उनके घर कुछ बन रहा था तो जगत राम जी के दिमाग में पता नहीं क्या आया उन्होंने वह सुखी मेथी लेकर उसे मसल कर उसमें डाल दिया और जब परिवार ने खाना खाया तो खाना बहुत टेस्टी लगा उन्होंने अपने और उसी पड़ोसी को भी टेस्ट कराया तो सब एकदम हैरान रह गए कि यह बिल्कुल अलग सा शानदार टेस्ट कैसे आया
उसके बाद जगत राम जी ने इस सूखी मेथी को पैक करके बेचना शुरू किया क्योंकि वह उसकी डिमांड बढ़ती गई तो फिर धीरे-धीरे लोगों ने उसका नाम कसूरी मेथी कर दिया
इस कसूर कस्बे में 70% आबादी हिंदू जैन सिख समुदाय की थी यहां एक बेहद शानदार श्री कृष्ण मंदिर था और एक कोई बजाज जी हैं जिन्होंने अपनी मां की याद में इस मंदिर के अंदर धर्मशाला भी बनवाया है ताकि दूर-दूर से श्रद्धालु आकर इस मंदिर में रुक सके आज इस मंदिर और उस धर्मशाला का हाल देखिए
प्रशासन का कहना है कि क्योंकि इस कस्बे में कोई हिंदू नहीं है इसलिए यहां से मूर्ति हटाकर सिंध भेज दी गई है और इस मंदिर को बंद करके स्कूल बना दिया गया है और बाकी हिस्सा ऐसे ही खंडहर है।





