Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

बालशेम के पास एक स्त्री आई, वह बांझ थी ;उसे बच्चा चाहिए था। वह निरंतर बालशेम के पीछे पड़ी रही :
‘आप आशीर्वाद दें तो सब कुछ हो सकता है। मुझे आशीर्वाद दें, मैं माँ बनना चाहती हूं।’
आखिरकार तंग आकर – हां, सताने वाली स्त्री से बालशेम भी तंग आ जाते हैं – वे बोले, बेटा चाहिए या बेटी?
निश्चय ही बेटा।
बालशेम ने कहा, ‘फिर यह कहानी सुनो। मेरी माँ का भी बच्चा नहीं था और वह हमेशा गाँव के रबाई के पीछे पड़ी रहती। आखिर रबाई बोला,’ एक सुंदर टोपी ले आ। ‘
मेरी माँ ने सुंदर टोपी बनाई और रबाई के पास ले गई। वह टोपी इतनी सुन्दर बनी कि उसे बनाकर ही वह तृप्त हो गई। और उसने रबाई से कहा, ‘मुझे बदले में कुछ नहीं चाहिए। आपको इस टोपी में देखना ही बहुत अच्छा लग रहा है। आप मुझे धन्यवाद न दें, मैं ही आपको धन्यवाद दे रही हूं।’
‘और मेरी मां चली गई। उसके बाद वह गर्भवती हुई और मेरा जन्म हुआ,’ बालशेम ने कहानी पूरी की।
इस स्त्री ने कहा,’ बहुत खूब। अब कल मैं भी एक सुंदर टोपी ले आती हूं। ‘ दूसरे दिन वह टोपी लेकर आई, बालशेम ने उसे ले लिया और धन्यवाद तक न दिया। स्त्री प्रतीक्षा करती रही करती रही, फिर उसने पूछा,’ बच्चे के बारे में क्या? ‘
बालशेम ने कहा, ‘बच्चे के बारे में भूल जाओ। टोपी इतनी सुंदर है कि मैं आभारी हूं। मुझे धन्यवाद कहना चाहिए। वह कहानी याद है? उस स्त्री ने बदले में कुछ न मांगा इसलिए उसे बच्चा मिला – और वह भी मेरे जैसा बच्चा।’
‘लेकिन तुम कुछ लेने की चाहत से आई हो। इस छोटी सी टोपी के बदले में तू बालशेम जैसा बेटा चाहती है? ‘
कई  बातें ऐसी हैं जो केवल कहानियां द्वारा कही जा सकती हैं। बालशेम ने बुनियादी बात कह दी :’ मांगो मत, और मिल जाएगा। ‘
मांगो मत – यह मूल शर्त है।

ओशो

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