दीना जिन्ना का नाम शायद बहुत कम लोगो ने सुना होगा!
वो भारत विभाजन और लाखो हिन्दुओ के कत्लेआम के जिम्मेदार मोहम्मद अली जिन्ना की बेटी थी ।
जो व्यक्ति मानते है की जिन्ना धर्म निरपेक्ष और महान था वो लोग सिर्फ खानदानी मुगलिया भाट है ।
मुहम्मद अली जिन्ना ने एक पारसी लड़की रतन बाई से शादी की थी। रतनबाई के पिता दीनशा इस शादी के लिये राज़ी नहीं थे। 42 साल के अधेड़ जिन्ना ने प्रेम जाल में फांस कर अपने से 24 साल छोटी रतन बाई से इस्लाम क़बूल करवा के निकाह पढ़वा लिया था। धर्म परिवर्तन के बाद रतन बाई का नाम बदल कर उनका नाम मरियम जिन्ना रखा गया, हालाँकि ये भी सही है कि ख़ुद रतन बाई ने इस नाम का इस्तेमाल कभी भी नहीं किया।
दीना, मुहम्मद अली जिन्ना और रतन बाई की इकलौती सन्तान थीं। उनका जन्म लंदन में 14 अगस्त, 1919 को आधी रात को हुआ। दीना के इस दुनिया में आने से जिन्ना को बहुत खुशी नहीं हुई. जिन्ना की क़रीबी दोस्त सरोजिनी नायडू ने लंदन में नवजात बच्ची को और उसकी मां रति (रतन बाई) से मिलने के बाद लिखा, “रती एक कमज़ोर पतंगे की तरह दिख रही थीं… वो बहुत खुश नहीं दिख रही थीं….”
कारण वही जो आज भी इसी श्रेणी की लड़कियाँ किसी मजहबी से शादी करने के बाद महसूस करती है।
जब दीना महज दो महीने की थीं, जिन्ना परिवार (मुंबई) लौट आया. दीना को नौकरों की देखरेख में छोड़ दिया गया जबकि दोनों दो दिशाओं में चल पड़े. इसके तुरंत बाद जिन्ना राजनीति में व्यस्त हो गए जबकि रती हैदराबाद में अपने दोस्त से मिलने चली गईं. वो अपने कुत्ते को साथ लेती गईं, लेकिन अपनी नवजात बेटी को वहीं छोड़ दिया।
छह साल की उम्र तक जिन्ना परिवार की ये इकलौती बच्ची बेनाम रही और एक नर्सरी के दायरे में बंद रही। उसके बाद का लंबा समय दीना के लिए बेहद कष्टप्रद रहा पर मुम्बई की ख्यात औद्योगिक परिवार की उनकी नानी लेडी पेटिट उनके लिए अवतार बन कर आगे आई जिसने उन्हें युवावस्था तक सम्हाला।
1938 में युवा दीना ने अपने पिता मुहम्मद अली जिन्ना से एक ग़ैर-मुसलमान आदमी नेविल वाडिया से शादी करने की इजाज़त माँगी। नेविल वाडिया उस वक़्त ईसाई थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपने पुश्तैनी पारसी धर्म को अपना लिया था।
अपनी एकलौती बेटी दीना के मूँह से शादी की बात सुनकर42 साल की आयु में 18 साल की छोटी आयु वाली रतनबाई से शादी करने वाले जिन्ना ने कहा कि 19 साल की उम्र उसके लिए काफी कम है और उसे एक अच्छे मजहबी लड़के के लिए इंतजार करना चाहिए!
जिन्ना ने अपनी बेटी को कहा कि भारत में लाखों योग्य मजहबी मुसलमान लड़के हैं जिनसे ब्याह कर वह अपने मजहब का पालन करते हुए सुखी और सम्मानित जीवन जी सकती है।
जिन्ना की बात से सन्न दीना अवाक थी !
उन्हें अपने पिता के असली मजहबी चरित्र को देख कर बेहद दुख हुआ।
अपने पिता के दोहरे चरित्र से आहत दीना ने कहा कि इण्डिया में लाखों मुसलमान लड़कियाँ थीं। फिर भी आपने एक पारसी लड़की से शादी क्यों की।
जिन्ना ने जवाब दिया कि वह मजहबी मुसलमान बन गयी थी। गुस्से में काँप रहे जिन्ना ने उससे पूछा कि क्या नेवल हमारे मज़हब को क़बूल कर मुसलमान बनने को तैयार है।
दीना ने कहा, नहीं !
लेकिन मैं उसी से शादी करूँगी।
जिन्ना ने कहा कि तब मैं तुम को अपनी बेटी नहीं कह सकता।
ये फैसला अब तुम्हे करना है कि तुम जिन्ना की बेटी कहलाना चाहती हो या एक गैर मजहबी की पत्नी !
टेक्सटाइल मिलों के मालिक वाडिया सभी तरह से एक योग्य वर थे, लेकिन जिन्ना का विरोध इस बात पर था कि वो मुसलमान नहीं हैं और इस वजह से ये उनके लिए एक राजनीतिक शर्मिंदगी का सबब था.
दीना ने अपने पिता के घोर विरोध के बावजूद नेविल वाडिया से शादी की और दीना वाडिया के नाम से जानीं गयीं। पाकिस्तान बनने के बाद वह भारत में ही रहीं। 1948 में जिन्ना की मौत के बाद वह अपने पिता को सपुर्द-ए-ख़ाक करने के मौके पर पाकिस्तान कुछ दिनों के लिये गयीं। उसके बाद भी वह एक बार पाकिस्तान की यात्रा पर गयीं थीं, लेकिन कभी भी पाकिस्तान की नागरिकता हासिल नहीं की।
कई सालों से वह न्यूयॉर्क के अपने घर में रह रही थीं और 2 नवम्बर 2017 को उनका देहांत हुआ। दीना वाडिया के बेटे नुस्ली वाडिया हैं, जो वाडिया ग्रुप के चेयरमैन हैं।
आज भी मजहबी चरित्र वही है जिसका अनुपालन, अकबर औरंगजेब ,जिन्ना या उसके जैसे असंख्य मजहबी लोग करते आये है पर फर्क यही है कि ये पहले से ज्यादा मारक और घातक हो चुका है #news #lovestory #trendingnow #story #Saadi #successstory #reels #izrael #foryouシ #viralphoto
