मोमिनों ने वैदिक रीति से शव को जलाने के बजाय में दफ़नाने को क्यों अच्छा बताया है क्योंकि इनको लैंड जिहाद जो करना है, शोध किया तो पता चला कि दिल्ली प्रान्त में 82 % हिन्दू रहते हैं और उनके शव दाह के लिए यहाँ केवल 56 शमशान घाट हैं जबकि 13 % मुस्लिमों के लिए 562 कब्रिस्तान हैं….!!
यदि इसी अनुपात में यदि हिन्दू शवों को दफ़नाने लग जाएँ तो 3500 अतिरिक्त कब्रिस्तानों की आवश्यकता पड़ेगी इसका कारण यह है कि एक कब्र में शव को कंकाल सहित पूरी तरह नष्ट होने में कई वर्षों का समय लग सकता है जबकि एक चिता में शव को भस्म होने में कुछ घण्टे का समय लगता है और अगला शव उसी जगह कुछ ही देर बाद जलाया जा सकता है…!!
अतः कई वर्षों की अवधि में जहाँ एक कब्र में केवल एक शव को दफनाया जा सकता है जबकि उतनी ही अवधि में एक ही जगह में हजारों शवों को जलाया जा सकता है और जलाया भी जा रहा है…!!
आप देख सकते हैं कि मुर्दों ने दिल्ली की बहुत सारी कीमती जमीन पर कब्ज़ा कर रखा है यदि उन सभी शवों को निकाल कर शमशान घाटों में जला दिया जाए और 562 कब्रिस्तानों की जगह पर स्कूल, कोलेज, अस्पताल और घर बना दिए जाएँ तो सभी नागरिकों का जबरदस्त फायदा होगा….!!
राम मन्दिर पर अस्पताल और स्कूल खोलने वाले कीड़े ज़बाब दे…!!