चीन का रोवर जनवरी 2019 से चांद पर चक्कर लगा रहा है और चीन के लिए वहां पर खोज कर रहा है जबकि हमारे रोवर को मात्र सात दिन ही हुए हैं और भारत के रोवर ने कई आश्चर्य जनक जानकारियां जुटा कर पूरे विश्व को दी है। सबसे बड़ी जानकारी यह है कि जहां रोवर विचरण कर रहा है वहां चांद की सतह पर 45 डिग्री टेंपरेचर है और जैसे ही रोवर ने ड्रिल करना शुरू किया तो प्रत्येक 1 सेंटीमीटर के बाद टेंपरेचर कम होना शुरू हो गया और 5-6 सेंटीमीटर नीचे जाते-जाते यह टेंपरेचर माइनस में आ गया। जिसका सीधा सीधा निष्कर्ष यह निकलता है कि चांद पर बर्फ है जो चांद के अंदरूनी भाग को ठंडा रखती है इसके साथ-साथ रोवर ने अन्य मिनरल्स के बारे में भी पता लगाया है जिनमें प्रमुख सल्फर और ऑक्सीजन है जो किसी भी ग्रह पर जीवन के लिए आवश्यक है। इसके अलावा हाइड्रोजन की खोज हमारा रोवर कर रहा है। इन सब खनिजों की खोज करने के लिए हमारा रोवर एक स्पेशल इंस्ट्रूमेंट जिसका नाम लिप लेजर होता है उसका इस्तेमाल कर रहा है और रोवर के द्वारा अभी तक ऑक्सीजन और सल्फर के अलावा अल्युमिनियम, कैल्शियम, मैगनीस, सोडियम, ओरगन, सिलिकॉन, टाइटेनियम आदि नौ धातुओं की तो खोज की जा चुकी है।
यहां मेरा यक्ष प्रश्न यह है कि चीन का कई वर्षों से घूम रहा रोवर क्या वहां पर घास छील रहा है या फिर उसने भी यह सब खोज कर ली है पर चीन ने विश्व को इसके बारे में भनक तक भी नहीं लगने दी।
शायद इसीलिए पूरा विश्व भारत पर विश्वास करता है और चीन को अव्वल दर्जे का दगाबाज मानता है।