याद होगा स्वामी प्रसाद मौर्य ने अधम शब्द पर बहुत तंज करके बोला था की रामायण नारी और दलित जाति की विरोधी है :- 👇
अधम ते अधम #अधम_अति_नारी। तिन्ह महँ मैं मतिमंद अघारी॥
भावार्थ:- जो अधम से भी अधम हैं, स्त्रियाँ उनमें भी अत्यंत अधम हैं, और उनमें भी हे पापनाशन! मैं मंदबुद्धि हूँ।
यह वाक्य शबरी मां स्वमं के लिए श्रीराम से कहती है की वह अधम (धर्महीन) पतित महिला है। स्वाभाविक रूप से हम किसी सिद्ध पुरुष के सामने इतने बौने हो जाते है की स्वमं को अति क्षुद्र समझने लगते हैं।
#स्पष्टीकरण …
श्रीरामचंद्र जी जवाब नही बताया बस एक लाइक पकड़ कर चिल्लाने लगा मौर्य
जाति पाँति कुल धर्म बड़ाई। धन बल परिजन गुन चतुराई॥
भगति हीन नर सोहइ कैसा। बिनु जल बारिद देखिअ जैसा॥
भगवान श्रीराम जी जवाब में कहते है:-
#जाति, #पाँति, कुल, धर्म, बड़ाई, धन, बल, कुटुम्ब, गुण और चतुरता- इन सबके होने पर भी #भक्ति_से_रहित मनुष्य कैसा लगता है, जैसे जलहीन बादल (शोभाहीन) दिखाई पड़ता है।
अर्थात भगवान राम भक्ति की महिमा का बखान करते कहते है की यदि किसी के पास दंभ हो तो भक्ति नही की जा सकती।
पुनः भेज रहा हूं…. राजनीति में लोग कितने अधम हो सकते है इसका यह उदाहरण है।
प्रणाम
फेसबुक ने इस समय ब्लॉक किया हुआ था इसलिए ट्विटर पर पोस्ट की थी