*इंदिरा गांधी द्वारा भारत को दिया गया एक जख्म जो युगो युगो तक भारत माफ नहीं करेगा।*
पाकिस्तान के सिंध राज्य के थारपाकर जिले के तीन तालुका भारत ने 1971 में जीत लिए थे और 6 महीने तक तीन तालुका के सभी गांव में बनासकांठा का कलेक्टर ही राजस्व वसूली करता था।
6 महीने के बाद पता नहीं क्या इंदिरा गांधी को चूल मची कि उन्होंने यह पूरा एरिया जो करीब 800 गांव थे कुल 3 तालुका थे जिसमें नगर पाकर खोखरापार डेरा कासिम उन्हें वापस पाकिस्तान को दे दिया।
थर पारकर, डिप्लो और मीठी एरिया को जीतने वाली आर्मी यूनिट के इंचार्ज ब्रिगेडियर भवानी सिंह (जयपुर रियासत के राजा) थे।
भारत के कन्ट्रोल में आने के बाद कच्छ (भुज) के तत्कालीन कलेक्टर गोपालस्वामी को थर पारकर का एडिशनल चार्ज दिया गया था जो बाद में भारत के चीफ इलेक्शन कमिश्नर के पद से निवृत हुए थे।
इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के जीते हुए विशाल एरिया जिनके कुछ हिस्से गुजरात के बनासकांठा में कुछ हिस्से गुजरात के कच्छ में तथा कुछ राजस्थान के बाड़मेर में मिला दिया गया था और जो 6 महीने तक भारत द्वारा शासित थे।
उन इलाकों को इंदिरा गांधी द्वारा पाकिस्तान को वापस देने के पीछे बड़ी रोचक कहानी है।
दरअसल अंग्रेजों ने पूरे विश्व में सबसे शानदार कैनाल सिस्टम पाकिस्तान के सिंध में बनाया था। आज भी अंग्रेजों के बनाए हुए कैनाल सिस्टम के दम पर पाकिस्तान पूरी दुनिया में सबसे शानदार कैनाल नेटवर्क वाला देश है।
सिंधु नदी के पानी को अंग्रेजों ने एक एक खेत तक इसलिए पहुंचाया था कि उस इलाके में गेहूं की खूब ज्यादा खेती हो सके और ब्रिटेन के मिलो को पास्ता और दूसरे फास्ट फूड बनाने के लिए रेगुलर गेहूं मिलता रहे।
जब इतना शानदार उपजाऊ प्रदेश भारत ने पाकिस्तान से छीन लिया तब पाकिस्तान ने अमेरिका के शरणों में गया।
उस वक्त पाकिस्तान और अमेरिका के बहुत अच्छे रिश्ते थे और 1971 में उस वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन थे।
रिचर्ड निक्सन ने इंदिरा गांधी को यह कहा कि आप अभूतपूर्व काम करते हुए यह सारे इलाके जो आपने पाकिस्तान से छीना है और जिसे आपने भारत में मिला लिया है उसे पाकिस्तान को वापस कर दो इसके बदले में हम आपको नोबेल शांति पुरस्कार दिलाएंगे और इस तरह से आप एक इंटरनेशनल लेवल की नेता बन जाएंगे और नोबेल शांति पुरस्कार से आपका नाम पूरी दुनिया में हो जाएगा।
इंदिरा गांधी निक्सन की बातों में आ गई और विशाल भूभाग जिसमें थारपारकर कार पारकर डेरा गाजी खान और मीरपुरखास के कुछ बड़े एरिया से वह सब के सब पाकिस्तान को वापस दे दिए और जब 3 महीने बाद नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा हुई उसमें इंदिरा गांधी का नाम नहीं था।
इंदिरा गांधी ने निक्सन को फोन किया कि आपने कहा था कि आप मुझे नोबल शांति पुरस्कार दिलवा कर विश्व स्तर का नेता बनाएंगे तब निक्सन ने कहा नोबेल शांति तो नहीं मैंने तुम्हारे लिए शानदार उपहार भेजा है वह तुम्हें जल्द मिल जाएगा।
इस तरह इंदिरा गांधी ने भारत के इतिहास की सबसे बड़ी मूर्खता की।
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