क्या आप जानते हैं कि 1962 के युद्ध में जब भारत को सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब एक परिवार ने अपना खजाना देश के लिए खोल दिया था?
कल जब हम महारानी कामसुंदरी देवी (दरभंगा राज की अंतिम महारानी) के निधन का समाचार सुन रहे हैं, तो यह सही समय है उस महान त्याग को याद करने का जिसे शायद आज की पीढ़ी भूलती जा रही है।
जब देश के लिए दान किया 600 किलो सोना!
1962 के भारत-चीन युद्ध के समय, दरभंगा के महाराजा कामेश्वर सिंह और उनके परिवार ने तत्कालीन प्रधानमंत्री की अपील पर 15 मन (लगभग 600 किलो) सोना देश के रक्षा कोष में दान कर दिया था। यह किसी भी नागरिक या परिवार द्वारा किया गया ऐतिहासिक और सबसे बड़ा दान था।
हवाई जहाज से लेकर जमीन तक सब न्योछावर
सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए उन्होंने:
* अपनी निजी कंपनी ‘दरभंगा एविएशन’ के 3 विमान सरकार को दे दिए।
* 90 एकड़ निजी जमीन हवाई पट्टी के लिए दान की, जिस पर आज का दरभंगा एयरपोर्ट गर्व से खड़ा है।
शिक्षा और संस्कृति की संरक्षक
महारानी कामसुंदरी देवी ने पिछले 64 वर्षों तक सादगी का जीवन जीते हुए मिथिला की संस्कृति को सहेजा। BHU से लेकर पटना यूनिवर्सिटी तक, इस परिवार की उदारता ने लाखों युवाओं का भविष्य बनाया।
आज जब हम राजनीति और समाज सेवा की बात करते हैं, तो दरभंगा राज का यह त्याग हमें याद दिलाता है कि ‘देश सबसे पहले’ होता है।
अपनी विरासत पर गर्व करें और जानें कि हमारे पूर्वजों ने इस देश को अपने खून और पसीने के साथ-साथ अपनी संपत्ति से भी सींचा है।
सत्ता और स्वार्थ से ऊपर उठकर ‘राष्ट्र सेवा’ का असली अर्थ दरभंगा राज के इस इतिहास में छिपा है।
विनम्र श्रद्धांजलि! महारानी कामसुंदरी देवी का जीवन और दरभंगा राज का त्याग युगों-युगों तक भारतवासियों को प्रेरित करता रहेगा। 🙏🇮🇳
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