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#बांका में बापू
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महात्मा गांधी आज के दिन ही सन 1925 में बांका आए थे। वो यहाँ एक रात और 2 दिन रुके थे। यहाँ उन्होंने 2 और 3 अक्तूबर को आयोजित कांग्रेस के जिला अधिवेशन को संबोधित किया था। तब भागलपुर जिले के अंदर ही बांका एक सब-डिवीजन था। यह जिला कांग्रेस की सालाना बैठक थी जो जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में तब आयोजित की जाती थी जिसमें इस बार बारी बांका की थी। इस दौरान वे बांका के समीप ककवारा स्टेट में ठहरे थे जहां उनके साथ तत्कालीन जिला कांग्रेस अध्यक्ष बाबू कमलेश्वरी सहाय भी थे। इस आवभगत का श्रेय उन्होंने बांका की जनता को दिया था और खिलाफ़त आंदोलन को सफल बनाने के लिए हर स्तर से मदद का आह्वान किया था। तब कांग्रेस का बांका कार्यालय वर्तमान में जिलाधिकारी आवास के आसपास हुआ करता था। गांधीजी के आगमन के बाद इस कार्यालय को ‘गांधी आश्रम’ कहा जाने लगा।

बापू यहाँ भागलपुर के 2 दिनों के प्रवास के बाद बांका आए थे। भागलपुर में 1 अक्तूबर 1925 को उन्होंने प्रोविंसियल मारवाड़ी कान्फ्रेंस में शिरकत की थी इसके बाद ‘बंगाली समाज’ के कार्यालय में गए थे। यात्रा के दूसरे दिन उन्होंने यहाँ महिलाओं को संबोधित किया और सक्रिय भागीदारी की प्रार्थना की।  

बापू अमरपुर होते हुए बांका आए थे। अमरपुर में उनका भव्य स्वागत हुआ था लेकिन वे वहाँ रुके नहीं।

3 अक्तूबर को ही बांका से वे देवघर के लिए प्रस्थान कर गए। यहाँ भी उन्होंने एक सभा को संबोधित किया। इस दिन उन्होंने रात्रि विश्राम टाऊन हाल में किया। वहाँ से वे 4 अक्तूबर को मधुपुर होते हुए गिरिडीह निकल गए।

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