एक बार की बात है.
शेर को भूख लगी तो उसने लोमड़ी से कहा – मेरे लिए कोई शिकार ढूंढकर लाओ अन्यथा मैं तुम्हें ही खा जाऊँगा…
शेर की बात सुनकर लोमड़ी एक गधे के पास गई और बोली – कहाँ तुम जंगल में फालतू का इतना मेहनत करते रहते हो.
इसीलिए, तुम मेरे साथ शेर के समीप चलो…
क्योंकि, वो तुम्हें जंगल का राजा बनाना चाहता है…
फिर तुम पूरी जिंदगी आराम से बैठ कर खाना और दूसरों पर हुक्म चलाना.
गधा… लोमड़ी की बात में आकर शेर के पास गया…!
उधर…. शेर ने गधे को देखते ही उस पर हमला करके उसके कान काट लिए…
लेकिन, गधा किसी प्रकार अपनी जान बचाकर वहाँ से भागने में सफल रहा.
वहाँ से भागकर गधे ने लोमड़ी से कहा – तुमने मुझे धोखा दिया..
तुम तो कह रही थी कि शेर मुझे राजा बनाना चाहता है.
लेकिन, वहाँ जाने पर तो शेर ने तो मुझे मारने का प्रयास किया.
और , देखो कि उसने झपट्टा मार कर मेरा कान भी काट लिया है.
इस पर लोमड़ी ने कहा – मूर्खता भरी बातें मत करो…
उसने तुम्हारे कान इसीलिए काट लिए ताकि तुम्हारे सिर पर ताज सुगमता पूर्वक पहनाया जा सके… समझे… ???
आओ.. चलो लौट चलें.. शेर के पास…
गधे को यह बात थोड़ी ठीक लगी…
इसीलिए, वह पुनः लोमड़ी के साथ शेर के पास चला गया…
उसके पहुंचते ही शेर ने फिर गधे पर हमला किया तथा इस बार उसकी पूँछ काट ली…
गधा, फिर किसी तरह जान बचाकर वहाँ से भागा और जाते ही लोमड़ी पर बरस पड़ा कि –
तुमने मुझसे फिर झूठ कहा… इस बार शेर ने तो मेरी पूँछ भी काट ली…!
इस पर लोमड़ी ने गधे से कहा – अरे, पगलाओ मत ज्यादा.
शेर ने तो तुम्हारी पूँछ इसीलिए काट ली ताकि तुम सिंहासन पर सहजतापूर्वक बैठ सको.
इतनी सी बात भी नहीं समझ आती है ???
चलो पुनः उसके पास चलते हैं…
इस प्रकार लोमड़ी ने गधे को फिर से लौटने के लिए मना लिया…
और, इस बार सिंह गधे को पकड़ने में सफल रहा और उसे मार डाला…
गधे को मारने के बाद शेर ने लोमड़ी से कहा – जाओ…
इसकी चमड़ी उतार कर इसका दिमाग फेफड़ा और हृदय मेरे पास ले आओ और बचा हुआ अंश तुम खा लो…
लोमड़ी ने गधे की चमड़ी निकाली और गधे का दिमाग खा लिया और केवल फेफड़ा तथा हृदय शेर के पास ले गई.
इस पर शेर ने गुस्से में आकर पूछा – इसका दिमाग कहाँ गया ???
लोमड़ी ने जवाब दिया- महाराज…!
इसके पास तो दिमाग था ही नहीं…
अगर, इसके पास दिमाग होता तो कान और पूँछ कटने के उपरान्त भी ये आपके पास फिर से वापस थोड़े न आता…
शेर बोला – हाऔ…
तुम पूर्णतया सत्य बोल रही हो…
यह हर उस हिनू गधे की कहानी है जो 1000 वर्षों से अधिक समय से सभी हिनूओं को खत्म करने के बारम्बार षड्यंत्र होने के बाद भी आज कुछेक लोमड़ी मठाधीशों की मोई मौलाना, वजीफा आदि की कहानी में विश्वास करता है…!
और, उनकी बातों में आकर वो पुनः उसी के साथ जुड़ने को आतुर दिखता है जिसने बारंबार उस पर हमला करके कभी उसे उसके राममंदिर से वंचित कर दिया..
तो, कभी धारा 370 लगाकर कश्मीर को उससे छीनने का प्रयास किया.
यहाँ तक कि… कानून बनाकर मंदिरों के धन पर भी अपना अधिकार जमा लिया..
एवं, धर्मनिरपेक्षता के नाम पर स्कूलों में हमारे धार्मिक ग्रंथों को प्रतिबंधित कर दिया.
सिर्फ इतना ही नहीं…. बल्कि आज भी उनके लोगों द्वारा सरेआम हिनू जनमानस एवं आराध्यों का अपमान करते हुए खुलेआम देखा जा सकता है.
फिर भी…. लोग तो लोग हैं…!
लोमड़ी ने बिल्कुल सही कहा था कि….
महाराज…!
इसके पास तो दिमाग था ही नहीं…
अगर, इसके पास दिमाग होता तो इतना कुछ गँवाने के उपरांत भी ये आपके पास फिर से वापस थोड़े न आता…!!