मैं आपको दिखा रहा हूं इतिहास के अंधेरों में गुम हुई एक शौर्य गाथा की जीती जागती इमारत।
मेरे इंगित पर जो यह इमारत खड़ी है इसे अकबर के मकबरे के रूप में जाना जाता है।
जबकि इसकी पहचान होनी चाहिए राजाराम जाट के शौर्य के प्रतीक के रूप में।
जी हां
एक ऐसा इतिहास, जो इतिहास की अंधेरी गलियों में कहीं गुम हो गया।
जिसे अकबर का मकबरा प्रचारित किया जा रहा है, उस कब्र में कोई शरीर है ही नहीं।
राजाराम जाट ने आगरा पर हमला करके, अकबर की कब्र खोदकर उसकी हड्डियों में आग लगा दी थी और राख को जमना में फेंक दिया था।
क्या आप इसे ऐसी घटना मानते हैं जिसे इतिहास में प्रमुखता नहीं दी जानी चाहिए ?
क्या आप इसे इतिहास की ऐसी घटना मानते हैं जिस पर हिंदुओं को गर्व नहीं करना चाहिए ?
हमे हमारे उन सब पूर्वजों के इतिहास से दूर रखा गया जिन्होने वास्तव में इतिहास बनाया।
और पढ़ाया गया अकबर महान था।
