पिताजी के पिताजी के लिए संज्ञा है, दादाजी दादाजी के पिताजी के लिए भी संज्ञा है परदादाजी,
माता के पिताजी के लिए संज्ञा है नानाजी, नानाजी के पिताजी के लिए भी संज्ञा है परनानाजी,
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दादीजी के पिताजी एवं दादीजी के पिताजी के पिताजी के लिए, भारतीय विशेष कर हिंदू समाज में कोई संज्ञा नहीं है,
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तो जब राहुल गांधी कहते हैं कि मेरी दादी, तब समझ में आता है इंदिरा जी, जब कहते हैं मेरे दादाजी तब भी समझ में आता है फिरोज गांधी, पर जब वह कहते हैं कि मेरे परदादा जी, तब वह इस बात को कहना चाहते हैं, नेहरू जी के लिए लेकिन वास्तव में उनके परदादा जी नेहरू जी नहीं बल्कि फिरोज गांधी के पिताजी होते हैं,
इस छोटी सी बात को कांग्रेसी थिंकटैंक का कोई सदस्य, राहुल गांधी को क्यों नहीं समझता?