Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🙇‍♂🙇‍♂🙇‍♂🙇‍♂🙇‍♂🙇‍♂🙇‍♂🙇‍♂🙇‍♂🙇‍♂

आज का प्रेरक प्रसंग
👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽

🔥क्रोध पर विजय🔥

बहुत प्राचीन बात है। किसी गाँव में एक बुर्जुग महात्मा रहते थे। दूर-दूर से लोग शिक्षा गृहण करने के उद्देश्य से अपने बच्चों को उनके आश्रम में भेजते थे। एक दिन महात्मा जी के पास कमल नाम का एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति आया।

‘गुरु जी मुझे अपने श्रीचरणों में जगह दे दीजिए। अब मेरी कोई कामना बाकी नहीं रही है। मैं आश्रम में रहकर आपके आज्ञानुसार समाज को अभी तक प्राप्त किया हुआ ज्ञान वितरित करना चाहता हूँ।‘ पारखी वृद्ध महात्मा ने एकदम समझ लिया कि यह व्यक्ति काबिल है, इसकी कामना सच्ची है और यह समाज के प्रति अपने दायित्व को निभाने के लिए कृतसंकल्पित है।

कमल उनके चरणों में गिरकर प्रार्थना किये जा रहा था-गुरु जी! मुझे अपने श्रीचरणों में स्थान दें।

महात्मा जी ने कहा-‘पुत्र! आश्रम की परम्परा है कि तुम स्नान करके पवित्र हो और भगवान के आगे संकल्प धारण करो कि अपना कृतव्य सही तरीके से निभाओगे। अतः इस कार्य के लिए तुम कल प्रातः स्नान करके आश्रम आ जाना।’

उसके जाते ही वृद्ध महात्मा जी ने साफ-सफाई का कार्य करने वाली महिला को अपने पास बुलाया और कहा ‘कल सुबह यह नया शिक्षक आयेगा। जैसे ही यह आश्रम के नजदीक आये, तुम इस प्रकार से झाड़ू लगाना कि उसके चेहरे पर धूल गिर जाए। लेकिन यह कार्य थोड़ा सावधानी से करना। वह तुम पर हाथ भी छोड़ सकता है। महिला महात्मा जी की बहुत सम्मान करती थी। उसने उनकी आज्ञा को सहर्ष स्वीकार कर लिया।

अति प्रसन्न मुद्रा में कमल नहा-धोकर इठलाता हुआ आश्रम आने लगा। जैसे ही वह नजदीक पहुँचा, महिला ने तेजी से झाड़ू लगाना शुरू कर दिया। कमल के पूरे चेहरे में धूल चली गई। उसके क्रोध की सीमा न रही। पास पड़े पत्थर को उठाकर वह महिला को मारने के लिए दौड़ा। महिला पहले ही सावधान थी। वह झाड़ू फैंक-फांक के वहाँ से भाग खड़ी हुई। अधेड़ के मुख में जो आया बकता चला गया।

कमल वापिस घर गया और दुबारा स्नान करके महात्मा के पास लौटा।

महात्मा जी ने कहा-‘अभी तो तुम जानवरों के समान लडने के लिए दौड़ते-चिल्लाते हो। तुमसे अभी यहाँ शिक्षण कार्य नहीं होगा। तुम एक वर्ष के बाद आना तब तक जो कार्य करते हो वही करते रहो।’

कमल की इच्छा सच्ची थी। उसकी महात्मा में श्रद्धा भी सच्ची थी। वर्ष पूरा होते ही वह फिर महात्मा जी के समीप उपस्थित हुआ।

महात्मा जी ने आदेश दिया- ‘पुत्र तुम कल स्नान करके प्रातः आना।’

कमल के जाते ही महात्मा जी ने सफाई कर्मचारी को बुला कर कहा-‘वह फिर आ रहा है। इस बार मार्ग में झाड़ू इस तरह से लगाना कि धूल के साथ-साथ उस पर झाड़ू की हल्की सी चोट भी लग जाए। डरना मत, वह तुम्हें मारेगा नहीं। कुछ भी बोले तो चुपचाप सुनते रहना।’

अगले दिन स्नान-ध्यान करके वह व्यक्ति जैसे ही द्वार तक पहुंचा। महिला झाड़ू लगाते हुए पहुंच गयी। महिला ने आदेशानुसार जानबूझकर झाड़ू उस पर इस प्रकार से छुआ कि कपड़े भी गंदे हो गये।

कमल को बहुत क्रोध आया, पर झगड़ने की बात उसके मन में नहीं आयी। वह केवल महिला को गालियाँ बक कर फिर स्नान करने घर लौट गया।

जब वह महात्मा जी के पास वापिस पहुंचा, संत ने कहा-‘तुम्हारी काबिलियत में मुझे संदेह है। एक वर्ष के बाद यहाँ आना।’

एक वर्ष और बीत गया। कमल महात्मा जी के पास आया। उसे पूर्व के भांति स्नान-ध्यान करके आने की आज्ञा मिली।

महात्मा जी ने उसके जाते ही उसी महिला को फिर बुलाया- ‘इस बार सुबह जब वह आये तो तुम इस बार अपनी कचड़े की टोकरी उस पर उड़ेल देना।’

साफ-सफाई करने वाली महिला डर गयी।

महिला ने कहा- ‘वह तो अति कठोर स्वभाव का है। ऐसा करने पर तो वह अत्यंत क्रोधित होगा और मार-पीट पर उतर जायेगा।’

महात्मा जी ने उसे आश्वासन दिया-‘चिन्ता मत करो। इस बार वह कुछ नहीं कहेगा। इसलिए तुम्हें भागने की आवश्यकता नहीं है।’

सुबह जैसे ही कमल आश्रम पहुँचा। महिला ने अनजान बनकर पूरा कूड़ा-कचरा उस पर उड़ेल दिया।

पर यह क्या! इस बार न तो वह गुस्सा हुआ और न ही मार-पीट के लिए दौड़ा।

कमल ने कहा- ‘माता! आप मेरी गुरु हैं। ’

कमल ने महिला के सामने अपना मस्तक झुका कर कहा… ‘आपने मुझ मूर्ख-अभिमानी पर अति कृपा की है।

आपके सहयोग से मैंने अपने बड़प्पन के अहंकार और क्रोध-रूपी शत्रु पर विजय प्राप्त की है।

वह दुबारा घर गया। स्नान करके आश्रम में उपस्थित हुआ।

इस बार महात्मा जी ने उसे गले लगा लिया और बोले- ‘पुत्र! तुमने अपने क्रोध पर काबू पा लिया है अतः अब तुम आश्रम में कार्य करने के सच्चे अधिकारी हो।

🎀🎀🎀🎀🎀🎀🎀🎀🎀

Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

चार आने का हिसाब

बहुत समय पहले की बात है , चंदनपुर का राजा बड़ा प्रतापी था , दूर-दूर तक उसकी समृद्धि की चर्चाएं होती थी, उसके महल में हर एक सुख-सुविधा की वस्तु उपलब्ध थी पर फिर भी अंदर से उसका मन अशांत रहता था। उसने कई ज्योतिषियों और पंडितों से इसका कारण जानना चाहा, बहुत से विद्वानो से मिला, किसी ने कोई अंगूठी पहनाई तो किसी ने यज्ञ कराए , पर फिर भी राजा का दुःख दूर नहीं हुआ, उसे शांति नहीं मिली।

एक दिन भेष बदल कर राजा अपने राज्य की सैर पर निकला। घूमते- घूमते वह एक खेत के निकट से गुजरा , तभी उसकी नज़र एक किसान पर पड़ी , किसान ने फटे-पुराने वस्त्र धारण कर रखे थे और वह पेड़ की छाँव में बैठ कर भोजन कर रहा था।

किसान के वस्त्र देख राजा के मन में आया कि वह किसान को कुछ स्वर्ण मुद्राएं दे दे ताकि उसके जीवन मे कुछ खुशियां आ पाये।

राजा किसान के सम्मुख जा कर बोला – ” मैं एक राहगीर हूँ , मुझे तुम्हारे खेत पर ये चार स्वर्ण मुद्राएँ गिरी मिलीं , चूँकि यह खेत तुम्हारा है इसलिए ये मुद्राएं तुम ही रख लो। “

किसान – ” ना – ना सेठ जी , ये मुद्राएं मेरी नहीं हैं , इसे आप ही रखें या किसी और को दान कर दें , मुझे इनकी कोई आवश्यकता नहीं। “

किसान की यह प्रतिक्रिया राजा को बड़ी अजीब लगी , वह बोला , ” धन की आवश्यकता किसे नहीं होती भला आप लक्ष्मी को ना कैसे कर सकते हैं ?”

“सेठ जी , मैं रोज चार आने कमा लेता हूँ , और उतने में ही प्रसन्न रहता हूँ… “, किसान बोला।

“क्या ? आप सिर्फ चार आने की कमाई करते हैं , और उतने में ही प्रसन्न रहते हैं , यह कैसे संभव है !” , राजा ने अचरज से पुछा।

” सेठ जी”, किसान बोला ,” प्रसन्नता इस बात पर निर्भर नहीं करती की आप कितना कमाते हैं या आपके पास कितना धन है …. प्रसन्नता उस धन के प्रयोग पर निर्भर करती है। “

” तो तुम इन चार आने का क्या-क्या कर लेते हो ?, राजा ने उपहास के लहजे में प्रश्न किया।

किसान भी बेकार की बहस में नहीं पड़ना चाहता था उसने आगे बढ़ते हुए उत्तर दिया , ”
इन चार आनो में से एक मैं कुएं में डाल देता हूँ , दुसरे से कर्ज चुका देता हूँ , तीसरा उधार में दे देता हूँ और चौथा मिटटी में गाड़ देता हूँ ….”

राजा सोचने लगा , उसे यह उत्तर समझ नहीं आया। वह किसान से इसका अर्थ पूछना चाहता था , पर वो जा चुका था।

राजा ने अगले दिन ही सभा बुलाई और पूरे दरबार में कल की घटना कह सुनाई और सबसे किसान के उस कथन का अर्थ पूछने लगा।

दरबारियों ने अपने-अपने तर्क पेश किये पर कोई भी राजा को संतुष्ट नहीं कर पाया , अंत में किसान को ही दरबार में बुलाने का निर्णय लिया गया।

बहुत खोज-बीन के बाद किसान मिला और उसे कल की सभा में प्रस्तुत होने का निर्देश दिया गया।

राजा ने किसान को उस दिन अपने भेष बदल कर भ्रमण करने के बारे में बताया और सम्मान पूर्वक दरबार में बैठाया।

” मैं तुम्हारे उत्तर से प्रभावित हूँ , और तुम्हारे चार आने का हिसाब जानना चाहता हूँ; बताओ, तुम अपने कमाए चार आने किस तरह खर्च करते हो जो तुम इतना प्रसन्न और संतुष्ट रह पाते हो ?” , राजा ने प्रश्न किया।

किसान बोला ,” हुजूर , जैसा की मैंने बताया था , मैं एक आना कुएं में डाल देता हूँ , यानि अपने परिवार के भरण-पोषण में लगा देता हूँ, दुसरे से मैं कर्ज चुकता हूँ , यानि इसे मैं अपने वृद्ध माँ-बाप की सेवा में लगा देता हूँ , तीसरा मैं उधार दे देता हूँ , यानि अपने बच्चों की शिक्षा-दीक्षा में लगा देता हूँ, और चौथा मैं मिटटी में गाड़ देता हूँ , यानि मैं एक पैसे की बचत कर लेता हूँ ताकि समय आने पर मुझे किसी से माँगना ना पड़े और मैं इसे धार्मिक ,सामजिक या अन्य आवश्यक कार्यों में लगा सकूँ। “

राजा को अब किसान की बात समझ आ चुकी थी। राजा की समस्या का समाधान हो चुका था , वह जान चुका था की यदि उसे प्रसन्न एवं संतुष्ट रहना है तो उस भी अपने अर्जित किये धन का सही-सही उपयोग करना होगा।

मित्रों, देखा जाए तो पहले की अपेक्षा लोगों की आमदनी बढ़ी है पर क्या उसी अनुपात में हमारी प्रसन्नता भी बढ़ी है ? पैसों के मामलों में हम कहीं न कहीं गलती कर रहे हैं , जीवन को स्थिर बनाना ज़रूरी है और इसके लिए हमें अपनी आमदनी और उसके इस्तेमाल पर ज़रूर गौर करना चाहिए, नहीं तो भले हम लाखों रूपये कमा लें पर फिर भी प्रसन्न एवं संतुष्ट नहीं रह पाएंगे !
* 🙏🏻जय श्री राधे कृष्णा 🙏🏻*

Posted in ज्योतिष - Astrology

😈😈😈😈😈😈

तन्त्र मन्त्र यन्त्र ग्रुप
की सादर भेंट
😈😈😈😈😈😈
अलौकिक विज्ञान का एक महत्वपूर्ण ग्रुप
👉🏽👉🏽👉🏽👉🏽👉🏽👉🏽
हँस जैन रामनगर खण्डवा
98272 14427
🌚🌚🌚🌚🌚🌚

आज शनिश्चरी अमावस्या,पितृ अमावस्या पर क्या करें
🌚🌚🌚🌚🌚🌚

दोस्तों,

आज शनिश्चरी अमावस्या, पितृ मोक्ष अमावस्या एवं भूतड़ी अमावस्या है। आज तन्त्र विद्या में कई प्रयोग किये जाते हैं, जिसके अशुभ परिणाम हम सब पर भी हो सकते हैं ।

वर्तमान वैज्ञानिक युग में तंत्र-मंत्र और तांत्रिक क्रिया की बात बेमानी लगती है। इस पर यकीन करना वैज्ञानिक तथ्‍यों और सुबूतों के सामने बेहद मुश्‍किल है, लेकिन कुछ घटनाएं ऐसी भी होती है जिनका जवाब मेडिकल साइंस और विज्ञान दोनों के पास नहीं मिलता। ऐसी स्‍थिति में व्‍यक्‍ति का विश्‍वास दूसरी ओर जाता है। जीवन में कई बार ऐसा समय आता है, जब ग्रहों की स्थिती में इस कदर बदलाव आता है की व्यक्ति का जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। ऐसे में वो इधर-उधर भटकता है, स्वयं का अच्छा करने के चक्कर में वो दूसरे का बुरा करने से भी नहीं चूकता।

दोस्तों की भीड़ में दुश्मनों को पहचानना मुश्किल हो जाता है. आप नहीं समझ सकते कि कब कौन आपके पीठ पीछे वार कर आपको धोखा देकर चला जाए. दोस्ती और प्यार के नाम पर दगा देने वाले भी बहुत लोग होते हैं.

आपकी कोई बात किसी को कितनी बुरी लग गई और इसका बदला लेने के लिए वो किस हद तक पहुंच जाएगा आप इस बात का अंदाजा भी नहीं लगा सकते | ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार जब अचानक से आपका अच्छा समय बुरे समय में बदल जाता है तो ऐसी संभावनाएं हो सकती हैं कि आपको या आपके घर को किसी की बुरी नजर लग गई हो। कई बार किसी की सफलता और समृद्धि से जलने वाले लोग उन्हें क्षति पहुंचाने के लिए टोने-टोटके या तंत्र-मंत्र जैसी नकारात्मक शक्तियों का उपयोग करते हैं। इन नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव से एकदम ही सबकुछ गड़बड़ हो जाता है।

हम कैसे बचें
😈😈😈😈😈
भूत-प्रेत की अथवा बाहरी बाधा को दूर करने के लिए शनिवार के दिन करने का एक टोटका बहुत ही सरल उपाय है, जिसके करने से समुचित लाभ तुरंत मिलता है। उसके लिए दोपहर में सवा किलो बाजरे का दलिया पका लें। उसमें थोड़ा गुड़ मिला दें। उसे एक मिट्टी की हांडी में रखकर उससे सूर्यास्त के बाद प्रेत से प्रभावित व्यक्ति के पूरे शरीर पर घड़ी की विपरीत दिशा में अर्थात बाएं से दाएं सात बार घुमाते हुए नजर उतारें। लोगों की नजर बचाकर हांडी को किसी सुनसान चैराहे पर रख दें और वापस घर लाटते समय न तो पीछे मुड़कर देखें और न ही किसी के रास्ते में कोई बात करें।

कुछ और उपाय
👉🏽👉🏽👉🏽👉🏽👉🏽👉🏽

कई बार पूरा घर ही प्रेतात्मा की चपेट में आ जाता है और इससे घर के कई सदस्य अज्ञात परेशानियों से घिर जाते हैं। उसे दूर करने के लिए जलते हुए गोबर के उपले के साथ गुग्गल की धूनी जलाने से प्रेत-बाधा खत्म हो जाती है। परिवार के सभी सदस्य इसके भभूत का तिलक लगाएं। घर को प्रेत-बाधा से मुक्त करने के लिए ओम के प्रतीक का त्रिशूल दरवाजे पर लगाना भी एक अचूक उपाय है।

😈😈😈😈😈😈

नींबू के प्रयोग
☘☘☘☘☘☘

अगर बीमारी पीछा नहीं छोड़ रही है तो तीन पके हुए नींबू लेकर एक को नीला एक को काला तथा तीसरे को लाल रंग कि स्याही से रंग दे। अब तीनों नीबुओं पर एक एक साबुत लौंग गांड दें। इसके बाद तीन मोटी चूर के लड्डू लेकर तथा तीन लाल पीले फूल लेकर एक रुमाल में बांध दें। अब प्रभावित व्यक्ति के ऊपर से सात बार उबार कर बहते जल में प्रवाहित कर दें। ध्यान रहे प्रवाहित करते समय आसपास कोई खड़ा न हो।

काले तिल के प्रयोग
🕸🕸🕸🕸🕸🕸

आज पूरे दिन रात काले कपड़े में काले तिल बांधकर अपनी जेब में रखें। कल उसे दिन में जलती आग में उन्हें डाल दें। इससे कोई तंत्र का प्रभाव आप पर काम नहीं करेगा।

जायफल से शत्रु नाश
🌘🌘🌘🌘🌘🌘

अगर आपका शत्रु परेशान कर रहा है और हर कार्य में अड़ंगा डाल रहा है तो शत्रु का नाम लेकर दो जायफल कपूर से जलाकर उसकी राख को नाले में बहा दें। ऐसा करने से शत्रु आपको परेशान करना बन्द कर देता है।

इस पोस्ट का ये उद्देश्य नही की आप भूत प्रेत बाधा ऊपरी हवा आदि से डरे। इस पोस्ट के माध्य्म से बस यही कहना चाहता हूं कि स्वयं की एवम परिवार की सुरक्षा हम करें क्योंकि आज साथ देने वाले कम और खींचने वाले ज्यादा है।आपके पीठ पीछे आपके लिये कौन सी चाल कौन चल रहा पता नही चलेगा।

हँस जैन रामनगर खण्डवा मध्यप्रदेश
98272 14427

तन्त्र मन्त्र यन्त्र ग्रुप

🤢😈🌑🌒🌖😈

Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

मांग


https://shreejisecuresofttech.blogspot.com/2019/03/blog-post_11.html

Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

👌🏼 शानदार फैसला ✅✅

“पिताजी ! पंचायत इकठ्ठी हो गई, अब बँटवारा कर दो।” अमरचंद जी के बड़े लड़के ने रूखे लहजे में कहा।

“हाँ पिताजी ! कर दो बाँटवारा अब इकठ्ठे नहीं रहा जाता” छोटे लड़के भंवर लाल ने भी उसी लहजे में कहा।

“जब साथ में निबाह न हो तो औलाद को अलग कर देना ही ठीक है, अब यह बताओ तुम किस बेटे के साथ रहोगे ?” सरपंच ने अमरचंद जी के कन्धे पर हाथ रख कर के पूछा।

“अरे इसमें क्या पूछना, छ: महीने पिताजी मेरे साथ रहेंगे और छ: महीने छोटे भंवर लाल के पास रहेंगे।”

” चलो तुम्हारा तो फैसला हो गया, अब करें जायदाद का बँटवारा !” सरपंच बोला।

अमरचंद जी जो काफी देर से सिर झुकाये बैठा था, एकदम उठ के खड़ा हो गया और चिल्ला के बोला,

” कैसा फैसला हो गया, अब मैं करूंगा फैसला, इन दोनों लड़कों को घर से बाहर निकाल कर !,”

“छः महीने बारी बारी से आकर मेरे पास रहें, और छः महीने कहीं और इंतजाम करें अपना….”

“जायदाद का मालिक मैं हूँ यह नहीं।”

दोनों लड़कों और पंचायत का मुँह खुला का खुला रह गया, जैसे कोई नई बात हो गई हो…..

उदाहरण-
इसे कहते हैं फैसला
फैसला औलाद नहीं करती फैसला मां-बाप करते हैं ।🙏🙏🌹🌹😂😃😭🙏🙏

Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🌹🌹 एक सुंदर सीख🌹🌹

एक पत्नी ने अपने पति से आग्रह किया कि वह उसकी छह कमियाँ बताए .. जिन्हें सुधारने से वह बेहतर पत्नी बन जाए..

पति यह सुनकर हैरान रह गया और असमंजस की स्थिति में पड़ गया,

उसने सोचा कि मैं बड़ी आसानी से उसे 6 ऐसी बातों की सूची थमा सकता हूँ , जिनमें सुधार की जरूरत थी और ईश्वर जानता है कि वह ऐसी 60 बातों की सूची थमा सकता था , जिसमें सुधार की जरूरत थी..

परंतु पति ने ऐसा नहीं किया और कहा –
‘मुझे इस बारे में सोचने का समय दो ,
मैं तुम्हें सुबह इसका जबाब दे दूँगा.’

पति अगली सुबह जल्दी ऑफिस गया और फूल वाले को फोन करके उसने अपनी पत्नी के लिए छह गुलाबों का तोहफा भिजवाने के लिए कहा जिसके साथ यह चिट्ठी लगी हो,
“मुझे तुम्हारी छह कमियाँ नहीं मालूम, जिनमें सुधार की जरूरत है..
तुम जैसी भी हो मुझे बहुत अच्छी लगती हो.”

उस शाम पति जब आफिस से लौटा तो देखा कि..
उसकी पत्नी दरवाज़े पर खड़ी उसका इंतज़ार कर रही थी,
उसकी आंखौं में आँसू भरे हुए थे, यह कहने की जरूरत नहीं कि उनके जीवन की मिठास कुछ और बढ़ गयी थी।

पति इस बात पर बहुत खुश था कि पत्नी के आग्रह के बावजूद उसने उसकी छह कमियों की सूची नहीं दी थी..
इसलिए यथासंभव जीवन में
सराहना करने में कंजूसी न करें और
आलोचना से बचकर रहने में ही समझदारी है।

“ज़िन्दगी का ये हुनर भी,
आज़माना चाहिए,
जंग अगर अपनों से हो,
तो हार जाना चाहिए..

पसीना उम्र भर का उसकी गोद में सूख जाएगा…
हमसफ़र क्या चीज है ये बुढ़ापे में समझ आएगा..!!

शुभरात्री सभी दोस्तो को
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

બાજ પક્ષી પોતાના બચ્ચા ના જન્મ પછી થોડા જ સમય માં એને પોતાની પાખો માં સમેટી ને ઉપર આકાશ માં લઈ જાય છે…..એટલું ઊચે કે જ્યાં વિમાન ઉડતા હોય…

આટલે ઉપર જઇ ને એ સ્થિર થઈ જાય છે…A highest distance from earth where a natural creature can fly…અને પછી શરૂ થાય છે ખતરનાક ટ્રેનીંગ…

એક એવી ટ્રેનીંગ કે જેમાં બાજ પક્ષી પોતાના બચ્ચા ને એ સમજાવવા માગે છે કે એ કોઈ સામાન્ય પક્ષી નથી અને એનું કામ આસમાન ની બુલંદીએ ઊડવાનું છે નહીં કે મકાનની છત પર બેસીને ચુ-ચુ કરવાનું… પછી એ બચ્ચાને આટલી ઊચાઈએ થી છૂટું મૂકી દેવામાં આવે છે…

આટલી ઊચાઇએ થી નીચે પડતી વખતે બચ્ચાને એ સમજાતું નથી કે મારી સાથે આ શું થઈ રહ્યું છે !!!

થોડું નીચે આવવા થી બચ્ચા ની પાંખ ખુલવા લાગે છે અને ધરતી થી અંદાજે 9 કિલોમીટર ઉપર સુધી માં એની પૂરી પાંખો ખૂલી જાય છે અને એ પાંખ ફફડાવે છે એટ્લે એને એહસાસ થાય છે કે એ કોઈ સામાન્ય પક્ષી તો નથી જ !!!

એ હજુ વધુ નીચે આવે છે પણ હજુ એની પાંખ એટલી સક્ષમ તો નથી જ કે એ ઊડી શકે અને જમીન થી 700-800 મીટરે ઊચાઇ થી નીચે પડતી વખતે એને એમ લાગવા લાગે છે કે આ એની જિંદગી ની આખરી સફર છે ત્યાં જ અચાનક એક મહાકાય પંજો એને પોતાની બાહોમાં લઈ લ્યે છે અને એ પંજો એની માં નો જ હોય છે જે એને નીચે પડતું મૂક્યા પછી એની સાથે જ આવતી હોય છે !!!

આવી ટ્રેનીંગ બાજ પક્ષી એના બચ્ચા ને ત્યાં સુધી આપ્યા રાખે છે જ્યાં સુધી એ બરાબર ઉડતા ના શીખી જાય…

મિત્રો આવી રીતે તૈયાર થાય છે એક મહાન બાજ પક્ષી જે આસમાન માં રાજ કરે છે અને એના થી 10 ગણા વધુ વજન વાળા પક્ષી ને પણ ઉપાડી ને આસમાનની બુલંદીયો સર કરે છે !!!

આ વાર્તા કે જે એક સત્ય હકીકત છે એ અહી કહી ને હું તમામ માં બાપ ને કહેવા માગું છુ કે તમે તમારા બાળકો ને છાતી એ ચીપકાવી ને જરૂર રાખો પણ એક બાજના બચ્ચા ની જેમ એને દુનિયા ની મુશ્કેલીઓ થી વાકેફ પણ કરો, એનો સામનો કરાવો અને લડતા શીખવો…

હકીકતે આજના સમય માં કાર્ટૂન, ટીવી માં આવતા રિઆલિટી શો અને વિડિયો ગેમે આપણા બાળકો ને બોઈલર મુરઘાં જેવા બનાવી નાખ્યા છે જેની પાસે પગ તો છે પણ ચાલી નથી શકતો અને પાંખ છે પણ ઊડી નથી શકતો…

મિત્રો કુંડા માં લગાવેલા છોડ માં અને જંગલ માં ઉગેલા છોડ માં કેટલો ફર્ક હોય છે એ તો આપ સૌ જાણો જ છો !!!

એક નાનકડી પણ સરસ પંક્તિ…

બહુ મીઠો પ્રેમ…બહુ ખારા આંસુ પડાવે છે…અને આ વાત ફક્ત પ્રેમીઑ ને જ નહીં પણ તમારા બાળકો પ્રત્યે ના પ્રેમ ને પણ લાગુ પડે છે માટે મિત્રો તમારા બાળક ને કોઈ વસ્તુ નો ભાવ કરતાં નહીં પણ તેની કિમત કરતાં જરૂર શિખડાવજો 🙏🙏

આ મેસેજ જો ગમે તો દરેક ગૃપ માં મોકલશો