Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas, Terrorism

कुछ लोग कहते हैं ”गड़े मुर्दे मत उखाड़ो”, तो ये गड़े मुर्दे अपने हिन्दू -सिख भाई तो है ही


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कुछ लोग कहते हैं ”गड़े मुर्दे मत उखाड़ो”, तो ये गड़े मुर्दे अपने हिन्दू -सिख भाई तो है ही, ये अपने इतिहास के काले पन्ने है । आतंकियों ने 135 पाकिस्तानी बच्चो को मार दिया तो आज पूरा भारत देश इन दुष्ट पाकिस्तानियो के साथ खड़ा है । मानवता और इंसानियत के लिहाज से ठीक भी लगता है । पर ये मानवता और इंसानियत सिर्फ हमारे लिए ही क्यों ?

भारत का मीरपुर अब पाकिस्तान के कब्जे में है। हमारे मीरपुर को पाकिस्तान ने झेलम नदी पर मंगला बांध बनाकर डुबो दिया। भारत में कश्मीर रियासत के विलय के समय यहां पर करीब 40 हजार हिंदू थे। इसमें दस हजार के करीब हिंदू पाकिस्तान से विभाजन के समय आ गए। यहां के तीन-चार हजार मुस्लिम पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में चले गए। पाकिस्तान की फौज ने जब मीरपुर पर आक्रमण किया तो अपनी लाज बचाने के लिए सैकड़ों हिंदू महिलाओं और लड़कियों ने कुंए में कूद कर जान दे दी। मीरपुर छोड़कर जा रहे परिवारों को घेरकर पाकिस्तानी फौज ने उनका कत्लेआम कर दिया। पाकिस्तानी फौज करीब पांच हजार युवा लड़कियों और महिलाओं का अपहरण कर पाकिस्तान ले गई। इन्हें बाद में मंडी लगाकर पाकिस्तान और खाड़ी देशों को बेच दिया ।

कैसे भूल जाऊ वो खौफनाक मंजर कैसे दोस्ती करू इस नापकिस्तान से ?

नोट – मीरपुर को लूटने में लगे पाकिस्तानी सैनिकों ने यहां से करीब दो घंटे पहले निकल चुके काफिले का किसी ने पीछा नहीं किया। काफिला अगली पहाडिय़ों पर पहुंच गया। वहां तीन रास्ते निकलते थे, तीनों पर काफिला बंट गया। जिसको जहां रास्ता मिला भागता रहा। पहला काफिला सीधे रास्ते की तरफ चल दिया जो कि झंगड़ की तरफ जाता था। दूसरा कस गुमा की ओर चल दिया। पहला काफिला दूसरी पहाड़ी तक पहुंच चुका था परंतु उसके पीछे वाले काफिले को कबाइलियों ने घेर लिया। उन दरिंदों ने जवान लड़कियों को एक तरफ कर दिया और बाकी सबको मारना शुरू कर दिया। कबाइली और पाकिस्तानी उस पहाड़ी पर जितने आदमी थे उन सबको मारकर नीचे वाले काफिले की ओर बढ़ गये। इस घटनाक्रम में 18,000 से ज्यादा लोग मारे गए।
झेलम नदी के किनारे बसा पुराना मीरपुर।

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कुख्यात आतंकिन इशरत


कुख्यात आतंकिन इशरत जहाँ का सियासी बाप सियासी चाचा सियासी ताऊ और सियासी मामू बनकर देश के साथ गद्दारी की शर्मनाक सियासी होड़ का परिणाम कितना खतरनाक हुआ था इसका खुलासा अब हुआ है.

देश के मोस्ट वॉन्टेड आतंकवादी यासीन भटकल को नेपाल के एक दूरस्थ गांव से गिरफ्तार करने वाली ख़ुफ़िया एजेंसी IB की SOG टीम के सदस्यों ने किस तरह अपने उच्चाधिकारियों की प्रारम्भिक अनुमति के बगैर ही, अपने दोस्तों से पैसे क़र्ज़ लेकर, अपनी नौकरी दांव पर लगाकर यासीन भटकल को नेपाल में जाकर घेर लिया था इसका सनसनीखेज विस्तृत विवरण OPEN मैगज़ीन ने छापा है.

विवरण के अनुसार SOG टीम को ऐसा इसलिए करना पड़ा था क्योंकि दिल्ली में बैठे ख़ुफ़िया एजेंसी के अधिकारी यह सोचकर बहुत भयभीत थे कि यदि इस ऑपरेशन में जरा भी चूक हुई तो ख़ुफ़िया एजेंसी के खिलाफ कुछ सियासी नेता देश में उसी तरह गदर मचाएंगे जिस तरह आतंकी इशरत जहां के नाम पर उन्होंने गदर मचाया था. इसलिए वे अनुमति देने से कतरा रहे थे. जबकि SOG टीम के जवान किसी भी कीमत पर देश के सबसे बड़े दुश्मन को अपने हाथों से बचकर नहीं जाने देना चाहते थे. अतः उन्होंने अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया था. उन जवानों को कोटि कोटि प्रणाम.

इस खुलासे से यह साफ़ हो गया है कि आतंकिन इशरत जहाँ का सियासी बाप सियासी चाचा सियासी ताऊ और सियासी मामू बनने की देशघाती बेशर्म होड़ ने किस तरह देश की ख़ुफ़िया एजेंसियों के मनोबल को ध्वस्त कर आतंकवादियों को लाभ पहुँचाने का काम किया था.

पूरी कथा इस लिंक पर जाकर भी पढ़ सकते हैं
http://www.openthemagazine.com/article/nation/thankless-india

कुख्यात आतंकिन इशरत जहाँ का सियासी बाप सियासी चाचा सियासी ताऊ और सियासी मामू बनकर देश के साथ गद्दारी की शर्मनाक सियासी होड़ का परिणाम कितना खतरनाक हुआ था इसका खुलासा अब हुआ है.

देश के मोस्ट वॉन्टेड आतंकवादी यासीन भटकल को नेपाल के एक दूरस्थ गांव से गिरफ्तार करने वाली ख़ुफ़िया एजेंसी IB की SOG टीम के सदस्यों ने किस तरह अपने उच्चाधिकारियों की प्रारम्भिक अनुमति के बगैर ही, अपने दोस्तों से पैसे क़र्ज़ लेकर, अपनी नौकरी दांव पर लगाकर यासीन भटकल को नेपाल में जाकर घेर लिया था इसका सनसनीखेज विस्तृत विवरण OPEN मैगज़ीन ने छापा है. 

विवरण के अनुसार SOG टीम को ऐसा इसलिए करना पड़ा था क्योंकि दिल्ली में बैठे ख़ुफ़िया एजेंसी के अधिकारी यह सोचकर बहुत भयभीत थे कि यदि इस ऑपरेशन में जरा भी चूक हुई तो ख़ुफ़िया एजेंसी के खिलाफ कुछ सियासी नेता देश में उसी तरह गदर मचाएंगे जिस तरह आतंकी इशरत जहां के नाम पर उन्होंने गदर मचाया था. इसलिए वे अनुमति देने से कतरा रहे थे. जबकि SOG टीम के जवान किसी भी कीमत पर देश के सबसे बड़े दुश्मन को अपने हाथों से बचकर नहीं जाने देना चाहते थे. अतः उन्होंने अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया था. उन जवानों को कोटि कोटि प्रणाम.

इस खुलासे से यह साफ़ हो गया है कि आतंकिन इशरत जहाँ का सियासी बाप सियासी चाचा सियासी ताऊ और सियासी मामू बनने की देशघाती बेशर्म होड़ ने किस तरह देश की ख़ुफ़िया एजेंसियों के मनोबल को ध्वस्त कर आतंकवादियों को लाभ पहुँचाने का काम किया था. 

पूरी कथा इस लिंक पर जाकर भी पढ़ सकते हैं 
http://www.openthemagazine.com/article/nation/thankless-india
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औवेसी


आप की अदालत का एक द्श्य देखा जिसमें असद्दुदीन औवेसी से एक लड़की ने सवाल पूछा कि “ज्यादातर मुस्लिम ही आतन्कवादी क्यों होते हैं?”

इस पर असद औवेसी ने जवाब दिया कि... “गांधी जी की हत्या किसने की” ?

” इन्दिरा गांधी की हत्या किसने की”?

इस तरह इस जवाब से असद औवेसी ने गोडसे और सतवन्त सिंह, बेअन्त सिंह को मुस्लिम आतन्कवादियो के बराबर बताने की कोशिश की…

लेकिन यहां सोचने वाली बात ये है कि गांधी को मारने वाले गोडसे और इन्दिरा को मारने वाले सतवन्त सिंह, बेअन्त सिंह का कभी बेवजह निर्दोष लोगों की हत्या करने का कोई पूर्व रिकार्ड नहीं था, इसलिए इन्हें आतन्कवादी कैसे ठहराया जा सकता है?…

जबकि इतिहास और वर्तमान गवाह है कि चाहे मुस्लिम हमलावर हो या जिहादी सन्गठन , इनका धर्म के नाम पर काफिरो को मारने रिकार्ड रहा है , तो फिर किसे अपने गिरेबान में झाकने की जरूरत है?

वैसे भी दुनिया की सबसे बड़ी साम्प्रदायिक कौम के लोग जब टीवी चैनलों पर सेकुलरिज़्म की बात करते हैं,तो ऐसा लगता हैं कि मानों कोई वेश्या लोगों को सदाचार पर उपदेश दे रही हो…