Posted in Sai conspiracy

www.sai.exposed


शेयर अवश्य करे और प्रमाण देखने के लिए लिंक पर click करें ..
http://www.sai.exposed

हमने लाखो ऐसे लोग देखे हजारो ऐसे लोगो से बात की जो साईं के भक्त थे,
जो लोग समझदार थे वो तुरंत समझ जाते है की हाँ भाई तुम सही कहते हो, दाल में कुछ तो काला है क्यूंकि 10 साल पहले मैं राम कृष्ण शिव को पूजता था, अब पता नहीं ये साईं कहाँ से आ गया??
पर कुछ मुर्ख लोग हमे ऐसे मिलते है जिन्हें आप कुछ भी प्रमाण दे दो, किसी भी बात पर तर्क दो वो आपको मुर्खता पूर्ण उत्तर ही देंगे,
एक मित्र से हमने कहा साईं मांस खाता था, कहने लगा की राम जी ने भी तो सीता जी के कहने पर हिरन शिकार किया था??
हमने कहा की आप साईं की बात करो राम पर क्यों जाते हो, क्या राम जी पर ऊँगली उठाने से साईं सही हो जायेगा,
और वैसे भी जिसका शिकार किया था क्या वो हिरन था, यदि राम जी को पता होता की वो राक्षस नहीं हिरन है तो क्या शिकार करते और यदि शिकार करते तो इतने दिन वो वन में रहे, इतने दिन में तो सारे हिरन ख़त्म हो जाते पर मुर्ख तो मुर्ख रहेंगे समझेंगे कैसे??
साईं के भक्त उस आदमी की तरह है जिसका दिमाग साईं को पूजने के बाद साईं के मार्केटिंग करने वाले निकाल कर अपने पास रख लेते है फिर उन अंधभक्त साईं भक्तो को केवल साईं ही दीखता है और साईं के अलावा सबमे खोट दिखती है,
इसलिए साईं के भक्तो को मेरा निवेदन है की अंधभक्ति अंधश्रद्धा छोड़े और असली ईश्वर को पहचाने,
!! जय श्री राम !! जय श्री कृष्ण !!
‪#‎ExposeShirdiSai‬ ‪#‎BhaktiJihad‬

शेयर अवश्य करे, website पे जाके पूरे प्रमाण देखिये 
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हमने लाखो ऐसे लोग देखे हजारो ऐसे लोगो से बात की जो साईं के भक्त थे,
जो लोग समझदार थे वो तुरंत समझ जाते है की हाँ भाई तुम सही कहते हो, दाल में कुछ तो काला है क्यूंकि 10 साल पहले मैं राम कृष्ण शिव को पूजता था, अब पता नहीं ये साईं कहाँ से आ गया??
पर कुछ मुर्ख लोग हमे ऐसे मिलते है जिन्हें आप कुछ भी प्रमाण दे दो, किसी भी बात पर तर्क दो वो आपको मुर्खता पूर्ण उत्तर ही देंगे,
एक मित्र से हमने कहा साईं मांस खाता था, कहने लगा की राम जी ने भी तो सीता जी के कहने पर हिरन शिकार किया था??
हमने कहा की आप साईं की बात करो राम पर क्यों जाते हो, क्या राम जी पर ऊँगली उठाने से साईं सही हो जायेगा,
और वैसे भी जिसका शिकार किया था क्या वो हिरन था, यदि राम जी को पता होता की वो राक्षस नहीं हिरन है तो क्या शिकार करते और यदि शिकार करते तो इतने दिन वो वन में रहे, इतने दिन में तो सारे हिरन ख़त्म हो जाते पर मुर्ख तो मुर्ख रहेंगे समझेंगे कैसे??
साईं के भक्त उस आदमी की तरह है जिसका दिमाग साईं को पूजने के बाद साईं के मार्केटिंग करने वाले निकाल कर अपने पास रख लेते है फिर उन अंधभक्त साईं भक्तो को केवल साईं ही दीखता है और साईं के अलावा सबमे खोट दिखती है,
इसलिए साईं के भक्तो को मेरा निवेदन है की अंधभक्ति अंधश्रद्धा छोड़े और असली ईश्वर को पहचाने,
!! जय श्री राम !! जय श्री कृष्ण !!
#ExposeShirdiSai #BhaktiJihad
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1838 में जन्म लेने वाला एक साधारण मुस्लिम हिन्दुओं का भगवान कैसे हो सकता है ।


1838 में जन्म लेने वाला एक साधारण मुस्लिम हिन्दुओं का भगवान कैसे हो सकता है ।

क्योंकि उस समय देश गुलाम था और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में साई लगभग 19 वर्ष का था ।

पहली बात तो रानी लक्ष्मी बाई से अंग्रेजों से युद्ध में इसकी भूमिका संदिग्ध है , फिर भी साई के भक्त कहते हैं कि इसका कही प्रमाण नहीं मिला है की मैं साई के भक्तों से एक सवाल पूछना चाहता हूँ कि आप इसका क्या प्रमाण दे सकते हैं , कि वे भगवान थे ।

अगर साई भगवान था और वह अपने चमत्कार से पानी से दीपक जलाए थे , तो फिर साई ने अपने चमत्कार से 1857 में अंग्रेजों से भारत को आजाद क्यो नही कराया ।

अगर भारत 1857 में आजाद हो गया होता तो शायद अलग पाकिस्तान न बनता तो क्या साई अलग पाकिस्तान बनाना चाहता था ।

जब ऐसे सवाल साई भक्तों के सामने आते हैं जिनमें साई गद्दार साबित हो सकता है तब साई भक्त सर्वधर्म सद्भावना की बात करने लगते हैं अरे मूर्खों सर्वधर्म सद्भाव तुम्हारे लिए इतना भी जरूरी नहीं कि अपने देवी देवताओं का अपमान करो ।

जैसे हम अन्य धर्म के लोगों को सम्मान देते हैं सम्मान देने का मतलब होता है कि उन्हें भइया , चाचा ,
काका , दादा , अंकल कर सम्मान दे सम्मान देने का यह कतई मतलब नहीं होना चाहिए कि हम उन्हें पिता जी या डैडी या अब्बू कहे तभी उनका सम्मान होगा ।

जिन्हें किसी को भी पिता जी कहने में कोई आपत्ति नहीं है ।

वे साई को भगवान मान सकते हैं हमें कोई भी आपत्ति नहीं है ।

लेकिन लेकिन उस मुल्ला के साथ हिन्दू देवी देवताओं का नाम न लगाएं क्योंकि इससे हिन्दू धर्म का अपमान होता है ।

जब भगवान विष्णु के अवतार में आप साई को दिखाते है , तब आप मां लक्ष्मी का कितना अपमान करते हैं , इसका एहसास भी नहीं है आप को और न कभी होगा क्योंकि आप किसी को भी अपना बाप बना सकते हैं ।

अब मैं कुछ अपने बारे में जानकारी दे रहे हैं मैं एक हिन्दू हूँ और मेरे पिता जी के पिता जी के पिता जी भी एक हिन्दू थे , इसलिए मेरी रगो में एक हिन्दू खून दौड़ रहा है ।

अतः एक हिन्दू होने के नाते मेरे लिए राम जन्म दशहरा दीपावली होली गणेशोत्सव जरूरी है , न कि साई बाबा की पूजा या ईद या क्रिसमस ।

‪#‎ExposeShirdiSai‬ ,

‪#‎BhaktiJihad‬ ,

‪#‎FraudSai‬ .

‪#‎बहरूपिया_साई‬ , ‪#‎भक्ति_जिहाद‬ ,

‪#‎शिर्डी_साई_बेनकाब‬

1838 में जन्म लेने वाला एक साधारण मुस्लिम हिन्दुओं का भगवान कैसे हो सकता है ।

क्योंकि उस समय देश गुलाम था और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में साई लगभग 19 वर्ष का था ।

पहली बात तो रानी लक्ष्मी बाई से अंग्रेजों से युद्ध में इसकी भूमिका संदिग्ध है , फिर भी साई के भक्त कहते हैं कि इसका कही प्रमाण नहीं मिला है की मैं साई के भक्तों से एक सवाल पूछना चाहता हूँ कि आप इसका क्या प्रमाण दे सकते हैं , कि वे भगवान थे ।

अगर साई भगवान था और वह अपने चमत्कार से पानी से दीपक जलाए थे , तो फिर साई ने अपने चमत्कार से 1857 में अंग्रेजों से भारत को आजाद क्यो नही कराया ।

अगर भारत 1857 में आजाद हो गया होता तो शायद अलग पाकिस्तान न बनता तो क्या साई अलग पाकिस्तान बनाना चाहता था ।

जब ऐसे सवाल साई भक्तों के सामने आते हैं जिनमें साई गद्दार साबित हो सकता है तब साई भक्त सर्वधर्म सद्भावना की बात करने लगते हैं अरे मूर्खों सर्वधर्म सद्भाव तुम्हारे लिए इतना भी जरूरी नहीं कि अपने देवी देवताओं का अपमान करो ।

जैसे हम अन्य धर्म के लोगों को सम्मान देते हैं सम्मान देने का मतलब होता है कि उन्हें भइया , चाचा , 
काका , दादा , अंकल कर सम्मान दे सम्मान देने का यह कतई मतलब नहीं होना चाहिए कि हम उन्हें पिता जी या डैडी या अब्बू कहे तभी उनका सम्मान होगा ।

 जिन्हें  किसी को भी पिता जी कहने में कोई आपत्ति नहीं है ।

वे साई को भगवान मान सकते हैं हमें कोई भी आपत्ति नहीं है ।

लेकिन लेकिन उस मुल्ला के साथ हिन्दू देवी देवताओं का नाम न लगाएं क्योंकि इससे हिन्दू धर्म का अपमान होता है ।

जब भगवान विष्णु के अवतार में आप साई को दिखाते है , तब आप मां लक्ष्मी का कितना अपमान करते हैं , इसका एहसास भी नहीं है आप को और न कभी होगा क्योंकि आप किसी को भी अपना बाप बना सकते हैं ।

अब मैं कुछ अपने बारे में  जानकारी दे रहे हैं मैं एक हिन्दू हूँ और मेरे पिता जी के पिता जी के पिता जी भी एक हिन्दू थे , इसलिए मेरी रगो में एक हिन्दू खून दौड़ रहा है ।

अतः एक हिन्दू होने के नाते मेरे लिए राम जन्म  दशहरा दीपावली होली गणेशोत्सव जरूरी है , न कि साई बाबा की पूजा  या ईद या क्रिसमस ।

#ExposeShirdiSai , 

#BhaktiJihad , 

#FraudSai . 

#बहरूपिया_साई , #भक्ति_जिहाद ,

#शिर्डी_साई_बेनकाब ।
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क्या आप लोगो को मालूम है हर साल महाराष्ट्र में लगभग १००० किसान आत्महत्या करते है ।


क्या आप लोगो को मालूम है हर साल महाराष्ट्र में लगभग १००० किसान आत्महत्या करते है ।

‪#‎शिर्डी‬ महाराष्ट्र में है, और यहाँ पर भी बड़ी संख्या में किसान आत्महत्या करते है इस हिसाब से शिर्डी साई को आत्महत्या एक्सपर्ट कहना चाहिए यह सभी किसान साई(‪#‎चाँदमिय्या‬) को मानने वाले होते है । यह किसान सभी लगभग हर महीने शिर्डी जाते है ।

Farmers taking their lives in drought hit maharashtra. Will Sai baba save them?
शिर्डी में किसानो के द्वारा आत्महत्या करने का मुख्य कारण है महाराष्ट्र के इस भाग में सूखे का पड़ना। लगातार कई वर्षो तक बारिश न होने के कारण महाराष्ट्र का ये हिस्सा पुरे देश में सूखे से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र में आता है।

आश्चर्य की बात है की साईं बाबा (‪#‎चाँद_मुहम्मद‬ )को चमत्कारी मानने वाले लोगों का ध्यान इस पर गया ही नहीं की क्या कारण है साईं बाबा ने इस क्षेत्र में बारिश करने के लिए कोई चमत्कार ही नहीं किया। साईं बाबा के द्वारा साईं सत्चरित्र अध्याय एक के अनुसार क्षेत्र में हैजा रोकने के लिए आटा फेंकने की घटना का वर्णन आता है जिसका मुख्य कारण था बारिश न होना और साईं बाबा ने बारिश करने व् हैजा रोकने के लिए ही आटे फिंकवाया । जबकि साईं बाबा के काल में कुल 16 बार शिर्डी में सूखा पड़ा पर केवल एक बार साईं बाबा ने अपना चमत्कार दिखाया, अन्य 15 बार बाबा कोई भी चमत्कार दिखाने में असफल रहे तो क्या पहले चमत्कार को केवल एक संयोग मात्र था?

नीचे दिए गए लिंक की आप जांच कर सकते है जिनमे शिर्डी में किसानो की आत्महत्या की रिपोर्ट दी हुई है

http://www.thehindu.com/…/maharashtra-co…/article6189959.ece

zeenews.india.com/…/maharashtra/maharashtra-tops-farmer-suicides-list_ 945085.html

इस रिपोर्ट के अनुसार २०१३ में ३१४५ किसानो ने आत्महत्या की । 1995 से अब तक ६० ००० किसानो ने आत्महत्या की ।

इस रिपोर्ट के कुछ अंश नीचे दिए है :-

With the highest number of farmer suicides recorded in the year 2013, Maharashtra continues to paint a dismal picture on the agrarian front with over 3,000 farmers taking their lives.

According to a recent report of the National Crime Records Bureau (NCRB) a total of 3,146 farmers killed themselves in the state in 2013.

Maharashtra repeated this performance despite the state registering 640 less farm suicides than 2012.

According to NCRB data, over 60,000 farmers have killed themselves in the state since 1995.

प्रश्न यह उठता है की साई बाबा इन सब की मदद क्यों नहीं कर पाए। क्या साईं बाबा सच में चमत्कारी थी या एक ढोंग? क्या साईं बाबा सच में लोगों की सेवा सहायता करते थे? क्या हर रोज मरते इन किसानो के लिए साईं बाबा कोई चमत्कार नहीं कर पाते? ऐसे में क्या उनके बाकी चमत्कारों पर प्रशन नहीं उठता?

महाराष्ट्र में आत्महत्या के बारे में रिपोर्ट आप लोगों को भेजा गया है । इस रिपोर्ट से जानकारी ले कर आप लोग यह सिद्ध कर सकते है कि साई बाबा कोई लोगो को भला करने वाले संत नहीं है ।

महाराष्ट्र में गरीबी कि वजह से हर साल लगभग १००० किसान आत्महत्या करते है । इन आत्महत्याओं के पीछे साई की पूजा ही कारण है क्यूंकि प्रेत पूजा वास्तव में ही कष्टदायक होती है १९९५ से अब तक ६०,००० किसानो ने महाराष्ट्र में आत्महत्या की है ।

इस रिपोर्ट में दो न्यूज़ चैनल्स की रिपोर्ट दी गई है । जिसे आप खुद देख सकते हो।

क्या आप लोगो को मालूम है हर साल महाराष्ट्र में लगभग १००० किसान आत्महत्या करते है ।

#शिर्डी महाराष्ट्र में है, और यहाँ पर भी बड़ी संख्या में किसान आत्महत्या करते है इस हिसाब से शिर्डी साई को आत्महत्या एक्सपर्ट कहना चाहिए यह सभी किसान साई(#चाँदमिय्या) को मानने वाले होते है । यह किसान सभी लगभग हर महीने शिर्डी जाते है ।

Farmers taking their lives in drought hit maharashtra. Will Sai baba save them?
शिर्डी में किसानो के द्वारा आत्महत्या करने का मुख्य कारण है महाराष्ट्र के इस भाग में सूखे का पड़ना। लगातार कई वर्षो तक बारिश न होने के कारण महाराष्ट्र का ये हिस्सा पुरे देश में सूखे से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र में आता है।

आश्चर्य की बात है की साईं बाबा (#चाँद_मुहम्मद )को चमत्कारी मानने वाले लोगों का ध्यान इस पर गया ही नहीं की क्या कारण है साईं बाबा ने इस क्षेत्र में बारिश करने के लिए कोई चमत्कार ही नहीं किया। साईं बाबा के द्वारा साईं सत्चरित्र अध्याय एक के अनुसार क्षेत्र में हैजा रोकने के लिए आटा फेंकने की घटना का वर्णन आता है जिसका मुख्य कारण था बारिश न होना और साईं बाबा ने बारिश करने व् हैजा रोकने के लिए ही आटे फिंकवाया । जबकि साईं बाबा के काल में कुल 16 बार शिर्डी में सूखा पड़ा पर केवल एक बार साईं बाबा ने अपना चमत्कार दिखाया, अन्य 15 बार बाबा कोई भी चमत्कार दिखाने में असफल रहे तो क्या पहले चमत्कार को केवल एक संयोग मात्र था?

नीचे दिए गए लिंक की आप जांच कर सकते है जिनमे शिर्डी में किसानो की आत्महत्या की रिपोर्ट दी हुई है

http://www.thehindu.com/news/national/other-states/maharashtra-continues-to-lead-in-farmers-suicide/article6189959.ece

zeenews.india.com/…/maharashtra/maharashtra-tops-farmer-suicides-list_ 945085.html

इस रिपोर्ट के अनुसार २०१३ में ३१४५ किसानो ने आत्महत्या की । 1995 से अब तक ६० ००० किसानो ने आत्महत्या की ।

इस रिपोर्ट के कुछ अंश नीचे दिए है :-

With the highest number of farmer suicides recorded in the year 2013, Maharashtra continues to paint a dismal picture on the agrarian front with over 3,000 farmers taking their lives.

According to a recent report of the National Crime Records Bureau (NCRB) a total of 3,146 farmers killed themselves in the state in 2013.

Maharashtra repeated this performance despite the state registering 640 less farm suicides than 2012.

According to NCRB data, over 60,000 farmers have killed themselves in the state since 1995.

प्रश्न यह उठता है की साई बाबा इन सब की मदद क्यों नहीं कर पाए। क्या साईं बाबा सच में चमत्कारी थी या एक ढोंग? क्या साईं बाबा सच में लोगों की सेवा सहायता करते थे? क्या हर रोज मरते इन किसानो के लिए साईं बाबा कोई चमत्कार नहीं कर पाते? ऐसे में क्या उनके बाकी चमत्कारों पर प्रशन नहीं उठता?

महाराष्ट्र में आत्महत्या के बारे में रिपोर्ट आप लोगों को भेजा गया है । इस रिपोर्ट से जानकारी ले कर आप लोग यह सिद्ध कर सकते है कि साई बाबा कोई लोगो को भला करने वाले संत नहीं है ।

महाराष्ट्र में गरीबी कि वजह से हर साल लगभग १००० किसान आत्महत्या करते है । इन आत्महत्याओं के पीछे साई की पूजा ही कारण है क्यूंकि प्रेत पूजा वास्तव में ही कष्टदायक होती है १९९५ से अब तक ६०,००० किसानो ने महाराष्ट्र में आत्महत्या की है ।

इस रिपोर्ट में दो न्यूज़ चैनल्स की रिपोर्ट दी गई है । जिसे आप खुद देख सकते हो।
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साईं बाबा का असली चरित्र जो टीवी फिल्मो के माध्यम से बदल दिया और लोगो। को मुर्ख बना कर साईं की मार्केटिंग की


साईं बाबा का असली चरित्र जो टीवी फिल्मो के माध्यम से बदल दिया और लोगो। को मुर्ख बना कर साईं की मार्केटिंग की

इसो मार्केटिंग के कारण साईं इतना बड़ा बना पर साईं का सच क्या है और साईं कैसा व्यक्ति था उसके विषय में पढ़े

अध्याय एक साईं बाबा ने गुस्से में औरतो से कहा की क्या ये तुम्हारे बाप का माल है जो इसे ले जा रही हो यहाँ से (चरित्र चित्रण – साईं बाबा का गालियाँ देना और औरतो का अपमान करना)

अध्याय 3 मैं घट घट में व्याप्त हु जो भी मेरे पास आपकर कुछ मांगेंगा मैं उसकी सभी इच्छा पूरी करूंगा (चरित्र चित्रं – साईं बाबा ने खुद को पूजा करने को कहा – शिर्डी ट्रस्ट का झूठा ब्यान की साईं ने ऐसा नहीं कहा)

अध्याय 3 पेज 15 साईं बाबा द्वारा रोहिल्ला मुस्लिम द्वारा की जाने वाली कर्कश ध्वनी में अजान का समर्थन किया पर उसके विरोध करने वाले गाँव वालो को बुरा भला कहा(साईं बाबा इस्लामिक रीती रिवाजो के पक्षधर थे)

अध्याय 5(जल का तेल में रूपांतरण) – साईं बाबा ने टमरेल(संडास का डिब्बा मराठी शब्द) में से पानी पिया, और उसमे तेल डालने के बाद बर्तन में उलट दिया, और फिर उस तेल मिश्रित पानी को दियो में डाल कर दिए जलाए(साईं बाबा द्वारा दीपावली पर्व का अपमान) बाबा ने जमीन में चिमटा मारा और चिलम में तम्बाकू चढ़ा कर खुद भी पिया और चाँद पाटिल को भी दी,

अध्याय 7 – साईं बाबा फकीरों(इस्लामिक सूफी संत) के साथ मांस मछली का भी सेवन कर लेते थे, उनके होंठो पर सदैव अल्लाह मालिक रहता था (नोट: साईं बाबा ने पुरे जीवन में एक बार भी राम नाम नहीं लिया न वेदों, शास्त्रों आर्ष ग्रंथो का पाठ किया)

अध्याय 10 – न्याय अथवा दर्शन मीमांसा पढने की आवश्यकता नहीं है (सनातन धर्म के आधार दर्शन शास्त्र का ही विरोध)

अध्याय 11 – बाबा ने शमा से कहा की जाओ और हाजी से पूछो की उसे बकरे का नाध चाहिए, गोश्त चाहिए या अंडकोष, फिर शामा ने बाबा से चालीस लाख रूपये की बात कही(नोट: लगभग हर दुसरे अध्याय में साईं द्वारा हजारो लाखो रूपये की बात दिखाई गयी है जबकि उस समय का एक रुपया आज के हजार रूपये के समान है, साईं के पास इतना पैसा कहाँ से आता था ये एक रहस्य है)बाबा ने बकरा हलाल करने की बात

अध्याय 13 – कोई कितना भी दुखी और पीड़ित क्यों न हो, जेसे ही वह मस्जिद की सीडियों पर पैररखता है , वह सुखी हो जाता है l(पूरी साईं सत्चरित्र में केवल मस्जिद ही साईं का निवास रही है)

अध्याय 14 – साईं बाबा को कोई एक रुपया भी देता था तो उससे वे तम्बाकु और बीडी खरीद लेते थे, उन्हें बीडी चिलम पिने का शौक था

अध्याय 18 कोई कितना भी दुखित और पीड़ित क्यों न हो , जेसे ही वह मस्जिद की सीडियों पर पैर रखता है , वह सुखी हो जाता है l(साईं जब खुद मस्जिद में रहता था तो उसके पूजा स्थलों को मंदिर का नाम क्यों??)

अध्याय 23 मस्जिद में एक बकरा बलि देने के लिए लाया गया l वह अत्यंत दुर्बल , बूडा और मरने वाला था , l उस समय मालेगांव के फकीर पीर मोहम्मद उर्फ बड़े बाबा उनके समीप खड़े थे , l बाबा ने उन्हें बकरा काट कर बलि चदाने को कहा …….तब बाबा ने काका साहिब से कहा कि मैं स्वम् ही बलि चढाने का काम करूँगा

अध्याय 28 – यहाँ से दूर हट जाओ, तुम एक उच्च ब्राह्मण हो और मैं एक निम्न यवनी(मुसलमान)बाबा ने कहा की मुझे गंगाजल से दूर ही रखो, मैं ठहरा फ़क़ीर(इस्लामिकसंत), मुझे इससे क्या प्रयोजन

अध्याय 38 बाबा की हांड़ीबाबा कभी मांस मिश्रित चावल पुलाव बनाते थे …… जब भोजन बन जाता , तब वह मस्जिद से बर्तन मंगवाकर मौलवी से फातिहा पढने को कहते थे जब भोजन तैयार हो जाता, तब वह मस्जिद से बर्तन मंगवा कर मौलवी से फातिहा पड़ने को कहते थे……….यहाँ कोई यह शंका कर सकता हे कि क्या वह शाकाहारी और मासाहारी भोज्य पदार्थों का प्रसाद बांटा करते थे ? इसका उतर बिलकुल सीधा और सरल हे l जो लोग मांसाहारी थे , उन्हें हांड़ी में से दिया जाता था
साईं बाबा ने दादा केलकर को एकादशी के दिन मांस लाने को कहा, ऐसे ही एक अवसर पर उन्होंने कहा की अपना कट्टरपन छोड़ो और इसे चख कर देखो

अध्याय 43-44 : साईं बाबा गुस्से में कहा की लो देख लो मैं यवनी हु या नहीं, बाबा साक्षात् दिगम्बर(नग्न) खड़े थे, लोग थर थर कांप रहे थे,साईं बाबा को दमे की बीमारी हो गयी थी, जिस कारण उनका स्वास्थ्य भी गिर गया था(नोट बीडी चिलम पिने के कारण साईं बाबा को दमा की बीमारी हुई थी,)

अध्याय 50 – साईं बाबा ने दमे से पीड़ित लक्ष्मण जी को चिलम पीने को दी और उनका दमा सही हो गया(इसी चिलम के कारण साईं को दमा हुआ था जिसे वे खुद ठीक नहीं कर पाए थे)

दशहरे के दिन रावण और साईं के जीवन का अंत हुआ ,रावण साधू के वेश में और साईं फकीर के वेश मेंरावण आसुरी स्वभाव के थे और अधर्म का जीवन जीते थे

साईं तामसी स्वभाव के थे, बीडी पीना, गाली बोलना , गुस्से में पीटना , मस्जिद में बकरे काटना , ब्रहामण को मॉस चखने के लिए विवश करना , एकादशी के दिन मॉस खाना उनका जीवन चरित्र थाजिस का वर्णन उनके शिष्यगुस्से में गाली और अपशब्द बोलना, निरीह बकरों को काटना, जबरदस्ती ब्राह्मण को जलते मास की स्वाद चखाना ऐसे व्यक्ति की मंदिरों में पूजा करना धर्म नहीं अधर्मऐसा क्यों है ?
रावण साधू के वेश में अपहरण के लिये आया और सीता को हर के ले गया l
साईं फकीर के वेश में अल्लाह के लिए आया और हिन्दुओं की मति को “ॐ साईं राम” के नाम से हर के ले गया l
साईं और रावण दोनों दशहरे के दिन ही इस लोक से विदा हुए l
साईं की मृत्य 15 अक्टूबर 1918 को हुई , इस दिन भी दशहरा था lयह सयोंग था या नियति का कोई छिपा सन्देश l

सनातन धर्म के मंदिरों में हो रही हे कलयुगी की पूजाइससे बढ कर पाप नहीं कोई दूजायक्ष प्रश्न ?
क्या मंदिरों में शास्त्र सम्मत देवी -देवताओं की पूजा हो या कोई भी ?
सोचें तो जरा ! मंदिरों में देवी-देवताओं के बीच अचानक किसी की पूजा क्यों हो रही हें ?
धर्म में प्रदूषण हमें कहाँ ले जायेगा ?

कलयुग के अंधरे में हिन्दू बदल गई हे पूजा की तस्वीरअब तक होती थी पूजा देवी-देवताओं की ,
अब पूजा जायेगा , फातिया बोलने वाला पीरगायत्री मन्त्र का पाठ करने वाले को हिन्दू कहते हें
फातिहा बोलने वाले को मुस्लमान कहते हैं l
गो – के-स्वामी को गोसाई कहते हें l
बकरे काटने वाले को कसाई कहते हैं l
धर्म में जो अधर्म फेलाए , उसे पापी कहते हैं l

साईं बाबा का असली चरित्र जो टीवी फिल्मो के माध्यम से बदल दिया और लोगो। को मुर्ख बना कर साईं की मार्केटिंग की

इसो मार्केटिंग के कारण साईं इतना बड़ा बना पर साईं का सच क्या है और साईं कैसा व्यक्ति था उसके विषय में पढ़े

अध्याय एक साईं बाबा ने गुस्से में औरतो से कहा की क्या ये तुम्हारे बाप का माल है जो इसे ले जा रही हो यहाँ से (चरित्र चित्रण – साईं बाबा का गालियाँ देना और औरतो का अपमान करना)

अध्याय 3 मैं घट घट में व्याप्त हु जो भी मेरे पास आपकर कुछ मांगेंगा मैं उसकी सभी इच्छा पूरी करूंगा (चरित्र चित्रं – साईं बाबा ने खुद को पूजा करने को कहा – शिर्डी ट्रस्ट का झूठा ब्यान की साईं ने ऐसा नहीं कहा)

अध्याय 3 पेज 15 साईं बाबा द्वारा रोहिल्ला मुस्लिम द्वारा की जाने वाली कर्कश ध्वनी में अजान का समर्थन किया पर उसके विरोध करने वाले गाँव वालो को बुरा भला कहा(साईं बाबा इस्लामिक रीती रिवाजो के पक्षधर थे)

अध्याय 5(जल का तेल में रूपांतरण) – साईं बाबा ने टमरेल(संडास का डिब्बा मराठी शब्द) में से पानी पिया, और उसमे तेल डालने के बाद बर्तन में उलट दिया, और फिर उस तेल मिश्रित पानी को दियो में डाल कर दिए जलाए(साईं बाबा द्वारा दीपावली पर्व का अपमान) बाबा ने जमीन में चिमटा मारा और चिलम में तम्बाकू चढ़ा कर खुद भी पिया और चाँद पाटिल को भी दी,

अध्याय 7 – साईं बाबा फकीरों(इस्लामिक सूफी संत) के साथ मांस मछली का भी सेवन कर लेते थे, उनके होंठो पर सदैव अल्लाह मालिक रहता था (नोट: साईं बाबा ने पुरे जीवन में एक बार भी राम नाम नहीं लिया न वेदों, शास्त्रों आर्ष ग्रंथो का पाठ किया)

अध्याय 10 – न्याय अथवा दर्शन मीमांसा पढने की आवश्यकता नहीं है (सनातन धर्म के आधार दर्शन शास्त्र का ही विरोध)

अध्याय 11 – बाबा ने शमा से कहा की जाओ और हाजी से पूछो की उसे बकरे का नाध चाहिए, गोश्त चाहिए या अंडकोष, फिर शामा ने बाबा से चालीस लाख रूपये की बात कही(नोट: लगभग हर दुसरे अध्याय में साईं द्वारा हजारो लाखो रूपये की बात दिखाई गयी है जबकि उस समय का एक रुपया आज के हजार रूपये के समान है, साईं के पास इतना पैसा कहाँ से आता था ये एक रहस्य है)बाबा ने बकरा हलाल करने की बात

अध्याय 13 – कोई कितना भी दुखी और पीड़ित क्यों न हो, जेसे ही वह मस्जिद की सीडियों पर पैररखता है , वह सुखी हो जाता है l(पूरी साईं सत्चरित्र में केवल मस्जिद ही साईं का निवास रही है)

अध्याय 14 – साईं बाबा को कोई एक रुपया भी देता था तो उससे वे तम्बाकु और बीडी खरीद लेते थे, उन्हें बीडी चिलम पिने का शौक था

अध्याय 18 कोई कितना भी दुखित और पीड़ित क्यों न हो , जेसे ही वह मस्जिद की सीडियों पर पैर रखता है , वह सुखी हो जाता है l(साईं जब खुद मस्जिद में रहता था तो उसके पूजा स्थलों को मंदिर का नाम क्यों??)

अध्याय 23 मस्जिद में एक बकरा बलि देने के लिए लाया गया l वह अत्यंत दुर्बल , बूडा और मरने वाला था , l उस समय मालेगांव के फकीर पीर मोहम्मद उर्फ बड़े बाबा उनके समीप खड़े थे , l बाबा ने उन्हें बकरा काट कर बलि चदाने को कहा .......तब बाबा ने काका साहिब से कहा कि मैं स्वम् ही बलि चढाने का काम करूँगा

अध्याय 28 – यहाँ से दूर हट जाओ, तुम एक उच्च ब्राह्मण हो और मैं एक निम्न यवनी(मुसलमान)बाबा ने कहा की मुझे गंगाजल से दूर ही रखो, मैं ठहरा फ़क़ीर(इस्लामिकसंत), मुझे इससे क्या प्रयोजन

अध्याय 38 बाबा की हांड़ीबाबा कभी मांस मिश्रित चावल पुलाव बनाते थे ...... जब भोजन बन जाता , तब वह मस्जिद से बर्तन मंगवाकर मौलवी से फातिहा पढने को कहते थे जब भोजन तैयार हो जाता, तब वह मस्जिद से बर्तन मंगवा कर मौलवी से फातिहा पड़ने को कहते थे..........यहाँ कोई यह शंका कर सकता हे कि क्या वह शाकाहारी और मासाहारी भोज्य पदार्थों का प्रसाद बांटा करते थे ? इसका उतर बिलकुल सीधा और सरल हे l जो लोग मांसाहारी थे , उन्हें हांड़ी में से दिया जाता था
साईं बाबा ने दादा केलकर को एकादशी के दिन मांस लाने को कहा, ऐसे ही एक अवसर पर उन्होंने कहा की अपना कट्टरपन छोड़ो और इसे चख कर देखो

अध्याय 43-44 : साईं बाबा गुस्से में कहा की लो देख लो मैं यवनी हु या नहीं, बाबा साक्षात् दिगम्बर(नग्न) खड़े थे, लोग थर थर कांप रहे थे,साईं बाबा को दमे की बीमारी हो गयी थी, जिस कारण उनका स्वास्थ्य भी गिर गया था(नोट बीडी चिलम पिने के कारण साईं बाबा को दमा की बीमारी हुई थी,)

अध्याय 50 – साईं बाबा ने दमे से पीड़ित लक्ष्मण जी को चिलम पीने को दी और उनका दमा सही हो गया(इसी चिलम के कारण साईं को दमा हुआ था जिसे वे खुद ठीक नहीं कर पाए थे)

दशहरे के दिन रावण और साईं के जीवन का अंत हुआ ,रावण साधू के वेश में और साईं फकीर के वेश मेंरावण आसुरी स्वभाव के थे और अधर्म का जीवन जीते थे

साईं तामसी स्वभाव के थे, बीडी पीना, गाली बोलना , गुस्से में पीटना , मस्जिद में बकरे काटना , ब्रहामण को मॉस चखने के लिए विवश करना , एकादशी के दिन मॉस खाना उनका जीवन चरित्र थाजिस का वर्णन उनके शिष्यगुस्से में गाली और अपशब्द बोलना, निरीह बकरों को काटना, जबरदस्ती ब्राह्मण को जलते मास की स्वाद चखाना ऐसे व्यक्ति की मंदिरों में पूजा करना धर्म नहीं अधर्मऐसा क्यों है ?
रावण साधू के वेश में अपहरण के लिये आया और सीता को हर के ले गया l
साईं फकीर के वेश में अल्लाह के लिए आया और हिन्दुओं की मति को "ॐ साईं राम" के नाम से हर के ले गया l
साईं और रावण दोनों दशहरे के दिन ही इस लोक से विदा हुए l
साईं की मृत्य 15 अक्टूबर 1918 को हुई , इस दिन भी दशहरा था lयह सयोंग था या नियति का कोई छिपा सन्देश l

सनातन धर्म के मंदिरों में हो रही हे कलयुगी की पूजाइससे बढ कर पाप नहीं कोई दूजायक्ष प्रश्न ?
क्या मंदिरों में शास्त्र सम्मत देवी -देवताओं की पूजा हो या कोई भी ?
सोचें तो जरा ! मंदिरों में देवी-देवताओं के बीच अचानक किसी की पूजा क्यों हो रही हें ?
धर्म में प्रदूषण हमें कहाँ ले जायेगा ?

कलयुग के अंधरे में हिन्दू बदल गई हे पूजा की तस्वीरअब तक होती थी पूजा देवी-देवताओं की ,
अब पूजा जायेगा , फातिया बोलने वाला पीरगायत्री मन्त्र का पाठ करने वाले को हिन्दू कहते हें
फातिहा बोलने वाले को मुस्लमान कहते हैं l
गो - के-स्वामी को गोसाई कहते हें l
बकरे काटने वाले को कसाई कहते हैं l
धर्म में जो अधर्म फेलाए , उसे पापी कहते हैं l
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मुस्लिम साई के माध्यम से हिन्दूओ के मंदिरो को हड़पने का वक्फ बोर्ड का भीषण षड्यन्त्र ::


मुस्लिम साई के माध्यम से हिन्दूओ के मंदिरो को हड़पने का वक्फ बोर्ड का भीषण षड्यन्त्र ::

हिन्दूओ की अपार धन-सम्पदा कुछ प्रख्यात मूर्ख भ्रमित हिन्दूओ द्वारा मुस्लिमो को पीर-फकीर-हाजी-चिश्ती-शरीफ दरगाहों मे जाती है ये सभी जिहादी थे जिनका मुख्य कार्य तलवार के ज़ोर पर हिन्दूओ का इस्लाम मे धर्म परिवर्तन करना और इसमे ये सफल भी हुए | इन्होने हिन्दूओ की माँ –बहनो की अस्मिता को तार-तार किया , उनका शील भंग किया ,उनका बलात्कार किया |आज मूर्ख हिन्दू इनहि बलात्कारियों की दरगाहों पर दुआ माँगने जाता है |

समय बदला और जिहाद का तरीका भी बदला मानव जिहाद से लव जिहाद और फिर भक्ति जिहाद |मुस्लिम साई की भक्ति , भक्ति जिहाद का ही रूप है | इसके माध्यम से ये जहाँ हिन्दूओ का इस्लाम मे धर्म परिवर्तन आसानी से कर रहे है |वही शिर्डी साई पर चढ़ने वाला हिन्दूओ का धन भी जिहादी गतिविधियो मे लग रहा है |इसी कारण शिर्डी ट्रस्ट को कई बार भंग भी किया जा चुका है | साई संध्या , श्रद्धा सबूरी के नाम से अल्लाह –अल्लाह की कव्वालिया हिन्दूओ को हाथ उठा कर गवाई जा रही है |

शिर्डी साई ट्रस्ट की एक मात्र प्रमाणित पुस्तक “साई सतचरित्र” के अनुसार यह पूर्णत: सिद्ध हो चुका है कि साई कोई हिन्दू संत या साधू नहीं था अपितु मुस्लिम व्यक्ति था इसलिए उसे फकीर कहते थे | साई अपनी जिह्वा पर सदैव अल्लाह मालिक का उच्चारण रखता था | मांसाहारी , बकरा हलाली , नशेड़ी , कुकर्मी और दुष्चरित्र का मुस्लिम व्यक्ति था |मुस्लिम और अरब देशो द्वारा बहुत सारा धन मुस्लिम साई के प्रचार मे खर्च किया जा चुका है और आगे भी किया जा रहा है |

हिन्दूओ को भ्रमित करने के लिए कई Movies और Seriales भी बनाए गए है जिसमे उसके मुस्लिम चरित्र को छिपा करके किसी संत के तरह चरित्र को प्रस्तुत किया जा रहा है | हिन्दूओ को भ्रमित करने के लिए साई-राम , साई-श्याम ,साई-माँ ,साई-शिव जैसे शब्दो का उपयोग मुल्ले साई के साथ किया जा रहा है |

जैसा कि आप सभी को ज्ञात ही है कि श्री P N Oak जी के अनुसार ताजमहल , तेजोमहालय (http://ia700502.us.archive.org/14/items/HindiBooksOfP.n.Oak/TajMahalMandirBhavanHei.pdf
,http://ia600502.us.archive.org/14/items/HindiBooksOfP.n.Oak/TajMahalTejoMahalayaSivaMandirHei.pdf) है किसी मुमताज़ की कब्र नहीं किन्तु मुस्लिमो ने इस पर अपना कब्जा कर रखा है |वक्फ बोर्ड भारत के सभी मंदिरो मे मुस्लिम साई की मूर्ति स्थापित होने का इंतजार कर रहा है और यह काम बहुत तेजी से हो भी रहा है |जिस दिन भारत के सभी मंदिरो मे मुल्ले साई कि मूर्ति स्थापित हो जाएगी |

रामेश्वरम,तिरुपति से लेकर वैष्णोदेवी , अमरनाथ तक उस दिन वक्फ बोर्ड मुस्लिम साई पर अपना अधिकार ठोक देगा |हिन्दूओ के सभी मंदिरो पर उनकी जमीन ,उसके धन पर वक्फ बोर्ड का एक मात्र अधिकार हो जाएगा |फिर उसी जमीन और करोड़ो के धन का उपयोग आतंकवादी गतिविधियो मे किया जाएगा |ISIS आतंकी संगठन के भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने के सपने को पूरा किया जाएगा |सेकुलर हिन्दू तो अपना खतना करवाने के लिए पहले से ही तैयार बैठा ही है |इसलिए कट्टर हिन्दू जाग जाये |

जय सियाराम 
धर्मो रक्षति रक्षितः 
धर्म की रक्षा करो धर्म तुम्हारी रक्षा करेगा
धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो |

पेज से भी जुडें :- (y) Shirdi Sai Baba - भारत के इतिहास का सबसे बड़ा पाखंड
(:_:)
!!ओ३म् !!

मुस्लिम साई के माध्यम से हिन्दूओ के मंदिरो को हड़पने का वक्फ बोर्ड का भीषण षड्यन्त्र ::

हिन्दूओ की अपार धन-सम्पदा कुछ प्रख्यात मूर्ख भ्रमित हिन्दूओ द्वारा मुस्लिमो को पीर-फकीर-हाजी-चिश्ती-शरीफ दरगाहों मे जाती है ये सभी जिहादी थे जिनका मुख्य कार्य तलवार के ज़ोर पर हिन्दूओ का इस्लाम मे धर्म परिवर्तन करना और इसमे ये सफल भी हुए | इन्होने हिन्दूओ की माँ –बहनो की अस्मिता को तार-तार किया , उनका शील भंग किया ,उनका बलात्कार किया |आज मूर्ख हिन्दू इनहि बलात्कारियों की दरगाहों पर दुआ माँगने जाता है |

समय बदला और जिहाद का तरीका भी बदला मानव जिहाद से लव जिहाद और फिर भक्ति जिहाद |मुस्लिम साई की भक्ति , भक्ति जिहाद का ही रूप है | इसके माध्यम से ये जहाँ हिन्दूओ का इस्लाम मे धर्म परिवर्तन आसानी से कर रहे है |वही शिर्डी साई पर चढ़ने वाला हिन्दूओ का धन भी जिहादी गतिविधियो मे लग रहा है |इसी कारण शिर्डी ट्रस्ट को कई बार भंग भी किया जा चुका है | साई संध्या , श्रद्धा सबूरी के नाम से अल्लाह –अल्लाह की कव्वालिया हिन्दूओ को हाथ उठा कर गवाई जा रही है |

शिर्डी साई ट्रस्ट की एक मात्र प्रमाणित पुस्तक “साई सतचरित्र” के अनुसार यह पूर्णत: सिद्ध हो चुका है कि साई कोई हिन्दू संत या साधू नहीं था अपितु मुस्लिम व्यक्ति था इसलिए उसे फकीर कहते थे | साई अपनी जिह्वा पर सदैव अल्लाह मालिक का उच्चारण रखता था | मांसाहारी , बकरा हलाली , नशेड़ी , कुकर्मी और दुष्चरित्र का मुस्लिम व्यक्ति था |मुस्लिम और अरब देशो द्वारा बहुत सारा धन मुस्लिम साई के प्रचार मे खर्च किया जा चुका है और आगे भी किया जा रहा है |

हिन्दूओ को भ्रमित करने के लिए कई Movies और Seriales भी बनाए गए है जिसमे उसके मुस्लिम चरित्र को छिपा करके किसी संत के तरह चरित्र को प्रस्तुत किया जा रहा है | हिन्दूओ को भ्रमित करने के लिए साई-राम , साई-श्याम ,साई-माँ ,साई-शिव जैसे शब्दो का उपयोग मुल्ले साई के साथ किया जा रहा है |

जैसा कि आप सभी को ज्ञात ही है कि श्री P N Oak जी के अनुसार ताजमहल , तेजोमहालय (http://ia700502.us.archive.org/14/items/HindiBooksOfP.n.Oak/TajMahalMandirBhavanHei.pdf
,http://ia600502.us.archive.org/14/items/HindiBooksOfP.n.Oak/TajMahalTejoMahalayaSivaMandirHei.pdf) है किसी मुमताज़ की कब्र नहीं किन्तु मुस्लिमो ने इस पर अपना कब्जा कर रखा है |वक्फ बोर्ड भारत के सभी मंदिरो मे मुस्लिम साई की मूर्ति स्थापित होने का इंतजार कर रहा है और यह काम बहुत तेजी से हो भी रहा है |जिस दिन भारत के सभी मंदिरो मे मुल्ले साई कि मूर्ति स्थापित हो जाएगी |

रामेश्वरम,तिरुपति से लेकर वैष्णोदेवी , अमरनाथ तक उस दिन वक्फ बोर्ड मुस्लिम साई पर अपना अधिकार ठोक देगा |हिन्दूओ के सभी मंदिरो पर उनकी जमीन ,उसके धन पर वक्फ बोर्ड का एक मात्र अधिकार हो जाएगा |फिर उसी जमीन और करोड़ो के धन का उपयोग आतंकवादी गतिविधियो मे किया जाएगा |ISIS आतंकी संगठन के भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने के सपने को पूरा किया जाएगा |सेकुलर हिन्दू तो अपना खतना करवाने के लिए पहले से ही तैयार बैठा ही है |इसलिए कट्टर हिन्दू जाग जाये |

जय सियाराम
धर्मो रक्षति रक्षितः
धर्म की रक्षा करो धर्म तुम्हारी रक्षा करेगा
धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो |

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क-साईं चाँद मिया का सौतेला भाई मुंबई में स्थित हाजी अली की दरगाह के बारे में आइये जानते हैं।


क-साईं चाँद मिया का सौतेला भाई मुंबई में स्थित हाजी अली की दरगाह के बारे में आइये जानते हैं।

इस दरगाह को हाजी अली की याद में सन 1431 में बनवाया गया था, हाजी अली दरअसल एक इस्लामिक कट्टरपंथी था जो की इस्लाम का प्रचार किया करता था। वो लोगों को आजकल के बाबाओं की तरह करतब दिखा के मुर्ख बनाता था और कहता था की अल्लाह ही सर्वशक्तिशाली है जैसा की आजकल पिछड़े इलाकों में इसाई मिशनरिया करती हैं। हज की यात्रा में निकला हाजी अली समुद्र में डूब कर मर गया और वहीँ उसकी मज़ार बना दी गई जिसे आज हम हाजी अली की दरगाह के नाम से जानते हैं।

कितने दुःख की बात है जिस हाजी अली ने हमारे जाने कितने पूर्वजों को धर्म से विमुख कर मुस्लिम बना दिया उसकी मज़ार पर हिन्दू अपना माथा रगड़ते हैं।

हिन्दू मुस्लिम की एकता की प्रतीक इन मजारों पर जो चढ़ावा चढ़ाया जाता है उस पैसे का प्रयोग मदरसों को बनाने में खर्च किया जाता है और मदरसों में क्या पढाया जाता है ये किसी से छुपा नहीं है। फ़िल्मी हस्तियाँ, नेता, खिलाड़ी सब यहाँ अपनी नाक रगड़ने आते हैं हमारे अपने 33 कोटि देवी देवता जो काम नहीं कर सकते उसे इस पाखंडी की कब्र की मिटटी कर देती है?

मित्रों समय रहते यदि हम न जागे तो हमारी पीढियां अपनी असली पहचान भूलकर उसी दिशा में चली जायेंगी जिस दिशा में जाने से रोकने के लिए हमारे असंख्य पूर्वजों ने अपने शीश कटा दिए।

जागो हिन्दुओ जागो
जय महाकाल
धर्मो रक्षति रक्षितः
धर्म की रक्षा करो धर्म तुम्हारी रक्षा करेगा
धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो |

‪#‎ExposeShirdisai‬ ‪#‎Bhaktijihad‬ ‪#‎FraudSai‬
‪#‎बहरूपिया_साई‬ ‪#‎शिर्डी_साई_बेनकाब‬ ‪#‎भक्ति_जिहाद‬

Shirdi Sai Baba – भारत के इतिहास का सबसे बड़ा पाखंड

क-साईं चाँद मिया का सौतेला भाई मुंबई में स्थित हाजी अली की दरगाह के बारे में आइये जानते हैं।

इस दरगाह को हाजी अली की याद में सन 1431 में बनवाया गया था, हाजी अली दरअसल एक इस्लामिक कट्टरपंथी था जो की इस्लाम का प्रचार किया करता था। वो लोगों को आजकल के बाबाओं की तरह करतब दिखा के मुर्ख बनाता था और कहता था की अल्लाह ही सर्वशक्तिशाली है जैसा की आजकल पिछड़े इलाकों में इसाई मिशनरिया करती हैं। हज की यात्रा में निकला हाजी अली समुद्र में डूब कर मर गया और वहीँ उसकी मज़ार बना दी गई जिसे आज हम हाजी अली की दरगाह के नाम से जानते हैं।

कितने दुःख की बात है जिस हाजी अली ने हमारे जाने कितने पूर्वजों को धर्म से विमुख कर मुस्लिम बना दिया उसकी मज़ार पर हिन्दू अपना माथा रगड़ते हैं।

हिन्दू मुस्लिम की एकता की प्रतीक इन मजारों पर जो चढ़ावा चढ़ाया जाता है उस पैसे का प्रयोग मदरसों को बनाने में खर्च किया जाता है और मदरसों में क्या पढाया जाता है ये किसी से छुपा नहीं है। फ़िल्मी हस्तियाँ, नेता, खिलाड़ी सब यहाँ अपनी नाक रगड़ने आते हैं हमारे अपने 33 कोटि देवी देवता जो काम नहीं कर सकते उसे इस पाखंडी की कब्र की मिटटी कर देती है?

मित्रों समय रहते यदि हम न जागे तो हमारी पीढियां अपनी असली पहचान भूलकर उसी दिशा में चली जायेंगी जिस दिशा में जाने से रोकने के लिए हमारे असंख्य पूर्वजों ने अपने शीश कटा दिए।

जागो हिन्दुओ जागो
जय महाकाल
धर्मो रक्षति रक्षितः 
धर्म की रक्षा करो धर्म तुम्हारी रक्षा करेगा
धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो |

#ExposeShirdisai #Bhaktijihad #FraudSai 
#बहरूपिया_साई #शिर्डी_साई_बेनकाब #भक्ति_जिहाद

(y) Shirdi Sai Baba - भारत के इतिहास का सबसे बड़ा पाखंड (y)
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भाईयों कल News Nation पर साई ( चाँद मियां ) के भक्तों की और सनातन धर्म के भक्तों की Debate देखी ।

भाइयों यह समाचार चैनल वाले सनातन धर्म के लोगों को बोलने का मौका ही नही देते ।

इन्होने प्रश्न पूछने के लिए जिनको invite किया था वह भी उलटे सनातन धर्म भक्तों पर ही सवाल उठा रहे थे ।

क्या किसी एक ने भी साई (चाँद मियां ) के भक्तों से सवाल किया कि वह साई के साथ ” राम ” क्यों लगा रहे हैं ।

क्या किसी समचार चैनल में है इतना दम कि वह साई ट्रस्ट या साई संस्थान या साई भक्तों से निम्नलिखित सवालों पूछे :-

1. साई का जन्म कहाँ हुआ था ?

2.1992 के बाद ही साई के प्रचार ने जोर पकड़ा ?

3. साई के साथ राम , कृष्ण , शिव आदि का नाम ही क्यों जोड़ा गया ?

4. साई के नाम के साथ ” अल्लाह साई ” क्यों नहीं जोड़ा गया ?

5. ” सबका मालिक एक ” साई ने कहा था तो वह एक कौन है ?

6. साई ने अपने जीवन में जनता की भलाई के लिए क्या कार्य किया जो उसे संत या गुरु की उपाधि दी जाए ?

7. सनातन धर्म के शास्त्रों के अनुसार हिन्दू धर्म में किसी पूजा की जानी चाहिए ?

8. अगर साई सारे धर्मों को मानता था तो साई की मूर्ति मस्जिद , चर्च और गुरूद्वारों में क्यों नहीं है ?

9. साई चरित में कितनी बार ” अल्लाह मालिक ” आया है ?

है कोई कसाई भक्त जो इन सवालों के जबाब दे ।

भाईयों कल News Nation पर साई ( चाँद मियां ) के भक्तों की और सनातन धर्म के भक्तों की Debate देखी ।

भाइयों यह समाचार चैनल वाले सनातन धर्म के लोगों को बोलने का मौका ही नही देते ।

इन्होने प्रश्न पूछने के लिए जिनको invite किया था वह भी उलटे सनातन धर्म भक्तों पर ही सवाल उठा रहे थे । 

क्या किसी एक ने भी साई (चाँद मियां ) के भक्तों से सवाल किया कि वह साई के साथ " राम " क्यों लगा रहे हैं । 

क्या किसी समचार चैनल में है इतना दम कि वह साई ट्रस्ट या साई संस्थान या साई भक्तों से निम्नलिखित सवालों पूछे :- 

1. साई का जन्म कहाँ हुआ था ?

2.1992 के बाद ही साई के प्रचार ने जोर पकड़ा ?

3. साई के साथ राम , कृष्ण , शिव आदि का नाम ही क्यों जोड़ा गया ? 

4. साई के नाम के साथ " अल्लाह साई " क्यों नहीं जोड़ा गया ? 

5. " सबका मालिक एक " साई ने कहा था तो वह एक कौन है ?

6. साई ने अपने जीवन में जनता की भलाई के लिए क्या कार्य किया जो उसे संत या गुरु की उपाधि दी जाए ?

7. सनातन धर्म के शास्त्रों के अनुसार हिन्दू धर्म में किसी पूजा की जानी चाहिए ? 

8. अगर साई सारे धर्मों को मानता था तो साई की मूर्ति मस्जिद , चर्च और गुरूद्वारों में क्यों नहीं है ? 

9. साई चरित में कितनी बार " अल्लाह मालिक " आया है ?

है कोई कसाई भक्त जो इन सवालों के जबाब दे ।
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हर अवतार में प्रभु ने किसी न किसी दत्य को मरा या मानव के हितार्थ कार्य किए l

साई के तथाकित अवतार पाँखड की लीला में देखे तो साई ने ज्यादा बीडी चिलम पी पर यह बुराई नही मरी

लेकिन र्मोडन कहे जाने वाले का यह तथाकित पाँखड खुद ही बीडी चिलम आदि के सेवन से दमे के कारण खांसते खांसते मर गया

यहाँ पर दमा नाम की बिमारी जीत गई और र्मोडन भगवान दर्दनाक मोत मर गया

हुआ हुआ हुहुहु
लगा दम मिटा साई

वेघानिक चेतावनी :- घुम्रपान जानलेवा हैं इससे र्मोडन अवतार पाँखंड भी नही बचा l

जय सियाराम
धर्मो रक्षति रक्षितः
धर्म की रक्षा करो धर्म तुम्हारी रक्षा करेगा
धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो |

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Shirdi Sai Baba – भारत के इतिहास का सबसे बड़ा पाखंड

Shirdi Sai Baba - भारत के इतिहास का सबसे बड़ा पाखंड's photo.
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यह साईं के धूर्त भक्त इतना ज़्यादा गिर जायेंगे, कभी नहीं सोचा था. दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित साईं धाम की वेबसाइट पर कहा गया है कि साईं सत्चरित्र में दिया हुआ ज्ञान वेदों और गीता में दिए ज्ञान से भी ऊपर है! हद्द हो गयी अब तो इनकी नीचता की.

Pulkit Arora
जय सियाराम
धर्मो रक्षति रक्षितः
धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो |

यह साईं के धूर्त भक्त इतना ज़्यादा गिर जायेंगे, कभी नहीं सोचा था. दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित साईं धाम की वेबसाइट पर कहा गया है कि साईं सत्चरित्र में दिया हुआ ज्ञान वेदों और गीता में दिए ज्ञान से भी ऊपर है! हद्द हो गयी अब तो इनकी नीचता की.

Pulkit Arora
जय सियाराम 
धर्मो रक्षति रक्षितः
धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो |

#ExposeShirdisai #Bhaktijihad #FraudSai 
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(y) Shirdi Sai Baba - भारत के इतिहास का सबसे बड़ा पाखंड (y)
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प्रकृति और विज्ञान का एक सिद्धान्त है
कि अगर आप सकारात्मक सोचते हो तो सकारत्मक सोच आएगी
अगर आप नकारात्मक सोचते हो तो नकारात्मक सोच आएगी

अगर आप सकारात्मक सोच वाले इंसान या भगवान के वारे मे सोचते हो तो सकारात्मक विचार आएंगे । अगर आप नकारात्मक ऊर्जा वाले इंसान या मुर्दे के बारे मे सोचते है या पूजा करते है तो नकारात्मक ऊर्जा आएगी ।

अब प्यारे हिन्दुओ आप सोचो इस साई फकीर के बारे जो कि एक भिखारी था जो एक हफ्ते मे एक बार स्नान करता था और मांस का सेवन और चिलम पीता था और नेगेटिव ऊर्जा का भंडार था ।

अगर आप एक भिक्षा मांगने वाले की पूजा करोगे तो आपके घर मे भिखारीपन और गरीबी और दरिद्रता अवश्य ही आ जाएगी तथा बच्चे नशेड़ी हो जाएगे । इस लिए साई की पूजा करने वाले सभी लोग नेगेटिव ऊर्जा ग्रहण करके दुखी हो रहे है । और साई के नाम पर धोका देकर दान का पैसा खा रहे है वे तात्कालिक सुखी अवश्य है पर उनका रूप भी भिखारी ही बोला जाएगा ।

अब आप स्वयं ही इस फोटो को देखे कि कितनी नेगेटिव ऊर्जा है । जबकि भगवान , ज्ञानी , देवता , गुरु और तपस्वी के चेहरे पर तेज़ झलकता है । जय श्री कृष्ण

Dr HsRawat
जय सियाराम
धर्मो रक्षति रक्षितः
धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो |

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प्रकृति और विज्ञान का एक सिद्धान्त है 
कि अगर आप सकारात्मक सोचते हो तो सकारत्मक सोच आएगी 
अगर आप नकारात्मक सोचते हो तो नकारात्मक सोच आएगी 

अगर आप सकारात्मक सोच वाले इंसान या भगवान के वारे मे सोचते हो तो सकारात्मक विचार आएंगे । अगर आप नकारात्मक ऊर्जा वाले इंसान या मुर्दे के बारे मे सोचते है या पूजा करते है तो नकारात्मक ऊर्जा आएगी । 

अब प्यारे हिन्दुओ आप सोचो इस साई फकीर के बारे जो कि एक भिखारी था जो एक हफ्ते मे एक बार स्नान करता था और मांस का सेवन और चिलम पीता था और नेगेटिव ऊर्जा का भंडार था । 

अगर आप एक भिक्षा मांगने वाले की पूजा करोगे तो आपके घर मे भिखारीपन और गरीबी और दरिद्रता अवश्य ही आ जाएगी तथा बच्चे नशेड़ी हो जाएगे । इस लिए साई की पूजा करने वाले सभी लोग नेगेटिव ऊर्जा ग्रहण करके दुखी हो रहे है । और साई के नाम पर धोका देकर दान का पैसा खा रहे है वे तात्कालिक सुखी अवश्य है पर उनका रूप भी भिखारी ही बोला जाएगा । 

अब आप स्वयं ही इस फोटो को देखे कि कितनी नेगेटिव ऊर्जा है । जबकि भगवान , ज्ञानी , देवता , गुरु और तपस्वी के चेहरे पर तेज़ झलकता है । जय श्री कृष्ण

Dr HsRawat
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