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कर्नल पुरोहित मामले की अनकही कहानी


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2005 में कर्नल पुरिहित ने रिपोर्ट दिया था कि


2005 में कर्नल पुरिहित ने रिपोर्ट दिया था कि भारत का सर्वोच्च शत्रु दाऊद इब्राहिम मुम्बई में बैठकर नक्सली और ISI के बीच मध्यस्तता कर रहा है इस पर कभी जांच भी नहीं कि गयी कि कैसे दाऊद इब्राहिम भारत की भूमि पर रहा, किसने उसे आश्रय दिया, कौन कौन राजनैतिक व्यक्ति उसके सम्पर्क में थे, पुलिस को जानकारी थी किन्तु पुलिस एक प्रकार से दाऊद के कवच के रूप में तैनात थी.. भारत मे ये सब कौन होने दे रहा था मैंने बताया था आपको की 2005 में कर्नल पुरोहित ने जानकारी दी थी कि दाऊद इब्राहिम मुम्बई में था और नक्सली और ISI के बीच सौदा करवा रहा था.. 2005 में अजीत डोवाल को मुंबई में पुलिस ने पकड़ लिया था क्योंकि उनके पास दाऊद को पकड़ने का पूरा प्लान था.. * 10जनपथ काखेल 26/11 को जो होने वाला था कर्नल पुरोहित को पता था, लेकिन उनको कुछ दिन पहले चोरों के माफिक भोपाल हवाई अड्डे पर ही पकड़ लिया गया.. जिनको शंका है वो जरा तारीखे पता कर लें.. * 10जनपथ काखेल 26/11 पहले गुजरात में करना था, निशाने पर कोई और नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी थे पर ये हमला मुम्बई में करना पड़ा क्योंकि गुजरात पुलिस अपने मुख्यमंत्री की सुरक्षा के लिए अत्यंत सक्रिय थी.. याद कीजिये आतंकियों की बात पहले गुजरात के तट पर ही देखी गयी थी किन्तु वहां दाल नहीं गली तो मुम्बई फारवर्ड किया गया था.. फिर सवाल यह उठता है कि भगवाआतंकवाद क्यों गढ़ा गया.. ISI के Lt. Gen. Pasha ने वास्तव में यह शब्द गढ़े थे जिसपर 10 जनपथ सहमत था.. दिग्गी को निर्देश मिले, मप्र के धार में दिग्गी ने सिमी का गढ़ बना रखा था, उधर से स्लीपर सेल मुम्बई पहुंचे, बच्चों के लिए खाने रहने की व्यवस्था की गई.. बच्चे आ रहे थे कर्नल पुरोहित को पता था… कर्नल को जेल क्यों हुई समझिये.. कर्नल बहुत कुछ जानते थे और जिसकी जानकारी वे लगातार सेना को दे रहे थे, वह जानकारी सेना के एक वरिष्ठतम अधिकारी को पता थी, वहां से 10 जनपथ तक खबर हो रही थी.. दिग्गी अपनी तैयारी में थे, कुछ ATS वालों को पहले से फोन पर बातें किया करते थे.. पर फोन पर जिनसे बातें किया करते थे उनको बोत से आने वाले बच्चे नहीं पहचानते थे.. कोऑर्डिनेशन में गड़बड़ हुई, ATS वाले अपनो से मिलने पहुंच गए “टहलते” हुए, बच्चों ने पुलिस की गाड़ी पर ak47की मैगजीन खाली कर दी, फिर गाड़ी को खाली किया और मुंबई सैर पर निकल गए.. उधर दिग्गी पहले ही भगवा आतंकवाद की कहानी पर किताबों की प्रूफ रीडिंग करवा चुके थे, बच्चे मुम्बई में उतरे तो उन्हें कलावे पहना दिए गए, बच्चों को निर्देश था कि जिंदा नहीं पकड़े जाना नही तो अम्मी अब्बू बहन भाई सब ऊपर ही मिलेंगे.. वो तो हवलदार देशभक्त था क्योंकि बच्चे इतनी दूर पहुंच जाएंगे इसकी तैयारी और सोच भी नहीं थी.. बाकी ईश्वर की मर्जी के आगे सब शून्य ही तो है.. कर्नल बहुत कुछ जानते थे, रिपोर्ट भी करते थे, बस कलावे के फेर में उलझते गए.. * 10जनपथ काखेल मालदा से दरभंगा तक नक्सलियों को रुपया पैसा हथियार नेपाल ISI दाऊद चीन कांग्रेस सब पता था कर्नल को किन्तु वो कौन था जो 10 जनपथ को सब बता रहा था.. * 10जनपथ काखेल एक पुलिस अधिकारी को आतंकियों ने मार दिया, पुलिस अधिकारी को मरणोंपरान्त मेडल से सम्मानित किया गया.. बाद में दिग्गी चुप नही रहे बता बैठे की एक दिन पहले ही दोनों की बात हुई थी, क्यो बताया, क्योंकि यदि नहीं बताते और कहीं गलती से जांच हो जाती तो फोन कॉल डिटेल्स में नाम तो आना ही था.. चौबेजी बनने चले थे छबे जी बनकर लौट आये.. * 10जनपथ काखेल आज आपने सुना होगा कि सबसे पहले शारद पवार ने हिन्दू आतंकवाद की अवधारणा भारत मे दी थी – डीपी त्रिपाठी ने कहा है.. बच्चे आये थे, कलावे पहन कर.. जिंदा नहीं पकड़े जाने, बार बार हमने रिकार्डेड बातचीत में सब सुन है,, पर तुकाराम,, हवलदार तुकाराम तो बहुत दूर चौपाटी के करीब थे, उनको तो बस माँ भारती की सेवा करनी थी.. सो पकड़ लिया कसाब को, जिंदा.. खुद तुकाराम तो वास्तव में शहीद हो गए पर हिन्दुओ को जीवन दे गए, खुद विषपान कर नीलकण्ठ हो गए और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अमरता का अमृत दे गए .. बस यहीं मात खा गया 10 जनपथ.. ये भारतीय नाहक ही देशभक्ति दिखा जाते हैं नहीं तो आज जिन मोदी जी के सामने विपक्ष शून्य हो चुका है उस स्थान पर राऊल बाबा होते, सल्तनत बरकरार रहती.. * 10जनपथ काखेल क्या आपको पता है कि पाकिस्तान ने साझा जांच के लिए कर्नल से पाकिस्तान में पूछताछ की बात की बार कही थी जिसपर तत्कालीन सरकार क़ानूनी दांवपेंच सुलझाने में लगी थी.. वास्तव में पाकिस्तानी ISI को यह पता करना था कि 10 जनपथ के साथ मिलकर उनके बनाये इतने पुख्ता प्लान के बारे में कर्नल को पता कैसे चला.. पर कर्नल तो सख्त जान निकले, माँ भारती के सच्चे सपूत, शरीर तोड़ दिया उन लोगों ने लेकिन जमीर नहीं तोड़ पाए.. * 10जनपथ काखेल “26/11 – आरएसएस की साजिश” किताब छापी जा चुकी थी क्योंकि तबतक प्लान के अनुसार कोई भी बच्चा जिंदा नहीं बचने वाला था, अधिकारी महोदय भी यही सुनिश्चित करने निकले थे कि अस्पताल से निकलेंगे, हाँथ मिलाएंगे फिर निबटा देंगे पर बच्चे सयाने थे, उन्होंने कन्फ्यूजन में अधिकारी महोदय को निबटा दिया… मुझे इस बात में कोई शंका नहीं कि भारत के पास एक डोवाल हैं तो साथ ही एक पुरोहित भी है.. डोवाल खुद पाकिस्तान में थे तो कर्नल भारत मे छिपे पाकिस्तान के बीच स्थापित थे.. 👍 * 10जनपथ का_खेल भारतीय सेना की खुफिया विंग के एक प्रमुख अधिकारी को पकड़ लिया गया और उधर खलबली मचा दी गयी .. इधर बच्चों को लाने की व्यवस्था कर दी गयी और बोट मुम्बई में लगा दी गयी.. 2009 में यदि श्रद्धेय आडवाणी जी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार नहीं बनाया गया होता तो उनके लिए 26/11 का समय बहुत कठिन हो सकता था लेकिन चुनाव भी सर पर थे… वैसे भारतीय समुद्री सीमा सुरक्षा बल जो पाकिस्तानी मछुआरों को 1 किलोमीटर के दायरा पार करते ही पकड़ लेता है उनपर क्या आप शंका कर सकते हैं कि मुम्बई तक बोट पहुंच गई और किसी को भनक तक नहीं लगी.. याद कीजिये, सुबह वो पाकिस्तानी हवाई जहाज जो पाकिस्तान से उड़ा था और जिसने भारत मे हथियार गिराए थे.. वो हथियार कहाँ गए, वो हवाई जहाज किसी भी रडार की पकड़ में क्यों नहीं आया… रडार जरूरत के समय कोई तो है जो एक साथ सभी संस्थाओं के रडार बन्द कर देता है.. कौन हो सकता है.. रानी आज भी कटघरे में है, राजा सीमा पार बैठा है, वजीर बाथरूम की फोटो में उलझ गया तो घोड़ा बितका हुआ है.. हांथी को लकवा लगा तो वो और सुस्त हो गया.. इसी बीच सत्ता परिवर्तन हो गया, पूरा खेल बिगड़ गया, सब के सब अपनी बारी की प्रतीक्षा में बैठे हैं कि कब उनके कर्म उनपर लौटकर पड़ते हैं.. पड़ेंगे जरूर..

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शासन बाबू और आराधना एक्सप्रेस की दिलचस्प कहानी…


शासन बाबू और आराधना एक्सप्रेस की दिलचस्प कहानी… 😈

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जब लालू यादव और नीतीश कुमार में दुश्मनी थी तब लालू की पत्नी राबड़ी देवी अक्सर नीतीश कुमार पर एक आरोप लगाया करती थी। वैसे वह आरोप केवल आरोप ही नहीं है बल्कि बिहार का बच्चा-बच्चा जानता है कि वह आरोप सच है।

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ये इशरत के अब्बू लंगोट के बहुत कमजोर हैं, इनकी पत्नी मंजू सिन्हा इनकी करतूतों की वजह से अलग रहा करती थीं और इन महानुभाव के अवैध सम्बन्ध लल्लन सिंह की बहन से रहे हैं ! कई बार की नौटंकी के बाद भी लल्लन सिंह ने इनका साथ नहीं छोड़ा है।

पटना से वैष्णोदेवी के लिए एक ट्रेन चलती है आराधना एक्सप्रेस, ये आराधना कोई और नहीं, इन्हीं लल्लन की बहन हैं। आप सब जानते होंगे कि भारत में ट्रेन का नाम व्यक्ति के नाम पर नहीं रखा जा सकता है लेकिन नीतीश ने वैष्णोदेवी से जोड़ कर इस ट्रेन का नाम आराधना एक्सप्रेस रख दिया था !

ऐसे बहुत किस्से हैं !

— पवन अवस्थी जी की वाल से साभार !

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राजदीप_सरदेसाई और उसकी पत्नी #सागरिका_घोष का काला सच


[07/06, 7:36 p.m.] ‪+91 78560 69769‬: #NDTV-की-सच्चाई

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एक पोस्ट .. मेमोरी से जो प्रणव रॉय और सागरिका की गंदी हकीकत बताती है
#राजदीप_सरदेसाई और उसकी पत्नी #सागरिका_घोष का काला सच ….”
टाइम्स ऑफ इंडिया के मालिक समीर जैन के ऊपर एक ताकतवर नौकरशाह प्रसार भारती के महानिदेशक ‘भास्कर घोष’ का बार बार दबाव आता था की मेरी बेटी सागरिका घोष और मेरे दामाद राजदीप सरदेसाई को टाइम्स ऑफ़ इंडिया का सम्पादक बनाओ ..बदले में सरकारी फायदा लो .. टाइम्स ऑफ इंडिया के मालिक समीर जैन ने मजबूरी में अपने सम्पादक को बुलाया और कहा- ‘‘पडगांवकर जी, अब आपकी छुट्टी की जाती है …. क्योकि मुझे भी अपना बिजनस चलाना है .. एक नौकरशाह की बेटी और उसके बेरोजगार पति जिससे उसने प्रेम विवाह किया है उसे नौकरी देनी है वरना सरकारी विज्ञापन मिलने बंद हो जायेंगे ….
भास्कर घोष का एक और सगा रिश्तेदार था प्रणव रॉय. … ये प्रणव रॉय अपने अंकल भास्कर घोष की मेहरबानी से दूरदर्शन पर हर रविवार “इंडिया दिस वीक” नामक कार्यक्रम करते थे …. उसकी पत्नी घोर वामपंथी नेता वृंदा करात की सगी बहन थी … उस समय दूरदर्शन के लिए खूब सारे नये नये उपकरण और साजोसमान खरीदे जा रहे थे ..उस समय विपक्ष के नाम पर सिर्फ वामपथी पार्टी ही थी बीजेपी के सिर्फ दो सांसद थे .. प्रणव रॉय ने अपने अंकल भाष्कर घोष के कहने पर न्यू देहली टेलीविजन कम्पनी लिमिटेड [एनडीटीवी] नामक कम्पनी बनाई और दूरदर्शन के लिए खरीदे जा रहे तमाम उपकरण धीरे धीरे एनडीटीवी के दफ्तर में लगने लगे … और एक दिन अचानक एनडीटीवी नामक चैनेल बन गया …
बाद में भास्कर घोष पर भ्रष्टाचार के तमाम आरोप लगे जिससे उन्हें पद छोड़ना पड़ा लेकिन जाते जाते उन्होंने अपनी बेटी सागरिका और उसके बेरोजगार प्रेमी से पति बने राजदीप सरदेसाई की जिन्दगी बना दी थी … फिर कुछ दिन दोनों मियां बीबी एनडीटीवी में रहे .. बाद में राघव बहल नामक एक कारोबारी ने “चैनेल-7” जो बाद में ‘आईबीएन-7’ बना उसे लांच किया और ये दोनों मियां बीबी आईबीएन-7 में आ गये … इन दोनों बंटी और बबली की जोड़ी ने अपने पारिवारिक रसूख का खूब फायदा उठाया …आईबीएन में सागरिका घोष की मर्जी के बिना पत्ता भी नही हिलता था क्योकि सागरिका घोष की सगी आंटी अरुंधती घोष हैं -अरुंधती घोष संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई प्रतिनिधि थी -CNN-IBN का “ग्लोबल बिजनेस नेटवर्क” (GBN) से व्यावसायिक समझौता है। -GBN टर्नर इंटरनेशनल और नेटवर्क-18 की एक कम्पनी है। भारत में सीएनएन के पीछे अरुंधती घोष की ही लाबिंग थी जिसका फायदा राजदीप और सागरिका ने खूब उठाया | सागरिका घोष की बड़ी आंटी रुमा पाल थी जिनके रसूख का फायदा भी इन दोनों बंटी और बबली की जोड़ी ने कांग्रेसी नेताओ के बीच पैठ जमाकर उठाया … रुमा पाल भले ही सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ जज थी लेकिन उनके फैसले के पीछे सागरिका घोष और राजदीप की दलाली होती थी …
बाद में वक्त का पहिया घुमा … देश में मोदीवाद उभरा .. आईबीएन को मुकेश अंबानी ने खरीद लिया .. और इन दोनों दलालों बंटी राजदीप और बबली सागरिका को लात मारकर भगा दिया … कुछ दिनों तक दोनों गायब रहे फिर बाद में अरुण पूरी के चैनेल आजतक पर नजर आने लगे.

[07/06, 7:39 p.m.] ‪+91 82996 75174‬: 26/11 के #मुंबई हमले के रिपोर्टिंग के दौरान का वाक्या है……. #एनडीटीवी पर #बिनोद_दुआ नाम का महाप्रतापी एंकर हुआ करता था, जिसे ज्यादातर भारतवासी ‘#जायका_इंडिया_का’ से जानते थे,  जिसने ब्रिटेन से अपने कार्यक्रम जायका इंडिया में गौ मांस के कई व्यंजन दिखाया था और खुद गौ मांस खाया था और कहा था आखिर भारतीय गौ मांस क्यों नहीं खाते गौ मांस बेहद लजीज होता है उस मुम्बई हमले की रिपोर्टिंग के दौरान स्टूडियो में ज्यादातर समय वही था । इसी दौरान नरीमन हाउस पर कब्जे के बाद जब #एनएसजी के कमांडो बाहर खुशियाँ मना रहे थे तो उनमें में से कई कमांडों….. #हर_हर_महादेव ..हर हर महादेव का उदघोष कर रहे थे, धीरे धीरे नारे लगाने में आमलोग भी शामिल हो गए । #आतंकवादियों को खत्म करने की खुसी में लग रहे हर हर महादेव की गगनभेदी आवाज हर टीवी देखने वाले को रोमांचित कर रही थी…… लेकिन एनडीटीवी पर एंकरिंग कर रहे विनोद दुआ का कहना था …..कि ……’क्या ऐसे मौके पर धार्मिक नारे लगाना उचित है और क्या इससे दूसरे समुदाय की भावना को ठेस नही पहुँचेगी’ ???
तब से एक वो दिन था और एक आज का दिन है…… #NDTV के प्रति जो घिन उत्पन्न हुई थी वो आज भी कायम है ।
हर हर महादेव 🙏

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​मीरा कुमार


मीरा कुमार अपना नाम Meera न लिखकर Meira मेइरा कुमार क्यों लिखती हैं ..

जानिए जरा ..!!
सोनिया के दरबार में जितने भी खान्ग्रेसी हैं ..

उनको दरबार में तभी एंट्री मिलती है जब वे ईसाई बन चुके होते हैं 
अनेक खान्ग्रेसी नेता …

सत्ता के लिए हिन्दू धर्म छोड़कर ईसाई बन चुके हैं 
ये अपना नाम थोड़ा सा ट्विस्ट करके लिखते हैं 

ताकि हिन्दू सा भी लगे और ईसाई जैसा भी 

हिन्दू मूर्ख बनते रहें 
इनके नाम की ट्विस्टिंग देखिये …
जैसे शीला दीक्षित Sheela न Sheila लिखती हैं 

शोभा ओझा जो शोभा थॉमस ओजा है 

Ojha को Oza लिखती है 

म_नीच तिवारी Tiwari को Tewary लिखता है 
ये सभी गौ माँस खाने वाले 

बीफ खाने वाले ईसाई हैं 
मेइरा Meira भी कन्वर्टेड ईसाई है 

न कि हिन्दू दलित
ऐसे लोग ईसाई बन चुके हैं 

फिर भी ये अनुसूचित जाति के बने रहकर 

हिन्दू दलितों का अधिकार मार रहे हैं 
ईसाईयों में कोई जाति व्यवस्था होती ही नहीं 

इसलिए अगर मेइरा कुमार ईसाई हैं तो इनको दलित कैसे कहा जा सकता है

👇🏻👇🏻👇🏻

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JNU


एक था कम्युनिस्ट नाम कामरेड सज्जाद जहीर ……लखनऊ में पैदा हुआ,,

ये मियाँ साहब ,पहले तो progressive writers association यानि अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ के रहनुमा बनकर उभरे ,और अपनी किताब अंगारे से इन्होने अपने लेखक होने का दावा पेश किया …………

बाद मे ये जनाब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सर्वेसर्वा बने , मगर बाबू साहब की रूह मे तो इस्लाम बसता था , इसीलिए 1947 मे नये इस्लामी देश बने ,पाकिस्तान मे जाकर बस गये ,इनकी बेगम रजिया सज्जाद जहीर भी उर्दू की लेखिका थी …….

सज्जाद जहीर , 1948 मे कलकत्ता के कम्युनिस्ट पार्टी के सम्मेलन मे भाग लेने कलकत्ता पहुँचे ,और वहाँ कुछ मुसलमानो ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया से अलग होकर CPP यानि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ पाकिस्तान का गठन कर लिया , जो बांग्लादेश मे तो फली – फूली ……

मगर पाकिस्तान मे , सज्जाद जहीर , मशहूर शायर लेखक फैज अहमद फैज , शायर अहमद फराज , रजिया सज्जाद जहीर ,और कुछ पाकिस्तानी जनरलो ने मिलकर रावलपिंडी षडयंत्र केस मे पाकिस्तान मे सैन्य तख्ता पलट का प्रयास किया और पकडे जाने पर जेल मे डाल दिये गये । सज्जाद जहीर, अहमद फराज और फैज अहमद फैज को लंबी सजाऐ सुनाई गई …….

जेल से रिहा होने के बाद सज्जाद जहीर भारत आया और खुद को शरणार्थी घोषित करके कांग्रेस सरकार से भारतीय नागरिता मांगी ..और कांग्रेस सरकार ने सज्जाद को भारतीय नागरिकता दे दिया …

अब आगे की कथा सुनिये , इन मियाँ साहब, सज्जाद जहीर और रजिया जहीर की चार बेटियाँ थी .

1- नजमा जहीर बाकर , पाकिस्तानी सज्जाद जहीर की सबसे बडी बेटी , जो कि नेहरू के मदरसे ,JNU मे biochemistry की प्रोफेसर है ……..

2- दूसरी बेटी नसीम भाटिया है …………

3- सज्जाद जहीर की तीसरी बेटी है ,नादिरा बब्बर जिसने फिल्म एक्टर और कांग्रेस सांसद राज बब्बर से शादी की है , इनके दो बच्चे है , आर्य बब्बर और जूही बब्बर ……………..

4- सज्जाद जहीर की चौथी और सबसे छोटी बेटी का नाम है नूर जहीर , ये मोहतरमा भी लेखिका है , और JNU से जुडी है ..

नूर जहीर ने शादी नही की और जीवन भर अविवाहित रहने के अपने फैसले पर आज भी कायम है । चूँकि नूर जहीर ने शादी ही नही की , तो बच्चो का तो सवाल ही पैदा नही होता ….. मगर रूकिये , यहाँ आपको निराश होना पडेगा . अविवाहित होने के बावजूद , नूर जहीर के चार बच्चे है , वो भी चार अलग – अलग पुरूषो से ………………..

इन्ही नूर जहीर और ए. दासगुप्ता की दूसरी संतान है पंखुडी जहीर ,अरे नही चौंकिये मत ………

ये वही पंखुडी जहीर है ,जिसने कुछ ही वर्षो पहले दिल्ली मे RSS ऑफिस केशव कुञ्ज के सामने खुलेआम चूमा- चाटी के लिए , किस ऑफ लव ( kiss of love ) के नाम से इवेंट आयोजित किया था । जी हाँ , ये वही है जो कन्हैयाकुमार वाले मामले मे सबसे ज्यादा उछल कूद मचा रही थी । इसे JNU मे कन्हैयाकुमार की सबसे विश्वश्त सहयोगी माना जाता है । खुले आम सिगरेट , शराब , और अनेको व्यसनो की शौकीन ,इन जैसी लडकियाँ जब महिला अधिकारो के नाम पर बवंडर मचाती है। तो सच मे पूछ लेने को दिल करता है ,कि तुम्हारा खानदान क्या है ??????????

और क्या है तुम्हारे संस्कार ???????

बिन ब्याही माँ की ,दो अलग अलग पुरूषो से उत्पन्न चार संतानो मे से एक पंखुडी जहीर जैसी औरते , खुद औरतो के नाम पे जिल्लत का दाग है ………..

शायद ये पोस्ट पाकिस्तान , इस्लामियत , कम्युनिस्टो का सडन भरा अतीत , इनकी मानसिकता , इनका खानदान , और इनके संस्कार बयां करने को काफी है ……….

इन्ही जैसे लोगो ने JNU की इज्जत मे चार चाँद लगा रखे है ………………..

पाकिस्तान मे कम्युनिस्ट पार्टी आज तक 01% वोट भी नही जुटा पाये , कुल 176 वोट मिलते है इन्हे ………

और पाकिस्तानी सज्जाद जहीर की औलादे , कम्युनिस्टो का चोला पहनकर भारत की बर्बादी के नारे लगा रहे है …..

समझ मे आया ???? JNU के कामरेडो का पाकिस्तान प्रेम और कश्मीर के मुद्दे पर नौटंकी करने का असली उद्देश्य ………………….

क्या कारण है कि ये पंखुडी दासगुप्ता ना लिखकर खुद को पंखुडी जहीर लिखती है ……..?????

और हाँ , इसकी सगी मौसी के लडके , नादिरा बब्बर और राज बब्बर की संतान ,फिल्म एक्टर आर्य बब्बर का घर का नाम सज्जाद है ……

वज्ष्णुगुप्त चाणक्य।

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सत्तर अस्सी के दशक में राजनीति के गलियारे में दबी जुबान से ”जग्गू-जगुआर” की चर्चा हुआ करती थी ! तब मुझे राजनीति की कोई समझ नहीं थी और न ही कोई ख़ास लगाव हुआ करता था ! 
दरअसल ”जग्गू-जगुआर” का मतलब जग्गू यानी जगजीवन राम (तत्कालीन रक्षामंत्री) और जगुआर लड़ाकू विमान ! इस विमान की खरीद में कथित रूप से बब्बू जी को घूस मिलने की बात राजनैतिक गलियारे में चर्चा का विषय हुआ करती थी ! एक बार तो जगजीवन राम ने सेना अध्यक्ष ”मानिक शा” पर भी अभद्र भाषा का प्रयोग किया था ! 
मेरे पिता जी को राजनीति में बहुत लगाव था उस समय पर ”दिनमान और रविवार” नाम की पाक्षिक पत्रिकाएं आती थी जिन्हे पिता जी बहुत पढ़ते थे ! (आपको बता दूँ की पूर्व उपराष्ट्रपति स्वर्गीय श्री भैरोंसिंह शेखावत जी भी ये पत्रिकाएं पढ़ते थे) कभी कभी मैं भी चित्र देखने के बहाने कुछ पढ़ लिया करता था ! सायद 1975 की बात है तब मैं 10 साल का था, गर्मियों की छुट्टी में पिता जी शहडोल (MP) से गाँव आये हुए थे ! उनकी चारपाई में तकिये के नीचे दिनमान या रविवार या कोई अन्य पत्रिका रखी थी, मैंने उसे उठाकर पन्ने पलटने लगा इतने में पिता जी आ गए और पत्रिका हाथ से छुड़ा लिया ! जबकि इसके पहले कभी भी ऐसा नहीं किया ! उलटा बोलते थे ”चित्र देख लिए हो तो लाओ मुझे दे दो” ! 
मेरे बालमन में बार बार उस पत्रिका के चित्र देखने की लालच नहीं गया और एक दिन चुपचाप मैंने देख लिए ! उसमे कई फोटो छपे थे पर अब कुछ याद नहीं ! पर आज एक मित्र की पोस्ट में मीराकुमार (राष्ट्रपति की उम्मीदवार) के भाई सुरेश कुमार के किसी महिला के साथ आपत्तिजनक स्थित में एक फोटो देखा तो मुझे 42 साल पुरानी ओ धुंधली याद आ गई जिसमे पत्रिका के एक पेज को पिता जी ने मोड़ कर छिपा दिया था !
इस फोटो की आधी अधूरी सच्चाई जो ज्ञात है (गुगलियाये नहीं कुछ नहीं मिलेगा) ओ ये है की ! बाबू जगजीवन राम जी का बेटा ”सुरेश कुमार” एक बिगड़ी हुई अय्याश किस्म की औलाद था जिसने  देश की रक्षा संबधी महत्वपूर्ण जानकारियों को चीन तथा पाकिस्तान को बेच दिया था ! तब 1970 से 1974 तक जगजीवन राम देश के रक्षामंत्री के रूप में काम किया करते थे विदेशी गुप्त चार एजेंसिया गुप्त सूचनाएं हासिल करने के लिए सुरेश कुमार को शराब तथा अय्याशी का पूरा इंतजाम किया करते थे ! इसी सिलसिले में उसने सुषमा नाम की विदेशी एजेंट से शारीरिक संबंध भी बनाए विदेशी गुप्तचर एजेंसियों ने ब्लैकमेल करने के लिए उसकी अश्लील फोटो भी खीच रखी थी जिसके वजह से वह हर महत्वपूर्ण सूचना भारत विरोधी गुप्तचर संस्थाओं को दे देता था ! इन अश्लील चित्रों के लीक होने से जगजीवन राम को काफी अपमानित होना पडा था , तथा राजनैतिक कैरियर में नुकसान भी उठाना पडा था ! 
सनद रहे जिस दिन पेपर में यह चित्र छपा था उस पेपर की सारी प्रतिया रातो रात खरीद ली गई थी और कुछ माह बाद वह पेपर बंद हो गया था (अखबार का नाम याद नहीं आ रहा) ! इसी तरह से ओ पत्रिका भी कुछ साल बाद बंद हो गई !
अब ये कहेंगे की गड़े मुर्दे उखाड़ने से क्या मिलेगा ? तो भैया जी मामला देश के सर्वोच्च पद का है ! कांगियों की नीति और नियत तो बताना हम राष्ट्रवदियों का पुनीत धर्म है !
नोट—: सभी अश्लील फोटो पोस्ट नहीं कर रहा हूँ !