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शासन बाबू और आराधना एक्सप्रेस की दिलचस्प कहानी…


शासन बाबू और आराधना एक्सप्रेस की दिलचस्प कहानी… 😈

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जब लालू यादव और नीतीश कुमार में दुश्मनी थी तब लालू की पत्नी राबड़ी देवी अक्सर नीतीश कुमार पर एक आरोप लगाया करती थी। वैसे वह आरोप केवल आरोप ही नहीं है बल्कि बिहार का बच्चा-बच्चा जानता है कि वह आरोप सच है।

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ये इशरत के अब्बू लंगोट के बहुत कमजोर हैं, इनकी पत्नी मंजू सिन्हा इनकी करतूतों की वजह से अलग रहा करती थीं और इन महानुभाव के अवैध सम्बन्ध लल्लन सिंह की बहन से रहे हैं ! कई बार की नौटंकी के बाद भी लल्लन सिंह ने इनका साथ नहीं छोड़ा है।

पटना से वैष्णोदेवी के लिए एक ट्रेन चलती है आराधना एक्सप्रेस, ये आराधना कोई और नहीं, इन्हीं लल्लन की बहन हैं। आप सब जानते होंगे कि भारत में ट्रेन का नाम व्यक्ति के नाम पर नहीं रखा जा सकता है लेकिन नीतीश ने वैष्णोदेवी से जोड़ कर इस ट्रेन का नाम आराधना एक्सप्रेस रख दिया था !

ऐसे बहुत किस्से हैं !

— पवन अवस्थी जी की वाल से साभार !

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राजदीप_सरदेसाई और उसकी पत्नी #सागरिका_घोष का काला सच


[07/06, 7:36 p.m.] ‪+91 78560 69769‬: #NDTV-की-सच्चाई

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एक पोस्ट .. मेमोरी से जो प्रणव रॉय और सागरिका की गंदी हकीकत बताती है
#राजदीप_सरदेसाई और उसकी पत्नी #सागरिका_घोष का काला सच ….”
टाइम्स ऑफ इंडिया के मालिक समीर जैन के ऊपर एक ताकतवर नौकरशाह प्रसार भारती के महानिदेशक ‘भास्कर घोष’ का बार बार दबाव आता था की मेरी बेटी सागरिका घोष और मेरे दामाद राजदीप सरदेसाई को टाइम्स ऑफ़ इंडिया का सम्पादक बनाओ ..बदले में सरकारी फायदा लो .. टाइम्स ऑफ इंडिया के मालिक समीर जैन ने मजबूरी में अपने सम्पादक को बुलाया और कहा- ‘‘पडगांवकर जी, अब आपकी छुट्टी की जाती है …. क्योकि मुझे भी अपना बिजनस चलाना है .. एक नौकरशाह की बेटी और उसके बेरोजगार पति जिससे उसने प्रेम विवाह किया है उसे नौकरी देनी है वरना सरकारी विज्ञापन मिलने बंद हो जायेंगे ….
भास्कर घोष का एक और सगा रिश्तेदार था प्रणव रॉय. … ये प्रणव रॉय अपने अंकल भास्कर घोष की मेहरबानी से दूरदर्शन पर हर रविवार “इंडिया दिस वीक” नामक कार्यक्रम करते थे …. उसकी पत्नी घोर वामपंथी नेता वृंदा करात की सगी बहन थी … उस समय दूरदर्शन के लिए खूब सारे नये नये उपकरण और साजोसमान खरीदे जा रहे थे ..उस समय विपक्ष के नाम पर सिर्फ वामपथी पार्टी ही थी बीजेपी के सिर्फ दो सांसद थे .. प्रणव रॉय ने अपने अंकल भाष्कर घोष के कहने पर न्यू देहली टेलीविजन कम्पनी लिमिटेड [एनडीटीवी] नामक कम्पनी बनाई और दूरदर्शन के लिए खरीदे जा रहे तमाम उपकरण धीरे धीरे एनडीटीवी के दफ्तर में लगने लगे … और एक दिन अचानक एनडीटीवी नामक चैनेल बन गया …
बाद में भास्कर घोष पर भ्रष्टाचार के तमाम आरोप लगे जिससे उन्हें पद छोड़ना पड़ा लेकिन जाते जाते उन्होंने अपनी बेटी सागरिका और उसके बेरोजगार प्रेमी से पति बने राजदीप सरदेसाई की जिन्दगी बना दी थी … फिर कुछ दिन दोनों मियां बीबी एनडीटीवी में रहे .. बाद में राघव बहल नामक एक कारोबारी ने “चैनेल-7” जो बाद में ‘आईबीएन-7’ बना उसे लांच किया और ये दोनों मियां बीबी आईबीएन-7 में आ गये … इन दोनों बंटी और बबली की जोड़ी ने अपने पारिवारिक रसूख का खूब फायदा उठाया …आईबीएन में सागरिका घोष की मर्जी के बिना पत्ता भी नही हिलता था क्योकि सागरिका घोष की सगी आंटी अरुंधती घोष हैं -अरुंधती घोष संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई प्रतिनिधि थी -CNN-IBN का “ग्लोबल बिजनेस नेटवर्क” (GBN) से व्यावसायिक समझौता है। -GBN टर्नर इंटरनेशनल और नेटवर्क-18 की एक कम्पनी है। भारत में सीएनएन के पीछे अरुंधती घोष की ही लाबिंग थी जिसका फायदा राजदीप और सागरिका ने खूब उठाया | सागरिका घोष की बड़ी आंटी रुमा पाल थी जिनके रसूख का फायदा भी इन दोनों बंटी और बबली की जोड़ी ने कांग्रेसी नेताओ के बीच पैठ जमाकर उठाया … रुमा पाल भले ही सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ जज थी लेकिन उनके फैसले के पीछे सागरिका घोष और राजदीप की दलाली होती थी …
बाद में वक्त का पहिया घुमा … देश में मोदीवाद उभरा .. आईबीएन को मुकेश अंबानी ने खरीद लिया .. और इन दोनों दलालों बंटी राजदीप और बबली सागरिका को लात मारकर भगा दिया … कुछ दिनों तक दोनों गायब रहे फिर बाद में अरुण पूरी के चैनेल आजतक पर नजर आने लगे.

[07/06, 7:39 p.m.] ‪+91 82996 75174‬: 26/11 के #मुंबई हमले के रिपोर्टिंग के दौरान का वाक्या है……. #एनडीटीवी पर #बिनोद_दुआ नाम का महाप्रतापी एंकर हुआ करता था, जिसे ज्यादातर भारतवासी ‘#जायका_इंडिया_का’ से जानते थे,  जिसने ब्रिटेन से अपने कार्यक्रम जायका इंडिया में गौ मांस के कई व्यंजन दिखाया था और खुद गौ मांस खाया था और कहा था आखिर भारतीय गौ मांस क्यों नहीं खाते गौ मांस बेहद लजीज होता है उस मुम्बई हमले की रिपोर्टिंग के दौरान स्टूडियो में ज्यादातर समय वही था । इसी दौरान नरीमन हाउस पर कब्जे के बाद जब #एनएसजी के कमांडो बाहर खुशियाँ मना रहे थे तो उनमें में से कई कमांडों….. #हर_हर_महादेव ..हर हर महादेव का उदघोष कर रहे थे, धीरे धीरे नारे लगाने में आमलोग भी शामिल हो गए । #आतंकवादियों को खत्म करने की खुसी में लग रहे हर हर महादेव की गगनभेदी आवाज हर टीवी देखने वाले को रोमांचित कर रही थी…… लेकिन एनडीटीवी पर एंकरिंग कर रहे विनोद दुआ का कहना था …..कि ……’क्या ऐसे मौके पर धार्मिक नारे लगाना उचित है और क्या इससे दूसरे समुदाय की भावना को ठेस नही पहुँचेगी’ ???
तब से एक वो दिन था और एक आज का दिन है…… #NDTV के प्रति जो घिन उत्पन्न हुई थी वो आज भी कायम है ।
हर हर महादेव 🙏

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​मीरा कुमार


मीरा कुमार अपना नाम Meera न लिखकर Meira मेइरा कुमार क्यों लिखती हैं ..

जानिए जरा ..!!
सोनिया के दरबार में जितने भी खान्ग्रेसी हैं ..

उनको दरबार में तभी एंट्री मिलती है जब वे ईसाई बन चुके होते हैं 
अनेक खान्ग्रेसी नेता …

सत्ता के लिए हिन्दू धर्म छोड़कर ईसाई बन चुके हैं 
ये अपना नाम थोड़ा सा ट्विस्ट करके लिखते हैं 

ताकि हिन्दू सा भी लगे और ईसाई जैसा भी 

हिन्दू मूर्ख बनते रहें 
इनके नाम की ट्विस्टिंग देखिये …
जैसे शीला दीक्षित Sheela न Sheila लिखती हैं 

शोभा ओझा जो शोभा थॉमस ओजा है 

Ojha को Oza लिखती है 

म_नीच तिवारी Tiwari को Tewary लिखता है 
ये सभी गौ माँस खाने वाले 

बीफ खाने वाले ईसाई हैं 
मेइरा Meira भी कन्वर्टेड ईसाई है 

न कि हिन्दू दलित
ऐसे लोग ईसाई बन चुके हैं 

फिर भी ये अनुसूचित जाति के बने रहकर 

हिन्दू दलितों का अधिकार मार रहे हैं 
ईसाईयों में कोई जाति व्यवस्था होती ही नहीं 

इसलिए अगर मेइरा कुमार ईसाई हैं तो इनको दलित कैसे कहा जा सकता है

👇🏻👇🏻👇🏻

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JNU


एक था कम्युनिस्ट नाम कामरेड सज्जाद जहीर ……लखनऊ में पैदा हुआ,,

ये मियाँ साहब ,पहले तो progressive writers association यानि अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ के रहनुमा बनकर उभरे ,और अपनी किताब अंगारे से इन्होने अपने लेखक होने का दावा पेश किया …………

बाद मे ये जनाब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सर्वेसर्वा बने , मगर बाबू साहब की रूह मे तो इस्लाम बसता था , इसीलिए 1947 मे नये इस्लामी देश बने ,पाकिस्तान मे जाकर बस गये ,इनकी बेगम रजिया सज्जाद जहीर भी उर्दू की लेखिका थी …….

सज्जाद जहीर , 1948 मे कलकत्ता के कम्युनिस्ट पार्टी के सम्मेलन मे भाग लेने कलकत्ता पहुँचे ,और वहाँ कुछ मुसलमानो ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया से अलग होकर CPP यानि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ पाकिस्तान का गठन कर लिया , जो बांग्लादेश मे तो फली – फूली ……

मगर पाकिस्तान मे , सज्जाद जहीर , मशहूर शायर लेखक फैज अहमद फैज , शायर अहमद फराज , रजिया सज्जाद जहीर ,और कुछ पाकिस्तानी जनरलो ने मिलकर रावलपिंडी षडयंत्र केस मे पाकिस्तान मे सैन्य तख्ता पलट का प्रयास किया और पकडे जाने पर जेल मे डाल दिये गये । सज्जाद जहीर, अहमद फराज और फैज अहमद फैज को लंबी सजाऐ सुनाई गई …….

जेल से रिहा होने के बाद सज्जाद जहीर भारत आया और खुद को शरणार्थी घोषित करके कांग्रेस सरकार से भारतीय नागरिता मांगी ..और कांग्रेस सरकार ने सज्जाद को भारतीय नागरिकता दे दिया …

अब आगे की कथा सुनिये , इन मियाँ साहब, सज्जाद जहीर और रजिया जहीर की चार बेटियाँ थी .

1- नजमा जहीर बाकर , पाकिस्तानी सज्जाद जहीर की सबसे बडी बेटी , जो कि नेहरू के मदरसे ,JNU मे biochemistry की प्रोफेसर है ……..

2- दूसरी बेटी नसीम भाटिया है …………

3- सज्जाद जहीर की तीसरी बेटी है ,नादिरा बब्बर जिसने फिल्म एक्टर और कांग्रेस सांसद राज बब्बर से शादी की है , इनके दो बच्चे है , आर्य बब्बर और जूही बब्बर ……………..

4- सज्जाद जहीर की चौथी और सबसे छोटी बेटी का नाम है नूर जहीर , ये मोहतरमा भी लेखिका है , और JNU से जुडी है ..

नूर जहीर ने शादी नही की और जीवन भर अविवाहित रहने के अपने फैसले पर आज भी कायम है । चूँकि नूर जहीर ने शादी ही नही की , तो बच्चो का तो सवाल ही पैदा नही होता ….. मगर रूकिये , यहाँ आपको निराश होना पडेगा . अविवाहित होने के बावजूद , नूर जहीर के चार बच्चे है , वो भी चार अलग – अलग पुरूषो से ………………..

इन्ही नूर जहीर और ए. दासगुप्ता की दूसरी संतान है पंखुडी जहीर ,अरे नही चौंकिये मत ………

ये वही पंखुडी जहीर है ,जिसने कुछ ही वर्षो पहले दिल्ली मे RSS ऑफिस केशव कुञ्ज के सामने खुलेआम चूमा- चाटी के लिए , किस ऑफ लव ( kiss of love ) के नाम से इवेंट आयोजित किया था । जी हाँ , ये वही है जो कन्हैयाकुमार वाले मामले मे सबसे ज्यादा उछल कूद मचा रही थी । इसे JNU मे कन्हैयाकुमार की सबसे विश्वश्त सहयोगी माना जाता है । खुले आम सिगरेट , शराब , और अनेको व्यसनो की शौकीन ,इन जैसी लडकियाँ जब महिला अधिकारो के नाम पर बवंडर मचाती है। तो सच मे पूछ लेने को दिल करता है ,कि तुम्हारा खानदान क्या है ??????????

और क्या है तुम्हारे संस्कार ???????

बिन ब्याही माँ की ,दो अलग अलग पुरूषो से उत्पन्न चार संतानो मे से एक पंखुडी जहीर जैसी औरते , खुद औरतो के नाम पे जिल्लत का दाग है ………..

शायद ये पोस्ट पाकिस्तान , इस्लामियत , कम्युनिस्टो का सडन भरा अतीत , इनकी मानसिकता , इनका खानदान , और इनके संस्कार बयां करने को काफी है ……….

इन्ही जैसे लोगो ने JNU की इज्जत मे चार चाँद लगा रखे है ………………..

पाकिस्तान मे कम्युनिस्ट पार्टी आज तक 01% वोट भी नही जुटा पाये , कुल 176 वोट मिलते है इन्हे ………

और पाकिस्तानी सज्जाद जहीर की औलादे , कम्युनिस्टो का चोला पहनकर भारत की बर्बादी के नारे लगा रहे है …..

समझ मे आया ???? JNU के कामरेडो का पाकिस्तान प्रेम और कश्मीर के मुद्दे पर नौटंकी करने का असली उद्देश्य ………………….

क्या कारण है कि ये पंखुडी दासगुप्ता ना लिखकर खुद को पंखुडी जहीर लिखती है ……..?????

और हाँ , इसकी सगी मौसी के लडके , नादिरा बब्बर और राज बब्बर की संतान ,फिल्म एक्टर आर्य बब्बर का घर का नाम सज्जाद है ……

वज्ष्णुगुप्त चाणक्य।

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सत्तर अस्सी के दशक में राजनीति के गलियारे में दबी जुबान से ”जग्गू-जगुआर” की चर्चा हुआ करती थी ! तब मुझे राजनीति की कोई समझ नहीं थी और न ही कोई ख़ास लगाव हुआ करता था ! 
दरअसल ”जग्गू-जगुआर” का मतलब जग्गू यानी जगजीवन राम (तत्कालीन रक्षामंत्री) और जगुआर लड़ाकू विमान ! इस विमान की खरीद में कथित रूप से बब्बू जी को घूस मिलने की बात राजनैतिक गलियारे में चर्चा का विषय हुआ करती थी ! एक बार तो जगजीवन राम ने सेना अध्यक्ष ”मानिक शा” पर भी अभद्र भाषा का प्रयोग किया था ! 
मेरे पिता जी को राजनीति में बहुत लगाव था उस समय पर ”दिनमान और रविवार” नाम की पाक्षिक पत्रिकाएं आती थी जिन्हे पिता जी बहुत पढ़ते थे ! (आपको बता दूँ की पूर्व उपराष्ट्रपति स्वर्गीय श्री भैरोंसिंह शेखावत जी भी ये पत्रिकाएं पढ़ते थे) कभी कभी मैं भी चित्र देखने के बहाने कुछ पढ़ लिया करता था ! सायद 1975 की बात है तब मैं 10 साल का था, गर्मियों की छुट्टी में पिता जी शहडोल (MP) से गाँव आये हुए थे ! उनकी चारपाई में तकिये के नीचे दिनमान या रविवार या कोई अन्य पत्रिका रखी थी, मैंने उसे उठाकर पन्ने पलटने लगा इतने में पिता जी आ गए और पत्रिका हाथ से छुड़ा लिया ! जबकि इसके पहले कभी भी ऐसा नहीं किया ! उलटा बोलते थे ”चित्र देख लिए हो तो लाओ मुझे दे दो” ! 
मेरे बालमन में बार बार उस पत्रिका के चित्र देखने की लालच नहीं गया और एक दिन चुपचाप मैंने देख लिए ! उसमे कई फोटो छपे थे पर अब कुछ याद नहीं ! पर आज एक मित्र की पोस्ट में मीराकुमार (राष्ट्रपति की उम्मीदवार) के भाई सुरेश कुमार के किसी महिला के साथ आपत्तिजनक स्थित में एक फोटो देखा तो मुझे 42 साल पुरानी ओ धुंधली याद आ गई जिसमे पत्रिका के एक पेज को पिता जी ने मोड़ कर छिपा दिया था !
इस फोटो की आधी अधूरी सच्चाई जो ज्ञात है (गुगलियाये नहीं कुछ नहीं मिलेगा) ओ ये है की ! बाबू जगजीवन राम जी का बेटा ”सुरेश कुमार” एक बिगड़ी हुई अय्याश किस्म की औलाद था जिसने  देश की रक्षा संबधी महत्वपूर्ण जानकारियों को चीन तथा पाकिस्तान को बेच दिया था ! तब 1970 से 1974 तक जगजीवन राम देश के रक्षामंत्री के रूप में काम किया करते थे विदेशी गुप्त चार एजेंसिया गुप्त सूचनाएं हासिल करने के लिए सुरेश कुमार को शराब तथा अय्याशी का पूरा इंतजाम किया करते थे ! इसी सिलसिले में उसने सुषमा नाम की विदेशी एजेंट से शारीरिक संबंध भी बनाए विदेशी गुप्तचर एजेंसियों ने ब्लैकमेल करने के लिए उसकी अश्लील फोटो भी खीच रखी थी जिसके वजह से वह हर महत्वपूर्ण सूचना भारत विरोधी गुप्तचर संस्थाओं को दे देता था ! इन अश्लील चित्रों के लीक होने से जगजीवन राम को काफी अपमानित होना पडा था , तथा राजनैतिक कैरियर में नुकसान भी उठाना पडा था ! 
सनद रहे जिस दिन पेपर में यह चित्र छपा था उस पेपर की सारी प्रतिया रातो रात खरीद ली गई थी और कुछ माह बाद वह पेपर बंद हो गया था (अखबार का नाम याद नहीं आ रहा) ! इसी तरह से ओ पत्रिका भी कुछ साल बाद बंद हो गई !
अब ये कहेंगे की गड़े मुर्दे उखाड़ने से क्या मिलेगा ? तो भैया जी मामला देश के सर्वोच्च पद का है ! कांगियों की नीति और नियत तो बताना हम राष्ट्रवदियों का पुनीत धर्म है !
नोट—: सभी अश्लील फोटो पोस्ट नहीं कर रहा हूँ !

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मीरा


कांग्रेस का हनी ट्रैप – और बर्बाद हो गया था मीरा कुमार का पूरा परिवार
दिल्ली : कैसे मीरा कुमार के दलित पिता बाबू जगजीवन राम को प्रधानमंत्री बनने से रोकने के लिए इंदिरा गाँधी ने कैसे साजिश रची थी
इसके लिए इंदिरा ने अपनी बहु मेनका गाँधी का सहारा लिया था ..क्योकि तब संजय गाँधी जिन्दा थे और इंदिरा और मेनका में खूब जमती थी . जगजीवन राम को प्रधानमंत्री बनने से रोकने के लिए उनके बेटे सुरेश राम का सेक्स स्कैंडल यानी उनकी फोटो अपनी पत्रिका सूर्या में छापी थी ..
मित्रो साल 1977 में जनता पार्टी की लहर में इंदिरा गांधी चुनाव हार गई थीं. उस समय जगजीवन राम पीएम पद के सबसे बड़े दावेदार माने जा रहे थे. कहा जाता है कि जाने-माने नेता जगजीवन राम के बेटे सेक्स स्कैंडल में न फंसे होते तो वह देश के पहले दलित पीएम बन सकते थे.

दुर्भाग्यवश 1978 में सूर्या नाम की एक पत्रिका में ऐसी तस्वीरें छपीं, जिसमें जगजीवन राम के बेटे सुरेश राम को यूपी के बागपत जिले के एक गांव की एक महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाते हुए आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया गया. इन तस्वीरों ने सियासी गलियारे में तूफान ला दिया.
सूर्या पत्रिका की संपादक कोई और नहीं बल्कि इंदिरा गांधी की बहू मेनका गांधी थीं. इस सेक्स स्कैंडल जिस वक्त खुलासा हुआ उस वक्त जगजीवन राम, मोरारजी देसाई की सरकार में रक्षा मंत्री थे. उनकी गिनती कद्दावर नेताओं में होती थी, लेकिन स्कैंडल ने उनके पीएम बनने के सपने के तोड़ दिया.
इस स्कैंडल में सुरेश राम के साथ दिख रही युवती दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज की छात्रा थी. कहा जाता है कि इसके बाद सुरेश ने उससे शादी भी की थी. लेकिन सुरेश की मौत के बाद जगजीवराम के परिवारवालों ने उसका बहिष्कार कर दिया था.
दबे जुबान ये भी कहा जाता है कि इस सेक्स स्कैंडल का खुलासा जगजीवन राम के राजनैतिक करियर को खत्म करने के लिए किया गया था. इसमें उन्हीं के पार्टी के कई नेता शामिल थे. इन नेताओं में केसी त्यागी, ओमपाल सिंह और एपी सिंह का नाम अप्रत्यक्ष रूप से आता है.

इस चर्चित सेक्स स्कैंडल का सूत्रधार खुशवंत सिंह को माना जाता है. वह उस समय कांग्रेस के अखबार नेशनल हेराल्ड के प्रधान संपादक और मेनका की पत्रिका सूर्या के कंसल्टिंग एडिटर भी थे. वह बंद लिफाफे में तस्वीरें लेकर पहुंचे. इसके बाद इसे सूर्या पत्रिका में छाप दिया गया .।

नवीन थूली

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आडवाणी जी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार क्यों नही बन पाए , इसे समझने के लिए महाभारत के एक प्रसंग को समझना जरूरी होगा ।
महाभारत के युद्ध पश्चात श्रीकृष्ण लौटे तो रोष में भरी रुक्मिणी ने पूछा..,

“आपने द्रोणाचार्य और भीष्म पितामह जैसे धर्मपरायण लोगों के वध में क्यों साथ दिया ?”
श्री कृष्ण ने उत्तर दिया.., “ये सही है कि उन दोनों ने जीवनपर्यंत धर्म का पालन किया किन्तु उनके किये एक पाप ने उनके सारे पुण्यों को हर लिया ”

“वो कौन सा पाप था ?”
श्री कृष्ण ने कहा : “भरी सभा में जब द्रौपदी का चीरहरण हो रहा था तब ये दोनों भी वहां उपस्थित थे। बड़े होने के नाते ये दुशासन को आज्ञा भी दे सकते थे किंतु इन्होंने ऐसा नहीं किय। उनके इस एक पाप से बाकी धर्मनिष्ठता छोटी पड गई”
रुक्मिणी ने पूछा, “और कर्ण ? वो अपनी दानवीरता के लिए प्रसिद्ध था ।कोई उसके द्वार से खाली हाथ नहीं गया। उसकी क्या गलती थी ?”

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श्रीकृष्ण ने कहा, “जब अभिमन्यु सभी वीरों को धूल चटाने के बाद युद्धक्षेत्र में आहत होकर भूमि पर पड़ा था तो उसने करण से पानी माँगा। कर्ण जहाँ खड़ा था उसके पास पानी का एक गड्ढा था किंतु कर्ण ने मरते हुए अभिमन्यु को पानी नहीं दिया। इसलिये उसका जीवन भर दानवीरता से कमाया हुआ पुण्य नष्ट हो गया। बाद में उसी गड्ढे में उसके रथ का पहिया फंस गया और वो मारा गया”

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अब आप लोग खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि पाकिस्तान जाकर जिन्ना की मजार पर आडवाणी जी ने जो भाषण दिया , उस भाषण के पाप का वजन कितना था ?

Sanjay dvivedi