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सत्तर अस्सी के दशक में राजनीति के गलियारे में दबी जुबान से ”जग्गू-जगुआर” की चर्चा हुआ करती थी ! तब मुझे राजनीति की कोई समझ नहीं थी और न ही कोई ख़ास लगाव हुआ करता था ! 
दरअसल ”जग्गू-जगुआर” का मतलब जग्गू यानी जगजीवन राम (तत्कालीन रक्षामंत्री) और जगुआर लड़ाकू विमान ! इस विमान की खरीद में कथित रूप से बब्बू जी को घूस मिलने की बात राजनैतिक गलियारे में चर्चा का विषय हुआ करती थी ! एक बार तो जगजीवन राम ने सेना अध्यक्ष ”मानिक शा” पर भी अभद्र भाषा का प्रयोग किया था ! 
मेरे पिता जी को राजनीति में बहुत लगाव था उस समय पर ”दिनमान और रविवार” नाम की पाक्षिक पत्रिकाएं आती थी जिन्हे पिता जी बहुत पढ़ते थे ! (आपको बता दूँ की पूर्व उपराष्ट्रपति स्वर्गीय श्री भैरोंसिंह शेखावत जी भी ये पत्रिकाएं पढ़ते थे) कभी कभी मैं भी चित्र देखने के बहाने कुछ पढ़ लिया करता था ! सायद 1975 की बात है तब मैं 10 साल का था, गर्मियों की छुट्टी में पिता जी शहडोल (MP) से गाँव आये हुए थे ! उनकी चारपाई में तकिये के नीचे दिनमान या रविवार या कोई अन्य पत्रिका रखी थी, मैंने उसे उठाकर पन्ने पलटने लगा इतने में पिता जी आ गए और पत्रिका हाथ से छुड़ा लिया ! जबकि इसके पहले कभी भी ऐसा नहीं किया ! उलटा बोलते थे ”चित्र देख लिए हो तो लाओ मुझे दे दो” ! 
मेरे बालमन में बार बार उस पत्रिका के चित्र देखने की लालच नहीं गया और एक दिन चुपचाप मैंने देख लिए ! उसमे कई फोटो छपे थे पर अब कुछ याद नहीं ! पर आज एक मित्र की पोस्ट में मीराकुमार (राष्ट्रपति की उम्मीदवार) के भाई सुरेश कुमार के किसी महिला के साथ आपत्तिजनक स्थित में एक फोटो देखा तो मुझे 42 साल पुरानी ओ धुंधली याद आ गई जिसमे पत्रिका के एक पेज को पिता जी ने मोड़ कर छिपा दिया था !
इस फोटो की आधी अधूरी सच्चाई जो ज्ञात है (गुगलियाये नहीं कुछ नहीं मिलेगा) ओ ये है की ! बाबू जगजीवन राम जी का बेटा ”सुरेश कुमार” एक बिगड़ी हुई अय्याश किस्म की औलाद था जिसने  देश की रक्षा संबधी महत्वपूर्ण जानकारियों को चीन तथा पाकिस्तान को बेच दिया था ! तब 1970 से 1974 तक जगजीवन राम देश के रक्षामंत्री के रूप में काम किया करते थे विदेशी गुप्त चार एजेंसिया गुप्त सूचनाएं हासिल करने के लिए सुरेश कुमार को शराब तथा अय्याशी का पूरा इंतजाम किया करते थे ! इसी सिलसिले में उसने सुषमा नाम की विदेशी एजेंट से शारीरिक संबंध भी बनाए विदेशी गुप्तचर एजेंसियों ने ब्लैकमेल करने के लिए उसकी अश्लील फोटो भी खीच रखी थी जिसके वजह से वह हर महत्वपूर्ण सूचना भारत विरोधी गुप्तचर संस्थाओं को दे देता था ! इन अश्लील चित्रों के लीक होने से जगजीवन राम को काफी अपमानित होना पडा था , तथा राजनैतिक कैरियर में नुकसान भी उठाना पडा था ! 
सनद रहे जिस दिन पेपर में यह चित्र छपा था उस पेपर की सारी प्रतिया रातो रात खरीद ली गई थी और कुछ माह बाद वह पेपर बंद हो गया था (अखबार का नाम याद नहीं आ रहा) ! इसी तरह से ओ पत्रिका भी कुछ साल बाद बंद हो गई !
अब ये कहेंगे की गड़े मुर्दे उखाड़ने से क्या मिलेगा ? तो भैया जी मामला देश के सर्वोच्च पद का है ! कांगियों की नीति और नियत तो बताना हम राष्ट्रवदियों का पुनीत धर्म है !
नोट—: सभी अश्लील फोटो पोस्ट नहीं कर रहा हूँ !

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मीरा

कांग्रेस का हनी ट्रैप – और बर्बाद हो गया था मीरा कुमार का पूरा परिवार
दिल्ली : कैसे मीरा कुमार के दलित पिता बाबू जगजीवन राम को प्रधानमंत्री बनने से रोकने के लिए इंदिरा गाँधी ने कैसे साजिश रची थी
इसके लिए इंदिरा ने अपनी बहु मेनका गाँधी का सहारा लिया था ..क्योकि तब संजय गाँधी जिन्दा थे और इंदिरा और मेनका में खूब जमती थी . जगजीवन राम को प्रधानमंत्री बनने से रोकने के लिए उनके बेटे सुरेश राम का सेक्स स्कैंडल यानी उनकी फोटो अपनी पत्रिका सूर्या में छापी थी ..
मित्रो साल 1977 में जनता पार्टी की लहर में इंदिरा गांधी चुनाव हार गई थीं. उस समय जगजीवन राम पीएम पद के सबसे बड़े दावेदार माने जा रहे थे. कहा जाता है कि जाने-माने नेता जगजीवन राम के बेटे सेक्स स्कैंडल में न फंसे होते तो वह देश के पहले दलित पीएम बन सकते थे.

दुर्भाग्यवश 1978 में सूर्या नाम की एक पत्रिका में ऐसी तस्वीरें छपीं, जिसमें जगजीवन राम के बेटे सुरेश राम को यूपी के बागपत जिले के एक गांव की एक महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाते हुए आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया गया. इन तस्वीरों ने सियासी गलियारे में तूफान ला दिया.
सूर्या पत्रिका की संपादक कोई और नहीं बल्कि इंदिरा गांधी की बहू मेनका गांधी थीं. इस सेक्स स्कैंडल जिस वक्त खुलासा हुआ उस वक्त जगजीवन राम, मोरारजी देसाई की सरकार में रक्षा मंत्री थे. उनकी गिनती कद्दावर नेताओं में होती थी, लेकिन स्कैंडल ने उनके पीएम बनने के सपने के तोड़ दिया.
इस स्कैंडल में सुरेश राम के साथ दिख रही युवती दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज की छात्रा थी. कहा जाता है कि इसके बाद सुरेश ने उससे शादी भी की थी. लेकिन सुरेश की मौत के बाद जगजीवराम के परिवारवालों ने उसका बहिष्कार कर दिया था.
दबे जुबान ये भी कहा जाता है कि इस सेक्स स्कैंडल का खुलासा जगजीवन राम के राजनैतिक करियर को खत्म करने के लिए किया गया था. इसमें उन्हीं के पार्टी के कई नेता शामिल थे. इन नेताओं में केसी त्यागी, ओमपाल सिंह और एपी सिंह का नाम अप्रत्यक्ष रूप से आता है.

इस चर्चित सेक्स स्कैंडल का सूत्रधार खुशवंत सिंह को माना जाता है. वह उस समय कांग्रेस के अखबार नेशनल हेराल्ड के प्रधान संपादक और मेनका की पत्रिका सूर्या के कंसल्टिंग एडिटर भी थे. वह बंद लिफाफे में तस्वीरें लेकर पहुंचे. इसके बाद इसे सूर्या पत्रिका में छाप दिया गया .।

नवीन थूली

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आडवाणी जी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार क्यों नही बन पाए , इसे समझने के लिए महाभारत के एक प्रसंग को समझना जरूरी होगा ।
महाभारत के युद्ध पश्चात श्रीकृष्ण लौटे तो रोष में भरी रुक्मिणी ने पूछा..,

“आपने द्रोणाचार्य और भीष्म पितामह जैसे धर्मपरायण लोगों के वध में क्यों साथ दिया ?”
श्री कृष्ण ने उत्तर दिया.., “ये सही है कि उन दोनों ने जीवनपर्यंत धर्म का पालन किया किन्तु उनके किये एक पाप ने उनके सारे पुण्यों को हर लिया ”

“वो कौन सा पाप था ?”
श्री कृष्ण ने कहा : “भरी सभा में जब द्रौपदी का चीरहरण हो रहा था तब ये दोनों भी वहां उपस्थित थे। बड़े होने के नाते ये दुशासन को आज्ञा भी दे सकते थे किंतु इन्होंने ऐसा नहीं किय। उनके इस एक पाप से बाकी धर्मनिष्ठता छोटी पड गई”
रुक्मिणी ने पूछा, “और कर्ण ? वो अपनी दानवीरता के लिए प्रसिद्ध था ।कोई उसके द्वार से खाली हाथ नहीं गया। उसकी क्या गलती थी ?”

.

श्रीकृष्ण ने कहा, “जब अभिमन्यु सभी वीरों को धूल चटाने के बाद युद्धक्षेत्र में आहत होकर भूमि पर पड़ा था तो उसने करण से पानी माँगा। कर्ण जहाँ खड़ा था उसके पास पानी का एक गड्ढा था किंतु कर्ण ने मरते हुए अभिमन्यु को पानी नहीं दिया। इसलिये उसका जीवन भर दानवीरता से कमाया हुआ पुण्य नष्ट हो गया। बाद में उसी गड्ढे में उसके रथ का पहिया फंस गया और वो मारा गया”

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अब आप लोग खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि पाकिस्तान जाकर जिन्ना की मजार पर आडवाणी जी ने जो भाषण दिया , उस भाषण के पाप का वजन कितना था ?

Sanjay dvivedi

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विजय माल्या

#तनिक_इधर_भी_गौर_फरमाये ..

#कांग्रेस द्वारा बार बार मोदी सरकार पर उद्योगपतियों को संरक्षण दिये जाने का आरोप लगाया जाता रहा है, जबकि सच्चाई इससे ठीक विपरीत है, आओ कुछ आकडो द्वारा यह जानने का प्रयास करते हैं कि उन उद्योगपतियों को हजारों हजार करोड के ऋण आखिरकार किसने दिया..?
सिर्फ एक विजय माल्या ही नहीं थे जिसको कांग्रेस सरकार ने 9000 करोड़ का लोन दिया और वो फुर्र हो गए । कांग्रेस ने अपने मित्र उद्योगपतियों को किस दरियादिली से लोन बांटे एक बानगी देखिए –

1. भूषण स्टील 90,000 करोड़
2. वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज 58,000 करोड़
3.जेपी ग्रुप 55,000 करोड़
4 एस्सार लिमिटेड 50,000 करोड़
5.जिंदल ग्रुप 38,000 करोड़
6.आलोक इंडस्ट्रीज 25,000 करोड़
7. लैंको 19,000 करोड़
8. एबीजी शिपयार्ड 15,000 करोड़
9.पुंज लॉयड 14,000 करोड़
10. इलेक्ट्रोस्टील 14,000 करोड़
11. अबान होल्डिंग 13,000 करोड़
12. मोंनेट इस्पात 12,000 करोड़
13.प्रयागराज पावर 12,000 करोड़
14.एरा ग्रुप। 7,000 करोड़

अपनी करनी को छुपाने के लिए #कांग्रेस के युवराज चीख चीख कर देश को गुमराह कर रहे हैं कि देश की सारी पूंजी सिर्फ कुछ उद्योगपतियों के हाथ मे है और उन्हें बचाया जा रहा है और किसानों का कर्ज माफ नही किया जा रहा । कितनी बेशर्मी से कांग्रेस अपनी करनी का हिसाब मोदी सरकार से मांग रही है ।देखिए इन शैतानो ने देश की अर्थव्यवस्था के साथ कितना बड़ा खिलवाड़ किया ।
पर फिर भी सरकार चुप नहीं बैठी है और पूर्ववर्ती सरकार द्वारा मित्र उद्योगपतियों को कर्ज़ के रूप में दिए गए हज़ारों करोड़ रुपये जो एनपीए बन चुके हैं , को वापस वसूलने का खाका बना चुकी है । सरकार हाल ही में बनाये गए नए बैंकरप्सी इंसाल्वेंसी कानून के मदत से कुल 30 ऐसे डिफॉल्टरों,जो 95% एनपीए के जिम्मेदार हैं, से फ़ेज्ड मैनर में वसूली करने जा रही है ।
आज प्रथम चरण में 12 ऐसे लोगों के खिलाफ जो 25 % कुल एनपीए के जिम्मेदार हैं से वसूली के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है ।
अगले चरण में बाकियों पर शिकंजा कसने जा रहा है । बचेगा कोई नहीं चाहे कितनी कोशिश कर ले ।

#ग़द्दार_घोटालेबाज़_कांग्रेस
1987 – बोफोर्स तोप घोटाला, 960 करोड़
1992 – शेयर घोटाला, 5,000 करोड़।।
1994 – चीनी घोटाला, 650 करोड़
1995 – प्रेफ्रेंशल अलॉटमेंट घोटाला, 5,000 करोड़
1995 – कस्टम टैक्स घोटाला, 43 करोड़
1995 – कॉबलर घोटाला, 1,000 करोड़
1995 – दीनार / हवाला घोटाला, 400 करोड़
1995 – मेघालय वन घोटाला, 300 करोड़
1996 – उर्वरक आयत घोटाला, 1,300 करोड़
1996 – चारा घोटाला, 950 करोड़
1996 – यूरिया घोटाला, 133 करोड
1997 – बिहार भूमि घोटाला, 400 करोड़
1997 – म्यूच्यूअल फण्ड घोटाला, 1,200 करोड़
1997 – सुखराम टेलिकॉम घोटाला, 1,500 करोड़
1997 – SNC पॉवेर प्रोजेक्ट घोटाला, 374 करोड़
1998 – उदय गोयल कृषि उपज घोटाला, 210 करोड़
1998 – टीक पौध घोटाला, 8,000 करोड़
2001 – डालमिया शेयर घोटाला, 595 करोड़
2001 – UTI घोटाला, 32 करोड़
2001 – केतन पारिख प्रतिभूति घोटाला, 1,000 करोड़
2002 – संजय अग्रवाल गृह निवेश घोटाला, 600 करोड़
2002 – कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज घोटाला, 120 करोड़
2003 – स्टाम्प घोटाला, 20,000 करोड़
2005 – आई पि ओ कॉरिडोर घोटाला, 1,000 करोड़
2005 – बिहार बाढ़ आपदा घोटाला, 17 करोड़
2005 – सौरपियन पनडुब्बी घोटाला, 18,978 करोड़
2006 – पंजाब सिटी सेंटर घोटाला, 1,500 करोड़
2008 – काला धन, 2,10,000 करोड
2008 – सत्यम घोटाला, 8,000 करोड
2008 – सैन्य राशन घोटाला, 5,000 करोड़
2008 – स्टेट बैंक ऑफ़ सौराष्ट्र, 95 करोड़
2008 – हसन् अली हवाला घोटाला, 39,120 करोड़
2009 – उड़ीसा खदान घोटाला, 7,000 करोड़
2009 – चावल निर्यात घोटाला, 2,500 करोड़
2009 – झारखण्ड खदान घोटाला, 4,000 करोड़
2009 – झारखण्ड मेडिकल उपकरण घोटाला, 130 करोड़
2010 – आदर्श घर घोटाला, 900 करोड़
2010 – खाद्यान घोटाला, 35,000 करोड़
2010 – बैंड स्पेक्ट्रम घोटाला, 2,00,000 करोड़
2011 – 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला, 1,76,000 करोड़
2011 – कॉमन वेल्थ घोटाला, 70,000 करोड़
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जय हिन्द ..🇮🇳

जय हिन्द ..🇮🇳

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लालू की बेटी मीसा भारती

लालू की बेटी मीसा भारती यादव द्वारा MBBS में टॉप किए जाने की कहानी बड़ी रोचक है… उस समय झारखंड नहीं बना था जमशेदपुर रांची आदि शहर बिहार के हिस्से थे और मीसा भारती के पिता लालू प्रसाद यादव एकीकृत बिहार के मुख्यमंत्री थे

मोहतरमा मीसा एकीकृत बिहार के MG मेडिकल College Jamshedpur में डाक्टरी पढ़ती थी, उसी समय खलनायक फ़िल्म रिलीज हुई … उन्होंने अपने मुख्यमंत्री पिता से कहा कि मेरे लिए और मेरी 5 सहेलियों के लिए फिल्म देखने के लिए खास इंतजाम किए जाए… मुख्यमंत्री कार्यालय से जमशेदपुर के डीसी को आदेश गया के मुख्यमंत्री की बेटी के लिए सिनेमा देखने के खास इंतजाम किए जाएं …इसको सहेलियों के साथ खलनायक फिल्म देखने के लिए डीसी ने पायल टाकीज में खास शो रखा गया ..

पहली वर्ष MBBS में इन्होने टॉप किया उस वक्त इन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति कलाम साहब द्वारा सम्मानित किया गया दूसरी वर्ष भी इन्होंने टॉप किया ….लेकिन कहते हैं किस्मत हमेशा मेहरबान नहीं होती

फिर बिहार का बंटवारा हुआ और जमशेदपुर झारखंड में चला गया अब झारखंड में लालू की सत्ता खत्म हो गई पढ़ने में बेहद गधी बेटी का ट्रांसफर लालू प्रसाद यादव ने आनन-फानन में जमशेदपुर से पटना करवा दिया लेकिन तब लालू की बेटी का टॉप करना मीडिया का चर्चा बन गया था इसलिए लालू की बेटी टॉप करना तो दूर लगातार दो साल फेल हो गई बाद में किसी तरह से एमबीबीएस पास किया

खैर मीसा भारती ने हम भारतीय लोगों और समाज के ऊपर एक बड़ा एहसान यह किया है कि उन्होंने कभी डॉक्टरी प्रेक्टिस नहीं की उन्होंने कभी एमसीआई में अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया वरना न जाने कितने लोगों को स्वर्ग भेजने में मीसा भारती मदद की होती

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.जब तक राज्यसभा में भाजपा का बहुमत नहीं होगा तब तक बचे हुए 25% संविधान को लागू नहीं किया जा सकता हैं।

.जब तक राज्यसभा में भाजपा का बहुमत नहीं होगा तब तक बचे हुए 25% संविधान को लागू नहीं किया जा सकता हैं।

* संविधान के आर्टिकल 21 के अनुसार समान चिकित्सा (यूनिफार्म हेल्थकेयर) कानून नहीं बन पायेगा !

* संविधान के आर्टिकल 21A के अनुसार समान शिक्षा (यूनिफार्म एजुकेशन) कानून नहीं बन पायेगा !

* संविधान के आर्टिकल 44 के अनुसार समान नागरिक संहिता (यूनिफार्म सिविल कोड) कानून नहीं बन पायेगा !

* संविधान के आर्टिकल 47 के अनुसार शराब पर पूर्ण प्रतिबन्ध का कानून नहीं बन पायेगा !

* संविधान के आर्टिकल 48 के अनुसार गौ-हत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध का कानून नहीं बन पायेगा !

* संविधान के आर्टिकल 312 के अनुसार जजों की नियुक्ति के लिए IAS की तरह IJS (भारतीय न्यायिक सेवा) शुरू करने का कानून नहीं बन पायेगा !

* संविधान के आर्टिकल 343 के अनुसार हिंदी को पूरे देश में लागू करने का कानून नहीं बन पायेगा !

* संविधान के आर्टिकल 351 के अनुसार हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित करने का कानून नहीं बन पायेगा !

* संविधान के आर्टिकल 370 को समाप्त नहीं किया जा सकता है !

* जस्टिस वेंकटचलैया आयोग के अनुसार समान जनसँख्या नियंत्रण कानून नहीं बन पायेगा !

* लोकसभा, विधानसभा और पंचायत चुनाव एक साथ करने का कानून नहीं बन पायेगा !

* भ्रष्टाचारियों /अपराधियों की शत-प्रतिशत संपत्ति जब्त करने और उन्हें आजीवन सश्रम कारावास का कानून नहीं बन पायेगा !

* भ्रष्टाचारियों /अपराधियों के चुनाव लड़ने, राजनीतिक पार्टी बनाने और पार्टी पदाधिकारी बनने पर आजीवन प्रतिबन्ध का कानून नहीं बन पायेगा

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​ढोला-सादिया सेतु

ढोला-सादिया सेतु (वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं) : आज 56 इंची सिने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश का सबसे लंबा सेतु राष्ट्र को समर्पित कर नया इतिहास रच डाला, आइये जानते हैं इसके बारे में रोचक तथ्य : 
1. 15 अगस्त 1950 में एक भूकंप आया जिस से ब्रह्मपुत्र नदी ने अपन रुख बदल लिया, परिणाम स्वरूप भारत का अतिसंवेदनशील पूर्वी अरुणांचल प्रदेश से सड़क मार्ग पूरी तरह कट गया, यानी अब पूर्वी सीमाएं पूर्ण रूप से असुरक्षित हो गयी थी, लेकिन देश मे 70 साल राज करने वाली कांग्रेस सरकार को कभी इसकी फिक्र ही नही हुई, बहुत व्यस्त जो थे अपनी अय्याशियों और घोटाले करने में ।
2. केंद्र में BJP की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार आयी और PM वाजपेयी ने देश की सुरक्षा की दृष्टि से पूर्वी सीमाओँ और अरुणांचल प्रदेश को देश से जोड़ने का बीड़ा उठाया ।
3. रक्षा मंत्री जॉर्ज फ़र्नान्डिस ने एक विवादास्पत बयान दिया “पाकिस्तान नही चीन है भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा” जिबकी इसके विपरीत आज तक कि कांग्रेस सरकारें “हिन्दी चीनी भाई भाई” का नारा देती आयीं थीं और हर बार भारत धोखा खाता था, पूरे विश्व मे अफरातफरी मच गई ये बयान विश्व हेडलाइंस बन गया, और वे PM वाजपेयी से मिले और सड़क को सेना के उपयोग में आने लायक बनाने के लिए कहा ।
4. PM वाजपेयी को बात जम गयी और BJP सरकार ने सामरिक उपयोग के लिए सेतु की डिज़ाइन ड्राइंग स्पेसिफिकेशन तैयार करने शुरू किए, फिजिबिलिटी रिपोट और DPR तैयार हुई और 2003 में BJP सरकार ने सेतु बनाने को हरी झंडी दे दी ।
5. सरकार बदल गयी और कांग्रेस की सरकार आयी जिसने 7 साल इस संवेदनशील सेतु की फ़ाइल दबाए रखी, ये देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ था ।
6. सेतु की प्रारंभिक कीमत 360 करोड़ थी, लेकिन बाद में कांग्रेस ने इसे बढ़ा कर 950करोड़ किया और फिर इसका ठेका 2096 करोड़ में दिया गया यानी मूल कीमत से करीब 6 गुना, शायद इसके निर्माण में भ्रष्टाचार करने के लिए ही कांग्रेस ने 7 साल तक इस मामले को लटकाए रखा और जब भ्रष्टाचार की रकम सबके पेट मे चली गयी तब फ़ाइल आगे बढ़ाई, यदि ये पुल 2004 में ही बनवा लिया गया होता तो सिर्फ 360 करोड़ में बन जाता और बचे हुए पैसे से और कई निर्माण किये जा सकते थे ।
7. 2010 में ठेका होने के बाद 2011 में कछुए की गति से काम चालू हुआ, मोदी सरकार के आने के बाद PM मोदी ने इस सेतु की संवेदनशीलता पर ध्यान देते हुए इसकी day to day रिपोर्ट PMO तलब करनी शुरू कर दी, मोदी की सख्ती रंग लाई और बचा हुआ काम रिकॉर्ड दिनों में पूरा किया गया ।
1950 से 2017 यानी 67 साल बाद आज देश का एक हिस्सा फिर से देश से जुड़ पाया है, वो भी मोदी सरकार के सत्ता में आने की बदौलत, अभी सिर्फ 3 साल हुए हैं आगे आगे देखिए होता है क्या, यू ही नही कोई 56 इंची बन जाता, 3 साल बेमिसाल, जय मोदीराज, नमो नमो ।