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Isliye bhartiya ho aur bhartiya hi bane rahe


  • Suraj Gupta Isliye bhartiya ho aur bhartiya hi bane rahe to jyada achcha hai…gandhi ne agar batware ke samay sabhi muslim ko pakistan jane se na raka hota to aaj kisi owaisi jaise kutte ki aukaat nahi hoti bhonkne ki..ye hindu dharm hi hai jo sabhi ko saath le kar chalta hai..soncho kahi hum 100 caror tliban ya pakistan ki tarha kattarwadi ho gaye..to musalmano ka kya hoga…santi ke ham pujari hai saanti se rahate hai aur rakhta hai..jis din santi chhod kar hathiyar utha liye..to….. apni khair manao ki hindustan me kahi is samay iraq ne hote to tumhare log hi tumhe kaat dalte…baki khud samajhdar ho..jai hind..
  •  Aaj b agar koi musalman..desh me sirf majhab ke naam par vote mange aur jeete b..to fir kya kaha jaye..aur yahi wo muasalman hai jo khata yaha hai aur bajata pakistan ki hai..isi ne kaha tha..ki agar sarkar sirf 15min ke liye police hata le to hum hinduo ka naam..nisan mita denge..is kutte ko sahyed ye nahi pata ya bhool gaya ki 800 saal muslim raaj raha tab b hindu raha aur aaj b hai..aur aage rahega..kisi owaisi ke kuch bolne se kuch hone wala nahi..5000 saal ka itihas hai aur caror saal ki sabhyata..kisi kutte ke bhonkne se hilne wali nahi..aur waise b muslim apne DNA test kar le..pata hi chalega ki DNA indian hai..matlam ye musalmano ke dwara dharm badal karwaya gaya..jo arbi the..aur kattarwadi the..asli muslim to india me hai hi nahi..
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भारतीय सेना में मुसलमानो को क्यों नहीं लिया जाता है ?


भारतीय सेना में मुसलमानो को क्यों नहीं लिया जाता है ?

क्या आप जानते है ?

1965 में जब पाकिस्तान के साथ युद्ध हुआ था उस वक्त मुस्लिम रेजिमेंट और मुस्लिम राईफल्स को हमला करने के आदेश जारी किया गया। उस वक्त मुस्लिम रेजिमेंट और मुस्लिम राईफल्स ने पाकिस्तान पर हमला करने से साफ़ मना कर दिया था और लगभग बीस हज़ार मुस्लिम सेना ने पाकिस्तान के सामने अपने हथियार डाल दिए थे . जिस वजह से उस वक्त भारत को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था . सेना ने मुस्लिम राईफल्स और मुस्लिम रेजिमेंट के ऊपर बहुत ज्यादा यकीन कर के इनको भेजा गया था. लेकिन इसके बाद इन दोनों को हटा दिया गया .

उसके बाद 1971 में पाकिस्तान के साथ फिर युद्ध हुआ . उस वक्त सेना में एक भी मुस्लिम नहीं था. उस वक्त भारत ने पाकिस्तान के नब्बे हज़ार सेना के हथियार डलवा कर उनको बंदी बना लिया था और लिखित तौर पर आत्मसमर्पण करवाया था ।। तब से लेकर आज तक भारतीय सेना में मुस्लिम रेजिमेंट या मुस्लिम राईफल्स नाम की कोई सेना नही है .

मुस्लिम रेजिमेंट ने सन 1965 मे पाकिस्तान के खिलाफ जंग लड़ने से साफ़ इंकार कर दिया,.इस वजह से इनकी पूरी की पूरी रेजिमेंट पर ही बैन लगा दिया गया, और पूरे रेजिमेंट को ही खत्म कर दिया गया,

क्योंकि भारत की असली जंग तो हमेशा ही पाकिस्तान के ही साथ होती है।

भारतीय सेना में मुसलमानो को क्यों नहीं लिया जाता है ? 

क्या आप जानते है ? 

1965 में जब पाकिस्तान के साथ युद्ध हुआ था उस वक्त मुस्लिम रेजिमेंट और मुस्लिम राईफल्स को हमला करने के आदेश जारी किया गया। उस वक्त मुस्लिम रेजिमेंट और मुस्लिम राईफल्स ने पाकिस्तान पर हमला करने से साफ़ मना कर दिया था और लगभग बीस हज़ार मुस्लिम सेना ने पाकिस्तान के सामने अपने हथियार डाल दिए थे . जिस वजह से उस वक्त भारत को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था . सेना ने मुस्लिम राईफल्स और मुस्लिम रेजिमेंट के ऊपर बहुत ज्यादा यकीन कर के इनको भेजा गया था. लेकिन इसके बाद इन दोनों को हटा दिया गया . 

उसके बाद 1971 में पाकिस्तान के साथ फिर युद्ध हुआ . उस वक्त सेना में एक भी मुस्लिम नहीं था. उस वक्त भारत ने पाकिस्तान के नब्बे हज़ार सेना के हथियार डलवा कर उनको बंदी बना लिया था और लिखित तौर पर आत्मसमर्पण करवाया था ।। तब से लेकर आज तक भारतीय सेना में मुस्लिम रेजिमेंट या मुस्लिम राईफल्स नाम की कोई सेना नही है . 

मुस्लिम रेजिमेंट ने सन 1965 मे पाकिस्तान के खिलाफ जंग लड़ने से साफ़ इंकार कर दिया,.इस वजह से इनकी पूरी की पूरी रेजिमेंट पर ही बैन लगा दिया गया, और पूरे रेजिमेंट को ही खत्म कर दिया गया, 

क्योंकि भारत की असली जंग तो हमेशा ही पाकिस्तान के ही साथ होती है।
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Temple


हम जैसे हिंदूवादी लोग जब भी इस्लाम या इस्लामी जेहाद के खिलाफ अपनी आवाज उठाते हैं तो.... मुस्लिम तो छोड़िये , हमारे अपने दूषित प्रजाति के हिन्दू (सेक्यूलर)  ही.... तुरंत अपना विधवा प्रलाप प्रारम्भ कर देते हैं..

और, हमें समझाते हैं कि... आखिर मुस्लिमों ने आपका क्या बिगाड़ा है...???????

सिर्फ इतना ही नहीं..... बल्कि,  अपने गलत-सही तर्कों के साथ.... हम जैसों को  यह भी  समझाने का प्रयास करते हैं कि....

और, सभी धर्म एक समान... एवं,  सभी के ईश्वर एक ही  है ....

तथा , सिर्फ हम सबमे उन्हें अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है और...... सिर्फ , हमारे पूजा करने की पद्धति में अंतर है....!

मनहूस सेक्यूलरों और मानवतावादियों की ऐसी ढकोसला भरी बातें सुनते ही मेरे तनबदन में आग जाती है.....

क्योंकि, यह कोरी बकवास है कि.... सभी धर्म एक समान है...!

मैं ऐसे मानवतावादियों और मनहूस सेक्यूलरों से .... सिर्फ एक मासूम सा सवाल करना चाहता हूँ कि.....

अगर भगवान एक हैं ,,,,,,,,,,,,,,तो............ मंदिर और  गुरुद्वारा तोड़-तोड़ कर ..........वहां  मस्जिद क्यों बनाये जाते रहे हैं ........?????

और.... अपनी बातों के सारे प्रमाण आज मैं साथ ही लेकर आ गया हूँ..... ताकि, इन प्रमाणों को ऐसे मानवतावादियों और मनहूस सेक्यूलरों के मुंह में ठूंसा जा सके....!

इस्लाम के जिहादियों ने.... अपने प्रमुख मस्जिदों का निर्माण कैसे किया है ..... आप इस साइट पर देख सकते हैं.....

प्रमाण : http://en.wikipedia.org/wiki/Conversion_of_non-Muslim_places_of_worship_into_mosques

कांग्रेस ने हमारी इतिहास के किताबो से इस तरह खिलवाड़ किया है कि ... आज खुद  हिंदू भी कहते दिख जाते हैं कि .... कुछेक मंदिरों को ही तोडा गया होगा....

जबकि... अपने स्थापना से ही मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनाने की परंपरा .. इस्लाम में रही है....

प्रमाण : http://en.wikipedia.org/wiki/Negationism_in_India_–_Concealing_the_Record_of_Islam

अयोध्या में बाबरी मस्जिद बनाने का वादा करने वाला महा सेक्यूलर केजरीवाल इस बात पर आज  क्यों खामोश हैं ...??????

मुसलमानों और तुर्क लुटेरों ने हम हिंदुओ पर 1146 साल तक राज किया है...... और,   इस दौरान मुसलमानों ने करोडो मासूम हिंदुओ का कत्लेआम किया, करोडो हिंदुओ का धर्मपरिवर्तन कर उन्हें मुसलमान बनाया,,,,,तथा,  हजारों हिंदू-जैन-बौद्ध मंदिरों कों मस्जिदों में तबदील कर दिया !

और.... आज भी सिर्फ भारत में ही करीब 2000 हिंदू - बौद्ध मंदिरों की जगह आज भी मस्जिदे खड़ी है !

प्रमाण : http://en.wikipedia.org/wiki/Hindu_Temples_-_What_Happened_to_Them

प्रमाण : http://ajitvadakayil.blogspot.in/2011/07/unquantified-holocaust-and-genocide.html

जिनमे से कुछ प्रमुख एवं प्रसिद्ध मंदिरों के विवरण कुछ इस प्रकार है......

1. बनारस के काशी विश्वनाथ शिव मंदिर की मूल जगह पर आज भी ज्ञानवापी  मस्जिद खड़ी है ।

प्रमाण : http://en.wikipedia.org/wiki/Kashi_Vishwanath_Temple

प्रमाण : http://khabar.ibnlive.in.com/latest-news/news/-181291.html?ref=hindi.in.com

2. अयोध्या के राम मंदिर की जगह इस्लामी मुग़ल सम्राट बाबर ने बनायीं थी बाबरी मस्जिद ।

प्रमाण : http://en.wikipedia.org/wiki/Babri_Mosque

प्रमाण : http://www.rediff.com/news/2003/aug/25ayo1.htm

3. भोजशाला के सरस्वती मंदिर कों अलाउद्दीन खिलजी ने कमाल मौला मस्जिद में तबदील किया ।

प्रमाण : http://en.wikipedia.org/wiki/Bhoj_Shala

4. मथुरा के कृष्ण मंदिर कों महमूद गज़नवी ने तोडा, औरंगजेब की बनायीं मस्जिद पड़ोस में आज भी है ।

प्रमाण : http://en.wikipedia.org/wiki/Mathura_temple

प्रमाण : http://www.thenational.ae/news/world/south-asia/hindus-in-india-claim-two-more-mosques
http://back2godhead.com/vrndavana-land-of-no-return-part-2/

5. गुजरात के सोमनाथ मंदिर कों मोहम्मद घोरी ने ध्वस्त किया, औरंगजेब ने वहा मस्जिद बनायीं ।

प्रमाण : http://en.wikipedia.org/wiki/Somnath

6. इंडोनेशिया की मेनारा कुदुस मस्जिद हिंदू बौद्ध मंदिर की जगह बनायीं गयी है ।

प्रमाण : http://en.wikipedia.org/wiki/Menara_Kudus_Mosque
http://tinyurl.com/m69yn47

क्या इतने सबूतों के बाद भी किसी सेक्यूलर और मानवतावादियों को कुछ कहना है....??????????

याद रखें कि.....

इसी नपुंसकता और  सेक्युलरिजम के कारण.................... ई.711 से 1857 तक........ यानी, लगभग  1146 साल ....... हिन्दुओं ने  मुसलमानों की गुलामी की है....!

और,  बाद में ब्रिटिशो गुलामी करने पर विवश हो गए....!

ऐसे लोग शायद एक बात भूल रहे हैं कि..... जो समाज इतिहास से कोई सीख नहीं लेता है .....

वो खुद इतिहास बन जाता  है....!

इसीलिए... मर्जी है आपकी.....

क्योंकि... देश और धर्म है आपका .....!

जय महाकाल...!!!

हम जैसे हिंदूवादी लोग जब भी इस्लाम या इस्लामी जेहाद के खिलाफ अपनी आवाज उठाते हैं तो…. मुस्लिम तो छोड़िये , हमारे अपने दूषित प्रजाति के हिन्दू (सेक्यूलर) ही…. तुरंत अपना विधवा प्रलाप प्रारम्भ कर देते हैं..

और, हमें समझाते हैं कि… आखिर मुस्लिमों ने आपका क्या बिगाड़ा है…???????

सिर्फ इतना ही नहीं….. बल्कि, अपने गलत-सही तर्कों के साथ…. हम जैसों को यह भी समझाने का प्रयास करते हैं कि….

और, सभी धर्म एक समान… एवं, सभी के ईश्वर एक ही है ….

तथा , सिर्फ हम सबमे उन्हें अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है और…… सिर्फ , हमारे पूजा करने की पद्धति में अंतर है….!

मनहूस सेक्यूलरों और मानवतावादियों की ऐसी ढकोसला भरी बातें सुनते ही मेरे तनबदन में आग जाती है…..

क्योंकि, यह कोरी बकवास है कि…. सभी धर्म एक समान है…!

मैं ऐसे मानवतावादियों और मनहूस सेक्यूलरों से …. सिर्फ एक मासूम सा सवाल करना चाहता हूँ कि…..

अगर भगवान एक हैं ,,,,,,,,,,,,,,तो………… मंदिर और गुरुद्वारा तोड़-तोड़ कर ……….वहां मस्जिद क्यों बनाये जाते रहे हैं ……..?????

और…. अपनी बातों के सारे प्रमाण आज मैं साथ ही लेकर आ गया हूँ….. ताकि, इन प्रमाणों को ऐसे मानवतावादियों और मनहूस सेक्यूलरों के मुंह में ठूंसा जा सके….!

इस्लाम के जिहादियों ने…. अपने प्रमुख मस्जिदों का निर्माण कैसे किया है ….. आप इस साइट पर देख सकते हैं…..

प्रमाण : http://en.wikipedia.org/wiki/Conversion_of_non-Muslim_places_of_worship_into_mosques

कांग्रेस ने हमारी इतिहास के किताबो से इस तरह खिलवाड़ किया है कि … आज खुद हिंदू भी कहते दिख जाते हैं कि …. कुछेक मंदिरों को ही तोडा गया होगा….

जबकि… अपने स्थापना से ही मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनाने की परंपरा .. इस्लाम में रही है….

प्रमाण : http://en.wikipedia.org/wiki/Negationism_in_India_–_Concealing_the_Record_of_Islam

अयोध्या में बाबरी मस्जिद बनाने का वादा करने वाला महा सेक्यूलर केजरीवाल इस बात पर आज क्यों खामोश हैं …??????

मुसलमानों और तुर्क लुटेरों ने हम हिंदुओ पर 1146 साल तक राज किया है…… और, इस दौरान मुसलमानों ने करोडो मासूम हिंदुओ का कत्लेआम किया, करोडो हिंदुओ का धर्मपरिवर्तन कर उन्हें मुसलमान बनाया,,,,,तथा, हजारों हिंदू-जैन-बौद्ध मंदिरों कों मस्जिदों में तबदील कर दिया !

और…. आज भी सिर्फ भारत में ही करीब 2000 हिंदू – बौद्ध मंदिरों की जगह आज भी मस्जिदे खड़ी है !

प्रमाण : http://en.wikipedia.org/wiki/Hindu_Temples_-_What_Happened_to_Them

प्रमाण : http://ajitvadakayil.blogspot.in/2011/07/unquantified-holocaust-and-genocide.html

जिनमे से कुछ प्रमुख एवं प्रसिद्ध मंदिरों के विवरण कुछ इस प्रकार है……

1. बनारस के काशी विश्वनाथ शिव मंदिर की मूल जगह पर आज भी ज्ञानवापी मस्जिद खड़ी है ।

प्रमाण : http://en.wikipedia.org/wiki/Kashi_Vishwanath_Temple

प्रमाण : http://khabar.ibnlive.in.com/latest-news/news/-181291.html?ref=hindi.in.com

2. अयोध्या के राम मंदिर की जगह इस्लामी मुग़ल सम्राट बाबर ने बनायीं थी बाबरी मस्जिद ।

प्रमाण : http://en.wikipedia.org/wiki/Babri_Mosque

प्रमाण : http://www.rediff.com/news/2003/aug/25ayo1.htm

3. भोजशाला के सरस्वती मंदिर कों अलाउद्दीन खिलजी ने कमाल मौला मस्जिद में तबदील किया ।

प्रमाण : http://en.wikipedia.org/wiki/Bhoj_Shala

4. मथुरा के कृष्ण मंदिर कों महमूद गज़नवी ने तोडा, औरंगजेब की बनायीं मस्जिद पड़ोस में आज भी है ।

प्रमाण : http://en.wikipedia.org/wiki/Mathura_temple

प्रमाण : http://www.thenational.ae/news/world/south-asia/hindus-in-india-claim-two-more-mosques
http://back2godhead.com/vrndavana-land-of-no-return-part-2/

5. गुजरात के सोमनाथ मंदिर कों मोहम्मद घोरी ने ध्वस्त किया, औरंगजेब ने वहा मस्जिद बनायीं ।

प्रमाण : http://en.wikipedia.org/wiki/Somnath

6. इंडोनेशिया की मेनारा कुदुस मस्जिद हिंदू बौद्ध मंदिर की जगह बनायीं गयी है ।

प्रमाण : http://en.wikipedia.org/wiki/Menara_Kudus_Mosque
http://tinyurl.com/m69yn47

क्या इतने सबूतों के बाद भी किसी सेक्यूलर और मानवतावादियों को कुछ कहना है….??????????

याद रखें कि…..

इसी नपुंसकता और सेक्युलरिजम के कारण……………….. ई.711 से 1857 तक…….. यानी, लगभग 1146 साल ……. हिन्दुओं ने मुसलमानों की गुलामी की है….!

और, बाद में ब्रिटिशो गुलामी करने पर विवश हो गए….!

ऐसे लोग शायद एक बात भूल रहे हैं कि….. जो समाज इतिहास से कोई सीख नहीं लेता है …..

वो खुद इतिहास बन जाता है….!

इसीलिए… मर्जी है आपकी…..

क्योंकि… देश और धर्म है आपका …..!

जय महाकाल…!!!

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औरंगजेब की मृत्यु कैसे हुई


क्या आप जानते हैं कि…. काशी विश्वनाथ और मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि मदिर के विध्वंसक ….जेहादी आताताई औरंगजेब की मृत्यु कैसे हुई थी….?????

दरअसल… औरंगजेब …और, हिन्दुओं के प्रति उसकी क्रूरता से लगभग हम सभी परिचित हैं…. परन्तु उस आताताई के मृत्यु की कहानी बहुत कम लोगों को ही मालूम होगी…!

उस आततायी के मौत की कहानी और कुछ नहीं …. बल्कि.. हमारे वीर पूर्वजों की वीर गाथा है …….जो कुछ इस प्रकार है कि….

14वीं और 15वीं शताब्दी में…… गद्दारों के मिलीभगत के कारण (जैसे आज के ज़माने में सेक्युलर हैं) …. कई युद्धों में हार के बाद हिन्दू महासभा द्वारा साधू-संतों की अगुवाई में यह निर्णय लिया गया कि …. अब प्रमुख साधू-संतों द्वारा “व्यक्ति निर्माण” का कार्य अपने हाथों में लिए जाए l

और… इस पुनीत कार्य हेतु….. बहुत से संतों ने अपना अपना राष्ट्रीय एवं धार्मिक कर्तव्य निभाते हुए समय-समय पर शूरवीरों का निर्माण किया l

समर्थ गुरु रामदास जी भी इसी श्रेणी में आते हैं…… जिन्होंने “”वीर शिवाजी”” का निर्माण किया l

वहीँ…. प्राण नाथ महाप्रभु जी ने….. बुन्देलखण्ड से “राजा छत्रसाल” का निर्माण किया l
और….. ओहम नरेश को श्री राम महाप्रभु……. द्वारा तैयार किया गया l

उस समय तक…. महान हिन्दु सम्राट शिवाजी…. का स्वर्गवास हो चूका था l

और…. सम्भाजी के अंग-अंग काट कर उनकी नृशंस हत्या …. औरंगजेब के सामने ही कर दी गई थी l

इसके बाद…… हिन्दू महासभा की अगुआई में हम हिन्दुओं के सामूहिक प्रयास द्वारा…… भारत में चारों ओर से…..औरंगजेब के विरुद्ध …छापामार युद्ध आरम्भ किया गया… जिसमे की बहुत से धर्म-गुरुओं और साधू-संतों द्वारा समय-समय पर नीतियाँ और परामर्श भी दिए जाते रहे l

यहाँ… मैं आपको यह दिलाना चाहूँगा कि…. औरंगजेब की सेना …….””धन से और व्यक्तियों से”” इतिहास में सबसे बड़ी सेना मानी जाती है…… l

परन्तु फिर भी हिन्दुओं ने हार नहीं मानी …तथा, ….औरंगजेब को मारने के छोटे-छोटे प्रयास हमेशा ही किये जाते थे ….. लेकिन , वो जेहादी किस्मत का धनी था… और… शायद भारत के गद्दारों के निष्ठा का भी l

यहाँ तक कि……. मराठा नेता संताजी और धनाजी द्वारा …. औरंगजेब के तम्बू की सारी रस्सियाँ ही काट कर तम्बू ही गिरा दिया गया था……परन्तु , औरंगजेब उस रात अपनी बेटी के तम्बू में था…. और, उसी के साथ सो रहा था…… जिस कारण वो तो बच गया …. पर बाकी सारे के सारे लोग… मारे गए l

फिर भी… इस हिन्दुओं के अचानक और जोरदार हमले के बाद….. संता जी और धनाजी की ख्याति भी बहुत बढ़ चुकी थी….. तथा …. मुस्लिमों में उनका इतना आतंक व्याप्त हो चुका था कि…. यदि कोई घोड़ा पानी भी नहीं पीता था… तो, उसे मुसलमान कहते थे कि .. क्या तूने संता जी और धना जी को देख लिया है …. जो डर के मारे पानी नहीं पी रहा है…???

इसी तरह…. दूसरी तरफ , बुन्देलखण्ड के “वीर छत्रसाल” ने सौगंध ली हुई थी कि….. वे औरंगजेब को…. व्यक्तिगत युद्ध में अपनी तलवार से हराएंगे ….. और , छत्रसाल महाराज द्वारा ऐसे कई प्रयास भी किये गए …..परन्तु, अथक प्रयासों के बावजूद वीर छत्रसाल सफल न हो पाए l

अंतत:…… प्राण नाथ महाप्रभु जी ने कहा कि …. औरंगजेब का जिन्दा रहना ….. एक-एक दिन भारी पड़ रहा है हिन्दुओं पर…. क्योंकि, जब तक औरंगजेब रोज ढाई मन जनेऊ न जला लेता था ….. तब तक उसे नींद नहीं आती थी l

अब आप…. इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि …. ढाई मन जनेऊ एक दिन में जलाने के लिए ….. कितने हिन्दुओं को मारा और सताया जाता होगा…. तथा, कितने बड़े स्तर पर धर्म परिवर्तन किया जाता होगा….. साथ ही, कितनी ही औरतों का शारीरिक मान मर्दन किया जाता होगा…. एवं … कितने ही मन्दिरों तथा प्रतिमाओं का विध्वंस किया जाता होगा ..??????

प्राण नाथ महाप्रभु जी की यह बातें सुन कर……. छत्रसाल जी ने अपनी सौगंध वापिस लेकर कहा कि …. आप जो कहेंगे मैं वो करूँगा … इसीलिए आप दुखी न हों…और , मुझे आदेश दें l

जिसके बाद…. प्राणनाथ महाप्रभु जी ने…… एक ख़ास प्रकार के जहर से युक्त एक खंजर दिया बुन्देलखण्ड को और सारी योजना समझाते हुए कहा कि …. यह खंजर उस आतताई औरंगजेब को पूरा नहीं मारना है..अन्यथा … वो तत्काल प्रभाव से मर जायेगा ….. अतः ये खंजर केवल उसको एक इंच से भी कम गहराई का घाव देते हुए….. लम्बा सा एक चीरा ही मारना था ..!

जिससे कि …. धीरे धीरे उस जहर का असर फैलेगा….. और, वो आतताई औरंगजेब तडप-तडप कर मरेगा l

और, ख़ुशी कि बात है कि…. बुन्देला वीर छत्रसाल ने इस कार्य को सफलता पूर्वक अंजाम दिया…. और, जैसा प्राण नाथ महाप्रभु जी ने कहा था… ठीक उसी प्रकार उसके शरीर पर एक चीरा दिया…. जिससे … वो औरंगजेब 3 महीने तक बिस्तर पर रह कर तड़पता रहा… और, इसी तरह वो तडप तडप कर कुत्ते से भी बदतर मौत मरा…… तथा … उसके पापों का का अंत हुआ l

औरंगशाही में औरंगजेब ने स्वयं लिखा है कि… “”मुझे प्राण नाथ महाप्रभु और छत्रसाल ने धोखे और छल से मारा है “”l

अतः…. आप अपने पूर्वजों के इतिहास जो जानें और समझने का प्रयास करें…. तथा… उनके द्वारा स्थापित किये गए सिद्धांतों को जीवित रखें l

जिस सनातन संस्कृति को जीवित रखने के लिए ….. अखंड भारत के सीमाओं की रक्षा हेतु हमारे असंख्य पूर्वजों ने अपने शौर्य और पराक्रम से… अनेकों बार अपने प्राणों तक की आहुति दी गयी हो….उसे हम किस प्रकार आसानी से भुलाते जा रहे हैं…?????

याद रखें….. सीमाएं उसी राष्ट्र की विकसित और सुरक्षित रहेंगी ….. जो सदैव संघर्षरत रहेंगे l

क्योंकि….. जो लड़ना ही भूल जाएँगे….. वो न स्वयं सुरक्षित रहेंगे……. न ही अपने राष्ट्र को सुरक्षित बना पाएंगे l

जय महाकाल…!!!

सौजन्य: हिन्दू महासभा

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काशी विश्वनाथ


हमारे वामपंथी इतिहासकारों द्वारा बहुत जोर-शोर से यह भ्रम फैलाया जाता है कि.... हमारे हिंदुस्तान में मुस्लिमों से बहुत सहृदयता से शासन की.... और, समाज के उत्थान के लिए ढेरों काम किये....!

लेकिन, उन मुस्लिम शासकों ने .... समाज का क्या और कैसा उत्थान किया .... यह जानकर आपका मुंह खुला का खुला रह जायेगा....

क्योंकि.... यह जानना किसी भी हिन्दू के लिए बेहद दुखद होगा  कि..... आज जिसे हम ""काशी विश्वनाथ मंदिर"" के नाम से जानते हैं ... वो रानी ""अहिल्या देवी होल्कर"" द्वारा 1777 ईस्वी में बनवाया गया ""नया मंदिर"" है....  !

क्योंकि.... अपने जिहादी भावना से वशीभूत होकर अकबर के परपोते औरंगजेब ने अगस्त  1669 में  .... 490 ईस्वी में स्थापित ""असली काशी विश्वनाथ मंदिर"" को ध्वस्त कर .... उस स्थान पर ""ज्ञानवापी मस्जिद"" का निर्माण करवा दिया गया था .... जिसे आज भी ""विश्वनाथ मंदिर"" के बगल में आसानी ने देखा जा सकता है....!

और तो और....

औरंगजेब द्वारा ... काशी विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त करने के पीछे ...... हमारे वामपंथी सेक्युलर विचारधारा के इतिहासकार .... क्या कहानी बताते हैं .... वो जानने योग्य है...

औरंगजेब द्वारा  विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त करने के उचित कारण बताते एवं औरंगजेब को सही ठहराते हुए ...... सेक्युलर विचारधारा के इतिहासकारों का कहना है कि.....

सन 1669  ईस्वी में .... औरंगजेब अपनी सेना एवं हिन्दू राजा  मित्रों के साथ वाराणसी के रास्ते बंगाल जा रहा था...... और, रास्ते में बनारस आने पर .... हिन्दू राजाओं की पत्नियों ने .... गंगा में डुबकी लगा कर काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा करने की इच्छा व्यक्त की ..... जिसे औरंगजेब सहर्ष मान गया और.... और, उसने अपनी सेना का पड़ाव बनारस से पांच किलोमीटर दूर ही रोक दिया ...!

फिर उस स्थान से .... हिन्दू राजाओं की रानियां पालकी एवं अपने अंगरक्षकों के साथ गंगाघाट पहुंची ... और, गंगा में स्नान कर ..... विश्वनाथ मंदिर में पूजा करने चली गई....!

लेकिन, पूजा के उपरांत सभी रानियां तो लौटी लेकिन ... कच्छ की रानी नहीं लौटी , जिससे औरंगजेब के सेना में खलबली गयी और, उसने अपने सेनानायक को रानी को खोज कर लाने का हुक्म दिया ...!

उसके बाद.... औरंगजेब का सेनानायक अपने सैनिकों के साथ रानी को खोजने मंदिर पहुंचा ... जहाँ, काफी खोजबीन के उपरांत ""भगवान गणेश की प्रतिमा के पीछे"" से नीचे की ओर जाती सीढ़ी से मंदिर के तहखाने में उन्हें रानी रोती हुई मिली.... जिसकी अस्मिता और गहने ......... मंदिर के पुजारी द्वारा लुट चुके थे ...!

इसके बाद .... औरंगजेब के लश्कर के साथ मौजूद हिन्दू राज्यों ने .... मंदिर के पुजारी एवं प्रबंधन के खिलाफ कठोरतम करवाई की मांग की .....

जिससे विवश होकर .... औरंगजेब ने सभी पुजारियों को दण्डित करने एवं उस ""विश्वनाथ मंदिर"" को ध्वस्त करने के आदेश दे दिए....और, मंदिर को तोड़ डाला गया ...!

============

लेकिन,  मनहूस  सेक्युलर इतिहासकारों के इस मनगढंत कहानी में बहुत झोल है .... और, इस कहानी से सम्बंधित कुछ ज्वलंत सवालों के  जबाब वे कभी देना नहीं चाहते हैं...................

१.  औरंगजेब की जीवनी में इस बात कहीं कोई जिक्र ही नहीं है कि.... औरंगजेब कभी बंगाल गया था......
और, बंगाल तो क्या वो कभी.... वाराणसी भी नहीं गया था...!

२. अगर एक बार इतिहासकारों की बात मान भी ली जाए तो...... मंदिर तोड़ने के बाद ... औरंगजेब बंगाल में कहाँ गया और वहां वो क्या किया.... ??????

३. क्या इतिहासकारों का ये कहना है कि..... औरंगजेब जब कहीं युद्ध के लिए जाता था तो... अपने साथ हिन्दू राजा मित्रों को रखता था.... क्योंकि, औरंगजेब की जीवनी में ऐसा कहीं कुछ नहीं लिखा है ...????

४. अगर एक बार फिर ... इन वामपंथी इतिहासकारों की बात मान भी ली जाए तो.... क्या, वे ये कहना चाहते हैं कि...... औरंगजेब और उसके तथाकथित हिन्दू मित्र ... जब भी कहीं युद्ध के लिए जाते थे तो क्या वे..... किसी  पिकनिक की तरह......  अपनी पत्नियों को भी ले कर जाते थे...????????

५. जब कच्छ की रानी .... ""अन्य रानियों एवं अपने अंगरक्षकों के साथ""........ मंदिर गयी थी..... तो , किसी पुजारी या महंत द्वारा उसका अपहरण कैसे संभव हुआ .... और, पुजारी द्वारा ऐसा करते हुए किसी ने देखा कैसे नहीं ....?????

६. अगर,  किसी तरह ये न हो सकने वाला जादू...... हो भी गया था तो..... साथ के हिन्दू राजाओं ने .... पुजारी को दंड देने एवं मंदिर को तोड़ने का आदेश देने के लिए औरंगजेब को क्यों कहा ... उन हिन्दू राजाओं ने खुद ही उन पुजारियों और मंदिर प्रबंधन को दंड क्यों नहीं दिया....?????

७. अगर किसी तरह ""ये  चमत्कार भी"" हो गया था तो.... क्या मंदिर तोड़ने से पहले वहां के ""ज्योतिर्लिंग और अन्य पवित्र मूर्तियों"" को..... शास्त्र सम्मत तरीके से हटाया गया था ...????

८. क्या मंदिरों को तोड़कर वहां पर .... मस्जिद बनाने की प्रार्थना भी ... साथ गए हिन्दू राजाओं ने ही की थी....????

९. मंदिर तोड़ने के बाद और पहले .... इतिहास में उस तथाकथित कच्छ की रानी का जिक्र क्यों नहीं है....?????
==========

इन सब सवालों के जबाब किसी भी इतिहासकारों के पास नहीं है क्योंकि ... यह एक पूरी तरह से मनगढंत कहानी है....!

हकीकत बात ये है कि.... औरंगजेब मदरसे में पढ़ा हुआ एक कट्टर मुसलमान और जेहादी था .... जिसने हिन्दुओं को अपमानित करने के लिए ना सिर्फ काशी विश्वनाथ बल्कि, कृष्णजन्म भूमि मथुरा के मंदिर अन्य सभी प्रसिद्द मंदिरों को ध्वस्त कर वहां मस्जिदों का निर्माण करवा दिया था.....

जिसे.... ये मनहूस वामपंथी सेक्युलर इतिहासकार किसी भी तरह से न्यायोचित ठहराने में लगे हुए हैं....

और .. अपने पुराने विश्वनाथ मंदिर की स्थिति ये है कि.....

 वहां औरंगजेब द्वारा  बनवाया गया ... ज्ञानवापी मस्जिद आज भी हम हिन्दुओं का मुंह चिढ़ा रहा है ... और, मुल्ले उसमे नियमित नमाज अदा करते हैं..... !

जबकि.... आज भी ज्ञानवापी मस्जिद के दीवारों पर हिन्दू देवी -देवताओं के मूर्ति अंकित हैं.... और, मस्जिद के ठीक सामने .... भगवान विश्वनाथ की नंदी विराजमान है....!

इसीलिए.....

हे हिन्दुओं जागो....

और... जानो अपने सही इतिहास को .....

क्योंकि.... इतिहास की सही जानकारी ही..... इतिहास की पुनरावृति को रोक सकती है...!

जय महाकाल....!!!

हमारे वामपंथी इतिहासकारों द्वारा बहुत जोर-शोर से यह भ्रम फैलाया जाता है कि…. हमारे हिंदुस्तान में मुस्लिमों से बहुत सहृदयता से शासन की…. और, समाज के उत्थान के लिए ढेरों काम किये….!

लेकिन, उन मुस्लिम शासकों ने …. समाज का क्या और कैसा उत्थान किया …. यह जानकर आपका मुंह खुला का खुला रह जायेगा….

क्योंकि…. यह जानना किसी भी हिन्दू के लिए बेहद दुखद होगा कि….. आज जिसे हम “”काशी विश्वनाथ मंदिर”” के नाम से जानते हैं … वो रानी “”अहिल्या देवी होल्कर”” द्वारा 1777 ईस्वी में बनवाया गया “”नया मंदिर”” है…. !

क्योंकि…. अपने जिहादी भावना से वशीभूत होकर अकबर के परपोते औरंगजेब ने अगस्त 1669 में …. 490 ईस्वी में स्थापित “”असली काशी विश्वनाथ मंदिर”” को ध्वस्त कर …. उस स्थान पर “”ज्ञानवापी मस्जिद”” का निर्माण करवा दिया गया था …. जिसे आज भी “”विश्वनाथ मंदिर”” के बगल में आसानी ने देखा जा सकता है….!

और तो और….

औरंगजेब द्वारा … काशी विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त करने के पीछे …… हमारे वामपंथी सेक्युलर विचारधारा के इतिहासकार …. क्या कहानी बताते हैं …. वो जानने योग्य है…

औरंगजेब द्वारा विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त करने के उचित कारण बताते एवं औरंगजेब को सही ठहराते हुए …… सेक्युलर विचारधारा के इतिहासकारों का कहना है कि…..

सन 1669 ईस्वी में …. औरंगजेब अपनी सेना एवं हिन्दू राजा मित्रों के साथ वाराणसी के रास्ते बंगाल जा रहा था…… और, रास्ते में बनारस आने पर …. हिन्दू राजाओं की पत्नियों ने …. गंगा में डुबकी लगा कर काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा करने की इच्छा व्यक्त की ….. जिसे औरंगजेब सहर्ष मान गया और…. और, उसने अपनी सेना का पड़ाव बनारस से पांच किलोमीटर दूर ही रोक दिया …!

फिर उस स्थान से …. हिन्दू राजाओं की रानियां पालकी एवं अपने अंगरक्षकों के साथ गंगाघाट पहुंची … और, गंगा में स्नान कर ….. विश्वनाथ मंदिर में पूजा करने चली गई….!

लेकिन, पूजा के उपरांत सभी रानियां तो लौटी लेकिन … कच्छ की रानी नहीं लौटी , जिससे औरंगजेब के सेना में खलबली गयी और, उसने अपने सेनानायक को रानी को खोज कर लाने का हुक्म दिया …!

उसके बाद…. औरंगजेब का सेनानायक अपने सैनिकों के साथ रानी को खोजने मंदिर पहुंचा … जहाँ, काफी खोजबीन के उपरांत “”भगवान गणेश की प्रतिमा के पीछे”” से नीचे की ओर जाती सीढ़ी से मंदिर के तहखाने में उन्हें रानी रोती हुई मिली…. जिसकी अस्मिता और गहने ……… मंदिर के पुजारी द्वारा लुट चुके थे …!

इसके बाद …. औरंगजेब के लश्कर के साथ मौजूद हिन्दू राज्यों ने …. मंदिर के पुजारी एवं प्रबंधन के खिलाफ कठोरतम करवाई की मांग की …..

जिससे विवश होकर …. औरंगजेब ने सभी पुजारियों को दण्डित करने एवं उस “”विश्वनाथ मंदिर”” को ध्वस्त करने के आदेश दे दिए….और, मंदिर को तोड़ डाला गया …!

============

लेकिन, मनहूस सेक्युलर इतिहासकारों के इस मनगढंत कहानी में बहुत झोल है …. और, इस कहानी से सम्बंधित कुछ ज्वलंत सवालों के जबाब वे कभी देना नहीं चाहते हैं……………….

१. औरंगजेब की जीवनी में इस बात कहीं कोई जिक्र ही नहीं है कि…. औरंगजेब कभी बंगाल गया था……
और, बंगाल तो क्या वो कभी…. वाराणसी भी नहीं गया था…!

२. अगर एक बार इतिहासकारों की बात मान भी ली जाए तो…… मंदिर तोड़ने के बाद … औरंगजेब बंगाल में कहाँ गया और वहां वो क्या किया…. ??????

३. क्या इतिहासकारों का ये कहना है कि….. औरंगजेब जब कहीं युद्ध के लिए जाता था तो… अपने साथ हिन्दू राजा मित्रों को रखता था…. क्योंकि, औरंगजेब की जीवनी में ऐसा कहीं कुछ नहीं लिखा है …????

४. अगर एक बार फिर … इन वामपंथी इतिहासकारों की बात मान भी ली जाए तो…. क्या, वे ये कहना चाहते हैं कि…… औरंगजेब और उसके तथाकथित हिन्दू मित्र … जब भी कहीं युद्ध के लिए जाते थे तो क्या वे….. किसी पिकनिक की तरह…… अपनी पत्नियों को भी ले कर जाते थे…????????

५. जब कच्छ की रानी …. “”अन्य रानियों एवं अपने अंगरक्षकों के साथ””…….. मंदिर गयी थी….. तो , किसी पुजारी या महंत द्वारा उसका अपहरण कैसे संभव हुआ …. और, पुजारी द्वारा ऐसा करते हुए किसी ने देखा कैसे नहीं ….?????

६. अगर, किसी तरह ये न हो सकने वाला जादू…… हो भी गया था तो….. साथ के हिन्दू राजाओं ने …. पुजारी को दंड देने एवं मंदिर को तोड़ने का आदेश देने के लिए औरंगजेब को क्यों कहा … उन हिन्दू राजाओं ने खुद ही उन पुजारियों और मंदिर प्रबंधन को दंड क्यों नहीं दिया….?????

७. अगर किसी तरह “”ये चमत्कार भी”” हो गया था तो…. क्या मंदिर तोड़ने से पहले वहां के “”ज्योतिर्लिंग और अन्य पवित्र मूर्तियों”” को….. शास्त्र सम्मत तरीके से हटाया गया था …????

८. क्या मंदिरों को तोड़कर वहां पर …. मस्जिद बनाने की प्रार्थना भी … साथ गए हिन्दू राजाओं ने ही की थी….????

९. मंदिर तोड़ने के बाद और पहले …. इतिहास में उस तथाकथित कच्छ की रानी का जिक्र क्यों नहीं है….?????
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इन सब सवालों के जबाब किसी भी इतिहासकारों के पास नहीं है क्योंकि … यह एक पूरी तरह से मनगढंत कहानी है….!

हकीकत बात ये है कि…. औरंगजेब मदरसे में पढ़ा हुआ एक कट्टर मुसलमान और जेहादी था …. जिसने हिन्दुओं को अपमानित करने के लिए ना सिर्फ काशी विश्वनाथ बल्कि, कृष्णजन्म भूमि मथुरा के मंदिर अन्य सभी प्रसिद्द मंदिरों को ध्वस्त कर वहां मस्जिदों का निर्माण करवा दिया था…..

जिसे…. ये मनहूस वामपंथी सेक्युलर इतिहासकार किसी भी तरह से न्यायोचित ठहराने में लगे हुए हैं….

और .. अपने पुराने विश्वनाथ मंदिर की स्थिति ये है कि…..

वहां औरंगजेब द्वारा बनवाया गया … ज्ञानवापी मस्जिद आज भी हम हिन्दुओं का मुंह चिढ़ा रहा है … और, मुल्ले उसमे नियमित नमाज अदा करते हैं….. !

जबकि…. आज भी ज्ञानवापी मस्जिद के दीवारों पर हिन्दू देवी -देवताओं के मूर्ति अंकित हैं…. और, मस्जिद के ठीक सामने …. भगवान विश्वनाथ की नंदी विराजमान है….!

इसीलिए…..

हे हिन्दुओं जागो….

और… जानो अपने सही इतिहास को …..

क्योंकि…. इतिहास की सही जानकारी ही….. इतिहास की पुनरावृति को रोक सकती है…!

जय महाकाल….!!!

Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas, P N Oak

लार्ड मैकाले


*** "हर भारतीय के लिए चुनौती " ***

सन् 1836 में लार्ड मैकाले अपने पिता को लिखे एक पत्र में कहता है:
"अगर हम इसी प्रकार अंग्रेजी नीतिया चलाते रहे और भारत इसे अपनाता रहा तो आने वाले कुछ सालों में 1 दिन ऐसा आएगा की यहाँ कोई सच्चा भारतीय नहीं बचेगा.....!!"
(सच्चे भारतीय से मतलब......चरित्र में ऊँचा, नैतिकता में ऊँचा, धार्मिक विचारों वाला, धर्मं के रस्ते पर चलने वाला)

भारत को जय करने के लिए, चरित्र गिराने के लिए, अंग्रेजो ने 1758 में कलकत्ता में पहला शराबखाना खोला, जहाँ पहले साल वहाँ सिर्फ अंग्रेज जाते थे। आज पूरा भारत जाता है।
सन् 1947 में 3.5 हजार शराबखानो को सरकार का लाइसेंस.....!!

सन् 2009-10 में लगभग 25,400 दुकानों को मौत का व्यापार करने की इजाजत।

चरित्र से निर्बल बनाने के लिए सन् 1760 में भारत में पहला वेश्याघर कलकत्ता में सोनागाछी में अंग्रेजों ने खोला और लगभग 200 स्त्रियों को जबरदस्ती इस काम में लगाया गया।

अंग्रेजों के जाने के बाद जहाँ इनकी संख्या में कमी होनी चाहिए थी वहीं इनकी संख्या में दिन दुनी रात चौगुनी वृद्धि हो रही है !!

आज हमारे सामने पैसा चुनौती नहीं बल्कि भारत का चारित्रिक पतन चुनौती है।
इसकी रक्षा और इसको वापस लाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए !!!

*** “हर भारतीय के लिए चुनौती ” ***

सन् 1836 में लार्ड मैकाले अपने पिता को लिखे एक पत्र में कहता है:
“अगर हम इसी प्रकार अंग्रेजी नीतिया चलाते रहे और भारत इसे अपनाता रहा तो आने वाले कुछ सालों में 1 दिन ऐसा आएगा की यहाँ कोई सच्चा भारतीय नहीं बचेगा…..!!”
(सच्चे भारतीय से मतलब……चरित्र में ऊँचा, नैतिकता में ऊँचा, धार्मिक विचारों वाला, धर्मं के रस्ते पर चलने वाला)

भारत को जय करने के लिए, चरित्र गिराने के लिए, अंग्रेजो ने 1758 में कलकत्ता में पहला शराबखाना खोला, जहाँ पहले साल वहाँ सिर्फ अंग्रेज जाते थे। आज पूरा भारत जाता है।
सन् 1947 में 3.5 हजार शराबखानो को सरकार का लाइसेंस…..!!

सन् 2009-10 में लगभग 25,400 दुकानों को मौत का व्यापार करने की इजाजत।

चरित्र से निर्बल बनाने के लिए सन् 1760 में भारत में पहला वेश्याघर कलकत्ता में सोनागाछी में अंग्रेजों ने खोला और लगभग 200 स्त्रियों को जबरदस्ती इस काम में लगाया गया।
अंग्रेजों के जाने के बाद जहाँ इनकी संख्या में कमी होनी चाहिए थी वहीं इनकी संख्या में दिन दुनी रात चौगुनी वृद्धि हो रही है !!

आज हमारे सामने पैसा चुनौती नहीं बल्कि भारत का चारित्रिक पतन चुनौती है।
इसकी रक्षा और इसको वापस लाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए !!!

Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas, P N Oak

अकबर


जेहादी हुमायूँ के बेटे अकबर को हमारे इतिहास की किताबों तथा, टीवी सीरियलों में एक बहुत ही नेक इंसान और भारत के एक बहुत महान शासक के रूप में प्रचारित किया जाता है .... मानो कि.... अकबर ने हमारे भारत पर शासन कर हमें कृतार्थ कर दिया हो...!

परन्तु, यह जानकर आपके हैरानी की सीमा नहीं रहेगी कि.....   भारत में वेश्यावृति का सर्वाधिक प्रचार मुस्लिम खासकर अकबर शासनकाल में ही हुआ और....अकबर के समय  वेश्यावृति को बाकायदा राजकीय संरक्षण प्रदान था...!

सिर्फ इतना ही नहीं.... बल्कि, अकबर की  खुद की भी एक बहुत बड़ी हरम थी,  जिसमे उसने बहुत सारी स्त्रियों को अपना रखैल बनाकर रखा हुआ था... जिन्हे वो  जबरदस्ती अपहरण करवा कर इकठ्ठा कर रखा हुआ था ...!

मुस्लिमों के अत्याचार से भयभीत होकर जब कोई  सुन्दर स्त्री को आत्मदाह (सती) होने को होती ... वह जाकर बलपूर्वक उसे आत्मदाह (सती)  करने से  रोकता और उस स्त्री को अपने हरम में डाल देता |

इस कांड को उसके चमचे इतिहासकारों ने "आईने अकबरी" में कुछ इस तरह से लिखा है..... बादशाह सलामत ने सती प्रथा का विरोध किया |
अकबर ने खुद कहा है – यदि मुझे पहले ही यह बुद्धिमता जागृत हो जाती तो मैं अपनी सल्तनत की किसी भी स्त्री का अपहरण कर अपने हरम में नहीं लाता (आईने अकबरी, भाग ३, पृष्ठ ३७८ ) |

आईने अकबरी में लिखे इस बात से यह साफ़-साफ़ पता चलता है कि ....अकबर सुन्दर हिन्दू स्त्रियों  का अपहरण करता था...!

और, जहाँ तक बात रह गयी .......‘मुझे पहले ही यह बुद्धिमता  जागृत हो जाती’ की  बात तो..... यह सर्वथा लोगों को चूसिया बनाने वाली बात है ....क्योकि,  न तो अकबर के ज़माने में और न ही उसके उत्तराधिकारियों के ज़माने में हरम बंद हुई थी |

सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि..... आईने अकबरी के पृष्ठ १५ पर बदायूँनी आगे कहता है कि..... बेगमें, कुलीन, दरवारियो की बीबियाँ अथवा अन्य स्त्रियां ... जब कभी बादशाह की सेवा में पेश होने की इच्छा करती हैं... तो ,  उन्हें पहले अपने इच्छा की सूचना देकर उत्तर की प्रतीक्षा करनी पड़ती है... और, जिन्हें योग्य समझा जाता है , सिर्फ उन्ही स्त्री को  हरम में प्रवेश की अनुमति दी जाती है ...!

इस कथन से आप खुद ही सोच सकते हैं कि....... अकबर के चाटुकार कैसी इतिहास लिखा करते थे ..... क्योंकि...

 प्रस्तुत उद्धरण का विश्लेषण करते हुए आप खुद भी कल्पना कर सकते हैं कि...... – प्रथमतः कितनी विवाहित स्त्रियों ने अकबर के साथ हरम में रहकर भ्रष्ट  होने एवं अकबर की लाखों रखैलों में से एक बनने कि चेष्टा की होगी....  जबकि अकबर के हरम  में पहले से ही असंख्य औरते थी ....?????????

क्या इतिहासकार हम सभी को यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि...... उस समय की तत्कालीन हिन्दू स्त्रियां ......अकबर के हाथो अपना सर्वस्य भ्रष्ट करवाने में अपना  सौभाग्य समझती थी और अपने पतियों, पुत्रो, पुत्रियों एवं घरो को छोड़ने के लिए तैयार हो जाती थी..???????

उस समय कि बात तो बहुत दूर है ..... बल्कि, यदि आज भी अगर हिन्दू औरत........ किसी कटुए से विधिवत शादी भी कर ले तो.... काफी बवेला उठ सकता है |

तो क्या .....  क्या वे हिन्दू औरतें  अपने युग से १००० वर्ष आगे थी....????????

और फिर...... उस कुरूप और चेचक से भरे दागों वाले अकबर के साथ सहवास से उनका ऐसा क्या हो जाता था ????

अथवा .... अकबर के हरम में ऐसा क्या आकर्षण था कि .... हिन्दू औरतें स्वेच्छा  से वहां चली जाती थी...?????????

असल में..... ये सारी बातें हिन्दुओं को अपमानित करने एवं अकबर को खुश करने के लिए उसकी चापलूसी में लिखी गई हैं ....!

हकीकत बात ये है है कि......जिन्हें "योग्य" समझा जाता था...... अर्थात,  जिस स्त्री को अकबर काफी आकर्षक देखता था........ उसे, वो ..... अपने हरम में जबरदस्ती मंगवा लेता था...!

और तो और........... अकबर अपनी सैन्य शक्ति के बल पर....प्रजा को बाध्य करता था कि .... वह अपने पत्नियों, बेटियों और  बहनों का सामूहिक नग्न प्रदर्शन आयोजित करे (कर्नल टाड की किताब – ‘राजस्थान का इतिहास’ पेज २७४-२७५) |

इस सामूहिक प्रदर्शन का नाम....... अकबर ने....... "खुदारोज" (प्रमोद दिवस ) रखा था !

और,  इस मेले के पीछे अकबर का एकमात्र उदेश्य सुन्दरियों को अपने हरम के लिए चुनना था !

सिर्फ इतना ही नहीं ... बल्कि, वो कालिया और चेचक से भरे दागों मुंह वाला जेहादी अकबर .... इतना बड़ा एहसानफरामोश था कि.....उसके अभिभावक एवं संरक्षक बहराम खान (जिसने हुमायूँ की मृत्यु के बाद अकबर की देखभाल की) को भी अकबर की कामुकता का शिकार होना पड़ा, क्योकि अकबर की कामुक दृष्टी उसकी बीबी "सलीमा सुल्तान" बेगम पर थी |

वो जेहादी अकबर इतना बड़ा हैवान था कि ... मात्र  १५ वर्षीय के उम्र में ही उसने ... अपने संरक्षक और अभिभावक बहराम खान की परिणीता पत्नी " सलीमा सुल्तान" को अपने हरम में लेने के लिए एक सर्वोच्च राजभक्त कर्मचारी के समस्त अधिकार छिनकर उसकी हत्या करवाने का जघन्य अपराध किया और तुरंत बाद उसकी बीबी "सलीमा सुल्तान" ( ६ वर्षीय पुत्र अब्दुल रहीम की माँ ) को अपनी रखैल बनाकर अपने हरम में ले लिया |

यह अकबर का चरम काम पिपासा एवं प्रेमोन्माद था |

हद तो ये थी कि..... इतनी रानियों और रखैलों के होते हुए भी उस नरपिशाच की कामपिपासा शांत नहीं हुई थी..... और..... वो जेहादी भेड़िया अकबर ...गोंडवाना की रानी दुर्गावती पर भी  बुरी नजर रखता था ....और,   उसने रानी दुर्गावती को प्राप्त करने के लिए उसके राज्य .गोंडवाना पर आक्रमण कर दिया !

इस पर उस राजपूतानी वीरांगना ""रानी दुर्गावती"" ने अकबर से बेहद बहादुरी से युद्ध किया ... परन्तु, युद्ध  क्षेत्र में उस वीरांगना ने देखा कि ..... युद्ध में  उसे मारने की नहीं वल्कि बंदी बनाने की कोशिश की जा रही है.... तो , रानी दुर्गावती ने .....अपने मान सम्मान और इज्जत की रक्षा हेतु "आत्म हत्या" कर ली .... जिससे उस युद्ध से अकबर को कुछ भी हासिल नहीं हुआ .... फिर भी, अकबर ने अपनी क्षतिपूति के तौर पर....महारानी दुर्गावती की  बहन और पुत्रवधू को बलात अपने हरम में डाल दी ...!

क्योंकि..... उस जेहादी अकबर ने यह प्रथा चला रखी थी कि......... उसके पराजित शत्रु अपने परिवार एवं परिचारिका वर्ग में से चुनी हुई महिलाये ..... रखैल के तौर पर उसके हरम में भेजे ...!

उस जेहादी और मनहूस अकबर के बारे में .... इतना सब जानने के बाद , मै मध्यकालीन भारतीय इतिहासकारों पूछना चाहता हूँ कि .....

ऐसे कामुक एवं पतित बादशाह..... को ""अकबर महान"" की संज्ञा क्यों दी जाती है....????????

क्या , अब हमारे ही हिंदुस्तान में ""मुस्लिम तुष्टिकरण''' इस कदर हावी हो चुकी है कि...... देश के बच्चों को भी गलत इतिहास पढ़ाया जा रहा है...??????

जागो हिन्दुओं.... और, सच्चाई को जानो.....!

क्योंकि... सच्चाई ही तुम्हारे अस्तित्व की रक्षा में सहायक होगा....!

जय महाकाल...!!!

जेहादी हुमायूँ के बेटे अकबर को हमारे इतिहास की किताबों तथा, टीवी सीरियलों में एक बहुत ही नेक इंसान और भारत के एक बहुत महान शासक के रूप में प्रचारित किया जाता है …. मानो कि…. अकबर ने हमारे भारत पर शासन कर हमें कृतार्थ कर दिया हो…!

परन्तु, यह जानकर आपके हैरानी की सीमा नहीं रहेगी कि….. भारत में वेश्यावृति का सर्वाधिक प्रचार मुस्लिम खासकर अकबर शासनकाल में ही हुआ और….अकबर के समय वेश्यावृति को बाकायदा राजकीय संरक्षण प्रदान था…!

सिर्फ इतना ही नहीं…. बल्कि, अकबर की खुद की भी एक बहुत बड़ी हरम थी, जिसमे उसने बहुत सारी स्त्रियों को अपना रखैल बनाकर रखा हुआ था… जिन्हे वो जबरदस्ती अपहरण करवा कर इकठ्ठा कर रखा हुआ था …!

मुस्लिमों के अत्याचार से भयभीत होकर जब कोई सुन्दर स्त्री को आत्मदाह (सती) होने को होती … वह जाकर बलपूर्वक उसे आत्मदाह (सती) करने से रोकता और उस स्त्री को अपने हरम में डाल देता |

इस कांड को उसके चमचे इतिहासकारों ने “आईने अकबरी” में कुछ इस तरह से लिखा है….. बादशाह सलामत ने सती प्रथा का विरोध किया |
अकबर ने खुद कहा है – यदि मुझे पहले ही यह बुद्धिमता जागृत हो जाती तो मैं अपनी सल्तनत की किसी भी स्त्री का अपहरण कर अपने हरम में नहीं लाता (आईने अकबरी, भाग ३, पृष्ठ ३७८ ) |

आईने अकबरी में लिखे इस बात से यह साफ़-साफ़ पता चलता है कि ….अकबर सुन्दर हिन्दू स्त्रियों का अपहरण करता था…!

और, जहाँ तक बात रह गयी …….‘मुझे पहले ही यह बुद्धिमता जागृत हो जाती’ की बात तो….. यह सर्वथा लोगों को चूसिया बनाने वाली बात है ….क्योकि, न तो अकबर के ज़माने में और न ही उसके उत्तराधिकारियों के ज़माने में हरम बंद हुई थी |

सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि….. आईने अकबरी के पृष्ठ १५ पर बदायूँनी आगे कहता है कि….. बेगमें, कुलीन, दरवारियो की बीबियाँ अथवा अन्य स्त्रियां … जब कभी बादशाह की सेवा में पेश होने की इच्छा करती हैं… तो , उन्हें पहले अपने इच्छा की सूचना देकर उत्तर की प्रतीक्षा करनी पड़ती है… और, जिन्हें योग्य समझा जाता है , सिर्फ उन्ही स्त्री को हरम में प्रवेश की अनुमति दी जाती है …!

इस कथन से आप खुद ही सोच सकते हैं कि……. अकबर के चाटुकार कैसी इतिहास लिखा करते थे ….. क्योंकि…

प्रस्तुत उद्धरण का विश्लेषण करते हुए आप खुद भी कल्पना कर सकते हैं कि…… – प्रथमतः कितनी विवाहित स्त्रियों ने अकबर के साथ हरम में रहकर भ्रष्ट होने एवं अकबर की लाखों रखैलों में से एक बनने कि चेष्टा की होगी…. जबकि अकबर के हरम में पहले से ही असंख्य औरते थी ….?????????

क्या इतिहासकार हम सभी को यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि…… उस समय की तत्कालीन हिन्दू स्त्रियां ……अकबर के हाथो अपना सर्वस्य भ्रष्ट करवाने में अपना सौभाग्य समझती थी और अपने पतियों, पुत्रो, पुत्रियों एवं घरो को छोड़ने के लिए तैयार हो जाती थी..???????

उस समय कि बात तो बहुत दूर है ….. बल्कि, यदि आज भी अगर हिन्दू औरत…….. किसी कटुए से विधिवत शादी भी कर ले तो…. काफी बवेला उठ सकता है |

तो क्या ….. क्या वे हिन्दू औरतें अपने युग से १००० वर्ष आगे थी….????????

और फिर…… उस कुरूप और चेचक से भरे दागों वाले अकबर के साथ सहवास से उनका ऐसा क्या हो जाता था ????

अथवा …. अकबर के हरम में ऐसा क्या आकर्षण था कि …. हिन्दू औरतें स्वेच्छा से वहां चली जाती थी…?????????

असल में….. ये सारी बातें हिन्दुओं को अपमानित करने एवं अकबर को खुश करने के लिए उसकी चापलूसी में लिखी गई हैं ….!

हकीकत बात ये है है कि……जिन्हें “योग्य” समझा जाता था…… अर्थात, जिस स्त्री को अकबर काफी आकर्षक देखता था…….. उसे, वो ….. अपने हरम में जबरदस्ती मंगवा लेता था…!

और तो और……….. अकबर अपनी सैन्य शक्ति के बल पर….प्रजा को बाध्य करता था कि …. वह अपने पत्नियों, बेटियों और बहनों का सामूहिक नग्न प्रदर्शन आयोजित करे (कर्नल टाड की किताब – ‘राजस्थान का इतिहास’ पेज २७४-२७५) |

इस सामूहिक प्रदर्शन का नाम……. अकबर ने……. “खुदारोज” (प्रमोद दिवस ) रखा था !

और, इस मेले के पीछे अकबर का एकमात्र उदेश्य सुन्दरियों को अपने हरम के लिए चुनना था !

सिर्फ इतना ही नहीं … बल्कि, वो कालिया और चेचक से भरे दागों मुंह वाला जेहादी अकबर …. इतना बड़ा एहसानफरामोश था कि…..उसके अभिभावक एवं संरक्षक बहराम खान (जिसने हुमायूँ की मृत्यु के बाद अकबर की देखभाल की) को भी अकबर की कामुकता का शिकार होना पड़ा, क्योकि अकबर की कामुक दृष्टी उसकी बीबी “सलीमा सुल्तान” बेगम पर थी |

वो जेहादी अकबर इतना बड़ा हैवान था कि … मात्र १५ वर्षीय के उम्र में ही उसने … अपने संरक्षक और अभिभावक बहराम खान की परिणीता पत्नी ” सलीमा सुल्तान” को अपने हरम में लेने के लिए एक सर्वोच्च राजभक्त कर्मचारी के समस्त अधिकार छिनकर उसकी हत्या करवाने का जघन्य अपराध किया और तुरंत बाद उसकी बीबी “सलीमा सुल्तान” ( ६ वर्षीय पुत्र अब्दुल रहीम की माँ ) को अपनी रखैल बनाकर अपने हरम में ले लिया |

यह अकबर का चरम काम पिपासा एवं प्रेमोन्माद था |

हद तो ये थी कि….. इतनी रानियों और रखैलों के होते हुए भी उस नरपिशाच की कामपिपासा शांत नहीं हुई थी….. और….. वो जेहादी भेड़िया अकबर …गोंडवाना की रानी दुर्गावती पर भी बुरी नजर रखता था ….और, उसने रानी दुर्गावती को प्राप्त करने के लिए उसके राज्य .गोंडवाना पर आक्रमण कर दिया !

इस पर उस राजपूतानी वीरांगना “”रानी दुर्गावती”” ने अकबर से बेहद बहादुरी से युद्ध किया … परन्तु, युद्ध क्षेत्र में उस वीरांगना ने देखा कि ….. युद्ध में उसे मारने की नहीं वल्कि बंदी बनाने की कोशिश की जा रही है…. तो , रानी दुर्गावती ने …..अपने मान सम्मान और इज्जत की रक्षा हेतु “आत्म हत्या” कर ली …. जिससे उस युद्ध से अकबर को कुछ भी हासिल नहीं हुआ …. फिर भी, अकबर ने अपनी क्षतिपूति के तौर पर….महारानी दुर्गावती की बहन और पुत्रवधू को बलात अपने हरम में डाल दी …!

क्योंकि….. उस जेहादी अकबर ने यह प्रथा चला रखी थी कि……… उसके पराजित शत्रु अपने परिवार एवं परिचारिका वर्ग में से चुनी हुई महिलाये ….. रखैल के तौर पर उसके हरम में भेजे …!

उस जेहादी और मनहूस अकबर के बारे में …. इतना सब जानने के बाद , मै मध्यकालीन भारतीय इतिहासकारों पूछना चाहता हूँ कि …..

ऐसे कामुक एवं पतित बादशाह….. को “”अकबर महान”” की संज्ञा क्यों दी जाती है….????????

क्या , अब हमारे ही हिंदुस्तान में “”मुस्लिम तुष्टिकरण”’ इस कदर हावी हो चुकी है कि…… देश के बच्चों को भी गलत इतिहास पढ़ाया जा रहा है…??????

जागो हिन्दुओं…. और, सच्चाई को जानो…..!

क्योंकि… सच्चाई ही तुम्हारे अस्तित्व की रक्षा में सहायक होगा….!

जय महाकाल…!!!

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वर्ण व्यवस्था


मुस्लिम और उनके सरपरस्त सेक्यूलरों द्वारा अक्सर ही यह अफवाह उड़ाई जाती है कि.... हमारा हिन्दू धर्म..... पूर्व काल में ....वर्ण व्यवस्था एवं छुआ-छूत जैसी कुरीतियों से भरा पड़ा था ... इसीलिए, बहुत से दलित हिन्दू ... पहले बौद्ध और फिर इस्लाम की ओर आकर्षित हो गए....!

लेकिन... ऐसा कहने वालों के पास इस बात का जबाब नहीं होता है कि..... अगर ऐसा ही था.... तो, 

हिन्दुओं के आराध्य भगवान राम ..... ब्राह्मण ना होकर एक क्षत्रिय थे.... और, भगवान कृष्ण भी यदुवंशी थे..... जिन्हे आज OBC में ही गिना जाता है..... 

फिर अगर , उस समय के समाज मे छुआ-छूत  मौजूद होते तो,  ..... गैर-ब्राह्मणों को भगवान के रूप में मान्यता कैसे मिल गयी ...???

सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि.... महर्षि व्यास, बाल्मीकि इत्यादि तो अति पिछड़े वर्ग के होते हुए भी .... ब्राह्मणों तक के लिए पूजनीय थे...

कहने का तात्पर्य है कि..... मुस्लिम और सेक्यूलरों द्वारा कहने जाने वाली कहानी में कहीं न कहीं कोई बड़ा झोल जरूर है... तभी वे तर्कसंगत जबाब नहीं दे पाते हैं...!

और वो झोल ये है कि.... हम हिन्दुओं में वर्ण व्यवस्था तो जरूर थी.... लेकिन, छुआ-छूत जैसी कुरीतियां नहीं थी..... क्योंकि, इसका कोई कारण ही नहीं था....!

जबकि .. इसके उलट .... अरब में .... इस्लाम का प्रादुर्भाव होने के उपरान्त.... वहां कबीलाई झगड़ा अपने चरम पर था.... और, एक कबीले के लोगों द्वारा ..... दूसरे कबीले के अनाज, पशु और औरत को लूट लाना आम बात थी....!

इसीलिए..... अरब में मुस्लिमों  ने .... अपनी औरतों को दूसरे कबीले के लुटेरों से बचाने के लिए.... उन्हें घर में ही रखना शुरू कर दिया  ..... और, उनके दैनिक कार्यों की व्यवस्था घर के अंदर ही कर दी.... जिसे बाद में परिवार के ही किसी "अन्य सदस्य द्वारा"... घर के बाहर फेंका अथवा फिंकवा दिया जाता था... (प्रारंभिक मेहतर प्रथा ).

कालांतर में... जब उन तुर्क मुस्लिम लुटेरों ने .... हमारे हिंदुस्तान पर आक्रमण किया तो... उन्होंने अपनी ये कुरीतियां अपने साथ हमारे हिंदुस्तान में ले आयीं  .... और, वे हिंदुस्तान में अपने युद्धबंदियों ( जो कि हिन्दू थे ) से ये काम करवाने लगे ....!

उसके बाद .... जब हमारे हिंदुस्तान में मुगलों का शासन हो गया तो..... वे यहाँ के बहुसंख्यक हिन्दुओं को .... तलवार के जोर पर ....इस्लाम ग्रहण करने के लिए दबाव बनाने लगे ... साथ ही उन्हें लोभ देने लगे....!

जिससे कायर हिन्दुओं की एक बड़ी संख्या .... मुस्लिम हो गयी....

परन्तु... जिन हिन्दुओं को अपनी आन प्यारी थी.... उन्होंने मुगलों की बात मानने से इंकार दिया ... और, उन मुगलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया...!

मुगलों के साथ इस लड़ाई में ..... युद्ध हार जाने के बाद .... उन्हें अपमानित करने के लिए..... मुगलों ने उन सैनिकों और सेनापतियों को ..... अपने हरम में..... मैला उठाने के काम में लगा दिया ...... जिसमे उस समय ... युद्ध बंदियों की पत्नियों और बहन बेटियों को .... मुग़ल सुल्तान ..... जबरन अपनी रखैल बना कर रखा करते थे...!

चूँकि.... हमारे हिंदुस्तान में मुगलों का शासन काफी समय तक रह गया.... इसीलिए, कुछ समय बाद ये कुरीति .... राजमहल के बाहर भी फ़ैल गयी और....  अमीर लोग .... उन ""राजकीय दास"" से...... "पैसे के बदले ये सेवा".... लेने लगे....!

और, चूँकि...... इस काम की शुरआत ही .....हिन्दू  युद्धवीरों और जांबाजों को अपमानित  करने के लिए किया गया था.... इसीलिए, उनकी बस्तियां और खाने-पीने का प्रबंध भी शहर से बाहर कर दिया गया ताकि, वे घबरा कर इस्लाम कबूल कर लें...!

परन्तु.... हम सभी को ..... अपने उन  हिन्दू  युद्धवीरों और जांबाजों के दृढ संकल्प के आगे नतमस्तक होना चाहिए कि.... उन्होंने सारे अपमान और दुःख को सहते हुए भी..... अपना धर्म नहीं छोड़ा और इस्लाम को दुत्कार दिया...!

उसके बाद... तरीके से ..... मुग़ल सल्तनत के कमजोर पड़ते ही.... हिन्दुओं को .... उन  अपमान झेलते हिन्दू  युद्धवीरों और जांबाजों को गले लेना चाहिए था और उन्हें हिन्दू धर्म के प्रति दी गयी इस बलिदान के लिए सम्मानित किया जाना चाहिए था....!

लेकिन... हम हिन्दुओं से एक बड़ी गलती फिर हो गयी..... और, हिन्दुओं ने उन्हें गले लगाने की जगह .... उसे वंशवादी कार्य बना दिया... और, अपने ही संगठित समाज में जहर का बीज बो दिया.... जिससे आगे चलकर ... एकीकृत और मजबूत हिन्दू समाज .... छोटी-छोटी जातियों में विभक्त होकर .... आपस में ही लड़ने लगे .... जो आज भी जारी है...!

इस तरह.... अरबी मुस्लिमों की एक कुरीति ..... हम हिन्दुओं की बेवकूफी और अदूरदर्शिता के कारण..... हम हिन्दुओं के विनाश का कारण बन गयी...!

जय महाकाल...!!!

नोट : यह लेख किसी भी समुदाय की भावना को आहत करने के लिए नहीं लिखा गया है.... बल्कि, यह लेख जात-पात और छुआ-छूत  जैसी कुरीतियों के विरुद्ध लिखी गयी है...!

लेख के साथ प्रयुक्त फोटो... महज लेख को समझाने के लिए डाला गया है... और, उसका उद्देश्य किसी भी समुदाय अथवा व्यक्ति या संगठन को अपमानित करना कदापि नहीं है...!!

मुस्लिम और उनके सरपरस्त सेक्यूलरों द्वारा अक्सर ही यह अफवाह उड़ाई जाती है कि…. हमारा हिन्दू धर्म….. पूर्व काल में ….वर्ण व्यवस्था एवं छुआ-छूत जैसी कुरीतियों से भरा पड़ा था … इसीलिए, बहुत से दलित हिन्दू … पहले बौद्ध और फिर इस्लाम की ओर आकर्षित हो गए….!

लेकिन… ऐसा कहने वालों के पास इस बात का जबाब नहीं होता है कि….. अगर ऐसा ही था…. तो,

हिन्दुओं के आराध्य भगवान राम ….. ब्राह्मण ना होकर एक क्षत्रिय थे…. और, भगवान कृष्ण भी यदुवंशी थे….. जिन्हे आज OBC में ही गिना जाता है…..

फिर अगर , उस समय के समाज मे छुआ-छूत मौजूद होते तो, ….. गैर-ब्राह्मणों को भगवान के रूप में मान्यता कैसे मिल गयी …???

सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि…. महर्षि व्यास, बाल्मीकि इत्यादि तो अति पिछड़े वर्ग के होते हुए भी …. ब्राह्मणों तक के लिए पूजनीय थे…

कहने का तात्पर्य है कि….. मुस्लिम और सेक्यूलरों द्वारा कहने जाने वाली कहानी में कहीं न कहीं कोई बड़ा झोल जरूर है… तभी वे तर्कसंगत जबाब नहीं दे पाते हैं…!

और वो झोल ये है कि…. हम हिन्दुओं में वर्ण व्यवस्था तो जरूर थी…. लेकिन, छुआ-छूत जैसी कुरीतियां नहीं थी….. क्योंकि, इसका कोई कारण ही नहीं था….!

जबकि .. इसके उलट …. अरब में …. इस्लाम का प्रादुर्भाव होने के उपरान्त…. वहां कबीलाई झगड़ा अपने चरम पर था…. और, एक कबीले के लोगों द्वारा ….. दूसरे कबीले के अनाज, पशु और औरत को लूट लाना आम बात थी….!

इसीलिए….. अरब में मुस्लिमों ने …. अपनी औरतों को दूसरे कबीले के लुटेरों से बचाने के लिए…. उन्हें घर में ही रखना शुरू कर दिया ….. और, उनके दैनिक कार्यों की व्यवस्था घर के अंदर ही कर दी…. जिसे बाद में परिवार के ही किसी “अन्य सदस्य द्वारा”… घर के बाहर फेंका अथवा फिंकवा दिया जाता था… (प्रारंभिक मेहतर प्रथा ).

कालांतर में… जब उन तुर्क मुस्लिम लुटेरों ने …. हमारे हिंदुस्तान पर आक्रमण किया तो… उन्होंने अपनी ये कुरीतियां अपने साथ हमारे हिंदुस्तान में ले आयीं …. और, वे हिंदुस्तान में अपने युद्धबंदियों ( जो कि हिन्दू थे ) से ये काम करवाने लगे ….!

उसके बाद …. जब हमारे हिंदुस्तान में मुगलों का शासन हो गया तो….. वे यहाँ के बहुसंख्यक हिन्दुओं को …. तलवार के जोर पर ….इस्लाम ग्रहण करने के लिए दबाव बनाने लगे … साथ ही उन्हें लोभ देने लगे….!

जिससे कायर हिन्दुओं की एक बड़ी संख्या …. मुस्लिम हो गयी….

परन्तु… जिन हिन्दुओं को अपनी आन प्यारी थी…. उन्होंने मुगलों की बात मानने से इंकार दिया … और, उन मुगलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया…!

मुगलों के साथ इस लड़ाई में ….. युद्ध हार जाने के बाद …. उन्हें अपमानित करने के लिए….. मुगलों ने उन सैनिकों और सेनापतियों को ….. अपने हरम में….. मैला उठाने के काम में लगा दिया …… जिसमे उस समय … युद्ध बंदियों की पत्नियों और बहन बेटियों को …. मुग़ल सुल्तान ….. जबरन अपनी रखैल बना कर रखा करते थे…!

चूँकि…. हमारे हिंदुस्तान में मुगलों का शासन काफी समय तक रह गया…. इसीलिए, कुछ समय बाद ये कुरीति …. राजमहल के बाहर भी फ़ैल गयी और…. अमीर लोग …. उन “”राजकीय दास”” से…… “पैसे के बदले ये सेवा”…. लेने लगे….!

और, चूँकि…… इस काम की शुरआत ही …..हिन्दू युद्धवीरों और जांबाजों को अपमानित करने के लिए किया गया था…. इसीलिए, उनकी बस्तियां और खाने-पीने का प्रबंध भी शहर से बाहर कर दिया गया ताकि, वे घबरा कर इस्लाम कबूल कर लें…!

परन्तु…. हम सभी को ….. अपने उन हिन्दू युद्धवीरों और जांबाजों के दृढ संकल्प के आगे नतमस्तक होना चाहिए कि…. उन्होंने सारे अपमान और दुःख को सहते हुए भी….. अपना धर्म नहीं छोड़ा और इस्लाम को दुत्कार दिया…!

उसके बाद… तरीके से ….. मुग़ल सल्तनत के कमजोर पड़ते ही…. हिन्दुओं को …. उन अपमान झेलते हिन्दू युद्धवीरों और जांबाजों को गले लेना चाहिए था और उन्हें हिन्दू धर्म के प्रति दी गयी इस बलिदान के लिए सम्मानित किया जाना चाहिए था….!

लेकिन… हम हिन्दुओं से एक बड़ी गलती फिर हो गयी….. और, हिन्दुओं ने उन्हें गले लगाने की जगह …. उसे वंशवादी कार्य बना दिया… और, अपने ही संगठित समाज में जहर का बीज बो दिया…. जिससे आगे चलकर … एकीकृत और मजबूत हिन्दू समाज …. छोटी-छोटी जातियों में विभक्त होकर …. आपस में ही लड़ने लगे …. जो आज भी जारी है…!

इस तरह…. अरबी मुस्लिमों की एक कुरीति ….. हम हिन्दुओं की बेवकूफी और अदूरदर्शिता के कारण….. हम हिन्दुओं के विनाश का कारण बन गयी…!

जय महाकाल…!!!

नोट : यह लेख किसी भी समुदाय की भावना को आहत करने के लिए नहीं लिखा गया है…. बल्कि, यह लेख जात-पात और छुआ-छूत जैसी कुरीतियों के विरुद्ध लिखी गयी है…!

लेख के साथ प्रयुक्त फोटो… महज लेख को समझाने के लिए डाला गया है… और, उसका उद्देश्य किसी भी समुदाय अथवा व्यक्ति या संगठन को अपमानित करना कदापि नहीं है…!!

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Rabindranath Tagore


This is from an interview of Rabindranath Tagore in “Times of India”, dated 18-4-1924 in the column, `Through Indian Eyes on the Post Khilafat Hindu Muslim Riots.
For details please refer:http://hindusamhati.blogspot.co.uk/2013/05/thought See More

 — withMita Bhatt and 5 others.

Photo: This is from an interview of Rabindranath Tagore in "Times of India", dated 18-4-1924 in the column, `Through Indian Eyes on the Post Khilafat Hindu Muslim Riots.
For details please refer:  http://hindusamhati.blogspot.co.uk/2013/05/thoughts-of-rabindranath-tagore-on.html
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Islamic Division of World Territories : "Dar-al-Harb" vs. "Dar-al-Islam"
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Dar-al-Harb : (Territory of War) is the name for the regions where Islam does not dominate, where Allah commandments are not observed, and therefore where continuing and intermittent strife(Jihad) is the norm, until the the accomplishment of Dar-al-Islam.

Dar-al-Islam (Territory of peace) is the name for those territories where Islam does dominate, where submission to Allah is observed all over the region, and where peace and tranquility reign. Here, the Quranic commandments are executed on everybody.
Link : http://atheism.about.com/od/islamicextremism/a/daralharb.htm
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India and Israel are a Dar-al-Harab territories, and are in continuous state of war according to Islamic theology.
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Subramanian Swamy
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जापान विश्व में एकमात्र ऐसा देश है जो, मुसलमानो को नागरिकत्व प्रदान नहीं करता


Ojasvi Hindustan
जापान ….. क्या आप जानते हैं ?

जापान विश्व में एकमात्र ऐसा देश है जो, मुसलमानो को नागरिकत्व प्रदान नहीं करता और उसके विरुध्द संयुक्त राष्ट्र संघ में कोई विशेष न्यायासन भी नहीं है। इस्लाम के प्रचार-प्रसार पर यहाँ पूर्णतः प्रतिबंध है। मदरसा भी नहीं है। धर्मांतरण किया नहीं जा सकता। मुसलमान धर्मांधता एवं कट्टरता
निर्माण करते है, ऐसा जपान सरकार का सैध्दांतिक आरोप है।इसलिए यहाँ मुसलमानों के संबंध में कठोरता पूर्वक सजगता रखी जाती है।

इस ही के कारण वहां की सरकार को निम्नलिखित फायदे हुए हो रहे :-

१) जापान में अभी तक किसी प्रकार के दंगे या आतंकी कृत्य हो नहीं पाया।
२) जापान में चार शतक पूर्व तक १० लक्ष मुसलमान थे,अब केवल पौने दो लक्ष शेष बचे है।राष्ट्रिय परिवार नियोजन तथा एक विवाह का नियम है।
३) जापान के मुसलमान केवल जापानी भाषा-लिपि का ही प्रयोग कर सकते है। जापानी भाषा में अनुवाद किया हुआ ही कुरान रख सकते है।
४) नमाज भी केवल जापानी में ही पढ़ सकते है।
५) जापान में केवल पांच मुस्लिम राष्ट्र के दूतावास है और उनके कर्मचारियों को भी जापानी भाषा में ही संवाद करना होता है।
६) जापान में धर्मांतरण प्रतिबंधित है। इसके आलावा लव जिहाद ,आतंकी जिहाद /देश का विभाजन होने जैसे के तो पैदा होने का सवाल ही नहीं l
७) ईसाई धर्मगुरू (पाद्री) भी यहाँ बेरोजगार है।गत ५० वर्ष में जापान निवासी ईसाईयो की जनसँख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई…
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