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लुटता रहा ‘आजाद हिन्द फौज’ का ख़जाना, देखते रहे नेहरू


लुटता रहा ‘आजाद हिन्द फौज’ का ख़जाना, देखते रहे नेहरू…, क्या देशद्रोही थे?

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नई दिल्ली। पिछले 67 सालों से प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की नेताजी सुभाष चन्द्र बोस से संबंधित जिन करतूतों और नापका कार्यों की फाईलों को काँग्रेस ने सरकार साउथ ब्लॉक में ऑफिशियल सीक्रेट के नाम पर दबा रखा था, उन फाईलों के बाहर आते ही नेहरू की छोटी मानसिकता की पोल परत दर परत खुलता जा रहा है।

नेताजी ने आजाद हिंद फौज के बैंक के लिए जो खजाना जुटाया था, जिसे उनके करीबियों ने नेहरू के ईशारे पर लूट लिया था। आश्चर्य इस बात की है कि इस पूरे मामले की जानकारी तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को थी, पर नेहरू सरकार आँखे मूंदे बैठी रही। यह खुलासा उन 37 फाइलों में से निकली है, जिसे लगातार सार्वजनिक करने की मांग उठती रही है। उसी में से एक फाइल से यह जानकारी सामने आई है।

RH-Nehru Netajiफाइल के मुताबिक नेताजी ने आजाद हिंद फौज को खड़ा करने के लिए आम लोगों से पैसे लेकर खजाना तैयार किया था। यह वह सोना था, जिसे भारत की मां-बहनों ने आजादी की लड़ाई के लिए नेताजी को दान में दिया था। नेताजी के निजी सहायक कुंदन सिंह के हवाले से बताया गया कि हिटलर ने भी स्टील के चार संदूकों में गहने भरकर नेताजी को गिफ्ट किया था।

उस खजाने में 65 किलो से ज्यादा सोना था। कुछ तो बताते हैं कि तकरीबन 100 किलो सोना नेताजी को दान में मिला था। नेताजी ने इस खजाने का बड़ा हिस्सा साईगान में आजाद हिंद फौज का बैंक बनाने के लिए रखा था। अब सीक्रेट फाइलों से यह पता चला है कि उस खजाने को जब लूटा जा रहा था, तब भारत की नेहरू सरकार चुपचाप देख रही थी अथवा उन्हीं के ईशारे पर यह सारा पाप किया जा रहा था।

दस्तावेज से यह बात भी सामने आई है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू को जापान सरकार ने बार-बार बताया कि नेताजी का खजाना उन्हीं के करीबी लूट रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नेहरू ने कोई कार्रवाई नहीं की। उलटे जिस शख्स पर खजाना लूटने का आरोप था, उसी की चिट्ठी संसद में पढ़ी गई, जिसमें उसने नेताजी की मौत की पुष्टि की थी। दस्तावेजों के मुताबिक नेताजी के करीबी ए. अय्यर और एम. रामामूर्ति ही खजाना लूटने के आरोपी हैं। जाहिर है उस खजाने की कीमत आज करोड़ों में होती।

दस्तावेजों के मुताबिक, तोक्यो में पहले भारतीय संपर्क मिशन के प्रमुख बेनेगल रामाराव ने भारत सरकार को बताया कि राममूर्ति ने नेताजी के पैसों और उनके कीमती सामान का गबन किया। इसके बाद मिशन प्रमुख बने के. के. चेत्तूर ने लिखा कि राममूर्ति और अय्यर का संबंध नेताजी के रहस्यमय ढंग से गायब खजाने से जरूर है। तोक्यों में भारतीय राजदूत ए. के. डार ने 1955 में लिखा कि सरकार को इस बात की जांच करानी चाहिए कि इस खजाने को चुराने वाले कौन हैं।

दस्तावेज बताते हैं कि इस दिशा में भारत सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। आलम यह है कि 65 किलो से ज्यादा सोने में से सिर्फ 11 किलो सोना ही भारत लौट सका। 1952 में चार पैकिटों में आजाद हिंद फौज का 11 किलो सोना वापस आ सका। यह ताइवान हादसे के बाद जमा किया गया था। जले हुए बैग में यह खजाना दिल्ली के नेशनल म्यूजियम में 62 साल से पड़ा है। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद इसे आजाद भारत में काँग्रेस सरकार का पहला महाघोटाला और देशद्रोह माना जा रहा है।

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यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण पोस्ट है इसे पढ़ने के बाद नेताजी पर कोई रहस्य आपके मन में नही रह जायेगा इसको पढ़े जरूर और पढ़ने से पहले शेयर अवश्य कर दे जिससे आपके सहयोग से इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ सके निवेदन हैं आप से


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यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण पोस्ट है इसे पढ़ने के बाद नेताजी पर कोई रहस्य आपके मन में नही रह जायेगा इसको पढ़े जरूर और पढ़ने से पहले शेयर अवश्य कर दे जिससे आपके सहयोग से इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ सके निवेदन हैं आप से

Aditi Gupta's photo.
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‪#‎नेताजी_पर_रहस्य‬

नेता जी सुभाषचंद्र बॉस की पर हम लोगो ने काफी कुछ पढ़ा है| बचपन मे पढ़ी इतिहास की किताबों मे नेता जी की कहानी को हम से हमेशा से दूर रखा गया था और कही उन के विषय मे कुछ लिखा हुआ था भी तो उस मे झूठ ही लिखा गया था|

नेता जी पर कुछ टॉप सीक्रेट फ़ाइल सार्वजनिक होने के बाद कहानी कुछ इस तरह हो गयी है कि कॉंग्रेस के भजन कीर्तन से क्रांति नही आ सकती और न इस से देश आज़ाद होगा इसलिए इस को समझते हुए नेता जी कॉंग्रेस से अलग हो गए थे और देश के युवाओ को ” तुम मुझे खून दो मैं तुम को आज़ादी दूंगा” का नारा दे कर नेता जी अंग्रेज़ो से युद्ध की तैयारी करने लगे थे, जिस के बाद नेता जी को अंग्रेज़ो ने उन के घर मे नज़रबंद कर दिये था| परंतु देश के लिए अपना सब कुछ समर्पित करने वाले नेता जी ने भेष बदल कर बंगाल से अफगानिस्तान के काबुल शहर मे रूस के दूतावास की मदद अफगानिस्तान छोड़ कर दिये थे| जिस के बाद नेता जी जर्मनी और जापान गए| जहां उन्होने हिटलर से मुलाक़ात की और उस से भारत के अंग्रेज़ो पर हमला करने की बात की और उस से हथियार और सेना मांगी| फिर बाद मे नेता जी ने रासबिहारी बोस जी की मदद से अंग्रेज़ो के लिए लड़ रहे भारतीय सैनिको मे देश के प्रति देशप्रेम जागा कर और आत्मसम्मान जागा कर “आजाद हिन्द फौज” बनाई|

जिस के बाद आजाद हिन्द फौज ने अँग्रेजी सेना पर हमला कर दिया था| जिस समय आजाद हिन्द फौज वर्मा के जगलों मे अँग्रेजी- भारतीय सेना से जंग कर रही थी उस समय कॉंग्रेस देश के लोगो का ध्यान नेता जी से हटा कर देश के युवको का जोश बर्बाद करने का काम कर रही थी|

आज़ाद हिन्द फौज उस समय कई मुसबितों का सामना कर रही थी –

1 – उस के पास राशन और हथियारो की कमी थी
2 – उस समय देश मे कभी भी बारिश नही होती थी परंतु जिस समय फौज ने अँग्रेजी सेना पर हमला की उस समय आजाद हिन्द फौज जंगल मे थी और उस समय बेमौसम बारिश होनी शुरू हो गयी जिस के कारण फौज बीमार होने लगी
3 – उस ही समय बंगाल मे अकाल पड़ रहा था

नेता जी एक रंगून मे एक सभा की जिस मे नेता जी की बात सुन कर लोगो ने नेता जी को अपने पैसे राशन लड़के आदि सब कुछ दे दिया | नेता जी के कुछ जासूस अंग्रेज़ो की छावनी मे जाते थे जहां से वह हथियार चुरा के भी लाते थे| उन के जासूसो पर अभी एक Documentary The EPIC Channel चैनल ने अपने सिरियल अद्रश्य मे दिखाया था| नेता जी के पास लोगो के दिये हुए पैसे थे, औरतों के जेवर-गहने यहाँ तक की मंगलसूत्र तक दान मे आए थे| आज़ाद हिन्द फौज के खजाने फौज के लिए काफी पैसे भी आए थे|

उस के बाद फौज ने एक लड़कियों की बटालियन भी बनाई जिस की कैप्टन डॉक्टर लक्ष्मी शहगल को बनाया गया था| फौज के काम की जानकारी आम जनता तक कॉंग्रेस नही आने दे रही थी और न ही अंग्रेस क्यूकि उन को डर था कि अगर आज़ाद हिन्द फौज के काम के विषय मे आम जनता को पता चल गया तो देश के लोग कॉंग्रेस के भजन कीर्तन को छोड़ कर फौज के साथ मिल कर अंग्रेज़ो को मर भागा देंगे| और कॉंग्रेस की ड्रामेबाजी लोग छोड़ देंगे क्यूकि वह सिर्फ देश के लोगो का समय बर्बाद कर रही थी|

आज़ाद हिन्द फौज ने भारत के कई हिस्से को अंग्रेज़ो से आज़ाद करवा दिया था| लेकिन तभी अमरीका ने हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम डाल दिये थे जिस के बाद जापान सेना ने आजाद हिन्द फौज की मदद करने से मना कर दिया|

जिस के बाद नेता जी ने अपनी सभी फौज को डिस्मिस कर दिया था| फौज के जवान को अंग्रेज़ो ने पकड़ लिया था| इस की खबर मिलते ही अलग-अलग देशो मे अंग्रेज़ो के लिए लड़ने वाले भारतीय सैनिक देश मे वापस आ गए थे और वह इंतज़ार कर रहे थे कि अब फौज के साथ क्या होगा ? अंग्रेज़ो को डर था कि अगर हम ने फौज के जवानो को फांसी दे दी तो हमारी फौज के भारतीय सैनिक और विदेशो से आए सैनिक और देश की जनता बगावत कर सकती है इसलिए उस ने किसी भी जवान को फांसी नही दी|

तभी खबर आई कि नेता जी का हवाईजहाज दुर्घटनाग्रस्त हो गया है जिस पर नेता जी के भाई ने बोला था कि ऐसा हो ही नही सकता उन को रूस की आर्मी ने पकड़ा दिया है और बाद मे नेहरू के कहने पर उन को जहर दे कर मर दिया गया

अब इस बात की पुष्टि इसलिए भी होती है कि हाल ही मे आई रिपोर्ट के अनुसार नेता जी की जासूसी आज़ादी के बाद तक नेहरू ने कारवाई थी और अभी फिर एक रिपोर्ट आई है कि आज़ाद हिन्द फौज के खजाने को भी नेहरू ने लूटने दिया था

मैं सिर्फ इतना कहना चाहती हूँ कि हमारे बच्चे अपनी किताबों मे अब सच पढे, हमारी तरह झूठ नही जय हिन्द
वंदे मातरम

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Source –
http://swarajyamag.com/…/vilifying-netaji-to-shield-pandit…/

http://www.business-standard.com/…/the-inheritors-115042400…

http://epaper.panchjanya.com/epaper.aspx…

http://www.dailyo.in/…/subhas-chandra-bos…/story/1/3443.html

http://www.dailyo.in/…/subhas-chandra-bos…/story/1/3443.html

http://timesofindia.indiatimes.com/…/articlesh…/46952078.cms

http://timesofindia.indiatimes.com/…/articlesh…/46964624.cms

http://timesofindia.indiatimes.com/…/articlesh…/46964624.cms

http://www.bbc.co.uk/…/multimedia/2015/04/150417_sc_bose_vi…

http://timesofindia.indiatimes.com/…/articlesh…/46963385.cms

http://www.dailypioneer.com/…/declassify-netaji-files-and-d…

http://www.mumbaimirror.com/…/Not-…/articleshow/46973567.cms

http://www.mumbaimirror.com/…/Not-…/articleshow/46973567.cms

http://swarajyamag.com/politi…/ib-spied-on-ina-veterans-too/

http://www.bbc.co.uk/…/150418_subhash_chandra_bose_controve…

http://blogs.timesofindia.indiatimes.com/…/of-netaji-nehru…/

http://www.newsx.com/opin…/truth-about-bose-must-be-revealed

http://www.sunday-guardian.com/…/pressure-was-put-on-netaji…

http://www.telegraphindia.com/115…/…/nation/story_14871.jsp…

http://www.gandhiashramsevagram.org/…/gandhi-letter-to-ever…

http://blogs.timesofindia.indiatimes.com/…/mystery-lives-o…/

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सुभाषचंद्र बोस से जुडी 39 फाईलों


#Disagree 

सुभाषचंद्र बोस से जुडी 39 फाईलों को सार्वजनिक नहीं करने का "मोदी सरकार" का निर्णय मुझे कतई नापसन्द है... उन फाईलों में चाहे जो और चाहे जैसी जानकारियाँ हों उन्हें सार्वजनिक करने से कोई भूचाल नहीं आ जाएगा... और यदि कोई ज्वालामुखी भी फट भी जाए तो मुझे नहीं लगता कि भाजपा उसकी चपेट में आएगी... फिर उन रहस्यों को उजागर करने में क्या दिक्कत है??

क्या कोई अंतरराष्ट्रीय झमेला भी उसमें जुड़ा हुआ है? अर्थात क्या उन फाईलों के सार्वजनिक होने से भारत के जापान-सिंगापुर-रूस आदि देशों से सम्बन्ध खराब होने का खतरा है?? जब अंग्रेज लोग अपने देश में तीस वर्षों के बाद सारे दस्तावेज सार्वजनिक कर देते हैं, तो उनके "गुलाम" रहे हम भी वैसा ही क्यों नहीं करते?? इतने साल पुरानी कोई जानकारी उजागर होने से विदेश सम्बन्ध खतरे में क्यों और कैसे पड़ेंगे?? इतने सालों में तो लगभग सभी सम्बन्धित देशों में सरकारें बदल चुकीं, जनता की दो-तीन पीढियाँ बदल चुकीं, मानसिकता बदल चुकी... फिर इन फाईलों को सार्वजनिक करने में क्या समस्या है?? Narendra Modi जी... Amit Shah जी और Rajnath Singh जी.. 

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सुप्रभात मित्रों... 
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‪#‎Disagree‬

सुभाषचंद्र बोस से जुडी 39 फाईलों को सार्वजनिक नहीं करने का “मोदी सरकार” का निर्णय मुझे कतई नापसन्द है… उन फाईलों में चाहे जो और चाहे जैसी जानकारियाँ हों उन्हें सार्वजनिक करने से कोई भूचाल नहीं आ जाएगा… और यदि कोई ज्वालामुखी भी फट भी जाए तो मुझे नहीं लगता कि भाजपा उसकी चपेट में आएगी… फिर उन रहस्यों को उजागर करने में क्या दिक्कत है??

क्या कोई अंतरराष्ट्रीय झमेला भी उसमें जुड़ा हुआ है? अर्थात क्या उन फाईलों के सार्वजनिक होने से भारत के जापान-सिंगापुर-रूस आदि देशों से सम्बन्ध खराब होने का खतरा है?? जब अंग्रेज लोग अपने देश में तीस वर्षों के बाद सारे दस्तावेज सार्वजनिक कर देते हैं, तो उनके “गुलाम” रहे हम भी वैसा ही क्यों नहीं करते?? इतने साल पुरानी कोई जानकारी उजागर होने से विदेश सम्बन्ध खतरे में क्यों और कैसे पड़ेंगे?? इतने सालों में तो लगभग सभी सम्बन्धित देशों में सरकारें बदल चुकीं, जनता की दो-तीन पीढियाँ बदल चुकीं, मानसिकता बदल चुकी… फिर इन फाईलों को सार्वजनिक करने में क्या समस्या है?? Narendra Modi जी… Amit Shah जी और Rajnath Singh जी..

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सुप्रभात मित्रों…