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शेयर करे मित्रो ताकि ये सच्चाई हर हिन्दुस्तानी जान सके …

दो घंटे युद्ध और चलता ! तो भारत की सेना ने लाहोर तक कब्जा कर लिया होता !!
लेकिन तभी पाकिस्तान को लगा कि जिस रफ्तार से भारत की सेना आगे बढ़ रही
हमारा तो पूरा अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा !

( भारत और पाकिस्तान के बीच १९६५ का युद्ध
भारत पाक युद्ध का भाग
तिथि – अगस्त – सितम्बर 23, 1965
स्थान -भारतीय उपमहाद्वीप
परिणाम-संयुक्त राष्ट्र के घोषनापत्र के द्वारा युद्धविराम .)

तभी पाकिस्तान ने अमेरिका से कहा कि वो किसी तरह से युद्ध रुकवा दे !!
अमेरिका जानता था कि शास्त्री जी इतनी जल्दी नहीं मानने वाले !! क्यूँ कि वो
पहले भी दो -तीन बार भारत को धमका चुका था !!

धमका कैसे चुका था ??

अमेरिका से गेहूं आता था भारत के लिए PL 48 स्कीम के अंडर ! ! PL मतलब
public law 48 ! जैसे भारत मे सविधान मे धराए होती है ऐसे अमेरिका मे PL
होता है ! तो बिलकुल लाल रंग का सड़ा हुआ गेंहू अमेरिका से भारत मे आता था !
और ये समझोता पंडित नेहरू ने किया था !!

जिस गेंहू को अमेरिका मे जानवर भी नहीं खाते थे उसे भारत के लोगो के लिए
आयात करवाया जाता था ! आपके घर मे कोई बुजुर्ग हो आप उनसे पूछ सकते हैं
कितना घटिया गेहूं होता था वो !!तो अमेरिका ने भारत को धमकी दी कि हम भारत को गेहूं देना बंद कर देंगे !
तो शास्त्री जी ने कहा हाँ कर दो ! फिर कुछ दिन बाद अमेरिका का ब्यान आया
कि अगर भारत को हमने गेंहू देना बंद कर दिया ! तो भारत के लोग भूखे मर जाएँगे !!

शास्त्री जी ने कहा हम बिना गेंहू के भूखे मारे या बहुत अधिक खा के मरे !
तुम्हें क्या तकलीफ है !???
हमे भूखे मारना पसंद होगा बेशर्ते तुम्हारे देश का सड़ा हुआ गेंहू खाके !! एक तो हम
पैसे भी पूरे दे ऊपर से सड़ा हुआ गेहूं खाये ! नहीं चाहीये तुम्हारा गेंहू !!

फिर शास्त्री ने दिल्ली मे एक रामलीला मैदान मे लाखो लोगो से निवेदन किया कि
एक तरफ पाकिस्तान से युद्ध चल रहा है ! ऐसे हालातो मे देश को पैसे कि बहुत जरूरत
पड़ती है ! सब लोग अपने फालतू खर्चे बंद करे ! ताकि वो domestic saving से देश
के काम आए ! या आप सीधे सेना के लिए दान दे ! और हर व्यति सप्ताह से एक दिन
सोमवार का वर्त जरूर रखे !!

तो शास्त्री जी के कहने पर देश के लाखो लोगो ने सोमवार को व्रत रखना शुरू कर दिया !
हुआ ये कि हमारे देश मे ही गेहु बढ्ने लगा ! और शास्त्री जी भी खुद सोमवार का व्रत
रखा रखते थे !!शास्त्री जी ने जो लोगो से कहा पहले उसका पालन खुद किया ! उनके घर मे बाई
आती थी !! जो साफ सफाई और कपड़े धोती थी ! तो शास्त्री जी उसको हटा दिया और
बोला ! देश हित के लिए मैं इतना खर्चा नहीं कर सकता ! मैं खुद ही घर कि सारी सफाई
करूंगा !क्यूंकि पत्नी ललिता देवी बीमार रहा करती थी !
और शास्त्री अपने कपड़े भी खुद धोते थे ! उनके पास सिर्फ दो जोड़ी धोती कुरता ही थी !!

उनके घर मे एक ट्यूटर भी आया करता था जो उनके बच्चो को अँग्रेजी पढ़ाया करता
था ! तो शास्त्री जी ने उसे भी हटा दिया ! तो उसने शास्त्री जी ने कहा कि आपका अँग्रेजी
मे फेल हो जाएगा ! तब शास्त्री जी ने कहा होने दो ! देश के हजारो बच्चे अँग्रेजी मे ही
फेल होते है तो इसी भी होने दो ! अगर अंग्रेज़ हिन्दी मे फेल हो सकते है तो भारतीय
अँग्रेजी मे फेल हो सकते हैं ! ये तो स्व्भविक है क्यूंकि अपनी भाषा ही नहीं है ये !!

एक दिन शास्त्री जी पत्नी ने कहा कि आपकी धोती फट गई है ! आप नहीं धोती ले
आईये ! शास्त्री जी ने कहा बेहतर होगा ! कि सोई धागा लेकर तुम इसको सिल दो !
मैं नई धोती लाने की कल्पना भी नहीं कर सकता ! मैंने सब कुछ छोड़ दिया है पगार
लेना भी बंद कर दिया है !! और जितना हो सके कम से कम खर्चे मे घर का खर्च चलाओ !!अंत मे शास्त्री जी युद्ध के बाद समझोता करने ताशकंद गए ! और फिर जिंदा कभी वापिस
नहीं लौट पाये !! पूरे देश को बताया गया की उनकी मृत्यु हो गई ! जब कि उनकी ह्त्या
कि गई थी !!

भारत मे शास्त्री जी जैसा सिर्फ एक मात्र प्रधानमंत्री हुआ ! जिसने अपना पूरा जीवन
आम आदमी की तरह व्तीत किया ! और पूरी ईमानदारी से देश के लिए अपना फर्ज
अदा किया !!
जिसने जय जवान और जय किसान का नारा दिया !!

क्यूंकि उनका मानना था देश के लिए अनाज पैदा करने वाला किसान और सीमा कि
रक्षा करने वाला जवान बहुत दोनों देश ले लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है !!

स्वदेशी की राह पर उन्होने देश को आगे बढ़ाया ! विदेशी कंपनियो को देश मे घुसने
नहीं दिया ! अमेरिका का सड़ा गेंहू बंद करवाया !!

ऐसा प्रधानमंत्री भारत को शायद ही कभी मिले ! अंत मे जब उनकी paas book
चेक की गई तो सिर्फ 365 रुपए 35 पैसे थे उनके बैंक आकौंट मे ! !

शायद आज कल्पना भी नहीं कर सकते ऐसा नेता भारत मे हुआ !!

मेरे आदर्श लालबहादुर शास्त्री ।।

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मियां नेहरू उर्फ़ मुबारक अली का गन्दा सच
…………यादों के झरोखे से………….
जब मियाँ नेहरू ने खरबपति डालमिया को मिट्टी में मिला दिया
देश के प्रथम प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप में अपने विरोधियों को निपटाने में माहिर था…..इतिहास इस बात का साक्षी है कि जिस व्यक्ति ने नेहरू के सामने सिर उठाया उसी को नेहरू ने मिट्टी में मिला दिया। देशवासी प्रथम राष्ट्रपति डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद और सुभाष बाबू के साथ उनके निर्मम व्यवहार के बारे में वाकिफ होंगे मगर इस बात को बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने अपनी जिद्द के कारण देश के उस समय के सबसे बड़े उद्योगपति सेठ रामकृष्ण डालमिया को बड़ी बेरहमी से मुकदमों में फंसाकर न केवल कई वर्षों तक जेल में सड़ा दिया बल्कि उन्हें कौड़ी-कौड़ी का मोहताज कर दिया।
जहां तक रामकृष्ण डालमिया का संबंध है वे राजस्थान के एक कस्बा चिड़ावा में एक गरीब घर में पैदा हुए थे और मामूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने मामा के पास कोलकाता चले गए थे। वहां पर बुलियन मार्केट में एक दलाल के रूप में उन्होंने अपने व्यापारिक जीवन का श्रीगणेश किया था। भाग्य ने डंटकर डालमिया का साथ दिया और कुछ ही वर्षों के बाद वे देश के सबसे बड़े उद्योगपति बन गए। उनका औद्योगिक साम्राज्य देशभर में फैला हुआ था जिसमें समाचारपत्र, बैंक, बीमा कम्पनियां, विमान सेवाएं, सीमेंट, वस्त्र उद्योग, खाद्य पदार्थ आदि सैंकड़ों उद्योग शामिल थे।
डालमिया सेठ के दोस्ताना रिश्ते देश के सभी बड़े-बड़े नेताओं से थी और वे उनकी खुले हाथ से आर्थिक सहायता किया करते थे। पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना उनके व्यक्तिगत और गहरे मित्रों में थे। पाकिस्तान के निर्माण के बाद सेठ डालमिया ने जिन्ना के नई दिल्ली स्थित बंगले को दस लाख रूपये में खरीदा था जो उस वक्त एक बड़ी रकम मानी जाती थी। जिन्ना के साथ डालमिया की दोस्ती नेहरू को फूटी आंख नहीं भाती थी। इसके बाद एक घटना ने नेहरू को डालमिया का जानी दुश्मन बना दिया। कहा जाता है कि डालमिया एक कट्टर सनातनी हिन्दू थे और उनके विख्यात हिन्दू संत स्वामी करपात्री जी महाराज से घनिष्ट संबंध थे। कृपात्री जी महाराज ने 1948 में एक राजनीतिक पार्टी राम राज्य परिषद स्थापित की थी। 1952 के चुनाव में यह पार्टी लोकसभा में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी और उसने 18 सीटों पर विजय प्राप्त की। हिन्दू कोड बिल और गोवध पर प्रतिबंध लगाने के प्रश्न पर डालमिया से नेहरू की ठन गई। पंडित नेहरू अपनी पुत्री इंदिरा गांधी को उनके पति फिरोज गांधी से तलाक दिलाने के लिए हिन्दू कोड बिल पारित करवाना चाहते थे जबकि स्वामी करपात्री जी महाराज और डालमिया सेठ इसके खिलाफ थे। हिन्दू कोड बिल और गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने के लिए स्वामी करपात्रीजी महाराज ने देशव्यापी आंदोलन चलाया जिसे डालमिया जी ने डंटकर आर्थिक सहायता दी। नेहरू के दबाव पर लोकसभा में हिन्दू कोड बिल पारित हुआ जिसमें हिन्दू महिलाओं के लिए तलाक की व्यवस्था की गई थी। कहा जाता है कि देश के प्रथम राष्ट्रपति डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद हिन्दू कोड बिल के सख्त खिलाफ थे इसलिए उन्होंने इसे स्वीकृति देने से इनकार कर दिया। जिद्दी मियां नेहरू ने इसे अपना अपमान समझा और इस विद्येयक को संसद के दोनों सदनों से पुनः पारित करवाकर राष्ट्रपति के पास भिजवाया। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार राष्ट्रपति को इसकी स्वीकृति देनी पड़ी।
इस घटना ने नेहरू को डालमिया का जानी दुश्मन बना दिया। कहा जाता है कि नेहरू ने अपने विरोधी सेठ राम कृष्ण डालमिया को निपटाने की एक योजना बनाई। नेहरू के इशारे पर डालमिया के खिलाफ कंपनियों में घोटाले के आरोपों को लोकसभा में जोरदार ढंग से उछाला गया। इन आरोपों के जांच के लिए एक विविन आयोग बना। बाद में यह मामला स्पेशल पुलिस इस्टैब्लिसमेंट को जांच के लिए सौंप दिया गया। नेहरू ने अपनी पूरी सरकार को डालमिया के खिलाफ लगा दिया। उन्हें हर सरकारी विभाग में प्रधानमंत्री के इशारे पर परेशान और प्रताड़ित करना शुरू किया। उन्हें अनेक बेबुनियाद मामलों में फंसाया गया। नेहरू की कोप दृष्टि ने एक लाख करोड़ के मालिक डालमिया को दिवालिया बनाकर रख दिया। उन्हें टाइम्स आॅफ इंडिया और अनेक उद्योगों को औने-पौने दामों पर बेंचना पड़ा। अदालत में मुकदमा चला और डालमिया को तीन साल कैद की सजा सुनाई गई। तबाह हाल और अपने समय के सबसे धनवान व्यक्ति डालमिया को मियां नेहरू की वक्र दृष्टि के कारण जीवन के अन्तिम दिनों में जेल के कालकोठरी में ही गुजारनी पड़ी।
व्यक्तिगत जीवन में डालमिया बेहद धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। उन्होंने अच्छे दिनों में करोड़ों रुपये धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए दान में दिये। इसके अतिरिक्त उन्होंने यह संकल्प भी लिया था कि जबतक इस देश में गोवध पर कानूनन प्रतिबंध नहीं लगेगा वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे। उन्होंने इस संकल्प को अंतिम सांस तक निभाया। पुत्र रत्न को प्राप्त करने के लिए डालमिया ने अपने जीवन में छह विवाह किए मगर लाख अनुष्ठान करने के बावजूद वे पुत्र रत्न का मूंह न देख पाए। उनके घर केवल लड़कियां ही पैदा हुईं। नेहरू की कोप दृष्टि के कारण एक लाख करोड़ का मालिक अपने अन्तिम दिनों में कौड़ी-कौड़ी का मोहताज हो गया। उसकी सारी सम्पत्ति और सभी उद्योग बिक गए। गरीबी की हालत में 1978 में 85 वर्ष की आयु में उनका दिल्ली में निधन हो गया।

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जवाहर लाल नेहरु ने अपनी पत्नी के साथ जो किया वो इतना भयावह था की जान कर आप नेहरु से नफरत करने लगेंगे..

टीवी चैनेल पर कांग्रेस पार्टी के नेताओ के द्वारा अक्सर ये आरोप लगते हुए सुना जाता है की प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी पत्नी को छोड़ दिया.

लेकिन क्या आप को यह पता है जवाहर लाल नेहरु ने अपनी पत्नी के साथ क्या किया ?
जवाहरलाल नेहरु की पत्नी कमला नेहरु को टीबी हो गया था .. उस जमाने में टीबी की दहशत ठीक ऐसा ही थी जैसे आज एड्स की है .. क्योंकि तब टीबी का इलाज नही था और इन्सान तिल तिल तडप तडप कर पूरी तरह गलकर हड्डी का ढांचा बनकर मरता था … और कोई भी टीबी मरीज के पास भी नहीं जाता था क्योंकि टीबी सांस से फैलती थी … लोग मरीजोंको पहाड़ी इलाके में बने टीबी सेनिटोरियम में भर्ती कर देते थे ..

नेहरु ने अपनी पत्नी को युगोस्लाविया [आज चेक रिपब्लिक] के प्राग शहर में दुसरे इन्सान के साथ सेनिटोरियम में भर्ती कर दिया ..

कमला नेहरु पुरे दस सालो तक अकेले टीबी सेनिटोरियम में पल पल मौत का इंतजार करती रही.. लेकिन नेहरु दिल्ली में एडविना बेंटन के साथ इश्क करते थे.. सबसे शर्मनाक बात तो ये है की इस दौरान नेहरु कई बार ब्रिटेन गये लेकिन एक बार भी उन्होंने प्राग जाकर अपनी धर्मपत्नी का हालचाल नही लिया .

नेताजी सुभाषचन्द्र बोस को जब पता चला तब वो प्राग गये .. और डाक्टरों से और अच्छे इलाज के बारे में बातचीत की .. प्राग के डाक्टरों ने बोला की स्विट्जरलैंड के बुसान शहर में एक आधुनिक टीबी होस्पिटल है जहाँ इनका अच्छा इलाज हो सकता है..

तुरंत ही नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने उस जमाने में 70 हजार रूपये इकट्ठे किये और उन्हें विमान से स्विटजरलैंड के बुसान शहर में होस्पिटल में भर्ती किया ..

लेकिन कमला नेहरु असल में मन से बेहद टूट चुकी थी.. उन्हें इस बात का दुःख था की उनका पति उनके पास पिछले दस सालो से हाल चाल लेने तक नही आया और गैर लोग उनकी देखभाल कर रहे है..दो महीनों तक बुसान में भर्ती रहने के बाद 28 February 1936 को बुसान में ही कमला नेहरु की मौत हो गयी..

उनके मौत के दस दिन पहले ही नेताजी सुभाषचन्द्र ने नेहरु को तार भेजकर तुरंत बुसान आने को कहा था .. लेकिन नेहरु नही आये..फिर नेहरु को उनकी पत्नी की मौत की खबर भेजी गयी .. फिर भी नेहरु अपनी पत्नी के अंतिम संस्कार में भी नही आये ..

अंत में स्विटजरलैंड के बुसान शहर में ही नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने नेहरु की पत्नी कमला नेहरु का अंतिम संस्कार करवाया. जिस व्यक्ति ने अपनी पत्नी के साथ ऐसा व्यवहार किया उसे हम चाचा नेहरू कहते हैं।
यह मेसेज इतना फैलाओ की लोग असलियत को जाने और इनकी फर्जी चाचा की पदवी निकाल ली जाये।।।

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अपना अमूल्य समय देकर इस पोस्ट का अवश्य पाठन करें, डॉ होमी भामा, जो भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक भी कहे जाते है — પ્રહલાદ પ્રજાપતિ


‎Santosh Kumar Hande‎ to I SUPPORT .P. M. MODI (BJP) 2019 अपना अमूल्य समय देकर इस पोस्ट का अवश्य पाठन करें, डॉ होमी भामा, जो भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक भी कहे जाते है डॉक्टर भाभा ने युद्ध से बहुत पहले ही ये बता दिया था कि, मैंने वो टेक्नॉलॉजी खोज ली है जो मेरे देश […]

via अपना अमूल्य समय देकर इस पोस्ट का अवश्य पाठन करें, डॉ होमी भामा, जो भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक भी कहे जाते है — પ્રહલાદ પ્રજાપતિ

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यही गौ हत्या के चलते इंदिरा गांधी ने लाखों संतो के ऊपर दिल्ली में गोलियां चार्ज करवाई थी


यही गौ हत्या के चलते इंदिरा गांधी ने लाखों संतो के ऊपर दिल्ली में गोलियां चार्ज करवाई थी वो दिन था गोपाष्टमी उसी के चलते उसे एक महान संत कृपात्रि जी महाराज ने उसी दिन सराफ दिया था दिल्ली में और बोला था जा तूने गोपाष्टमी के दिन में ही संतो को मारी है उसी दिन तेरा बिनास होगा तो सच में हो भी गया तो इंद्रा मरी दिल्ली में दिन था गोपाष्टमी राजीव मरे मद्रास में दिन था गोपाष्टमी संजय मरे आकाश में दिन था वह भी गोपाष्टमी आप सोचो किसी ने कभी यह बातें बताई भारत बचाओ आंदोलन

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चंद्रशेखर आज़ाद की मौत ( असली राज )

मित्रों, चंद्रशेखर आज़ाद की मौत से जुडी फ़ाइल आज भी लखनऊ के सीआइडी ऑफिस १- गोखले मार्ग मे रखी है .. उस फ़ाइल को नेहरु ने सार्वजनिक करने से मना कर दिया .. इतना ही नही नेहरु ने यूपी के प्रथम मुख्यमंत्री गोविन्द बल्लभ पन्त को उस फ़ाइल को नष्ट करने का आदेश दिया था .. लेकिन चूँकि पन्त जी खुद

एक महान क्रांतिकारी रहे थे इसलिए उन्होंने नेहरु को झूठी सुचना दी की उस फ़ाइल

को नष्ट कर दिया गया है ..

क्या है

उस फ़ाइल मे ?

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उस फ़ाइल मे इलाहबाद के तत्कालीन पुलिस सुपरिटेंडेंट मिस्टर नॉट वावर के बयान दर्ज है जिसने अगुवाई मे ही पुलिस ने अल्फ्रेड पार्क मे बैठे आजाद को घेर लिया था और एक भीषण गोलीबारी के बाद आज़ाद शहीद हुए |

नॉट वावर ने अपने बयान मे कहा है कि ” मै खाना खा रहा था तभी नेहरु का एक संदेशवाहक आया उसने कहा कि नेहरु जी ने एक संदेश दिया है कि आपका शिकार अल्फ्रेड पार्क मे है और तीन बजे तक रहेगा .. मै कुछ समझा नही फिर मैं तुरंत आनंद भवन भागा और नेहरु ने बताया कि अभी आज़ाद अपने साथियो के साथ आया था वो रूस भागने के लिए बारह सौ रूपये मांग रहा था मैंने उसे अल्फ्रेड पार्क मे बैठने को कहा है ”

फिर मै बिना देरी किये पुलिस बल लेकर अल्फ्रेड पार्क को चारो ओर घेर लिया और आजाद को आत्मसमर्पण करने को कहा लेकिन उसने अपना माउजर निकालकर हमारे एक इंस्पेक्टर को मार दिया फिर मैंने भी गोली चलाने का हुकम दिया .. पांच गोली से आजाद ने हमारे पांच लोगो को मारा फिर छठी गोली अपने कनपटी पर मार दी |”

आजाद नेहरु से मिलने क्यों गए थे ?

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इसके दो कारण है

१- भगत सिंह की फांसी की सजा माफ़ करवाना

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महान क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आजाद जिनके नाम से ही अंग्रेज अफसरों की पेंट गीली हो जाती थी, उन्हें मरवाने में किसका हाथ था ? 27 फरवरी 1931 को क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आजाद की मौत हुयी थी । इस दिन सुबह आजाद नेहरु से आनंद भवन में उनसे भगत सिंह की फांसी की सजा को उम्र केद में बदलवाने के लिए मिलने गये थे, क्यों की वायसराय लार्ड इरविन से नेहरु के अच्छे ”सम्बन्ध” थे, पर नेहरु ने आजाद की बात नही मानी,दोनों में आपस में तीखी बहस हुयी, और नेहरु ने तुरंत आजाद को आनंद भवन से निकल जाने को कहा । आनंद भवन से निकल कर आजाद सीधे अपनी साइकिल से अल्फ्रेड पार्क गये । इसी पार्क में नाट बाबर के साथ मुठभेड़ में वो शहीद हुए थे ।अब आप अंदाजा लगा लीजिये की उनकी मुखबरी किसने की ? आजाद के लाहोर में होने की जानकारी सिर्फ नेहरु को थी । अंग्रेजो को उनके बारे में जानकारी किसने दी ? जिसे अंग्रेज शासन इतने सालो तक पकड़ नही सका,तलाश नही सका था, उसे अंग्रेजो ने 40 मिनट में तलाश कर, अल्फ्रेड पार्क में घेर लिया । वो भी पूरी पुलिस फ़ोर्स और तेयारी के साथ ?

अब आप ही सोच ले की गद्दार कोन हें ?

२- लड़ाई को आगे जारी रखने के लिए रूस जाकर स्टालिन की मदद लेने की योजना

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मित्रों, आज़ाद पहले कानपूर गणेश शंकर विद्यार्थी जी के पास गए फिर वहाँ तय हुआ की स्टालिन की मदद ली जाये क्योकि स्टालिन ने खुद ही आजाद को रूस बुलाया था . सभी साथियो को रूस जाने के लिए बारह सौ रूपये की जरूरत थी .जो उनके पास नही था इसलिए आजाद ने प्रस्ताव रखा कि क्यों न नेहरु से पैसे माँगा जाये .लेकिन इस प्रस्ताव का सभी ने विरोध किया और कहा कि नेहरु तो अंग्रेजो का दलाल है लेकिन आजाद ने कहा कुछ भी हो आखिर उसके सीने मे भी तो एक भारतीय दिल है वो मना नही करेगा |

फिर आज़ाद अकेले ही कानपूर से इलाहबाद रवाना हो गए और आनंद भवन गए उनको सामने देखकर नेहरु चौक उठा |

आजाद ने उसे बताया कि हम सब स्टालिन के पास रूस जाना चाहते है क्योकि उन्होंने हमे बुलाया है और मदद करने का प्रस्ताव भेजा है .पहले तो नेहरु काफी गुस्सा हुआ फिर तुरंत ही मान गया और कहा कि तुम अल्फ्रेड पार्क बैठो मेरा आदमी तीन बजे तुम्हे वहाँ ही पैसे दे देगा |

मित्रों, फिर आपलोग सोचो कि कौन वो गद्दार है जिसने आज़ाद की मुखबिरी की थी ?

चंदन दुबे

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क्या है सोनिया गाँधी का सच?


क्या है सोनिया गाँधी का सच? कैसे अपने फायदे के लिए सोनिया ने बेटी प्रियंका की शादी रोबर्ट वाड्रा से कराई? सच आपको हिला देगा…

रॉबर्ट और प्रियंका की शादी सन 1997 में हुई थी .लेकिन अगर कोई रॉबर्ट को ध्यान से देखे तो यह बात सोचेगा कि सोनिया ने रॉबर्ट जैसे कुरूप और साधारण व्यक्ति से प्रियंका की शादी कैसे करवा दी? क्या उसे प्रियंका के लिए कोई उपयुक्त वर नहीं मिला ? और यह शादी जल्दी में और चुप चाप क्यों की गयी??? वास्तव में सोनिया ने रॉबर्ट से प्रियंका की शादी अपनी पोल खुलने के डर से की थी. क्योंकि जिस समय # सोनिया इंगलैंड में एक कैंटीन में # बार गर्ल थी . उसी समय उसी जगह रोबट की माँ # मौरीन(Maureen) भी यही काम करती थी. मौरीन को # सोनिया_और_माधव_ राव_सिंधिया की रास लीला की बात पता थी.

मौरीन यह भी जानती थी कि किन किन लोगों के साथ सोनिया के अवैध सम्बन्ध थे .

जब सोनिया राजीव से शादी करके दिल्ली आ गयी , तो कुछ समय बाद मौरीन भी दिल्ली में बस गयी . मौरीन जानती थी कि सोनिया सत्ता के लिए कुछ भी कर सकती है, क्योंकि जो भी व्यक्ति उसके खतरा बन सकता था सोनिया ने उसका पत्ता साफ कर दिया. जैसे संजय, माधव राव, पायलेट जितेन्द्र प्रसाद. यहाँ तक लोगों को यह भी शक है कि राजीव की हत्या में सोनिया का भी हाथ है , वर्ना वह अपने पति के हत्यारों को माफ़ क्यों कर देती?

चूँकि मौरीन का पति और रॉबर्ट का पिता राजेंदर वडरा पुराना जनसंघी था , और सोनिया को डर था कि अगर अपने पति के दवाब ने मौरीन अपना मुंह खोल देगी तो मुझे भारत पर हुकूमत करने और अपने # नालायकु_कुपुत्र _राहुलको प्रधानमंत्री बनाने में सफलता नहीं मिलेगी . इसीलिए # सोनिया ने मौरीन के लडके रॉबर्ट की शादी प्रियंका से करवा दी.

रोबर्ट वाड्रा ने भारत के सबसे बड़े राजनीतिज्ञ खानदान में शादी की क्या कीमत चुकाई और क्या इनाम पाए???  कैसे एक एक करके रोबर्ट के सभी जान पहचान वाले मरते चले गए???

………शादी के बाद-की कहानी -……….

राजेंद्र वडरा के दो पुत्र , रिचार्ड और रॉबर्ट

और एक पुत्री मिशेल थे . और प्रियंका की शादी के बाद सभी एक एक कर मर गए

या मार दिएगए . जैसे , # मिशेल( Michelle ) सन 2001 में # कार_दुर्घटनामें मारी गयी , # रिचार्ड( Richard ) ने सन 2003 में # आत्महत्या कर ली . और प्रियंका के # ससुर सन 2009 में एक # मोटेल में मरे हुए पाए गए थे . लेकिन इनकी मौत के कारणों की कोई जाँच नहीं कराई गयी|

और इसके बाद सोनिया ने रॉबर्ट को राष्ट्रपति और प्रधान मंत्री के बराबर का दर्जा SPG इनाम के तौर पर दे दिया .

इस रॉबर्ट को कोई पडोसी भी नहीं जानता था , उसने मात्र तीन वर्षो में करोड़ों की संपत्ति कैसे बना ली और कई कंपनियों का मालिक बन गया, साथ ही सैकड़ों एकड़ कीमती जमीनें भी हथिया ली.

अमिताभ दिक्सित