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झाड़ू में धन की देवी महालक्ष्मी का वास !!!!!!

पौराणिक शास्त्रों में कहा गया है कि जिस घर में झाड़ू का अपमान होता है वहां धन हानि होती है, क्योंकि झाड़ू में धन की देवी महालक्ष्मी का वास माना गया है।

विद्वानों के अनुसार झाड़ू पर पैर लगने से महालक्ष्मी का अनादर होता है। झाड़ू घर का कचरा बाहर करती है और कचरे को दरिद्रता का प्रतीक माना जाता है। जिस घर में पूरी साफ-सफाई रहती है वहां धन, संपत्ति और सुख-शांति रहती है। इसके विपरित जहां गंदगी रहती है वहां दरिद्रता का वास होता है।

ऐसे घरों में रहने वाले सभी सदस्यों को कई प्रकार की आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी कारण घर को पूरी तरह साफ रखने पर जोर दिया जाता है ताकि घर की दरिद्रता दूर हो सके और महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त हो सके। घर से दरिद्रता रूपी कचरे को दूर करके झाड़ू यानि महालक्ष्मी हमें धन-धान्य, सुख-संपत्ति प्रदान करती है।

वास्तु विज्ञान के अनुसार झाड़ू सिर्फ घर की गंदगी को दूर नहीं करती है बल्कि दरिद्रता को भी घर से बाहर निकालकर घर में सुख समृद्घि लाती है। झाड़ू का महत्व इससे भी समझा जा सकता है कि रोगों को दूर करने वाली शीतला माता अपने एक हाथ में झाड़ू धारण करती हैं।

यदि भुलवश झाड़ू को पैर लग जाए तो महालक्ष्मी से क्षमा की प्रार्थना कर लेना चाहिए।जब घर में झाड़ू का इस्तेमाल न हो, तब उसे नजरों के सामने से हटाकर रखना चाहिए।
ऐसे ही झाड़ू के कुछ सतर्कता के नुस्खे अपनाये गये उनमें से आप सभी मित्रों के समक्ष हैं जैसे :-

शाम के समय सूर्यास्त के बाद झाड़ू नहीं लगाना चाहिए इससे आर्थिक परेशानी आती है।

झाड़ू को कभी भी खड़ा नहीं रखना चाहिए, इससे कलह होता है।

आपके अच्छे दिन कभी भी खत्म न हो, इसके लिए हमें चाहिए कि हम गलती से भी कभी झाड़ू को पैर नहीं लगाए या लात ना लगने दें, अगर ऐसा होता है तो मां लक्ष्मी रुष्ठ होकर हमारे घर से चली जाती है।

झाड़ू हमेशा साफ रखें ,गिला न छोडे ।

ज्यादा पुरानी झाड़ू को घर में न रखें।

झाड़ू को कभी घर के बाहर बिखराकर ना फेके और इसको जलाना भी नहीं चाहिए।

झाड़ू को कभी भी घर से बाहर अथवा छत पर नहीं रखना चाहिए। ऐसा करना अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि ऐसा करने से घर में चोरी की वारदात होने का भय उत्पन्न होता है। झाड़ू को हमेशा छिपाकर रखना चाहिए। ऐसी जगह पर रखना चाहिए जहां से झाड़ू हमें, घर या बाहर के किसी भी सदस्यों को दिखाई नहीं दें।

गौ माता या अन्य किसी भी जानवर को झाड़ू से मारकर कभी भी नहीं भगाना चाहिए।

घर-परिवार के सदस्य अगर किसी खास कार्य से घर से बाहर निकले हो तो उनके जाने के उपरांत तुरंत झाड़ू नहीं लगाना चाहिए। यह बहुत बड़ा अपशकुन माना जाता है। ऐसा करने से बाहर गए व्यक्ति को अपने कार्य में असफलता का मुंह देखना पड़ सकता है।

शनिवार को पुरानी झाड़ू बदल देना चाहिए।

सपने मे झाड़ू देखने का मतलब है नुकसान।

*घर के मुख्य दरवाजा के पीछे एक छोटी झाड़ू टांगकर रखना चाहिए। इससे घर में लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

पूजा घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्वी कोने में झाडू व कूड़ेदान आदि नहीं रखना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और घर में बरकत नहीं रहती है इसलिए वास्तु के अनुसार अगर संभव हो तो पूजा घर को साफ करने के लिए एक अलग से साफ कपड़े को रखें।

जो लोग किराये पर रहते हैं वह नया घर किराये पर लेते हैं अथवा अपना घर बनवाकर उसमें गृह प्रवेश करते हैं तब इस बात का ध्यान रखें कि आपका झाड़ू पुराने घर में न रह जाए। मान्यता है कि ऐसा होने पर लक्ष्मी पुराने घर में ही रह जाती है और नए घर में सुख-समृद्घि का विकास रूक जाता है।*

संजय गुप्ता

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देवराज इंद्र और महालक्ष्मी संवाद– जिसमे देवी लक्ष्मी ने बताए थे लक्ष्मी कृपा के कारण !!

महालक्ष्मी की कृपा पाने के लिए पूजन-पाठ के साथ ही कई और बातों का भी ध्यान रखना अनिवार्य है। यहां हम आपको आज महालक्ष्मी को प्रसन्न करने वाले खास उपाय बता रहे है जो की स्वयं लक्ष्मी ने देवराज इंद्र को बताए थे। महाभारत के शांति पर्व में देवराज इंद्र और महालक्ष्मी के संवाद दिए गए हैं। इन संवादों में बताया गया है कि कैसे काम करने वाले लोगों के घर लक्ष्मी निवास नहीं करती हैं। आज भी जिन घरों में इन बातों का ध्यान नहीं रखा जाता है, वहां दरिद्रता का वास होता है।

महाभारत में दिए गए प्रसंग के अनुसार एक समय जब देवी लक्ष्मी असुरों का साथ छोड़कर देवराज इंद्र के यहां निवास करने के लिए पहुंची थीं, तब इंद्र ने लक्ष्मी से पूछा था कि किन कारणों से आपने दैत्यों का साथ छोड़ दिया है? इस प्रश्न के जवाब में लक्ष्मी ने देवताओं के उत्थान तथा दानवों के पतन के कारण बताए थे।

लक्ष्मी ने बताया जो लोग व्रत-उपवास करते हैं। प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व बिस्तर का त्याग कर देते हैं, रात को सोते समय दही और सत्तू का सेवन नहीं करते हैं, सुबह-सुबह घी और पवित्र वस्तुओं का दर्शन किया करते हैं, दिन के समय कभी सोते नहीं हैं, इस सभी बातों का ध्यान रखने वाले लोगों के यहां लक्ष्मी सदैव निवास करती हैं। पूर्व काल में सभी दानव भी इन नियमों का पालन करते थे, इस कारण मैं उनके यहां निवास कर रही थी। अब सभी दानव अधर्मी हो गए हैं, इस कारण मैंने उनका त्याग कर दिया है।

इंद्र ने देवी लक्ष्मी से असुरों पर कृपा न करने का कारण पूछा।

महालक्ष्मी ने इंद्र को बताया कि जो पुरुष दानशील, बुद्धिमान, भक्त, सत्यवादी होते हैं, उनके घर में मेरा वास होता है। जो लोग ऐसे कर्म नहीं करते हैं, मैं उनके यहां निवास नहीं करती हूं।

लक्ष्मी कहती हैं कि पूर्व काल में मैं असुरों के राज्य में निवास करती थीं, लेकिन अब वहां अधर्म बढ़ने लगा है। इस कारण मैं देवताओं के यहां निवास करने आई हूं।

इंद्र के पूछने पर महालक्ष्मी ने कहा कि जो लोग धर्म का आचरण नहीं करते हैं। जो लोग पितरों का तर्पण नहीं करते हैं। जो लोग दान-पुण्य नहीं करते हैं, उनके यहां मेरा निवास नहीं होता है।

पूर्व काल में दैत्य दान, अध्ययन और यज्ञ किया करते थे, लेकिन अब वे पाप कर्मों में लिप्त हो गए हैं। अत: मैं उनके यहां निवास नहीं कर सकती।

महाभारत में महालक्ष्मी ने बताया है कि जहां मूर्खों का आदर होता है, वहां उनका निवास नहीं होता। जिन घरों में स्त्रियां दुराचारिणी यानी बुरे चरित्र वाली हो जाती हैं, जहां स्त्रियां उचित ढंग से उठने-बैठने के नियम नहीं अपनाती हैं, जहां स्त्रियां साफ-सफाई नहीं रखती हैं, वहां लक्ष्मी का निवास नहीं होता है।

देवी लक्ष्मी ने बताया कि वह स्वयं धनलक्ष्मी, भूति, श्री, श्रद्धा, मेधा, संनति, विजिति, स्थिति, धृति, सिद्धि, समृद्धि, स्वाहा, स्वधा, नियति तथा स्मृति हैं। धर्मशील पुरुषों के देश में, नगर में, घर में हमेशा निवास करती हैं।

लक्ष्मी उन्हीं लोगों पर कृपा बरसाती हैं जो युद्ध में पीठ दिखाकर नहीं भागते हैं। शत्रुओं को बाहुबल से पराजित कर देते हैं। शूरवीर लोगों से लक्ष्मी सदैव प्रसन्न रहती हैं।

जिन घरों में खाना बनाते समय पवित्रता का ध्यान नहीं रखा जाता है, जहां जूठे हाथों से ही घी को छू लिया जाता है, वहां मैं निवास नहीं करती हूं।

लक्ष्मी ने बताया जिन घरों में बहु अपने सास-ससुर पर नौकरों के समान हुकुम चलाती है, उन्हें कष्ट देती हैं, अनादर करती है, मैं उन घरों का त्याग कर देती हूं।

जिस घर में पत्नी अपने पति को प्रताडि़त करती है, पति की आज्ञा का पालन नहीं करती है, पति के अतिरिक्त अन्य पुरुषों से अनैतिक संबंध रखती है, मैं उन घरों का त्याग कर देती हूं।

जो लोग अपने शुभ चिंतकों के नुकसान पर हंसते हैं, उनसे मन ही मन द्वेष भाव रखते हैं, किसी मित्र बनाकर उसका अहित करते हैं तो मैं उन लोगों पर कृपा नहीं बरसाती हूं। ऐसे लोग सदैव दरिद्र रहते हैं।

सुनील झा ‘मैथिल’

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सोमवार को करें चावल के ये उपाय, आर्थिक तंगी के साथ पितृदोष से मिलेगी मुक्ति

अधिक मेहनत करने के बाद भी व्यक्ति को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जेब या पर्स में अधिक समय तक पैसा नहीं टिकता। ज्योतिष शास्त्र में कुछ उपाय बताए गए हैं जो बहुत कारगर हैं। पूजा में हल्दी कुमकुम के साथ अक्षत का भी प्रयोग किया जाता है। पूजा में अक्षत न हो तो पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती। ज्योतिष में अक्षत के कुछ सरल उपाय बताएं गए हैं। जिन्हें अपनाने से भोलेनाथ की कृपा के साथ आर्थिक तंगी व हर तरह की परेशानियों से मुक्ति मिल जाएगी। इसके साथ ही पितृदोष भी दूर हो जाता हैं। जानिए, अक्षत के उपाय-

सोमवार के दिन भगवान शिव को चावल अर्पित करें। इस बात का ध्यान रखें चावल खंड़ित न हो। इससे भोलेनाथ की कृपा बनी रहती है।
आधा किलो चावल लेकर ऐसे शिवलिंग के पास जाएं जो एकांत में हों। वहां पर जाकर बैठे अौर भगवान शिव पर मुट्ठी चावल अर्पित करें। शेष बचे चावलों को किसी गरीब या जरूरतमंद को दान कर दें। यह उपाय पूर्णिमा के बाद आने वाले सोमवार को करें। ये उपाय लगातार पांच सोमवार तक करें। इससे आर्थिक तंगी से छुटकारा मिलेगा अौर घर में कभी भी पैसों का कमी नहीं होगी।

सोमवार के दिन दूध में शक्कर मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें। इससे तीव्र बुद्धि होगी।

नौकरी नहीं मिल रही या अॉफिस में परेशानी चल रही है तो मीठे चावल बनाकर कौवे को खिलाएं। इससे शीघ्र नौकरी मिलने के योग बनते हैं।
पितृदोष होने पर कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। किसी भी कार्य में सफलता नहीं मिलती। इन सब से मुक्ति हेतु चावल की खीर अौर रोटी कौवे को खिलाएं। इससे पितर खुश होकर अपना आशीर्वाद देंगे अौर रुके कार्य बनने लगेंगे।

संजय गुप्ता

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अगर आप में भी हैं ये लक्षण तो आप कभी अमीर नहीं बन सकते

हर शख्स अमीर बनने के लिए ही पैसा कमाता है, और पैसे कमाने के लिए नौकरी, बिजनेस करते हैं। कई खर्चे होते हैं, लेकिन इसके वाबजूद भी आप पैसे बचा लेते हैं क्योंकि आप अमीर बनना चाहते हैं। क्या ऐसा करने से आप अमीर बन जायेंगे। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। परिश्रम और बचत करके आप अमीर बनने का सपना बिल्कुल भी नहीं देख सकते हैं। इसके पीछे कई कारण हैं,ये हैं वो कारण…
इन 9 लक्षण के कारण लोग अमीर नहीं बन पाते हैं

1- हार्ड वर्क करते हैं स्मार्टवर्क नहीं

आमतौर पर लोगों का मानना है कि कठिन परिश्रम हमें जीवन में आगे ले जाता है। यह आधा हकीकत है। वित्तीय सलाहकार रिक मैडन का यही मानना है। कि अगर आप कठिन परिश्रम करते हैं, तो पैसे कमा तो सकते हैं, लेकिन बचा नहीं सकते। उनका कहना है कि अगर आप धनवान बनना चाहते हैं तो हार्डवर्क के साथ आपको स्मार्टवर्क भी करना पड़ेगा। उनका एक तरीका शेयर बाजार या रिटायरमेंड फंड में निवेश करना है।

2- कमाई बढ़ाने पर नहीं है ध्यान

लोग अक्सर बचन पर ज्यादा ध्यान देते हैं, लेकिन बचत के साथ-साथ आमदनी बढ़ाने पर भी ध्यान देना चाहिए जो अकसर हम नहीं करते हैं. पैसे जमा करन के लिए बचत पर ध्यान देना तो जरूर है ही, लेकिन अगर हम पूरा ध्यान बचत पर लगा दें तो कमाई पर से नजर हट जाएगी। धनवानों की आदत होती है कि वे कमाई के ज्यादा स्रोत पैदा कर लेते हैं और बेहद कुशलता से बचत की आदत भी डाल लेते हैं।

3- हैसियत से ज्यादा खरीदना

अगर आप अपनी हैसियत से ज्यादा चीजें खरीदेंगे तो धनवान कभी नहीं बन सकते हैं। अगर आपकी थोड़ी सी कमाई बढ़ भी जाए तो ज्यादा चीजें खरीदने की आदत न डालें।

4- समय पर वेतन मिलने से ही खुश हैं

ज्यादातर लोग समय पर वेतन मिलने का ज्यादा तवज्जों देते हैं। वहीं धनवान लोग का परिणाम आधारित पेमेंट पसंद करते हैं। ऐसे लोग खास अपने लिए ही काम करते हैं ऐसा नहीं है कि समय पर वेतन मिलने के तवज्जो नहीं देना चाहिए। भविष्य के अमीरों को पता होता है कि अमीरी का रास्त होता है स्वरोजगार। कुछ लोग बिजनेस तैयार कर अपार दौलत कमा रहे होते हैं तो वहीं दूसरी ओर कुछ लोग अच्छी खासी नौकरी कर चैंद की नींद लेते हैं।

5-निवेश नहीं कर रहे

अगर आपके पाप पर्याप्त पैसे तो इसे उचित निवेश किया जा सकता है। आप जितने जल्दी निवेश शुरु कर देंगे उतने जल्दी ही अमीरी की राह में पैर आगे बढ़ाएंगे। न्यूयार्क की एक रिपोर्ट की मानें तो अमीर लोग सालाना अपनी कमाई का 20 प्रतिशत निवेश करते हैं। किसी की संपत्ति का अंदाजा इस बात से नहीं लगाया जा सकता कि वो कितना कमाता है उसकी बचत कितनी है। निवेश के लिए आपको किसी की भी जरूरत नहीं है बस आप रिटायरमेंट फंड, पीएफ फंड से ही शुरुआत कर दें।

6- अपनी नहीं बल्कि दूसरे का सपना करने में जुटे हैं

अगर आप सफल होना चाहतो हैं और कुछ अलग करना चाहते हैं कई लोग अपने माता-पिता या किसी और का सपना पूरा करने में जुटे रहते हैं। हममें से कई यह भी सोचते हैं कि फलां काम करेंगे तो समाज क्या सोचेगा, मित्र क्या सोचेंगे। मशहूर पुस्तक ‘अपनी आदतें बदलो, अपना जीवन बदलो’ के लेखकर कहते हैं, ‘जब आप दूसरों की सपना पूरा करने में जुट जाते हैं तो आपको अपने काम से प्यार नहीं होता है, क्योंकि वह आपके पसंद का काम नहीं होता है। इसलिए, भारी मन से किए काम में आपका परफॉर्मेंस भी झलकेगा ही। इसका असर आपके करियर पर पड़ेगा और आप वित्तीय रूप से संघर्ष करते रहेंगे।’

7- आराम चाहते हैं

अगर आप धनवान बनना चाहते हैं तो जहां पर भी सफलता मिले उससे आगे बढ़ जाएं। दरअसल मध्यमवर्गीय मानसिकता का लक्ष्य शारीरिक, मानसिक, और भावनात्मक स्तर पर सुख चैन पाना ही है। दुनिया भर के विचारकों का मानना है कि अमीर बनना कोई आसान बात नहीं है औरत आराम किसी को भी बर्बाद कर सकता है। वहीं अमीरों ने इससे सीख ले ली है गुना गणित से लिया गया जोखिम सफलता का मार्ग प्रशस्त्र करता है।

8-पैसे का क्या करें, पता ही नहीं-

अगर आपके पास पैसे हैं तो पहले से फाइनेंशियल प्लानिंग स्पष्ट कर लें। इससे आपकी राह आसान हो जाती है। घर खरीदना चाहते हैं, विदेश में रहना चाहते हैं या फिर आराम की जिंदगी व्यतीत करना चाहते हैं तो इन सबको पहले से ही लिख लें। अमीर लोग संपत्ति जमा करने को लेकर प्रतिबद्ध होते हैं और वे अक्सर ही कुछ न कुछ इनवेस्टमेंट करते हैं। वहीं ज्यादातर लोगों को यहा पता नहीं होता है कि वे चाहते क्या हैं। अमीर लोगों को पता होता है कि वे क्या चाहते हैं इसलिए वे अमीर बनते हैंं।

9- जमकर खर्च करना, इसके बाद सेविंग्स

अगर आप अमीर होना चाहते हैं तो सबसे पहले खुद को पेमेंट करें। लेखक डेविड बैक का मानना है कि ‘ज्यादातर लोग पैसे मिलने पर दूसरों को देने लगते हैं। वो मकान मालिक,क्रेडिट कार्ड कंपनी, मोबाइल कंपनी को पेमेंट करते हैं।’ उनका कहना है कि सबको देकर कुछ नहीं बचता है। इसलिए, पहले अपने लिए बचाओ, फिर दूसरों को दो। ऐसे में जब हर महीने पैसे की तंगी महसूस होगी, तो आप आमदनी बढ़ाने पर खुद-ब-खुद जोर देने लगेंगे। इसलिए सबसे पहले इमर्जेंसी पेमेंट बनाएं फिर अपने आप ही पैसे ट्रांसफर होते रहते हैं।

संजय गुप्ता

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🌷! श्री महालक्ष्मी देवी नमोSस्तु ते !🌷
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“महालक्ष्मी को प्रसन्न करने की अचूक विधि और मंत्र”

धन, संपत्ति अर्थात पैसा वर्तमान में मनुष्य की सबसे बड़ी जरुरत है। पैसे से ही मनुष्य के जीवन की तमाम भौतिक जरुरतें पूरी होती हैं। धन, संपत्ती, समृद्धि का एक नाम लक्ष्मी भी है। लक्ष्मी जो कि भगवान विष्णु की पत्नी हैं। मान्यता है कि मां लक्ष्मी की कृपा से ही घर में धन, संपत्ती समृद्धि आती है।

जिस घर में मां लक्ष्मी का वास नहीं होता वहां दरिद्रता घर कर लेती है। इसलिये मां लक्ष्मी का प्रसन्न होना बहुत जरुरी माना जाता है और उन्हें प्रसन्न करने के लिये की जाती है मां लक्ष्मी की पूजा। आइये आपको बताते हैं कि क्या है लक्ष्मी पूजन की विधि और पूजा के लिये चाहिये कौन सी सामग्री?

कौन हैं लक्ष्मी :- देवी लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी कहा जाता है। सनातन धर्म के विष्णु पुराण में बताया गया है कि लक्ष्मी जी भृगु और ख्वाती की पुत्री हैं और स्वर्ग में यह वास करती थीं। समुद्रमंथन के समय लक्ष्मी जी की महिमा का व्याख्यान वेदों में बताया गया है। लक्ष्मी जी ने विष्णु जी को अपने पति के रुप में वरण किया जिससे इनकी शक्तियां और प्रबल हुई मानी जाती हैं। लक्ष्मी का अभिषेक दो हाथी करते हैं। वह कमल के आसन पर विराजमान हैं।

लक्ष्मी जी के पूजन में कमल का विशेष महत्त्व बताया गया है। क्योंकि यह फूल कोमलता का प्रतीक है इसलिए माँ लक्ष्मी जी की पूजा में इसका स्थान आता है। लक्ष्मी जी के चार हाथ बताये गये हैं। वे एक लक्ष्य और चार प्रकृतियों (दूरदर्शिता, दृढ़ संकल्प, श्रमशीलता एवं व्यवस्था शक्ति) के प्रतीक हैं और माँ लक्ष्मी जी सभी हाथों से अपने भक्तों पर आशीर्वाद की वर्षा करती हैं। इनका वाहन उल्लू को बताया गया है जो निर्भीकता का सूचक है।

माँ लक्ष्मी जी की मुख्य पूजा तो वैसे दिवाली पर की जाती है किन्तु लक्ष्मी पूजा निरंतर करना, और भी ज्यादा फलदायक माना जाता है।

लक्ष्मी पूजन के लिये सामग्री :- मां लक्ष्मी की पूजा के लिये सामग्री अपने सामर्थ्य के अनुसार जुटा सकते हैं। मां लक्ष्मी को जो वस्तुएं प्रिय हैं उनमें लाल, गुलाबी या फिर पीले रंग का रेशमी वस्त्र लिया जा सकता है। कमल और गुलाब के फूल भी मां को बहुत प्रिय हैं।

फल के रुप में श्री फल, सीताफल, बेर, अनार और सिंघाड़े भी मां को पसंद हैं। अनाज में चावल घर में बनी शुद्ध मिठाई, हलवा, शिरा का नैवेद्य उपयुक्त है। दिया जलाने के लिये गाय का घी, मूंगफली या तिल्ली का तेल इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा पूजन में रोली, कुमकुम, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, चौकी, कलश, मां लक्ष्मी व भगवान श्री गणेश जी की प्रतिमा या चित्र, आसन, थाली, चांदी का सिक्का, धूप, कपूर, अगरबत्तियां, दीपक, रुई, मौली, नारियल, शहद, दही गंगाजल, गुड़, धनियां, जौ, गेंहू, दुर्वा, चंदन, सिंदूर, सुगंध के लिये केवड़ा, गुलाब अथवा चंदन के इत्र ले सकते हैं।

पूजा की विधि :- सबसे पहले पूजा के जलपात्र से थोड़ा जल लेकर मूर्तियों के ऊपर छिड़कें इससे मूर्तियों का पवित्रकरण हो जायेगा, इसके पश्चात स्वयं को, पूजा सामग्री एवं अपने आसन को भी पवित्र करें। पवित्रीकरण के दौराण निम्न मंत्र का जाप करें-

ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि:।।

इसके बाद जिस जगह पर आसन बिछा है उस जगह को भी पवित्र करें और मां पृथ्वी को प्रणाम करें। इस प्रक्रिया में निम्न मंत्र का उच्चारण करें-

पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग ऋषिः सुतलं छन्दः कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥

ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।
त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्॥
पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः।।

अब पुष्प, चम्मच या अंजुलि से एक बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और ॐ केशवाय नमः मंत्र बोलिये इसके बाद फिर एक बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और ॐ नारायणाय नमः मंत्र का उच्चारण करें इसी तरह तीसरी बूंद मुंह में डालकर ॐ वासुदेवाय नमः मंत्र बोलें। फिर ॐ हृषिकेशाय नमः कहते हुए हाथों को खोलें, अंगूठे के मूल से होठों पोंछ कर हाथों को धो लें। इस प्रक्रिया को आचमन कहते हैं इससे विद्या, आत्म और बुद्धि तत्व का शोधन हो जाता है। तत्पश्चात तिलक लगाकर अंग न्यास करें। अब आप पूजा के लिये पूरी तरह पवित्र हैं।

इसके बाद मन को एकाग्र व प्रभु में ध्यान लगाने के लिये प्राणायाम करें या आंखें बंद कर मन को स्थिर कर तीन बार गहरी सांस लें। पूजा के आरंभ में स्वस्तिवाचन किया जाता है इसके लिये हाथ में पुष्प, अक्षत और जल लेकर स्वतिन: इंद्र आदि वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए ईश्वर को प्रणाम किया जाता है। किसी भी पूजा को करने में संकल्प प्रधान होता है इसलिये इसके बाद संकल्प करें।

संकल्प के लिये हाथ में अक्षत, पुष्प और जल लें साथ में कुछ द्रव्य यानि पैसे भी लें अब हाथ में लेकर संकल्प मंत्र का जाप करते हुए संकल्प किजिये कि मैं अमुक व्यक्ति, अमुक स्थान एवं समय एवं अमुक देवी-देवता की पूजा करने जा रहा हूं, जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हो।

संकल्प लेने के बाद भगवान श्री गणेश व मां गौरी की पूजा करें। इसके बाद कलश पूजें। हाथ में थोड़ा जल लेकर आह्वान व पूजन मंत्रों का उच्चारण करें फिर पूजा सामग्री चढ़ायें। फिर नवग्रहों की पूजा करें, इसके लिये हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर नवग्रह स्तोत्र बोलें। तत्पश्चात भगवती षोडश मातृकाओं का पूजन करें। माताओं की पूजा के बाद रक्षाबंधन करें। रक्षाबंधन के लिये मौलि लेकर भगवान गणपति पर चढ़ाइये फिर अपने हाथ में बंधवा लीजिये और तिलक लगा लें। इसके बाद महालक्ष्मी की पूजा करें।

माँ लक्ष्मी जी की पूजा के लिए वेदों में कई महत्वपूर्ण मन्त्र दिये गये हैं। ऋग्वेद में एक जगह माँ लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए निम्न मंत्र का उल्लेख किया गया है-

धनमग्निर्धनं वायुर्धनं सूर्यो धनं वसुः।
धनमिन्द्रो बृहस्पतिर्वरुणं धनमस्तु ते।।
अश्वदायै गोदायै धनदायै महाधने।
धनं मे जुषतां देवि सर्वकामांश्च देहि मे।।
मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि।
पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः ।।

लक्ष्मी जी की पूजा करते वक़्त साफ़-सफाई का विशेष ध्यान दिया जाना चाहिये। मङ्गलमय-पूजा के अवसर पर मां लक्ष्मी की पूजा के बाद दीपक पूजन करें इसके लिये तिल के तेल के सात, ग्यारह, इक्कीस अथवा ज्यादा दीपक प्रज्जवलित कर एक थाली में रखकर पूजा करें।

दीपक पूजन के बाद घर की महिलायें अपने हाथ से सोने-चांदी के समस्त आभूषण इत्यादि को मां लक्ष्मी को अर्पित कर दें। अगले दिन स्नान के बाद विधि-विधान से पूजा के बाद आभूषण एवं सुहाग की अन्य सामग्री जो अर्पित की थी उसे मां लक्ष्मी का प्रसाद समझकर स्वयं प्रयोग करें। मान्यता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा सदा बनी रहती है।
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संजय गुप्ता

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😎 तिजोरी में रखना चाहिए एक सुपारी क्योंकि ये बढ़ाती है पैसा
तिजोरी जहां पैसा, ज्वेलरी और अन्य बेशकीमती वस्तुएं रखी जाती है। अत: यह जगह बहुत ही पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर होनी चाहिए। जिससे कि घर में बरकत बनी रह सके और पैसों की कभी कमी न आए। यदि तिजोरी के आसपास कोई नकारात्मक शक्तियां सक्रिय हैं तो उस घर में कभी भी पैसों कमी कभी पूरी नहीं हो सकेगी। ऐसे में शास्त्रों के अनुसार कुछ उपाय बताए गए हैं।

तिजोरी में हमेशा पैसा ही पैसा भरा रहे, धन की देवी महालक्ष्मी की कृपा सदैव आप पर बनी रहे, इसके लिए एक छोटा सा उपाय अपनाएं। शास्त्रों के अनुसार श्रीगणेश रिद्धि और सिद्ध के दाता है। कोई भी भक्त नित्य श्रीगणेश का ध्यान करता है तो उसे कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं सताती। श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय हैं। प्रतिदिन गणेशजी की विधिवत पूजा करें और किसी भी शुभ मुहूर्त में विशेष पूजा करें। पूजन में गणेशजी के प्रतीक स्वरूप सुपारी रखी जाती है। बस यही सुपारी पूजा पूर्ण होने के बाद अपनी तिजोरी में रख दें।
पूजा में उपयोग की गई सुपारी में श्रीगणेश का वास होता है। अत: यह तिजोरी में रखने से तिजोरी के आसपास के क्षेत्र में सकारात्मक और पवित्र ऊर्जा सक्रिय रहेगी जो नकारात्मक शक्तियों को दूर रखेगी। पूजा में उपयोग की जाने वाली सुपारी बाजार में मात्र 1 रुपए में ही प्राप्त हो जाती है लेकिन विधिविधान से इसकी पूजा कर दी जाए तो यह चमत्कारी हो जाती है। जिस व्यक्ति के पास सिद्ध सुपारी होती है वह कभी भी पैसों की तंगी नहीं देखता, उसके पास हमेशा पर्याप्त पैसा रहता है।
जय श्री गणेश देवा

संजय गुप्ता

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मंत्र
लंकापति रावण एक राक्षस था यह तो सभी जानते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं, वह एक महान पंडित था। रावण एक विद्वान तांत्रिक, ज्योतिषी और भगवान शिव का परमभक्त भी था। रावण ने ही शिव तांडव स्त्रोत की रचना की थी। रावण संहिता में रावण ने तंत्र मंत्र के बारे में लिखा है। इसमें रावण ने देवताओं और यक्ष यक्षणियों से किस प्रकार लाभ ले सकते हैं, इन बातों का भी उल्लेख किया है। इन्हीं में धनवान बनने के मंत्रों के बारे में भी रावण ने लिखा है।
1. ‘ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवाणाय, धन धन्याधिपतये धन धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा॥’

जिन्हें भी धन की कमी रहती है, वह प्रतिदिन 108 बार इस मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से धन संबंधी सभी समस्याओं का समाधान होता है ऐसा रावण संहिता में कहा गया है।
2. ‘लां लां लां लंकाधिपतये लीं लीं लीं लंकेशं लूंलूंलूं लोह जिव्हां, शीघ्रं आगच्छ आगच्छ चद्रंहास खडेन मम शश्रुन विरदारय विदारय मारय मारय काटय काटय हूं फट स्वाहा’
रावण संहिता के अनुसार, यह मंत्र रावण ने खुद लिखा है। विजयादशमी के दिन रावण दहन के समय जो भी जातक 108 बार इस मंत्र का जप करता है उसे भी रावण की तरह भौतिक सुख की प्राप्ति होती है ऐसी मान्यता है।
3. ‘ॐ क्लीं ह्रीं ऐं ओं श्रीं महा यक्षिण्ये सर्वैश्वर्यप्रदात्र्यै नमः॥
इमिमन्त्रस्य च जप सहस्त्रस्य च सम्मितम्।
कुर्यात् बिल्वसमारुढो मासमात्रमतन्द्रितः॥’
हर दिन बेल के वृक्ष पर चढ़कर एक महीने तक इस मंत्र का एक हजार बार जप करने का नियम है। जब यह जप पूरा हो जाता है तो ब्राह्मणों और कुंवारी कन्याओं को भोजन कराना होता है। रावण संहिता में कहा गया है कि इससे आर्थिक कष्ट दूर होता है।
4. ‘ॐ सरस्वती ईश्वरी भगवती माता क्रां क्लीं, श्रीं श्रीं मम धनं देहि फट् स्वाहा।’
रावण द्वारा रचित यह मंत्र बेहद खास है। इस मंत्र का जप सवा महीने तक एक ही स्थान पर, एक ही समय पर हर रोज करें। ऐसा करने से आपको फल तुरंत मिलता है।
5. ‘ॐ नमो विघ्नविनाशाय निधि दर्शन कुरु कुरु स्वाहा।’

इस मंत्र का जप अगर आप सवा महीने में 10,000 कर लेते हैं तो आपका खोया हुआ धन, उधार दिया हुआ धन वापस मिल सकता है ऐसा रावण संहिता में बताया गया है।
6. ‘ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्मी, महासरस्वती ममगृहे आगच्छ-आगच्छ ह्रीं नम:’

रावण संहिता के अनुसार, इस मंत्र का 108 बार जप शुभ अवसर पर ही करना चाहिए। मकर संक्रांति, होली, अक्षय तृतीया, कृष्ण जन्माष्टमी, महाशिवरात्री और दिवाली जैसे शुभ अवसर पर मध्यरात्रि में इस मंत्र का जप करना चाहिए। सबसे पहले इस मंत्र को कुमकुम से थाली पर लिखें और फिर जप करें। इससे आपकी आर्थिक तंगी दूर होती है।

  1. ॐ नमो भगवती पद्म पदमावी ऊँ ह्रीं ऊँ ऊँ पूर्वाय दक्षिणाय उत्तराय आष पूरय सर्वजन वश्य कुरु कुरु स्वाहा’
    दिपावली के दिन माता लक्ष्मी की पूजा विधि-विधान के साथ करें। इसके बाद अगली सुबह बिस्तर से उतरने से पहले इस मंत्र का 108 बार जप करलें और दसों दिशाओं में 10-10 बार फूंके। ऐसा करने से चारों तरफ से पैसे आने के रास्ते खुल जाएंगे। यह उपाय भी रावण संहिता में बताया गया है।