Posted in Kashmir

बहुत से लोग कहते है, कश्मीर में हिन्दू को पुनः बसायेंगे।

पर क्या ये घटना के बाद आपको लगता है हिन्दू फिर से बसाने के बाद बचेंगे।

====================

अभी न्यूज़ देख रहा था ध्यान से सुनने पर एक गहराई वाली बात सुनाई दी कल कश्मीर में एक DSP मोहम्मद अयूब “पंडित” की मस्जिद के बाहर मुस्लिमो ने पीट पीटकर हत्या कर दी

न्यूज़ चैनल वाले DSP के परिवार वालो के मुह में माइक डालकर सवाल पूछ रहे थे रोते हुए एक महिला के मुहँ से सच निकल गया

उस महिला ने बुर्खे के अन्दर से बोला ” भीड़ ने मेरे अयूब को “#पंडित” समझकर पिट डाला वो उसको मुखबिर समझ रहे थे पहले अयूब से पूछ लेते वो तो वहां #नमाज पढने गया था

अगर भीड़ सिर्फ नाम में “#पंडित” होने पर ही आपको पीटकर मार डालती है तो इसका मतलब आप समझ सकते हो कश्मीर में “कश्मीरी पंडितो ” की क्या #हालात हुई होगी

माइक मुहँ में डालकर सच उगलवाने के लिए “अज्ञात” पत्रकार को धन्यवाद्

ये प्रोग्राम ABP न्यूज़ पर था

Posted in Kashmir

पत्थरबाजों का समर्थन दिखा रहा है ख़ूनी रंग. श्रीनगर मस्जिद के बाहर DSP की पीट – पीट कर हत्या…

डीएसपी मोहम्मद अयूब पंडित मस्जिद के बाहर ड्यूटी कर रहे थे, तभी उन पर भीड़ ने हमला किया…

न्यूज़ चैनल वाले DSP के परिवार वालो के मुह में माइक डालकर सवाल पूछ रहे थे …..

रोते हुए एक महिला के मुहँ से सच निकल गया ….

उस महिला ने बुर्खे के अन्दर से बोला ” भीड़ ने मेरे अयूब को “पंडित” समझकर पिट डाला वो उसको मुखबिर समझ रहे थे …..

पहले अयूब से पूछ लेते वो तो वहां नमाज पढने गया था …. 

अगर भीड़ सिर्फ नाम में “पंडित” होने पर ही आपको पीटकर मार डालती है तो इसका मतलब आप समझ सकते हो 

कश्मीर में “कश्मीरी पंडितो ” की हालात हुई होगी…..

मुसलमान को ‘हिन्दू’ समझकर मुसलमानों ने मार डाला वह भी मस्जिद के सामने … 
अब क्या होगा ..?

.

और उस पर उस मुसलमान की माँ कह रही है की पूंछ तो लेते “”हिन्दू”” है की नहीं….
अखलाक को भीड ने माराऔरDSPअयूब को भी,तब फिर अखलाक ही अकेला मासूम क्यो

एकविचार

क्या मासूमियत भी मरने व मारने वाले के धर्म से तय होगी

यदि मुस्लिम समुदाय के लिए रमजान एक पाक महिना है तो फिर इस महीने में जिस तरह DSP का खून बहाया गया उस पर अभी तक किसी मुस्लिम धर्म गुरु की कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई ? 
क्या वो इस हत्या को इस्लाम के हिसाब से जायज मान रहे हैं ?
#कश्मीर

Dr. Dhananjay Singh

Posted in Kashmir

जब कश्मीर के राजपूत महाराजा हरिसिंह को मिला नेहरू और शेख अब्दुल्ला के हांथों धोखा—–

दुष्ट कांग्रेस पार्टी,राजपूतों की सबसे बड़ी दुश्मन—
क्श्मीर के आखिरी राजपूत राजा महाराजा हरि सिंह, जिन्होंने भारत में आजादी की परिकल्पना से कई साल पहले सन् 1925 में कश्मीर राज्य को स्वाधीन कराने का लक्ष्य देकर राष्ट्र्रीयता की भावना का जो परिचय पूरे भारत के सामने दिया था, को जवाहर लाल नेहरू और शेख अब्दुल्ला जैसे सत्तालोभी नेताओं द्वारा बुरी तरह नष्ट कर दिया गया। महाराजा हरि सिंह की भारत के तत्कालीन राष्ट्र्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद को लिखे गए पत्र में इस घटना का खुलासा हुआ है कि कैसे नेहरू और शेख अब्दुल्ला ने साजिश के तहत मनमाने तरीके से कश्मीर के भारत में विलय को अंजाम दिया, जिससे इतनी बड़ी कश्मीर समस्या का जन्म हुआ।
17 अगस्त 1952 को लिखे गए अपने 9000 शब्दों के इस पत्र में महाराजा हरि सिंह ने देश के प्रथम राष्ट्रपति  डॉ राजेंद्र प्रसाद को आगाह किया है कि कैसे जवाहर लाल नेहरू, शेख अब्दुल्ला और लुई माउंटबेटन जिसे लोगों ने मिलकर भारतीय प्रांतों की आजादी के समय होने वाले विलय के नियमों के साथ खिलवाड़ कर अपनी मनमानी दिखाई जिसका प्रभाव आजतक कश्मीर में देखा जा सकता है। कश्यप मुनि की धरती कश्मीर का भारत में विलय राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों ही रूप से महत्वपूर्ण था। किंतु भारत के हुक्मरानों ने ऐसी चाल चली जिसे ना तो सरकारी अनुदान प्राप्त इतिहासकारों ने दिखाया और ना ही आगे आने वाली सरकारों ने ऐसे किसी पत्र को सामने आने दिया। इतिहास के साथ साथ लोगों की मानसिकता के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे लोगों का सच सामने लाने के लिए सरकार को हर एक दस्तावेज को सार्वजनिक करना होगा जो भारत के इतिहास से जुड़ा हुआ है। इसके बाद ही जनता नायकों, खलनायकों, धूर्तों और चाटुकारों में फर्क कर पाएगी।
महाराजा हरि सिंह ने अपने पत्र में लिखा है कि कैसे सन् 1925 में उनके जैसे देशभक्त के कश्मीर की सत्ता संभालते ही अंग्रेज तिलमिला गए क्योंकि कश्मीर उनके लिए बहुत महत्व रखता था। अंग्रजों ने वहां के मुसलमानों को भड़काकर धार्मिक विद्रोह की शुरूआत की तथा हिंदु राज का अंत और इस्लाम खतरे में जैसे नारों को जन्म दिया। कश्मीर प्रांत में चौधरी गुलाम अब्बास तथा मौलाना यूसुफ शाह जैसे नेताओं ने हिंदु विरोधी नारों के साथ नेशनल कानफ्रेंस नामक पार्टी की स्थापना की जिसे कांग्रेस पार्टी का पूरा समर्थन भी मिला। नेहरू की हिंदु विरोधी विचारधारा को देखते हुए मांउटबेटन ने हरि सिंह के पाकिस्तान में शामिल होने की संभावना के तरफ इसारा भी किया था। सन् 1947 में सरदार बल्लभ भाई पटेल ने राजा हरि सिंह को पत्र लिखकर मेहर चंद महाजन को प्रधानमंत्री बनाने की सूरत में पूरा सहयोग देने का अश्वासन दिया था। हरि सिंह द्वारा महाजन को प्रधानमंत्री बनाए जाने के बाद पटेल ने शेख अब्दुल्ला की कश्मीर को लेकर बुरी नीयत के बारे में महाजन को अगाह भी किया था।
जवाहरलाल नेहरू ने भी महाजन को कुछ ऐसे ही लिखे पत्र में शेख अब्दुल्ला को जम्मू कश्मीर की अंतरिम सरकार का मुखिया बनाकर हरि सिंह को हटाने की बीच में से हटाने की मांग की थी। नेहरू का कहना था कि शेख अब्दुल्ला ही कश्मीर का सबसे प्रसिद्ध नेता है इसलिए उसे ही राज्य का मुख्यमंत्री बनना चाहिए। उन्होंने यहां तक कि कश्मीर विलय पर चल रहे कार्यक्रम को तब तक के लिए स्थगित कर दिया था जब तक शेख अब्दुल्ला मुख्यमंत्री नहीं बन जाता। महाराजा हरि सिंह को कश्मीर को लेकर मिले हुए विशेषाधिकारों के बावजूद नेहरू ने राजा पर अब्दुल्ला को बड़ा पद देने के लिए दबाव बनाना भी शुरू कर दिया था। नेहरू के कहने पर भारत की अंतरिम सरकार में मंत्री एन गोपालस्वामी अयंगार ने अब्दुल्ला के हस्ताक्षर किए हुए पत्र को स्वीकृति के लिए महाराजा के पास भेजा जिसमें अब्दुल्ला को विशेष स्थान देने की बात कही गई थी।
शेख अब्दुल्ला ने ताकत मिलते ही राजा हरि सिंह को परेशान करना शुरू कर दिया। हरि सिंह ने राष्ट्रपति से शिकायत की थी कि शेख जानबूझ कर उनको नजरअंदाज कर रहा है और नेहरू के समर्थन से अअपनी मनमानी करने में कामयाब हो रहा है। यहां तक कि राजा हरि सिंह के कश्मीर में घूमने और वहां की जनता से मिलने पर भी अब्दुल्ला ने रोक लगा दिया था। नेहरू के दबाव में हरि सिंह को कुछ महीनो के लिए मजबूरन कश्मीर छोड़ना पड़ा और इसी दौरान शेख अब्दुल्ला ने सरकारी समेत राजा की निजी संपत्तियों पर भी कब्जा करना शुरू कर दिया था। अब्दुल्ला ने हिंदुओं के खिलाफ जाते हुए राजा के धर्मार्थ ट्रस्ट को परेशान करने की नीयत से पैसे निकालने पर रोक लगा दी। अब्दुल्ला ने हिंदु मंदिरो और देव स्थानों पर पूजा करने पर भी रोक लगा दी जो नेहरू के स्वतंत्र भारत में धर्मनिरपेक्षता का पहला उदाहरण है।
हरि सिंह ने डा राजेंद्र प्रसाद को लिखे पत्र में नेहरू द्वारा भारत के संविधान के विपरीत जाते हुए अनुच्छेद 370 का दुरूपयोग कर उसे शेख अब्दुल्ला के पक्ष में परिवर्तित करने का आरोप लगाया था। राजा ने पूछा था कि “क्या भारत सरकार उस व्यक्ति को अनदेखा कर सकती है जिसने सरकार को कश्मीर में प्रवेश करने की आज्ञा दी ? वह इंसान, जिसने कश्मीर के भारत में विलय की नींव रखी, आज उसे ही कश्मीर से निकाला जा रहा है |” महाराजा हरि सिंह के नेहरू, माउंटबेटन और भारत सरकार के भरोसे और नेक सोच पर चलने के बावजूद एक ऐसे तरीके से उनका अंत करना ना ही सम्मानजक है और ना ही सही |

Posted in Kashmir

कश्मीर में हुआ था बडा नरसंहार
डोडा नरसंहार – अगस्त १४, १९९३ को बस रोककर १५ हिंदुओं की हत्या कर दी गई ।

संग्रामपुर नरसंहार – मार्च २१, १९९७ घर में घुसकर ७ कश्मीरी पंडितों का अपहरण कर मार डाला गया ।

वंधामा नरसंहार – जनवरी २५, १९९८ को हथियारबंद आतंकियों ने ४ कश्मीरी परिवार के २३ लोगों को गोलियों से भून कर मार डाला ।

प्रानकोट नरसंहार – अप्रैल १७, १९९८ को उधमपुर जिले के प्रानकोट गांव में एक कश्मीरी हिन्दू परिवार के २७ लोगोंको माैत के घाट उतार दिया था, इसमें ११ बच्चे भी थे । इस नरसंहार के बाद डर से पौनी और रियासी के १००० हिंदुओं ने पलायन किया था ।

२००० में अनंतनाग के पहलगाम में ३० अमरनाथ यात्रियों की आतंकियों ने हत्या कर दी थी ।

२० मार्च २००० चित्ती सिंघपोरा नरसंहार होला मना रहे ३६ सिखों की गुरुद्वारे के सामने आतंकियों ने गोली मार कर हत्या कर दी ।

२००१ में डोडा में ६ हिंदुओं की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी ।

२००१ जम्मू कश्मीर रेलवे स्टेशन नरसंहार, सेना के रूप में आतंकियों ने रेलवे स्टेशन पर गोलीबारी कर दी, इसमें ११ लोगों की मृत्यु हो गई ।

२००२ में जम्मू के रघुनाथ मंदिर पर आतंकियों ने दो बार आक्रमण किया, पहला ३० मार्च और दूसरा २४ नवंबर को । इन दोनों आक्रमणों में १५ से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो गई ।

२००२ क्वासिम नगर नरसंहार, २९ हिन्दू मजदूरों को मारा गया । इनमें १३ महिलाएं और एक बच्चा था ।

२००३ नदिमार्ग नरसंहार, पुलवामा जिले के नदिमार्ग गांव में आतंकियों ने २४ हिंदुओं को मृत्यु के घाट उतार दिया था ।

स्त्रोत : दैनिक भास्कर

Posted in Kashmir, Uncategorized

काश्मीरमें धारा ३७० अंग्रेजो द्वारा नहेरु की देन ================= काश्मीरमें ३७० धरा को लगानेमें अंग्रेजोंका काम है ,जो नहेरु अंग्रेजोंका गुलाम था और अंग्रेजोंका मुरीद था और अंग्रेज नहीं चाहते थे की देश में शांति हो और देश प्रगति करे हिन्दू मुसलमानोंको आपसमे लड़ाते रहे और देश पर राज करते रहे नहेरु इस देह का […]

via काश्मीरमें धारा ३७० अंग्रेजो द्वारा नहेरु की देन — પ્રહલાદ પ્રજાપતિ

Posted in Kashmir

*न रोते बन रहा है* *न देखते बन रहा है*

*न रोते बन रहा है*

*न देखते बन रहा है*

 

न जाने क्यूँ आज

भगवान पर एतबार न

करते बन रहा है

न किस्मत पर एतबार करते बन रहा है

 

न जाने क्यूँ आज

फुट फुट कर आँसू बहाने का मन कर रहा है

 

आज अपना कश्मीर

फिर से बाढ़ से घिर गया है दोस्तों

 

और एक बार फिर से

सेना को बचाव कार्य में

लगना पड़ रहा है

 

बचना भी उन्ही पत्थरबाजों को है

 

इसलिए न जाने क्यूँ

*न रोते बन रहा है*

*न देखते बन रहा है*

Posted in Kashmir

​_UNKNOWN FACTS ABOUT KASHMIR TERRORISM._

_UNKNOWN FACTS ABOUT KASHMIR TERRORISM._
👁 👁    *EYE  OPENER*   👁 👁
_State of J&K Under India ( Area wise 101380 sq Km) Excluding POK._
_*Kashmir  :  15%*_

_*Jammu   :  26%*_

_*Ladakh    :  59%*_
*85,000 sq Km comprising 85% area are not Muslim Majority.*
_Population  – 1.25 Crores_
*Kashmir :  69 Lakhs.* _(Only 55 Lakhs speak Kashmiri. Rest 13 lakhs speak Non kashmiri languages.)_
*Jammu : 53 Lakhs.*

_(Dogri, Punjabi, Hindi)_
*Ladakh :  03 Lakhs.* _(Ladakhi language)_
_This does not include 7.5 lakh people settled who do not have citizenship._
There are 22 districts in J&K. Out of which *only 5 Districts where separatists have the say ;* 

_Srinagar, Anantnag, Baramullah, Kulgam and Pulwama._  
*Other 17 districts are Pro India.*  

_So separatist’s writ runs in just 15% of the population which are Sunni Muslim dominated._ 
_Interestingly these 5 districts are far away from Pakistan Border/LOC._
*There are more than fourteen major Religious/ ethinic groups comprising 85% of the population of J&K who are Pro India.*
_These include:_i
_Shias ;_ 
_Dogras: (Rajputs, Brahmins & Mahajans);_
_Kashmiri Pandits;_
_Sikhs;_ 
_Buddhists ( Ladakhis );_ 
_Gujjars;_
_Bakarwals;_ 
_Paharis;_ 
_Baltis;_
_Christians & many more._
*Majority of the people in J&K do not speak Kashmiri as their mother tongue. It’s Dogri, Gujjari, Punjabi, Ladhaki , Pahari etc.*
_Only 33 % people in Kashmir speak Kashmiri & this group controls narrative from Hurriyat to militants and from NC and PDP._
_This 33% controls *business, bureaucracy & agriculture*. This sunni 33% is opposed to India although population of all other muslims in JK is 69 %._
*Shias (12%), Gujjars Muslims (14%), Pahadi Muslims ( 8%), Buddhists , Pandits, Sufis, Christians and Jammu Hindus/ Dogras ( aprox 45%) are totally opposed to separatism and Pakistan.*
_Stone pelting , Hoisting of Pakistani flags & Anti India demonstrations are held in just 5 Districts in Kashmir valley._
*Other 17 districts have never participated in such activities.*
*Poonch and Kargil have above 90% Muslim population. There has never been an Anti India or separatist protest in these districts.*
_It is only the_ *Anti National Media and other Anti India forces* _who with their own nefarious designs have_ *created an impression that “WHOLE J&K” is against India.*
_*Whereas the truth is that  just 15% of the Population comprising Sunni Muslims inhabitating 5 Districts of Kashmir province are fanning the separatist activities.*_
_Please spread this message to every INDIAN to UNITE and SAVE the Sovereignity of Our Nation and Defeat the Nefarious Designs of Pakistan and root out terrorism._
*Jai Hind. Vande Mataram.*