Posted in Kala Dhan, Rajniti Bharat ki

कालाधन देश में लाने का वाद किसने किया था……


1. कालाधन देश में लाने का वाद किसने किया था……..???
उत्तर : बीजेपी………!!!
2. कालेधन पर सबसे पहले SIT किसने बनाई……….???
उत्तर : बीजेपी ……….!!!
3. कालेधन का पता लगाने के लिए स्पेशल टीम को स्विस
बैंक किसने भेजा……..???
उत्तर : बीजेपी………!!!
4. सुप्रीम कोर्ट की हर शर्त मानने
को कौन राजी……..???
उत्तर : बीजेपी………!!!
5. कालेधन पर पुरे देश में रथ यात्रा किसने
निकली थी और सबसे बड़ा आंदोलन किसने
किया था ……..???
उत्तर : लाल कृष्णा आडवाणी (बीजेपी) और बाबा रामदेव…….!!!
6. सुप्रीम कोर्ट में लम्बे समय से कालेधन के खिलाफ
पैरी कौन कर रहा है……..???
उत्तर : राम जेठमलानी (बीजेपी सरकार में कानून मंत्री रह चुके हैं) और सुब्रमनियम स्वामी (बीजेपी)………!!!
7. लेकिन क्रेडिट कौन ले रहा है…………..???
उत्तर : आपिये प्रशांत भूषन एंड केजरीवाल…….!!!
वाह क्या सीन है……….!!!
ये आपिये दूसरों की मेहनत पर क्रेडिट लेने खुद
आ जाते हैं……..!!!
नोट : सुप्रीम कोर्ट 3 साल से कोंग्रेस सरकार को कहते
कहते थक गयी लेकिन कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट की बात को कभी नहीं माना……..और ना ही कोई आपिया कालेधन की लड़ाई में आगे आया………!!!

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दोस्तों जब मोदी सरकार काले धन के मामले मे नाम सार्बजनिक नही कर रही थी आपिये और कांग्रेसी जम के उछ कूद कर रहे थे


चचचच !!!केजरी चमचो जबाब?????

दोस्तों जब मोदी सरकार काले धन के 
मामले मे नाम सार्बजनिक नही कर रही थी

आपिये और कांग्रेसी जम के उछ कूद कर रहे थे 

जबकि ऐसा करार 
कांग्रेस सरकार ही उन सभी देशो से करके गई है 
जहाँ काला धन है

अगर नाम सर्वाजनिक हुआ तो 
कोई देश भारत सरकार की मदत न करे

जिससे काले धन बाले बच जाये 

दोस्तों ये दोहरा खेल कांग्रेस ही कर के गई है 

एक तो ऐसा विदेशों से समझौता किया है

नाम सर्वाजनिक होने पर आप सब  जांच ऐजेन्सी की मदत न करे 

अब कोई सरकार आयेगी विदेशो से जो  करार हुआ है 

उसी आधार पर कार्य करेगी 
क्योंकि ये  मजबूरी बनती है 
ऐसा करना

दूसरा यह कि नाम सर्वाजनिक नही होने पर

मेढक जैसे फुदकते है 
कारण यह कांग्रेसी जानते है

 कि जो उन्होने  कांटे बोये है 
 मोदी सरकार को उसपर चलना ही पडेगा 

और इसी का फायदा उठाकर 
नाम सर्वाजनिक करने की माग करते है 

अब जब 
सुप्रीम कोर्ट को और  एसआईटी को यह बात पता चली तो 
कोर्ट तथा
एसआईटी भी नाम सर्वाजनिक करने को मना कर दिया

अब कांग्रेसियो का मोदी सरकार को तंज कसना फेल हो गया 

बेचारे कांग्रेसी

च च च च च 

काले धन के बारे मैं केंद्रीय सरकार ने 

सुप्रीम कोट
को बताया था
की ६८७ खाते दारों की लिस्ट
२७/०६/२०१४ को SIT को दे दी है

तथा बिना जांच के नाम उजागर करना संभव
नहीं है।

 परन्तु सुप्रीम कोट इससे सहमत नहीं हुआ

तथा 
सरकार पर दबाव  बनाई
 तथा कहा की सरकार
कुछ नहीं कर सकती

 तुरंत लिस्ट हमें दी जाए

 हम
करवाई करेंगे।

 सुप्रीम कोर्ट के कहने  मे 
मोदी सरकार  ने 
लिष्ट  कोर्ट को देदी

जबकि एसआईटी को यह लिष्ट पहले ही दी  जा चुकी थी 

कोर्ट को सरकार ने
यह भी बताया था 

कि नाम सर्वाजनिक नही हो सकता क्योंकि ऐसा विदेशों से करार है 

पर कोर्ट नही माना और अब जब सुप्रीम कोर्ट ने सब जाना समझा तो 
मोदी सरकार का साथ देना पडा कोर्ट को भी 

 हुआ यू कि आज सरकार ने लिष्ट जो सुप्रीम कोर्ट को दी 
तुरत कोर्ट ने बात को गंभीरता से लेते हुये 

एसआईटी को
हेतु भेज दिया
 तथा कहा की नाम उजागर
करना संभव नहीं है।

 अर्थात सरकार के निर्णय
की पुष्टि करदी।

मुझे एक कहानी याद आती है -: एक
भिखारी किसी के घर आटा मांगने गया।

 सास
मंदिर गयी थी 

तो बहु ने कहा की नहीं है आटा 

आगे जाओ , 

बेचारा भिखारी जब
जा ही रहा था

 कि इतनी देर मैं सास भी आ
गयी ,

 सास ने भिखारी से पूछा की क्या बात
है ,

 भिखारी ने कहा कि मैं सामने वाले घर से
आटा मांगने गया था

 परन्तु एक औरत ने मुझे
आटा नहीं दिया 

और जाने के लिए कह दिया।

सास को बहुत गुस्सा आया

 और भिखारी से
बोली उसने खाली हाथ भेज दिया , 

चल वापिस
चल। 

भिखारी बहुत खुश हुआ सोचा अब
तो आटा मिल ही जाएगा

 और उस बुढ़िया के
पीछे पीछे उनके घर आ गया।

 बुढ़िया घर के अंदर
चली गयी।

भिखारी बोला माता आटा तो डाल दो।

बुढ़िया वापिस आई और बोली जाओ
आटा घर पर नहीं है

भिखारी बोला ये बात तो आपकी बहु ने
भी कहदी थी 

फिर मुझे वापिस क्यों बुलाया 

सास बोली -" वो कौन होती है
न कहने वाली ,

सास मैं हूँ या वो "

लगता है सुप्रीम कोर्ट और सरकार मैं सास बहु
का खेल चल रहा था

अब जैसे  सास को यह नही पता था कि आटा घर पर नही है

भाई उसने पल भर के लिये ये नही सोचा कि आटा न देने के पीछे उसकी कुछ मजबूरी हो सकती है

वैसे ही  सुप्रीम कोर्ट ने 
मोदी सरकार की मजबूरी नही समझी 

अशलियत सामने आते ही 
सुप्रीम कोर्ट की भी बोलती बंद 

अनुराग मिश्र 
नमो सेना सीधी
आईटी संयोजक
शुभसंध्या दोस्तों
जय हिन्द

दोस्तों जब मोदी सरकार काले धन के
मामले मे नाम सार्बजनिक नही कर रही थी

आपिये और कांग्रेसी जम के उछ कूद कर रहे थे

जबकि ऐसा करार
कांग्रेस सरकार ही उन सभी देशो से करके गई है
जहाँ काला धन है

अगर नाम सर्वाजनिक हुआ तो
कोई देश भारत सरकार की मदत न करे

जिससे काले धन बाले बच जाये

दोस्तों ये दोहरा खेल कांग्रेस ही कर के गई है

एक तो ऐसा विदेशों से समझौता किया है

नाम सर्वाजनिक होने पर आप सब जांच ऐजेन्सी की मदत न करे

अब कोई सरकार आयेगी विदेशो से जो करार हुआ है

उसी आधार पर कार्य करेगी
क्योंकि ये मजबूरी बनती है
ऐसा करना

दूसरा यह कि नाम सर्वाजनिक नही होने पर

मेढक जैसे फुदकते है
कारण यह कांग्रेसी जानते है

कि जो उन्होने कांटे बोये है
मोदी सरकार को उसपर चलना ही पडेगा

और इसी का फायदा उठाकर
नाम सर्वाजनिक करने की माग करते है

अब जब
सुप्रीम कोर्ट को और एसआईटी को यह बात पता चली तो
कोर्ट तथा
एसआईटी भी नाम सर्वाजनिक करने को मना कर दिया

अब कांग्रेसियो का मोदी सरकार को तंज कसना फेल हो गया

बेचारे कांग्रेसी

च च च च च

काले धन के बारे मैं केंद्रीय सरकार ने

सुप्रीम कोट
को बताया था
की ६८७ खाते दारों की लिस्ट
२७/०६/२०१४ को SIT को दे दी है

तथा बिना जांच के नाम उजागर करना संभव
नहीं है।

परन्तु सुप्रीम कोट इससे सहमत नहीं हुआ

तथा
सरकार पर दबाव बनाई
तथा कहा की सरकार
कुछ नहीं कर सकती

तुरंत लिस्ट हमें दी जाए

हम
करवाई करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के कहने मे
मोदी सरकार ने
लिष्ट कोर्ट को देदी

जबकि एसआईटी को यह लिष्ट पहले ही दी जा चुकी थी

कोर्ट को सरकार ने
यह भी बताया था

कि नाम सर्वाजनिक नही हो सकता क्योंकि ऐसा विदेशों से करार है

पर कोर्ट नही माना और अब जब सुप्रीम कोर्ट ने सब जाना समझा तो
मोदी सरकार का साथ देना पडा कोर्ट को भी

हुआ यू कि आज सरकार ने लिष्ट जो सुप्रीम कोर्ट को दी
तुरत कोर्ट ने बात को गंभीरता से लेते हुये

एसआईटी को
हेतु भेज दिया
तथा कहा की नाम उजागर
करना संभव नहीं है।

अर्थात सरकार के निर्णय
की पुष्टि करदी।

मुझे एक कहानी याद आती है -: एक
भिखारी किसी के घर आटा मांगने गया।

सास
मंदिर गयी थी

तो बहु ने कहा की नहीं है आटा

आगे जाओ ,

बेचारा भिखारी जब
जा ही रहा था

कि इतनी देर मैं सास भी आ
गयी ,

सास ने भिखारी से पूछा की क्या बात
है ,

भिखारी ने कहा कि मैं सामने वाले घर से
आटा मांगने गया था

परन्तु एक औरत ने मुझे
आटा नहीं दिया

और जाने के लिए कह दिया।

सास को बहुत गुस्सा आया

और भिखारी से
बोली उसने खाली हाथ भेज दिया ,

चल वापिस
चल।

भिखारी बहुत खुश हुआ सोचा अब
तो आटा मिल ही जाएगा

और उस बुढ़िया के
पीछे पीछे उनके घर आ गया।

बुढ़िया घर के अंदर
चली गयी।

भिखारी बोला माता आटा तो डाल दो।

बुढ़िया वापिस आई और बोली जाओ
आटा घर पर नहीं है

भिखारी बोला ये बात तो आपकी बहु ने
भी कहदी थी

फिर मुझे वापिस क्यों बुलाया

सास बोली -” वो कौन होती है
न कहने वाली ,

सास मैं हूँ या वो ”

लगता है सुप्रीम कोर्ट और सरकार मैं सास बहु
का खेल चल रहा था

अब जैसे सास को यह नही पता था कि आटा घर पर नही है

भाई उसने पल भर के लिये ये नही सोचा कि आटा न देने के पीछे उसकी कुछ मजबूरी हो सकती है

वैसे ही सुप्रीम कोर्ट ने
मोदी सरकार की मजबूरी नही समझी

अशलियत सामने आते ही
सुप्रीम कोर्ट की भी बोलती बंद

अनुराग मिश्र
नमो सेना सीधी
आईटी संयोजक
शुभसंध्या दोस्तों
जय हिन्द