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Height of Secularism: गरीब के बच्चे सिर्फ तभी याद आते हैं जब शिवलिंग पर दूध चढता है, 31 Dec को 10000करोड़ की दारू पीते हुए सब भूल जाते हैं

Height of Secularism: गरीब के बच्चे सिर्फ तभी याद आते हैं जब शिवलिंग पर दूध चढता है,
31 Dec को 10000करोड़ की दारू पीते हुए सब भूल जाते हैं

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मोरारजी देसाई को जब किसी ने पहली जनवरी को नववर्ष की बधाई

मोरारजी देसाई को जब किसी ने
पहली जनवरी को नववर्ष की बधाई
दी तो उन्होंने उत्तर दिया था-
किस बात की बधाई?
मेरे देश और देश के सम्मान का तो इस
नववर्ष से कोई संबंध नहीं। यही हम
लोगों को भी समझना और
समझाना होगा।
क्या एक जनवरी के साथ ऐसा एक
भी प्रसंग जुड़ा है जिससे राष्ट्र प्रेम
जाग सके, स्वाभिमान जाग सके
या श्रेष्ठ होने का भाव जाग सके ?
आइये! विदेशी को फैंक स्वदेशी अपनाऐं
और गर्व के साथ भारतीय नव वर्ष
यानि विक्रमी संवत् को ही मनायें
तथा इसका अधिक से अधिक प्रचार
करें
भारतीय नव वर्ष : चैत्र शुक्ल
प्रतिपदा को हमारा नववर्ष है। हम
परस्पर उसी दिन एक दुसरे
को शुभकामनाये दें।
भारतीय नववर्ष का ऐतिहासिक
महत्व :
1. यह दिन
सृष्टि रचना का पहला दिन है। इस
दिन से एक अरब 97 करोड़ 39 लाख
49 हजार 109 वर्ष पूर्व इसी दिन के
सूर्योदय से ब्रह्माजी ने जगत
की रचना प्रारंभ की।
2. विक्रमी संवत का पहला दिन:
उसी राजा के नाम पर संवत् प्रारंभ
होता था जिसके राज्य में न कोई
चोर हो, न अपराधी हो, और न
ही कोई भिखारी हो। साथ
ही राजा चक्रवर्ती सम्राट भी हो।
सम्राट विक्रमादित्य ने 2067 वर्ष
पहले इसी दिन राज्य स्थापित
किया था।
3. प्रभु राम ने भी इसी दिन
को लंका विजय के बाद अयोध्या में
राज्याभिषेक के लिये चुना।
4. शक्ति और भक्ति के नौ दिन
अर्थात्, नवरात्र
स्थापना का पहला दिन यही है।
प्रभु राम के जन्मदिन रामनवमी से
पूर्व नौ दिन उत्सव मनाने का प्रथम
दिन।
5. गुरू अंगददेव प्रगटोत्सव: सिख
परंपरा के द्वितीय गुरू का जन्म
दिवस।
6. समाज को श्रेष्ठ (आर्य) मार्ग पर
ले जाने हेतु
स्वामी दयानंद सरस्वती ने
इसी दिन को आर्य
समाज स्थापना दिवस के रूप में चुना।
7. संत झूलेलाल जन्म दिवस : सिंध
प्रान्त के प्रसिद्ध समाज रक्षक
वरूणावतार संत झूलेलाल इसी दिन
प्रगट हुए
8. शालिवाहन संवत्सर का प्रारंभ
दिवस : विक्रमादित्य
की भांति शालिनवाहन ने
हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में
श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु
यही दिन चुना।
9. युगाब्द संवत्सर का प्रथम दिन :
5112 वर्ष पूर्व युधिष्ठिर
का राज्यभिषेक भी इसी दिन हुआ।
भारतीय नववर्ष का प्राकृतिक
महत्व :
1. वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष
प्रतिपदा से ही होता है जो उल्लास,
उमंग, खुशी तथा चारों तरफ
पुष्पों की सुगंधि से भरी होती है।
2. फसल पकने का प्रारंभ
यानि किसान की मेहनत का फल
मिलनेका भी यही समय होता है।
3. नक्षत्र शुभ स्थिति में होते हैं
अर्थात् किसी भी कार्य को प्रारंभ

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३१ दिसंबर मनाना, अर्थात मानसिक एवं सांस्कृतिक धर्मांतर !

३१ दिसंबर मनाना, अर्थात मानसिक एवं सांस्कृतिक धर्मांतर !

रावणरूपी पाश्‍चात्य संस्कृतिके आक्रमणोंको नष्ट कर, चैत्रप्रतिपदाके दिन नववर्षका विजयध्वज अपने घरों-मंदिरोंपर फहराएं !

अधिक जानकारी यहा पढे : http://www.hindujagruti.org/hindi/news/4183.html

To establish Hindu Rashtra, join us @ Hindujagruti.org/join

Buy online books on Hinduism @http://sanatanshop.com/shop/hn/34-hindi

(y) Like Page : Forum for Hindu Awakening

३१ दिसंबर मनाना, अर्थात मानसिक एवं सांस्कृतिक धर्मांतर !

रावणरूपी पाश्‍चात्य संस्कृतिके आक्रमणोंको नष्ट कर, चैत्रप्रतिपदाके दिन नववर्षका विजयध्वज अपने घरों-मंदिरोंपर फहराएं !

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भारतीय नववर्ष का ऐतिहासिक महत्व को जानिये

भारतीय नववर्ष का ऐतिहासिक महत्व को जानिये …..

1. यह दिन सृष्टि रचना का पहला दिन है। इस दिन से एक अरब
97 करोड़ 39 लाख 49 हजार 110 वर्ष पूर्व इसी दिन के
सूर्योदय से ब्रह्माजी ने जगत की रचना प्रारंभ की।
2. विक्रमी संवत का पहला दिन: उसी राजा के नाम पर संवत्
प्रारंभ होता था जिसके राज्य में न कोई चोर हो, न
अपराधी हो, और न ही कोईभिखारी हो। साथ
ही राजा चक्रवर्ती सम्राट भी हो। सम्राट विक्रमादित्य ने
2067 वर्ष पहले इसी दिन राज्य स्थापित किया था।
3. प्रभु श्री राम का राज्याभिषेक दिवस : प्रभु राम ने
भी इसी दिन को लंका विजय के बाद अयोध्या में राज्याभिषेक के
लिये चुना।
4. नवरात्र स्थापना : शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात्,
नवरात्र स्थापना का पहला दिन यही है। प्रभु राम के जन्मदिन
रामनवमी से पूर्व नौ दिन उत्सव मनाने का प्रथम दिन।
5. गुरू अंगददेव प्रगटोत्सव: सिख परंपरा के द्वितीय गुरू
का जन्म दिवस।
6. समाज को श्रेष्ठ (आर्य) मार्ग पर ले जाने हेतु स्वामी दयानंद
सरस्वती ने इसी दिन को आर्य समाज स्थापना दिवस के रूप में
चुना।
7. संत झूलेलाल जन्म दिवस : सिंध प्रान्त के प्रसिद्ध समाज
रक्षक वरूणावतार संत झूलेलाल इसी दिन प्रगट हुए
8. शालिवाहन संवत्सर का प्रारंभ दिवस : विक्रमादित्य
की भांति शालिनवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में
श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना।
9. युगाब्द संवत्सर का प्रथम दिन : 5113 वर्ष पूर्वयुधिष्ठिर
का राज्यभिषेक भी इसी दिन हुआ।
भारतीय नववर्ष का प्राकृतिक महत्व :
1. वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है जो उल्लास,
उमंग, खुशी तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंधि से भरी होती है।
2. फसल पकने का प्रारंभ यानिकिसान की मेहनत का फल
मिलनेका भी यही समय होता है।
3. नक्षत्र शुभ स्थिति में होते हैं अर्थात् किसी भी कार्य
को प्रारंभ करने के लिये यह शुभ मुहूर्त होता है।

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भारतीय नववर्ष का ऐतिहासिक महत्व को जानिये .....

1. यह दिन सृष्टि रचना का पहला दिन है। इस दिन से एक अरब
97 करोड़ 39 लाख 49 हजार 110 वर्ष पूर्व इसी दिन के
सूर्योदय से ब्रह्माजी ने जगत की रचना प्रारंभ की।
2. विक्रमी संवत का पहला दिन: उसी राजा के नाम पर संवत्
प्रारंभ होता था जिसके राज्य में न कोई चोर हो, न
अपराधी हो, और न ही कोईभिखारी हो। साथ
ही राजा चक्रवर्ती सम्राट भी हो। सम्राट विक्रमादित्य ने
2067 वर्ष पहले इसी दिन राज्य स्थापित किया था।
3. प्रभु श्री राम का राज्याभिषेक दिवस : प्रभु राम ने
भी इसी दिन को लंका विजय के बाद अयोध्या में राज्याभिषेक के
लिये चुना।
4. नवरात्र स्थापना : शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात्,
नवरात्र स्थापना का पहला दिन यही है। प्रभु राम के जन्मदिन
रामनवमी से पूर्व नौ दिन उत्सव मनाने का प्रथम दिन।
5. गुरू अंगददेव प्रगटोत्सव: सिख परंपरा के द्वितीय गुरू
का जन्म दिवस।
6. समाज को श्रेष्ठ (आर्य) मार्ग पर ले जाने हेतु स्वामी दयानंद
सरस्वती ने इसी दिन को आर्य समाज स्थापना दिवस के रूप में
चुना।
7. संत झूलेलाल जन्म दिवस : सिंध प्रान्त के प्रसिद्ध समाज
रक्षक वरूणावतार संत झूलेलाल इसी दिन प्रगट हुए
8. शालिवाहन संवत्सर का प्रारंभ दिवस : विक्रमादित्य
की भांति शालिनवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में
श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना।
9. युगाब्द संवत्सर का प्रथम दिन : 5113 वर्ष पूर्वयुधिष्ठिर
का राज्यभिषेक भी इसी दिन हुआ।
भारतीय नववर्ष का प्राकृतिक महत्व :
1. वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है जो उल्लास,
उमंग, खुशी तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंधि से भरी होती है।
2. फसल पकने का प्रारंभ यानिकिसान की मेहनत का फल
मिलनेका भी यही समय होता है।
3. नक्षत्र शुभ स्थिति में होते हैं अर्थात् किसी भी कार्य
को प्रारंभ करने के लिये यह शुभ मुहूर्त होता है।

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मेरे प्रिय भाइयों, एक जनवरी को नववर्ष की वधाई क्यों ?

मेरे प्रिय भाइयों, एक जनवरी को नववर्ष की वधाई क्यों ? एक जनवरी को मनाया जाने वाला नववर्ष दरअसल ग्रेगोरियन कैलिंडर पर आधारित है। एक जनवरी हिंदुओं का नववर्षारंभ नहीं’। एक जनवरी हिंदू नव वर्ष या भारतीय नव वर्ष के नए साल की शुरुआत नहीं है। 31 दिसंबर की रात ईसाई नववर्ष मनाने की प्रथा हिंदुओं ने अपनाई है।

बडे दुख: का विषय है कि आज भारतीय हिंदू नववर्ष से एकदम अनभिज्ञ है और कुछ लोग एक जनवरी को नये साल 2015 की बधाई दे रहे हैं जबकि हिंदू नव वर्ष या भारतीय नव वर्ष का प्रारंभ 21 मार्च 2015 से चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से माना जाताहै।

आईये भारतीय नववर्ष के बारे में जाने:-

हिंदू संस्कृति के अनुसार प्रतिवर्ष हिन्दू नववर्ष के शुभारंभ पर गुड़ी पड़वा मनाई जाती है, जिसके पीछे मान्यता है कि इस दिन ब्रम्ह्म देव ने सृष्टि की रचना की थी। वहीं ग्रंथों के अनुसार उज्जयिनी (उज्जैन) के राजा विक्रमादित्य ने इसी तिथि से कालगणना के लिए विक्रम संवत् प्रारंभ किया था, जो आज भी हिंदू कालगणना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है और तभी से गुड़ी पड़वा पर्व मनाया जाता है।

इस विक्रम संवत में नववर्ष की शुरुआत चंद्रमास के चैत्र माह के उस दिन से होती है जिस दिन ब्रह्म पुराण अनुसार ब्रह्मा ने सृष्टि रचना की शुरुआत की थी। इसी दिन से सतयुग की शुरुआत भी मानी जाती है। इसी दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। इसी दिन से नवरात्र की शुरुआत भी मानी जाती है। इसी दिन को भगवान राम का राज्याभिषेक हुआ था और पूरे अयोध्या नगर में विजय पताका फहराई गई थी।

मुझे डॅा.वीरप्रतापसिंह सिसोदिया का कहना है कि 1835 में, थामस मैकाले ने बहुत बढ़िया ढंग से ब्रिटिश उपनिवेशिक साम्राज्यवाद के उद्देशों को स्पष्ट कियाः ’’हमें एक ऐसे वर्ग को बनाने की भरसक कोशिश करना चाहिए जो हमारे और जिन पर हम शासन करते हैं, उन लाखों लोगों के बीच दुभाषिया हो सके, एक वर्ग जो खून और रंग में भारतीय हो परंतु स्वाद में, राय में, भाषा और बुद्धिमानी में, अंग्रेज हो।’ Lord Macaulay “let us create a class of people, Indians in their origin and blood but English in their tastes and manners”

मित्रो, 21 मार्च 2015 से भारतीय नववर्ष एवं विक्रम शक संवत्सर का आरंभ होगा ! हिंदू संस्कृति के के अनुसार हमारा नव वर्ष चैत्र मास की शुक्लपक्ष की प्रतिपदा, तदनुसार आँग्ल तिथि 21 मार्च 2015 को पड़ता है।

जागो भारतीय जागो ! जय हिन्द, जय भारत ! वन्दे मातरम !!