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1948 में हिन्दू मुस्लिम दंगा हुवा
एक मुस्लिम लड़का हिन्दुओं के एक गांव में फस गया था एक हिन्दु ने उसे साडी पहनाकर उसके घर ले जाकर छोड़ा ।
लड़का घर के अंदर गया और हिन्दु दरवाजे पर खड़ा था की उसके माँ बाप खुश होकर बधाई देगे
मुस्लिम के माँ बाप ने कहा बेटे तू कैसे बच गया
लड़का बोला एक नेक हिन्दु लड़के ने मुझे साडी पहनाकर घर तक छोड़ा आप लोग उसका धन्यवाद करिये
मुस्लिम लड़के के बाप ने कहा की बेटे हमारे धर्म में किसी का कोई एहसान नही होता हैं ।
तू अपने धर्म का पालन कर जाकर मार दे उस हिन्दु को और अपने लड़के के हाथ में तलवार दे दी ।
मुस्लिम लड़का तलवार लेकर बाहर आया हिन्दु लड़का जो सारी बाते सुन रहा था वह बोला की भाई यह क्या हैं
मुस्लिम लड़के ने कहा की हमारे धर्म में काफिर पर रहम नही किया जाता चाहे वह हमारे घर पर शरण में ही क्यू न आया हो ।
हिन्दु ने कहा की हमने तो तुमारी जान बचाई और तुम हमे ही मार रहे हो कोई बात नही एक गिलास पानी तो पिला दो फिर मार देना मुस्लिम लड़का जैसे पानी लेने के लिए मुड़ा हिन्दु ने तुरन्त उसकी तलवार छीनकर उसकी गर्दन उड़ा दी और घर में घुसकर बोला
की तुम्हारे में शरण में आये को भी नही छोड़ते
और हम गद्दारो को उसके घर में घुसकर काट देते हैं ।
7 मुसलमान को काट कर वह हिन्दु भाई खुनी तलवार लेकर अपने घर गया और अपने बाप को सारी हकीकत बतायी ॥
भिवानी से आये महमलडलेश्वर ने यह सच्ची घटना धर्म संसद हरिद्वार 2016 में बताई
आस्तीन में साप पालोगे तो जहर ही मिलेगा ॥

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✊🚩

पनपते आतंकीयों का समाधान… पूरा लेख पढ़ें..…
🔵🛑⚫😡👇🏿
आज बर्मा में करोड़ो रुपये के बने मस्जिद वीरान पड़े हैं… क्यूंकि देश में मुसलमान देखने को नहीं, कि वहां जाए, और जो है वहां, उसकी तबीयत से ठुकाई हो रही है ।

विराथु जिसके बाद ही लोग जान पाए कि ये महान इंसान कौन है .. और इन्होने क्या कर डाला है … पुरे संसार की मीडिया ने इनका बहिस्कार कर रखा है … मीडिया इनको “बौद्धों का ओसामा बिन लादेन ” पुकारती है .. या सीधा आतंकवादी ही बोल देती है …
बौद्धों के धर्मगुरु विराथू ने पुरे देश को जगाया इस्लाम के खतरे को कुछ इस तरह से समझाया कि लोगों ने सेकुलरिज्म का त्याग कर दिया और हथियार उठा लिए .. इसके पहले तक बौद्ध महात्मा बुद्ध के रास्ते पर चल कर प्रताड़ित हो रहे थे पर विराथू जी ने नया मन्त्र दिया …कहा ..
“अब समय शांत रहने का नहीं है .. खतरे की घंटी बज चुकी है .. ”

ये उनका एक बहुत ही विवादित प्रवचन है .. जिसके बाद बर्मा में .. बौद्धों ने हथियार ले कर आक्रमण कर दिया । हथियार का जवाब हथियार से देने लगे … वहाँ भी सेक्युलर नेता थे तुरंत विराथू जी को सांप्रदायिक घोषित कर के जेल में डाल दिया २५ साल की सजा के साथ … पर विराथू जी के कई विडियो सोशल मीडिया पर तब तक आ चुके थे .. घर घर में लोगों ने सुना और नजरें खुल गयी .. क्यूंकि किसी के बोलने में इतना आकर्षण और ताकत होता है कि आँखों के ऊपर बंधी पट्टी उतर जाती है । हमारे देश में ऐसे बोलने वाले कई हिन्दू साधू संत साध्वियां है .. परन्तु ये लोग कभी इस विषय पर बोलते ही नहीं.. इस्लाम में खास कर ऐसे बोलने वाले लोग आतंकवादी शिविरों में जाकर बोलते हैं .. ये सम्मोहन की तरह है । जिसके बाद एक मुस्लिम किसी गुलाम की तरह हो जाता है … आपको हर उस आदमी से नफरत होने लगती है जो मुस्लिम नहीं है .. यही वजह है की बहुत लोग आपको हमेशा कहेंगे … “एक बार कुरआन पढ़ के तो देखो”

बर्मा के सारे बौद्धों को विराथू जी ने समझाया और सीधे घोषणा की .. अगर देश बचाना है और खुद बचना है .. अगर अपनी लड़कियों को बचाना है तो एक एक मुस्लिम को बाहर करो उसके बाद तो जो हुआ आज वो इतिहास है ..
संसार भर में उनके खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हुए भारत में भी हुए .. लेकिन ९९% लोग भारत के जानते ही नहीं थे कि म्यांमार में ऐसा क्या हो रहा है जिसके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं .. यहाँ मीडिया से सिर्फ एकतरफा न्यूज़ चलाये गए ….
विराथू जी जेल में थे सरकार ने हवा का रुख भांपते हुए विराथू जी को १० साल के बाद जेल से छोड़ दिया और एलान किया कि मुस्लिम इस देश के निवासी नहीं हो सकते .. वो देश छोड़ कर चले जाएँ …खास बात ये थी कि जेल जाने के बाद भी ये डिगे नहीं .. और जेल से निकलते ही एकसूत्री कार्यक्रम, इस देश में सिर्फ बौद्ध रहेंगे ..

रातों रात भगदड़ मच गयी .. पूरा देश खाली हो गया .. जबकि इन लोगों को पाकिस्तान के सारे आतंकवादी संगठन बैकअप दे रहे थे .. बाहर से आतंकी भी आकर लड़ाई लड़ते थे लेकिन .. सब फेल हो गया.. बौद्धों की जीत हुयी ।
आज बर्मा इस्लाम मुक्त देश है .. विराथू जी आज पूरी दुनिया के मीडिया के विलेन जैसे हैं पर बर्मा में वो नायक है ..
⚫🔵🛑⚫🔵🛑
👉काश ऐसे साधू संत हिन्दू धर्म में भी होते !!!……..
⚜🌹🕉🔱🕉🌹⚜

मिस रीमा सिंघ

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महाभारत से पहले कृष्ण भी गए थे दुर्योधन के दरबार में. यह प्रस्ताव लेकर, कि हम युद्ध नहीं चाहते….
तुम पूरा राज्य रखो…. पाँडवों को सिर्फ पाँच गाँव दे दो…
वे चैन से रह लेंगे, तुम्हें कुछ नहीं कहेंगे.
………..बेटे ने पूछा – “पर इतना unreasonable proposal लेकर कृष्ण गए क्यों थे ?
अगर दुर्योधन प्रोपोजल एक्सेप्ट कर लेता तो..?

पिता :- नहीं करता….!
कृष्ण को पता था कि वह प्रोपोजल एक्सेप्ट नहीं करेगा…

उसके मूल चरित्र के विरुद्ध था.

फिर कृष्ण ऐसा प्रोपोजल लेकर गए ही क्यों थे..?

वे तो सिर्फ यह सिद्ध करने गए थे कि दुर्योधन कितना अनरीजनेबल, कितना अन्यायी था.

वे पाँडवों को सिर्फ यह दिखाने गए थे,
कि देख लो बेटा…
युद्ध तो तुमको लड़ना ही होगा… हर हाल में…
अब भी कोई शंका है तो निकाल दो….मन से.
तुम कितना भी संतोषी हो जाओ,
कितना भी चाहो कि “घर में चैन से बैठूँ “…

दुर्योधन तुमसे हर हाल में लड़ेगा ही.

“लड़ना…. या ना लड़ना” – तुम्हारा ऑप्शन नहीं है…”

फिर भी बेचारे अर्जुन को आखिर तक शंका रही…
“सब अपने ही तो बंधु बांधव हैं….”😞

कृष्ण ने सत्रह अध्याय तक फंडा दिया…फिर भी शंका थी..

ज्यादा अक्ल वालों को ही ज्यादा शंका होती है ना 😄

दुर्योधन को कभी शंका नहीथी…
उसे हमेशा पता था कि “उसे युद्ध करना ही है… “उसने गणित लगा रखा था….

हिन्दुओं को भी समझ लेना होगा कि :-
“कन्फ्लिक्ट होगा या नहीं,
यह आपका ऑप्शन नहीं है…

आपने तो पाँच गाँव का प्रोपोजल भी देकर देख लिया…

देश के दो टुकड़े मंजूर कर लिए,

(उस में भी हिंदू ही खदेड़ा गया अपनी जमीन जायदाद ज्यों की त्यों छोड़कर….)

हर बात पर विशेषाधिकार देकर देख लिया….

हज के लिए सबसीडी देकर देख ली,

उनके लिए अलग नियम
कानून (धारा 370) बनवा कर देख लिए…

“आप चाहे जो कर लीजिए, उनकी माँगें नहीं रुकने वाली”

उन्हें सबसे स्वादिष्ट उसी गौमाता का माँस लगेगा जो आपके लिए पवित्र है,
उसके बिना उन्हें भयानक कुपोषण हो रहा है.

उन्हें “सबसे प्यारी” वही मस्जिदें हैं,
जो हजारों साल पुराने “आपके” ऐतिहासिक मंदिरों को तोड़ कर बनी हैं….
उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी उसी आवाज से है
जो मंदिरों की घंटियों और पूजा-पंडालों से है.

ये माँगें गाय को काटने तक नहीं रुकेंगी…
यह समस्या मंदिरों तक नहीं रहने वाली,
यह हमारे घर तक आने वाली है…
हमारी बहू-बेटियों तक जाने वाली है…
आज का तर्क है:-
तुम्हें गाय इतनी प्यारी है तो सड़कों पर क्यों घूम रही है ?
हम तो काट कर खाएँगे….
हमारे मजहब में लिखा है !

कल कहेंगे,
“तुम्हारी बेटी की इतनी इज्जत है तो वह अपना *खूबसूरत चेहरा ढके बिना घर से निकलती ही क्यों है ?

हम तो उठा कर ले जाएँगे.”

उन्हें समस्या गाय से नहीं है,
हमारे “अस्तित्व” से है.

तुम जब तक हो,
उन्हें कुछ ना कुछ प्रॉब्लम रहेगी.

इसलिए हे अर्जुन,
और डाउट मत पालो…
कृष्ण घंटे भर की क्लास बार-बार नहीं लगाते..

25 साल पहले कश्मीरी हिन्दुओं का सब कुछ छिन गया….. वे शरणार्थी कैंपों में रहे, पर फिर भी वे आतंकवादी नहीं बनते….

जबकि कश्मीरी मुस्लिमों को सब कुछ दिया गया….
वे फिर भी आतंकवादी बन कर जन्नत को जहन्नुम बना रहे हैं ।

पिछले साल की बाढ़ में सेना के जवानों ने जिनकी जानें बचाई वो आज उन्हीं जवानों को पत्थरों से कुचल डालने पर आमादा हैं….

इसे ही कहते हैं संस्कार…..
ये अंतर है “धर्म” और “मजहब” में..!!

एक जमाना था जब लोग मामूली चोर के जनाजे में शामिल होना भी शर्मिंदगी समझते थे….

और एक ये गद्दार और देशद्रोही लोग हैं जो खुले आम… पूरी बेशर्मी से एक आतंकवादी के जनाजे में शामिल हैं..!

सन्देश साफ़ है,,,
एक कौम,
देश और तमाम दूसरी कौमों के खिलाफ युद्ध छेड़ चुकी है….
अब भी अगर आपको नहीं दिखता है तो…
यकीनन आप अंधे हैं !
या फिर शत प्रतिशत देश के गद्दार..!!

आज तक हिंदुओं ने किसी को हज पर जाने से नहीं रोका…
लेकिन हमारी अमरनाथ यात्रा हर साल बाधित होती है !
फिर भी हम ही असहिष्णु हैं…..?
ये तो कमाल की धर्मनिरपेक्षता है भाई Jai Bharat 🚩

रीमा सिंग

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सचाई क्या है
जागो ***
“कुत्ती” “कमीनी” “वेश्या” “कुलटा बोल इस भगवा में किसकी रखैल है?”
“अब तक कितनों के बिस्तर पर गई‎ है?”
“किसके इशारे पर सब कर रही है?”
“जिंदगी प्यारी है तो जो मैं कहता हुं कबुल ले बाकी जिंदगी आराम से कटेगी”
यह शब्द सुनकर आपकी त्योरियां जरुर चढ़ गई‎ होगी।

मेरी भी चढ़ गई थी। ऐसे घृणित शब्दों से किसी और को नहीं बल्कि भगवा वस्त्र धारिणी निष्कलंक साध्वी प्रज्ञा दीदी को कलंकित “कांग्रेस”‎ के इशारे पर कांग्रेस‎ का दल्ला मुम्बई ATS हेमंत करकरे के सामने मुम्बई पुलिस व ATS के दोगलों ने नहलाया था। … जिस करकरे को आज शहीद मान कर सम्मान दिया जाता है एक नम्बर का नीच आदमी था…. उसको तो भगवान ऐसी सजा दी कि इसका पूरा परिवार तबाह हो गया… खुद कुत्ते की मौत मारा गया,… औरत केंसर से तड़प तड़प कर मरी बच्चा एक्सीडेंट से खत्म हो गया।

मैं साध्वी दीदी का एक साक्षात्कार देख रहा था ऐसे घृणित शब्दों को इशारे में बताया, बताते हुए उनके नेत्र सजल हो गये। साक्षात्कार देखते हुए क्रोधाग्नि से धधक रहे मेरे आँखो से भी अश्रु की धारा फूट पड़ी “साध्वी दीदी” ने मर्माहत शब्दों में वृत्तान्त सुनाया कि मेरे शरीर का कोई‎ ऐसा अंग नही जिसे चोटिल ना किया गया हो।

जब पत्रकार ने पुछा कि मारने के कारण ही आपके रीढ़ की हट्टी टूट गई‎ थी??
साध्वी दीदी ने कहा, “नहीं, मारने से नहीं, एक जन हमारा हाथ पकड़ते थे एक जन पांव और झूलाकर दीवार की तरफ फेंक देते थे, ऐसा प्राय: रोजाना होता था दीवार से सर टकराकर सुन्न हो जाता था कमर में भयानक दर्द होता था ऐसा करते करते एक दिन रीढ़ की हड्डी टूट गई तब अस्पताल में भर्ती कराया गया।”

साध्वी दीदी ने बताया, “एक दिन तो ऐसा हुआ कि मारते मारते एक पुलिस वाला थक गया तो दुसरा मारने लगा उस दौरान मेरे फेफड़े की झिल्ली फट गई‎ फिर भी विधर्मी निर्दयता से मारता रहा।”…..

साध्वी दीदी ने बताया, “रीढ़ की हड्डी टूटने के बाद मैं बेहोश हो गई‎ थी। जब होश आया तो देखा कि मेरे शरीर से सारा भगवा वस्त्र उतार लिया गया गया था और मुझे एक फ्राक पहनाया गया था।”

साध्वी दीदी ने बताया, “मेरे साथ मेरे एक शिष्य को भी गिरफ्तार किया गया था उसे मेरे सामने लाकर उसे चौड़ा वाला बेल्ट दिया और कहा मार!! अपने गुरु को इस साली को!!” …..

“शिष्य, सकुचाने लगा तो मैं बोली मारो मुझे!! शिष्य ने मजबुरी में मारा तो जरुर मुझे लेकिन नरमी से तब एक पुलिस वाले ने शिष्य से बेल्ट छीन कर शिष्य को बुरी तरह पीटने लगा और बोला ऐसे मारा जाता है।

“साध्वी दीदी ने बताया कि एक दिन कुछ पुरुष‎ कैदियों के साथ मुझे खड़ा करके अश्लील आडियो सुनाया जा रहा था। मेरे शरीर पर इतनी मार पड़ी थी कि मेरे लिए खड़ा रहना मुश्किल था। मैं बोली कि बैठ जाऊँ वो बोले साली शादी मे आई है क्या कि बैठ जायेगी!! मेरी आँख बंद होने लगी मैं अचेत हो गई।

साध्वी दीदी ने बताया, “मेरे दोनों हाथों को सामने फैलवाकर एक चौड़े बेल्ट से मारते थे मेरा दोनो हाथ सूज जाते थे। अँगुलियां भी काम नही करती थी, तब गुनगुना पानी लाया जाता था। मैं अपने हाथ उसमें डालती कुछ आराम होता जब अंगलुियां हिलने डुलने लगती थी। तो फिर से वही क्रिया मेरे पर मार पड़ती थी।

साध्वी जी ने बताया कि मुझे तोड़ने के लिए मेरे चरित्र पर लांछन लगाया क्योंकि लोग जानते हैं कि किसी औरत को तोड़ना है तो उसके चरित्र पर दाग लगाओ! मेरे जेल जाने के बाद यह सदमा मेरे पिताजी बर्दास्त नहीं कर पाये और इस दुनियां से चल बसे। साध्वी जी राहत की सांस लेते हुए कहती हैं मेरे अन्दर रहते ही, एक दुर्बुद्धि दुराचारी हेमंत करकरे को तो सजा मिल गई‎ मिल गई अभी बहुत लोग बाकी हैं

साध्वी दीदी ने बताया, “नौ साल जेल में थी, सिर्फ एक दिन एक महिला ने एक डंडा मारा था, बाकी हर रोज पुरुष ही निर्दयता से हमें पीटते थे।”
पत्रकार ने पूछा, “आपको समझ में तो आ गया होगा कि क्यों आपको इतने बेरहमी से तड़पाया जा रहा था?”

साध्वी जी ने कहा, “हां, भगवा के प्रति उनका द्वेश था। फूटी आंख भी भगवा को नही देखना चाहते थे। भगवा को बदनाम करने का कांग्रेस ने एक सुनियोजित षडयंत्र तैयार किया था।”

साध्वी जी ने बताया कि एक बार कांग्रेस का गुलाम, स्वामी अग्निवेष मुझसे मिलने जेल में आया और बोला, “आप सब कबुल कर लो कि हां, यह सब RSS के कहने पर हुआ है! सरकारी गवाह बन जाओ। चिदम्बरम और दिग्विजय हमारे मित्र हैं। मै आपको छुड़वा दुंगा.”

साध्वी जी ने कहा, “अगर आपकी उनसे घनिष्ठता है और सच में हमें छुड़ाना चाहते हो, तो चिदम्बरम से जाकर बोलो की इमानदारी से जांच करवा ले, क्योंकि मैंने ऐसा कुछ किया ही नही है।”

मित्रों !
सोचने वाली बात यह है कि साध्वी दीदी, ९ साल जेल में रही भाजपा का तीन साल निकाल दो तो ६ साल तक कांग्रेस के कार्यकाल में जेल में रही। इन ६ सालों में कांग्रेस ने “भगवा आतंकवाद” के खिलाफ सबूत नहीं जुटा पाई। इसका सीधा सा अर्थ यह है कि “भगवा” को सिर्फ बदनाम किया जा रहा था।

गैरकानूनी तरीके से ‘मकोका’ भी लगाया गया था ९ साल जेल में भयानक यातना सहने के बाद भी साध्वी दीदी व खुफिया अधिकारी कर्नल पुरोहित जी जब स्वच्छंद हवा में सांस लिए, तो उनके अधरों पर बस एक ही बात थी। “जय हिंद! भारत माता की जय! यह तन राष्ट्र के प्रति समर्पित है।”
और यह कठोर यातना तो “राष्ट्र प्रेम” का श्रृंगार है, खुशी खुशी सहन करेंगे, और एक तरफ कांग्रेस का “रखैल,” दोगला ‘हामिद अंसारी,’ देश के दुसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद पर १० साल तक मलाई चाटता रहा। रिटायरमेंट के दौरान हरामी बोलता है कि हिंदुस्तान असहिष्णु हो गया है।

इसके बाद भी जो हिंदु, “कांग्रेस” की तरफदारी करता है तो तब सोचती हुं कि यह तो हिंदु हो ही नहीं सकते!!
यह दोगले ‘इस्लामिक आतंकवाद’ के दोगली व नाजायज पैदावार हैं।

यह उलेख रजनीश तिवारी राज द्वारा सुदर्शन टीवी के चेयरमैन सुरेश चौह्वाण को साध्वी जी द्वारा दिए गये साक्षात्कार के आधार पर तैयार किया गया है। इस उलेख पर कोई कापी राइट नही है। हिंदुओ में जनजागरण हेतु ज्यादा से ज्यादा आगे तक साध्वी जी की व्यथा को व कलंकित कांग्रेस का भगवा के प्रति षडयंत्र को, लोगों तक पहुंचाए।
जय हिंद, जय भारत!!
🇮🇳🇮🇳✍🏼🙏🏼

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अजमेर शरीफ के दरगाह की सच्चाई:

अजमेर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर इतनी भीड़ थी कि वहाँ की कोई बैंच खाली नहीं थी। एक बैंच पर एक परिवार, जो पहनावे से हिन्दू लग रहा था, के साथ बुर्के में एक अधेड़ सुसभ्य महिला बैठी थी।

बहुत देर चुपचाप बैठने के बाद बुर्खे में बैठी महिला ने बगल में बैठे युवक से पूछा, “अजमेर के रहनेवाले हैँ या फिर यहाँ घूमने आये हैं?”

युवक ने बताया, “जी अपने माता पिता के साथ पुष्कर में ब्रह्मा जी के मंदिर के दर्शन करने आया था।”

महिला ने बुरा मुँह बनाते हुए फिर पूछा, “आप लोग अजमेर शरीफ की दरगाह पर नहीं गये?”

युवक ने उस महिला से प्रतिउत्तर कर दिया, “क्या आप ब्रह्मा जी के मंदिर गयी थीं?”

महिला अपने मुँह को और बुरा बनाते हुये बोली, “लाहौल विला कुव्वत। इस्लाम में बुतपरस्ती हराम है और आप पूछ रहे हैं कि ब्रह्मा के मंदिर में गयी थी।”

युवक झल्लाकर बोला, “जब आप ब्रह्मा जी के मंदिर में जाना हराम मानती हैं तो हम क्यों अजमेर शरीफ की दरगाह पर जाकर अपना माथा फोड़ें।”

महिला युवक की माँ से शिकायती लहजे में बोली, “देखिये बहन जी। आपका लड़का तो बड़ा बदतमीज है। ऐसी मजहबी कट्टरता की वजह से ही तो हमारी कौमी एकता में फूट पड़ती है।”

युवक की माँ मुस्काते हुये बोली, “ठीक कहा बहन जी। कौमी एकता का ठेका तो हम हिन्दुओं ने ही ले रखा है।

अगर हर हिँदू माँ-बाप अपने बच्चों को बताए कि अजमेर दरगाह वाले ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती ने किस तरह इस्लाम कबूल ना करने पर पृथ्वीराज चौहान की पत्नी संयोगिता को मुस्लिम सैनिकों के बीच बलात्कार करने के लिए निर्वस्त्र करके फेँक दिया था।तो, शायद ही कोई हिँदू उस मुल्ले की कब्र पर माथा पटकने जाए।
( बाद में पृथ्वीराज चौहान की वीर पुत्रियों ने मोइनुद्दीन चिश्ती के टुकडे टुकडे कर दिए थे)

पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गोरी को १७ बार युद्ध में हराने के बाद भी उसे छोड़ देता है जबकि एक बार उस से हारने पर चौहान की आँख में जलता हुआ सरिया डाल दिया जिससे वह अंधे हो गए थे। मोहम्मद गौरी पृथ्वीराज चौहान की (आवाज सुनकर उसी दिशा में तीर चलाने) की कला को देखना चाहता था। पृथ्वीराज चौहान के हाथ में तीर आते हैं उन्होंने सीधा गोरी की आवाज पर निशाना साधा और गौरी की गर्दन पर तीर लगने से उसकी मृत्यु हो गई। बाद में मोहम्मद गोरी के सैनिकों ने पृथ्वीराज को बंदी बनाकर मार डाला वे लोग पृथ्वीराज के शव को घसीटते हुए अफ़ग़ानिस्तान ले गये और दफ़्न किया।

चौहान की क़ब्र पर जो भी मुसलमान वहॉ जाता था प्रचलन के अनुसार उनके क़ब्र को वहॉ पे रखे जूते से मारता है। ऐसी बर्बरता कहीं नहीं देखी होगी। फिरभी हम हैं कि…बेवकुफ secular बने फिर रहे है…!
( बाद में शेर सिंह राणा ने अफगानिस्तान जाकर पृथ्वीराज चौहान की कब्र से शव निकालकर उसका अंतिम संस्कार किया और उनकी अस्थियों को हिंदुस्तान लाकर गंगा में प्रवाहित कर दिया)

“अजमेर के ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती को ९० लाख हिंदुओं को इस्लाम में लाने का गौरव प्राप्त है. मोइनुद्दीन चिश्ती ने ही मोहम्मद गोरी को भारत लूटने के लिए उकसाया और आमंत्रित किया था…”

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महारानी पद्मावती को काल्पनिक कहने वाले विकृत मानसिकता के लोग


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#महारानी पद्मावती को काल्पनिक कहने वाले विकृत मानसिकता के लोग
चित्र में जो दिख रहा है यही वो असंख्य नमन करने वाला स्थल है जिसमें महारानी पद्मावती ने म्लेच्छ आक्रान्ताओं से अपनी रक्षा करने के लिए धधकती ज्वाला के कुंड में छलांग लगाई थी। चित्तौड़गढ़ के किले में आज उस कुंड की ओर जाने वाला रास्ता बेहद अंधेरे वाला है जिसपर कोई जाने का साहस नहीं करता । उस रास्ते की दीवारों तथा कई गज दूर भवनों में आज भी कुंड की अग्नि के चिन्ह और उष्णता अनुभव किया जा सकता है । विशाल अग्निकुंड की ताप से दीवारों पर चढ़े हुए चूने के प्लास्टर जल चुके हैं। चित्र में कुंड के समीप जो दरवाज़ा दिख रहा है कहा जाता है की माँ पद्मावती वहीँ से कुंड में कूद गयी थी। स्थानीय लोग आज भी विश्वास के साथ कहते हैं कि इस कुंड से चीखें यदा-कदा सुनायी पड़ती रहती है और सैंकड़ों वीरांगनाओं की आत्माएं आज भी इस कुंड में मौजूद हैं।

वो चीखें आज के युग में एक सबक है, “उन हिन्दू बहनों और बेटियों के लिए जिन पर वर्तमान मलेच्छों की बुरी नज़र है। ”
ये चीखें नहीं एक दहाड़ है , जो यह कहता है की ,”हे हिन्दू पुत्रियाँ हर युगों में इन मलेच्छों से सतर्क रहना। ”
ये चीखें नहीं एक आत्मबल है जो यह कहता है कि,” हे हिन्दू पुत्रियाँ तुम अबला नहीं सबला हो ।”
ये चीखें नहीं एक वेदना है जो यह कहती हैं की, ” हे हिन्दू वीरों और वीरंगनाओं हमें भूल न जाना। ”
महारानी पद्मावती जी हम सहस्त्र जन्म लेकर भी आपका उपकार नहीं चुका पाएँगे।
असंख्य नमन….चित्र में जो दिख रहा है यही वो असंख्य नमन करने वाला स्थल है जिसमें महारानी पद्मावती ने म्लेच्छ आक्रान्ताओं से अपनी रक्षा करने के लिए धधकती ज्वाला के कुंड में छलांग लगाई थी। चित्तौड़गढ़ के किले में आज उस कुंड की ओर जाने वाला रास्ता बेहद अंधेरे वाला है जिसपर कोई जाने का साहस नहीं करता । उस रास्ते की दीवारों तथा कई गज दूर भवनों में आज भी कुंड की अग्नि के चिन्ह और उष्णता अनुभव किया जा सकता है । विशाल अग्निकुंड की ताप से दीवारों पर चढ़े हुए चूने के प्लास्टर जल चुके हैं। चित्र में कुंड के समीप जो दरवाज़ा दिख रहा है कहा जाता है की माँ पद्मावती वहीँ से कुंड में कूद गयी थी। स्थानीय लोग आज भी विश्वास के साथ कहते हैं कि इस कुंड से चीखें यदा-कदा सुनायी पड़ती रहती है और सैंकड़ों वीरांगनाओं की आत्माएं आज भी इस कुंड में मौजूद हैं।

वो चीखें आज के युग में एक सबक है, “उन हिन्दू बहनों और बेटियों के लिए जिन पर वर्तमान मलेच्छों की बुरी नज़र है। ”
ये चीखें नहीं एक दहाड़ है , जो यह कहता है की ,”हे हिन्दू पुत्रियाँ हर युगों में इन मलेच्छों से सतर्क रहना। ”
ये चीखें नहीं एक आत्मबल है जो यह कहता है कि,” हे हिन्दू पुत्रियाँ तुम अबला नहीं सबला हो ।”
ये चीखें नहीं एक वेदना है जो यह कहती हैं की, ” हे हिन्दू वीरों और वीरंगनाओं हमें भूल न जाना। ”
महारानी पद्मावती जी हम सहस्त्र जन्म लेकर भी आपका उपकार नहीं चुका पाएँगे।
असंख्य नमन….
Praveen Gulati 

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नीदरलैण्ड विश्व का सर्वाधिक नास्तिक देश है!!!


नीदरलैण्ड विश्व का सर्वाधिक नास्तिक देश है!!!

अपराध दर इतनी कम, के जेलखाने तक बन्द करने पडे!!!

100% शिक्षित लोग!!!

रहन सहन का अत्यधिक उच्च स्तर!!!

 

और एक हमारा देश है@

रोजाना लोग भगवा, लाल, पीले , Nila , Hara , kala झण्डे लेके घूमते है फिर भी

भयंकर गरीबी, बढती बेरोजगार, हत्या, बलात्कार, भेदभाव, जातीय हिंसा, रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार, गरीबो का शोषण,

हमारा यहाँ आम बात है।

 

 

समाज” के “अनपढ़” लोग  हमारी “समस्या” नहीं है ।

 

“समाज” के “पढे़ लिखे” लोग “गलत” बात का “समर्थन” करने के लिए अपनी “बुध्दि” का उपयोग करते हैं ।

 

ये हमारी “समस्या” है ।