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There is the fact that Lord Krishna fled Dwaraka because of the repeated attacks by Jarasandha and built a fortress amid the sea to escape him. I do not subscribe to the view that there were seven Dwarakas and what is found off Gujarat coast was the latest of Krishna because if you want to escape from an enemy you do not settle very near to where you had been attacked. And the construction of the Por-Bazhyn is of of an Indian fortress and temple. And it is surrounded by water.

via Krishna’s Palace In Siberia Sanskrit Inscription Por-Bazhyn — Ramani’s blog

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હે કૃષ્ણ,

“હે કૃષ્ણ,
તમે જ કહો,
અમારે કરવું કેમ?

રોજ રચાતા કુરુક્ષેત્ર માં,
રોજ અમારે લડવું કેમ?

આ અવઢવમાંથી ઉગારો શ્યામ,
વચન તમારું નિભાવો શ્યામ,

કાં વાંસળીનો જીવનસૂર આપો,
કાં સુદર્શન શિખવાડો શ્યામ”.

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GOD

​I read this today morning and Salute the writer….
👉You relax in an aeroplane though you do not know the pilot, 
👉You relax in a ship though you do not know the captain, 
👉You relax in the train without knowing the motorman,
👉You relax in the bus not knowing the driver,
👉 *Why don’t you relax in your life while you know that God is its controller?*
*Trust your lord!*🙏😇

*He is the best planner!*👌🙂

*Wishing you a Beautiful Life!* 💙👍

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‘ હું પાણીને સ્થિર રાખીશ.’

​મહાભારતના એક પ્રસંગનું

કોઈકે અદભૂત દર્શન કરાવ્યું છે.

મત્સ્યવેધની આગલી રાતે

કૃષ્ણ અને અર્જુન સંવાદ કરે છે.

કૃષ્ણ અર્જુનને અત્યંત

ધીરજપૂર્વક સમજાવે છે :

ત્રાજવા પર સંભાળીને ચઢજે,

પગ બરાબર સંતુલીત રાખજે,

ધ્યાન માછલીની આંખ પર જ

કેન્દ્રિત રાખજે, મનમાં સંપૂર્ણ

એકાગ્રતા રાખજે . . . વગેરે વગેરે.

અર્જુન પૂછે છે : 

બધું મારે જ કરવાનું ? 

તો તમે શું કરશો ?

જવાબ મળે છે : 

જે તારાથી ન થાય એ હું કરીશ.

એમ ?

એવું શું છે જે મારાથી નહીં થાય ? 

એવું તે શું કરશો ?

‘ હું પાણીને સ્થિર રાખીશ.’

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શ્રી કૃષ્ણ જન્મોત્સવ અવસરે

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कृष्ण_शब्द_का_अर्थ

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#कृष्ण_शब्द_का_अर्थ
कृष्ण शब्द के अनेक अर्थ हैं। कृष् धातु का एक अर्थ है खेत जोतना, दूसरा अर्थ है आकर्षित करना। वे जो खींच लेते हैं, वे जो प्रत्येक को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, जो सम्पूर्ण संसार के प्राण हैं- वही हैं कृष्ण। कृष्ण का अर्थ है विश्व का प्राण, उसकी आत्मा। कृष्ण का तीसरा अर्थ है वह तत्व जो सबके ‘मैं-पन’ में रहता है। मैं हूँ, क्योंकि कृष्ण है। मेरा अस्तित्व है, क्योंकि कृष्ण का अस्तित्व है। अर्थात यदि कृष्ण नहीं हो तो मेरा अस्तित्व भी नहीं होगा। मेरा अस्तित्व पूर्णत: कृष्ण पर निर्भर करता है। मेरा होना ही कृष्ण के लक्षण या प्रमाण है।
➡ अगर आप भी अपने बाल गोपाल,अपने घर मंदिर की झांकी,सजावट पेज पर भेजना व् देखना चाह रहे तो नि:संकोच पेज पे पोस्ट कर सकते है
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,हे नाथ नारायण वासुदेवा..
💐👣 #ԶเधेԶเधे 👣💐

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श्रीकृष्ण और बहते दीये

🌼 श्रीकृष्ण और बहते दीये 🌼
🙏लघु कथाएँ🙏

🔸कार्तिक महीने में दीप-दान का चलन है। सभी माताएँ कार्तिक
में नदी में दीप बहाती हैं। मैया यशोदा भी दीप-दान के लिए
तैयार हुई। कन्हैया ने उन्हें देख लिया और साथ जाने की जिद्द
करने लगे। मैया ने उन्हें अपने साथ ले लिया।

🔸जब मैया यमुना जी में दीप बहा रही थीं तो श्रीकृष्ण
यमुनाजी में उतर गए और जहाँ पर घुटने तक पानी था ,
वहाँ पहुँच गए। और दीये पकड़ कर किनारे पर लाने लगे।
मैया यशोदा ने उन्हें देखा और कहा कि ये क्या कर रहे हो ?
उन्होंने कहा कि दीये किनारे लगा रहा हूँ। मैया ने कहा
कि दीप तो बहने के लिए ही हैं।

🔸श्रीकृष्ण कहते हैं कि – बहतों को किनारे लगाना ही तो
मेरा काम है और वही मैं कर रहा हूँ। मैया कहती है कि इतने
असंख्य दीप बहे जा रहे हैं , सब को किनारे किसलिए नहीं
लगाते। तो श्रीकृष्ण कहते हैं कि यही तो राज की बात है।
जो बहते हुए मेरे समीप आ जाता है , मैं उसे ही किनारे लगाता हूँ।

🔸हमारा बहाव भी ईश्वर की ओर होना चाहिए , किनारे
लगाना उसका काम है।

🌼श्रीराधारमणाय समर्पणं🌼