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(ओशो का जबर्दस्त तीखा प्रवचन)
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भारत अकेला देश है जो गौ भक्त है | भारत भी पूरा नहीं सिर्फ हिंदू, ना सिख, ना इसाई, ना जैन, ना मुसलमान, ना पारसी इन सबको छोड़ दो | सिर्फ हिंदू और हिंदू ही सिर्फ भारत नहीं है | हिंदुओं की संख्या तो 20 करोड़ है बाकी 50 करोड़ लोग और भी इस देश में हैं |
यह हिंदुओं की धारणा को बाकी 50 करोड़ लोगों के ऊपर थोपने का किसको अधिकार है? और “विनोवा भावे” ने जो अनशन किया था उसको मैं हिंसा मानता हूं, वह जबरदस्ती है, हिंदुओं की जबरदस्ती | फिर जिन्ना ठीक ही कहता था कि अगर भारत एक रहा तो हिंदू जबरदस्ती करेंगे | वह जबरदस्ती दिखाई पड़ती है, फिर तो जिन्ना ठीक था और गांधी गलत थे | अच्छा किया कि उसने पाकिस्तान तोड़ लिया | फिर तो सीख भी ठीक हैं उनको भी सीखस्थान तोड़ लेना चाहिए, फिर तो ईसाई भी सही हैं उनको भी कहना चाहिए कि हमें इसाईस्थान अलग कर दो और जैनियों को अपना जैनस्थान अलग कर लेना चाहिए और पारसियों को कहना चाहिए बंबई हमारी |
फिर हिंदू अपनी गौ रक्षा करें, जो उनको करना है करें, सब गौ को ले जाए और रक्षा करें, जो उनको करना है करें | यह देश सबका है | इसमें हिंदू धारणाओं को जबरदस्ती नहीं थोपा जा सकता | हिंदू धारणा थोपना है, मगर बातें ऊंची कर रहे हैं, बातें अहिंसा की कर रहे हैं और हिंसा करने का आग्रह है | यह क्या है? “बिनोवा” का अनशन करना कि मैं मर जाऊंगा अगर गौ हत्या पर निषेध नहीं लगाया गया | यह हिंसा की धमकी है, किसी को मारने की धमकी दो या मरने की धमकी दो बात तो एक ही है | किसी की छाती पर छुरा रख दो या अपनी छाती पर छुरा रख लो और कहो कि मैं मर जाऊंगा यह बात तो एक ही है | इसमें कुछ भेद नहीं है, इसमें कुछ अहिंसा नहीं है, यह शुद्ध हिंसा है और जबरदस्ती है | और एक आदमी जबरदस्ती करे और सारे देश पर अपने इरादे थोप देना चाहे यह कैसा लोकतंत्र है?
हिंदुओं को गौ बचानी है बचाएं, कौन मना करता है | कल मुसलमान कहने लगे कि सबका खतना होना चाहिए वह भी खतने के लिए आधार खोज सकते हैं | यहूदियों ने खोज लिए हैं, यहूदियों ने किताबें लिखी हैं कि खतने के बड़े फायदे हैं उन फायदे में एक फायदा यह गिनाया है कि जब व्यक्ति का खतना किया जाता है तो उसकी बुद्धि विकसित होती है और उनके दावे की दुनिया में सबसे ज्यादा नोबेल प्राइज यहूदियों को मिलती है | क्यों? क्योंकि उनके ख़तनें होते हैं और ख़तना जल्दी करनी चाहिए, जितनी जल्दी हो उतना फायदा इसलिए मुसलमान का ख़तना तो जरा देर से होता है उसको यहूदी नहीं मानते | यहूदी तो मानते हैं कि बच्चा पैदा हो और जितनी जल्दी खतना हो उतना अच्छा है क्योंकि उसकी उर्जा जन्म इंद्री से हटकर मस्तिष्क में प्रवेश कर जाती है | क्योंकि जब उसकी जन्म इंद्री की चमड़ी काटी जाती है तो ऊर्जा एकदम सरक जाती है | जन्म इंद्री से मस्तिष्क में और प्रतिभा पैदा हो जाती है | #अगरइसतरहकीबेवकूफ़ियोंकोएकदूसरेकेऊपरथोपनेकाआग्रह शुरू हो जाए तब तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी |
गौ हत्या नहीं होनी चाहिए | क्यों? क्योंकि जीव दया है, तो मच्छर क्यों मारते हो? और यह कैसी जीव दया है? दया करनी हो तो मच्छर पर करो कुछ पता चले क्योंकि गौ को तो तुम शोषण करते हो उसके बछड़ों के लिए जो दूध है उसको खुद पीते हो और कहते हो कि गौ भक्त हूं मैं | गौ को माता कहते हो और उसके असली बच्चों से वंचित करते हो, उसके असली बेटों को भूखा मारते हो | शंभू महाराज दूध पी रहे हैं और नंदी महाराज भूखे बैठे हैं और असली बेटा नंदी महाराज, शंभू महाराज नहीं | नंदी महाराज बैठे देख रहे हैं कि यह क्या हो रहा है, जरा नदियों से तो पूछो तो वह कहेंगे कि बाबा यह दूध हमारे लिए है, अगर तुम्हारी गौ भक्ति इतनी बड़ी है तो अपने स्त्रियों का दूध बछड़े को पिलाओ तो समझ में आएगा गौ भक्ति | यह कैसी गौ भक्ति की दूध पी रहे हो उनका, चूस रहे हो गायों को और बातें कर रहे हो गौ भक्ति की | फिर तो मच्छरों की भक्ति करो, मच्छर भक्त हो जाओ, क्योंकि मच्छर तुम्हारा खून चूसते हैं | तब पता चलेगा भक्ति का | लेट जाओ खाटों पर नंग-धड़ंग, चूसने दो मच्छरों को, खटमलों को, पिलाओ खून और कहो कि यह जीव दया है | तब मैं कहूंगा की यह भक्ति है क्योंकि भक्ति में कुछ तुम दो तब भक्ति है | यह कैसी भक्ति है कि उल्टा ले रहे हो? गायों से तो पूछो कि तुमने उनकी क्या गती कर दी? सारी दुनिया में गायों की हालत बेहतर है भारत को छोड़कर |
भारत अकेला देश है जहां गायों की सबसे दयनीय दसा है, हड्डी-हड्डी हो रही है, मांस सूख गया है और लोग दूध खींचे जा रहे हैं निचोड़े जा रहे हैं निकलता भी नहीं है | कुछ दो पाव निकल आए तो बहुत, शेर-भर निकल आए तो गजब | स्विडन में एक गाय इतना दूध देती है जितना भारत में 40 गाय देती हैं, और स्विडन में कोई लोग गौ भक्त नहीं हैं | स्विट्जरलैंड में कोई गौ भक्त नहीं हैं | अभी यहां मेरे पास सन्यासी हैं, सारी दुनिया से आए हुए हैं, विवेक मुझसे बार-बार कहती है कि अगर आप एक दफा पश्चिम की गाय का दूध पी लें तो फिर गाय का दूध | भारत का दूध तो पीने जैसा ही नहीं है, ना इसमें स्वाद है, क्योंकि वह मुझे कह रही थी कि हमने तो कभी सुना ही नहीं था पश्चिम में की दूध में शक्कर मिलाई जाती है | दूध खुद ही इतना मीठा होता है उसमें शक्कर मिलाने की बात ही बेहूदी है | और दूध इतना गाढ़ा होता है, इतना पौष्टिक होता है और यह कोई गौ भक्त देश नहीं है | लेकिन कारण है उसका, उतनी ही गाय बचाते हैं वह जितनी गायों को ठीक पोषण दिया जा सके, ठीक जीवन दिया जा सके, सुविधा दी जा सके | तुम गायों को क्या दे रहे हो ? और तुम बातें दया की कर रहे हो | यह ज्यादा दया-पूर्ण होगा कि यह मरती हुई गायों को सड़कों पर सड़ने के बजाए, पिंजड़ा पोलो में सड़ने के बजाय मुक्त कर दो, इनकी सड़ी-गली देह से इनको मुक्त कर दो |
यही मैंने कहा था | सुन के अड़चन हो गई बेचैनी हो गई मैंने इतना ही कहा था की भारत उतनी ही गाय बचा ले जितनी गाय बचा सकते हैं हम | जब ज्यादा बचा सकेंगे तो ज्यादा बचा लेंगे | यह दया का काम होगा | लेकिन उन्होंने क्या तरकीब निकाली, उन्होंने यह तरकीब निकाली की इसका तो मतलब यह हुआ कि भारत में सिर्फ 40% लोगों को छोड़कर 60% तो दीन-हीन हैं तो इनकी भी हत्या कर दी जाए? मैं नहीं कहूंगा कि इनकी हत्या कर दी जाए लेकिन अगर तुमको गाय बचानी है तो इनकी हत्या हो जाएगी | तुम इसके लिए जिम्मेवार होगे | अगर भारत में थोड़ी वैज्ञानिक बुद्धि का प्रयोग किया जाए तो भारत की 60% जनता भी सुखी हो सकती है, आनंदित हो सकती है | और अगर मेरी बातें ना सुनी गई और शंभू महाराज जैसे लोगों की बातें सुनी गई तो वह 60% जनता, मैं तो नहीं कहता कि मारी जाए लेकिन प्रकृति मार डालेगी | आकाल में मरेगी, भूख में मरेगी, बाढ़ में मरेगी, बीमारियों में मरेगी | इस सदी के अंत में तुम देख लेना | इस सदी के पूरे होते होते भारत में दुनिया का सबसे बड़ा अकाल पड़ने वाला है | सारे दुनिया के वैज्ञानिक घोषणा कर रहे हैं क्योंकि इस सदी के पूरे होते होते भारत की संख्या चीन से आगे निकल जाएगी | एक अरब की आंकड़ा पार कर जाएगी और एक अरब का आंकड़ा पार करते ही तुम्हारी क्या हालत होगी? अभी ही तुम अधमरे हालत में हो | एक अरब का आंकड़ा पूरा हुआ कि भारत में महा भयंकर बीमारियां, अकाल फैलने वाला है | प्रकृति मारेगी, मुझे मारने की कोई जरूरत नहीं है | मुझे कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है | परमात्मा मारेगा |
अगर उस घटना के पहले कुछ कर सकते हो तो समझने की कोशिश करो | भारत के मन को व्यर्थ के उलझनों में ना उलझाओ, कि गौहत्या बचानी है और शराबबंदी करवानी है और चरखा चलवाना है | इन पागलपन की बातों में ना उलझो, बड़े उद्योग बनाओ विज्ञान ने पूरे साधन खोज दिए हैं, उन साधनों को लाओ | चरखे में मत अटके रहो |
उतनी ही गाय बचा लो जितनी तुम अभी बचा सकते हो | हां, कल जब हम ज्यादा बचा सकेंगे तो ज्यादा बचाएंगे | पहले आदमी को बचाओ फिर दूसरी बात है, सबसे ऊपर मनुष्य का सत्य है उसके ऊपर कुछ भी नहीं | अगर मनुष्य को बचाने के लिए और सब भी नष्ट करना पड़े तो मैं करने को तैयार हूं | लेकिन मनुष्य को बचाना जरूरी है क्योंकि मनुष्य बच जाए तो शेष सबको पुनर्जीवित किया जा सकता है | लेकिन अगर मनुष्य मर जाए तो कौन तुम्हारी गाय बचाएगा? और कौन तुम्हारी भैंस बचाएगा? और कौन तुम्हारी धर्म और संस्कृति और महानतम बातों को बचाएगा? कौन तुम्हारे वेद, उपनिषद, गुरु-ग्रंथ को बचाएगा? यह पागलपन की बातों को छोड़ो | यह पागलपन की बातों को मैं सीधा पागलपन कह देता हूं इससे उनको एकदम आग लग जाती है | लोगों को थोड़े जीने की स्वतंत्रता, थोड़ा सांस लेने की स्वतंत्रता दो | वह भी नहीं हो पा रहा है, खाने पीने की तक स्वतंत्रता नहीं है |
मैं शराब का विरोधी हूं लेकिन शराबबंदी का पक्षपाती नहीं हूं | क्योंकि यह तो व्यक्ति का निजी स्वतंत्रता है अगर कोई व्यक्ति शराब पीना ही चाहता है तो उसे पीने का हक है यधपि हमें फिक्र करनी चाहिए कि उसे पूरी तरह ज्ञात हो कि शराब के क्या क्या नुकसान है | देश में हवा होनी चाहिए कि शराब के नुकसान क्या क्या है | लेकिन फिर भी कोई तय करे पीने का तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में उस पर जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए |
किसी एक आदमी को क्या हक है? “मोरारजी देसाई” शराब के विरोध में हो सकते हैं लेकिन उनको क्या हक है कि अपनी जिद को अपनी हट को सारे देश की छाती पर थोप दें? कल समझ लो कोई शराबी मुल्क का प्रधानमंत्री हो जाए और कहे कि सब को शराब पीना पड़ेगा तब तुम कहोगे कि यह कैसा लोकतंत्र है हुआ | तुम्हें पीना हो पियो, न पीना हो न पियो, तुम्हें जो ठीक लगता है उसका प्रचार करो, उसका हवा पैदा करो, लोकमत बनाओ लेकिन जबरदस्ती क्यों? मैं कोई गौ हत्या का पक्षपाती नहीं हूं लेकिन फिर भी इस तरह की धमकियां देना हिंसात्मक है | बकरों की हत्या हो “बिनोवा जी” को कोई फर्क नहीं, “विनोवा जी” जरा अपने गुरु महात्मा गांधी को याद करो, जिंदगी भर बकरी का दूध पीकर जिए | बकरियां कटती रहे, बकरे कटते रहे कोई मतलब नहीं | बकरी-बकरे जैसे मुसलमान हैं, गाय हिंदू है | यह भी खूब रहा | बकरे बकरियों को यह पता ही नहीं कि वह कब मुसलमान हो गए |
हिंसा नहीं होनी चाहिए | लेकिन इसका वातावरण पैदा करो फिर भी अगर लोग कुछ मांसाहार करना ही चाहते हैं तो उनको जबरदस्ती से रोकना तो गलती बात है | फिर तो कल अगर कोई जैन सत्ता में होगा तो वह कहेगा कि मछली भी मत खाओ, फिर तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी | वह कहेगा कि प्याज भी मत खाओ, आलू भी नहीं क्योंकि जैन धर्म में जमीन के नीचे गड़ी हुई सब्जियां वर्जित है | उन्हें खाने से पाप होता है | तो आलू, मूली, गाजर सब पाप |
प्रत्येक को अपने ढंग से जीने दो, लोकतंत्र का अर्थ ही यही होता है जब तक कि कोई व्यक्ति किसी दूसरे के जीवन में बाधा ना डालने लगे तुम बाधा ना बनो | लोकतंत्र का अर्थ नकारात्मक होता है |
और जो करने योग्य है वह तो करेंगे नहीं, संततिनिमन होना चाहिए, वह तो करेंगे नहीं | शराबबंदी होना चाहिए, जैसे शराब बंद हो जाएगी तो देश की समस्याएं हल हो जाएंगी | तुम सोचते हो गरीबी मिट जाएगी, बीमारी मिट जाएगी, अशिक्षा मिट जाएगी, गौ-वध बंद हो जाएगा तो | तुम सोचते हो समस्याएं मिट जाएंगी, गरीबी मिट जाएगी, एकदम धन की वर्षा हो जाएगी | अगर ऐसा होता तो अमेरिका जैसा देश को तो दुनिया का सबसे गरीब देश होना चाहिए | क्योंकि गौ हत्या चलती है | #लेकिनयहतरकीबेंहैतुम्हारेमनकोउलझानेकी, गौ हत्या की बंदी होनी चाहिए यह सुनकर हिंदू खुश हो जाता हैं, वोट दे देता है | गौ हत्या के होने से ना होने से कोई समस्या का हल नहीं है और याद रखना मैं यह नहीं कह रहा हूं कि गौ हत्या होनी चाहिए लेकिन एक वातावरण होना चाहिए, सुसंस्कार की एक हवा पैदा होनी चाहिए, जोर जबरदस्ती नहीं |
आज इतना ही |

ओशो🙏🏻🌿🌷
दिनांक 10 अक्टूबर 1980 | श्री ओशो आश्रम पुणे

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🌸🌼 गाय का अर्थतंञ और
किसान का स्वावलंबन 🌸🌺

गौ एक फायदे अनेक

डॉ. शरद कबले, सुरत, गुजरात 🌴🌴

मीञो , प्रतीदिन एक गाय को जादा से जादा ३० किलो चारा चाहिए

२० किलो हरा चारा एवम् १० किलो सुखा चारा

मतलब प्रती वर्ष ३६५*१०= ३६५० किलो सुखा चारा

ईस चारे का जादा से जादा मुल्य ३६५० /- रूपये है

जो की किसान का अपने खेत का ही होगा

अब रही बात हरे चारे की तो समझीए मेहंगा विकल्प भी चुने तो हायड्रोपोनीक चारा एक बढीया विकल्प है

प्रतीदिन २० किलो हायड्रोपोनीक चारा हेतू २ किलो गेव्हू / मका चाहिए

मतलब सालाना ३६५*२ = ७३० किलो

१५०० रू. प्रती क्वींटल के हिसाब से ईसका मुल्य हूआ ७३०*१५ = १०,६५०
कुल खर्च १०,६५०+ ३,६५० = १४,३००/-

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कुल आय
१) गौ मुञ कमसे कम ३ से ४ लिटर प्रती दिन

मतलब कम से कम १००० लिटर प्रती वर्ष

जैविक व प्राकृतीक खेती कर रहे किसानो को गौ मुञ का महत्व पता ही है

शुध्द देसी गाय का जो की रसायन मुक्त चारा खाती है ऐसी गौ माता का गौमुञ का कम से कम मुल्य १० रू प्रती लीटर चल ही रहा है

ईसी गौ मुञ से बना अर्क २०० रू प्रती लीटर मीलता है
पर हम यहा केवल गौ मुञ की बात करेंगे जो की कृषी मे ईस्तमाल होगा !
मुल्य १०००१० = १०,०००/- प्रती वर्ष
एक गौ से प्रतीदिन गोबर कम से कम १० किलो मीलेगा
ईसमे गाय का बचा हूआ न खाया हूआ चारा
+ कीचन वेस्ट से बायोगेस बनकर
कमसे कम १० किलो स्लरी खाद (Solid) मीलेगा
स्लरी खाद का महत्व तो सभी जानते ही है
ईस खाद का मुल्य ३ रू प्रती किलो
मतलब १०
३ = ३० रू. प्रतीदिन
मतलब ३०*३६५ = १०,९५०/-
ईसतरह कुल आय = १०,९५०+ १०,०००= २०९५०
+ गोबर गेस का प्रती माह ५०० के मुताबीक
६००० प्रती वर्ष
मतलब कुल आय २६,९५० /-

और कुल खर्च १४,३००/-

१२,६५०/-
ईसमे पाणी का खर्च भी यदी जोडते है
तो भी २० लीटर प्रतीदिन *३६५ = ७३०० लीटर पाणी का खर्च टेंकर से लाए तो भी
जादा से जादा १००० रू होता है

तब भी ११,६५० का नेट फायदा प्रती वर्ष
मतलब २००० प्रती माह फायदा

ईसका मतलब दुध न देनेवाली गाय से भी किसान को प्रती माह कम से कम २००० का अतीरीक्त फायदा ही होगा

और यदि दुध देनेवाली गौ माता हो तो फीर तो
+ दुध, दही ,घी और छाछ का मुल्य तो आप सब जानते ही है

ना खाद खरिदने की जरूरत
ना ही किटनाशक
ना रसोई का सरकारी सीलेंडर
ना ही मेंहगी दवाईया
( यदि गौ मुञ अर्क पीया जाए तो बीमारीया दूर ही रहती है )
ना दुध खरिदना पडेगा
ना घी ना ही छाछ

मतलब आपकी कृषी भी शुध्द खाद से समृध्द और आप स्वावलंबी भी बनेंगे
जादा जाणकारी के लिए आप हमारे टेलिग्राम पर जहारमूक्त खेती ग्रुप से जुडीये.

🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼
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गाय का दैशी देशी गाय का देशी धी मे फर्क है ।।

भारतीय गौमाता के धी के महत्व पडीयै ;-
भारतीया देशी गाय के घी से होने वाले लाभ …

1.गाय का घी नाक में डालने से पागलपन दूर होता है।
2.गाय का घी नाक में डालने से एलर्जी खत्म हो जाती है।
3.गाय का घी नाक में डालने से लकवा का रोग में भी उपचार होता है।
4.(20-25 ग्राम) घी व मिश्री खिलाने से शराब, भांग व गांझे का नशा कम हो जाता है।
5.गाय का घी नाक में डालने से कान का पर्दा बिना ओपरेशन के ही ठीक हो जाता है।
6.नाक में घी डालने से नाक की खुश्की दूर होती है और दिमाग तरोताजा हो जाताहै।
7.गाय का घी नाक में डालने से कोमा से बाहर निकल कर चेतना वापस लोट आती है।
8.गाय का घी नाक में डालने से बाल झडना समाप्त होकर नए बाल भी आने लगते है।
9.गाय के घी को नाक में डालने से मानसिक शांति मिलती है, याददाश्त तेज होती है।
10.हाथ पाव मे जलन होने पर गाय के घी को तलवो में मालिश करें जलन ठीक होता है।
11.हिचकी के न रुकने पर खाली गाय का आधा चम्मच घी खाए, हिचकी स्वयं रुक जाएगी।
12.गाय के घी का नियमित सेवन करने से एसिडिटी व कब्ज की शिकायत कम हो जाती है।
13.गाय के घी से बल और वीर्य बढ़ता है और शारीरिक व मानसिक ताकत में भी इजाफा होता है
14.गाय के पुराने घी से बच्चों को छाती और पीठ पर मालिश करने से कफ की शिकायत दूर हो जाती है।
15.अगर अधिक कमजोरी लगे, तो एक गिलास दूध में एक चम्मच गाय का घी और मिश्री डालकर पी लें।
16.हथेली और पांव के तलवो में जलन होने पर गाय के घी की मालिश करने से जलन में आराम आयेगा।
17.गाय का घी न सिर्फ कैंसर को पैदा होने से रोकता है और इस बीमारी के फैलने को भी आश्चर्यजनक ढंग से रोकता है।
18.जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक की तकलीफ है और चिकनाइ खाने की मनाही है तो गाय का घी खाएं, हर्दय मज़बूत होता है।
19.देसी गाय के घी में कैंसर से लड़ने की अचूक क्षमता होती है। इसके सेवन से स्तन तथा आंत के खतरनाक कैंसर से बचा जा सकता है।
20.घी, छिलका सहित पिसा हुआ काला चना और पिसी शक्कर (बूरा) तीनों को समान मात्रा में मिलाकर लड्डू बाँध लें। प्रातः खाली पेट एक लड्डू खूब चबा-चबाकर खाते हुए एक गिलास मीठा गुनगुना दूध घूँट-घूँट करके पीने से स्त्रियों के प्रदर रोग में आराम होता है, पुरुषों का शरीर मोटा ताजा यानी सुडौल और बलवान बनता है.
21.फफोलो पर गाय का देसी घी लगाने से आराम मिलता है।
22.गाय के घी की झाती पर मालिस करने से बच्चो के बलगम को बहार निकालने मे सहायक होता है।
23.सांप के काटने पर 100 -150 ग्राम घी पिलायें उपर से जितना गुनगुना पानी पिला सके पिलायें जिससे उलटी और दस्त तो लगेंगे ही लेकिन सांप का विष कम हो जायेगा।
24.दो बूंद देसी गाय का घी नाक में सुबह शाम डालने
से माइग्रेन दर्द ठीक होता है।
25.सिर दर्द होने पर शरीर में गर्मी लगती हो, तो गाय के घी की पैरों के तलवे पर मालिश करे, सर दर्द ठीक हो जायेगा।
26.यह स्मरण रहे कि गाय के घी के सेवन से कॉलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता है। वजन भी नही बढ़ता, बल्कि वजन को संतुलित करता है ।यानी के कमजोर व्यक्ति का वजन बढ़ता है, मोटे व्यक्ति का मोटापा (वजन) कम होता है।
27.एक चम्मच गाय का शुद्ध घी में एक चम्मच बूरा और 1/4 चम्मच पिसी काली मिर्च इन तीनों को मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय चाट कर ऊपर से गर्म मीठा दूध पीने से आँखों की ज्योति बढ़ती है।
28.गाय के घी को ठन्डे जल में फेंट ले और फिर घी को पानी से अलग कर ले यह प्रक्रिया लगभग सौ बार करे और इसमें थोड़ा सा कपूर डालकर मिला दें। इस विधि द्वारा प्राप्त घी एक असर कारक औषधि में परिवर्तित हो जाता है जिसे त्वचा सम्बन्धी हर चर्म रोगों में चमत्कारिक कि तरह से इस्तेमाल कर सकते है। यह सौराइशिस के लिए भी कारगर है।
29.गाय का घी एक अच्छा (LDL) कोलेस्ट्रॉल है। उच्च कोलेस्ट्रॉल के रोगियों को गाय का घी ही खाना चाहिए। यह एक बहुत अच्छा टॉनिक भी है।
30.अगर आप गाय के घी की कुछ बूँदें दिन में तीन बार, नाक में प्रयोग करेंगे तो यह त्रिदोष (वात पित्त और कफ) को संतुलित करता है। वंदे गौ मातरम् ।।

पंचगव्य से जुडे हूये उत्पाद प्राप्त करे ।।
गौधाम पंथमेडा सोजत पाली राज
मो नं-9549470009

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जानिये क्यों पास नहीं हुआ आज तक गौहत्या रोकने का कोई बिल ?


जानिये क्यों पास नहीं हुआ आज तक गौहत्या रोकने का कोई बिल ?

भारत मे गाय काटने का इतिहास !
अंग्रेज़ बहुत चालक थे ! किसी भी गलत काम को करने से पहले उसको कानून बना देते थे फिर करते थे और कहते थे हम तो कानून का पालन कर रहे हैं !!

भारत मे पहला गौ का कत्लखाना 1707 ईस्वी ने रॉबर्ट क्लाएव ने खोला था और उसमे रोज की 32 से 35 हजार गाय काटी जाती थी ! तो कत्लखाने के size का अंदाजा लगा सकते हैं ! और तब हाथ से गाय काटी जाती थी ! तो सोच सकते हैं कितने कसाई उन्होने रखे होंगे !
आजादी के 5 साल बाद 1952 मे पहली बार संसद मे ये बात उठी कि गौ रक्षा होनी चाहिए ! गाय के सभी कत्लखाने जो भारत मे अंग्रेज़ो ने शुरू किए थे बंद होने चाहिए ! और यही गांधी जी कि आत्मा को यही श्र्द्धांजलि होगी ! क्यूकि ये उनके आजाद भारत के सपनों मे से पहले नंबर पर था !

तो गांधी के परम शिष्य नेहरू खड़ा हुआ और बोला चलो ठीक है अगर गौ रक्षा का कानून बनना चाहिए तो इस पर संसद मे प्रस्ताव आना चाहिए ! तो संसद मे एक सांसद हुआ करते थे महावीर त्यागी वो आर्य समाजी थे और सोनीपत से अकेले चुनाव लड़ा करते थे !सबसे पहला चुनाव 1952 मे हुआ और वो बहुत भयंकर वोटो से जीत कर आए थे !

तो महावीर त्यागी ने कहा ठीक मैं अपने नाम से प्रस्ताव लाता हूँ ! तो प्रस्ताव आया उस पर बहस हुई ! बहस के बाद तय किया कि वोट किया जाय इस पर ! तो वोट करने का दिन आया !
तब पंडित नेहरू ने एक ब्यान दिया !जो लोकसभा के रेकॉर्ड मे है आप चाहे तो पढ़ सकते हैं ! नेहरू ने कहा अगर ये प्रस्ताव पारित हुआ तो मैं शाम को इस्तीफा दे दूंगा !

मतलब ?

गौ रक्षा अगर हो गई इस देश मे! तो मैं प्रधानमंत्री नहीं रहूँगा ! परिणाम क्या हुआ जो कांग्रेसी नेता संसद मे गौ रक्षा के लिए वोट डालने को तैयार हुए थे नेहरू का ये वाक्य सुनते ही सब पलट गए ! तो उस जमाने मे क्या होता था कि नेहरू जी अगर पद छोड़ दे तो क्या होगा ? क्यूंकि वल्ब भाई पटेल का स्वर्गवास हो चुका था !
तो कांग्रेसी नेताओ मे चिंता रहती थी कि अगर नेहरू जी भी चलेगे फिर पार्टी का क्या होगा और पता नही अगली बार जीतेंगे या नहीं जीतेंगे ! और उस समय ऐसी बात चलती थी nehru is india india is नेहरू !
(और ये कोंग्रेसीओ कि आदत है indra is india india is indra )
तो बाकी कोंग्रेसी पलट गए और संसद मे हगामा कर दिया और गौ रक्षा के कानून पर वोट नहीं हुआ !

और अगले दिन महावीर त्यागी को सब ने मजबूर कर दिया और उनको प्रस्ताव वापिस लेना पड़ा !
महावीर त्यागी ने प्रस्ताव वापिस लेते समय भाषण किया और बहुत ही जबर्दस्त भाषण किया ! उन्होने कहा पंडित नेहरू मैं तुमको याद दिलाता हूँ !कि आप गांधी जी के परम शिष्य है और गांधी जी ने कहा था भारत आजाद होने के बाद जब पहली सरकार बनेगी तो पहला कानून गौ रक्षा का बनेगा ! अब आप ही इस से हट रहे है तो हम कैसे माने कि आप गांधी जी के परम शिष्य है ?
और उन्होने कहा मैं आपको आपके पुराने भाषणो कि याद दिलाता हूँ ! जो आपने कई बार अलग अलग जगह पर दिये है ! और सबमे एक ही बात काही है कि मुझे कत्लखानों से घिन्न आते इन सबको तो एक मिनट मे बंद करना चाहिए! मेरी आत्मा घबराती है ये आपने कितनी बार कहा लेकिन जब कानून बनाने का समय आया तब आप ही अपनी बात से पलट रहे है?

नेहरू ने इन सब बातों को कोई जवाब नहीं दिया ! और चुप बैठा रहा !और बात आई गई हो गई ! फिर एक दिन 1956 मे नेहरू ने सभी मुख्य मंत्रियो को एक चिठी लिखी वो भी संसद के रेकॉर्ड मे है ! अब नेहरू का कौन सा स्वरूप सही था और कौन सा गलत ! ये तय करने का समय आ गया हैं !
जब वे गांधी जी के साथ मंचपर होते थे तब भाषण करते थे कि क्त्ल्खनों के आगे से गुजरता हूँ तो घिन्न आती है आत्मा चीखती है ! ये सभी क्त्ल्खने जल्द बंद होने चाहिए !और जब वे प्र्धानमतरी बनते है तो मुख्य मंत्रियो को चिठी लिखते हैं ! कि गाय का कत्ल बंद मत करो क्यूंकी इससे विदेशी मुद्रा मिलती है !

उस पत्र का अंतिम वाक्य बहुत खतरनाक था उसमे नेहरू लिख रहा है मान लो हमने गाय ह्त्याबंद करवा दी ! और गौ रक्षा होने लगी तो सारी दुनिया हम पर हसे गई कि हम भारत को 18 व शताब्दी मे ले जा रहे हैं ! !
अर्थात नेहरू को ये लगता था कि गाय का कत्ल होने से देश 21 वी शताब्दी मे जा रहा है ! और गौ रक्षा होने से 18 वी शताब्दी कि और जाएगा ! राजीव भाई का हरद्य इस पत्र को पढ़ कर बहुत दुखी हुआ !राजीव भाई के एक बहुत अच्छे मित्र थे उनका नाम था रवि राय लोकसभा के अधक्षय रह चुके थे ! उनकी मदद से ये पत्र मिला ! संसद कि लाएब्रेरी मे से ! और उसकी फोटो कॉपी रख ली !!

अब आगे कि बात करे नेहरू के बाद से आजतक गाय ह्त्या रोकने का बिल पास क्यूँ नहीं हुआ !?

दस्तावेज़ बताते हैं इसके बाद के दो ऐसे प्रधानमंत्री हुए जिनहोने पूरी ईमानदारी से गौ ह्त्या रोकने का कानून लाने की कोशिश की ! उनमे से एक का नाम था श्री लाल बहादुर शास्त्री और दूसरे श्री मुरार जी देसाई !!
श्री मुरार जी भाई ये कानून पास करवा पाते कि उनकी सरकार गिर गई ! या दूसरे शब्दो मे कहे सरकार गिरा दी गई !
क्योंकि वही एक मात्र ऐसे प्रधान मंत्री थे ! जिनहोने बहुत हिम्मत वाला काम किया था अमेरिका कि कंपनी coca cola को 3 दिन का नोटिस दिया और भारत से भागा दिया ! और ऐसा नोटिस केवल coco cola को नहीं बल्कि एक और बड़ी विदेशी कंपनी hul(hindustaan uniliver ) को भी दिया और ऐसे करते करते काफी विदेशी कंपनियो को नोटिस जारी किया कि जल्दी से जल्दी तुम भारत छोड़ दो !

इसके इलवा उन्होने एक और बढ़िया काम किया था गुजरात मे शराब पर प्रतिबंध लगा दिया ! और वो आजतक है वो बात अलग है कि black मे कहीं शराब मिल जाती है पर कानूनी रूप से प्रतिबंध है ! और उनहोने कहा था ऐसा मैं पूरा भारत मे करूंगा और जल्दी से गौ रक्षा का कानून भी लाऊँगा और गौ ह्त्या करने वाले को कम से कम फांसी कि सजा होगी !
तो देश मे शराब बेचने वाले,गौ ह्त्या करने वाले और विदेशी कंपनिया वाले! ये तीनों l lobby सरकार के खिलाफ थी इन तीनों ने मिल कर कोई शयद्त्र रचा होगा जिससे मुरार जी भाई की सरकार गिर गई !!

लालबहादुर शास्त्री जी ने भी एक बार गौ ह्त्या का कानून बनाना चाहा पर वो ताशबंद गए ! और फिर कभी जीवित वापिस नहीं लोटे !!
और अंत 2003 मे श्री अटल बिहारी वाजपायी की NDA सरकार ने गौ ह्त्या पर सुबह संसद मे बिल पेश किया और शाम को वापिस ले लिया !!
क्यू ?
अटल जी की सरकार को उस समय दो पार्टिया समर्थन कर रही थी एक थी तेलगु देशम और दूसरी त्रिमूल कॉंग्रेस ! दोनों ने लोकसभा मे कहा अगर गौ ह्त्या पर कानून पास हुआ तो समर्थन वापिस !!

बाहर मीडिया वालों ने ममता बेनर्जी से पूछा की आप गौ ह्त्या क्यूँ नहीं बंद होने देना चाहती ?
ममता बेनर्जी ने कहा गाय का मांस खाना मे मौलिक अधिकार है
कोई कैसे रोक सकता है ?

तो किसी ने कहा आप तो ब्राह्मण है तो ममता ने कहा बेशक हूँ !!
तो अंत वाजपाई जी को अपनी सरकार बचाना गौ ह्त्या रोकने से ज्यादा बड़ा लगा ! और उन्होने बिल वापिस ले लिया !
फिर 2003 के बाद कॉंग्रेस आ गई ! इससे तो वैसे कोई अपेक्षा नहीं कि जा सकती! गाय ह्त्या रोकना तो दूर मनमोहन जी ने भारत को दुनिया मे गाय का मांस निर्यात करने वाले देशो कि सूची मे तीसरे नंबर पर ला दिया है!

वर्तमान भारत में प्रतिवर्ष एक करोड़ से अधिक गायों की हत्या होती है तथा एक लाख टन गौमांस विदेशों में निर्यात किया जा रहा है।

संविधान में किये गए वादे और अनेकों सरकारों द्वारा बार-बासर किये गये कोरे आश्वासन

गौ रक्षा एवं विकास के लिए तुरन्त उठाये जाने योग्य क़दम।
गौरक्षा एवं विकास विषय को समवर्ती सूची में लाकर केन्द्रीय कानून बनाकर गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया जाये तथा किसी भी आयु की गाय, साँड, बछिया अथवा बैल की हत्या मनुष्य की हत्या के बराबर दंडनीय अपराध घोषित किया जाये तथा गौमांस का निर्यात अविलम्ब बन्द किया जाये।
गौरक्षा एवं हित के लिए बाकायदा केन्द्रीय मंत्रालय एवं मंत्री नियुक्त किया जाना चाहिए।
प्रत्येक ग्राम व नगर के पाय पर्याप्त गोचर भूमि हो।
सरकारी पशु चिकित्सालयों तथा गर्भादान केन्द्रों में विदेशी नस्ल के सांडों के वीर्य से कृत्रिम गर्भादान अविलम्ब बन्द किया जाये।
गौवंश के व्यापार को सरकार अपने हाथों में लेकर स्वायशासी निगम बनाकर उनके हाथों में दिया जाये।

गौवंश से प्राप्त तमाम औषद्यीयों के व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ साथ उसके करमुक्त भी किया जाये जिससे लोग गायों की सेवा कर उनसे अधिकाधिक औषद्यीयां बनाकर जनसेवा कर सकें क्योंकि गौमूत्रा समेत गाय के दूध एवं अन्य उत्पादों से कई असाध्य बीमारियों के शत प्रतिशत सही होने के कई प्रमाण सामने आ चुके हैं
गौ को राष्ट्रमाता अथवा राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए।
गौरक्षा, संरक्षण पालन-पोषण की व्यवस्था को शैक्षणिक पाठयक्रम में शामिल किये जाने की भी सुविधा प्राप्त कराई जाये।
गायों की व्यापक देखरेख करने के लिए चिकित्सालयों के अलावा भारत के प्रत्येक नगर में एक विभाग खोला जाये जिसमें अधिकारी टोल, सड़क अथवा अन्य स्थानों पर मिलने वाली लावारिस गौ को गौशालाओं में ले जाने की व्यवस्था कर सकें। जिनसे वह किसी गौहत्यारें के चंगुल में न पड़ें।

यदि हम वेद पुराणों की बात को मानें तब भी कई बातें आज सच साबित हो रही हैं। अनेक पुराणों में स्पष्ट रूप से लिखा है कि गौहत्या से वातावरण में तनाव पैदा होता है। सभी देवी-देवता, पृथ्वी, जल, आकाश, वायु, अग्नि और परमात्मा का कोप मानव और पर्यावरण व वातावरण पर पड़ता है जिससे सूखा, बाढ़, भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदायें आती हैं।

अत: माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय मोदी जी से निवेदन है कि अब वे अपनी गौमाता की रक्षा और सेवा के लिए शीघ्रातिशीघ्र उपरोक्त बातों को संज्ञान में लेते हुए निश्चय ही ठोस कदम उठायेंगे। अब आपको तय करना है की गौ ह्त्या रोकने का बिल संसद मे कैसे पास करवाएँगे ?

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नेहरू गौ मांस खाते थे
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गांधी टोपी रहस्य
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निओ दिप

एक गाय के जान की कीमत
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उशीनगर में एक पुरुवंशी राजा हुये जिनका नाम था ‘शिवि’. वे बड़े दयालु और परोपकारी थे और उनकी करुणा इंसान तो इंसान पशु-पक्षियों तक के लिये भी थी.एक बार देवराज इंद्र और अग्नि देव ने उनकी परीक्षा लेने का निश्चय किया और दोनों क्रमशः बाज और कबूतर का रूप बनाकर उनके राजमहल में घुस गये. कबूतर बने अग्नि-देव झट से जाकर राजा शिवि की गोद में गिर गये और कातर स्वर में उन्हें ताकने लगे. उधर पीछे से बाज बने इंद्रदेव भी आ गये और आकर कहा, हे राजन ! ये कबूतर मेरा आहार है, मुझे वापस दे दो क्योंकि बड़ी देर से इसका पीछा कर रहा हूँ.

राजा ने उससे कहा; चूँकि ये कबूतर अभी मेरा शरणागत है इसलिये मैं कभी भी तुमको इसे नहीं दूँगा. इस पर बाज कहने लगा, ‘महाराज ! शरणागत की रक्षा करना आपका धर्म होगा पर मैं भी आपकी ही प्रजा हूँ और अगर आप मेरा आहार छीनते हो तो आप मेरे साथ अन्याय करोगे. अगर आप इस कबूतर को छोड़ दो मैं और मेरा परिवार भूखों मरने से बच जायेगा और अगर आपने ये नहीं किया तो मेरे और मेरे भूखे बच्चों की आह आपको लगेगी. अतः हे राजन ! आप पाप न करें और मेरा आहार मुझे सौंप कर अपने धर्म का पालन करें. राजा तो हरेक के लिये करुणा रखते थे तो उन्होंने बाज से कहा, देखो अपने शरणागत को तो मैं तुम्हें कदापि नहीं दे सकता पर तुम्हारे आहार के लिए इसके स्थान पर मैं अपना मांस तुम्हें देता हूँ. तुम भरपेट खा लो और तृप्त हो जाओ. बाज सहमत हो गया पर कहा, हे राजन ! आप कबूतर के वजन बराबर अपना मांस मुझे दे दीजिये इससे अधिक की आवश्यकता भी मुझे नहीं है.

राजा को उसकी बात से बड़ी प्रसन्नता हुई और बाज से कहा- यह आपने बड़ी कृृपा की. आज मेरे इस नश्वर शरीर से अविनाशी धर्म की और इस निरीह प्राणी की रक्षा हो रही है.

उनकी बात सुनते ही पूरे राज्य में कोलाहल मच गया कि ये कैसी अद्भुत बात है कि एक पक्षी के लिये आज एक राजा अपने शरीर का मांस काटकर बाज को देने जा रहा है. नगर की सारी प्रजा ये अद्भुत दृश्य देखने को एकत्रित हो गई. तराजू मंगाया गया. एक पलड़े में कबूतर को बैठाया गया और दूसरे पलड़े पर राजा ने अपने शरीर के जंघे से मांस काट कर रखा. मांस कम पड़ा तो और काटना पड़ा और कम पड़ गया तो और काटना पड़ा और इस प्रकार राजा अपने शरीर का मांस काट-काट कर रखते गये पर तराजू का पलड़ा हमेशा कबूतर की तरफ ही झुका रहा. राजा अपना मांस काट-काट कर तराजू पर रखते जा रहे थे पर उनके चेहरे पर एक शिकन तक नहीं थी. अंत में राजा स्वयं तराजू के पलड़े पर बैठ गये और उनके वहाँ बैठते ही आकाश से पुष्प-वृष्टि होने लगी. राजा अपनी परीक्षा में सफल थे.

इसी तरह की एक कथा राजा दिलीप की भी है जो भगवान राम के पूर्वज थे और जिन्होनें नंदिनी गाय के प्राणों की रक्षा के लिये स्वयं को सिंह के सामने अर्पित कर दिया था.

हमारे वेदों में ऐसा नहीं है कि केवल गाय की रक्षा की ही बात है. अर्थववेद में ऋषि कहता है, “हे हिंसा ! निर्दोषों की हत्या निश्चय ही महाभयानक है, अतः तू हमारी गौ, घोड़े और पुरुषों को न मार”. इस मन्त्र में ऋषि गौ और घोड़े के जान की कीमत इंसानों के साथ रख रहा है. ऋग्वेद के एक मन्त्र में जिनकी सुरक्षा और जिनके सुख की कामना की गई है उस सूची में माता-पिता, जाति-बंधु और नौकर के साथ-साथ घर के जानवरों को भी रखा गया है.

उधर यजुर्वेद में ऋषि कहता है,

मित्रस्य मा चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षन्ताम्। मित्रस्याहं चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षे। मित्रस्य चक्षुषा समीक्षामहे।। (यजुर्वेद)

इस मन्त्र में तीन बातें हैं, प्रथमये कि समस्त जीव-जंतु मेरी ओर मित्रता भाव से देखें, दूसरा ये कि मैं समस्त जीव-जंतुओं को मित्रता भाव से देखूँ और तीसरा ये कि हम दोनों एक-दूसरे को मित्रभाव से देखें.

समस्त जीवों के प्रति दया, करुणा और उनके अस्तित्व रक्षण का निर्देशन हमें हमारे संस्कारों में मिला है और गाय को लेकर तो हमारी श्रद्धा उसे ईश्वर के दर्जे तक मान लेने की है और वो भी इतनी कि उसके मल-मूत्र और अवशिष्ट हमारे लिये अमृत-तुल्य है और इतने पवित्र हैं कि हम उसके गोबर से अपने इष्ट के घर को लीपते हैं.

इसलिये बेहतर है कि तुम हम हिंदुओं से ये न पूछो कि तुम्हारे लिये क्या एक गाय के जान की कीमत किसी इंसान के जान की कीमत से ज्यादा है? इसका उत्तर हमारे पूर्वजों ने अतीत में दिया है और कई बार दिया है, इसी का उत्तर रघु के पिता राजा दिलीप ने दिया था, इसी का उत्तर महर्षि च्यवन ने दिया था, इसी का उत्तर हमारे पूर्वज महाराज शिवि ने दिया था और इसी का उत्तर हम भी तुम्हें बार-बार दे रहें हैं कि एक गाय के जान की कीमत एक इंसान तो छोड़ो राम के पूर्वज दिलीप के प्राणों से ज्यादा थी , एक गाय के जान की कीमत महर्षि च्यवन के जान से ज्यादा थी, एक गाय के प्राणों की कीमत प्रतापी राजा शिवि के प्राणों से ज्यादा थी तो फिर बाकियों की बिसात ही क्या है और यहाँ तो मामला एक नहीं कई गायों का है. इसलिये अगर ये बात तुम्हारी समझ में नहीं आई है, तो ये समस्या तुम्हारी है. हमारी समझ इस बारे में बिलकुल क्लिअर है.

सोचना तुमको है.

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” उरुग्वे ” एक ऐसा देश है , जिसमे औसतन हर एक आदमी के पास 4 गायें हैं … और
पूरे विश्व में वो खेती के मामले में नम्बर वन की पोजीशन में है …
सिर्फ 33 लाख लोगों का देश है और 1 करोड़ 20 लाख 🐄 गायें है …
हर एक 🐄 गाय के कान पर इलेक्ट्रॉनिक 📼 चिप लगा रखी है …
जिससे कौन सी 🐄 गाय कहाँ पर है , वो देखते – रहते हैं …
एक किसान मशीन के अन्दर बैठा , फसल कटाई कर रहा है , तो दूसरा उसे स्क्रीन पर जोड़ता है , कि फसल का डाटा क्या है … ???
इकठ्ठा किये हुये डाटा के जरिए , किसान प्रति वर्ग मीटर की पैदावार का स्वयं विश्लेषण करता हैं …
2005 में 33 लाख लोगों का देश , 90 लाख लोगों के लिए अनाज पैदा करता था … और …
आज की तारीख में 2 करोड़ 80 लाख लोगों के लिये अनाज पैदा करता है …
” उरुग्वे ” के सफल प्रदर्शन के पीछे देश , किसानों और पशुपालकों का दशकों का अध्ययन शामिल है …
पूरी खेती को देखने के लिए 500 कृषि इंजीनियर लगाए गए हैं और ये लोग ड्रोन और सैटेलाइट से किसानों पर नजर रखते हैं , कि खेती का वही तरीका अपनाएँ जो निर्धारित है …
यानि ” दूध , दही , घी , मक्खन ” के साथ आबादी से कई गुना ज्यादा अनाज उत्पादन …
” सब अनाज , दूध , दही , घी , मक्खन , आराम से निर्यात होते हैं और हर किसान लाखों में कमाता है … ”
एक आदमी की कम से कम आय 1,25,000/= महीने की है , यानि 19,000 डॉलर सालाना …
” इस देश का राष्ट्रीय चिन्ह सूर्य 🌞 व राष्ट्रीय प्रगति चिन्ह गाय 🐄 व घोड़ा 🐎 हैं … ”
” उरूग्वे में गाय 🐄 की हत्या पर तत्काल फाँसी का कानून है … ”
🐄🐎🌞 🐄🐎🌞 🐄🐎🌞
” धन्यवाद है , इस गौ – प्रेमी देश को … ”
मुख्य बात यह है , ” कि ये सभी गो – धन भारतीय हैं … ”
जिसे वहाँ ” इण्डियन काउ ” के तौर पर जानते हैं …
” दु:ख इस बात का है , कि भारत में गो – हत्या होती है और वहाँ उरुग्वे में गो – हत्या पर मृत्युदण्ड का प्रावधान है … ”
” क्या हम इस कृषक राष्ट्र उरुग्वे से कुछ सीख सकते हैं … ??? ”
👏🙏🙏 👏🙏🙏 👏🙏🙏
” _ Forwarded as received … _ ”

संजय गुप्ता

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पदमा गाय – जिसका दूध बाल कृष्ण पिया करते थे

पदमा गाय का बड़ा महत्व है पदमा गाय किसे कहते है पहले तो हम ये जानते है – एक लाख देशी गौ के दूध को १०,००० गौ को पिलाया जाता है,उन १० ,००० गौ के दूध को १०० गौ को पिलाया जाता है अब उन १०० गायों के दूध को १० गौ को पिलाया जाता है अब उन १० गौ का दूध काढकर १ गौ को पिलाया जाता है. और जिसे पिलाया जाता है, उस गौ के जो “बछड़ा” ‘बछड़ी” होता है उसे “पदमा गाय”कहतेहै.

ऐसी गौ का बछड़ा जहाँ जिस भूमि पर मूत्र त्याग करता है उसका इतना महत्व है कि यदि कोई बंध्या स्त्री उस जगह को सूँघ भी लेती है तो उसे निश्चित ही पुत्र की प्राप्ति हो जाती है.

ऐसी एक लाख गाये नन्द भवन में महल में थी जिनका दूध नन्द बाबा यशोदा जी और बाल कृष्ण पिया करते थे, तभी नन्द बाबा और यशोदा के बाल सफ़ेद नहीं थे सभी चिकने और एकदम काले थे चेहरे पर एक भी झुर्री नहीं थी, शरीर अत्यंत पुष्ट थी.

ऐसी गौ का दूध पीने से चेहरे कि चमक में कोई अंतर नहीं आता, आँखे कमजोर नहीं होती, कोई आधी-व्याधि नहीं आती.इसलिए नंद बाबा के लिए सभी कहते थे ‘साठा सो पाठा” अर्थात ६० वर्ष के नंद बाबा थे जब बाला कृष्ण का प्राकट्य हुआ था पर फिर भी जबान कि तरह दिखते थे.

_____श्री राधा विजयते नमः

जब गोपियों ने पदमा गौ के मूत्र से बाल कृष्ण का अभिषेक किया

जब पूतना का मोक्ष भगवान ने किया उसके बाद पूर्णमासी, रोहिणी, यशोदा और अन्य गोपियाँ बाल कृष्ण की शुद्धि के लिए उन्हें पदमा गौ कि गौशाला में लेकर गई. रोहिणी जी पदमा गौ को कुजली करने लगी अर्थात प्यार से सहलाने लगी,

यशोदा जी ने गौ शाला में ही गोद में बाल कृष्ण को लेकर बैठ गई और पूर्णमासी उस गौ की पूंछ से, भगवान के ही दिव्य नामो से झाडा (नजर उतारने) देने लगी.
उसी पदमा गौ के मूत्र से बाल कृष्ण को स्नान कराया, गौ के चरणों से रज लेकर लाला के सारे अंगों में लगायी. और गौ माता से प्रार्थना करने लगी की हमारे लाल को बुरी नजर से बचाना.

गऊ सेवा करो मेरी राधे जू के प्यारो अनंत कृपा बरसेगीपरवश राज

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जय जय गैया मैया