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जानिये क्यों पास नहीं हुआ आज तक गौहत्या रोकने का कोई बिल ?


जानिये क्यों पास नहीं हुआ आज तक गौहत्या रोकने का कोई बिल ?

भारत मे गाय काटने का इतिहास !
अंग्रेज़ बहुत चालक थे ! किसी भी गलत काम को करने से पहले उसको कानून बना देते थे फिर करते थे और कहते थे हम तो कानून का पालन कर रहे हैं !!

भारत मे पहला गौ का कत्लखाना 1707 ईस्वी ने रॉबर्ट क्लाएव ने खोला था और उसमे रोज की 32 से 35 हजार गाय काटी जाती थी ! तो कत्लखाने के size का अंदाजा लगा सकते हैं ! और तब हाथ से गाय काटी जाती थी ! तो सोच सकते हैं कितने कसाई उन्होने रखे होंगे !
आजादी के 5 साल बाद 1952 मे पहली बार संसद मे ये बात उठी कि गौ रक्षा होनी चाहिए ! गाय के सभी कत्लखाने जो भारत मे अंग्रेज़ो ने शुरू किए थे बंद होने चाहिए ! और यही गांधी जी कि आत्मा को यही श्र्द्धांजलि होगी ! क्यूकि ये उनके आजाद भारत के सपनों मे से पहले नंबर पर था !

तो गांधी के परम शिष्य नेहरू खड़ा हुआ और बोला चलो ठीक है अगर गौ रक्षा का कानून बनना चाहिए तो इस पर संसद मे प्रस्ताव आना चाहिए ! तो संसद मे एक सांसद हुआ करते थे महावीर त्यागी वो आर्य समाजी थे और सोनीपत से अकेले चुनाव लड़ा करते थे !सबसे पहला चुनाव 1952 मे हुआ और वो बहुत भयंकर वोटो से जीत कर आए थे !

तो महावीर त्यागी ने कहा ठीक मैं अपने नाम से प्रस्ताव लाता हूँ ! तो प्रस्ताव आया उस पर बहस हुई ! बहस के बाद तय किया कि वोट किया जाय इस पर ! तो वोट करने का दिन आया !
तब पंडित नेहरू ने एक ब्यान दिया !जो लोकसभा के रेकॉर्ड मे है आप चाहे तो पढ़ सकते हैं ! नेहरू ने कहा अगर ये प्रस्ताव पारित हुआ तो मैं शाम को इस्तीफा दे दूंगा !

मतलब ?

गौ रक्षा अगर हो गई इस देश मे! तो मैं प्रधानमंत्री नहीं रहूँगा ! परिणाम क्या हुआ जो कांग्रेसी नेता संसद मे गौ रक्षा के लिए वोट डालने को तैयार हुए थे नेहरू का ये वाक्य सुनते ही सब पलट गए ! तो उस जमाने मे क्या होता था कि नेहरू जी अगर पद छोड़ दे तो क्या होगा ? क्यूंकि वल्ब भाई पटेल का स्वर्गवास हो चुका था !
तो कांग्रेसी नेताओ मे चिंता रहती थी कि अगर नेहरू जी भी चलेगे फिर पार्टी का क्या होगा और पता नही अगली बार जीतेंगे या नहीं जीतेंगे ! और उस समय ऐसी बात चलती थी nehru is india india is नेहरू !
(और ये कोंग्रेसीओ कि आदत है indra is india india is indra )
तो बाकी कोंग्रेसी पलट गए और संसद मे हगामा कर दिया और गौ रक्षा के कानून पर वोट नहीं हुआ !

और अगले दिन महावीर त्यागी को सब ने मजबूर कर दिया और उनको प्रस्ताव वापिस लेना पड़ा !
महावीर त्यागी ने प्रस्ताव वापिस लेते समय भाषण किया और बहुत ही जबर्दस्त भाषण किया ! उन्होने कहा पंडित नेहरू मैं तुमको याद दिलाता हूँ !कि आप गांधी जी के परम शिष्य है और गांधी जी ने कहा था भारत आजाद होने के बाद जब पहली सरकार बनेगी तो पहला कानून गौ रक्षा का बनेगा ! अब आप ही इस से हट रहे है तो हम कैसे माने कि आप गांधी जी के परम शिष्य है ?
और उन्होने कहा मैं आपको आपके पुराने भाषणो कि याद दिलाता हूँ ! जो आपने कई बार अलग अलग जगह पर दिये है ! और सबमे एक ही बात काही है कि मुझे कत्लखानों से घिन्न आते इन सबको तो एक मिनट मे बंद करना चाहिए! मेरी आत्मा घबराती है ये आपने कितनी बार कहा लेकिन जब कानून बनाने का समय आया तब आप ही अपनी बात से पलट रहे है?

नेहरू ने इन सब बातों को कोई जवाब नहीं दिया ! और चुप बैठा रहा !और बात आई गई हो गई ! फिर एक दिन 1956 मे नेहरू ने सभी मुख्य मंत्रियो को एक चिठी लिखी वो भी संसद के रेकॉर्ड मे है ! अब नेहरू का कौन सा स्वरूप सही था और कौन सा गलत ! ये तय करने का समय आ गया हैं !
जब वे गांधी जी के साथ मंचपर होते थे तब भाषण करते थे कि क्त्ल्खनों के आगे से गुजरता हूँ तो घिन्न आती है आत्मा चीखती है ! ये सभी क्त्ल्खने जल्द बंद होने चाहिए !और जब वे प्र्धानमतरी बनते है तो मुख्य मंत्रियो को चिठी लिखते हैं ! कि गाय का कत्ल बंद मत करो क्यूंकी इससे विदेशी मुद्रा मिलती है !

उस पत्र का अंतिम वाक्य बहुत खतरनाक था उसमे नेहरू लिख रहा है मान लो हमने गाय ह्त्याबंद करवा दी ! और गौ रक्षा होने लगी तो सारी दुनिया हम पर हसे गई कि हम भारत को 18 व शताब्दी मे ले जा रहे हैं ! !
अर्थात नेहरू को ये लगता था कि गाय का कत्ल होने से देश 21 वी शताब्दी मे जा रहा है ! और गौ रक्षा होने से 18 वी शताब्दी कि और जाएगा ! राजीव भाई का हरद्य इस पत्र को पढ़ कर बहुत दुखी हुआ !राजीव भाई के एक बहुत अच्छे मित्र थे उनका नाम था रवि राय लोकसभा के अधक्षय रह चुके थे ! उनकी मदद से ये पत्र मिला ! संसद कि लाएब्रेरी मे से ! और उसकी फोटो कॉपी रख ली !!

अब आगे कि बात करे नेहरू के बाद से आजतक गाय ह्त्या रोकने का बिल पास क्यूँ नहीं हुआ !?

दस्तावेज़ बताते हैं इसके बाद के दो ऐसे प्रधानमंत्री हुए जिनहोने पूरी ईमानदारी से गौ ह्त्या रोकने का कानून लाने की कोशिश की ! उनमे से एक का नाम था श्री लाल बहादुर शास्त्री और दूसरे श्री मुरार जी देसाई !!
श्री मुरार जी भाई ये कानून पास करवा पाते कि उनकी सरकार गिर गई ! या दूसरे शब्दो मे कहे सरकार गिरा दी गई !
क्योंकि वही एक मात्र ऐसे प्रधान मंत्री थे ! जिनहोने बहुत हिम्मत वाला काम किया था अमेरिका कि कंपनी coca cola को 3 दिन का नोटिस दिया और भारत से भागा दिया ! और ऐसा नोटिस केवल coco cola को नहीं बल्कि एक और बड़ी विदेशी कंपनी hul(hindustaan uniliver ) को भी दिया और ऐसे करते करते काफी विदेशी कंपनियो को नोटिस जारी किया कि जल्दी से जल्दी तुम भारत छोड़ दो !

इसके इलवा उन्होने एक और बढ़िया काम किया था गुजरात मे शराब पर प्रतिबंध लगा दिया ! और वो आजतक है वो बात अलग है कि black मे कहीं शराब मिल जाती है पर कानूनी रूप से प्रतिबंध है ! और उनहोने कहा था ऐसा मैं पूरा भारत मे करूंगा और जल्दी से गौ रक्षा का कानून भी लाऊँगा और गौ ह्त्या करने वाले को कम से कम फांसी कि सजा होगी !
तो देश मे शराब बेचने वाले,गौ ह्त्या करने वाले और विदेशी कंपनिया वाले! ये तीनों l lobby सरकार के खिलाफ थी इन तीनों ने मिल कर कोई शयद्त्र रचा होगा जिससे मुरार जी भाई की सरकार गिर गई !!

लालबहादुर शास्त्री जी ने भी एक बार गौ ह्त्या का कानून बनाना चाहा पर वो ताशबंद गए ! और फिर कभी जीवित वापिस नहीं लोटे !!
और अंत 2003 मे श्री अटल बिहारी वाजपायी की NDA सरकार ने गौ ह्त्या पर सुबह संसद मे बिल पेश किया और शाम को वापिस ले लिया !!
क्यू ?
अटल जी की सरकार को उस समय दो पार्टिया समर्थन कर रही थी एक थी तेलगु देशम और दूसरी त्रिमूल कॉंग्रेस ! दोनों ने लोकसभा मे कहा अगर गौ ह्त्या पर कानून पास हुआ तो समर्थन वापिस !!

बाहर मीडिया वालों ने ममता बेनर्जी से पूछा की आप गौ ह्त्या क्यूँ नहीं बंद होने देना चाहती ?
ममता बेनर्जी ने कहा गाय का मांस खाना मे मौलिक अधिकार है
कोई कैसे रोक सकता है ?

तो किसी ने कहा आप तो ब्राह्मण है तो ममता ने कहा बेशक हूँ !!
तो अंत वाजपाई जी को अपनी सरकार बचाना गौ ह्त्या रोकने से ज्यादा बड़ा लगा ! और उन्होने बिल वापिस ले लिया !
फिर 2003 के बाद कॉंग्रेस आ गई ! इससे तो वैसे कोई अपेक्षा नहीं कि जा सकती! गाय ह्त्या रोकना तो दूर मनमोहन जी ने भारत को दुनिया मे गाय का मांस निर्यात करने वाले देशो कि सूची मे तीसरे नंबर पर ला दिया है!

वर्तमान भारत में प्रतिवर्ष एक करोड़ से अधिक गायों की हत्या होती है तथा एक लाख टन गौमांस विदेशों में निर्यात किया जा रहा है।

संविधान में किये गए वादे और अनेकों सरकारों द्वारा बार-बासर किये गये कोरे आश्वासन

गौ रक्षा एवं विकास के लिए तुरन्त उठाये जाने योग्य क़दम।
गौरक्षा एवं विकास विषय को समवर्ती सूची में लाकर केन्द्रीय कानून बनाकर गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया जाये तथा किसी भी आयु की गाय, साँड, बछिया अथवा बैल की हत्या मनुष्य की हत्या के बराबर दंडनीय अपराध घोषित किया जाये तथा गौमांस का निर्यात अविलम्ब बन्द किया जाये।
गौरक्षा एवं हित के लिए बाकायदा केन्द्रीय मंत्रालय एवं मंत्री नियुक्त किया जाना चाहिए।
प्रत्येक ग्राम व नगर के पाय पर्याप्त गोचर भूमि हो।
सरकारी पशु चिकित्सालयों तथा गर्भादान केन्द्रों में विदेशी नस्ल के सांडों के वीर्य से कृत्रिम गर्भादान अविलम्ब बन्द किया जाये।
गौवंश के व्यापार को सरकार अपने हाथों में लेकर स्वायशासी निगम बनाकर उनके हाथों में दिया जाये।

गौवंश से प्राप्त तमाम औषद्यीयों के व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ साथ उसके करमुक्त भी किया जाये जिससे लोग गायों की सेवा कर उनसे अधिकाधिक औषद्यीयां बनाकर जनसेवा कर सकें क्योंकि गौमूत्रा समेत गाय के दूध एवं अन्य उत्पादों से कई असाध्य बीमारियों के शत प्रतिशत सही होने के कई प्रमाण सामने आ चुके हैं
गौ को राष्ट्रमाता अथवा राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए।
गौरक्षा, संरक्षण पालन-पोषण की व्यवस्था को शैक्षणिक पाठयक्रम में शामिल किये जाने की भी सुविधा प्राप्त कराई जाये।
गायों की व्यापक देखरेख करने के लिए चिकित्सालयों के अलावा भारत के प्रत्येक नगर में एक विभाग खोला जाये जिसमें अधिकारी टोल, सड़क अथवा अन्य स्थानों पर मिलने वाली लावारिस गौ को गौशालाओं में ले जाने की व्यवस्था कर सकें। जिनसे वह किसी गौहत्यारें के चंगुल में न पड़ें।

यदि हम वेद पुराणों की बात को मानें तब भी कई बातें आज सच साबित हो रही हैं। अनेक पुराणों में स्पष्ट रूप से लिखा है कि गौहत्या से वातावरण में तनाव पैदा होता है। सभी देवी-देवता, पृथ्वी, जल, आकाश, वायु, अग्नि और परमात्मा का कोप मानव और पर्यावरण व वातावरण पर पड़ता है जिससे सूखा, बाढ़, भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदायें आती हैं।

अत: माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय मोदी जी से निवेदन है कि अब वे अपनी गौमाता की रक्षा और सेवा के लिए शीघ्रातिशीघ्र उपरोक्त बातों को संज्ञान में लेते हुए निश्चय ही ठोस कदम उठायेंगे। अब आपको तय करना है की गौ ह्त्या रोकने का बिल संसद मे कैसे पास करवाएँगे ?

https://www.facebook.com/sashkttabharat/posts/1670924339816619
नेहरू गौ मांस खाते थे
https://www.facebook.com/…/a.1500830570159…/1774012396174479
गांधी टोपी रहस्य
https://www.facebook.com/sashkttabharat/posts/1774897952752590

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निओ दिप

एक गाय के जान की कीमत
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उशीनगर में एक पुरुवंशी राजा हुये जिनका नाम था ‘शिवि’. वे बड़े दयालु और परोपकारी थे और उनकी करुणा इंसान तो इंसान पशु-पक्षियों तक के लिये भी थी.एक बार देवराज इंद्र और अग्नि देव ने उनकी परीक्षा लेने का निश्चय किया और दोनों क्रमशः बाज और कबूतर का रूप बनाकर उनके राजमहल में घुस गये. कबूतर बने अग्नि-देव झट से जाकर राजा शिवि की गोद में गिर गये और कातर स्वर में उन्हें ताकने लगे. उधर पीछे से बाज बने इंद्रदेव भी आ गये और आकर कहा, हे राजन ! ये कबूतर मेरा आहार है, मुझे वापस दे दो क्योंकि बड़ी देर से इसका पीछा कर रहा हूँ.

राजा ने उससे कहा; चूँकि ये कबूतर अभी मेरा शरणागत है इसलिये मैं कभी भी तुमको इसे नहीं दूँगा. इस पर बाज कहने लगा, ‘महाराज ! शरणागत की रक्षा करना आपका धर्म होगा पर मैं भी आपकी ही प्रजा हूँ और अगर आप मेरा आहार छीनते हो तो आप मेरे साथ अन्याय करोगे. अगर आप इस कबूतर को छोड़ दो मैं और मेरा परिवार भूखों मरने से बच जायेगा और अगर आपने ये नहीं किया तो मेरे और मेरे भूखे बच्चों की आह आपको लगेगी. अतः हे राजन ! आप पाप न करें और मेरा आहार मुझे सौंप कर अपने धर्म का पालन करें. राजा तो हरेक के लिये करुणा रखते थे तो उन्होंने बाज से कहा, देखो अपने शरणागत को तो मैं तुम्हें कदापि नहीं दे सकता पर तुम्हारे आहार के लिए इसके स्थान पर मैं अपना मांस तुम्हें देता हूँ. तुम भरपेट खा लो और तृप्त हो जाओ. बाज सहमत हो गया पर कहा, हे राजन ! आप कबूतर के वजन बराबर अपना मांस मुझे दे दीजिये इससे अधिक की आवश्यकता भी मुझे नहीं है.

राजा को उसकी बात से बड़ी प्रसन्नता हुई और बाज से कहा- यह आपने बड़ी कृृपा की. आज मेरे इस नश्वर शरीर से अविनाशी धर्म की और इस निरीह प्राणी की रक्षा हो रही है.

उनकी बात सुनते ही पूरे राज्य में कोलाहल मच गया कि ये कैसी अद्भुत बात है कि एक पक्षी के लिये आज एक राजा अपने शरीर का मांस काटकर बाज को देने जा रहा है. नगर की सारी प्रजा ये अद्भुत दृश्य देखने को एकत्रित हो गई. तराजू मंगाया गया. एक पलड़े में कबूतर को बैठाया गया और दूसरे पलड़े पर राजा ने अपने शरीर के जंघे से मांस काट कर रखा. मांस कम पड़ा तो और काटना पड़ा और कम पड़ गया तो और काटना पड़ा और इस प्रकार राजा अपने शरीर का मांस काट-काट कर रखते गये पर तराजू का पलड़ा हमेशा कबूतर की तरफ ही झुका रहा. राजा अपना मांस काट-काट कर तराजू पर रखते जा रहे थे पर उनके चेहरे पर एक शिकन तक नहीं थी. अंत में राजा स्वयं तराजू के पलड़े पर बैठ गये और उनके वहाँ बैठते ही आकाश से पुष्प-वृष्टि होने लगी. राजा अपनी परीक्षा में सफल थे.

इसी तरह की एक कथा राजा दिलीप की भी है जो भगवान राम के पूर्वज थे और जिन्होनें नंदिनी गाय के प्राणों की रक्षा के लिये स्वयं को सिंह के सामने अर्पित कर दिया था.

हमारे वेदों में ऐसा नहीं है कि केवल गाय की रक्षा की ही बात है. अर्थववेद में ऋषि कहता है, “हे हिंसा ! निर्दोषों की हत्या निश्चय ही महाभयानक है, अतः तू हमारी गौ, घोड़े और पुरुषों को न मार”. इस मन्त्र में ऋषि गौ और घोड़े के जान की कीमत इंसानों के साथ रख रहा है. ऋग्वेद के एक मन्त्र में जिनकी सुरक्षा और जिनके सुख की कामना की गई है उस सूची में माता-पिता, जाति-बंधु और नौकर के साथ-साथ घर के जानवरों को भी रखा गया है.

उधर यजुर्वेद में ऋषि कहता है,

मित्रस्य मा चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षन्ताम्। मित्रस्याहं चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षे। मित्रस्य चक्षुषा समीक्षामहे।। (यजुर्वेद)

इस मन्त्र में तीन बातें हैं, प्रथमये कि समस्त जीव-जंतु मेरी ओर मित्रता भाव से देखें, दूसरा ये कि मैं समस्त जीव-जंतुओं को मित्रता भाव से देखूँ और तीसरा ये कि हम दोनों एक-दूसरे को मित्रभाव से देखें.

समस्त जीवों के प्रति दया, करुणा और उनके अस्तित्व रक्षण का निर्देशन हमें हमारे संस्कारों में मिला है और गाय को लेकर तो हमारी श्रद्धा उसे ईश्वर के दर्जे तक मान लेने की है और वो भी इतनी कि उसके मल-मूत्र और अवशिष्ट हमारे लिये अमृत-तुल्य है और इतने पवित्र हैं कि हम उसके गोबर से अपने इष्ट के घर को लीपते हैं.

इसलिये बेहतर है कि तुम हम हिंदुओं से ये न पूछो कि तुम्हारे लिये क्या एक गाय के जान की कीमत किसी इंसान के जान की कीमत से ज्यादा है? इसका उत्तर हमारे पूर्वजों ने अतीत में दिया है और कई बार दिया है, इसी का उत्तर रघु के पिता राजा दिलीप ने दिया था, इसी का उत्तर महर्षि च्यवन ने दिया था, इसी का उत्तर हमारे पूर्वज महाराज शिवि ने दिया था और इसी का उत्तर हम भी तुम्हें बार-बार दे रहें हैं कि एक गाय के जान की कीमत एक इंसान तो छोड़ो राम के पूर्वज दिलीप के प्राणों से ज्यादा थी , एक गाय के जान की कीमत महर्षि च्यवन के जान से ज्यादा थी, एक गाय के प्राणों की कीमत प्रतापी राजा शिवि के प्राणों से ज्यादा थी तो फिर बाकियों की बिसात ही क्या है और यहाँ तो मामला एक नहीं कई गायों का है. इसलिये अगर ये बात तुम्हारी समझ में नहीं आई है, तो ये समस्या तुम्हारी है. हमारी समझ इस बारे में बिलकुल क्लिअर है.

सोचना तुमको है.

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” उरुग्वे ” एक ऐसा देश है , जिसमे औसतन हर एक आदमी के पास 4 गायें हैं … और
पूरे विश्व में वो खेती के मामले में नम्बर वन की पोजीशन में है …
सिर्फ 33 लाख लोगों का देश है और 1 करोड़ 20 लाख 🐄 गायें है …
हर एक 🐄 गाय के कान पर इलेक्ट्रॉनिक 📼 चिप लगा रखी है …
जिससे कौन सी 🐄 गाय कहाँ पर है , वो देखते – रहते हैं …
एक किसान मशीन के अन्दर बैठा , फसल कटाई कर रहा है , तो दूसरा उसे स्क्रीन पर जोड़ता है , कि फसल का डाटा क्या है … ???
इकठ्ठा किये हुये डाटा के जरिए , किसान प्रति वर्ग मीटर की पैदावार का स्वयं विश्लेषण करता हैं …
2005 में 33 लाख लोगों का देश , 90 लाख लोगों के लिए अनाज पैदा करता था … और …
आज की तारीख में 2 करोड़ 80 लाख लोगों के लिये अनाज पैदा करता है …
” उरुग्वे ” के सफल प्रदर्शन के पीछे देश , किसानों और पशुपालकों का दशकों का अध्ययन शामिल है …
पूरी खेती को देखने के लिए 500 कृषि इंजीनियर लगाए गए हैं और ये लोग ड्रोन और सैटेलाइट से किसानों पर नजर रखते हैं , कि खेती का वही तरीका अपनाएँ जो निर्धारित है …
यानि ” दूध , दही , घी , मक्खन ” के साथ आबादी से कई गुना ज्यादा अनाज उत्पादन …
” सब अनाज , दूध , दही , घी , मक्खन , आराम से निर्यात होते हैं और हर किसान लाखों में कमाता है … ”
एक आदमी की कम से कम आय 1,25,000/= महीने की है , यानि 19,000 डॉलर सालाना …
” इस देश का राष्ट्रीय चिन्ह सूर्य 🌞 व राष्ट्रीय प्रगति चिन्ह गाय 🐄 व घोड़ा 🐎 हैं … ”
” उरूग्वे में गाय 🐄 की हत्या पर तत्काल फाँसी का कानून है … ”
🐄🐎🌞 🐄🐎🌞 🐄🐎🌞
” धन्यवाद है , इस गौ – प्रेमी देश को … ”
मुख्य बात यह है , ” कि ये सभी गो – धन भारतीय हैं … ”
जिसे वहाँ ” इण्डियन काउ ” के तौर पर जानते हैं …
” दु:ख इस बात का है , कि भारत में गो – हत्या होती है और वहाँ उरुग्वे में गो – हत्या पर मृत्युदण्ड का प्रावधान है … ”
” क्या हम इस कृषक राष्ट्र उरुग्वे से कुछ सीख सकते हैं … ??? ”
👏🙏🙏 👏🙏🙏 👏🙏🙏
” _ Forwarded as received … _ ”

संजय गुप्ता

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पदमा गाय – जिसका दूध बाल कृष्ण पिया करते थे

पदमा गाय का बड़ा महत्व है पदमा गाय किसे कहते है पहले तो हम ये जानते है – एक लाख देशी गौ के दूध को १०,००० गौ को पिलाया जाता है,उन १० ,००० गौ के दूध को १०० गौ को पिलाया जाता है अब उन १०० गायों के दूध को १० गौ को पिलाया जाता है अब उन १० गौ का दूध काढकर १ गौ को पिलाया जाता है. और जिसे पिलाया जाता है, उस गौ के जो “बछड़ा” ‘बछड़ी” होता है उसे “पदमा गाय”कहतेहै.

ऐसी गौ का बछड़ा जहाँ जिस भूमि पर मूत्र त्याग करता है उसका इतना महत्व है कि यदि कोई बंध्या स्त्री उस जगह को सूँघ भी लेती है तो उसे निश्चित ही पुत्र की प्राप्ति हो जाती है.

ऐसी एक लाख गाये नन्द भवन में महल में थी जिनका दूध नन्द बाबा यशोदा जी और बाल कृष्ण पिया करते थे, तभी नन्द बाबा और यशोदा के बाल सफ़ेद नहीं थे सभी चिकने और एकदम काले थे चेहरे पर एक भी झुर्री नहीं थी, शरीर अत्यंत पुष्ट थी.

ऐसी गौ का दूध पीने से चेहरे कि चमक में कोई अंतर नहीं आता, आँखे कमजोर नहीं होती, कोई आधी-व्याधि नहीं आती.इसलिए नंद बाबा के लिए सभी कहते थे ‘साठा सो पाठा” अर्थात ६० वर्ष के नंद बाबा थे जब बाला कृष्ण का प्राकट्य हुआ था पर फिर भी जबान कि तरह दिखते थे.

_____श्री राधा विजयते नमः

जब गोपियों ने पदमा गौ के मूत्र से बाल कृष्ण का अभिषेक किया

जब पूतना का मोक्ष भगवान ने किया उसके बाद पूर्णमासी, रोहिणी, यशोदा और अन्य गोपियाँ बाल कृष्ण की शुद्धि के लिए उन्हें पदमा गौ कि गौशाला में लेकर गई. रोहिणी जी पदमा गौ को कुजली करने लगी अर्थात प्यार से सहलाने लगी,

यशोदा जी ने गौ शाला में ही गोद में बाल कृष्ण को लेकर बैठ गई और पूर्णमासी उस गौ की पूंछ से, भगवान के ही दिव्य नामो से झाडा (नजर उतारने) देने लगी.
उसी पदमा गौ के मूत्र से बाल कृष्ण को स्नान कराया, गौ के चरणों से रज लेकर लाला के सारे अंगों में लगायी. और गौ माता से प्रार्थना करने लगी की हमारे लाल को बुरी नजर से बचाना.

गऊ सेवा करो मेरी राधे जू के प्यारो अनंत कृपा बरसेगीपरवश राज

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जय जय गैया मैया

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कसाई गाय काट रहा था
और गाय हँस रही थी….
.
.
.
ये सब देख के कसाई बोला..
“मै तुम्हे मार रहा हू
और तुम मुझपर हँस क्यो रही हो…?”
.
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गाय बोलीः जिन्दगी भर मैने घास के
सिवा कुछ नही खाया…
फिर भी मेरी मौत इतनी दर्दनाक है.
तो
हे इंसान जरा सोच
तु मुझे मार के खायेगा तो
तेरा अंत
कैसा होगा…?.
दूध पिला कर 🐄
मैंने तुमको बड़ा किया…🐄
अपने बच्चे से भी छीना 🐄
पर मैंने तुमको दूध दिया🐄…
रूखी सूखी खाती थी मैं, 🐄
कभी न किसी को सताती थी मैं…🐄
कोने में पड़ जाती थी मैं, 🐄
दूध नहीं दे सकती मैं,🐄
अब तो गोबर से काम तो आती थी मैं,मेरे उपलों की🐄 आग
से तूने, 🐄
भोजन अपना पकाया था…🐄
गोबर गैस से रोशन कर के, 🐄
तेरा घर उजलाया था…🐄
क्यों मुझको बेच रहा रे, 🐄
उस कसाई के हाथों में…??🐄
पड़ी रहूंगी इक कोने में, 🐄
मत कर लालच माँ हूँ मैं…🐄
मैं हूँ तेरे कृष्ण की प्यारी, 🐄
वह कहता था जग से न्यारी…🐄
उसकी बंसी की धुन पर मैं, 🐄
भूली थी यह दुनिया सारी..🐄.
मत कर बेटा तू यह पाप,🐄
अपनी माँ को न बेच आप…🐄
रूखी सूखी खा लूँगी मैं 🐄
किसी को नहीं सताऊँगी मैं 🐄
तेरे काम ही आई थी मैं🐄
तेरे काम ही आउंगी मैं…🐄
अगर आप गौमाता से प्यार करते हैं🐄
और आपने गौमाता का दूध पिया है1🐄
तो इस मेसेज को शेयर करके थोडा बहुत दूध का कर्ज🐄
चुकता करे….🐄…!!!!
सb कि एक पुकार…🐄.!🐄
गौ हत्या अब नहीं स्वीकार….!!🐄
गौमाता की यह पीड़ा जन जन तक 🐄
पहुँचाने के लिये केवल 2 मिनट का 🐄
समय निकाल कर दोस्तों को 🐄
शेयर जरुर करें………🐄
Save cow🐄..🐄

Hanuman भगवान कि कसम
ये Message गोकूल नगरि से आया है
ईसे 9 लोगो को FORWARD करो 3 दिन मे आपकी मनोकामना पुरी होगी ईनकार करोगे तो 2
साल तक कोई भी काम नही होगा…

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गाय को बासी रोटी देने वालों पहले ये पोस्ट पढ़ लो,
बरसों से करते आ रहे हो ये बड़ी गलती-

गाय को हिन्दू धर्म में एक विशेष स्थान प्राप्त हैं. शास्त्रों में भी गाय को घर में पालने और उसकी सेवा करने की बात कही गई हैं. ऐसा माना जाता हैं कि गाय के अन्दर 33 करोड़ देवी देवताओं का वास होता हैं. यही वजह हैं कि गाय की सेवा के साथ साथ गोवर्धन पर्व पर उसकी पूजा भी की जाती हैं.धार्मिक महत्त्व के अलावा स्वास्थ की द्रष्टि से भी गाय को पालना और उसके दूध से बने प्रोडक्ट खाना सेहत के अच्छा होता हैं. सिर्फ दूध ही नहीं बल्कि गाय का मूत्र और गोबर भी कई तरह के फायदे प्रदान करता हैं. कुल मिलाकर कहे तो गाय का हमारे दिल, धर्म और घर में एक विशेष स्थान होता हैं.

गाय को बासी रोटी खिलाने से
घटती हैं बरकत-

लेकिन इतना सब जानने के बाद भी जब गाय हमारे दरवाजे पर आती हैं तो हम उसे बासी रोटी और बचा कूचा खाना दे देते हैं. अब जरा एक बार सोचिए. जब भी आप घर में कुछ बनाते हो तो सबसे पहले भगवान को उसका भोग लगाते हो. लेकिन जिस गाय को आप बासी रोटी देते हो उसके अन्दर तो 33 करोड़ देवी देवताओं का वास हैं. ऐसे में आप अनजाने में इन सभी देवी देवताओं को बासी रोटी और खाने का भोग लगा रहे हो.
भगवान को बासे खाने का भोग लगाना मतलब आपके घर में अन्न की बरकत कम होना होता हैं. यदि आप भी गाय को बासी रोटी खिलाते हो तो आज ही संभल जाए, वरना आज नहीं तो कल आपके घर खाने पीने की किल्लत से लेकर धन की कमी तक जैसी समस्याएं आ
सकती हैं.

गाय को भूलकर न खिलाये बासी रोटी, ऐसा
करना बना देगा आपको कंगाल-

अगर सीधे शब्दों में कहा जाए तो गाय एक श्रेष्ठ जीव है। आजकल लोग की व्यस्तता और जीवन शैली ऐसी हो चुकी है की गौ सेवा का लाभ नहीं लिया जा सकता क्योंकि गाँव देहात की बात तो अलग पर शहरों में गाय पालना बेहद मुश्किल काम हैं।

ऐसे में शहरी लोगों के लिए गाय की सेवा के दो ही रास्ते है या तो गौशाला आदि में दान आदि करें या फिर अगर राह चलते गाय मिल जाए तो उसे रोटी खिलाकर लोग पुण्य
कर लेते है।

अक्सर गली मोहल्ले में देखा है लोग घर में रात का बचा हुआ खाना या बासी खाना गौ के लिए निकाल देते है। इसके पीछे लोगों की मंशा होती है की अन्न को फेंकना भी नहीं पड़ा और पुण्य लाभ भी हो गया पर आपको बता दें अगर आप भी ऐसा करते है तो आप पुण्य की जगह पाप
के भोगी बन रहे है।

क्योंकि गाय को रोटी खिलाना तो पुण्य का काम है
पर बासी रोटी खिलाना बिकुल भी ठीक नहीं है।

हमेशा गाय को खिलाए
ताज़ी रोटी-
आप जब भी घर में रोटियां बनाते हो तो सबसे पहले गाय के नाम की एक या अधिक रोटी बनाने की आदत डालो. इसके बाद उस रोटी को जितना जल्दी हो सके गाय को खिला दो. अक्सर यह देखा गया हैं कि लोग गाय के नाम की रोटी तो बना लेते हैं लेकिन उसे समय पर देने की बजाए आलस करते हैं और रोटी के बासी हो जाने के बाद गाय को खिलाते हैं. आपको अपनी यह आदत आज से ही बदलनी होगी. तभी आप 33 करोड़ देवी देवताओं के
पाप के भागीदार बनने से बच पाएंगे.

             !! वन्दे गौ मातरम् !!

ज्योति अग्रवाल

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गौमूत्र
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गौमूत्र घर को पवित्र कर बुरी नजर से बचाता है रोगों पर विजय प्राप्त करना है तो गौमूत्र का करें इस्तेमाल अवश्य करना चाहिए।

आज संपूर्ण भारतवर्ष में गाय की उपयोगिता पर भारत सरकार सहित राज्यों की सरकार भी जागरूक हो गई है क्योंकि गौ माता के दूध, मूत्र से लेकर गोबर तक मानव जीवन में इतना उपयोगी है कि समस्त रोग व्याधियां एवं मानव शरीर के पोषण में उसकी महत्ता प्रतिपादित हो रही है। आज मैं गाय के गोमूत्र से किन किन बीमारियों में लाभ होता है और घर कैसे बुरी नजर से बचता है उसके उपयोग की जानकारी दे रहा हूं।

गोमूत्र में किसी भी प्रकार के कीटाणु नष्ट करने की चमत्कारी शक्ति है। सभी कीटानुजन्य व्याधियां नष्ट होती है। वास्तु शास्त्र में गौमूत्र का बहुत महत्व है घर को शुद्ध और पवित्र बनाने के लिए यदि घर में इस का छिड़काव किया जाता है तो जितनी आसुरी शक्तियां हैं वह सब गोमूत्र के प्रभाव से खत्म हो जाती है प्रातः काल सूर्योदय के समय गोमूत्र का छिड़काव घर के सभी कमरों मे मुख्य द्वार से शुरू कर पुणे मुख्य द्वार पर खत्म करें समस्त वास्तु दोष एवं ग्रह दोष खत्म हो जाएंगे।गोमूत्र त्रिदोष को सामान्य बनाता है अत एव रोग नष्ट हो जाते है। प्रातः काल खाली पेट गौ मूत्र का सेवन करें।

गोमूत्र से लाभ-
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गोमूत्र शरीर में लिवर को सही एवं स्वच्छ खून बनाकर किसी भी रोग का विरोध करने की शक्ति प्रदान करता है। प्रतिदिन सेवन करें।

गोमूत्र में सभी तत्व होते है जो हमारे शरीर के आरोग्यदायक तत्वों की कमी की पूर्ति करते है।

गोमूत्र में कई खनिज खासकर ताम्र होता है जिसकी पूर्ति से शरीर के खनिज तत्व पूर्ण हो जाते है। स्वर्ण छार भी होने से बचने की यह शक्ति देता है।

मानसिक छोभ से स्नायु तन्त्र (नर्वस सिस्टम) को आघात होता है। गोमूत्र को मेध्य और ह्रद्य कहा गया है। यानि मष्तिष्क और ह्रदय को शक्ति प्रदान करता है। अतएव मानसिक कारणों से होने वाले आघात से ह्रदय की रक्षा करता है और इन अंगो को होने वाले रोगों से बचत है।

किसी भी प्रकार की औषधि की मात्रा का अतिप्रयोग हो जाने से जी तत्व शरीर में रहकर किसी प्रकार से उपद्रव पैदा करते है उनको गोमूत्र अपनी विषनाशक शक्ति से रोगी को निरोग करता है।

विद्युत् तरंगे हमारे शरीर को स्वस्थ रखती है यह वातावरण में विद्यमान है। सुक्षमाति सूक्ष्म रूप से तरंगे हमारे शरीर में गोमूत्र से प्राप्त ताम्र के रहम से ताम्र के अपने विद्युतीय आकर्षक गुण के कारण शरीर से आकर्षित होकर स्वास्थ्य प्रदान करती है।

गोमूत्र रसायन है यह बुढ़ापा रोकता है व्याधियो को नष्ट करता है। प्रतिदिन सेवन करें।

आहार में जो पोषक तत्व कम प्राप्त होते है उनकी पूर्ति गोमूत्र में विद्यमान तत्वों से होकर स्वास्थ्य लाभ होता है।

आत्मा के विरुद्ध कर्म करने से ह्रदय और मष्तिष्क संकुचित होता है जिससे शरीर में क्रिया कलापो पर प्रभाव पड़कर रिक्त हो जाते है। गोमूत्र सात्विक बुद्धि प्रदान कर सही कार्य कराकर इस तरह के रोगों से बचाता है ।

शास्त्रो में पूर्व कर्मज व्याधियां भी कही गयी है जो हमे भुगतनी पड़ती है गोमूत्र में गंगा ने निवास किया है गंगा पाप नाशिनी है अतएव गोमूत्र पान से पूर्व जन्म के पाप क्षय होकर इस प्रकार के रोग नष्ट हो जाते है ।

शास्त्रो के अनुसार भूतो के शरीर प्रवेश के कारण होने वाले रोगों पर गोमूत्र इसलिए प्रभाव करता है की भूतो के अधिपति भगवान शंकर है। शंकर के शीश पर गंगा है गो मूत्र में गंगा है। अतः गोमूत्र पान से भूतगण अपने अधिपति के मश्तक पर गंगा के दर्शन कर शांत हो जाते है, और इस शरीर को नही सताते है।

जो रोगी वंश परम्परा से रोगी हो रोग के पहले ही गो मूत्र कुछ समय पान करने से रोगी के शरीर में इतनी विरोधी शक्ति हो जाती है की रोग नष्ट हो जाते है।

विषों के द्वारा रोग होने के कारणों पर गोमूत्र विष नाशक होने के चमत्कार के कारण ही रोग नाश करता है। बड़ी-बड़ी विषैली औषधियां गोमूत्र से शुद्ध होती है गोमूत्र मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाकर रोगों को नाश करने की क्षमता देता है। उन्मुक्ति शक्ति (immunity power) देता है। निर्विष होते हुए यह विष नाशक है।
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