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तो हुआ यूँ कि 4 जुलाई 1986 को राजीव गाँधी मारीशस की यात्रा पर निकल रहे थे, उसी दिन सुबह 6 बजे आकाशवाणी ने बाबू जगजीवन राम के निधन का दुखद समाचार प्रसारित किया। अब राजीव जी असमंजस में पड़ गए, दलितों की राजनीती करने वाली कांग्रेस का मुखिया एक कद्दावर दलित नेता की मृत्यु होने पर उनके घर न जाकर विदेश यात्रा पर निकल जाए और वहां तस्वीरें खिंचवाए ये तो अच्छा नहीं लगेगा, और राजीव एक खूबसूरत देश का दौरा निरस्त करने के मूड में एकदम नहीं थे 

खैर कांग्रेस रणनीतिकार कोई कच्ची गोली तो खेले नहीं थे, सो राजीव गाँधी से कहा गया कि आप अपनी यात्रा जारी रखिये, हम लोग बाबू  जगजीवन राम को आप के आने तक जीवित रखेंगे, आनन् फानन में जगजीवन राम के मृत शरीर को वेंटीलेटर पर लगाया गया और आकाशवाणी ने गलत समाचार प्रसारित करने के लिए खेद प्रकट कर लिया , देश में शोक की लहर ख़ुशी की बयार में परिवर्तित हो गयी , राजीव गाँधी मारीशस की यात्रा पर निकल गए वो दो दिन बाद वापस आये और तब बाबू जगजीवन राम को एक बार फिर से मृत घोषित किया गया 

यही वो कांग्रेस है जिसने बाबू जगजीवन राम की  बेटी मीरा कुमार को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किये है ।

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*तीन कांग्रेसियों की कहानी*

1. मुफ्ती मोहम्मद सैयद केंद्र में गृह मंत्री ||

December 8 1989 मुफ्ती की बेटी रूबिया सैयद का अफहरण|| *नतीजा 13 आतंकियों की रिहाई ||*

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2 . सेैफुदीन सौज .. पार्टी के वरिष्ट नेता ..

August 1991 को सौजी की बेटी नाहीदा सौज का अपरहण || 

*नतिजा जेल में बंद 7 आतंकियों की रिहाई ||*

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3 गुलाम नबी आजाद …तब कांग्रेस के सीएम उम्मीदवार .. अब राज्यसभा में विपक्ष के नेता ||

September 22,1991 आजाद के साले तासादुक्क का अपहरण ||

*नतीजा 21 आतंकियों की रिहाई ||*
आओ आज इन सबके महान कार्यों को याद करें ||

और हां पोस्ट शेयर करने में हिचकिचाहट हो तो धर्म परिवर्तन करने में ही भलाई है ||

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#कांग्रेस_मुक्त_भारत के सैकड़ों असंख्य कारणों में से कुछ : –

#कांग्रेस_मुक्त_भारत के सैकड़ों असंख्य कारणों में से कुछ : –
1- मैं रहन सहन से ईसाई संस्कृति से मुसलमान और गलती से हिंदू हूँ—: जवाहरलाल नेहरू

2-राम एक काल्पनिक पात्र हैं और राम भारत में कभी पैदा ही नहीं हुए: सुप्रीम कोर्ट के हलफनामे में कांग्रेस

3-रामसेतु से किसी की आस्था वास्था नहीं जुड़ी है,अतः रामसेतु को तोड़ देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के हलफनामे में कांग्रेस

4-देश के संसाधनों पर अल्पसंख्यकों का पहला अधिकार है..पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

5-हिंदू आतंकवाद सैफरॉन टेररिज्म भगवा आतंकवाद शब्द के जनक पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे कांग्रेस के

6-कांग्रेस के हर कार्यालय में गाय काटी जाएगी और गौ मांस परोसा जाएगा। अखिलेश प्रताप सिंह (पूर्व कांग्रेसी विधायक और प्रवक्ता।)

7-हिंदुओं को गुलाम बनाने एवं अपने ही देश में दोयम दर्जे का नागरिक बनाने वाला कम्युनल वायलेंस बिल सोनिया गांधी की अध्यक्षता में बनाया गया था।

8-लोग मंदिर में लड़की छेड़ने जाते हैं। राहुल गांधी

9-26/11 के मुंबई हमले, RSS और हिंदुओं ने कराए थे दिग्विजय सिंह पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री

10-निर्दोष हिंदू साध्वी को जेल में डालकर निर्वस्त्र करके मुंह में गौ मांस खिलाने वाली जबरिया अश्लील फिल्में दिखाने वाली पार्टी कांग्रेस है ।

11- 7 नवम्बर 1966 में गोपाल अष्टमी के दिन गौ हत्या के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे संतो को पर गोली चलवाकर हजारो हिंदुओं की हत्या करवाने वाली पार्टी कांग्रेस। इस मामले को दबा दिया गया.

ऐसे सैकड़ो उदाहरण है, कुछ की बानगी सिर्फ इसलिए दी गई है क्योंकि ये कुछ कार्यकर्ताओं की गलती नहीं,यह वह कुत्सित हिंदू विरोधी मानसिकता है जो कांग्रेस के DNA में इसकी स्थापना के समय से ही भरी गई है,और कांग्रेस के पिंडदान तक ये कांग्रेसी हिन्दू मान्यताओं का मजाक बनाना,हिंदुओं की बेइज्जती करना जारी रखेंगे.. और इनका पिंडदान हम भारतीय ही करेंगे !

इतना सब कुछ होने के बाद भी यदि कोई हिन्दू कांग्रेस को वोट देता है तो मैं उसे यही सलाह दूंगा की वो अपना DNA टेस्ट करवाए !

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कांग्रेस और पाकिस्तान में समानताएँ –

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कांग्रेस कभी नहीं मानती कि उसने भ्रष्टाचार किया है और पाकिस्तान कभी नहीं मानता कि वो आतंकवाद का समर्थन करता है।
कांग्रेस हिंदुओं की शत्रु है और पाकिस्तान भी।
कांग्रेस इस देश को खोखला, कमज़ोर और बदनाम करने में लगी रही, पाकिस्तान भी यही करता है।
कांग्रेस का पाकिस्तान प्रेम और पाकिस्तान का कांग्रेस प्रेम किसी से छिपा नहीं है।
आतंकवादियों के मारे जाने पर सोनिया गांधी और कांग्रेसी रोते हैं पाकिस्तान भी रोता है।
कश्मीर में पत्थरबाजों और अलगाववादी नेताओं पर सख़्त कार्रवाई का विरोध कांग्रेस करती है और पाकिस्तान भी।
कश्मीर समस्या को उलझाकर रखने की कांग्रेस ने हमेशा कोशिश की और पाकिस्तान ने भी।
कांग्रेस को मोदी फूटी आँख नहीं सुहाते, पाकिस्तान को भी नहीं सुहाते।
कांग्रेस ने अपने सैनिकों को शहीद होने दिया या कहें कि उनकी हत्याएँ करवाईं लेकिन पाकिस्तान पर कभी कड़ी जवाबी कार्रवाई करने की छूट सेना को नहीं दी।
केंद्र और राज्य दोनों जगह कांग्रेस की सरकार थी और 26/11 जैसे भीषणतम आतंकी हमला भारत में हुआ और कांग्रेस ने बाक़ायदा किताब छापकर इसमें पाकिस्तान का हाथ होने की बजाय आरएसएस का नाम ले दिया।
जेएनयू में भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे लगाने वालों के समर्थन में राहुल गांधी जाकर खड़े हो जाते हैं, पाकिस्तान भी भारत के टुकड़े चाहता है।
कांग्रेस के नेता पाकिस्तान जाकर मोदी को हटाने के लिये मदद माँगते हैं।
अनेक देशद्रोही गतिविधियों में लिप्त NGOs को कांग्रेस राज में फंडिंग पाने और कामकाज करने की छूट थी, मोदी ने बंद करा दिए।
कांग्रेस ने अनेक राज्यों की सरकारें गिराई, जोड़तोड़ से सरकारें बनाई तब कभी लोकतंत्र की हत्या नहीं हुई लेकिन भाजपा ने किया तो उसे ये लोकतंत्र के लिए खतरा लगा। पाकिस्तान भी ऐसा ही करता है फिर जब सर्जिकल स्ट्राइक होती है तो इसे अपने ऊपर ख़तरा बताता है।
मोदी कूटनीति के तहत अचानक पाकिस्तान चले जाते हैं तो सारे कांग्रेसी और उसके हिमायती इस पर तंज कसते हैं लेकिन पाकिस्तान के 90 हज़ार सैनिकों को रिहा करने पर ये खामोश हो जाते हैं। ऐसी ही दोगलापंथी पाकिस्तान भी करता है।
गुजरात दंगों को लेकर कांग्रेस ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक बदनाम करने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ा, पाकिस्तान ने भी वही किया।

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​हमेशा से हिंदू विरोधी है कांग्रेस, 10 सबसे बड़े सबूत

हमेशा से हिंदू विरोधी है कांग्रेस, 10 सबसे बड़े सबूत
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील और कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल ने दलील दी है जिस तरह से राम हिंदुओं के लिए आस्था का सवाल हैं उसी तरह तीन तलाक मुसलमानों की आस्था का मसला है। भगवान राम की तुलना तीन तलाक और हलाला जैसी घटिया परंपराओं से करना लोगों को बहुत चुभ रहा है। माना जा रहा है कि कपिल सिब्बल ने सोच-समझकर हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की नीयत से ये बयान दिया है। लेकिन कपिल सिब्बल का बयान इस लंबे सिलसिले की एक कड़ी भर है। हम आपको बताते हैं उन 10 बयानों और घटनाओं के बारे में जो इस बात का सबूत हैं कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से हिंदू विरोध की नीति पर चली है और आज भी वो इसी नीति पर मजबूती के साथ कायम है।
1. वंदेमातरम से थी दिक्कत: आजादी के बाद यह तय था कि वंदे मातरम राष्ट्रगान होगा। लेकिन जवाहरलाल नेहरू ने इसका विरोध किया और कहा कि वंदे मातरम से मुसलमानों के दिल को ठेस पहुंचेगी। जबकि इससे पहले तक तमाम मुस्लिम नेता वंदे मातरम गाते थे। नेहरू ने ये रुख लेकर मुस्लिम कट्टरपंथियों को शह दे दी। जिसका नतीजा देश आज भी भुगत रहा है। आज तो स्थिति यह है कि वंदेमातरम को जगह-जगह अपमानित करने की कोशिश होती है। जहां भी इसका गायन होता है कट्टरपंथी मुसलमान बड़ी शान से बायकॉट करते हैं।
2. सोमनाथ मंदिर का विरोध: गांधी और नेहरू ने हिंदुओं के सबसे अहम मंदिरों में से एक सोमनाथ मंदिर को दोबारा बनाने का विरोध किया था। गांधी ने तो बाकायदा एतराज जताते हुए कहा था कि सरकारी खजाने का पैसा मंदिर निर्माण में नहीं लगना चाहिए, जबकि इस समय तक हिंदू मंदिरों में दान की बड़ी रकम सरकारी खजाने में जमा होनी शुरू हो चुकी थी। जबकि सोमनाथ मंदिर के वक्त ही अगर बाबरी, काशी विश्वनाथ और मथुरा कृष्ण जन्मभूमि के विवादों को भी हल किया जा सकता था। लेकिन कांग्रेस ने ऐसा नहीं होने दिया।
3. बीएचयू में हिंदू शब्द से एतराज: नेहरू और गांधी को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदू शब्द पर आपत्ति थी। दोनों चाहते थे कि इसे हटा दिया जाए। इसके लिए उन्होंने महामना मदनमोहन मालवीय पर दबाव भी बनाया था। जबकि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के नाम से दोनों को ही कोई एतराज नहीं था।
4. हज के लिए सब्सिडी शुरू की: ये कांग्रेस सरकार ही थी जिसने हज पर जाने वाले मुसलमानों को सब्सिडी देने की शुरुआत की। दुनिया के किसी दूसरे देश में ऐसी सब्सिडी नहीं दी जाती। जबकि कांग्रेस सरकार ने अमरनाथ यात्रा पर खास तौर पर टैक्स लगाया। इसके अलावा हिंदुओं की दूसरी धार्मिक यात्राओं के लिए भी बुनियादी ढांचा कभी विकसित नहीं होने दिया गया। अब मोदी सरकार के आने के बाद उत्तराखंड के चारों धाम को जोड़ने का काम शुरू हुआ है।
5. 26/11 के पीछे हिंदुओं का हाथ: मुंबई हमले के बाद कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने इसके पीछे हिंदू संगठनों की साजिश का दावा किया था। दिग्विजय के इस बयान का पाकिस्तान ने खूब इस्तेमाल किया और आज भी जब इस हमले का जिक्र होता है तो पाकिस्तानी सरकार दिग्विजय के हवाले से यही साबित करती है कि हमले के पीछे आरएएस का हाथ है। दिग्विजय के इस बयान पर उनके खिलाफ कांग्रेस ने कभी कोई कार्रवाई या खंडन तक नहीं किया।
6. मंदिर जाने वाले छेड़खानी करते हैं: राहुल गांधी ने कहा था कि जो लोग मंदिर जाते हैं वो लड़कियां छेड़ते हैं। यह बयान भी कांग्रेस और उसके शीर्ष नेतृत्व की हिंदू विरोधी सोच की निशानी थी। यह अलग बात कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद खुद राहुल गांधी कई मंदिरों के चक्कर काट चुके हैं। हालांकि उनकी मां सोनिया अब भी ऐसा कुछ नहीं करती हैं जिससे यह मैसेज जाए कि उनका हिंदू धर्म से कोई नाता है।
7. राम सेतु पर हलफनामा: 2007 में कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि चूंकि राम, सीता, हनुमान और वाल्मिकी वगैरह काल्पनिक किरदार हैं इसलिए रामसेतु का कोई धार्मिक महत्व नहीं माना जा सकता है। जब बीजेपी ने इस मामले को जोरशोर से उठाया तब जाकर मनमोहन सरकार को पैर वापस खींचने पड़े। हालांकि बाद के दौर में भी कांग्रेस रामसेतु को तोड़ने के पक्ष में दिखती रही है।
8. हिंदू आतंकवाद शब्द गढ़ा: इससे पहले हिंदू के साथ आतंकवाद शब्द कभी इस्तेमाल नहीं होता था। मालेगांव और समझौता ट्रेन धमाकों के बाद कांग्रेस सरकारों ने बहुत गहरी साजिश के तहत हिंदू संगठनों को इस धमाके में लपेटा और यह जताया कि देश में हिंदू आतंकवाद का खतरा मंडरा रहा है। जबकि ऐसा कुछ था ही नहीं। इस केस में जिन बेगुनाहों को गिरफ्तार किया गया वो इतने सालों तक जेल में रहने के बाद बेकसूर साबित हो रहे हैं।
9. राम की तुलना इस्लामी कुरीति से: तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने इसकी तुलना भगवान राम से की। यह तय है कि कपिल सिब्बल ने यह बात अनजाने में नहीं, बल्कि बहुत सोच-समझकर कही है। उनकी नीयत भगवान राम का मज़ाक उड़ाने की है। कोर्ट में ये दलील देकर कांग्रेस ने मुसलमानों को खुश करने की कोशिश की है।
10. सेना में फूट डालने की कोशिश: सोनिया गांधी के वक्त में भारतीय सेना को जाति और धर्म में बांटने की बड़ी कोशिश हुई थी। तब सच्चर कमेटी की सिफारिश के आधार पर सेना में मुसलमानों पर सर्वे की बात कही गई थी। बीजेपी के विरोध के बाद मामला दब गया, लेकिन इसे देश की सेनाओं को तोड़ने की गंभीर कोशिश के तौर पर आज भी देखा जाता है।
यह बात भी ऐतिहासिक तथ्य है कि राजनीति में सोनिया गांधी के बढ़ते असर के साथ देश में ईसाई मिशनरियों की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। पहले राजीव गांधी और बाद में मनमोहन सिंह के काल में ईसाई मिशनरियों को उन इलाकों में भी गतिविधियां चलाने की इजाज़त दी गई जो आदिवासी होने के कारण संरक्षित माने जाते हैं। नतीजा ये निकला कि बीते करीब 3 दशक में देश के तमाम आदिवासी इलाके ईसाई मिशनरियों के चंगुल में फंस चुके हैं। जबकि इसी दौरान हिंदू संगठनों के लिए इन इलाकों में काम करना लगभग नामुमकिन बना दिया गया

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हमेशा से हिंदू विरोधी है कांग्रेस

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🌟 हमेशा से हिंदू विरोधी है कांग्रेस, 

10 सबसे बड़े सबूत🌟

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील और कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल ने दलील दी है जिस तरह से राम हिंदुओं के लिए आस्था का सवाल हैं —-

उसी तरह तीन तलाक मुसलमानों की आस्था का मसला है। 
भगवान राम की तुलना तीन तलाक और हलाला जैसी घटिया परंपराओं से करना लोगों को बहुत चुभ रहा है। 

माना जा रहा है कि कपिल सिब्बल ने सोच-समझकर हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की नीयत से ये बयान दिया है। 

लेकिन कपिल सिब्बल का बयान इस लंबे सिलसिले की एक कड़ी भर है। 
हम आपको बताते हैं उन 10 बयानों और घटनाओं के बारे में जो इस बात का सबूत हैं कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से हिंदू विरोध की नीति पर चली है और आज भी वो इसी नीति पर मजबूती के साथ कायम है।

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⚔1. वंदेमातरम से थी दिक्कत: आजादी के बाद यह तय था कि वंदे मातरम राष्ट्रगान होगा। 

लेकिन जवाहरलाल नेहरू ने इसका विरोध किया और कहा कि वंदे मातरम से मुसलमानों के दिल को ठेस पहुंचेगी। 

जबकि इससे पहले तक तमाम मुस्लिम नेता वंदे मातरम गाते थे। 
नेहरू ने ये रुख लेकर मुस्लिम कट्टरपंथियों को शह दे दी। जिसका नतीजा देश आज भी भुगत रहा है। 

आज तो स्थिति यह है कि वंदेमातरम को जगह-जगह अपमानित करने की कोशिश होती है। जहां भी इसका गायन होता है कट्टरपंथी मुसलमान बड़ी शान से बायकॉट करते हैं।

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2. सोमनाथ मंदिर का विरोध: गांधी और नेहरू ने हिंदुओं के सबसे अहम मंदिरों में से एक सोमनाथ मंदिर को दोबारा बनाने का विरोध किया था। 

गांधी ने तो बाकायदा एतराज जताते हुए कहा था कि सरकारी खजाने का पैसा मंदिर निर्माण में नहीं लगना चाहिए, जबकि इस समय तक हिंदू मंदिरों में दान की बड़ी रकम सरकारी खजाने में जमा होनी शुरू हो चुकी थी। 

जबकि सोमनाथ मंदिर के वक्त ही अगर बाबरी, काशी विश्वनाथ और मथुरा कृष्ण जन्मभूमि के विवादों को भी हल किया जा सकता था। लेकिन कांग्रेस ने ऐसा नहीं होने दिया।

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3. बीएचयू में हिंदू शब्द से एतराज: नेहरू और गांधी को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदू शब्द पर आपत्ति थी। दोनों चाहते थे कि इसे हटा दिया जाए। 

इसके लिए उन्होंने महामना मदनमोहन मालवीय पर दबाव भी बनाया था। जबकि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के नाम से दोनों को ही कोई एतराज नहीं था।

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4. हज के लिए सब्सिडी शुरू की: ये कांग्रेस सरकार ही थी जिसने हज पर जाने वाले मुसलमानों को सब्सिडी देने की शुरुआत की। दुनिया के किसी दूसरे देश में ऐसी सब्सिडी नहीं दी जाती। 

जबकि कांग्रेस सरकार ने अमरनाथ यात्रा पर खास तौर पर टैक्स लगाया। इसके अलावा हिंदुओं की दूसरी धार्मिक यात्राओं के लिए भी बुनियादी ढांचा कभी विकसित नहीं होने दिया गया। अब मोदी सरकार के आने के बाद उत्तराखंड के चारों धाम को जोड़ने का काम शुरू हुआ है।

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5. 26/11 के पीछे हिंदुओं का हाथ: मुंबई हमले के बाद कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने इसके पीछे हिंदू संगठनों की साजिश का दावा किया था।
 दिग्विजय के इस बयान का पाकिस्तान ने खूब इस्तेमाल किया और आज भी जब इस हमले का जिक्र होता है तो पाकिस्तानी सरकार दिग्विजय के हवाले से यही साबित करती है कि हमले के पीछे आरएएस का हाथ है। दिग्विजय के इस बयान पर उनके खिलाफ कांग्रेस ने कभी कोई कार्रवाई या खंडन तक नहीं किया।

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6. मंदिर जाने वाले छेड़खानी करते हैं: राहुल गांधी ने कहा था कि जो लोग मंदिर जाते हैं वो लड़कियां छेड़ते हैं। 

यह बयान भी कांग्रेस और उसके शीर्ष नेतृत्व की हिंदू विरोधी सोच की निशानी थी। यह अलग बात कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद खुद राहुल गांधी कई मंदिरों के चक्कर काट चुके हैं। 

हालांकि उनकी मां सोनिया अब भी ऐसा कुछ नहीं करती हैं जिससे यह मैसेज जाए कि उनका हिंदू धर्म से कोई नाता है।

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7. राम सेतु पर हलफनामा: 2007 में कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि चूंकि राम, सीता, हनुमान और वाल्मिकी वगैरह काल्पनिक किरदार हैं 
इसलिए रामसेतु का कोई धार्मिक महत्व नहीं माना जा सकता है। जब बीजेपी ने इस मामले को जोरशोर से उठाया तब जाकर मनमोहन सरकार को पैर वापस खींचने पड़े। 

हालांकि बाद के दौर में भी कांग्रेस रामसेतु को तोड़ने के पक्ष में दिखती रही है।

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8. हिंदू आतंकवाद शब्द गढ़ा: इससे पहले हिंदू के साथ आतंकवाद शब्द कभी इस्तेमाल नहीं होता था। 

मालेगांव और समझौता ट्रेन धमाकों के बाद कांग्रेस सरकारों ने बहुत गहरी साजिश के तहत हिंदू संगठनों को इस धमाके में लपेटा और यह जताया कि देश में हिंदू आतंकवाद का खतरा मंडरा रहा है। 

जबकि ऐसा कुछ था ही नहीं। इस केस में जिन बेगुनाहों को गिरफ्तार किया गया वो इतने सालों तक जेल में रहने के बाद बेकसूर साबित हो रहे हैं।

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9. राम की तुलना इस्लामी कुरीति से: तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने इसकी तुलना भगवान राम से की। 
यह तय है कि कपिल सिब्बल ने यह बात अनजाने में नहीं, बल्कि बहुत सोच-समझकर कही है। उनकी नीयत भगवान राम का मज़ाक उड़ाने की है। 
कोर्ट में ये दलील देकर कांग्रेस ने मुसलमानों को खुश करने की कोशिश की है।

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10. सेना में फूट डालने की कोशिश: सोनिया गांधी के वक्त में भारतीय सेना को जाति और धर्म में बांटने की बड़ी कोशिश हुई थी।
 तब सच्चर कमेटी की सिफारिश के आधार पर सेना में मुसलमानों पर सर्वे की बात कही गई थी।
 बीजेपी के विरोध के बाद मामला दब गया, लेकिन इसे देश की सेनाओं को तोड़ने की गंभीर कोशिश के तौर पर आज भी देखा जाता है।
यह बात भी ऐतिहासिक तथ्य है कि राजनीति में सोनिया गांधी के बढ़ते असर के साथ देश में ईसाई मिशनरियों की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। 
पहले राजीव गांधी और बाद में मनमोहन सिंह के काल में ईसाई मिशनरियों को उन इलाकों में भी गतिविधियां चलाने की इजाज़त दी गई जो आदिवासी होने के कारण संरक्षित माने जाते हैं। नतीजा ये निकला कि बीते करीब 3 दशक में देश के तमाम आदिवासी इलाके ईसाई मिशनरियों के चंगुल में फंस चुके हैं। 
जबकि इसी दौरान हिंदू संगठनों के लिए इन इलाकों में काम करना लगभग नामुमकिन बना दिया गया

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मोदी ने अपनी पत्नी को छोड़ दिया

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टीवी चैनेलो पर सबसे ज्यादा कांग्रेसी कहते है की 

मोदी ने अपनी पत्नी को छोड़ दिया … 
अब इन कांग्रेसियो की 

भयावह सच्चाई जानिये … 
नेहरु की पत्नी कमला नेहरु को टीबी हो गया था .. 
उस जमाने में टीबी का दहशत ठीक ऐसा ही था 

जैसा आज एड्स का है .. 

क्योकि तब टीबी का इलाज नही था और 

इन्सान तिल तिल तडप तडपकर पूरी तरह 

गलकर हड्डी का ढांचा बनकर मरता था … और 

कोई भी टीबी मरीज में पास भी नही जाता था 

क्योकि टीबी सांस से फैलती थी … लोग पहाड़ी इलाके में बने टीबी सेनिटोरियम में 

भर्ती कर देते थे … 
नेहरु में अपनी पत्नी को युगोस्लाविया 

[आज चेक रिपब्लिक] के प्राग शहर में दुसरे इन्सान के साथ सेनिटोरियम में भर्ती कर दिया .. 
कमला नेहरु पुरे दस सालो तक अकेले 

टीबी सेनिटोरियम में पल पल मौत का इंतजार करती रही .. लेकिन नेहरु दिल्ली में एडविना बेंटन के साथ इश्क करता था .. 

मजे की बात ये की इस दौरान नेहरु कई बार ब्रिटेन गया लेकिन एक बार भी वो प्राग जाकर अपनी धर्मपत्नी का हालचाल नही लिया .. 
नेताजी सुभाषचन्द्र बोस को जब पता चला 

तब वो प्राग गये .. और डाक्टरों से और अच्छे इलाज के बारे में बातचीत की .. 

प्राग के डाक्टरों ने बोला की स्विट्जरलैंड के 

बुसान शहर में एक आधुनिक टीबी होस्पिटल है …..

जहाँ इनका अच्छा इलाज हो सकता है .. तुरंत ही नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने  उस जमाने में 70 हजार रूपये इकट्ठे किये और उन्हें विमान से स्विटजरलैंड के बुसान शहर में होस्पिटल में भर्ती किये … 
लेकिन कमला नेहरु असल में मन से बेहद टूट चुकी थी .. 
उन्हें इस बात का दुःख था की उनका पति उनके पास  पिछले दस सालो से हालचाल लेने तक नही आया और गैर लोग उनकी देखभाल कर रहे है …..
दो महीनों तक बुसान में भर्ती रहने के बाद  

28 February 1936 को बुसान में ही कमला नेहरु की मौत हो गयी … 

उनके मौत के दस दिन पहले ही नेताजी सुभाषचन्द्र ने नेहरु को तार भेजकर तुरंत बुसान आने को कहा था .. 

लेकिन नेहरु नही आया … फिर नेहरु को उसकी पत्नी के मौत का तार भेजा गया .. 

फिर भी नेहरु अपनी पत्नी के अंतिम संस्कार में भी नही आया .
अंत में स्विटजरलैंड के बुसान शहर में ही 

नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने नेहरु की पत्नी 

कमला नेहरु का अंतिम संस्कार करवाया …
कांग्रेसियों … 

असल में वामपंथी इतिहासकारों ने 

इस खानदान की गंदी सच्चाई ही 

इतिहास की किताबो से गायब कर दी …….😡😡😡