Posted in Bollywood

किरण राव

सुनने में आ रहा है कि..
आमिर खान अपने पांव की पुरानी “जूती” किरण राव को उतारकर! !…”नई जूती” फातिमा शेख को पहनने जा रहा है…!!!…
इससे पहले भी! !..रीमा नाम की पुरानी ” जूती” को हटाकर!..”नई जूती” किरण राव को पहना था!!…

सैफ अली ने भी अमृता सिंह को उताकर करीना कपूर को पहन रखा है !!..कुछ सालों बाद वो भी नई जूती पसन्द आने पर करीना को उतार फेकेगा !!!….

दोष सिर्फ इन जैसे लोगों का ही नहीं !..बल्कि हमारे समाज में ही ऐसी बेगेरत औरतें है!!..जिन्हें इज्जतदार बहू बनने की बजाय “पांव की जूती” बनना पसन्द है!!!

Posted in Bollywood

किरण राव

ये खबर मशहूर अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपा है …शायद आमिर खान ने सना फातिमा शेख से निकाह कर लिया है ..वैसे इस्लाम इसकी इजाजत देता है आमिर खान चाहे तो पांच निकाह और कर सकते हैं

मुझे याद आता है 1987 में मैंने दूरदर्शन पर आमिर खान और उनकी पहली पत्नी रीना दत्ता का इंटरव्यू देखा था आमिर खान ने अपनी पत्नी की आंखों में देखते हुए कहा था आज मैं जो कुछ भी हूं अपनी पत्नी रीना दत्ता की वजह से हूं उन्होंने और भी बहुत सी बातें बताई थी कि कैसे वह 8 घंटे तक खिड़की पर खड़े खड़े रहते थे सिर्फ इसलिए कि उन्हें एक झलक रीना दत्ता की मिल जाए अंत में उनके सामने यह परेशानी आई कि रीना दत्ता के मां-बाप एक मुस्लिम से शादी नहीं करना चाहते थे रीना दत्ता के पिताजी ने मुझसे (आमिर खान) से कहा कि तुम मुस्लिम हो तुम्हारे घर में कभी भी महिलाओं को तलाक दे दिया जाता है फिर मैंने यानी आमिर खान ने रीना दत्ता के पिताजी से कहा कि मैं कुरान-ए-पाक की कसम खाकर कहता हूं कि मैं कभी भी रीना दत्ता का साथ नहीं छोडूंगा और फिर रीना दत्ता के पिता ने हमारी शादी के लिए हामी भर ली

मित्रों आमिर खान और रीना दत्ता का इंटरव्यू का टेप आज भी दूरदर्शनन के आर्काइव में है

फिर वक्त के साथ रीना दत्ता का हुस्न ढलने लगा तो आमिर खान को अपनी सह निर्देशक किरण राव से प्यार हो गया फिर 6 सालों तक किरण राव को भोगने के बाद जब किरन राव का भी हुस्न ढलने लगा तो आमिर खान को अपनी फिल्म की अभिनेत्री सना फातिमा शेख से प्यार हो गया
यही इस्लाम का सच्चा दर्शन है
साभार जीतेंद्र प्रताप सिंह जी..
….
वैसे इन सेकुलर हिन्दू कुतियो के साथ ऐसा ही होना चाहिए ।

Posted in Bollywood

बाहुबली

Forwarded:
A very interesting article: Must Read 
बाहुबली ने बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए ! क्या इसको लेकर कोई शोर हुआ ? नहीं !

किसी फिल्म के सौ करोड़ पार करने मात्र से उछलकूद मचाने वाले एक हजार करोड़ का आकड़ा पहली बार पार करने पर भी चुप है ! आश्चर्य होता है, घोर आश्चर्य ! और तो और बाहुबली की ऐतिहासिक सफलता के बीच में अचानक दंगल के कलेक्शन की चर्चा की गई !

इसमें मजेदार बात यह थी की दंगल के करोड़ो का कलेक्शन चीन में दिखाया गया ! मानो चीन के खिलाड़ी आमिर खान से प्रेरित होकर अगले ओलिम्पिक में अपना पहला पदक जीतेंगे ! सब कुछ कितना हास्यासपद है !

मगर भारत की जनता इन खबरों को पढ़ने के लिए मजबूर है ! लेकिन इन बातों के पीछे के कारणों को नजरअंदाज कर देना ही हमारी सबसे बड़ी मूर्खता है ! मीडिया में एक मिनट का स्लॉट या एक कॉलम की खबर के कितने पैसे लगते हैं, इसका हमें शायद अंदाज नहीं मगर प्रेस्टीट्यूट के नाम से बदनाम खबरवाली ने ये खबर मुफ्त में चलाई होगी, ऐसा हो नहीं सकता , उलटा बाहुबली की खबर ना बनने देने के भी उसने अलग से पैसे लिए होंगे ! और अगर पैसे नहीं लिए होंगे तो नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया होगा !

कोई पूछ सकता है की आखिरकार ये सब क्यों और किसलिए ? क्योंकि भारत में मीडिया को पढ़ने-सुनने वालो में एक वर्ग सदा ही ऐसा होता है जो हर खबर को सच मानता है ! ये खबरे आप के मन मस्तिष्क पर गहरे तक प्रभाव डालती है और धीरे धीर आपको नियंत्रित करने लगती हैं ! ऐसी खबर निरंतर दिखाते रहने से खबर प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है !

इस संख्या को बढ़ाना ही उद्देश्य है, उन लोगों का जो भारत के खिलाफ एक परसेप्शन बनाने का खेल बड़ी चतुराई से खेल रहे हैं !

यह परसेप्शन की लड़ाई, दशकों से लड़ी जा रही है !

इसका सबसे खतरकनाक पहलू यह है की हम-आम लोगों को इसका पता ही नहीं की हम पर निरंतर आक्रमण हो रहा है, जिसमे हर पल हमारा बहुत कुछ तबाह किया जा रहा है !

जेएनयू से लेकर जाधवपुर यूनिवर्सिटी में भारत के टुकड़े के नारे यूं ही नहीं लगते ! यह उसी षड्यंत्र का अंतिम लक्ष्य है जो इन गिरोह के सदस्यों के मुख से चीख चीख कर बोलता है !

आज भारत विरोधी षड्यंत्र का एक मुख्य केंद्र चीन बन चुका है ! जो विश्वशक्ति बनने के अपने सपने पर तेजी से काम कर रहा है ! पाकिस्तान को तो वो अपने कब्जे में पूरी तरह ले चुका है ! एकमात्र हिन्दू राष्ट्र नेपाल को इस ड्रेगन ने निगल लिया और हम देखते रहे ! मगर यह ना सोचे की हम बचे हुए हैं ! हमारे उपभोग का हर दूसरा सामान अब चीन से आ रहा है ! हमारी अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण के साथ साथ अब वो भारत के परसेप्शन की लड़ाई में भी अपनी सक्रियता बड़ा रहा है ! जिसमे उसका साथ दे रहा है हमारा स्थाई पड़ोसी और उसका ए बी सी डी गैंग !

इनके कई स्लीपर सेल हमारे देश में अनेक मुखौटा लगा कर उनके काम को बखूबी अंजाम दे रहे हैं ! ये राजनीति से लेकर धर्म कला साहित्य और बॉलीवुड में भी प्लांट किये गए हैं !और ये सब मिल कर देश के भीतर- बाहर से एक खतरनाक खेल खेल रहे हैं !

ये दंगल की चीन में अचानक ५०० करोड़ की कमाई उसी खेल का एक छोटा सा हिस्सा है ! क्योंकि परसेप्शन की लड़ाई में वे नहीं चाहते की १००० करोड़ का आकड़ा पार करने वाली एकमात्र भारतीय फिल्म वो हो जिसमे भारत के गौरवशाली इतिहास का प्रस्तुतिकरण हो !

इसलिए दंगल को भी १००० का आकड़ा पार करवाया गया और उसकी चर्चा अधिक की गयी ! उसमे भी दंगल से अधिक आमिर का परसेप्शन बनाये रखा गया जो उनका ब्रांड एम्बेसडर बन कर आगे भी उनके काम आता रहेगा !

बाहुबली में हिन्दुस्तान की अनेक सांस्कृतिक व परम्पराओं का भव्य प्रदर्शन किया गया है , जिसे हमारा दुश्मन कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता ! वो कभी नहीं चाहेगा की देश की जनता की निगाह में कोई ऐसी फिल्म बसी रहे जो उन के आत्मविश्वास और जोश को बढ़ाये और भारत की सभ्यता की जड़े मजबूत हो !

हमारे नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों पर बॉलीवुड ने कैसे धीरे से प्रहार कर नुकसान किया है, यह हम कम ही समझ पाते हैं ! तीन बौने खानों का कद लार्जर देन लाइफ बना देना कोई उनकी मात्र योग्यता के कारण नहीं हुआ , ना ही यह कोई महज संयोग है !

फिल्म पीके के द्वारा हिन्दुओं की कुरीतियों की बात करने वाले तथाकथित मिस्टर परफेक्शनिस्ट अगर ट्रिपल तलाक और हलाला पर चुप है , फिर भी आप इस दोगले कागजी समाज सुधारक को समझ नहीं पाते हैं तो आप मूर्ख हैं !और मूर्ख की चिंता करना उससे बड़ी मूर्खता है !

अब तक पीके ही सबसे सफल फिल्म के शिखर पर विराजमान कर रखी गई थी अर्थात शिव को दूध पिलाने वाले की हँसी उड़ाने वाला आप के मन मष्तिष्क पर राज कर रहा था, अब उसकी जगह कोई शिव की पूजा करने वाला बाहुबली ले ले, यह उन षड्यंत्रकारी लोगों को कैसे मंजूर हो सकता है !

उनका दशकों से जमाया गया सारा खेल ही मिनटों में खत्म हो जाए वो यह कैसे बर्दास्त कर सकते हैं ! ऐसे में जब आज अब पीके को तो फिर से पिक्चर हॉल में चलाया नहीं जा सकता तो उन्होंने दंगल को चला दिया ,वो भी चीन में, क्योंकि भारत के सिनेमा घरों से दंगल को उतरे हुए भी महीनो हो गए थे ! और आननफानन में चीन में उसके ५०० करोड़ के कलेक्शन की चर्चा करा दी गई ! जिसका परिणाम ये हुआ की अब बाहुबली अकेले १००० करोड़ की फिल्म नहीं रही !

अब क्या आप चीन के बॉक्स ऑफिस में कलेक्शन गिनने जाएंगे ? नहीं ! जिस देश से कोई सामान्य खबर भी बाहर नहीं आ पाती वहाँ हमारे एक फिल्म के कलेक्शन की खबर तुरंत आ जाती है , क्या मजेदार खेल है, वाह ! वो तो इस गिरोह का बस नहीं चल रहा वरना आज ये दंगल को बाहुबली से अधिल कलेक्शन दिखा कर नंबर एक कर दें ! दो चार हजार रूपये का कलेक्शन दिखाना इनके लिए बाएं हाथ का मैल है ! अब इनकी भी मजबूरी है क्योंकि जमीनी हकीकत कुछ और बयान कर रही है और बाहुबली भारत में ही नहीं विश्व के अनेक देशों में तीसरे सप्ताह भी फुल चल रही है !

ऐसे में कोई पूछ सकता है की एक आम आदमी क्या करे ? और क्यों ?

अब इस क्यों का जवाब तो संक्षिप्त में सिर्फ इतना कहा जा सकता है की अरे भाई आप की लड़ाई कोई और लड़ेगा क्या ? वैसे भी आपको अगर अपनी सांस्कृतिक विरासत और पारम्परिक स्वतंत्रता से प्यार है, अपनी मिट्टी की सुगंध में ही जीना-मरना चाहते हो तो तो आप को उसके लिए सतत संघर्ष करना होगा ! वरना आप जल्द ही एक कट्टर विचारधारा, क्रूर शासन व्यवस्था या कबीली धर्म के आतंक में जीने के लिए तैयार रहें !

अब सवाल उठता है की इस परसेप्शन की लड़ाई आखिर एक आम आदमी कैसे लड़े ? इस युद्ध में लड़ने के लिए सीमा पर जाने की जरूरत नहीं ,बन्दूक चलाने बम फोड़ने या सीने पर गोली खाने की भी जरूरत नहीं, बस दुश्मन को उसी के खेल में उसी के अस्त्र शस्त्र से मारना होगा !

तो क्यों ना जिन्होंने बाहुबली अब तक नहीं देखी है वो सपरिवार देखें , और जिन्होंने पहले ही देख रखी है वो दूसरी तीसरी चौथी बार देखें ! और इस परसेप्शन के युद्ध में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं !

बाहुबली को उस ऊंचाई तक पहुंचा दें की कोई रईस या सुलतान चाहे जितना पीके भी दंगल करे उस तक ना पहुंच पाए ! वैसे भी लगता है की बाहुबली अगर २००० करोड़ का आकड़ा पार कर जाये तो कोई आश्चर्य नहीं होगा !

हमें ऐसा होने देने में मदद करनी चाहिए ,क्योंकि अभी कोई और नहीं है जो वहां तक जल्द पहुंच सके ! यह हमारे परसेप्शन की लड़ाई की पहली जीत होगी, जिसकी गूँज कई दिनों तक बॉलीवुड के कुछ रहस्यमयी परदों को चीर कर परदे के पीछे बैठे शैतान के कानों में बजती रहेगी !

Posted in Bollywood

जस्टिन बीबर – Thakur Ram Kumar Rana

ये था वो चमगादड़ जिसको देखने के लिए ₹75000 का टिकट था….!

जस्टिन बीबर की आधी उतरी पेण्ट देखने के लिए भारतियों ने खर्च डाले 250 करोड़ ? इनमें से अधिकतर बॉलीवुड, उच्च वर्ग के सेकुलर प्रगतिशील बुद्धिजीवी | और यही लोग हिन्दू धर्म पे कटाक्ष करते बोलते हैं कि शिवलिंग में आधा किलो दूध चढ़ाना पैसे की बर्बादी है ।

जस्टिन बीबर को एक टिकट के 75000 में खरीदकर हम उसे एक रात में 250 करोड़ लेकर भेज देते हैं | वहीं जब बाढ़ राहत कोष, सैनिक सहायता कोष या विधवा राहत फंड के नाम पर सौ रूपए देने में साँस फूल जाती है, फेफड़ों में पानी भर जाता है हमारे |

90 मिनट होठ हिलाकर 250 करोड़ ले गया, ये वही देश है जहाँ बीस रूपए किलो के प्याज अगर 30 के हो जाए तो अच्छे अच्छो के गणित गड़बड़ा जाते हैं |

ध्यान से सोचिए प्राथमिकता किसे देनी चाहिए ? मेरे इस संदेश को आपसे साधुवाद की अपेक्षा नहीं है ! फिर भी गौर करना.

Posted in Bollywood

दाऊद के इशारे पर बॉलीवुड में घुसाये जा रहे पाकिस्तानी, निकाले जा रहे हिन्दू कलाकार…..

दाऊद के इशारे पर बॉलीवुड में घुसाये जा रहे पाकिस्तानी,
निकाले जा रहे हिन्दू कलाकार…..

कुमार शानू ,उदित नारायण, अभिजीत, शान, सुखविंदर सिंह, सोनू निगम, अरजीत सिहं ।

आपने कभी ध्यान दिया है कि फ़िल्मों मे 92 के बाद से गायकों का करियर ग्राफ़ कैसा रहा है ??

याद है कुमार शानू जो करियर में पीक पर चढ़कर अचानक ही धुँध में खो गये ।

फिर आये अभिजीत, जिन्हे टाप पर पहुँचकर अचानक
ही काम मिलना बद हो गया

उदित नारायण भी उदय होकर समय से पहले अस्त हो गये।

उसके बाद सुखविंदर अपनी धमाकेदार आवाज से फलक पर छा गये और फिर अचानक ही ग्रहण लग गया

उसके बाद आये शान,और बुलंदियों को छूने के अचानक बाद ही कब नीचे आये पता ही नही लगा।

फिर सोनू निगम कब काम मिलना बंद हुआ, लोग समझ ही नही पाये ।

उसके बाद अरजीत सिंह जिनकी मखमली आवाज ने दिलो मे जगह बनानी शुरू ही की थी कि सलमान ने उन्हें पब्लिकली माफ़ी माँगने के बाद भी फिल्म सुलतान में उनके द्वारा गाया हुआ ‘जग घूमया’ जैसा गाना बाहर निकलवा दिया अौर उसी गाने को पाकिस्तानी गायक राहत फतेह अली खान से गवाया, अौर सिर्फ़ यही नहीं बाद में धीरे धीरे उसका करियर खतम करने की साज़िश चल रही है।

सारे ही गायकों को असमय बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

इसके उल्टा पहले चीख़ कर गाने वाले, क़व्वाली
गायक नुसरत फ़तेह अली खान क़व्वाली गाने के
लिये बुलाया जाता है, और पाकिस्तानी गायकों के लिये दरवाज़े खोल दिये जाते हैं। उसके बाद राहत फ़तेह अली खान आते हैं और बॉलीवुड में उन्हे लगातार काम मिलने लगता है और बॉलीवुड की वजह से सुपरहिट हो जाते है।

फिर नये स्टाईल के नाम पर आतिफ़ असलम आते हैं जिनको एक के बाद एक अच्छे गाने मिलने लगते हैं।

अली जाफ़र जैसे औसत गायक को भी काम मिलने में कोई दिक़्क़त नही आती ।

धीरे धीरे पाकिस्तानी हीरो हीरोइन को भी बॉलीवुड मे लाकर स्थापित किया जाने लगा और भारतियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाने लगा

उरी हमले के बाद बैक डोर से चुपके से उन्हे लाने की चाल, कुछ भारतियों की नज़र मे आ गया और उन्होंने निंदा करने की माँग करने की, हिमाक़त कर डाली जो उन्हे नागवार गुज़री और वो पाकिस्तान वापस चले गये।

क्या आपको लगता है कि यह महज इत्तिफ़ाक़ है तो आप से बडा भोला कोइ नही

पूरा बॉलीवुड डी-कंपनी या पी-कंपनी (पाकिस्तान) के इशारों पर चलता है, और इसका इलाज है टोटल बॉयकाट।

सिर्फ़ देशभक्त कलाकारों का समर्थन करें।।

हम हमारे देश के लिए इतना तो कर सकते है। हम अपने रूपये को आतंकियो के हाथ मे न जाने दे।
हमारे ही रुपयो से हमारे ही बच्चो के लिए कफन का इन्तजाम तो न करें!!
अपने पैसे देश की बर्बादी में न लगा के देश के विकास अपने समाज के विकास में लगाएं साल में 100 फ़िल्में न देख के अच्छी 1 ही फिल्म देखें ,जेहादी सोच वाले शाहरुख़, महेश भट्ट, कपूर खानदान का बॉयकॉट करें जिन प्रोडक्ट की जेहादी ऐड करते हैं उसका बॉयकॉट करें, पर ध्यान रखें ये सब गुस्से या अराजकता से नहीं धैर्य से करना है।

Posted in Bollywood

बॉलीवुड

षड़यंत्र
बॉलीवुड में घुसाये जा रहे पाकिस्तानी कलाकार व गायक और निकाले जा रहे हिन्दू कलाकार ।।
कुमार शानू ,उदित नारायण, अभिजीत, शान, सुखविंदर सिंह, सोनू निगम, अरजीत सिहं ।

*आपने कभी ध्यान दिया है कि फ़िल्मों मे 92 के बाद से गायकों का करियर ग्राफ़ कैसा रहा है ??*

याद है *कुमार शानू* जो करियर में पीक पर चढ़कर अचानक ही धुँध में खो गये ।

फिर आये *अभिजीत*, जिन्हे टाप पर पहुँचकर अचानक

ही काम मिलना बद हो गया

*उदित नारायण* भी उदय होकर समय से पहले अस्त हो गये।

उसके बाद *सुखविंदर* अपनी धमाकेदार आवाज से फलक पर छा गये और फिर अचानक ही ग्रहण लग गया

उसके बाद आये शान,और बुलंदियों को छूने के अचानक बाद ही कब नीचे आये पता ही नही लगा।

फिर *सोनू निगम* कब काम मिलना बंद हुआ, लोग समझ ही नही पाये ।

उसके बाद *अरजीत सिंह* जिनकी मखमली आवाज ने दिलो मे जगह बनानी शुरू ही

की थी कि 💥 *सलमान ने उनहे पब्लिकली माफ़ी माँगने के बाद भी फिल्म सुलतान में उनके द्वारा गाया हुआ ‘जग घूमया’ जैसा गाना बाहर निकलवा दिया अौर उसी गाने को पाकिस्तानी गायक राहत फतेह अली खान से गवाया*, अौर सिर्फ़ यही नहीं बाद में धीरे धीरे उसका करियर

खतम करने की साज़िश चल रही है।

सारे ही गायकों को असमय बाहर का रास्ता दिखा दिया गया ।

इसके उल्टा पहले चीख़ कर गाने वाले, क़व्वाली

गायक *नुसरत फ़तेह अली खान* क़व्वाली गाने के

लिये बुलाया जाता है, और पाकिस्तानी गायकों के लिये दरवाज़े खोल दिये जाते हैं। उसके बाद राहत *फ़तेह अली खान* आते हैं और बॉलीवुड में उन्हे लगातार काम मिलने लगता है और बॉलीवुड की वजह से सुपरहिट हो जाते है।

फिर नये स्टाईल के नाम पर *आतिफ़ असलम* आते हैं जिनको एक के बाद एक अच्छे गाने मिलने लगते हैं।

*अली जाफ़र* जैसे औसत गायक को भी काम मिलने में कोई दिक़्क़त नही आती ।

धीरे धीरे *पाकिस्तानी हीरो*

*हीरोइन* को भी बॉलीवुड मे लाकर स्थापित किया जाने लगा और भारतियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाने लगा

*उरी हमले के बाद* बैक डोर से चुपके से उन्हे लाने की चाल, कुछ भारतियों की नज़र मे आ गया और उन्होंने निंदा करने की माँग करने की, हिमाक़त कर डाली जो उन्हे नागवार गुज़री और फिर  हमारे ही देश के गद्दार सेकुलर-वामपंथियों ने उन पाकिस्तानी कलाकारों  के पक्ष और अपने ही देश के विरोध में आकाश-पाताल एक कर दिया किंन्तु अन्ततोगत्वा उन्हें  *पाकिस्तान* वापस जाना ही पड़ा ।

क्या आपको लगता है कि यह महज इत्तिफ़ाक़ है तो आप से बडा भोला कोइ नही

*पूरा बॉलीवुड डी-कंपनी या पी-कंपनी (पाकिस्तान) के इशारों पर चलता है, और इसका इलाज है टोटल बॉयकाट ( *बहिष्कार*)

*सिर्फ़ देशभक्त कलाकारों का* *समर्थन करें ।।*

Manu kumar

Posted in Bollywood

बाहूबली

श्री संजय द्विवेदी
​”बाहूबली फिल्म मे जिस 

#महिष्मति रियासत की बात हुई है उस पर”
“हैहय वंश” के क्षत्रियो का राज था ।

चेदि जनपद की राजधानी ‘माहिष्मति’, जो नर्मदा के तट पर स्थित थी, इसका अभिज्ञान ज़िला इंदौर, मध्य प्रदेश में स्थित ‘महेश्वर’ नामक स्थान से किया गया है, जो पश्चिम रेलवे के अजमेर-खंडवा मार्ग पर बड़वाहा स्टेशन से 35 मील दूर है।
महाभारत के समय यहाँ राजा नील का राज्य था, जिसे सहदेव ने युद्ध में परास्त किया था ।

‘ततो रत्नान्युपादाय पुरीं माहिष्मतीं ययौ।

तत्र नीलेन राज्ञा स चक्रे युद्धं नरर्षभ:।।
राजा नील महाभारत के युद्ध में कौरवों की ओर से लड़ता हुआ मारा गया था। बौद्ध साहित्य में माहिष्मति को दक्षिण अवंति जनपद का मुख्य नगर बताया गया है। बुद्ध काल में यह नगरी समृद्धिशाली थी तथा व्यापारिक केंद्र के रूप में विख्यात थी। तत्पश्चात उज्जयिनी की प्रतिष्ठा बढ़ने के साथ-साथ इस नगरी का गौरव कम होता गया।
गुप्त काल में 5वीं शती तक माहिष्मति का बराबर उल्लेख मिलता है। कालिदास ने ‘रघुवंश’ में इंदुमती के स्वयंवर के प्रसंग में नर्मदा तट पर स्थित #माहिष्मति का वर्णन किया है और यहाँ के राजा का नाम ‘प्रतीप’ बताया है।
‘अस्यांकलक्ष्मीभवदीर्घबाहो

माहिष्मतीवप्रनितंबकांचीम् प्रासाद-जालैर्ज

लवेणि रम्यां रेवा यदि प्रेक्षितुमस्तिकाम:।’
इस उल्लेख में माहिष्मती नगरी के परकोटे के नीचे कांची या मेखला की भाति सुशोभित नर्मदा का सुंदर वर्णन है।

कालिदास का उल्लेख माहिष्मति नरेश को कालिदास ने अनूपराज भी कहा है जिससे ज्ञात होता है कि कालिदास के समय में माहिष्मति का प्रदेश “नर्मदा” नदीके तट के निकट होने के कारण अनूप कहलाता था। पौराणिक कथाओं में माहिष्मति को हैहय वंशीय कार्तवीर्य अर्जुन अथवा सहस्त्रबाहु की राजधानी बताया गया है। किंवदंती है कि इसने अपनी सहस्त्र भुजाओं से नर्मदा का प्रवाह रोक दिया था।
महेश्वर में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई ने नर्मदा के उत्तरी तट पर अनेक घाट बनवाए थे, जो आज भी वर्तमान हैं। यह धर्मप्राणरानी 1767 के पश्चात इंदौर छोड़कर प्राय: इसी पवित्र

स्थल पर रहने लगी थीं। नर्मदा के तट पर अहिल्याबाई तथा होल्कर वंश के नरेशों की कई छतरियां बनी हैं। ये वास्तुकला की दृष्टि से प्राचीन हिन्दू मंदिरों के स्थापत्य की अनुकृति हैं। भूतपूर्व इंदौर रियासत की आद्य राजधानी यहीं थी।
एक पौराणिक अनुश्रुति में कहा गया है कि माहिष्मति का बसाने वाला ‘महिष्मानस’ नामक चंद्रवंशी नरेश था। सहस्त्रबाहु इन्हीं के वंश में हुआ था। महेश्वरी नामक नदी जो माहिष्मति अथवा महिष्मान के नाम पर प्रसिद्ध है, महेश्वर से कुछ ही दूर पर नर्मदा में मिलती है।
हरिवंश पुराण की टीका में नीलकंठ ने माहिष्मति की स्थिति विंध्य और ऋक्ष पर्वतों के बीच में विंध्य के उत्तर में और ऋक्ष के दक्षिण में बताई है।
मुम्बई फ़िल्म इंडस्ट्री वाले तिलमिला गए हैं। सारी इंडस्ट्री चिन्ता में है। और क्यों न हों? प्रतिस्पर्धा कोई एरे गेरे से थोड़ी ना है??

आजतक मद्रास ने कोई अधिक हानि नही पहुचाई थी परन्तु आंध्र फ़िल्म इंडस्ट्री मद्रास थोड़ी ना है?? यह मुम्बई बॉलीवुड को खा जायेगी और डकार भी नही लेगी। बॉलीवुड ने कभी योग्य व्यक्ति को उचित कार्य नही दीया है। बॉलीवुड में दाउद जैसे मुस्लीमों का राज चलता होने के कारण सभी फ़िल्म में अकारण मुस्लीम पात्र घुसेड़ा है। नायक-नायिका हिन्दू होने पर भी गीतों में खुदा और अल्ला-अल्ला गाना पड़ता था।

सारी फिल्मों में मुस्लीम सभ्यता को महान दिखाना और मुस्लिम पात्र को वीरत्व भरा ही दिखाना पड़ता था क्योंकि बॉलीवुड मुस्लीम साम्राज्य पर ही खड़ा था। परन्तु अब उनके पाप का घड़ा भर चूका है। सामने उनका बाप बाहुबली खड़ा है।
उस दौर में बर्बर यवनो, शकों, हुणों हमारे वैभव को देखकर खिंचे चले आते थे, उन बर्बरों के लगातार आक्रमणों को नकारते हुए, इस पुण्यभूमि के गौरव की गाथा को वही भव्यता के साथ प्रस्तुत किया गया जो उस समय होगा, इसे कल्मनिक मानकर नही अपितु इस पुण्यभूमि भारत का गौरव और वैभव को सजीव मान इस सबसे बहतरीन फिल्म बाहुबली को देखे और अपने पुरखों का स्वाभिमान मान गर्वित हो ।
# बाहूबली जिस फिल्म मे #क्षत्रियो की वीरता ,युद्ध की रणनीती और मातृभूमि के लिए मर मिट जाने वाला शौर्य दिखाया गया है, जो हम इतिहास की किताबो मे पढते आए वो ही इस फिल्म मे दर्शाया है l

वर्तमान में महेश्वर 

खरगोन ज़िले में है 

जो एरिया निमाड़ के नाम से जाना जाता है 

निमाड़ में पहले दो जिले थे अब चार है 

ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग भी निमाड़ में है