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માણો ગુજરાતના 10 મેળાઓ


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પશુ પક્ષીનાં નામ પરથી નામ


પશુ પક્ષીનાં નામ પરથી નામ

સાભાર – શ્રીમતિ વિમળા હીરપરા, શ્રી. ઉત્તમ ગજ્જર

  • હંસ​
    • હંસરાજ,​હંસલ, હંસા
  • કોયલ ​​
    • કોકીલા, કોકીલ
  • મેના
    • મેના, કોકીલ, મેનકા, મોનિકા(?)
  • ગધેડો​ 
    • ખરબંદા
  • વાનર ​
    • કપીશ,​ ​કપિલ
  • બકરો 
    • અજામિલ(?)
  • પોપટ 
    • પોપટલાલ, તોતારામ, તોતાપુરી
  • મૃગ/ હરણ  ​
    • મૃગેશ, મૃગયા
  • મોર​
    • મયુર,​ ​ મયુરધ્વજ, કલાપી
  • ઘોડો
    • ​કુરંગ​, અશ્વિન, અશ્વપતિ
  • ભમરો
    • મધુકર, દ્વિરેફ
  • નાગ​
    • નાગજી, નાગાર્જુન, નાગરદાસ, નાગદાન
  • ફૂલ​
    • મકરન્દ, પુષ્પા
  • હાથી
    • હસ્તીનાપુર, ગજાનન, ગજેન્દ્ર
  • પક્ષી​  ​
    • ખગેન્દ્ર, વિહંગ
  • વાછરડું​ ​
    • વચ્છરાજ
  • બળદ​ 
    • નંદ, નાંદી
  • વાધ ​
    • વાધજી, શેરખાન
  • સિંહ 
    • વનરાજ, વનપાલ, અનેક કોમોમાં નામ પાછળ  રજપુતો, દરબાર, શિખ )
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જુઓ ગુજરાતી ભાષા નો વૈભવ.


💕જુઓ ગુજરાતી ભાષા નો વૈભવ…..💕
આશા અમર છે.

અમર પ્રેમ છે.

પ્રેમ સાગર છે.

સાગર કુંવારો છે.

કુંવારો સુખી છે.

સુખી ગાયક છે.

ગાયક ગાય છે.

ગાય માતા છે.

માતા સ્ત્રી છે.

સ્ત્રી શક્તિ છે.

શક્તિ દુધ છે.

દુધ સફેદ છે.

સફેદ કલર છે.

કલર ચેનલ છે.

ચેનલ ચાલુ છે.

ચાલુ આઇટમ છે.

આઇટમ હોટ છે.

હોટ સમર છે.

સમર વેકેશન છે.

વેકેશન લાંબું છે.

લાંબું જીવન છે.

જીવન યાત્રા છે.

યાત્રા સાહસ છે.

સાહસ વીર છે.

વીર જવાન છે.

જવાન અમર છે

અને

અમર તો આશા છે.
સાલુ…જબરૂ છે નઈ…..
મજા આવી ને વાંચવાની ….તો….. ગુજરાતીઓ ને મોકલો આગળ.

આ પાછુ નવુ આવ્યું મારકેટ માં….🔸🔸🔸🔸🔸

આનંદ કરે અંબાણી

જલસા કરે અદાણી

રૂપાણી ને મળ્યા વાઘાણી

કરસે ભાજપ ને ધુળધાણી

સમજો હવે સરકાર વીખાણી

લી. ઉપર થી

ધીરુભાઈ અંબાણી

😜😂😜😂😃

💙💙?💙💙💙*ઝોકું* “જલેબી” નથી, તો ય “ખવાય” જાય છે.
*આંખો* “તળાવ” નથી, તોય “ભરાય” જાય છે.
*ઇગો* “શરીર” નથી, તોય “ઘવાય” જાય છે.
*દુશ્મની* “બીજ” નથી, તોય “વવાય” જાય છે.
*હોઠ* “કપડું” નથી, તોય “સિવાઈ” જાય છે.
*કુદરત* “પત્ની” નથી, તોય “રિસાઈ” જાય છે.
*બુદ્ધિ* “લોખંડ” નથી, તોય “કટાઇ” જાય છે.
અને *માણસ* “હવામાન” નથી, તોય “બદલાઈ” જાય છે.👌🏻👌🏻

🔹શબ્દ ૧ જ મુકાય

ને અર્થ ફરી જાય છે,

🔹આંકડો ૧ જ મુકાય

ને દાખલો ફરી જાય છે,

🔹પગલુ ૧ જ મુકાય

ને દિશા ફરી જાય છે,

 

સાથ અગર સારી,

૧ જ વ્યક્તિનો મળે ને સાહેબ,

આખી જિંદગી બદલાઈ જાય છે.

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दस पवित्र पक्षी और उनका रहस्य


दस पवित्र पक्षी और उनका रहस्य

*********************
आइये जाने उन दस दिव्य और पवित्र पक्षीयों के बारे मैं जिनका हिंदू धर्म में बहुत ही महत्व माना गया है…
हंस:- जब कोई व्यक्ति सिद्ध हो जाता है तो उसे कहते हैं कि इसने हंस पद प्राप्त कर लिया और जब कोई समाधिस्थ हो जाता है, तो कहते हैं कि वह परमहंस हो गया। परमहंस सबसे बड़ा पद माना गया है।
हंस पक्षी प्यार और पवित्रता का प्रतीक है। यह बहुत ही विवेकी पक्षी माना गया है। आध्यात्मिक दृष्टि मनुष्य के नि:श्वास में ‘हं’ और श्वास में ‘स’ ध्वनि सुनाई पड़ती है। मनुष्य का जीवन क्रम ही ‘हंस’ है क्योंकि उसमें ज्ञान का अर्जन संभव है। अत: हंस ‘ज्ञान’ विवेक, कला की देवी सरस्वती का वाहन है। यह पक्षी अपना ज्यादातर समय मानसरोवर में रहकर ही बिताते हैं या फिर किसी एकांत झील और समुद्र के किनारे।
हंस दांप‍त्य जीवन के लिए आदर्श है। यह जीवन भर एक ही साथी के साथ रहते हैं। यदि दोनों में से किसी भी एक साथी की मौत हो जाए तो दूसरा अपना पूरा जीवन अकेले ही गुजार या गुजार देती है। जंगल के कानून की तरह इनमें मादा पक्षियों के लिए लड़ाई नहीं होती। आपसी समझबूझ के बल पर ये अपने साथी का चयन करते हैं। इनमें पारिवारिक और सामाजिक भावनाएं पाई जाती है।
हिंदू धर्म में हंस को मारना अर्थात पिता, देवता और गुरु को मारने के समान है। ऐसे व्यक्ति को तीन जन्म तक नर्क में रहना होता है।
मोर :- मोर को पक्षियों का राजा माना जाता है। यह शिव पुत्र कार्तिकेय का वाहन है। भगवान कृष्ण के मुकुट में लगा मोर का पंख इस पक्षी के महत्व को दर्शाता है। यह भारत का राष्ट्रीय पक्षी है।
अनेक धार्मिक कथाओं में मोर को बहुत ऊंचा दर्जा दिया गया है। हिन्दू धर्म में मोर को मार कर खाना महापाप समझा जाता है।
कौआ :- कौए को अतिथि-आगमन का सूचक और पितरों का आश्रम स्थल माना जाता है। इसकी उम्र लगभग 240 वर्ष होती है। श्राद्ध पक्ष में कौओं का बहुत महत्व माना गया है। इस पक्ष में कौओं को भोजना कराना अर्थात अपने पितरों को भोजन कराना माना गया है। कौए को भविष्य में घटने वाली घटनाओं का पहले से ही आभास हो जाता है।
उल्लू : – उल्लू को लोग अच्छा नहीं मानते और उससे डरते हैं, लेकिन यह गलत धारणा है। उल्लू लक्ष्मी का वाहन है। उल्लू का अपमान करने से लक्ष्मी का अपमान माना जाता है। हिन्दू संस्कृति में माना जाता है कि उल्लू समृद्धि और धन लाता है।
भारत वर्ष में प्रचलित लोक विश्वासों के अनुसार भी उल्लू का घर के ऊपर छत पर स्थि‍त होना तथा शब्दोच्चारण निकट संबंधी की अथवा परिवार के सदस्य की मृत्यु का सूचक समझा जाता है। सचमुच उल्लू को भूत-भविष्य और वर्तमान में घट रही घटनाओं का पहले से ही ज्ञान हो जाता है।
वाल्मीकि रामायण में उल्लू को मूर्ख के स्थान पर अत्यन्त चतुर कहा गया। रामचंद्र जी जब रावण को मारने में असफल होते हैं और जब विभीषण उनके पास जाते हैं, तब सुग्रीव राम से कहते हैं कि उन्हें शत्रु की उलूक-चतुराई से बचकर रहना चाहिए। ऋषियों ने गहरे अवलोकन तथा समझ के बाद ही उलूक को श्रीलक्ष्मी का वाहन बनाया था।
गरूड़ : – इसे गिद्ध भी कहा जाता है। पक्षियों में गरूढ़ को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। यह समझदार और बुद्धिमान होने के साथ-साथ तेज गति से उड़ने की क्षमता रखता है। गरूड़ के नाम पर एक पुराण भी है गरूड़ पुराण। यह भारत का धार्मिक और अमेरिका का राष्ट्रीय पक्षी है।
गरूड़ के बारे में पुराणों में अनेक कथाएं मिलती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु की सवारी और भगवान राम को मेघनाथ के नागपाश से मुक्ति दिलाने वाले गरूड़ के बारे में कहा जाता है कि यह सौ वर्ष तक जीने की क्षमता रखता है।
नीलकंठ :- नीलकंड को देखने मात्र से भाग्य का दरवाजा खुल जाता है। यह पवित्र पक्षी माना जाता है। दशहरा पर लोग इसका दर्शन करने के लिए बहुत ललायित रहते हैं।
तोता :- तोते का हरा रंग बुध ग्रह के साथ जोड़कर देखा जाता है। अतः घर में तोता पालने से बुध की कुदृष्टि का प्रभाव दूर होता है। घर में तोते का चित्र लगाने से बच्चों का पढ़ाई में मन लगता है।
आपने बहुत से तोता पंडित देखें होंगे जो भविष्यवाणी करते हैं। तोते के बारे में बहुत सारी कथाएं पुराणों में मिलती है। इसके अलवा, जातक कथाओं, पंचतंत्र की कथाओं में भी तोते को किसी न किसी कथा में शामिल किया गया है।
कबूतर :- इसे कपोत कहते हैं। यह शांति का प्रतीक माना गया है। भगवान शिव ने जब अमरनाथ में पार्वती को अजर अमर होने के वचन सुनाए थे तो कबतरों के एक जोड़े ने यह वचन सुन लिए थे तभी से वे अजर-अमर हो गए। आज भी अमरनाथ की गुफा के पास ये कबूतर के जोड़े आपको दिखाई दे जाएंगे। कहते हैं कि सावन की पूर्णिमा को ये कबूतर गुफा में दिखाई पड़ते हैं। इसलिए कबूतर को महत्व दिया जाता है।
बगुला :- आपने कहावत सुनी होगी बगुला भगत। अर्थात ढोंगी साधु। धार्मिक ग्रंथों में बगुले से जुड़ी अनेक कथाओं का उल्लेख मिलता है। पंत्रतंत्र में एक कहानी है बगुला भगत। बगुला भगत पंचतंत्र की प्रसिद्ध कहानियों में से एक है जिसके रचयिता आचार्य विष्णु शर्मा हैं।
बगुला के नाम पर एक देवी का नाम भी है जिसे बगुलामुखी कहते हैं। बगुला ध्यान भी होता है अर्थात बगुले की तरह एकटक ध्यान लगाना। बगुले के संबंध में कहा जाता है कि ये जिस भी घर के पास ‍के किसी वृक्ष आदि पर रहते हैं वहां शांति रहती है और किसी प्रकार की अकाल मृत्यु नहीं होती।
गोरैया:- भारतीय पौराणिक मान्यताओं अनुसार यह चिड़ियां जिस भी घर में या उसके आंगन में रहती है वहां सुख और शांति बनी रहती है। खुशियां उनके द्वार पर हमेशा खड़ी रहती है और वह घर दिनोदिन तरक्की करता रहता है।✍☘💕

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भारतीय नदी


*भारतीय नदी–
*1 सिन्धु नदी* :-

•लम्बाई: (2,880km)

• उद्गम स्थल: मानसरोवर झील के निकट

• सहायक नदी:(तिब्बत) सतलुज, व्यास,

झेलम, चिनाब,

रावी, शिंगार,

गिलगित, श्योक जम्मू और कश्मीर, लेह

—————————————

*2 झेलम नदी*

•लम्बाई: 720km

•उद्गम स्थल: शेषनाग झील,

जम्मू-कश्मीर

•सहायक नदी: किशन, गंगा, पुँछ लिदार,करेवाल,

सिंध जम्मू-कश्मीर,

कश्मीर

——————————

*3 चिनाब नदी*

•लम्बाई: 1,180km

•उद्गम स्थल: बारालाचा दर्रे के निकट

•सहायक नदी: चन्द्रभागा जम्मू-कश्मीर

—————————————

*4 रावी नदी*

•लम्बाई: 725 km

•उद्गम स्थल:रोहतांग दर्रा,

कांगड़ा

•सहायक नदी :साहो, सुइल पंजाब

————————————–

*5 सतलुज नदी*

•लम्बाई: 1440 (1050)km •उद्गमस्थल:मानसरोवर के निकट राकसताल

•सहायक नदी : व्यास, स्पिती,

बस्पा हिमाचल प्रदेश, पंजाब

————————————

*6 व्यास नदी*

•लम्बाई: 470

•उद्गम स्थल: रोहतांग दर्रा •सहायक नदी:तीर्थन, पार्वती,

हुरला

—————————————

*7 गंगा नदी*

•लम्बाई :2,510 (2071)km •उद्गम स्थल: गंगोत्री के निकट गोमुख से

• सहायक नदी: यमुना, रामगंगा,

गोमती,

बागमती, गंडक,

कोसी,सोन,

अलकनंदा,

भागीरथी,

पिण्डार,

मंदाकिनी, उत्तरांचल,

उत्तर प्रदेश,

बिहार,

————————————–

*8 यमुना नदी*

•लम्बाई: 1375km

•उद्गम स्थल: यमुनोत्री ग्लेशियर

•सहायक नदी: चम्बल, बेतवा, केन,

टोंस, गिरी,

काली, सिंध,

आसन

————————————-

*9 रामगंगा नदी*

•लम्बाई: 690km

•उद्गम स्थल:नैनीताल के निकट एक हिमनदी से

• सहायक नदी:खोन

—————————————

*10 घाघरा नदी*

•लम्बाई: 1,080 km

•उद्गम स्थल:मप्सातुंग (नेपाल)

• सहायक नदी:हिमनद शारदा, करनली,

कुवाना, राप्ती,

चौकिया,

————————————
*11 गंडक नदी*

•लम्बाई: 425km

•उद्गम स्थल: नेपाल तिब्बत सीमा पर मुस्ताग के निकट •सहायक नदी :काली गंडक,

त्रिशूल, गंगा

————————————–

*12 कोसी नदी*

•लम्बाई: 730km

•उद्गम स्थल: नेपाल में सप्तकोशिकी

(गोंसाईधाम)

•सहायक नदी: इन्द्रावती,

तामुर, अरुण,

कोसी

————————————–

*13 चम्बल नदी*

•लम्बाई: 960 km

•उद्गम स्थल:मऊ के निकट जानापाव पहाड़ी से

•सहायक नदी :काली सिंध,

सिप्ता,

पार्वती, बनास

—————————————

*14 बेतवा नदी*

•लम्बाई: 480km

•उद्गम स्थल: भोपाल के पास उबेदुल्ला गंज के पास मध्य प्रदेश

—————————————

*15 सोन नदी*

•लम्बाई: 770 km

•उद्गमस्थल:अमरकंटक की पहाड़ियों से

•सहायक नदी:रिहन्द, कुनहड़

—————————————

*16 दामोदर नदी*

•लम्बाई: 600km

•उद्गम स्थल: छोटा नागपुर पठार से दक्षिण पूर्व

•सहायक नदी:कोनार,

जामुनिया,

बराकर झारखण्ड,

पश्चिम बंगाल

—————————————

*17 ब्रह्मपुत्र नदी*

•लम्बाई: 2,880km

•उद्गम स्थल: मानसरोवर झील के निकट (तिब्बत में सांग्पो)

•सहायक नदी: घनसिरी,

कपिली,

सुवनसिती,

मानस, लोहित,

नोवा, पद्मा,

दिहांग अरुणाचल प्रदेश, असम

————————————

*18 महानदी*

•लम्बाई: 890km

•उद्गम स्थल: सिहावा के निकट रायपुर

•सहायक नदी: सियोनाथ,

हसदेव, उंग, ईब,

ब्राह्मणी,

वैतरणी मध्य प्रदेश,

छत्तीसगढ़,

उड़ीसा

————————————–

*19 वैतरणी नदी*

• लम्बाई: 333km

•उद्गम स्थल:क्योंझर पठार उड़ीसा

—————————————

*20 स्वर्ण रेखा*

•लम्बाई: 480km

•उद्गम स्थल ;छोटा नागपुर पठार उड़ीसा,

झारखण्ड,

पश्चिम बंगाल

*—————————————*
*21 गोदावरी नदी*

•लम्बाई: 1,450km

•उद्गम स्थल: नासिक की पहाड़ियों से

•सहायक नदी:प्राणहिता,

पेनगंगा, वर्धा,

वेनगंगा,

इन्द्रावती,

मंजीरा, पुरना महाराष्ट्र,

कर्नाटक,

आन्ध्र प्रदेश

———–;;—;——————–

*22 कृष्णा नदी*

•लम्बाई: 1,290km

•उद्गम स्थल: महाबलेश्वर के निकट

•सहायक नदी: कोयना, यरला,

वर्णा, पंचगंगा,

दूधगंगा,

घाटप्रभा,

मालप्रभा,

भीमा, तुंगप्रभा,

मूसी महाराष्ट्र,

कर्नाटक,

आन्ध्र प्रदेश

—————————————

*23 कावेरी नदी*

•लम्बाई: 760km

•उद्गम स्थल: केरकारा के निकट ब्रह्मगिरी

•सहायक नदी:हेमावती,

लोकपावना,

शिमला, भवानी,

अमरावती,

स्वर्णवती कर्नाटक,

तमिलनाडु

—————————————

*24 नर्मदा नदी*

•लम्बाई: 1,312km

•उद्गम स्थल :अमरकंटक चोटी

•सहायक नदी: तवा, शेर, शक्कर,

दूधी, बर्ना मध्य प्रदेश,

गुजरात

————————————–

*25 ताप्ती नदी*

•लम्बाई: 724km

•उद्गम स्थल: मुल्ताई से (बेतूल)

•सहायक नदी: पूरणा, बेतूल,

गंजल, गोमई मध्य प्रदेश,

गुजरात

—————————————

*26 साबरमती*

•लम्बाई: 716km

•उद्गम स्थल: जयसमंद झील

(उदयपुर)

•सहायक नदी:वाकल, हाथमती राजस्थान,

गुजरात

————————————-

*27 लूनी नदी*

•उद्गम स्थल: नाग पहाड़ •सहायक नदी:सुकड़ी, जनाई,

बांडी राजस्थान,

गुजरात,

मिरूडी,

जोजरी

————————————–

*28 बनास नदी*

•उद्गम स्थल: खमनौर पहाड़ियों से

•सहायक नदी :सोड्रा, मौसी,

खारी कर्नाटक,

तमिलनाडु

—————————————

*29 माही नदी*

•उद्गम स्थल: मेहद झील से •सहायक नदी:सोम, जोखम,

अनास, सोरन मध्य प्रदेश,

गुजरात

—————————————

*30 हुगली नदी*

•उद्गम स्थल: नवद्वीप के निकट

•सहायक नदी: जलांगी

—————————————

*31 उत्तरी पेन्नार*

•लम्बाई: 570km

•उद्गम स्थल: नंदी दुर्ग पहाड़ी •सहायक नदी:पाआधनी,

चित्रावती,

सागीलेरू

—————————————

*32 तुंगभद्रा नदी*

•उद्गम स्थल: पश्चिमी घाट में गोमन्तक चोटी

•सहायक नदी:कुमुदवती, वर्धा,

हगरी, हिंद, तुंगा,

भद्रा

—————————————

*33 मयूसा नदी*

•उद्गम स्थल: आसोनोरा के निकट

•सहायक नदी: मेदेई

—————————————

*34 साबरी नदी*

•लम्बाई: 418km

•उद्गम स्थल: सुईकरम पहाड़ी •सहायक नदी:सिलेरु

——————————

रावती नदी*

•लम्बाई: 531km

•उद्गम स्थल :कालाहाण्डी,

उड़ीसा

•सहायक नदी: नारंगी, कोटरी

—————————————
*36 क्षिप्रा नदी*

•उद्गम स्थल: काकरी बरडी पहाड़ी, इंदौर

•सहायक नदी: चम्बल नदी

—————————————

*37 शारदा नदी*

•लम्बाई: 602km

•उद्गम स्थल: मिलाम हिमनद,

हिमालय, कुमायूँ

•सहायक नदी:घाघरा नदी

—————————————*38 तवा नदी*

•उद्गम स्थल: महादेव पर्वत,

पंचमढ़ी

•सहायक नदी:नर्मदा नदी

—————————————

*39 हसदो नदी*

•सहायक नदी: सरगुजा में कैमूर पहाड़ियाँ

•सहायक नदी:महानदी

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*40 काली सिंध नदी*

•लम्बाई: 416 km

•उद्गम स्थल:बागलो, ज़िला देवास,विंध्याचल पर्वत

•सहायक नदी:यमुना नदी

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*41 सिन्ध नदी*

•उद्गम स्थल: सिरोज, गुना ज़िला

•सहायक नदी: चम्बल नदी

—————————————

*42 केन नदी*

•उद्गम स्थल: विंध्याचल श्रेणी •सहायक नदी:यमुना नदी

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*43 पार्वती नदी*

•उद्गम स्थल: विंध्याचल, मध्य प्रदेश

•सहायक नदी :चम्बल नदी

—————————————

*44 घग्घर नदी*

•उद्गम स्थल: कालका,

हिमाचल प्रदेश

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*45 बाण गंगा नदी*

•लम्बाई: 494km

•उद्गम स्थल: बैराठ पहाड़ियाँ, जयपुर

•सहायक नदी:यमुना नदी

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*46 सोम नदी*

•उद्गम स्थल: बीछा मेंड़ा,

उदयपुर

•सहायक नदी: नजोखम, गोमती,

सारनी

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*47 आयड़ या बेडच नदी* •लम्बाई :190km

•उद्गम स्थल:गोमुण्डा पहाड़ी, उदयपुर

•सहायक नदी:बनास नदी

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*48 दक्षिण पिनाकिन*

•लम्बाई: 400km

•उद्गम स्थल: चेन्ना केशव पहाड़ी,

कर्नाटक

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*49 दक्षिणी टोंस*

•लम्बाई: 265km

•उद्गम स्थल: तमसा कुंड, कैमूर पहाड़ी

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*50 दामन गंगा नदी*

•उद्गम स्थल: पश्चिम घाट

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असली कामसूत्र चुराकर अंग्रेजों ने प्राप्त की थी ये महाशक्ति…..


असली कामसूत्र चुराकर अंग्रेजों ने प्राप्त की थी ये महाशक्ति…..
कामसूत्र का नाम सुनते ही लोग नाक-मुंह सिकोड़ने लगते हैं, लेकिन वह भूल जाते हैं ,कि महर्षि वात्स्यायन का कामसूत्र विश्व की पहली यौन संहिता है।

जिस में यौन प्रेम के मनोशारीरिक सिद्धान्तों तथा प्रयोग की विस्तृत व्याख्या एवं विवेचना की गई है ! लेकिन आप यह जान कर चौंक जाएंगे कि वात्सायन के इस ग्रंथ ने भारतीय इतिहास को संजोने में अहम भूमिका निभाई।

इस प्राचीन ग्रंथ से सिर्फ यौन आसन ही नहीं निकले, बल्कि कामसूत्र की कजरारी से काजल जैसे सौंदर्य प्रसाधनों ने भी जन्म नहीं लिया।

रचना के बाद से ही वात्सायन के कामसूत्र का वर्चस्व पूरी दुनिया में छाया हुआ है। आप को जानकर आश्चर्य होगा कि मुगलों के दौर में इस प्राचीन ग्रंथ को बचाने के लिए उसे छिपा दिया गया था, लेकिन करीब २०० साल पहले यह किताब व्यापार करने भारत आए अंग्रेजों के हाथ लग गई।

अंग्रेज इसे इग्लेंड ले गए जहां यह प्रसिद्ध भाषाविद सर रिचर्ड एफ बर्टन के हाथों तक पहुंची। बर्टन ने जब वात्सायन के कामसूत्र का अंग्रेजी में अनुवाद किया तो पूरी दुनिया में तहलका मच गया। स्थिती यह थी ,कि उस समय इस किताब की एक प्रति १०० से १५० पौंड तक में बिकी।

छिपाई गयी इतिहास बदलने वाली खोज :-

कामसूत्र का अनुवाद करने के दौरान बर्टन के हाथ दुनिया बदलने वाली एक खोज भी लगी, लेकिन वह इसे छिपा गए।

बाद में उन्होंने इस खोज को नाम दिया मार्कर… एक ऐसी स्याही जो कभी मिटती ना हो। यही अमिट स्याही बाद में अंग्रेजों की अचूक ताकत बन गई। ऐसी ताकत जिसके जरिए वह अपने सारे दस्तावेज इग्लेंड में लिखते और दुनिया भर के गुलाम देशों तक भेजते।

अब खुला इतिहास बदलने वाला राज :-

हाल ही में पुणे के फग्यू्र्रसन कॉलेज में देश भर के ४५० वैज्ञानिक और शोधार्थी जुटे।

भारतीय विज्ञान सम्मेलन का। विज्ञान भारती की ओर से हुए इस आयोजन में कोटा के डॉ. बाबू लाल भाट ने इतिहास बदलने वाला शोध पत्र प्रस्तुत किया।

उन्होंने वंशावली लेखकों के हजारों साल पुराने दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणित किया कि अमिट स्याही का जन्म वात्सायन के कामसूत्र से करीब ३००० साल पहले हुआ था। डॉ. बाबूलाल भाट वंशावली लेखकों पर शोध करने वाले देश के पहले शोधार्थी हैं।

उन्होंने इतिहासकार प्रो. जगत नारायण के निर्देशन में कोटा विश्वविद्यालय से पीएचडी की। सात साल तक देश भर में घूम कर वंशावली लेखकों, लिखने के तरीकों और संसाधनों की जानकारी जुटाने में जुटे रहे।

ऐसे बनती थी अमिट स्याही :-

डॉ. भाट के मुताबिक वात्सायन के कामसूत्र में कजरारी से काजल बनाने की तमाम विधियां बताई गई थीं। जिन में सुधार कर वंशावली लेखकों ने अमिट स्याही बनाने के तीन तरीके खोजे। वंशावली लेखकों के सदियों पुराने दस्तावेजों में तीन प्रमुख तरीके मिलते हैं। पहला सबसे आसान तरीका था कि छह टका काजल, बारह टका बीयाबोल, छत्तीस टका खेर का गोंद, आधा टका अफीम, अलता पोथी तीन टका, कच्ची फिटकरी आधी टका को लेकर नीम के ठंडे पानी से तांबे के बर्तन में सात दिन तक घोटने से पक्की काली स्याही बन जाएगी।

गोमूत्र से भी बनती थी , स्याही :-

वंशावली लेखकों के प्राचीन ग्रंथों में गोमूत्र से भी स्याही बनाने का तरीका दर्ज है। जिसके लिए नीम का गोंद, उसकी दुगनी मात्रा में बीयाबोल और उससे दुगना तिल के तेल का बना हुआ काजल लेकर सभी को गोमूत्र में मिलाकर आग पर चढ़ा दें।

पानी सूखने पर लाक्षा रस मिलाकर गोमूत्र से धोए हुए काले भांगरे के सर के साथ इसे घोटें। बेहद टिकाऊ काली अमिट स्याही बनेगी।

वहीं तीसरा तरीका सूखी अमिट स्याही बनाने का था। जिसमें तिल के तेल से पारे गए काजल और तांबे-नीम के घोटे का इस्तेमाल होता था।

मनीष कुमार सोलंकी

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સંક્ષિપ્ત સબ્દો


 

  • તા.ક.
    • તાજા કલમ
  • સ.દ. પોતે
    • સહી દસ્તખત પોતે
  • ઈ.સ.
    • ઈસ્વી સન
  • વિ.સં.
    • વિક્રમ સંવત
  • અ.સૌ.
    • અખંડ સૌભાગ્યવતી
  • ચિ.
    • ચિરંજીવ
  • રા.રા.
    • રાજમાન રાજેશ્રી
  • લિ
    • લિખિતંગ
  • દાત
    • દાખલા તરીકે
  • વિવિ
    • વિગેરે વિગેરે
  • ગંસ્વ
    • ગંગા સ્વરૂપ
  • ઉરૂ
    • ઉદાહરણ રૂપે
  • અબક તબક
    • અમે બનતું કર્યું, તમે બનતું કર્યું?
  • કોશુંક
    • કોઈ શું કહેશે?
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સિયાચીન


સિયાચીન વિશે ચપટીક –

  • દુનિયામાં સૌથી ઊંચે આવેલી લશ્કરી ચોકી
  • લઘુત્તમ ઉષ્ણતામાન -૬૦ અંશ સેન્ટિગ્રેડ
  • ઊંચાઈ – ૫૭૫૩ મીટર
  • તોફાન વખતે પવનની ઝડપ – કલાકના ૧૦૦ માઈલ
  • સ્નો ફોલ – ૩૬ ફૂટ 
  • સપ્લાય લાવનાર હેલિકોપ્ટરની ઊંચાઈ – ૨૦,૦૦૦ ફૂટ 
  • સપ્લાય ફેંકવા માટે સમય – એક જ મિનિટ . નહીં તો થોડેક જ દૂર નીચે આવેલ પાકિસ્તાની તોપના નિશાન બની જવું પડે. 
  • ૩૦ વર્ષ – ૮૪૬ સૈનિકો શહીદ બન્યા
  • ૧૫ મી રાજપૂત બટાલિયનના હવાલદાર ગયા પ્રસાદનું શબ ૧૮ વર્ષ પછી મળ્યું.
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ગુજરાતી સાહિત્યકારો અને તેના ઉપનામો:


ગુજરાતી સાહિત્યકારો અને તેના ઉપનામો:

 

મુશાળીમા

ગિજુભાઈ બધેકા

વાસુકિ 

ઉમાશંકર જોશી

મરીઝ

અબ્બાસ અબ્દુલઅલી વાસી

અઝીઝ

ધનશંકર ત્રિપાઠી

સવ્યસાચી

ધીરુભાઈ ઠાકર

સુન્દરમ્

ત્રિભુવનદાસ લુહાર

સ્નેહરશ્મિ

ઝીણાભાઈ રતનજી દેસાઈ

માયડીયર જયુ

જયંતિલાલ રતિલાલ ગોહિલ

મધુરાય

મધુસુદન વલ્લભભાઈ ઠક્કર

અદલ,મોટાલાલ

અરદેશર ખબરદાર

અવળવાણીયા

જ્યોતિન્દ્ર દવે  

અશક્ય,નામુમકિન

પ્રીતિસેન ગુપ્તા

ચાંદામામા

ચંદ્રવદન મહેતા

અખાભગત

વેણીભાઈ પુરોહિત

આદિલ મન્સૂરી

ફકીર મુહમ્મદ ગુલામનબી મન્સૂરી

કથક

ગુલામદાસ બ્રોકર

કાઠીયાવાડી વિદુર

કે.કે.શાસ્ત્રી

ઈવા ડેવ

પ્રફુલ્લ દવે

તથાના

રાધેશ્યામ શર્મા

ચિત્રગુપ્ત

બંસીધર શુક્લ

શૂન્ય પાલનપુરી

અલીખાન બલુચ

નારકર

જગદીશભાઈ રમણભાઈ પટેલ

દિવાકર

હરિશંકર દવે

મરીઝ

અબ્બાસ અબ્દુલઅલી વાસી

બુલબુલ

ડાહ્યાભાઈ દેરાસરી

મહારાજ

રવિશંકર વ્યાસ

પ્રિયદર્શી

મધુસુદન પારેખ

વનમાળી વાંકો

દેવેન્દ્ર ઓઝા

વનમાળી

કેશવહર્ષદ ધ્રુવ

ભગીરથ

ભગવતીકુમાર શર્મા

બાદરાયણ

ભાનુશંકર વ્યાસ

મધુકર

વિશ્વનાથ મગલાલ ભટ્ટ

મૂષિકાર

રસિકલાલ પરીખ

મકરંદ

રમણભાઈ નીલકંઠ

નિરાલા

સૂર્યકાન્ત ત્રિપાઠી

પરમહંસ

સચ્ચિદાનંદ સ્વામી

ધૂનીરામ

ગૌરીશંકર પ્રભાશંકર ત્રિવેદી

સૌજન્ય

પીતાંબર પટેલ

યયાતિ 

જયેન્દ્ર દવે

સોપાન

મોહનલાલ મહેતા

શેખાદમ

શેખ આદમુલ્લા આબુવાલા

અકીંશન

ધનવંત ઓઝા

મિસ્કીન

રાજેશ વ્યાસ

સુંદરી

જયશંકર ભૂધરદાસ ભોજક

સાહિત્ય કવિ

ચૂનીલાલ શાહ

પ્રેમસખી

પ્રમાંનદ સ્વામી

સાહિત્યયાત્રી

ઝવેરચંદ મેધાણી

સવ્યચાસી

ધીરુભાઈ ઠાકર

શૂન્યમ

હમુખભાઈ પટેલ

લલિત

જમનાશંકર બૂચ

શંકર

ઈચ્છારામ દેસાઈ

જ્ઞાનબાલ  

નરસિંહરાવ દિવેટિયા

વૈશંમપાય

કરસનદાસ માણેક

મનહર

મનહરલાલ લક્ષ્મીશંકર રાવળ

મસ્તફકીર

હરિપ્રસાદ ભટ્ટ

પૂ.મોટા

ચુનીલાલ આશારામ ભગત

લોકાયતસૂરી

રધુવીર ચૌધરી

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નવ રત્નો


કૃદરતના નવ રત્નો

 હીરો વ્રજ:          ધોળા રંગનુ રત્ન

માણેક – મણિક્ય:     રાતા રંગનું રત્ન

મોતી – મુક્તા:      પીળા રંગનું રત્ન

પાનું – પન્ના:        લીલા રંગનું રત્ન

પોખરાજ – ગોમેદા:    પીળા રંગનું રત્ન

લસણિયો – તપખિરિયા રંગનો એક મણિ

વૈદૂર્ય – આસમાની રંગનો એક મણિ

પરવાળુ – પ્રવાલ વિદ્રુમ:   ગુલાબી રંગનો રત્ન

નીલમ – લીલમ મસ્કલ:  નીલા રંગનું એક રત્ન


રાજા ભોજના દરબારના નવ રત્નો

મહાકવિ કાલિદાસ

વૈદરાજ ધન્વંતરી

ક્ષપણક

શંકુ

અમર

વેતાલ

ઘટર્ક્પર

વરાહમિહિર

વરુચિ


અકબરના દરબારના નવ રત્નો

અબુફઝલ        ઇતિહાસકાર

ટોડરમલ         જમા બંધી નિષ્ણાત

માન સિંહ         સેનાધ્યક્ષ

ફૈજી                  કવિ

બદાઉની          લેખક

તાનસેન          ગાયક

દોપ્યાજી          મુલ્લા

મહેસદાસ        બિરબલ     હાજર જવાબી

હકીમ હમામ    વૈદરાજ


રણજીત સિંહના દરબારના નવ રત્નો

ફકીર અઝીઝુદીન –  વિદેશ પ્રધાન

હકીમ નુરુદ્દીન      –   શસ્ત્રા ગારના વડા

રાજા દીનાનાથ – નાણા પ્રધાન

ખુશાલ સિંહ – શાહી સરભરા અને સમારંભોના વડા નિયામક

ધ્યાન સિંહ – મુખ્ય પ્રધાન

મોહકમચન્દ – સર સેનાપતિ

હરિસિંહ નવલા  –     અશ્વદળના સેનાપતિ

દીવાન ચંદ – પાયદળના સેનાપતિ

રાજા હીરાસિંહ – અંગત સલાહકાર