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इस खूबसूरत पाकिस्तानी अभिनेत्री का असली नाम झरना बासक था लेकिन फ़िल्म इंडस्ट्रीज के लिए वह शबनम थी ! वह पैदाईश बंगाली थी लेकिन उसे शबनम नाम से काम करने मे सुरक्षा महसूस होती थी ! झरना अपने समय की चर्चित अभिनेत्री थी ! उसने कई कामयाब फिल्मो में काम किया और कई पुरस्कार भी जीते थे !

71 में बांग्लादेश के पाकिस्तान से अलग होने के बावजूद उसने पाकिस्तान में रहना मुनासिब समझा था ! उसके मन में वही निश्चिंतता रही होगी जो आज भारत के लाखो करोडो सेक्युलर लोगो के मन रहती रहती कि ,यह हैं तो आखिर हमारे अपने ही ही लोग ! बरसो से साझी संस्कृति का हिस्सा रहे यह लोग कभी हमसे नजरे नहीं फिर सकते ! शायद तब तक किसी ने उसे काफिर शब्द का मतलब नहीं समझाया होगा !

उसने रुबिन घोष से शादी की और उनका एक बच्चा रूनी घोष भी हो चुका था ! पति सुलझे विचारो वाले बुध्दिजीवी तबके के बाशिंदे थे जिन्हे आम बोलचाल में वामी रुझान वाला माना जाता हैं !

उस दौर में खबर बनी की झरना के घर कुछ हथियारबंद लोगो ने डकैती डाली ! जिन्हे बाद में गिरफ्तार भी कर लिया गया ! लेकिन जब सच्चाई सामने आई तब रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी सामने आई !

दरअसल वह चार लोग डकैत नहीं थे बल्कि सम्पन्न ,रसूखदार और राजनैतिक घराने के लड़के थे ! डकैती की खबर तो सिर्फ मीडिया में मैनेज की गई थी ! उन्होंने रोबिन घोष और रूनी घोष के हाथ मुँह बाँध कर उन्ही के सामने काफिर झरना संग बलात्कार किया और कई बार किया ! और फिर ठहाके लगाते हुए चले गए !वैसे भी पाकिस्तान में बंगालियों संग कोई सहानुभूति नहीं थी लेकिन यहाँ मामला चर्चित अभिनेत्री का था सो FIR हुई और गिरफ्तारी भी हुई ।
Sambhavami Yuge Yuge

कोर्ट से मुजरिमो को फांसी हुई तो मामला मुस्लिम बनाम बंगाली का बन गया ! झरना और उसके परिवार पर दबाव बढ़ने लगा ,धार्मिक राजनैतिक नेताओ के अलावा फिल्म इंडस्ट्रीज से भी दबाव बढ़ने लगा ! अंत में भविष्य की सुरक्षा के मद्देनजर रख कर उसने अदालत में अपराधियों को माफ़ करने की सहमति दी तब जिया उल हक़ सरकार ने दोषियों की फांसी की सज़ा को उम्र कैद में बदल दिया और आगे चल कर वह अपराधी कब और क्यों रिहा हो गए किसी को भी पता न चला !

उन चारो मुजरिमो में एक का नाम फारूख बांदियाल हैं जिसने हालिया चुनाव जीत कर इमरान खान की तहरीके इन्साफ पार्टी ज्वाइन की ! उसे मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था लेकिन सोशल मीडिया में उसके अतीत के किस्से छपने के बाद उसके खिलाफ बहुत ट्रोलिंग होने के कारण उसे मंत्री मंडल से बाहर रखना पड़ा !

अभी जब इमरान खान ने भारत के खिलाफ वक्तव्य दिया की हम पाकिस्तान में बताएँगे की अल्पसंख्यको संग कैसे बर्ताव किया जाता हैं , तब मुझे झरना बासक की कहानी याद आ गई जो यह पढ़ कर कही अपने आँसू पोछ रही होगी ! और ना जाने ऐसी कितनी अनगिनत कहानियां भी रही होगी जो कभी सामने नहीं आ पाई !

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महाराष्ट्र शिरडी साई बाबा की अपार सफलता
के बाद पूणे में पेश है नया पीर साहेब मंदिर!
#हज़रत_पठाण_बाबा

वो जानते हैं चर्च लिखेंगे तो एक भी ईसाई यहाँ नही आएगा!
लेकिन मंदिर लिखेंगे तो हजारो हिंदू बिना सोचे समझे रोज माथा पटकने आएंगे और लाखो का चढ़ावा चढ़ाएंगे!

साईं ट्रष्ट को जैसे मूर्ख हिन्दुओ ने खरबो पति बनाया वैसे ही मूर्ख यहां भी थोड़े ही दिनों में आने लगेंगे,

दुनियाभर में इस्लाम और ईसाइयो को इतने मूर्ख नही मीले जितने अकेले भारत मे इन्हें मिल गए,

साले मन्नतों में ही भगवान बदल लें, एक मन्नत के चक्कर मे सनातन संस्कृति और सनातन देवी देवता छोड़ देते है !

दुनिया के सबसे बड़े मूर्ख ओर सबसे बड़े लालची हिन्दू होते है,
जो लालच में भगवान तक बदल लेते है!

ऐसे ही लालचियो को चर्च ओर जिहादी दोनो मिलकर मूर्ख बनाते आए है और सनातन धर्म और भारत को खोखला करते आए है!

अब तो सुधर जाओ श्रीमान हिन्दू जी

यह पीर साहेब मन्दिर ही क्यों ????
पीर साहेब चर्च क्यो नही पीर साहेब मज्जिद क्यों नही ….????
क्योंकि इनको भी पता है दोगले ओर सेक्युलर हिन्दू आएंगे लाखो का चढ़ावा भी चढ़ाएंगे बाकी कोई ईसाई तो यहाँ आएगा नही..!

जिस दिन तुम जाग जाओगे इनकी यह नोटंकी भी बंद हो जाएगी!!
साभार w/A Ashok Grover jee

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भोपाल से 14 किलोमीटर दूर एक गाँव है जिसका नाम ‘इस्लाम नगर‘ था उसे अब ‘जगदीशपुर’ के नाम से जाना जाएगा। केंद्र सरकार ने गाँव का नाम बदलने की अनुमति दे दी है।

308 साल पहले 17वीं शताब्दी में जगदीशपुर कभी मुगल आक्रांताओं के धोखे से खून में लाल होकर इस्लाम नगर हो गया था। मोहम्मद खान ने हिंदू राजा को अपने यहाँ रात्रि भोज पर बुलाया और धोखे से हत्या कर जगदीशपुर को इस्लाम नगर का नाम दे दिया। अब 308 साल बाद इस्लामनगर अंतत: फिर जगदीशपुर होने से लोगों में ख़ुशी है।

ससे पहले शिवराज सरकार ने होशंगाबाद जिले का नाम बदलकर नर्मदापुरम कर दिया था. हाल ही में होशंगाबाद रेलवे स्टेशन का नाम भी बदलकर नर्मदापुरम रेलवे स्टेशन किया गया है.भोपाल से 14 किलोमीटर दूर एक गाँव है जिसका नाम ‘इस्लाम नगर‘ था उसे अब ‘जगदीशपुर’ के नाम से जाना जाएगा। केंद्र सरकार ने गाँव का नाम बदलने की अनुमति दे दी है।

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पहाड़ों के बीच एक पागलखाना हुआ करता था। दुनिया भर से जरूरतमंद लोग वहाँ इलाज के लिए आते थे। एक दिन किसी कारणवश हॉस्पिटल की सुरक्षा में कोई चूक हो गई और वहाँ से 89 रोगी भाग निकले।

सारे रोगी भाग कर पहाड़ों के नीचे बसे एक छोटे-शहर में छिप गए। जब हॉस्पिटल में ये बात पता चली तो हड़कंप मच गया। डॉक्टरों की टीम ने तुरंत एक प्लान बनाया और शहर की ओर निकल पड़े। शहर पहुँच कर डॉक्टरों और नर्सों ने बच्चों की तरह एक-दूसरे के पीछे रेलगाड़ी के डब्बों की तरह खड़े होकर बीच मार्केट में घूमने लगे,

“कू…छुक छुक छुक छुक..”

कुछ ही देर में भीड़ में से लोग बाहर निकल कर आने लगे और रेलगाड़ी के डब्बों की तरह जुड़ने लगे। 3-4 घंटों में पूरी रेलगाड़ी पुनः हॉस्पिटल में वापस चली गई।

थोड़ी देर बाद जब सारे डॉक्टर बैठ कर चैन की साँस ले रहे थे तभी एक नर्स भागते हुई आई और कहा,

“सर, एक बड़ी प्रॉब्लम हो गई है। हॉस्पिटल से भागे 89 लोग थे लेकिन शहर से रेलगाड़ी के डब्बों की तरह वापस 131 लोग लौटे हैं। अब क्या करें?”

डॉक्टर एक-दूसरे का चेहरा देख रहे थे और पहाड़ों में शोर घुल रहा था,

AdaniGroup

hiddenberg

केकड़ा_राष्ट्र

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मोगल गार्डन


मोदी का ऑपरेशन ‘काला गुलाब’ सफल हुआ

  • क्या काला गुलाब भी होता है ? आपको जानकर हैरानी होगी कि काला नहीं हरा गुलाब भी होता है । काला और हरा दोनों रंग के गुलाब दिल्ली के राष्ट्रपति भवन के मुगल गार्डन में मौजूद हैं । इसी मुगल गार्डन का नाम अब प्रधानमंत्री मोदी ने बदलकर अमृत उद्यान कर दिया है । लेख के आखिरी हिस्से में मुगल गार्डन वाला कम्युनिस्ट प्रोपागेंडा भी एक्सपोज करेंगे । लेख पूरा पढिएगा ।
  • मुगल गार्डन को अंग्रेजों ने बनवाया था और उसके नाम से दो तरह की गुलामी की गंध आती थी… पहला कि ये अंग्रेजों के द्वारा निर्मित था जो आक्रमणकारी थे और दूसरा कि अंग्रेज आक्रमणकारियों ने मुगल आक्रमणकारियों के नाम पर गार्डन बनवाया था जिसको मुगल गार्डन कहा गया
  • आजादी के 75 वें वर्ष को अमृत महोत्सव के नाम से मनाया जा रहा है और इसी के तहत अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुगल गार्डन का नाम बदलकर अमृत उद्यान कर दिया है
  • भारत के राष्ट्रपति भवन के पिछवाड़े में ब्रिटिश वास्तुकार सर एडविन लुटियन ने ये गार्डन बनवाया था । साल 1912 में इसका निर्माण शुरू हुआ था और साल 1929 में इसका निर्माण खत्म हो गया
  • 1910 से 1916 तक गवर्नर जनरल या वायसराय रहे चार्ल्स हार्डिंग की पत्नी लेडी हार्डिंग ने कश्मीर के शालीमार और निशांत गार्डन को देखा था और उन्हीं के निर्देशों के अनुसार एडविन लुटियन ने ये गार्डन बनवाया था
  • इसकी तुलना भारत के मैसूर में मौजूद वृंदावन गार्डन से ही की जा सकती है । दुनिया में जितने भी फूल पाए जाते हैं ज्यादातर यहां पर मौजूद होने का दावा किया जाता है । सिर्फ गुलाब की ही यहां 250 प्रजातियां हैं
  • जब अंग्रेजों का कब्जा देश से हटा और राजेंद्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति बने तो उन्होंने राष्ट्रपति भवन को आम जनता के लिए खोल दिया और पहली बार भारत के लोगों ने इस गार्डन को देखा था
  • कम्युनिस्टों ने पूरे देश में एक थ्योरी पेश करी की मुगल काफी नरम मिजाज थे और उनकी छवि को बदलने के लिए कम्युनिस्टों ने ये झूठ फैलाया कि मुगलों को बाग बगीचे बनवाने का काफी शौक था ।
  • मुगल लुटेरे और हमलावर थे लेकिन कम्युनिस्टों और जिहादी इतिहासकारों को इतिहास बदलने के काम में महारथ हासिल थी । मुगल गार्डन के बारे में दावा ये किया गया कि ये एक इस्लामिक गार्डन है
  • लेकिन सच ये है कि इस्लाम तो रेगिस्तान यानी अरब देश में जन्म लेना वाला मजहब है और रेगिस्तान में गार्डन की परिकल्पना भी नहीं की जा सकती है लेकिन कम्युनिस्टों ने ये सब कर डाला, हिंदुओं को मूर्ख बनाने के लिए ।
  • हमारे देश में ऋषियों की परंपरा रही है वन और उपवन को संजोने की । हमारी आर्य संस्कृति वास्तव में वन संस्कृति ही है । हमारे यहां वनों में तपस्या और पूजा के स्थान मिलते हैं । कई ऐसे वन हैं जो इसीलिए प्रसिद्ध हुए क्योंकि वहां पर किसी विशेष ऋषि का वास था
  • जैसे पंचवटी जो कि एक उपवन था और इसका वर्णन वाल्मीकि और तुलसी दास दोनों ने अपनी रामकथा में किया है । लेकिन कम्युनिस्टों ने इस पर नहीं बल्कि छद्म मुगल गार्डन पर ज्यादा ध्यान लगा
  • मुगल गार्डन जैसी भी कोई चीज कभी आस्तित्व में नहीं रही दरअसल मुगल वंश का जन्मदाता बाबर उज्बेकिस्तान से आया था और उज्बेकिस्तान में बाग बगीचे या उपवन को बनाने की संस्कृति इसलिए भी नहीं थी क्योंकि उज्बेकिस्तान मूल रूप से एक शुष्क प्रदेश है
  • उज्बेकिस्तान में सिर्फ 8 प्रतिशत ही जंगल है बाकी उज्बेकिस्तान में दुनिया का 15वां सबसे बड़ा रेगिस्तान है । इस शुष्क देश में सिर्फ दो नदियां हैं । उज्बेकिस्तान का आधा हिस्सा तो रेगिस्तान ही है लेकिन कम्युनिस्टों ने मुगल गार्डन के शब्द को खूब बढा चढाकर पेश किया ताकी हिंदू संस्कृति को नीचा दिखाया जा सके ।

धन्यवाद
प्लीज शेयर

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क्या आप जानते हैं कि….. हमारे हिंदुस्तान से अलग होने के बाद ….. मुस्लिमों ने अपने नए देश का नाम “”पाकिस्तान”” ही क्यों रखा ….????

असल में….. “पाकिस्तान” शब्द का जनक ….सियालकोट का रहने वाला ‘मुहम्मद इकबाल’ था….. जो कि… जन्म से एक कश्मीरी ब्राह्मण था . परन्तु बाद में मुसलमान बन गया था …!

ध्यान रहे कि….ये वही मुहम्मद इकबाल है…. जिसने प्रसिद्द सेकुलर गीत ……..”सारे जहाँ से अच्छा हिदोस्तान हमारा” .. लिखा है…!

और, इसी इकबाल ने अपने गीत में एक जगह लिखा है कि….. “”मजहब नहीं सिखाता ….आपस में बैर रखना”

परन्तु …….दूसरी तरफ इस इकबाल ने ………अपनी एक किताब ” कुल्लियाते इकबाल ” में अपने बारे में लिखा है….

“मिरा बिनिगर कि दर हिन्दोस्तां दीगर नमी बीनी ,बिरहमन जादए रम्ज आशनाए रूम औ तबरेज अस्त “
अर्थात… मुझे देखो……… मेरे जैसा हिंदुस्तान में दूसरा कोई नहीं होगा… क्योंकि, मैं एक ब्राह्मण की औलाद हूँ……लेकिन, मौलाना रूम और मौलाना तबरेज से प्रभावित होकर मुसलमान बन गया…!

कालांतर में यही इकबाल……. मुस्लिम लीग का अध्यक्ष बन गया….

और, हैरत कि बात है कि…… जो इकबाल “सारे जहाँ से अच्छा हिदोस्तान हमारा” .. लिखा …और, “”मजहब नहीं सिखाता ….आपस में बैर रखना”….. जैसे बोल बोले थे…

उसी दोगले इकबाल ने ……. मुस्लिम लीग खिलाफत मूवमेंट के समय …… 1930 के इलाहाबाद में मुस्लिम लीग के सम्मलेन में कहा था …..

“हो जाये अगर शाहे खुरासां का इशारा ,सिजदा न करूं हिन्दोस्तां की नापाक जमीं पर “

यानि…. यदि तुर्की का खलीफा अब्दुल हमीद ( जिसको अँगरेजों ने 1920 में गद्दी से उतार दिया था ) इशारा कर दे…… तो, मैं इस “नापाक हिंदुस्तान” पर नमाज भी नहीं पढूंगा…!

बाद में…… इसी ” नापाक” शब्द का विपरीत शब्द लेकर “पाक ” से “पाकिस्तान ” बनाया गया …… जिसका शाब्दिक अर्थ है …..( मुस्लिमों के लिए ) पवित्र देश …!

कहने का तात्पर्य ये है कि….. हिन्दू बहुल क्षेत्र होने के कारण…. मुस्लिमों को हिंदुस्तान “”नापाक”” लगता था…. इसीलिए… मुस्लिमों ने अपने लिए एक अलग देश की मांग की…. तथा, अपने तथाकथित पवित्र देश का नाम … “पाकिस्तान”… रख लिया…!

अब इस सारी कहानी में…. समझने की बात यह है कि…….
जब एक कश्मीरी ब्राह्मण के …. धर्मपरिवर्तन करने के बाद…. अपने देश और अपनी मातृभूमि के बारे में सोच … इतनी जहरीली हो सकती है….

तो, आज …. हिन्दुओं की अज्ञानता और उदासीनता का लाभ उठा कर … जकारिया नाईक जैसे….. समाज के दुश्मनों द्वारा हजारो -लाखो हिन्दुओं का धर्मपरिवर्तन करवाया जा रहा है….. उसका परिणाम कितना भयानक हो सकता है…????

ऐसे में मुझे एक मौलाना की वो प्रसिद्द उक्ति याद आ रही है…. जिसमे उसने कहा था कि….

देखिये, हमारे तो इतने इस्लामी देश हैं …. इसीलिए , अगर हमारे लिए जमीन तंग हो जाएगी तो ,,,हम किसी भी देश में जाकर कहेंगे ” अस्सलामु अलैकुम ” ……और, वह कहेगा ” वालेकुम अस्सलाम ” ….. साथ ही….हमें भाई समझ कर अपना लेगा .

लेकिन मैं… अपने हिन्दू भाई-बहनों से एक मासूम सा सवाल पूछना चाहता हूँ कि……. उनके राम-राम का जवाब देने वाला … दुनिया में दूसरा कौन सा देश है…… ????

इसलिए, अब यह समय की मांग है कि….. अब मनहूस सेक्यूलरों के बहकावे से दूर होकर …. जकारिया नायक जैसे क्षद्म जिहादी और इस्लाम का पर्दाफाश करने में हर प्रकार का सहयोग करें …… !

याद रखें कि…. अगर धर्म नहीं रहेगा तो देश भी नहीं रहेगा !

क्योंकि…. देश और धर्म का अटूट सम्बन्ध है ….

जिस तरह…. धर्म के लिए देश की जरुरत होती है … ठीक उसी तरह….. देश की एकता के लिए भी धर्म की जरूरत होती है …!

इसीलिए, अगर हमारे हिन्दुस्थान को बचाना है तो…… जाति और क्षेत्रवाद का भेद भूलकर ….. कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी… और कच्छ से लेकर असम तक के सारे हिन्दुओं को एक होना ही होगा…
Jai Jai Shree Krishna 🙏🙏

जय हिंदुत्व!

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक, हिन्दू पतन

एक था कम्युनिस्ट,
नाम था कामरेड सज्जाद जहीर, लखनऊ में पैदा हुए.
ये मियाँ साहब, पहले तो Progressive Writers Association, यानि अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ के रहनुमा बनकर उभरे ,और अपनी किताब अंगारे से इन्होने अपने लेखक होने का दावा पेश किया.

बाद मे ये जनाब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सर्वेसर्वा बने, मगर बाबू साहब की रूह मे तो इस्लाम बसता था, इसीलिए 1947 मे नये इस्लामी देश बने, पाकिस्तान मे जाकर बस गये, इनकी बेगम रजिया सज्जाद जहीर भी उर्दू की लेखिका थी.

सज्जाद जहीर, 1948 मे कलकत्ता के कम्युनिस्ट पार्टी के सम्मेलन मे भाग लेने कलकत्ता पहुँचे, और वहाँ कुछ मुसलमानो ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया से अलग होकर CPP यानि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ पाकिस्तान का गठन कर लिया, जो बांग्लादेश मे तो फली – फूली,
मगर पाकिस्तान मे, सज्जाद जहीर, मशहूर शायर लेखक फैज अहमद फैज, शायर अहमद फराज, रजिया सज्जाद जहीर, और कुछ पाकिस्तानी जनरलो ने मिलकर रावलपिंडी षडयंत्र केस मे पाकिस्तान मे सैन्य तख्ता पलट का प्रयास किया और पकडे जाने पर जेल मे डाल दिये गये। सज्जाद जहीर, अहमद फराज और फैज अहमद फैज को लंबी सजाऐ सुनाई गई.

जेल से रिहा होने के बाद सज्जाद जहीर भारत आया और खुद को शरणार्थी घोषित करके कांग्रेस सरकार से भारतीय नागरिता मांगी और कांग्रेस सरकार ने सज्जाद को भारतीय नागरिकता दे दिया.

अब आगे की कथा सुनिये,
इन मियाँ साहब, सज्जाद जहीर और रजिया जहीर की चार बेटियाँ थी.

1- नजमा जहीर बाकर, पाकिस्तानी सज्जाद जहीर की सबसे बडी बेटी, JNU मे Biochemistry की प्रोफेसर है.

2- दूसरी बेटी नसीम भाटिया है.

3- सज्जाद जहीर की तीसरी बेटी है, नादिरा बब्बर जिसने फिल्म एक्टर और कांग्रेस सांसद राज बब्बर से शादी की है, इनके दो बच्चे है, आर्य बब्बर और जूही बब्बर.

4- सज्जाद जहीर की चौथी और सबसे छोटी बेटी का नाम है नूर जहीर, ये मोहतरमा भी लेखिका है, और JNU से जुडी है.

नूर जहीर ने शादी नही की और जीवन भर अविवाहित रहने के अपने फैसले पर आज भी कायम है। चूँकि नूर जहीर ने शादी ही नही की, तो बच्चो का तो सवाल ही पैदा नही होता.
मगर रूकिये, अविवाहित होने के बावजूद, नूर जहीर के चार बच्चे है, वो भी चार अलग – अलग पुरूषो से.

इन्ही नूर जहीर और ए. दासगुप्ता की दूसरी संतान है पंखुडी जहीर.

ये वही पंखुडी जहीर है, जिसने कुछ ही वर्षो पहले दिल्ली मे संघ कार्यालय केशव कुञ्ज के सामने खुलेआम चूमा- चाटी के लिए , किस ऑफ लव (Kiss of Love) के नाम से इवेंट आयोजित किया था।
जी हाँ, ये वही है जो कन्हैया कुमार वाले मामले में सबसे ज्यादा उछल कूद मचा रही थी। इसे JNU मे कन्हैया कुमार की सबसे विश्वश्त सहयोगी माना जाता है। खुलेआम सिगरेट , शराब, और अनेकों व्यसनों की शौकीन.
बिन ब्याही माँ की, दो अलग अलग पुरूषों से उत्पन्न चार संतानों मे से एक पंखुडी जहीर जैसी औरतें, खुद औरतों के नाम पे जिल्लत का दाग है.
इन्ही जैसे लोगो ने JNU की इज्जत मे चार चाँद लगा रखे है.

पाकिस्तान मे कम्युनिस्ट पार्टी आज तक 01% वोट भी नही जुटा पाई, कुल 176 वोट मिलते है इन्हे.
और पाकिस्तानी सज्जाद जहीर की औलादें, कम्युनिस्टो का चोला पहनकर भारत की बर्बादी के नारे लगा रही हैं.
समझ मे आया ??
JNU के कामरेडो का पाकिस्तान प्रेम और कश्मीर के मुद्दे पर नौटंकी करने का असली उद्देश्य.

क्या कारण है कि ये पंखुडी दासगुप्ता ना लिखकर खुद को पंखुडी जहीर लिखती है ??
और हाँ, इसकी सगी मौसी के लड़के, नादिरा बब्बर और राज बब्बर की संतान, फिल्म एक्टर आर्य बब्बर का घर का नाम सज्जाद है.

अरुण शुक्ला

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हिंदुस्तान में सबसे बड़े उद्योगपति कौन है??? देखिए इस लेख को, अधिकतर लोगों को यह पता ही नहीं है

कॉरपोरेट मिशनरी इस संस्था पर किसी का भी ध्यान नहीं हैं?
🙄🤔
😡😡

यह मुद्दा बहुत ही ज्वलंत और चिंताजनक मुद्दा हैं!

क्या आप जानते हैं भारत में सबसे बड़ा कॉर्पोरेट कौन हैं?
🙄🤔

टाटा ? नहीं
अम्बानी ? नहीं
अदानी ? नहीं

चौंकिए मत आगे और पढ़िए

300000 (तीन लाख) करोड़ की सम्पति वाला कोई और नहीं यह हैं!

“The Syro Malabar Church”, केरल!

इसका 10000 से ज्यादा संस्थानों पर कण्ट्रोल हैं!

और इसकी अन्य बहुत सी सहायक ऑर्गेनाइजेशन्स भी हैं!

मेरी समझ में यह एक ऐसा छद्म बिज़नेस ऑर्गेनाइजेशन हैं!

जो सम्पत्ति के मामले में भारत के

टाटा
अम्बानी
अदानी

आदि का मुकाबला करने में सक्षम हैं?

ये सारे औद्योगिक घराने इसके आसपास भी नहीं हैं!

यकीन नहीं हो रहा हैं ना???
तो ठीक हैं अब इन आंकड़ो को देखिए!

इनके अधीन हैं!
01)👉 9000 प्रीस्ट
02)👉 37000 नन
03) 👉50 लाख चर्च मेम्बर
04)👉 34 Dioceses
05)👉 3763 चर्च
06👉 71 पादरी शिक्षा संस्थान
07👉 4860 शिक्षा संस्थान
08👉 2614 हॉस्पिटल्स और क्लिनिक
09👉 77 ईसाई शिक्षा संस्थान

कुल मिलकर 11000 छोटे बड़े संस्थान संचालित हैं!
🤔😡
इनके ऊपर सबसे शक्तिशाली चर्च हैं – “CMA”🤔🙄😡😡

“CMA” के अन्दर ही देश भर में फैले1514 संस्थान आते हैं जिनके
स्कूल
कॉलेज
हॉस्पिटल
और
अनाथालय हैं!
🙄🤔
😡😡

चर्च के 50 ऐसे ऑर्गेनाइजेशन हैं जो स्टॉक मार्केट में लिस्टेड हैं!

अगर आप इस चर्च का सालाना टर्न ओवर देखेंगे तो कोई भी कंपनी इनके आसपास भी नहीं फटकती है!

पूरे भारत के अंदर इन चर्च की पहुऺच गांवों तक हैं और विदेशों में भी इसके सहयोगी संस्थान हैं!

इस चर्च के सारे सदस्य मलेशिया के हैं और पूरी मैनेजमेंट टीम भी मलेशिया की ही है!
🙄🤔
😡😡

इसके अध्यक्ष को मेजर आर्चबिशप कहाँ जाता हैं!

Synod इस चर्च की सबसे ताकतवर कमेटी हैं इसका मुखिया बिशप ही होता हैं!

The SYRO मालाबार चर्च दुनिया के कैथोलिक इसाईयत का सबसे शक्तिशाली विंग हैं!
जिसका ओहदा उसकी अपनी सम्पत्ति की वजह से हैं!
🙄🤔

यह इनकम टैक्स भी नहीं देते हैं!
क्योंकि यह माइनॉरिट संस्थान है

और सरकार इसकी सम्पति का ब्यौरा भी नहीं देख सकती हैं!
🤔
😡
इस वजह से इनके वास्तविक सम्पति का आज तक हमारे अपने देश के किसी भी विद्वान, बुद्धिमान, जागरूक, होशियार, ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ कहलाने वाले नेताओं को भी पता नहीं हैं!
क्योंकि इनका ऑडिट भी नहीं होता हैं!🤔
😡

अल्पसंख्यक के नाम पर यह बहुत बड़ा गोरखधंधा हिन्दुस्तान राष्ट्र के अंदर खुलेआम चल रहा हैं!

यह एक प्रकार से ईस्ट इंडिया कम्पनी के जैसा ही कारोबार हैं!
😡

यहाँ पर आश्चर्य का विषय यह हैं कि हमारे देश का संविधान और नेता इनके सामने असहाय हैं!

इसके पास जो जमीनें हैं उसका भी हमारे देश के सरकार के पास कोई व्यवस्थित लेखा-जोखा नहीं हैं!

अगर किसी एक के खिलाफ कोई कोर्ट जाता हैं तो उसके सहयोग के लिए एक साथ हज़ारों लोग खड़े हो जाते हैं जैसे वे रक्तबीज हों!

लेकिन हम अपने ही लोगों के खिलाफ चाहे वह टाटा, अंबानी, अडानी रामदेव हों जो देश को टैक्स भी देते हैं फिर भी हम इनके खिलाफ क्योंकि हम इनको जानते हैं! उन मिशनरियों के बारे में नहीं जानते जो देश को खोखला कर रहीं हैं!

इनकी सारी सम्पति का लगभग 50% हिस्सा तो सिर्फ शिक्षा संस्थानों के पास हैं!

जहाँ ज्यादातर हिन्दुओं के बच्चे महंगी फीस देकर पढ़ते आ रहें हैं, इनमे बच्चों को भारतीय मूल्यों से दूर किया जाता है, ईसायत का भाव दिया जाता है.

यही पैसा लोगों को कन्वर्ट करने में!
साधुओं की हत्या प्लानिंग में
नक्सलवाद में और ना जाने कितनी ही अन्य साजिशों में उपयोग हो रहा हैं…..?

यहाँ पर यह उल्लेखनीय हैं कि

हिन्दू संस्थाओं द्वारा संचालित सभी स्कूलों पर टैक्स भी लगता हैं!
और RTE जैसे कानून भी लगते हैं!

जो की कान्वेंट स्कूल पर लागु नहीं हैं

इसकी वास्तविक सच्चाई को पढ़ने और समझने के बाद आपका हर कदम आने वाली पीढ़ी के कदमों को इस देश में मजबूती से जमाएगा!

अब निर्णय आपको करना हैं

अब यह सब बाते स्वयं हमको समझना चाहिए कि उनका ही पैसा एक दिन उनकी आने वाली पीढ़ियों को निगल ना जाये!

अरुण सुकला

Posted in हिन्दू पतन

👇👇👇👇
✨ऐसा कहा जाता है कि इतिहास से सबक न लेने वाले इतिहास बन जाते हैं अस्तु कुछ दिमाग पर जोर डालिए ।😑👉1946 में अलग देश की मांग पर “डायरेक्ट ऐक्शन डे” हुआ
हमें कुछ नहीं पता

😑👉1947 में बंटवारे में लाखों लोग मारे गए, करोड़ों लोग बेघर हो गए
हमें कुछ नहीं पता

😑👉1947 के बंटवारे में 23 % मुसलमानों को 31 प्रतिशत भूमि दे दी गई
हमें कुछ नहीं पता

😑👉अपनी आबादी के अनुपात से अधिक भूमि लेने के बाद भी 9करोड़ में से 3करोड़ मुसलमान भारत से गए ही नहीं
हमें ये भी नहीं पता

😑👉 हमसे टूटा हुआ हिस्सा इस्लामिक देश बन गया और भारत धर्मशाला बन गया
हमें बिलकुल भी नहीं पता

😑👉 और सबसे बड़ी बात जो हिन्दू को अब तक नहीं पता है कि १९४७ में आजादी सिर्फ मुस्लिम को ही मीली है। हिन्दू तो आज भी गुलाम है।
हमें अब तक नहीं पता

😑👉 पूरा का पूरा संविधान हिन्दू के खिलाफ बना दिया और सेक्युलर के नाम पर हिन्दू का दमन होता आ रहा है।
हमें अब तक नहीं पता

😑👉80-85 प्रतिशत हिन्दुओं के राष्ट्र में मस्जिद और मदरसा महत्वपूर्ण हो गए जबकि मंदिर और मठ का नाम लेना साम्प्रदायिक हो गया
हमें नहीं पता

😑👉सौ साल के भीतर ही मुसलमान फिर से एक देश लेने की स्थिति में पहुंच गए
हमें ये भी नहीं पता होगा

😑👉मेरे प्यारें लोभी-लालची सेक्युलर हिन्दुओं तुम्हें पता क्या है ?
और हां …
अब पता करो कि भागना कहां है ?
🙏 अतः कुछ ज्ञान चक्षु ‌खुले हो तो जगिए और जगाइए !!
एक हिन्दुस्तानी
🙏🙏🙏🙏

Posted in हिन्दू पतन

शाहजहाँ और औरंगज़ेब काल में आया यूरोपियन यात्री मानुची जगननाथ मंदिर की एक घटना के बारे में लिखता है- एक बार पुरी में एक पुर्तगाली व्यापारी/ येस्यूइट आया जिसके हाथ घुटने पार पहुँचते थे। स्थानीय पुजारियों ने उसे दैव पुरुष का दर्जा दिया और उसे ईश्वर का भेजा हुआ मान खूब आदर सत्कार किया।

उस पुर्तगाली ने कई दिनोंतक खूब मज़े , गुलछर्रे उड़ाये। मंदिर में भी आराम से आवागमन रहा जहां उसने मंदिर के अंदर की संपदा का जायज़ा लिया। संपदा देख पुर्तगाली की आँखें फैल गई और उसने अपने भाई के साथ चोरी का प्लान बनाया। गोवा से आया उसका भाई उसका भक्त बन कुछ दिन साथ रहा और फिर एक दिन रातोंरात दोनों कई रत्न आदि ले रफ़ूचक्कर हो गये।

घुटनों से लंबे हाथ होने के ऐसे दो लोगों के बारे में लिखता है जिन्हें भारतीय समाज में अपार सम्मान मिला था। इत्तिफ़ाक़ से दोनों पुर्तगाली थे। लेकिन ये समझ नहीं आया उस समय के समाज में ऐसे लंबे हाथ वालों को दैवी क्यों माना जाता था ?

नोट १- ऐसे व्यक्ति अजानुभूज कहलाते है। छत्तीसगढ़ उड़ीसा में आज भी इसे दैव लक्षण माना जाता है।मित्र किशोर वैभव जी की टिप्पणी अनुसार!

नोट २- नालंदा को जलाने वाला बख़्तियार ख़िलजी भी कुछ इसी प्रकार का आदमी था- लंबे हाथ वाला।

नोट ३- गांधी जी के हाथ इतने लंबे नहीं थे ।